Thursday, July 30, 2015

रैंगिग से परेशान छात्रएं, अभिभावक पहुंच रहे सीबीएसइ

- सीबीएसइ के कई स्कूलों में चल रहा रैंगिग
- सीबीएसइ रीजनल ऑफिस के साथ दिल्ली सीबीएसइ के पास भी भेजे गये लिखित शिकायत
संवाददाता, पटना
केस वन - स्मृति (बदला हुआ नाम) आइसीएसइ बोर्ड की स्टूडेंट हैं. 11वीं में स्मृति ने नामांकन सीबीएसइ बोर्ड के एक स्कूल में लिया. जुलाई के पहले सप्ताह में क्लास भी शुरू हुआ. लेकिन पहले ही दिन से स्मृति के साथ सीनियर क्लास की लड़कियों ने परेशान करना शुरू किया. स्टडी समय से लेकर लंच आवर तक में स्मृति को परेशान करती थीं. स्मृति ने स्कूल जाना बंद कर दिया. जब अभिभावक को पता चला तो स्कूल को सूचना दी गयी. इसके बाद भी स्मृति को तंग ही किया जाता था. फिर सीबीएसइ के पास भी लिखित शिकायत भेजा गया हैं.
केस टू  - रानी (बदला हुआ नाम) 11वीं में नामांकन ली हैं. क्लास के पहले ही दिन से सीनियर उसे तंग करना शुरू कर दिया. चोटी करने आना, रबर बैंड क्यूं लगाया, पानी का बोतल इस कलर का क्यूं हैं, सीनियर को गुड मॉर्निग करके प्रणाम करों, सीनियर को लंच पहले दो, फिर खुद खाओ आदि तरह से तंग किया जाता था. कई दिन तो रानी को जोर से डांट दिया, जिससे वो स्कूल में ही रोना भी शुरू कर दी. तंग आकर रानी से स्कूल जाना बंद कर दिया. मामला अब सीबीएसइ के पास हैं.

- सीबीएसइ के पास पहुंचा मामला
सीबीएसइ रीजनल ऑफिस के सूत्रों की माने तो पटना के कई स्कूलों में रैंगिग जैसी घटनाएं घट रही हैं. इसको लेकर कई अभिभावकों ने बोर्ड के पास शिकायत भी किया हैं. अभिभावकों से मिली शिकायत के अनुसार स्कूल में आए दिन रैंगिग होती हैं. डरा धमका कर रखा जाता हैं. सीनियर क्लास की लड़कियां आए दिन तंग करती हैं. सीबीएसइ के पास पिछले सप्ताह यह मामला आया हैं. अब सीबीएसइ उन मामलों को स्पॉट विजिट करेगी. स्कूल का नाम गुप्त रखा गया हैं. जिससे स्कूल सतर्क ना हो जायें. बोर्ड की ओर से जांच के पास स्कूल पर कार्रवाई भी की जायेगी. जांच में सीबीएसइ उन तमाम प्वाइंट पर भी फोकस करेगी, जो रैंगिग को लेकर बनाया गया था.
- रैंगिग सेल हो स्कूलों में
सीबीएसइ के पास 2011 में कई स्कूलों के खिलाफ रैंगिग के मामले आयें थे. इसके बाद सीबीएसइ ने रैंगिग को लेकर नियम बनाया. इसके तहत स्कूलों को कई स्तर पर काम करने को कहा गया था.  हर स्कूलों को रैंगिग सेल बनाने को कहा गया था. रैंगिग सेल को गुप्त रखा जाये. जिससे स्टूडेंट्स अपनी शिकायत खुल कर दर्ज करवा सकें. लेकिन पटना के अधिकांश स्कूलों मे रैंगिग सेल अभी तक नहीं खुला है. अगर किसी स्टूडेंट के साथ कुछ होता हैं तो उनके लिए कोई ऐसी जगह स्कूल कैंपस में नहीं होता है जहां पर जाकर स्टूडेंट्स अपनी बातें रख सके.

इस तरह से स्कूलों में चलता हैं रैंगिग
- गाली देकर आवाज देना और पास बुलाना
- लंच खा जाना
- लंच में लाये सामग्री को लेकर कांमेंट करना
- बाल खुले तो हो तो उसको लेकर डांटना
- क्लास वर्क संबंधित चीजों में इंटरफेयर करना
- छोटी-छोटी बातों पर पिंच करना
- क्लास रूम में दूसरी लड़कियों के सामने बेइज्जती करना
-  स्कूल बस, वैन या स्कूल ऑटो में छेड़ना
- छोटी-छोटी बातों पर डांटना
- हंसने, बोलने या बात करने पर पाबंदी लगाना

सीबीएसइ के रैंगिग को लेकर ये हैं नियम
- हर स्कूल में रैंगिग पर पूरी तरह से पाबंदी हैं
- रैंगिग को लेकर स्कूल के नोटिस बोर्ड पर जानकारी देना हैं
- स्कूल टीचर्स द्वारा सीनियर से लेकर जूनियर को रैंगिग की पाबंदी के बारे में बतायें
- प्रिंसिपल खुद स्कूल के पहले ही दिन तमाम स्टूडेंट्स को रैंगिग की जानकारी दे
- रैंगिग की पाबंदी के बारे में स्कूल के मुख्य गेट से लेकर क्लास रूम तक अवेयर किया जायें
- हर स्कूलों में बने रैंगिग सेल
- रैंगिग के लिए ऑन लाइन आवेदन ले स्कूल

अभिभावक की बातें
रैंगिग कॉलेजों में हुआ करता था, लेकिन अब स्कूलों में भी होने लगा है. ऐसे में स्कूल को इस पर कड़ा एक्शन लेना चाहिए. कोएड की तो छोड़िये, गल्र्स स्कूलों में भी रैंगिग हो रही है. 11वीं क्लास में बच्चों के पास जानकारी ही कितनी होती हैं. ऐसे में रैंगिग होने से बच्चे डिप्रेशन में चले जाते है .
राजीव वर्मा, अभिभावक

सीबीएसइ ने नियम बनाया था. इसे मैने न्यूज पेपर में पढ़ा भी था. इस कारण हम लोग निश्चित थे. लेकिन नामांकन लेने के बाद पता चला कि स्कूलों इंटर्नल लेबल पर काफी रैंगिग होती ैहै . लेकिन स्कूल वालों का ध्यान नहीं जाता हैं. स्कूल वाले नये स्टूडेंट को ही दोषी मानते हैं.
मोहित कुमार, अभिभावक 

No comments:

Post a Comment