- दसवीं बोर्ड परीक्षा देने वाले 81 हजार स्टूडेंट्स में मात्र दस हजार को मिला 11वी ं में नामांकन
- सीबीएसइ स्कूलों पर आइसीएसइ बोर्ड के स्टूडेंट्स का कब्जा
संवाददाता, पटना
हर स्टूडेंट्स की इच्छा होती है कि वो जिस स्कूल से 10वीं पास किया वहीं से 12वीं बोर्ड की परीक्षा भी पास करें, लेकिन इस बार सीबीएसइ स्कूलों के अधिकांश स्टूडेंट्स का यह सपना पूरा नहीं हो पाया. उन्होंने अपने ही स्कूल में नामांकन लेने का काफी प्रयास किया. लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. बाद में मायूस हो कर उन्हें दूसरे स्कूल या फिर कोचिंग संस्थान में जाकर नामांकन लेना पड़ा. इस बार पूरे बिहार में सीबीएसइ से 10वीं बोर्ड की परीक्षा देने वाले 81 हजार स्टूडेंट्स थे, लेकिन इसमें से केवल 10 हजार स्टूडेंट्स को ही नामांकन उनके अपने स्कूल में हो पाया. बाकी बचे हुए स्टूडेंट्स को वापस कर दिया गया. अपने ही स्कूल से लगभग 71 हजार स्टूडेंट्स बाहर हो गये.
एक सेक्शन या दो सेक्शन चलते हैं 11वीं में
पटना के अधिकांश स्कूलों में 11वीं में एक या दो सेक्शन ही हर विषय में रखें हुए हैं. ऐसे मे एक स्कूल में अधिकतर 100 स्टूडेंट्स का ही नामांकन हो पाता हैं. वहीं साइंस की पढ़ाई तो लगभग तमाम स्कूलों में हैं. लेकिन आर्ट्स और कॉमर्स स्ट्रीम की पढ़ाई गिने चुने स्कूलों में ही करवाये जाते हैं. ऐसे में आर्ट्स और कॉमर्स में नामांकन लेने वाले स्टूडेंट्स के लिए और भी मुश्किल हो गया हैं. जहां किसी स्कूल में 10वीं में 300 के लगभग स्टूडेंट्स की संख्या थी, वहीं 11वीं में नामांकन लेने में स्टूडेंट्स की संख्या मात्र 100 रह गयी. ऐसे में स्कूल कम परसेंटेज वाले स्टूडेंट्स को छांट देता हैं. इतना ही नहीं स्टूडेंट्स के सेलेक्शन के लिए 11वीं में एंट्रांस परीक्षाएं भी ली जाती हैं.
सीबीएसइ पर आइसीएसइ स्कूलों का कब्जा
अधिकांश स्कूलों में इस बार 11वीं के नामांकन में आइसीएसइ बोर्ड के स्टूडेंट्स का कब्जा रहा. इसकी दो मुख्य वजह रही. एक तो आइसीएसइ बोर्ड के अधिकतर स्कूलों में 10वीं बोर्ड तक ही पढ़ाई होती हैं. वहीं दूसरी वजह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में सीबीएसइ की सिलेबस ही मेन रूप में होता हैं. ऐसे में आइसीएसइ बोर्ड के अधिकांश स्टूडेंट्स प्लस टू की पढ़ाई सीबीएसइ बोर्ड से करना चाहते हैं. इसके लिए सीबीएसइ स्कूलों पर काफी प्रेशर होता हैं. पटना के बड़े स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार प्लस टू में नामांकन के लिए मात्र 80 सीटें थी. लेकिन 15 सौ से अधिक स्टूडेंट्स ने इसके लिए आवेदन दिया था. ऐसे में स्कूल उन्हीं स्टूडेंट्स को मौका देता हैं जिनके मार्क्स अधिक होते हैं.
40 हजार को मिला 10 सीजीपीए
इस बार पटना जोन का पास परसेंटेज तो कम हो गया, लेकिन 10 सीजीपीए प्राप्त करने में पटना जोन पिछले साल की तुलना में बेहतर किये. 2014 में जहां पटना के तमाम स्कूलों से लगभग पांच सौ छात्रों को ही 10 सीजीपीए में शामिल हो पाये थे. लेकिन 2015 मे यह काफी आगे चला गया. जहां पटना जोन से 40 हजार छात्रों को 10 सीजीपीए प्राप्त हुआ है, वहीं पटना के स्कूलों में लगभग दो हजार छात्र 10 सीजीपीए के ग्रेड में आये हैं. स्कूलों की माने तो पिछले दो सालों में इस बार 10वीं का रिजल्ट बेहतर हुआ है.
