Friday, July 31, 2015

तीन स्टूडेंट पर चार टीचर्स, 120 में 53 ही स्टूडेंट्स हैं सिमुलतला आवासीय विद्यालय में

- 11वीं में 5 स्टूडेंट्स आर्ट्स विषय में तो 3 स्टूडेंट्स हैं कॉमर्स में
रिंकू झा, पटना
प्रदेश के अन्य विद्यालयों में भले टीचर्स की कमी हो, लेकिन बिहार का नेतरहाट कहे जाने वाले जमुई के सिमुलतला आवासीय विद्यालय में स्टूडेंट्स से अधिक टीचर्स की संख्या है. कुछ ऐसा ही सीट इस बार 11वीं में नामांकन लेने वाले छात्रों के साथ हुआ है. आर्ट्स विषय में जहां पांच छात्रों पर नौ शिक्षक हैं. वहीं कॉमर्स में तीन छात्रों पर चार शिक्षक स्कूल में पढ़ा रहें हैं. पहली बार 11वीं की पढ़ाई स्कूल में शुरू किया गया. नामांकन के लिए सीटों की संख्या 120 हैं. हर विषय के लिए एक सेक्शन और हर सेक्शन में 40 छात्रों का होना अनिवार्य हैं. लेकिन 10वीं के बाद 55 छात्रों से 11वीं में नामांकन नहीं लिया. 108 छात्रों में मात्र 53 छात्रों ने ही 11वीं में नामांकन लिया. इससे छात्रों की संख्या तो कम हो गयी, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षकों की संख्या जस की तस रही.
387 विद्यार्थी को पढ़ा रहे 30 शिक्षक
सिमुलतला आवासीय विद्यालय में 387 विद्यार्थी नामांकित हैं. 387 विद्यार्थी को पढ़ाने के लिए 30 शिक्षक हैं. वहीं प्लस टू में 53 विद्यार्थी को पढ़ाने के लिए 23 शिक्षक कार्यरत हैं. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अनुसार प्लस टू में हर विषय में एक-एक सेक्शन रहना आवश्यक हैं. हर सेक्शन में 40 विद्यार्थी होने चाहिए. लेकिन सिमुलतला में आर्ट्स विषय में जहां मात्र पांच छात्रों ने नामांकन लिया हैं. वहीं कॉमर्स में तीन छात्रों ने ही नामांकन लिया है. बाकी 47 विद्यार्थी ने साइंस विषय में नामांकन लिया हैं. इसमें 16 विद्यार्थी में बायोलॉजी में और 30 विद्यार्थी ने मैथेमेटिक्स में नामांकन लिया है.
क्लास वन से 11वीं तक के लिए होता है नामांकन
सिमुलतला आवासीय विद्यालय में नामांकन क्लास वन से 11वीं तक के लिया गया था. लेकिन व्यवस्था की कमी होने से विद्यालय से समय-समय पर विद्यार्थियों ने बाहर होते रहे. 2015 सत्र में मैट्रिक की परीक्षा में मात्र 108 छात्रों शामिल हुए. लेकिन 11वीं जाकर विद्यार्थी की संख्या 53 बच गयी है. ज्ञात हो कि विद्यालय की ओर से कहा गया था कि बची हुई सीट को भरने के लिए बाहर के स्टूडेंट्स का नामांकन लिया जायेगा. इसके लिए विज्ञापन निकाल पर विद्यार्थी को सूचित किया जायेगा. लेकिन विद्यालय की ओर से अभी तक विज्ञापन भी नहीं निकाला गया हैं.
प्रवेश परीक्षा में भी कम हो गये बच्चे
व्यवस्था को लेकर विवादित सिमुलतला प्रवेश परीक्षा में आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या भी कम होती जा रही हैं. पहली बार जहां लाखों की संख्या में आवेदन प्राप्त किये गये थे वहीं अब 8 हजार आवेदन की संख्या रह गयी हैं. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अनुसार इस बार 20 हजार के आवेदन आने की उम्मीद की जा रही थी. लेकिन मात्र 8 हजार ही आवेदन आया.

कोट
विद्यालय में जहां छात्रों की संख्या कम होती जा रही हैं. वहीं शिक्षकों की संख्या जस की तस है. इस बार 11वीं में नामांकन लेने में विद्यार्थी कम हो गया हैं. आर्ट्स और कॉमर्स में छात्रों की संख्या बहुत ही कम है. इसमें भी अधिकतर छात्रओं की संख्या हैं. बोर्ड के टॉप टेन में शामिल मात्र 11 बच्चे ने ही नामांकन लिया है.
प्रो. शंकर प्रसाद, पूर्व प्रिंसिपल, सिमुलतला आवासीय विद्यालय

काफी संख्या में छात्रों ने एसएलसी ( स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट) ले लिया है. इससे छात्रों की संख्या काफी कम हो गयी है. हम लोगों ने समिति से बाहरी छात्रों को लेने के लिए विज्ञापन निकालने के लिए कहा था. लेकिन अभी तक विज्ञापन नहीं निकाला गया है. इससे आर्ट्स और कॉमर्स में सीटें काफी खाली हैं.
राजीव रंजन, प्रिंसिपल, सिमुलतला आवासीय विद्यालय 

Thursday, July 30, 2015

रैंगिग से परेशान छात्रएं, अभिभावक पहुंच रहे सीबीएसइ

- सीबीएसइ के कई स्कूलों में चल रहा रैंगिग
- सीबीएसइ रीजनल ऑफिस के साथ दिल्ली सीबीएसइ के पास भी भेजे गये लिखित शिकायत
संवाददाता, पटना
केस वन - स्मृति (बदला हुआ नाम) आइसीएसइ बोर्ड की स्टूडेंट हैं. 11वीं में स्मृति ने नामांकन सीबीएसइ बोर्ड के एक स्कूल में लिया. जुलाई के पहले सप्ताह में क्लास भी शुरू हुआ. लेकिन पहले ही दिन से स्मृति के साथ सीनियर क्लास की लड़कियों ने परेशान करना शुरू किया. स्टडी समय से लेकर लंच आवर तक में स्मृति को परेशान करती थीं. स्मृति ने स्कूल जाना बंद कर दिया. जब अभिभावक को पता चला तो स्कूल को सूचना दी गयी. इसके बाद भी स्मृति को तंग ही किया जाता था. फिर सीबीएसइ के पास भी लिखित शिकायत भेजा गया हैं.
केस टू  - रानी (बदला हुआ नाम) 11वीं में नामांकन ली हैं. क्लास के पहले ही दिन से सीनियर उसे तंग करना शुरू कर दिया. चोटी करने आना, रबर बैंड क्यूं लगाया, पानी का बोतल इस कलर का क्यूं हैं, सीनियर को गुड मॉर्निग करके प्रणाम करों, सीनियर को लंच पहले दो, फिर खुद खाओ आदि तरह से तंग किया जाता था. कई दिन तो रानी को जोर से डांट दिया, जिससे वो स्कूल में ही रोना भी शुरू कर दी. तंग आकर रानी से स्कूल जाना बंद कर दिया. मामला अब सीबीएसइ के पास हैं.

- सीबीएसइ के पास पहुंचा मामला
सीबीएसइ रीजनल ऑफिस के सूत्रों की माने तो पटना के कई स्कूलों में रैंगिग जैसी घटनाएं घट रही हैं. इसको लेकर कई अभिभावकों ने बोर्ड के पास शिकायत भी किया हैं. अभिभावकों से मिली शिकायत के अनुसार स्कूल में आए दिन रैंगिग होती हैं. डरा धमका कर रखा जाता हैं. सीनियर क्लास की लड़कियां आए दिन तंग करती हैं. सीबीएसइ के पास पिछले सप्ताह यह मामला आया हैं. अब सीबीएसइ उन मामलों को स्पॉट विजिट करेगी. स्कूल का नाम गुप्त रखा गया हैं. जिससे स्कूल सतर्क ना हो जायें. बोर्ड की ओर से जांच के पास स्कूल पर कार्रवाई भी की जायेगी. जांच में सीबीएसइ उन तमाम प्वाइंट पर भी फोकस करेगी, जो रैंगिग को लेकर बनाया गया था.
- रैंगिग सेल हो स्कूलों में
सीबीएसइ के पास 2011 में कई स्कूलों के खिलाफ रैंगिग के मामले आयें थे. इसके बाद सीबीएसइ ने रैंगिग को लेकर नियम बनाया. इसके तहत स्कूलों को कई स्तर पर काम करने को कहा गया था.  हर स्कूलों को रैंगिग सेल बनाने को कहा गया था. रैंगिग सेल को गुप्त रखा जाये. जिससे स्टूडेंट्स अपनी शिकायत खुल कर दर्ज करवा सकें. लेकिन पटना के अधिकांश स्कूलों मे रैंगिग सेल अभी तक नहीं खुला है. अगर किसी स्टूडेंट के साथ कुछ होता हैं तो उनके लिए कोई ऐसी जगह स्कूल कैंपस में नहीं होता है जहां पर जाकर स्टूडेंट्स अपनी बातें रख सके.

