- कोबसे ने 2013 में इंगलिश स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन ऑफ ट्रावनकोर स्टेट और कोचिंग स्टेट स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन बोर्ड को किया था फर्जी घोषित
- फर्जी घोषित के बावजूद चल रहा बोर्ड
संवाददाता, पटना
काउंसिल ऑफ बोर्ड्स ऑफ स्कूल एजुकेशन इन इंडिया (कोबसे) ने 27 फरवरी 2013 को देश के दो एग्जामिनेशन बोर्ड इंगलिश स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन ऑफ ट्रावनकोर स्टेट और कोचिंग स्टेट स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट को फर्जी घोषित किया था. इसके बाद इन बोर्ड्स की मान्यता भी चली गयी. लेकिन इसके बावजूद इन बोर्ड्स से स्टूडेंट्स बोर्ड परीक्षा का फार्म भर रहें हैं. दो साल निकल जाने के बाद भी हर साल हजारों की संख्या में इन बोर्ड्स से स्टूडेंट्स परीक्षा दे रहें हैं. इसकी जानकारी कोबसे ही ओर से तमाम बोर्ड को दिया गया हैं. कोबसे ने अपने निर्देश में तमाम बोर्ड को सावधानी बरतने को कहा है कि अगर कोई स्टूडेंट्स इन बोर्ड के माध्यम से 11वीं या हायर क्लास में नामांकन लेने आते है तो उसके सर्टिफिकेट को वैल्यू ना दें. क्योंकि कोबसे की ओर से इन बोर्ड्स को फर्जी करार दे दिया गया हैं.
- हर साल 5 से 6 हजार परीक्षार्थी होते हैं बोर्ड परीक्षा में शामिल
कोबसे के सूत्रों की माने तो इन दोनों ही बोर्ड से हर साल सैकड़ों की संख्या में परीक्षार्थी शामिल होकर बोर्ड परीक्षा पास कर रहें हैं. इसमें हर स्टेट के परीक्षार्थी शामिल होते हैं. हर साल औसतन 5 से 6 हजार परीक्षार्थी इन बोर्ड से 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा पास करते हैं. बोर्ड परीक्षा पास करने के बाद ये स्टूडेंट्स देश के स्टेट बोर्ड या नेशनल बोर्ड और कॉलेजों में नामांकन लेते हैं. कोबसे सूत्रों की माने तो हर साल इन बोर्ड्स से स्टूडेंट्स निकल कर हायर एजुकेशन में नामांकन ले रहें हैं. इस पर ना तो बोर्ड्स का ध्यान हैं और ना ही कॉलेज की ओर से ही इस पर इंक्वायरी की जा रही हैं. कोबसे के पास 2015 में इन दोनो बोर्ड्स से पास करने वाले स्टूडेंट्स की संख्या का पता चला. अब कोबसे की ओर से बोर्ड्स और यूजीसी को इसकी जानकारी दी जा रही हैं कि इन बोर्ड के पास करने वाले स्टूडेंट्स का नामांकन ना लें.
- ना क्लास का टेंशन और ना ही कोर्स पूरा करने का झंझट
दक्षिण भारतीय इन दोनों ही बोर्ड से देश के किसी भी कोने से 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं पास की जा सकती हैं. इसके लिए स्टूडेंट्स को सिर्फ ऑन लाइन एडमिशन लेना होता हैं. एक बार एडमिशन हो जाने के बाद बस स्टूडेंट्स को बोर्ड परीक्षा देने के लिए ही बाहर जाना होता हैं. 9वीं से 10वीं और 11वीं से 12वीं में ना तो क्लास करना होता हैं और ना ही कोई कोर्स ही पूरा करना होता हैं. स्टूडेंट्स अपना सेल्फ स्टडी करते हैं. बोर्ड की ओर से बस ऑन लाइन ही सारा कुछ किया जाता हैं. ऐसे में स्टूडेंट्स को स्कूल एजुकेशन नहीं मिल पाता हैं.
- कंम्प्यूटर पर चलता हैं यह बोर्ड
कोबसे के अनुसार यह दोनों ही बोर्ड कोबसे के नियम के अनुसार नहीं चलता हैं. दोनों की बोर्ड का सारा काम कम्प्यूटर पर ही होता हैं. ऐसे में स्टूडेंट्स का भविष्य हमेशा अंधेर में रहेगा. इन दोनों की बोर्ड्स के ना तो अपनी बिल्ंिडग हैं और ना ही कोई डाटा बेस. कई चीजों इंक्वायरी करने के बाद कोबसे ने इन दोनों की बोर्ड को फर्जी घोषित किया था.