कोट
अधिकांश स्कूल 10 सीजीपीए लाने वाले सीबीएसइ स्टूडेंट्स को ही 11वीं में नामांकन का पहला मौका देते हैं. इसके बाद अगर कोई सीट खाली रहता है तो 9 सीजीपीए वाले स्टूडेंट्स को मौका दिया जाता हैं. जो भी बड़े स्कूल होते हैं, वहां पर 10 सीजीपीए और आइसीएसइ बोर्ड के अधिक मार्क्स लाने वाले स्टूडेंट्स को पहला मौका देते हैं. इससे अधिकांश स्टूडेंट्स को अपने ही स्कूल में मौका नहीं मिलता हैं.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑर्डिनेटर, सीबीएसइ पटना
- सीबीएसइ स्कूलों पर आइसीएसइ बोर्ड के स्टूडेंट्स का कब्जा
संवाददाता, पटना
हर स्टूडेंट्स की इच्छा होती है कि वो जिस स्कूल से 10वीं पास किया वहीं से 12वीं बोर्ड की परीक्षा भी पास करें, लेकिन इस बार सीबीएसइ स्कूलों के अधिकांश स्टूडेंट्स का यह सपना पूरा नहीं हो पाया. उन्होंने अपने ही स्कूल में नामांकन लेने का काफी प्रयास किया. लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. बाद में मायूस हो कर उन्हें दूसरे स्कूल या फिर कोचिंग संस्थान में जाकर नामांकन लेना पड़ा. इस बार पूरे बिहार में सीबीएसइ से 10वीं बोर्ड की परीक्षा देने वाले 81 हजार स्टूडेंट्स थे, लेकिन इसमें से केवल 10 हजार स्टूडेंट्स को ही नामांकन उनके अपने स्कूल में हो पाया. बाकी बचे हुए स्टूडेंट्स को वापस कर दिया गया. अपने ही स्कूल से लगभग 71 हजार स्टूडेंट्स बाहर हो गये.
एक सेक्शन या दो सेक्शन चलते हैं 11वीं में
पटना के अधिकांश स्कूलों में 11वीं में एक या दो सेक्शन ही हर विषय में रखें हुए हैं. ऐसे मे एक स्कूल में अधिकतर 100 स्टूडेंट्स का ही नामांकन हो पाता हैं. वहीं साइंस की पढ़ाई तो लगभग तमाम स्कूलों में हैं. लेकिन आर्ट्स और कॉमर्स स्ट्रीम की पढ़ाई गिने चुने स्कूलों में ही करवाये जाते हैं. ऐसे में आर्ट्स और कॉमर्स में नामांकन लेने वाले स्टूडेंट्स के लिए और भी मुश्किल हो गया हैं. जहां किसी स्कूल में 10वीं में 300 के लगभग स्टूडेंट्स की संख्या थी, वहीं 11वीं में नामांकन लेने में स्टूडेंट्स की संख्या मात्र 100 रह गयी. ऐसे में स्कूल कम परसेंटेज वाले स्टूडेंट्स को छांट देता हैं. इतना ही नहीं स्टूडेंट्स के सेलेक्शन के लिए 11वीं में एंट्रांस परीक्षाएं भी ली जाती हैं.
सीबीएसइ पर आइसीएसइ स्कूलों का कब्जा
अधिकांश स्कूलों में इस बार 11वीं के नामांकन में आइसीएसइ बोर्ड के स्टूडेंट्स का कब्जा रहा. इसकी दो मुख्य वजह रही. एक तो आइसीएसइ बोर्ड के अधिकतर स्कूलों में 10वीं बोर्ड तक ही पढ़ाई होती हैं. वहीं दूसरी वजह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में सीबीएसइ की सिलेबस ही मेन रूप में होता हैं. ऐसे में आइसीएसइ बोर्ड के अधिकांश स्टूडेंट्स प्लस टू की पढ़ाई सीबीएसइ बोर्ड से करना चाहते हैं. इसके लिए सीबीएसइ स्कूलों पर काफी प्रेशर होता हैं. पटना के बड़े स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार प्लस टू में नामांकन के लिए मात्र 80 सीटें थी. लेकिन 15 सौ से अधिक स्टूडेंट्स ने इसके लिए आवेदन दिया था. ऐसे में स्कूल उन्हीं स्टूडेंट्स को मौका देता हैं जिनके मार्क्स अधिक होते हैं.
40 हजार को मिला 10 सीजीपीए
इस बार पटना जोन का पास परसेंटेज तो कम हो गया, लेकिन 10 सीजीपीए प्राप्त करने में पटना जोन पिछले साल की तुलना में बेहतर किये. 2014 में जहां पटना के तमाम स्कूलों से लगभग पांच सौ छात्रों को ही 10 सीजीपीए में शामिल हो पाये थे. लेकिन 2015 मे यह काफी आगे चला गया. जहां पटना जोन से 40 हजार छात्रों को 10 सीजीपीए प्राप्त हुआ है, वहीं पटना के स्कूलों में लगभग दो हजार छात्र 10 सीजीपीए के ग्रेड में आये हैं. स्कूलों की माने तो पिछले दो सालों में इस बार 10वीं का रिजल्ट बेहतर हुआ है.
कोट
अधिकांश स्कूल 10 सीजीपीए लाने वाले सीबीएसइ स्टूडेंट्स को ही 11वीं में नामांकन का पहला मौका देते हैं. इसके बाद अगर कोई सीट खाली रहता है तो 9 सीजीपीए वाले स्टूडेंट्स को मौका दिया जाता हैं. जो भी बड़े स्कूल होते हैं, वहां पर 10 सीजीपीए और आइसीएसइ बोर्ड के अधिक मार्क्स लाने वाले स्टूडेंट्स को पहला मौका देते हैं. इससे अधिकांश स्टूडेंट्स को अपने ही स्कूल में मौका नहीं मिलता हैं.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑर्डिनेटर, सीबीएसइ पटना
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