इस तरह से स्कूलों में चलता हैं रैंगिग
- गाली देकर आवाज देना और पास बुलाना
- लंच खा जाना
- लंच में लाये सामग्री को लेकर कांमेंट करना
- बाल खुले तो हो तो उसको लेकर डांटना
- क्लास वर्क संबंधित चीजों में इंटरफेयर करना
- छोटी-छोटी बातों पर पिंच करना
- क्लास रूम में दूसरी लड़कियों के सामने बेइज्जती करना
-  स्कूल बस, वैन या स्कूल ऑटो में छेड़ना
- छोटी-छोटी बातों पर डांटना
- हंसने, बोलने या बात करने पर पाबंदी लगाना

सीबीएसइ के रैंगिग को लेकर ये हैं नियम
- हर स्कूल में रैंगिग पर पूरी तरह से पाबंदी हैं
- रैंगिग को लेकर स्कूल के नोटिस बोर्ड पर जानकारी देना हैं
- स्कूल टीचर्स द्वारा सीनियर से लेकर जूनियर को रैंगिग की पाबंदी के बारे में बतायें
- प्रिंसिपल खुद स्कूल के पहले ही दिन तमाम स्टूडेंट्स को रैंगिग की जानकारी दे
- रैंगिग की पाबंदी के बारे में स्कूल के मुख्य गेट से लेकर क्लास रूम तक अवेयर किया जायें
- हर स्कूलों में बने रैंगिग सेल
- रैंगिग के लिए ऑन लाइन आवेदन ले स्कूल

अभिभावक की बातें
रैंगिग कॉलेजों में हुआ करता था, लेकिन अब स्कूलों में भी होने लगा है. ऐसे में स्कूल को इस पर कड़ा एक्शन लेना चाहिए. कोएड की तो छोड़िये, गल्र्स स्कूलों में भी रैंगिग हो रही है. 11वीं क्लास में बच्चों के पास जानकारी ही कितनी होती हैं. ऐसे में रैंगिग होने से बच्चे डिप्रेशन में चले जाते है .
राजीव वर्मा, अभिभावक

सीबीएसइ ने नियम बनाया था. इसे मैने न्यूज पेपर में पढ़ा भी था. इस कारण हम लोग निश्चित थे. लेकिन नामांकन लेने के बाद पता चला कि स्कूलों इंटर्नल लेबल पर काफी रैंगिग होती ैहै . लेकिन स्कूल वालों का ध्यान नहीं जाता हैं. स्कूल वाले नये स्टूडेंट को ही दोषी मानते हैं.
मोहित कुमार, अभिभावक 

एसिड फेंकने वालों को जब तक सजा नहीं मिलती, अपनी लड़ाई लड़ती रहूंगी

- एसिड विक्टिम चंचल को हैं अभी भी दोषी दे रहें धमकी
- तेजाबी हमलों के खिलाफ विशेष कानून बनाने की कर रहीं चंचल मांग
संवाददाता, पटना
रात में घर की छत पर सो रही थी. अचानक से चार लड़का आया और उसके उपर एसिड फेंक कर चला गया. एक हफ्ते के अंदर सारे लड़के पकड़ में भी आ गये. उन्हें जेल भी हुआ. लेकिन फिर उनकी वेल हो गयी. अब वेल होने के बाद मेरे घर आकर मुङो धमकी देते हैं और कहते हैं कि हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती. रात के समय घर पर पत्थर आदि फेंकते हैं. केस वापस लेने की धमकी देते हैं. घर से बाहर निकलना मुश्किल कर दिया हैं. मै आगे बढ़ना चाहती हैं. पढ़ना चाहती हूं. अपने चेहरे को छुपाये चंचल ने बताया कि जब तक मेरे उपर एसिड फेंकने वालों को सजा नहीं मिल जाती हैं, मै अपनी लड़ाई लड़ती रहूंगी. नये सिरे से अपनी जिंदगी को शुरू करने की इच्छा रखें चंचल गुरुवार को प्रेस मीडिया के पास अपनी बातें रखी. ग्रैंड प्लाजा के सीजन्स रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेस मीडिया के सामने परिवर्तन केंद्र के संरक्षण में चंचल ने बिहार सरकार से एसिड एटैक्ट करने वालों के खिलाफ विशेष कानून बनाने की मांग की.
- 5 लाख कर्ज लेकर कर चुका हूं इलाज पर खर्च
चंचल के पिता शैलेस पासवान ने अभी तक बेटी के इलाज पर 5 लाख के उपर खर्च कर चुके हैं. पेशे से मजदूरी कर रहे शैलेश पासवान ने बताया कि सामाजिक संस्थान वाले बेटी के इलाज में मदद करते हैं. लेकिन खुद अभी तक 5 लाख के उपर खर्च कर चुका है. कर्ज लेकर इलाज करवा रहें हैं. अभी तक 7 ऑपरेशन हो चुका हैं. कान, आंख, नाक, गले, हाथ आदि का ऑपरेशन होता हैं. डाक्टर बताते हैं कि ऑपरेशन का सिलसिला हमेशा जारी रहेगा. इलाज चलता रहेगा.
- दो साल हो गया पढ़ाई खराब
एसिड अटैक्ट और इलाज के कारण चंचल दो सालों तक पढ़ाई नहीं कर पायी. अब वो अपनी जिंदगी फिर एक बार शुरू करना चाहती हैं. कंप्यूटर इंजीनियर बनने का ख्वाब देख रही चंचल ने बताया कि जो सपना था वो तो पूरा नही कर पायी, लेकिन अपने पांव पर खड़ी होना चाहती हूं. आगे बढ़ना चाहती हूं.
- थाने में दर्ज नहीं होते है एसिड अटैक्ट के मामले
 एसिड अटैक्ट को लेकर परिवर्तन केंद्र की ओर से 2013 जून में सुप्रीम कोर्ट में पीआइएल दर्ज किया गया था. परिवर्तन केंद्र की वर्षा आत्मसिद्ध ने बताया कि पीआइएल दर्ज करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तमाम राज्य सरकार से छह हफ्ते के अंदर जवाब देने को कहा था. बांकी राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जवाब दिया था, लेकिन बिहार सरकार ने अभी तक जवाब नहीं दिया हैं. किसी भी थाने में एसिड अटैक्ट के मामले दर्ज नहीं होते हैं. एक लड़की की जिंदगी बर्बाद हो जाती हैं, लेकिन उसे न्याय के भी भटकना पड़ता है. वर्षा आत्मसिद्ध ने बताया कि एसिड अटैक्ट संबंधित केस के लिए विशेष कानून बने. 

Friday, July 24, 2015

इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन के लिए दो सौ अभ्यर्थी को बुलाया गया, आये मात्र 42

- काउंसिलिंग के पहले ही दिन गायब रहें अभ्यर्थी
संवाददाता, पटना
बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (बीसीइसीइ) द्वारा लिये जाने वाले सात इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन  के लिए अभ्यर्थी की संख्या काफी कम रही. काउंसिलिंग के दूसरे दिन जेनरल कोटा के एक से दो सौ रैंक तक के अभ्यर्थी को बुलाया गया था. लेकिन इसमें मात्र 42 अभ्यर्थी ही काउंसिलिंग के लिए पहुंचे. 41 की काउंसिलिंग के बाद नामांकन लिया गया. वहीं एक अभ्यर्थी ने नामांकन नहीं लिया. इन 41 अभ्यर्थी में  22 भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन लिया वही 19 अभ्यर्थी ने मुजफ्फरपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन लिया. ज्ञात हो कि सात इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन के लिए काउंसिलिंग 23 जुलाई से 5 अगस्त तक किया जाना है. काउंसिलिंग के पहले दिन नि:शक्त और मिलट्री कोटे के अभ्यर्थी की काउंसिलिंग किया गया. इसमें से सातों इंजीनियरिंग कॉलेजों को मिला कर 37 अभ्यर्थी का नामांकन लिया गया था.
- आज नहीं होगी काउंसिल
25 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पटना आगमन के कारण काउंसिलिंग को स्थगित कर दिया गया हैं. 25 जुलाई की काउंसिलिंग 26 जुलाई को किया जायेगा. इस दिन 201 रैंक वाले से लेकर 400 रैंक तक के अभ्यर्थी को बुलाया गया है. इस संबंध में बीसीइसीइ के ओएसडी अनिल कुमार ने बताया कि आइआइटी और एनआइटी में नामांकन लेने के कारण जेनरल कोटे के पहले दिन अभ्यर्थी की संख्या काफी कम थी. 200 अभ्यर्थी को बुलाया गया था, लेकिन इसमें से मा. 42 अभ्यर्थी ही काउंसिलिंग के लिए आयें. 

इंटरमीडिएट की 2016 की परीक्षा होगी दो पालियों में

- मैट्रिक के बाद अब इंटर की परीक्षा में लिया जायेगा दो पालियो में
- 2016 में 14 लाख परीक्षार्थी हो सकते हैं शामिल
संवाददाता, पटना
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति जल्द ही इंटरमीडिएट की परीक्षा को भी दो पालियों में लिये जाने को ले कर निर्णय लेगी. इंटरमीडिएट में हर साल परीक्षार्थी की संख्या बढ़ रही है, इस कारण अब समिति इंटर की परीक्षा भी दो पालियों में करवाने पर विचार कर रहीं हैं. इसे 2016 से ही लागू कर दिया जायेगा. समिति सूत्रो की माने तो इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया हैं. प्रस्ताव में दो पालियों में लिया जाने वाले परीक्षा की पूरी रूपरेखा भी तैयार की गयी है. दोनों ही पालियों की परीक्षा एकदम अलग होगी. परीक्षार्थी की संख्या के हिसाब से उसे बांट दिया जायेगा. चुकी इंटर में साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स का अलग-अलग विषय और उसमें शामिल छात्रों की संख्या होती हैं. इस कारण इसमें विषय वार परीक्षार्थी की संख्या को अलग-अलग किया जायेगा.
- एक दिन में एक ही विषय की होगी परीक्षा
मैट्रिक की तरह अब इंटर की परीक्षा भी अब एक दिन में एक ही विषय की ली जायेगी. जिन विषयों में परीक्षार्थी की संख्या कम होगी, उन विषयों की परीक्षा एक ही दिन दो पालियों में लिया जायेगा. लेकिन जिन विषयों में परीक्षार्थी की संख्या अधिक होगी, ऐसे विषयों के दिन दुसरे विषयों की परीक्षा नहीं लिया जायेगा. इससे परीक्षा को कंट्रोल किया जा सकेगा. समिति सूत्रों की माने तो साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स स्ट्रीम परीक्षा का रूटीन तैयार करने में ही इसका ख्याल रखा जायेगा.
- 2016 में 14 लाख पर जा सकती हैं परीक्षार्थी की संख्या
समिति की माने तो हर साल इंटरमीडिएट करने वाले परीक्षार्थी की संख्या बढ़ रही है. पिछले तीन सालों की बात करें तो हर साल दो लाख के लगभग परीक्षार्थी बढ़ रहें है. 2015 में जहां 12 लाख के लगभग परीक्षार्थी इंटर की परीक्षा में शामिल हुए, वहीं 2016 में यह संख्या 14 लाख तक पहुंच सकता हैं.

