- आइसीएसइ बोर्ड ने निकाला कारपोरल पनिशमेंट संबंधी गाइड लाइन
- स्कूल के कोड ऑफ कंडक्ट में किया गया कारपोरल पनिशमेंट को शामिल
संवाददाता, पटना
स्कूल परिसर में किसी भी स्टूडेंट्स को फिजिकल, साइकोलॉजिकल और एजुकेशनल पनिशमेंट नहीं दिया जा सकता है. शिक्षा के अधिकार एक्ट 2009 के तहत अगर किसी स्कूल में स्टूडेंट्स के साथ कारपोरल पनिशमेंट की शिकायत आयेगी तो इसके लिए संबंधित टीचर के साथ स्कूल के प्रिंसिपल को भी दोषी माना जायेगा. काउंसिल फॉर दी इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (आइसीएसइ) ने कारपोरल पनिशमेंट पर कड़ा डिसीजन लेते हुए स्कूलों को निर्देश दिया है कि अगर किसी स्कूल में कारपोरल पनिशमेंट की शिकायत आती है तो ऐसे में स्कूल के टीचर को तीन साल तक स्कूल से बाहर किया जा सकता है. अगर जांच में स्कूल का प्रिंसिपल दोषी पाया गया तो ऐसे प्रिंसिपल को भी उनके पद से हटाया जा सकता है. बोर्ड की ओर से यह निर्देश तमाम स्कूलों को भेज दिया गया है. ज्ञात हो कि मानव संसाधन मंत्रलय द्वारा तमाम बोर्ड को शिक्षा के अधिकार कानून को सख्त करने को कहा गया है. इसको लेकर आइसीएसइ बोर्ड ने टीचर और प्रिंसिपल को सजा देने का प्रावधान बनाया है.
- सीबीएसइ ने लिया डिसीजन, तीन साल के लिए बाहर हुए मिस्टर जोशी
सीबीएसइ स्कूलों में आये दिन कारपोरल पनिशनमेंट संबंधित शिकायत आती रहती हैं. इसको लेकर सीबीएसइ ने पटना जोन के विधा निकेतन स्कूल के एक टीचर को तीन साल के लिए स्कूल से निकाल दिया हैं. टीचर पर आरोप था कि उसने बच्चे को काफी पीटा था. इससे बच्चे के हाथ की हड्डी टूट गयी थी. अभिभावकों ने सीबीएसइ से शिकायत किया. इसके बाद दो साल तक इस मामले की जांच हुई. अभी जून में टीचर मिस्टर जोशी को तीन साल के लिए निष्कासित किया गया हैं.
- तीन स्कूलों में दो स्कूल में बच्चे को दिया जाता है सजा
चिल्ड्रेन एब्यूज इन इंडिया 2007 के अनुसार देश भर में हर तीन स्कूलों में दो स्कूल में एक बच्चे को सजा दी जाती है. कारपोरल पनिशमेंट में प्रायमरी और उच्च क्लास के स्टूडेंट्स अधिक शामिल है. 6 राज्य में किये गये एक सर्वे के अनुसार जाति के अनुसार भी बच्चों को शारीरिक सजा दिया जाता है. इसके अलावा स्कूल में इकोनॉमिकल, सोशल और रिलिजियश के आधार पर भी स्कूल में बच्चों को सजा दी जाती है. आइसीएसइ बोर्ड की ओर से स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि अगर किसी बच्चे को टीचर सजा दे रहे है तो ऐसी स्थिति मे बच्चे से खुल कर बोलने की सलाह दे. कई बार टीचर बच्चे को डरा धमका कर चुप रहने की का दबाव देते है. ऐसे में बच्च स्कूल जाने से कतराता है. ऐसे बच्चे पर स्कूल मैनेजमेंट पूरा ध्यान रखेगा.
