Thursday, July 30, 2015

एसिड फेंकने वालों को जब तक सजा नहीं मिलती, अपनी लड़ाई लड़ती रहूंगी

- एसिड विक्टिम चंचल को हैं अभी भी दोषी दे रहें धमकी
- तेजाबी हमलों के खिलाफ विशेष कानून बनाने की कर रहीं चंचल मांग
संवाददाता, पटना
रात में घर की छत पर सो रही थी. अचानक से चार लड़का आया और उसके उपर एसिड फेंक कर चला गया. एक हफ्ते के अंदर सारे लड़के पकड़ में भी आ गये. उन्हें जेल भी हुआ. लेकिन फिर उनकी वेल हो गयी. अब वेल होने के बाद मेरे घर आकर मुङो धमकी देते हैं और कहते हैं कि हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती. रात के समय घर पर पत्थर आदि फेंकते हैं. केस वापस लेने की धमकी देते हैं. घर से बाहर निकलना मुश्किल कर दिया हैं. मै आगे बढ़ना चाहती हैं. पढ़ना चाहती हूं. अपने चेहरे को छुपाये चंचल ने बताया कि जब तक मेरे उपर एसिड फेंकने वालों को सजा नहीं मिल जाती हैं, मै अपनी लड़ाई लड़ती रहूंगी. नये सिरे से अपनी जिंदगी को शुरू करने की इच्छा रखें चंचल गुरुवार को प्रेस मीडिया के पास अपनी बातें रखी. ग्रैंड प्लाजा के सीजन्स रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेस मीडिया के सामने परिवर्तन केंद्र के संरक्षण में चंचल ने बिहार सरकार से एसिड एटैक्ट करने वालों के खिलाफ विशेष कानून बनाने की मांग की.
- 5 लाख कर्ज लेकर कर चुका हूं इलाज पर खर्च
चंचल के पिता शैलेस पासवान ने अभी तक बेटी के इलाज पर 5 लाख के उपर खर्च कर चुके हैं. पेशे से मजदूरी कर रहे शैलेश पासवान ने बताया कि सामाजिक संस्थान वाले बेटी के इलाज में मदद करते हैं. लेकिन खुद अभी तक 5 लाख के उपर खर्च कर चुका है. कर्ज लेकर इलाज करवा रहें हैं. अभी तक 7 ऑपरेशन हो चुका हैं. कान, आंख, नाक, गले, हाथ आदि का ऑपरेशन होता हैं. डाक्टर बताते हैं कि ऑपरेशन का सिलसिला हमेशा जारी रहेगा. इलाज चलता रहेगा.
- दो साल हो गया पढ़ाई खराब
एसिड अटैक्ट और इलाज के कारण चंचल दो सालों तक पढ़ाई नहीं कर पायी. अब वो अपनी जिंदगी फिर एक बार शुरू करना चाहती हैं. कंप्यूटर इंजीनियर बनने का ख्वाब देख रही चंचल ने बताया कि जो सपना था वो तो पूरा नही कर पायी, लेकिन अपने पांव पर खड़ी होना चाहती हूं. आगे बढ़ना चाहती हूं.
- थाने में दर्ज नहीं होते है एसिड अटैक्ट के मामले
 एसिड अटैक्ट को लेकर परिवर्तन केंद्र की ओर से 2013 जून में सुप्रीम कोर्ट में पीआइएल दर्ज किया गया था. परिवर्तन केंद्र की वर्षा आत्मसिद्ध ने बताया कि पीआइएल दर्ज करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तमाम राज्य सरकार से छह हफ्ते के अंदर जवाब देने को कहा था. बांकी राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जवाब दिया था, लेकिन बिहार सरकार ने अभी तक जवाब नहीं दिया हैं. किसी भी थाने में एसिड अटैक्ट के मामले दर्ज नहीं होते हैं. एक लड़की की जिंदगी बर्बाद हो जाती हैं, लेकिन उसे न्याय के भी भटकना पड़ता है. वर्षा आत्मसिद्ध ने बताया कि एसिड अटैक्ट संबंधित केस के लिए विशेष कानून बने. 

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