इंटरमीडिएट की परीक्षा में ऐसे बढ़े तीन साल में परीक्षार्थी
साल          -     परीक्षार्थी की संख्या
2013        -      7 लाख 68 हजार
2014        -       9 लाख  89 हजार
2015        -       12 लाख 65 हजार

कोट
इंटरमीडिएट में हर साल परीक्षार्थियों की संख्या दो लाख के उपर बढ़ रही हैं. ऐसे में परीक्षा केंद्र की संख्या भी हर साल बढ़ती जा रही हैं. इस कारण दो पालियों में परीक्षा लेने का विचार चल रहा है.  दो पालियों में परीक्षा लेने से सेंटर कम रखना पड़ेगा और कदाचार मुक्त परीक्षा ली जा सकेगी.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति 

मुजफ्फरपुर और गया से हटाया गया एआइपीएमटी का सेंटर, पटना में ही बनाया गया केवल सेंटर

- 35 परीक्षा केंद्र के परीक्षार्थी की परीक्षा होगी अब पटना में
-  39 परीक्षा केंद्र पर 30 हजार 6 सौ परीक्षार्थी देंगे परीक्षा
संवाददाता, पटना
ऑल इंडिया प्री मेडिकल प्री डेंटल एंट्रांस टेस्ट (एआइपीएमटी) अब केवल पटना में बने परीक्षा केंद्र पर ही लिया जायेगा. पहले से निर्धारित मुजफ्फरपुर और गया परीक्षा केंद्र को सीबीएसइ ने कैंसिल कर दिया हैं. ज्ञात हो कि 3 मई को आयोजित एआइपीएमटी में पूरे बिहार में पटना के अलावा गया में 15 परीक्षा केंद्र और मुजफ्फरपुर में 20 परीक्षा केंद्र बनाये गये थे.  इन परीक्षा केंद्र पर लगभग 10 हजार परीक्षार्थी ने परीक्षा भी दिया था. लेकिन इन 35 परीक्षा केंद्र को कैंसिल कर दिया गया हैं.  अब कैंसिल 35 परीक्षा केंद्र के परीक्षार्थी की परीक्षा पटना के 39 परीक्षा केंद्र पर लिया जायेगा. सीबीएसइ के द्वारा इसकी सूचना तमाम परीक्षा केंद्र के सेंट्रल सुप्रीटेडेंट को दे दिया गया है. पूरे बिहार के उन परीक्षार्थी के लिए काफी मुश्किल बढ़ गया हैं जिनका परीक्षा केंद्र गया और मुजफ्फरपुर दिया गया था.
- 7.30 बजे परीक्षा केंद्र पर पहुंचने की होगी चुनौती
सेंटर चेंज होने से अभ्यर्थी के लिए सेंटर पर 7.30 बजे पहुंचने की चुनौती होगी. सीबीएसइ के निर्देश के अनुसार हर अभ्यर्थी को सुबह 7.30 बजे ही परीक्षा केंद्र पर पहुंच जाना हैं. ऐसे में जिन अभ्यर्थी का परीक्षा केंद्र पहले से निर्धारित मुजफ्फरपुर और गया में था, उन्हें अब पटना आना होगा. पटना आना अब अभ्यर्थी के लिए चुनौती पूर्ण होगा. इससे अभ्यर्थी का खर्च के साथ सेंटर पर समय से पहुंचने का मेंटर टेंशन भी काफी होगा. सीबीएसइ ने स्पष्ट कर दिया हैं कि  अंतिम समय 9.30 रखा गया हैं. अगर इस बीच अभ्यर्थी नहीं पहुंचेगे तो उन्हें परीक्षा नही देने दिया जायेगा. ज्ञात हो कि 3 मई को आयोजित एआइपीएमटी की परीक्षा में 74  परीक्षा केंद्र बनाये गये थे.
- पटना जोन में 42 हजार 618 परीक्षार्थी देंगे एआइपीएमटी
 पटना जोन (बिहार और झारखंड) में तीन परीक्षा केंद्र पर एआइपीएमटी लिया जायेगा. इसमें बिहार में एक परीक्षा केंद्र पटना में बनाया गया हैं. वहीं झारखंड में रांची और बोकारो में परीक्षा केंद्र बनाया गया गया. पूरे बिहार से 30 हजार 600 परीक्षार्थी एआइपीएमटी में शामिल होंगे. इसके लिए 39 परीक्षा केंद्र बनाये गये हैं. वहीं झारखंड में 12 हजार 18 परीक्षार्थी एआइपीएमटी में शामिल होंगे. इसके लिए 17 परीक्षा केंद्र बनाये गये हैं. इसमें रांची में 9 परीक्षा केंद्र और बोकारो में 8 परीक्षा केंद पर परीक्षा ली जायेगी. बिहार में गया और मुजफ्फरपुर के परीक्षा केंद्र पर कैंसिल कर दिया गया हैं. अब सारे अभ्यर्थी को पटना आकर ही परीक्षा देना होगा. परीक्षा का समय सुबह 10.30 बजे से 1.30 बजे तक आयोजित की जायेगी. एआइपीएमटी की तैयारी को लेकर रेडियेंट इंटरनेशनल स्कूल शुक्रवार को एक बैठक आयोजित किया गया. बैठक में 39 परीक्षा केंद्र के सेंट्रल सुप्रीटेंडेंट शामिल हुए.

सेंटर कैंसिल करने के सीबीएसइ की दलील
- सेंटर कम होने से परीक्षा को कदाचार मुक्त आयोजित करने में मदद मिलेगी
- एक सेंटर अधिक सुरक्षा अच्छे से दी जा सकती हैं
- कम सेंटर पर अधिक से अधिक सीबीएसइ के आब्जर्वर लगाये जा सकेंगे
- जैमर, बग डिटेक्टर को कम से कम सेंटर पर अधिक से अधिक देने से सहूलियत होगी
- आब्जर्वर द्वारा अभ्यर्थी पर नजर रखना आसान होगा
- दीवार घड़ी अब 39 परीक्षा केंद्र के परीक्षा हॉल में ही लगाये जायेंगे

इन चीजों के साथ आयें परीक्षा केंद्र पर
-  एडमिट कार्ड
- पोस्टकार्ड साइज एक फोटो ग्राफ. इसे एडमिट कार्ड पर चिपकाना हैं
- एक पासपोर्ट साइज फोटाग्राफ. इसे एटेंडेस सीट पर लगाया जायेगा

एग्जामिनेशन सेंटर पर होगी यह व्यवस्था
- एग्जाम देने के लिए पेन सीबीएसइ द्वारा उपलब्ध करवाया जायेगा
- हर परीक्षा हॉल में दीवार घड़ी सीबीएसइ द्वारा लगाया गया हैं
- हर आधे घंटे पर वेल रिंग बजाया जायेगा. इससे समय का अंदाजा अभ्यर्थी को लगता रहेगा
- परीक्षा केंद्र पर 7.30 बजे पहुंच जायें. बग डिटेक्टर से जांच होगी
- परीक्षा केंद्र के हर क्लास रूम के बाहर जैमर लगी रहेगी.जो हर पल की रिकॉडिंग अभ्यर्थी का करेगा
- परीक्षा देते समय पीने के पानी की पूरी व्यवस्था रहेगी.
- अभ्यर्थी को परीक्षा के दौरान हॉल ने निकलने की इजाजत नहीं होगी
- अभ्यर्थी के एग्जामिनेशन सेंटर पर इंट्री के साथ परीक्षा देते हुए हर एक पल की वीडियो रिकॉडिंग की जायेगी

पटना जोन
बिहार
कुल अभ्यर्थी  - 30 हजार 600
परीक्षा केंद्र  - पटना
कुल परीक्षा कंद्र  - 39

कोट
एआइपीएमटी को लेकर पूरी तैयारी कर ली गयी हैं. हर परीक्षा केंद्र के हर क्लास रूम के बाहर जैमर लगाया जायेगा. इसके अलावा हर अभ्यर्थी की विडियो रिकॉडिंग भी की जायेगी. सुरक्षा को लेकर पूरा इंतजाम किया गया हैं. बस परीक्षार्थी बताये गये समय के अनुसार 7.30 बजे तक परीक्षा केंद्र पर पहुंच जायें.
डा. सैयम भारद्वाज, ज्वाइंट सेक्रेटरी और ओएसडी, एआइपीएमटी

