Thursday, July 16, 2015

रामानुज प्रसाद को प्रिंसिपल के पद से हटायेगा डीएवी

- पूर्व प्रिंसिपल रामानुज प्रसाद पर 20 करोड़ का घोटाला करने का आरोप
- सो कॉज नोटिस में पूछे गये 21 सवाल
संवाददाता, पटना
डीएवी पब्लिक स्कूल, बीएसइबी के पूर्व प्रिंसिपल रामानुज प्रसाद को जल्द प्रिंसिपल पद से हटा दिया जायेगा. इसको लेकर डीएवी मैनेजमेंट ने सो कॉज नोटिस भी कई पूर्व प्रिंपिल रामानुज प्रसाद को भेजा हैं. लेकिन अभी तक रामानुज प्रसाद ने सो कॉज नोटिस का जवाब डीएवी मैनेजमेंट को नहीं दिया है. डीएवी मैनेजमेंट ने रामानुज प्रसाद के उपर 20 करोड़ रुपये के घोटाला का आरोप लगाया है. डीएवी मैनेजमेंट के अनुसार 2013-14 के दौरान रामानुज प्रसाद ने डीएवी के पैसे के लेने देन में काफी गड़बड़ी किया था. इसकी जानकारी डीएवी मैनेजमेंट को 2013-14 के ऑडिट रिपोर्ट से मिली हैं. इसी ऑडिट रिपोर्ट को आधार बना कर डीएवी मैनेजमेंट ने पूर्व प्रिंसिपल रामानुज प्रसाद को सो कॉज नोटिस भेजा हैं. इसमें 21 प्वाइंट में सवाल डाले गये है. इस सवालों का जवाब डीएवी मैनेजमेंट रामानुज प्रसाद से मांगी हैं.
- सरकारी आवास के साथ हर सुविधा ले ली जायेगी
डीएवी मैनेजमेंट जल्द ही रामानुज प्रसाद को उनके पद से हमेशा के लिए निकाल देगी. ज्ञात हो कि स्कूल में नामांकन को लेकर गड़बड़ी के मामले में रामानुज प्रसाद को डीएवी संस्था ने प्रिंसिपल के पद से सस्पेंड (निलंबित) किया था. लेकिन इस ऑडिट रिपोर्ट में गड़बड़ी को लेकर डीएवी मैनेजमेंट अब रामानुज प्रसाद को प्रिंसिपल के पद से हटाने की तैयारी कर रहीं हैं. इसके लिए सो कॉज नोटिस डीएवी की डायरेक्टर नीशा पेशिन के द्वारा रामानुज प्रसाद को भेजा गया हैं. ऑडिट रिपोर्ट डीएवी के ऑडिट असिस्टेंट संतोष बारले, इंटर्नल ऑडिटर एसके रसतोगी और ऑडिट एओ इंद्रजीत सिंह शामिल थे.
- हाई कोट ने भी कर दिया खारिज
डीएवी के द्वारा प्रिंसिपल के पद से निलंबित किये जाने के बाद रामानुज प्रसाद ने निलंबन के खिलाफ हाई कोट में डीएवी के खिलाफ केस किया था. इसके तहत 3 जुलाई को हाई कोट से भी मामला खारिज कर दिया गया. केस नंबर 5974/2015 के तहत रामानुज प्रसाद के निलंबन को बरकरार रखे जाने का निर्देश हाई कोट ने दिया था.

ये सवाल जिसके घेरे में हैं पूर्व प्रिंसिपल. डीएवी मैनेजमेंट के ऑडिट रिपोर्ट में ये सारे आरोप लगाये गये हैं.