ये होते है कारपोरल पनिशमेंट
- शारीरिक प्रताड़ना
- मानसिक प्रताड़ना
- बेइज्जती करना
- दबाव डालना
- आर्थिक दंड
- शैक्षिणिक प्रताड़ना
ऐसा हो स्कूल मैनेजमेंट का रोल
- स्कूल में हर टीचर को शिक्षा के अधिकार की जानकारी हो
- बोर्ड के गाइड लाइन को स्कूल मैनेजमेंट के हर स्टाफ को समझना है
- बच्चों के साथ स्कूल मैनेजमेंट का व्यवहार कैसा हो, इसकी जानकारी पूरी होनी चाहिए
- जेंडर, जाति, वर्ग, डिस्एब्लिटी आदि के नाम पर किसी भी बच्चे को सजा नहीं दिया जा सकता है
- स्कूल मैनेजमेंट के द्वारा किसी भी बच्चे को डरा, धमका, बेइज्जती करके और दबाव नहीं डाला जा सकता है
- बच्चे के साथ स्कूल मैनेजमेंट को ऐसा व्यवहार करना है जिससे बच्चे को स्कूल परिसर में सेफ महसूस हो
कोट
कारपोरल पनिशमेंट को लेकर बोर्ड की ओर से निर्देश दिया गया है. इसकी जानकारी तमाम टीचर्स को भी दे दी गयी है. वैसे यह नियम पहले से भी स्कूल में लागू था. लेकिन आरटीइ के तहत इस तरह के कड़े नियम पहली बार लागू किया गया है. इससे काफी फायदा होगा. हमने इसको लेकर स्कूल के तमाम टीचर को बता दिया गया है.
एम रिजवी, प्रिंसिपल, रोड वड हाई स्कूल
स्कूल में कारपोरल पनिशमेंट संबंधी जानकारी बोर्ड की ओर से हमारे पास आया है. इसकी तमाम जानकारी टीचर्स को दे दिया गया है. बोर्ड ने कारपोरल पनिशमेंट के बारे में विस्तार से बताया है. हमने इसकी भी जानकारी टीचर्स को दे दिया है. कारपोरल पनिशमेंट पूरी तरह से बंद हो इसके लिए स्कूल परिसर में कैमरे लगाये जायेंगे. वैसे लंच आवर और क्लास के समय मै खुद क्लास रूम में अचानक से आता जाता हूं.
ब्रदर सतीश, प्रिंसिपल, लोयेला हाई स्कूल
- स्कूल के कोड ऑफ कंडक्ट में किया गया कारपोरल पनिशमेंट को शामिल
संवाददाता, पटना
स्कूल परिसर में किसी भी स्टूडेंट्स को फिजिकल, साइकोलॉजिकल और एजुकेशनल पनिशमेंट नहीं दिया जा सकता है. शिक्षा के अधिकार एक्ट 2009 के तहत अगर किसी स्कूल में स्टूडेंट्स के साथ कारपोरल पनिशमेंट की शिकायत आयेगी तो इसके लिए संबंधित टीचर के साथ स्कूल के प्रिंसिपल को भी दोषी माना जायेगा. काउंसिल फॉर दी इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (आइसीएसइ) ने कारपोरल पनिशमेंट पर कड़ा डिसीजन लेते हुए स्कूलों को निर्देश दिया है कि अगर किसी स्कूल में कारपोरल पनिशमेंट की शिकायत आती है तो ऐसे में स्कूल के टीचर को तीन साल तक स्कूल से बाहर किया जा सकता है. अगर जांच में स्कूल का प्रिंसिपल दोषी पाया गया तो ऐसे प्रिंसिपल को भी उनके पद से हटाया जा सकता है. बोर्ड की ओर से यह निर्देश तमाम स्कूलों को भेज दिया गया है. ज्ञात हो कि मानव संसाधन मंत्रलय द्वारा तमाम बोर्ड को शिक्षा के अधिकार कानून को सख्त करने को कहा गया है. इसको लेकर आइसीएसइ बोर्ड ने टीचर और प्रिंसिपल को सजा देने का प्रावधान बनाया है.