Thursday, July 23, 2015

इंजीनियरिंग कॉलेजों में काउंसिलिंग शुरू, 116 को बुलाया गया, 37 का हुआ नामांकन

- 23 जुलाई से 5 अगस्त तक चलेगी काउंसिलिंग
संवाददाता, पटना
राज्य के सात सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला के लिए काउंसिलिंग गुरुवार से शुरू कर दिया गया हैं. काउंसिलिंग के पहले लिए नि:शक्त और मिलट्री कोटे के सफल छात्रों की काउंसिलिंग करवायी गयी. इसके लिए 116 छात्रों को काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया था. लेकिन इसमें से मात्र 37 छात्र की ही काउंसिलिंग की गयी. सात इंजीनियरिंग कॉलेज में हर कॉलेज में नि:शक्त और मिलट्री कोटे के लिए सीटें रिजर्व हैं. इसमें मिलट्री कोटे में सफल छात्रों के लिए 31 सीटें और नि:शक्त कोटे में सफल छात्रों के लिए 46 सीटें रिजर्व रखी हुई हैं. नि:शक्त और मिलट्री कोटे के लिए एक दिन की ही काउंसिलिंग रखा गया था. 24 जुलाई से जेनरल छात्रों के लिए काउंसिलिंग रखा गया है. जेनरल छात्रों के लिए काउंसिलिंग के पहले दिन एक से दो सौ रैंक तक छात्रों को बुलाया गया हैं.
- मोतीहारी इंजीनियरिंग कॉलेज में 126 सीटों पर ही होगा नामांकन
25 जुलाई की काउंसिलिंग को स्थगित रखा गया हैं. इसके बाद 26 जुलाई से 5 अगस्त तक काउंसिलिंग होगी. पहले दिन नि:शक्त और मिलिट्री कोटे के सफल छात्रों की काउंसिलिंग करवायी गयी. काउंसिलिंग के लिए अभ्यर्थी को कॉल लेटर लेकर जाना अनिवार्य था. इस बार कुल 1738 सीटों पर ही नामांकन लिया जायेगा. एआइसीटीइ ने मोतीहारी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की 126 सीटों पर ही नामांकन लेने की अनुमति दी हैं. बांकी बचे 126 सीटों पर नामांकन नहीं लिया जायेगा.
- पॉलिटेक्टिक की काउंसिलिंग रहेगी स्थगित
इंजीनियरिंग कॉलेजों की काउंसिलिंग शुरू होने से पहले से चल रही पॉलिटेक्टिक कॉलेजों में नामांकन के लिए काउंसिलिंग को स्थगित कर दिया गया हैं. इंजीनियरिंग कॉलेजों में काउंसिलिंग होने पूरा हो जाने के बाद दुबारा पोलिटेक्टिक कॉलेजों में काउंसिलिंग 6 अगस्त के शुरू हो पायेगी.

नि:शक्त और मिलट्री में सफल छात्रों की काउंसिलिंग
काउंसिलिंग के लिए बुलाये गये  -  116 अभ्यर्थी
काउंसिलिंग में अबसेंट रहें  -  73
अनफिट पाये गये  -  6
नि:शक्त छात्रों की हुई काउंसिलिंग  -  21
मिलट्री छात्रों की हुई काउंसिलिंग  - 16

किस इंजीनियरिंग कॉलेज में कितनी सीटें
 बिहार के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में  -  1864 सीटें
- मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी  - 304 सीट
- भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग  - 300 सीट
- नालंदा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, चंडी  -  252 सीट
- मोतीहारी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग -  252 सीटें (नामांकन मात्र 126 पर)
- गया इंजीनियरिंग कॉलेज  -  252
- दरभंगा इंजीनियरिंग कॉलेज  - 252
- छपरा इंजीनियरिंग कॉलेज  -  252

कोट
सात इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए काउंसिलिंग गुरुवार से शुरू किया गया. पहले दिन नि:शक्त और मिलट्री कोटे वाले अभ्यर्थी के लिए काउंसिलिंग किया गया. काउंसिलिंग के लिए 116 अभ्यर्थी को बुलाया गया था. इसमें से मात्र 37 का ही नामांकन किया जा सका. 6 अभ्यर्थी अनफिट पाये गये हैं.
अनिल कुमार, ओएसडी, बीसीइसीइ 

1991 के बाद इंटर काउंसिल में नहीं हुआ एक भी कर्मचारी की नियुक्ति

- 426 रेगूलर कर्मचारियों की संख्या अब मात्र 360 बची
- एडहॉक कर्मचारी कर रहें 22 सालों से रेगूलर करने की मांग
संवाददाता, पटना
मैट्रिक और इंटर में हर साल विद्यार्थी की संख्या बढ़ रही है. इसकी तुलना में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में कर्मचारियों की संख्या हर साल कम होती जा रही हैं. हर साल लाखों की संख्या में नये विद्यार्थी समिति से जुड़ रहें हैं. लेकिन पिछले 22 सालों से समिति में नये पद का सृजन नहीं किया गया हैं. वर्तमान में जो भी कर्मचारी अब बचे हैं, वो भी अब सेवा निवृत हो रहें हैं. इससे कर्मचारियों की संख्या भी घट रही हैं. ज्ञात हो कि इंटर काउंसिल में 426 एडहॉक कर्मचारियों को 1980 से 1991 के बीच में रेगूलर किया गया था. अब इन 426 कर्मचारियों में कई साल दर साल सेवा निवृत हो रहें है. इनकी संख्या अब 360 बच गयी हैं. इन 360 कर्मचारियों में 12 कर्मचारी 2015 से 2016 के बीच सेवानिवृत हो जायेगे. इसके बाद रेगूलर कर्मचारियों की संख्या और कम हो जायेगी.
- 22 साल से कर रहें रेगूलर होने की मांग
इंटरमीडिएट काउंसिल में पिछले 22 सालों से एडहॉक पर 248 कर्मचारी कार्यरत हैं. लेकिन कई लोगों के नौकरी छोड़ देने के बाद अब 239 कर्मचारी ही इसमें बच गये हैं. ये कर्मचारी रेगूलर होने की मांग पिछले कई सालो से कर रहें हैं. लेकिन अभी तक इन्हें रेगूलर नहीं किया गया हैं. ये कर्मचारी इंटर काउंसिल में कम्प्यूटर ऑपरेटर के साथ, असिस्टेंट कलर्क, रूटीन कलर्क और चपरासी के पद पर कार्यरत हैं. कर्मचारियों की संख्या कम होने के कारण इंटर काउंसिल में किसी काम को होने में महीनों लग जाते हैं. इस संबंध में एडहॉक कर्मचारी संघ के संयोजक अरूण कुमार ने बताया कि हर विभाग में एडहॉक कर्मचारियों से काम लिया जाता हैं. लेकिन अभी तक हमें रेगूलर नहीं किया गया ह

एआइपीएमटी : 74 परीक्षा केंद्र पर सीबीएसइ की ओर से लगाये जायेंगे जैमर

- हर सेंटर सुप्रीटेंडेंट को आज सीबीएसइ जैमर करवायेगा प्रोवाइड
- बग डिटेक्टर से होगा बॉडी की चेकिंग
संवाददाता, पटना
ऑल इंडिया प्री मेडिकल प्री डेंटल एंट्रांस टेस्ट (एआइपीएमटी) की परीक्षा को कदाचार मुक्त करवाने के लिए सीबीएसइ तमाम परीक्षा सेंटर पर जैमर की व्यवस्था करने जा रहा हैं. इसके लिए बोर्ड की ओर से हर परीक्षा केंद्र के सेंटर सुप्रीटेंडेंट को जैमर उपलब्ध करवाया जायेगा. पटना जोन के बिहार स्टेट में 74 परीक्षा केंद्र एआइपीएमटी के लिए बनाये गये हैं.  सीबीएसइ के प्रतिनिधि द्वारा 24 जुलाई को 74 सेंटर सुप्रीटेंडेंट जैमर उपलब्ध करवाया जायेगा. इसकी सूचना गुरुवार को तमाम सेंटर सुप्रीटेंडेंट के पास सीबीएसइ की ओर से भेजा गया है. सीबीएसइ के निर्देश के अनुसार 24 जुलाई को रेडियेंट इंटरनेशनल स्कूल में आयाजित बैठक में तमाम सेटर सुप्रीटेंडेंट का आना अनिवार्य है. अगर कोई सेंटर सुप्रीटेंडेंट बैठक में शामिल नहीं हो पाते है तो ऐसे परीक्षा केंद्र पर सीबीएसइ के आब्जर्बर अपने साथ जैमर लेकर जायेंगे. ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर तमाम परीक्षा केंद्र पर जैमर लगाना अनिवार्य हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही सीबीएसइ की ओर से यह पहल की जा रही हैं.
- बॉडी की चेकिंग बग डिटेक्टर से
एआइपीएमटी की परीक्षा में शामिल तमाम अभ्यर्थी की पूरी बॉडी की चेकिंग भी किया जायेगा. इसके लिए तमाम परीक्षा केंद्र पर बग डिटेक्टर भी लगाये जायेंगे. बग डिटेक्टर भी सीबीएसइ की ओर से तमाम परीक्षा केंद्र को उपलब्ध करवाया जा रहा है. सीबीएसइ सूत्रो की माने तो बिहार में कुल 74 परीक्षा केंद्र बनाये गये है. इसमें 39 पटना जिला में और 20 मुजफ्फरपुर और 15 गया जिला में परीक्षा केंद्र बनाये गये हैं. इन तमाम परीक्षा केंद्र पर जैमर लगाने की व्यवस्था सीबीएसइ की ओर से किया जायेगा. सीबीएसइ सूत्रों के मुताबिक तमाम परीक्षा केंद्र से कहा गया है कि अगर कोई प्राइवेट एजेंसी भी जैमर, मेटर डिटेक्टर या बग डिटेक्टर प्रोवाइड करवाये तो उनकी भी सुविधा सेंटर सुप्रीटेंडेंट की ओर से लिया जायें.


उड़ान में सेलेक्ट हुई तो आइआइटी में फ्री एजुकेशन

- सीबीएसइ के उड़ान प्रोजेक्ट से फिर जुड़ेगी बेटियां
- 1000 बेटियों को सीबीएसइ की ओर से दिया जायेगी फ्री एजुकेशन
संवाददाता, पटना
बेटियां बढ़ेगी तो देश बढ़ेगा. बेटियों को प्रायमरी एजुकेशन से हायर एजुकेशन तक जोड़ने के लिए सीबीएसइ ने फिर एक बार उड़ान प्रोजेक्ट बेटियों को जोड़ने का सिलसिला शुरू किया हैं. इंजीनियरिंग कॉलेज में मुफ्त शिक्षा देने के उदेश्य से शुरू किये गये इस प्रोजेक्ट में देश भर से एक हजार बेटियों को चुना जाता है. एक बार चुने जाने के बाद इंजीनियरिंग की तैयारी से लेकर आइआइटी, एनआइटी में चार सालों तक पढ़ाई का पूरा खर्च सीबीएसइ की ओर से  दिया जाता हैं. इसके लिए आवेदन की तिथि घोषित कर दी गयी हैं. 23 जुलाई से 3 अगस्त का ऑन लाइन आवेदन भरे जायेंगे. ऑन लाइन आवेदन सीबीएसइ के वेबसाइट 666.ूु2ी.ल्ल्रू.्रल्ल  666.ूु2ीूंंीि्रेू.्रल्ल पर जाकर भरे जायेंगे.
- एंट्रांस टेस्ट से चुनी जायेगी बेटियां
 इस प्रोजेक्ट में बेटियों का चुनाव एंट्रांस टेस्ट के माध्यम से किया जाता है. ऑन लाइन आवेदन लेने के बाद इसका एंट्रांस टेस्ट देश भर में आयोजित होता है. ऑन लाइन टेस्ट लिये जायेंगे.टेस्ट के लिए देश भर में 50 शहरों चुना गया हैं. इसके बाद एक हजार छात्रओं का चयन बोर्ड की ओर से किया जायेगा. इसके बाद सितंबर से तैयारी शुरू होगी. 11वीं मे स्टडी कर रही छात्रएं ही इसमें लिए आवेदन कर सकती हैं.