1. स्कूल के फर्निचर खरीदारी -  2013-14 में स्कूल में फर्निचर की खरीदारी की गयी. इसमें डीएवी मैनेजमेंट से पूछे बिना 54 लाख 13 हजार 789 रुपये खर्च कर दिये गये.
2. स्कूल मेटेरियल का पेमेंट में गड़बड़ी  - स्कूल मेटेरियल की खरीदारी में एकाउंट में काफी उलट फेर किया गया हैं. 2013 में किये गये इस खरीदारी में स्कूल के लिए रजिस्टर, स्क्रूटनाइजर का बिल आदि शामिल था. इसमें पूर्व प्रिंसिपल ने 1 करोड़ 22 हजार के पैसे का कोई हिसाब डीएवी को नहीं दिया गया.
3. एकेडेमिक डयूटी की लापरवाही - आये दिन स्कूलों में हल्ला हंगामे के कारण रामानुज प्रसाद पर एकेडेमिक ड्यूटी सही से नहीं निभाने का भी आरोप डीएवी मैनेजमेंट ने लगाया हैं. स्कूल के एटेंडेंस रजिस्टर पर स्टूडेंट्स की संख्या और नाम में काफी अंतर पाया गया हैं. कई एटेंडेंस रजिस्टर पर पेंसिल से एटेंडेंस बना दिया गया है. स्टूडेंट्स के डॉक्यूमेंट रखने में भी लापरवाही होती रही हैं.
4. डिग्री भी है शक के घेरे में  -  डीएवी मैनेजमेंट ने पूर्व पिं्रसिपल रामानुज प्रसाद के बीएड और एमए की डिग्री पर भी प्रश्न चिन्ह लगा दिया हैं. डीएवी मैनेजमेंट के अनुसार राम रति कमला उच्च विद्यालय, नालंदा में असिस्टेंट टीचर (1883 से 1987 के बीच) के रूप में कार्यरत रहते हुए रांची विवि से बीएड की डिग्री रेगूलर स्टूडेंट के रूप में कैसे ले लिया. इसके अलावा डीएवी पब्लिक स्कूल जहानाबाद में टीचर इंचार्ज और हेड मास्टर के रूप कार्यरत रहते हुए  1992 से 1997 के बीच बीएस कॉलेज, दानापुर से इकोनॉमिक्स से एमए की डिग्री कैसे ले लिया.
5. एक से अधिक बैंक एकाउंट खोलने से संबंधित -  18 लाख 36 हजार 374 रूपये 2013-14 के बीच स्कूल से अलग एक बैंक एकाउंट में रख लिया
6. गलत तरीके से  लोन और बस की खरीदारी  - पूर्व प्रिंसिपल रामानुज प्रसाद ने 13 टाटा विंगलर और तीन टाटा मैजिक की खरीदारी डीएवी मैनेजमेंट से पूछे बगैर कर लिया. इसमें 88.55 लाख रुपये की खर्च आयी
7. डीएवी के अलग-अलग ब्रांच खोले  - पटना के अलग- अलग एरिया में चल रहे डीएवी ब्रांच को खोलने से पहले डीएवी मैनेजमेंट से पूछा तक नहीं. इन डीएवी को खोलने और लीज पर लेने में चार लाख 80 हजार रुपये खर्च कर दिये गये.
8. बिल्ंिडग कंस्ट्रक्शन बिना अनुमति के  -  डीएवी बीएसइबी के फस्र्ट फ्लोर, सेकेंड फ्लोर और थर्ड फ्लोर के बनने में 5 करोड़ 50 हजार रूपये खर्च कर दिये.
9. कंप्यूटर की खरीदारी में गड़बड़ी  - डीएवी मैनेजमेंट को बताये बिना इंदू इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड स्कूल ने एग्रीमेंट कर लिया. इसके तहत 12 रुपये प्रति महीने प्रति छात्र के हिसाब से कंप्यूटर की ट्रेनिंग दिया. इसके लिए डीएवी ने इस कंपनी को 60 हजार रुपये पेमेंट किया.
10. नॉन एकाउंट ऑफ इंकम  - इसके तहत फूड फेस्ट प्रोग्राम, फेयरवेल फंक्शन के नाम पर जो भी स्टूडेंट्स से चाज्रेज लिये गये. उन तमाम पैसे को पूर्व प्रिंसिपल ने अपने पास ही रख लिया. फूड फेस्ट प्रोग्राम के तहत 2013-14 में 12 लाख 95 हजार 800 का कलेक्शन किया गया था.
11. टीए और डीए में गड़बड़ी  -  2013-14 के बीच पूर्व प्रिंसिपल दस बार दिल्ली का दौरा किया. इसके अलावा एक बार धनबाद और एक बार इलाहाबाद का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने आने जाने में हजारों रुपये खर्च किये. डीएवी के नाम पर इस पैसे को टीए और डीए के नाम पर उठा लिया.
12. मोबाइल फोन  - डीएवी मैनेजमेंट ने एक मोबाइल प्रोवाइड करवाया. लेकिन दो मोबाइल पूर्व प्रिंसिपल के पास थे. हर महीने हजारों रूपये मोबाइल बिल के नाम पर डीएवी को उठा रहे थे.
13. स्कूल के नाम पर ट्रांसपोर्ट की खरीदारी - 14 हजार प्रति महीने के हिसाब से अशोक कुमार नाम के व्यक्ति से बस किराये पर लिया.
14. बुक प्रिंट के नाम पर पेमेंट  -  2014-15 सेशन के लिए बुक की प्रिंटिंग करवायी गयी. इसके तहत 10 हजार बुक का प्रिंट 7 रुपये प्रति पृष्ट करवाया गया.
15. एडवांस के नाम पर पैसे निकाल लिये - स्कूल के बैंक एकाउंट से पैसे निकाल कर स्कूल के स्टॉफ को एडवांस के तौर पर दे दिया. इन पैसे की दुबारा निकासी भी नहीं हुआ.
16. टूर के नाम पर वसूली  - स्टूडेंट्स से टूर के नाम पर पैसे तो लिये जाते थे. लेकिन उसे डीएवी मैनेजमेंट को बताया नहीं जाता था. 17 स्टूडेंट से प्रति स्टूडेंट तीन हजार रूपये लिये जाते थे.
17. फंक्शन एक्सपेंस - हर साल फंक्शन (साइंस एग्जीविशन, सीसीइ ट्रेनिंग आदि) के नाम पर 2012-13 में 3 करोड़ 10 हजार 660 रूपया और 2013-14 में तीन करोड़ 56 हजार रुपये खर्च कर दिये गये
18. काउंसिलेशन फी के नाम पर - छात्रों से काउंसिलेश फी के नाम पर लाखों रुपये लिये जाते थे
19.  कैश प्राइज के नाम पर  - कैश प्राइज के नाम पर स्टूडेंट्स के बीच हजार ये 25 सौ रुपये तक दे दिये गये. इसमें 2013 में 4 लाख 12 हजार 400, 1 लाख 31 हजार और 63 सौ रुपये खर्च कर दिये गये
20. स्मार्ट क्लासेज के नाम पर  - स्कूल की ओर से स्मार्ट क्लासेज के नाम पर 45 लाख रूपये कमाये गये. इसमें फिजिक्स, केमेस्ट्री बायोलॉजी का क्लास 11वीं और 12वीं के स्टूडेंट्स के लिए करवाया गया था.
21. कंप्यूटर एजुकेशन के नाम पर  - स्कूल में कंप्यूटर एजुकेशन के नाम पर टीचर्स और स्टूडेंट्स से पैसे लिये. टीचर्स से जहां 25 रुपये प्रति महीने तो वहीं स्टूडेंट्स से 12 रुपये प्रति महीने लिया गया. 

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