- सीबीएसइ ने लिया डिसीजन, तीन साल के लिए बाहर हुए मिस्टर जोशी
सीबीएसइ स्कूलों में आये दिन कारपोरल पनिशनमेंट संबंधित शिकायत आती रहती हैं. इसको लेकर सीबीएसइ ने पटना जोन के विधा निकेतन स्कूल के एक टीचर को तीन साल के लिए स्कूल से निकाल दिया हैं. टीचर पर आरोप था कि उसने बच्चे को काफी पीटा था. इससे बच्चे के हाथ की हड्डी टूट गयी थी. अभिभावकों ने सीबीएसइ से शिकायत किया. इसके बाद दो साल तक इस मामले की जांच हुई. अभी जून में टीचर मिस्टर जोशी को तीन साल के लिए निष्कासित किया गया हैं.
- तीन स्कूलों में दो स्कूल में बच्चे को दिया जाता है सजा
चिल्ड्रेन एब्यूज इन इंडिया 2007 के अनुसार देश भर में हर तीन स्कूलों में दो स्कूल में एक बच्चे को सजा दी जाती है. कारपोरल पनिशमेंट में प्रायमरी और उच्च क्लास के स्टूडेंट्स अधिक शामिल है. 6 राज्य में किये गये एक सर्वे के अनुसार जाति के अनुसार भी बच्चों को शारीरिक सजा दिया जाता है. इसके अलावा स्कूल में इकोनॉमिकल, सोशल और रिलिजियश के आधार पर भी स्कूल में बच्चों को सजा दी जाती है. आइसीएसइ बोर्ड की ओर से स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि अगर किसी बच्चे को टीचर सजा दे रहे है तो ऐसी स्थिति मे बच्चे से खुल कर बोलने की सलाह दे. कई बार टीचर बच्चे को डरा धमका कर चुप रहने की का दबाव देते है. ऐसे में बच्च स्कूल जाने से कतराता है. ऐसे बच्चे पर स्कूल मैनेजमेंट पूरा ध्यान रखेगा.
ये होते है कारपोरल पनिशमेंट
- शारीरिक प्रताड़ना
- मानसिक प्रताड़ना
- बेइज्जती करना
- दबाव डालना
- आर्थिक दंड
- शैक्षिणिक प्रताड़ना
ऐसा हो स्कूल मैनेजमेंट का रोल
- स्कूल में हर टीचर को शिक्षा के अधिकार की जानकारी हो
- बोर्ड के गाइड लाइन को स्कूल मैनेजमेंट के हर स्टाफ को समझना है
- बच्चों के साथ स्कूल मैनेजमेंट का व्यवहार कैसा हो, इसकी जानकारी पूरी होनी चाहिए
- जेंडर, जाति, वर्ग, डिस्एब्लिटी आदि के नाम पर किसी भी बच्चे को सजा नहीं दिया जा सकता है
- स्कूल मैनेजमेंट के द्वारा किसी भी बच्चे को डरा, धमका, बेइज्जती करके और दबाव नहीं डाला जा सकता है
- बच्चे के साथ स्कूल मैनेजमेंट को ऐसा व्यवहार करना है जिससे बच्चे को स्कूल परिसर में सेफ महसूस हो
कोट
कारपोरल पनिशमेंट को लेकर बोर्ड की ओर से निर्देश दिया गया है. इसकी जानकारी तमाम टीचर्स को भी दे दी गयी है. वैसे यह नियम पहले से भी स्कूल में लागू था. लेकिन आरटीइ के तहत इस तरह के कड़े नियम पहली बार लागू किया गया है. इससे काफी फायदा होगा. हमने इसको लेकर स्कूल के तमाम टीचर को बता दिया गया है.
एम रिजवी, प्रिंसिपल, रोड वड हाई स्कूल
स्कूल में कारपोरल पनिशमेंट संबंधी जानकारी बोर्ड की ओर से हमारे पास आया है. इसकी तमाम जानकारी टीचर्स को दे दिया गया है. बोर्ड ने कारपोरल पनिशमेंट के बारे में विस्तार से बताया है. हमने इसकी भी जानकारी टीचर्स को दे दिया है. कारपोरल पनिशमेंट पूरी तरह से बंद हो इसके लिए स्कूल परिसर में कैमरे लगाये जायेंगे. वैसे लंच आवर और क्लास के समय मै खुद क्लास रूम में अचानक से आता जाता हूं.
ब्रदर सतीश, प्रिंसिपल, लोयेला हाई स्कूल
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