उड़ान प्रोजेक्ट में जुड़ने के लिए शर्त
- यह प्रोजेक्ट केवल देश की बेटियों के लिए हैं
- जो छात्रएं 2015 में ग्यारहवीं में गणित विषय को लेकर पढ़ रही हों, वहीं इसमें आवेदन दे सकती हैं
- आवेदन करने के लिए 10वीं में हर विषय में 70 फीसदी अंक आयें हों. इसके अलावा साइंस और मैथ में 80 फीसदी अंक आयें हों. वहीं बोर्ड परीक्षा में सीजीपीए में ग्रेड अंक 8 तथा साइंस और मैथ में ग्रेड अंक 9 प्राप्त करना आवश्यक हैं
- छात्रओं के परिवार की वार्षिक आय छह लाख रुपया से कम हों
- इसमें जेनरल के लिए 50.5 फीसदी सीटें रखी गयी है. वहीं अति पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फीसदी, अनुसूचित जाति के लिए 15 फीसदी, अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5 फीसदी सीटें आरक्षित हैं
- स्पेशल स्टूडेंट्स के लिए हर आरक्षित सीटों में 3-3 फीसदी सीटें रिजर्व रखी गयी हैं

ये होगा फायदा
- इसमें इंजीनियरिंग परीक्षा की तैयारी से लेकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी मुफ्त करवाया जायेगा
- छात्रओं को तैयारी के लिए ट्यूटोरियल, व्याख्यान, स्टडी मेटेरियल के साथ टेबलेट भी दिया जायेगा
- हेल्पलाइन की सुविधा मिलेगी
- आइआइटी, एनआइटी या केंद्र सरकार द्वारा चालित इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन और पढ़ाई के लिए प्रवेश शुल्क, ट्यूशन फी और होस्टल फी की सुविधा दी जायेगी
- तैयारी के लिए ऑन लाइन और ऑफ लाइन स्टडी की सुविधा
- देश भर में 50 शहरों में स्टडी क्लास रूम बनाया गया हैं

उड़ान प्रोजेक्ट के बारे में संपर्क कर सकते हैं
फोन नंबर - 01123214737
इ-मेल   -  4ंिल्ल.ूु2ीॅें्र’.ूे
यहां से ले सकते हैं जानकारी  -  http://ूु2ील्ल’्रल्ली.ल्ल्रू.्रल्ल/1ीॅल्ल/4ंिल्ल.ँ3े’

कोट
उड़ान प्रोजेक्ट के तहत बिहार के लिए पटना में सेंटर बनाया गया है. छात्रओं को किसी भी तरह की जानकारी लेना होगा तो पटना केंद्रीय विद्यालय कंकड़बाग से संपर्क कर सकते हैं. इसमें सेलेक्ट होने के लिए एंट्रांस टेस्ट लिया जायेगा. देश भर से एक हजार बेटियों को चुना जाता है.
सुधाकर सिंह, सिटी को-ऑडिनेटर, उड़ान प्रोजेक्ट

Tuesday, July 21, 2015

मोबाइल और हैंग बैग लेकर नहीं जा पायेंगे एग्जामिनर

- एआइपीएमटी की परीक्षा के एग्जामिनर को सीबीएसइ देगा आई कार्ड
- 6.30 बजे परीक्षा केंद्र पर पहुंचेंगे तमाम एग्जामिनर
संवाददाता, पटना
एआइपीएमटी की परीक्षा देने वाले परीक्षार्थी के साथ लेने वाले एग्जामिनर पर भी मोबाइल रखने की पाबंदी लगा दी गयी है. इसके साथ एग्जामिनर को हैंड बैग भी साथ में लेकर परीक्षा हॉल में जाने की पाबंदी लगायी गयी हैं. एग्जामिनर एक बार परीक्षा हॉल में जाने के बाद परीक्षा समाप्त होने के बाद ही हॉल से निकलेंगे. इन तमाम गाइड लाइन को सीबीएसइ द्वारा परीक्षा केंद्र सुप्रीटेंडेंट को भेज दिया गया हैं. 25 जुलाई को एआइपीएमटी की परीक्षा को अंतिम रूप सीबीएसइ द्वारा दिना जाने लगा हैं. परीक्षार्थी के बाद अब तमाम एग्जामिनर (इंविजिलेटर) को सीबीएसइ गाइड लाइन जारी करने जा रहा हैं.
- 6.30 बजे पहुंचना हैं सेंटर पर
सीबीएसइ के अनुसार तमाम एग्जामिनर को परीक्षा केंद्र पर सुबह 6.30 बजे पहुंच जाना होगा. परीक्षार्थी के आने के समय से एक घंटा पहले तमाम एग्जामिनर को पहुंचना होगा. इस बार तमाम परीक्षा केंद्र पर सीबीएसइ द्वारा मजिस्ट्रेट और आब्जर्वर को भी रखा जायेगा. परीक्षा के दौरान बाहरी किसी को भी परीक्षा केंद्र पर आने की मनाही होगी.
- 24 को होगी सेंटर सुप्रीटेंडेंट की बैठक
परीक्षा संबंधी गाइड लाइन को लेकर सीबीएसइ की ओर से एक बैठक का आयोजन 24 जुलाई को रेडियेंट इंटरनेशनल स्कूल में किया जायेगा. इस बैठक में तमाम सेंटर सुप्रीटेंडेंट को शामिल होना हैं.  बैठक में एआइपीएमटी को लेकर कई गाइड लाइन की जानकारी दी जायेगी. इस बार तमाम एग्जामिनर को सीबीएसइ द्वारा स्पेशल आइ कार्ड दिया जायेगा. इस आइ कार्ड पर सेंटर सुप्रीटेंडेंट का हस्ताक्षर रहेगा. इस आइ कार्ड को परीक्षा के दौरान सभी एग्जामिनर को पहनना होगा. सेंटर के तमाम गार्ड को भी इस बार आइ कार्ड दिया जायेगा. जिसके पास आइ कार्ड होगा, वहीं परीक्षा सेंटर के अंदर जा पायेगा.

24 जुलाई की बैठक में होगा इन चीजों पर फोकस
- कितने सेंटर पर जैमर की व्यवस्था की गयी है
- मेंटर डिटेक्टर को लेकर सेंटर पर क्या इंतजाम हैं
- एलक्ष्डी टार्च की खरीदारी किस सेंटर ने कितना क्या हैं
- तमाम परीक्षा केंद्र पर सीबीएसइ द्वारा मजिस्ट्रेट और आब्जर्वर को रखा जायेगा
- एग्जामिनर के मोबाइल लेकर परीक्षा हॉल में नहीं जायेंगे
- हैंग बैग भी साथ में नहीं होगा एग्जामिनर के
- तीन घंटे की अवधि में परीक्षा हॉल से बाहर निकलने पर पाबंदी

कोट
एआइपीएमटी के लिए एग्जामिनर को गाइड लाइन जारी किया गया. 24 जुलाई को भी एक बैठक आयोजित की जायेगी. परीक्षार्थी को परीक्षा संबंधित तमाम नियम का पालन करना चाहिए. परीक्षा केंद्र पर तीन घंटे पहुंचने का शर्त का पालन करना चाहिए.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ 

एडमिशन के नाम पर आरटीइ में होता हैं खानापूर्ति

- नामांकन के लिए सीटों का परसेंटेज स्कूल खुद करता है तय
- शिक्षा के अधिकार का 25 फीसदी नियम का नहीं हो रहा पालन
संवाददाता, पटना
शिक्षा के अधिकार के तहत हर स्कूलों को क्लास वन में स्टूडेंट्स के कुल संख्या का 25 फीसदी नामांकन लेना तय किया गया है. हर स्कूल अपने एरिया के आसपास के 25 फीसदी बच्चे का नामांकन आरटीइ के तहत लेंगे. लेकिन इस नियम का पालन अधिकांश स्कूल नहीं करते हैं. स्कूल आरटीइ के तहत नामांकन तो लेते है, लेकिन इसकी बस खानापूर्ति होती हैं. सूचना के अधिकार के तहत हर सत्र में स्कूल नामांकन तो लेते हैं, लेकिन 25 फीसदी नामांकन के शर्त का ख्याल नहीं रखा जाता हैं. स्कूलों ने नामांकन तो लिया हैं, लेकिन यह नहीं बताया है कि क्लास वन में कितने स्टूडेंट्स उस स्कूल में पढ़ते हैं और उसमें से कितने का नामांकन आरटीइ के तहत लिया गया हैं. आरटीआइ एक्टिविस्ट अजय कुमार चौरसिया ने बताया कि हर साल का यहीं स्थिति हैं. आरटीइ के तहत नामांकन काफी कम होता हैं. जो भी नामांकन होता है, उसमें से अधिकांश स्कूल तो बस खानापूर्ति करते काम निकाल लेते हैं.
- हर सेक्शन में होगा 25 फीसदी नामांकन
आरटीइ के तहत किसी भी प्राइवेट स्कूल में नामांकन गरीब बच्चों का लिया जायेगा. जिस स्कूल में क्लास वन में जितना सेक्शन चलेगा, उसका 25 फीसदी नामांकन लेना तय किया गया हैं. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के अनुसार एक सेक्शन में 40 बच्चों को नामांकन होता हैं. अगर किसी भी स्कूल में एक ही सेक्शन क्लास वन में है तो ऐसे में 25 फीसदी के हिसाब से एक सेक्शन में 10 बच्चे का नामांकन तो होना ही चाहिए. लेकिन पटना जिला के कई स्कूलों ने नामांकन लेने में कोताही बरती है. ऐसे में विभाग की ओर से ऐसे स्कूलों को चिहिंत किया जायेगा, जो नामांकन लेने में लापरवाही किये हैं.