टॉप सेवेन पर हैं इन स्टेट के स्टूडेंट्स (परीक्षार्थी)
स्टेट - स्टूडेंट्स की संख्या
बिहार - 1300
उत्तर प्रदेश - 843
झारखंड - 575
मध्य प्रदेश - 787
आंध्र प्रदेश - 325
राजस्थान - 856
गुजरात - 638
- फर्जी घोषित के बावजूद चल रहा बोर्ड
संवाददाता, पटना
काउंसिल ऑफ बोर्ड्स ऑफ स्कूल एजुकेशन इन इंडिया (कोबसे) ने 27 फरवरी 2013 को देश के दो एग्जामिनेशन बोर्ड इंगलिश स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन ऑफ ट्रावनकोर स्टेट और कोचिंग स्टेट स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट को फर्जी घोषित किया था. इसके बाद इन बोर्ड्स की मान्यता भी चली गयी. लेकिन इसके बावजूद इन बोर्ड्स से स्टूडेंट्स बोर्ड परीक्षा का फार्म भर रहें हैं. दो साल निकल जाने के बाद भी हर साल हजारों की संख्या में इन बोर्ड्स से स्टूडेंट्स परीक्षा दे रहें हैं. इसकी जानकारी कोबसे ही ओर से तमाम बोर्ड को दिया गया हैं. कोबसे ने अपने निर्देश में तमाम बोर्ड को सावधानी बरतने को कहा है कि अगर कोई स्टूडेंट्स इन बोर्ड के माध्यम से 11वीं या हायर क्लास में नामांकन लेने आते है तो उसके सर्टिफिकेट को वैल्यू ना दें. क्योंकि कोबसे की ओर से इन बोर्ड्स को फर्जी करार दे दिया गया हैं.
- हर साल 5 से 6 हजार परीक्षार्थी होते हैं बोर्ड परीक्षा में शामिल
कोबसे के सूत्रों की माने तो इन दोनों ही बोर्ड से हर साल सैकड़ों की संख्या में परीक्षार्थी शामिल होकर बोर्ड परीक्षा पास कर रहें हैं. इसमें हर स्टेट के परीक्षार्थी शामिल होते हैं. हर साल औसतन 5 से 6 हजार परीक्षार्थी इन बोर्ड से 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा पास करते हैं. बोर्ड परीक्षा पास करने के बाद ये स्टूडेंट्स देश के स्टेट बोर्ड या नेशनल बोर्ड और कॉलेजों में नामांकन लेते हैं. कोबसे सूत्रों की माने तो हर साल इन बोर्ड्स से स्टूडेंट्स निकल कर हायर एजुकेशन में नामांकन ले रहें हैं. इस पर ना तो बोर्ड्स का ध्यान हैं और ना ही कॉलेज की ओर से ही इस पर इंक्वायरी की जा रही हैं. कोबसे के पास 2015 में इन दोनो बोर्ड्स से पास करने वाले स्टूडेंट्स की संख्या का पता चला. अब कोबसे की ओर से बोर्ड्स और यूजीसी को इसकी जानकारी दी जा रही हैं कि इन बोर्ड के पास करने वाले स्टूडेंट्स का नामांकन ना लें.
- ना क्लास का टेंशन और ना ही कोर्स पूरा करने का झंझट
दक्षिण भारतीय इन दोनों ही बोर्ड से देश के किसी भी कोने से 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं पास की जा सकती हैं. इसके लिए स्टूडेंट्स को सिर्फ ऑन लाइन एडमिशन लेना होता हैं. एक बार एडमिशन हो जाने के बाद बस स्टूडेंट्स को बोर्ड परीक्षा देने के लिए ही बाहर जाना होता हैं. 9वीं से 10वीं और 11वीं से 12वीं में ना तो क्लास करना होता हैं और ना ही कोई कोर्स ही पूरा करना होता हैं. स्टूडेंट्स अपना सेल्फ स्टडी करते हैं. बोर्ड की ओर से बस ऑन लाइन ही सारा कुछ किया जाता हैं. ऐसे में स्टूडेंट्स को स्कूल एजुकेशन नहीं मिल पाता हैं.
- कंम्प्यूटर पर चलता हैं यह बोर्ड
कोबसे के अनुसार यह दोनों ही बोर्ड कोबसे के नियम के अनुसार नहीं चलता हैं. दोनों की बोर्ड का सारा काम कम्प्यूटर पर ही होता हैं. ऐसे में स्टूडेंट्स का भविष्य हमेशा अंधेर में रहेगा. इन दोनों की बोर्ड्स के ना तो अपनी बिल्ंिडग हैं और ना ही कोई डाटा बेस. कई चीजों इंक्वायरी करने के बाद कोबसे ने इन दोनों की बोर्ड को फर्जी घोषित किया था.
टॉप सेवेन पर हैं इन स्टेट के स्टूडेंट्स (परीक्षार्थी)
स्टेट - स्टूडेंट्स की संख्या
बिहार - 1300
उत्तर प्रदेश - 843
झारखंड - 575
मध्य प्रदेश - 787
आंध्र प्रदेश - 325
राजस्थान - 856
गुजरात - 638
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