2014-15 सत्र में 49 स्कूलों ने नामांकन लिया. इसमें से 12 ऐसे प्राइवेट स्कूल हैं जिन्होंने नामांकन तो लिया, लेकिन इसकी संख्या काफी नगण्य रही.
स्कूल का नाम               -     25 फीसदी के तहत लिये गये नामांकन
सेंट अगस्टिन एकेडमी    -       1
जेउस मैरी कांवेंट           -       5
गॉडस्पीड पब्लिक स्कूल   -    9
कैथेड्रल पब्लिक स्कूल     -   4
आरपीएस रेजिडेंसियल स्कूल -  5
द बिसोपस हेरीटेज स्कूल    -    8
आरपीएस गल्र्स पब्लिक स्कूल  -   4
ज्ञान ज्योति रेसिडेंशियल पब्लिक स्कूल  -  8
विद्या निकेतन गल्र्स हाई स्कूल    -   3
पाटलिपुत्र सेंट्रल स्कूल   -    4
बिहटा पब्लिक स्कूल, किशुनपुर   -  7
प्रभु तारा स्कूल    -      8

2013-14 सत्र में 67 स्कूलों ने नामांकन लिया. इसमें से 7 ऐसे प्राइवेट स्कूल हैं जिन्होंने नामांकन तो लिया, लेकिन इसकी संख्या काफी नगण्य रही.
स्कूल का नाम               -     25 फीसदी के तहत लिये गये नामांकन
कैथेड्रल पब्लिक स्कूल   -         5
सेंट अगस्टिन एकेडमी   -          1
मॉडन पब्लिक स्कूल     -           6
 प्रभु तारा स्कूल            -           5
जीएमजे कांवेंट हाई स्कूल   -        4
जेउस मैरी कांवेंट              -          7
गायत्री इंटरनेशनल स्कूल    -        8

कोट
आरटीइ के तहत नामांकन हर साल लिया जाता है. नामांकन तो स्कूल लेते हैं, लेकिन स्टूडेंट्स की कुल संख्या की जानकारी नही देते है. इससे हमें यह पता नहीं चल पाता हैं कि इसमें स्कूल ने कितने फीसदी गरीब बच्चों का नामांकन आरटीइ के तहत लिया हैं. जब स्कूलों की लिस्ट आती हैं तो पता चलता है कि कई स्कूलों ने तो बस खानापूर्ति ही किया हैं. ऐसे स्कूलों की लिस्ट निकाली जायेगी. और उन्हें नोटिस दिया जायेगा.
 राम सागर सिंह, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान

्रप्रधानमंत्री का आगमन बिगाड़ ना दे एआइपीएमटी की परीक्षा

- परीक्षा शुरू होने का समय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने का एक ही हैं समय
संवाददाता, पटना
ऑल इंडिया प्री मेडिकल प्री डेंटल एंट्रांस टेस्ट (एआइपीएमटी) की परीक्षा 25 जुलाई को सुबह 10.30 बजे से 1.30 बजे तक आयोजित की जायेगी.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी पटना और मुजफ्फरपुर का दौरा 25 जुलाई को हैं. ऐसे मे ंपरीक्षा सेंटर पर पहुंचना और परीक्षा में शामिल होना, यह दोनों ही एआइपीएमटी देने वाले अभ्यर्थी के लिए कठिन होगा. एक तरफ जहां परीक्षार्थी सीबीएसइ द्वारा जारी गाइड लाइन से परेशान हो रहें हैं. वहीं परीक्षा के दिन (25 जुलाई) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन से पटना के परीक्षार्थी के लिए परीक्षा केंद्र पर पहुंचना कठिन हो जायेगा. प्रधानमंत्री के आने के कारण बेली रोड के साथ गांधी मैदान का एरिया भी कई घंटे तक बंद कर दिया जायेगा. इससे परीक्षा केंद्र तक परीक्षार्थी को पैदल भी जाना पड़ सकता है .
- कई परीक्षा केंद्र तक पहुंचना होगा कठिन
प्रधानमंत्री का कार्यक्रम सुबह 10 बजे से लेकर दिन के 1.30 बजे तक हैं. इसी बीच एआइपीएमटी की परीक्षा भी आयोजित की जायेगी. ऐसे में उन परीक्षा केंद्र तक परीक्षार्थी को सवारी नहीं मिलेगी जिस ओर से प्रधानमंत्री का काफिला गुजरेगा. जिन अभ्यर्थी का परीक्षा केंद्र बेली रोड स्थिति स्कूलों में होगा तो उन्हें पैदल ही परीक्षा केंद्र तक पहुंचना पड़ सकता हैं. ऐसे में उन्हें दो से तीन घंटा अधिक समय लेकर चलना होगा.
- पटना में बनाये गये 39 परीक्षा केंद्र
देश भर में ली गयी इस परीक्षा के लिए पटना में 39 परीक्षा केंद्र बनाये गये हैं. पूरे बिहार में पटना के अलावा मुजफ्फरपुर और गया में एआइपीएमटी की परीक्षा आयोजित की जायेगी. मुजफ्फरपुर में 20 और गया में 15 परीक्षा केंद्र बनाये गये हैं. पूरे बिहार से लगभग 50 हजार परीक्षार्थी एआइपीएमटी की परीक्षा में शामिल होगें. इसमें पटना से लगभग 30 हजार परीक्षार्थी शामिल होंगे. एक पाली में ली गयी परीक्षा सुबह 10.30 बजे से 1.30 बजे तक चलेगी. परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी को प्रवेश पत्र के साथ दो फोटो लाना हैं. परीक्षा में उत्तर देने के लिए स्पेशल पेन सीबीएसइ द्वारा उपलब्ध करवाया जायेगा.

ये परीक्षा केंद्र तक पहुंचना होगा कठिन
- केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड, डीएवी बीएसइबी, चिल्ड्रेन हेवेन एकेडमी, बी डी पब्लिक स्कूल, क्राइस्ट चर्च, जीसस एंड मेरी, केंद्रीय विद्यालय दानापुर, खगौल

इस एरिया के अभ्यर्थी रखें ध्यान
1. अनिसाबाद, फुलवारी सरीफ, गर्दनीबाग एरिया - इन एरिया में रहने वाले परीक्षार्थी का परीक्षा केंद्र अगर गांधी मैदान या पटना सिटी की तरफ हो तो उन्हें चार से पांच घंटा पहले ही परीक्षा शुरू होने के पहले निकलना होगा. क्योंकि बेली रोड से गांधी मैदान तक सवारी नहीं मिलेगा तो उन्हें पैदल भी चलना पड़ सकता हैं
 2. पटना सिटी, गुलजारबाग - इन एरिया के अभ्यर्थी का परीक्षा केंद्र अगर दानापुर, खगौल आदि की तरफ हो तो अभ्यर्थी को परीक्षा शुरू होने के चार घंटे पहले ही सेंटर पर पहुंचना होगा. ऐसे अभ्यर्थी को गांधी मैदान एरिया की तरफ से बेली रोड होते हुए दानापुर नहीं जाना चाहिए. अभ्यर्थी को कंकड़बाग रूट होते हुए पटना रेलवे स्टेशन आकर बेली रोड का रूट पकड़ने से फायदा होगा.
3.  पहाड़ी, दिदारगंज, बंकाघाट, कच्ची दरगाह, जेठली, फतुहा  - इन एरिया के परीक्षार्थी को पटना आने के लिए ऑटो और बस का ही आप्सर हैं. ऐसे अभ्यर्थी को बेली रोड आने के लिए मीठापुर बस स्टैंड से पटना रेलवे स्टेशन होते हुए बेली रोड की तरफ आना चाहिए.
4. पटना से बाहर के अभ्यर्थी - पटना के बाहर रहने वाले अभ्यर्थी को एक दिन पहले ही पटना आ जाना चाहिए. परीक्षा केंद्र के पास ही रहने से फायदा होगा.

अभ्यर्थी रखें इन बातों का ख्याल
- बाहर से आने वाले अभ्यर्थी रखें समय का ख्याल
- एक दिन पहले ही पटना पहुंच जायें
- परीक्षा केंद्र के पास में ही रहने का इंतजाम करें
- परीक्षा केंद्र पर 7 बजे सुबह ही पहुंच जाना चाहिए
- परीक्षा केंद्र पर एडमिट कार्ड के अलावा कुछ भी साथ नहीं ले कर जाना हैं

परीक्षा केंद्र पर पहुंचने में रखें इन बातों का ख्याल
- परीक्षा शुरू होने के तीन घंटे पहले पहुंचने का रखें ख्याल
- एक दिन पहले ही परीक्षा केंद्र पर जाकर विजिट कर ले
- परीक्षा केंद्र पर जाने का रूट अच्छे से किसी अनुभवी से पूछे ले
- केंद्र तक जाने के लिए कौन सी सवारी जायेगी, इसका भी पता लगा ले

कोट
जिन अभ्यर्थी के परीक्षा केंद्र उन रास्तें में आते हैं जहां से प्रधानमंत्री का काफिला गुजरेगा. ऐसे अभ्यर्थी को सेंटर पर पहले पहुंच जाना चाहिए. क्योंकि इस बार देरी से सेंटर पर पहुंचने वाले अभ्यर्थी के लिए कोई छूट नहीं दिया जायेगा. इसके लिए सीबीएसइ ने पहले ही गाइड लाइन जारी कर दिया हैं.
जी जे गॉल्स्टॉन, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ 

Monday, July 20, 2015

2016 का नेशनल एनुअल सहोदया कांफ्रेंस पटना में

- साल में दो बार आयोजित होगा अब नेशनल एनुअल सहोदया कांफ्रेंस
- लाइफ स्कील्स एजुकेशन है 2015 का थीम
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेण्ड्री एजुकेशन की ओर से अब साल में दो बार सहोदया स्कूल कांप्लेक्स की एनूअल कांफ्रेंस आयोजित की जायेगी. पहली बार इसका आयोजन पटना में भी किया जायेगा. इसके लिए पाटलिपुत्र सहोदया को 2016 में यह मौका मिलेगा. स्कूलों में एक्टिविटी को बढावा देने के लिए आयोजित सहोदया स्कूल कांप्लेक्स की एनूअल कांफ्रेंस में तमाम स्कूल के प्रिंसिपल शामिल होते है. पहली बार कांफ्रेंस होने के पहले स्कूल के प्रिंसिपल को एक थीम दिया गया है. लाइफ स्कील्स एजूकेशन विषय पर हर स्कूल के प्रिंसिपल को कुछ टॉपिक दिये गये है. इस टॉपिक पर हर प्रिंसिपल को अपना प्रेंजेटेंशन देना होगा.
- तीन हजार शब्दों का होगा प्रेंजेंटेशन
बोर्ड के अनुसार प्रेंजेंटेशन में स्कूल प्रिंसिपल पेपर, ऑटिक्लस और केस स्टडी को माध्यम बना सकते है. इसमें शब्दों की संख्या 25 सौ से 3 तीन हजार शब्दों की सीमा हो सकती है. कांफ्रेंस होने के पहले ही स्कूल के प्रिंसिपल को अपना पेपर बोर्ड के पास भेजना होगा. पेपर भेजने के साथ अपना नाम और स्कूल का नाम भी भेजना होगा. इसके लिए बोर्ड के वेबसाइट पर ई-मेल भी किया जा सकता है.
- 2015 में रायपुर में होगा कांफ्रेंस
सीबीएसइ की ओर से 2014 में सहोदया स्कूल कांप्लेक्स की एनूअल कांफ्रेंस कोच्ची में किया गया. इस दौरान तमाम स्कूलों के प्रिंसिपल को शामिल हुए. वहीं 22वां सहोदया नेशनल एनूअल कांफ्रेंस 16, 17 और 18 दिसंबर को रायपुर में आयोजित किया जायेगा.  इसकी तैयारी भी सहोदया की ओर से शुरू कर दिया गया है.
- टॉपर होंगे सम्मानित
अब सहोदया की ओर से सीबीएसइ के 10वीं और 12वीं के नेशनल टॉपर को सम्मानित किया जायेगा. इसके अलावा प्रत्येक स्टेट टॉपर को भी स्टेट सहोदया ग्रुप की ओर से सम्मानित किया जायेगा. इसका निर्णय सहोदया की बैठक में लिया जा रहा हैं. पाटलिपुत्र सहोदया की ओर से इसी हफ्ते बैठक होने वाली हैं. बैठक में टॉपर को सम्मानित करने संबंधी बात पर निर्णय लिया जायेगा.

2016 के लिए यह दिया गया है थीम
- लाइफ स्कील्स स्प्रोच
- एडोलसेंट एजूकेशन
- अल्टरनेट पाथवे ऑफ लर्निग
- प्राब्लम सॉल्विग असेसमेंट (पीएसए)
- मल्टीपल मोडस ऑफ असेसमेंट
- को-स्कूलस्टिक एरियाज
- लाइफ स्कील्स
- होल ब्रेन थिकिंग

कोट
अब सहोदया कांप्लेक्स की एनूअल कांफ्रेंस साल में दो बार आयोजित किया जायेगा. इसमें साल भर की एक्टिविटी पर फोकस होगा. पहली बार कांफ्रेंस होने के पहले प्रिंसिपल को एक थीम पर कुछ टॉपिक दिये गये हैं. इस पर उन्हें अपना विचार रखना होगा. पाटलिपुत्र सहोदया को 2016 में कांफ्रेंस करने का मौका मिलेगा.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया कांप्लेक्स

टीचर्स के एक्सपेरिमेंट पर मिलेगा अवार्ड

- केंद्रीय विद्यालय संगठन बेस्ट टीचिंग के लिए देगा 20 अवार्ड
संवाददाता, पटना
टीचर्स करेंगे एक्सपेरिमेंट तो उन्हें मिलेगा अवार्ड. केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) की ओर से टीचर्स के बेस्ट टीचिंग को लेकर अवार्ड देने की घोषणा की गयी हैं. इसमें उन तमाम टीचर्स को शामिल किया जायेगा जो पिछले पांच सालों में अपने विषय से संबंधित कुछ अलग हट कर काम किया होगा. उनके काम से स्कूल में स्टडी को अलग रूप दिया गया हो. केवीएस की ओर से ऐसे टीचर्स से आवेदन मांगे गये हैं. इनसेंटिव अवार्ड 2015 नाम से दिया जाने वाले इस अवार्ड में प्रिंसिपल के साथ वाइस प्रिंसिपल को भी चुना गया हैं. इसमें अवार्ड के लिए हर विषय के टीचर्स आवेदन दे सकते हैं. केवीएस की ओर से 20 अवार्ड दिये जायेंगे. इसमें 17 अवार्ड जेनरल केटेगरी और तीन अवार्ड स्पेशल टीचर्स केटेगरी के लिए रखा गया हैं. इस अवार्ड सेरेमनी मे केवीएस का एक लाख 80 हजार का खर्च आयेगा.
- 31 जुलाई तक जमा करें आवेदन
केवीएस की ओर से हर केंद्रीय विद्यालय को अवार्ड के लिए परफार्मा भेजा है. इस परफर्मा भर कर अपने ही स्कूल में उसे जमा करना हैं. इसके लिए केवीएस ने 31 जुलाई तक का समय टीचर्स को दिया हैं. 20 अगस्त तक हर केंद्रीय विद्यालय की ओर से केवीएस को भेज देना हैं. अवार्ड देने की घोषणा दिसंबर में किया जायेगा. इसके बाद जिस केंद्रीय विद्यालय के टीचर्स का अवार्ड देने की घोषणा की जायेगी. टीचर्स के लिए अवार्ड सेरेमनी का आयोजन 15 दिसंबर को उसी केंद्रीय विद्यालय में किया जायेगा, जिस केंद्रीय विद्यालय के टीचर्स को चुना जायेगा.
- 10 प्वाइंट पर होगा चुनाव
इस अवार्ड के लिए वहीं टीचर्स आवेदन दे सकते हैं जिन्हें केंद्रीय विद्यालय में पांच सालों तक पढ़ाने का अनुभव हो. अवार्ड के लिए 10 प्वाइंट का वेटेज रखा गया हैं. इस दस प्वाइंट पर ही अवार्ड के लिए टीचर्स को चुना जायेगा. जिस टीचर्स को जितना अधिक प्वाइंट आयेगा, उनके नाम का सेलेक्शन पहले किया जायेगा. केवीएस के वेबसाइट पर से भी टीचर्स का परफार्मा लेकर भर सकते हैं.

ऐसे किया गया हैं अवार्ड का डिस्ट्रीब्यूशन
केटेगरी            -      नंबर ऑफ अवार्ड
प्रिंसिपल          -          1
वाइस प्रिंसिपल  -         1
पीजीटी टीचर्स   -         3
टीजीटी टीचर्स   -         3
पीआरटी टीचर्स   -      4
अदर्स टीचर्स       -       3
नॉन टीचिंग स्टॉफ  -     2

स्पेशल टीचर्स के लिए भी हैं अवार्ड
स्पेशल केटेगरी (डिसएबल) में प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल, टीचर्स  -  1 अवार्ड
स्पेशल केटेगरी में पीजीटी म्यूजिक टीचर्स  -   1 अवार्ड
स्पेशल केटेगरी में नॉन टीचिंग स्टॉफ  -   1 अवार्ड

ये मिलेगा अवार्ड के रूप में
1. कैश प्राइस   - 5 हजार रुपया
2. शॉल   -  एक हजार रुपये का

कोट
टीचर्स के लिए यह काफी बड़ा मौका केवीएस की ओर से दिया गया हैं. इसमें सेलेक्ट होने वाले टीचर्स नेशनल लेवल पर पहचान बना लेते हैं. इससे टीचर्स में एक्सपेरिमेंट करने के प्रति उत्साह बढ़ेगा.
एमएस चौहान, रीजनल डायरेक्टर, केवीएस पटना


25 जुलाई को नहीं होगा बिहार इंजीनियरिंग कॉलेजो ंके नामांकन के लिए काउंसिलिंग

- 25 जुलाई से 4 अगस्त तक के निर्धारित काउंसिलिंग की तिथि में किया गया बदलाव
- प्रधानमंत्री के आने की वजह से स्थगित हुआ 25 जुलाई की काउंसिलिंग
संवाददाता, पटना
बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (बीसीइसीइ) की ओर से लिया जाने वाला पीसीएम (इंजीनियरिंग) ग्रुप के नामांकन के लिए काउंसिलिंग की तिथि और सीट आवंटन  में बदलाव किया गया हैं. प्रथम और दूसरे दिन की काउंसिलिंग की तिथि को यथावत रखा गया हैं. प्रथम दिन और दूसरे दिन की काउंसिलिंग 23 और 24 जुलाई से शुरू हो रहा हैं. वहीं 25 जुलाई को काउंसिलिंग कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया है . 25 जुलाई की काउंसिलिंग 26 जुलाई को किया जायेगा. इसके बाद हर एक दिन की काउंसिलिंग की तिथि एक दिन आगे बढ़ा दिया गया हैं. इंजीनियरिंग कॉलेज के काउंसिलिंग के अलावा 25 जुलाई को पीसीबी (मेडिकल) ग्रुप की सेकेंड काउंसिलिंग के 25 जुलाई की तिथि को स्थगित कर दिया गया है.
- प्रधानमंत्री के आगमन से नहीं होगी काउंसिलिंग
बीसीइसीइ से मिली जानकारी के अनुसार चुकी बीसीइसीइ का ऑफिस एयरपोर्ट एरिया में हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने से वह एरिया काफी डिस्टर्ब करेगा. इस कारण 25 जुलाई की काउंसिलिंग को स्थगित कर दिया गया हैं. बीसीइसीइ के ओएसडी अनिल कुमार ने बताया कि हर दिन की काउंसिलिंग एक दिन आगे बढ़ा दिया गया हैं. बिहार इंजीनियरिंग कॉलेजों में नामांकन के लिए काउंसिंलिंग और सीट एलॉटमेंट 4 अगस्त तक किया जाना था. लेकिन अब यह 5 अगस्त को अंतिम दिन की काउंसिलिंग की जायेगी. 

कारपोरल पनिशमेंट दिया तो तीन साल के लिए स्कूल से बाहर

- आइसीएसइ बोर्ड ने निकाला कारपोरल पनिशमेंट संबंधी गाइड लाइन
- स्कूल के कोड ऑफ कंडक्ट में किया गया कारपोरल पनिशमेंट को शामिल
संवाददाता, पटना
स्कूल परिसर में किसी भी स्टूडेंट्स को फिजिकल, साइकोलॉजिकल और एजुकेशनल पनिशमेंट नहीं दिया जा सकता है. शिक्षा के अधिकार एक्ट 2009 के तहत अगर किसी स्कूल में स्टूडेंट्स के साथ कारपोरल पनिशमेंट की शिकायत आयेगी तो इसके लिए संबंधित टीचर के साथ स्कूल के प्रिंसिपल को भी दोषी माना जायेगा. काउंसिल फॉर दी इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (आइसीएसइ) ने कारपोरल पनिशमेंट पर कड़ा डिसीजन लेते हुए स्कूलों को निर्देश दिया है कि अगर किसी स्कूल में कारपोरल पनिशमेंट की शिकायत आती है तो ऐसे में स्कूल के टीचर को तीन साल तक स्कूल से बाहर किया जा सकता है. अगर जांच में स्कूल का प्रिंसिपल दोषी पाया गया तो ऐसे प्रिंसिपल को भी उनके पद से हटाया जा सकता है. बोर्ड की ओर से यह निर्देश तमाम स्कूलों को भेज दिया गया है. ज्ञात हो कि  मानव संसाधन मंत्रलय द्वारा तमाम बोर्ड को शिक्षा के अधिकार कानून को सख्त करने को कहा गया है. इसको लेकर आइसीएसइ बोर्ड ने टीचर और प्रिंसिपल को सजा देने का प्रावधान बनाया है.
-  सीबीएसइ ने लिया डिसीजन, तीन साल के लिए बाहर हुए मिस्टर जोशी
सीबीएसइ स्कूलों में आये दिन कारपोरल पनिशनमेंट संबंधित शिकायत आती रहती हैं. इसको लेकर सीबीएसइ ने पटना जोन के विधा निकेतन स्कूल के एक टीचर को तीन साल के लिए स्कूल से निकाल दिया हैं. टीचर पर आरोप था कि उसने बच्चे को काफी पीटा था. इससे बच्चे के हाथ की हड्डी टूट गयी थी. अभिभावकों ने सीबीएसइ से शिकायत किया. इसके बाद दो साल तक इस मामले की जांच हुई. अभी जून में टीचर मिस्टर जोशी को तीन साल के लिए निष्कासित किया गया हैं.
- तीन स्कूलों में दो स्कूल में बच्चे को दिया जाता है सजा
चिल्ड्रेन एब्यूज इन इंडिया 2007 के अनुसार देश भर में हर तीन स्कूलों में दो स्कूल में एक बच्चे को सजा दी जाती है. कारपोरल पनिशमेंट में प्रायमरी और उच्च क्लास के स्टूडेंट्स अधिक शामिल है. 6 राज्य में किये गये एक सर्वे के अनुसार जाति के अनुसार भी बच्चों को शारीरिक सजा दिया जाता है. इसके अलावा स्कूल में इकोनॉमिकल, सोशल और रिलिजियश के आधार पर भी  स्कूल में बच्चों को सजा दी जाती है. आइसीएसइ बोर्ड की ओर से स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि अगर किसी बच्चे को टीचर सजा दे रहे है तो ऐसी स्थिति मे बच्चे से खुल कर बोलने की सलाह दे. कई बार टीचर बच्चे को डरा धमका कर चुप रहने की का दबाव देते है. ऐसे में बच्च स्कूल जाने से कतराता है. ऐसे बच्चे पर स्कूल मैनेजमेंट पूरा ध्यान रखेगा.

ये होते है कारपोरल पनिशमेंट
- शारीरिक प्रताड़ना
- मानसिक प्रताड़ना
- बेइज्जती करना
- दबाव डालना
- आर्थिक दंड
- शैक्षिणिक प्रताड़ना

ऐसा हो स्कूल मैनेजमेंट का रोल
- स्कूल में हर टीचर को शिक्षा के अधिकार की जानकारी हो
- बोर्ड के गाइड लाइन को स्कूल मैनेजमेंट के हर स्टाफ को समझना है
- बच्चों के साथ स्कूल मैनेजमेंट का व्यवहार कैसा हो, इसकी जानकारी पूरी होनी चाहिए
- जेंडर, जाति, वर्ग, डिस्एब्लिटी आदि के नाम पर किसी भी बच्चे को सजा नहीं दिया जा सकता है
- स्कूल मैनेजमेंट के द्वारा किसी भी बच्चे को डरा, धमका, बेइज्जती करके और दबाव नहीं डाला जा सकता है
- बच्चे के साथ स्कूल मैनेजमेंट को ऐसा व्यवहार करना है जिससे बच्चे को स्कूल परिसर में सेफ महसूस हो

कोट
कारपोरल पनिशमेंट को लेकर बोर्ड की ओर से निर्देश दिया गया है. इसकी जानकारी तमाम टीचर्स को भी दे दी गयी है. वैसे यह नियम पहले से भी स्कूल में लागू था. लेकिन आरटीइ के तहत इस तरह के कड़े नियम पहली बार लागू किया गया है. इससे काफी फायदा होगा. हमने इसको लेकर स्कूल के तमाम टीचर को बता दिया गया है.
एम रिजवी, प्रिंसिपल, रोड वड हाई स्कूल

स्कूल में कारपोरल पनिशमेंट संबंधी जानकारी बोर्ड की ओर से हमारे पास आया है. इसकी तमाम जानकारी टीचर्स को दे दिया गया है. बोर्ड ने कारपोरल पनिशमेंट के बारे में विस्तार से बताया है. हमने इसकी भी जानकारी टीचर्स को दे दिया है. कारपोरल पनिशमेंट पूरी तरह से बंद हो इसके लिए स्कूल परिसर में कैमरे लगाये जायेंगे. वैसे लंच आवर और क्लास के समय मै खुद क्लास रूम में अचानक से आता जाता हूं.
ब्रदर सतीश, प्रिंसिपल, लोयेला हाई स्कूल



नियम हैं ताक पर, ऑटो के फ्रंट सीट पर भी बैठते हैं स्कूली बच्चे

- सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के नियम को स्कूल वाले रख रहे ताक पर
- 2011 में ही पटना ट्रैफिक पुलिस ने बनाया था स्कूली वाहनों पर नियम
संवाददाता, पटना
स्कूल की बस हो या स्कूली वैन हो या स्कूली ऑटो, हर सवारी में बच्चें आलू प्याज ठूस दिये जाते हैं. अगर स्कूली वाहनों को देख लिया जायें तो लगेगा कि कभी भी कोई बच्च ऑटो से गिर सकता है. ना तो स्पीड पर लगाम और ना ही बच्चे के सुरक्षा का ख्याल, बस स्कूल से बच्चे को घर छोड़ने और घर से स्कूल छोड़ने की होती हैं जल्दी. ऐसे मे हर बच्च का जान जोखिम से भरा होता है. स्कूली वाहनों को लेकर कई बार नियम भी बनाये गये, लेकिन इसका ना तो स्कूल वाले और ना ही ऑटो वाले और ना ही अभिभावक ही सजग हो रहें हैं.
- स्कूल वाले नहीं लेते जिम्मेवारी
पटना ट्रैफिक पुलिस के कई बार कहने के बावजूद स्कूल वाले स्कूल के किसी भी वाहन को लेकर जिम्मेवारी नहीं लेते है. स्कूल का कहना होता हैं कि बच्चे की जिम्मेवारी बस स्कूल कैंपस तक ही हैं, स्कूल कैंपस के बाहर बच्चे गये तो उसकी जिम्मेवारी अभिभावकों की होती है. वहीं ट्रैफिक पुलिस कई बार स्कूल को इसकी जिम्मेवारी लेने को कह चुकी हैं, लेकिन स्कूल हर बार पलड़ा झाड़ लेता है.
- 2011 में पटना ट्रैफिक पुलिस ने बनाया था नियम
ट्रैफिक पुलिस की ओर से 9 अप्रैल 2011 में स्कूली वाहन को लेकर नियम बनाया गया था. इसके तहत पटना मे 88 स्कूलों के नोटिस बोर्ड यह सूचना डाली गयी थी. इसमें कहा गया था कि स्टूडेंट्स जिस भी वाहन से स्कूल आते है, उस पर स्कूल को ध्यान देना चाहिए. हर छोटे ऑटो में तीन बच्चे से अधिक नहीं होना चाहिए. वहीं बड़े ऑटो में छह बच्चे ही होना चाहिए.
- किराया अधिक ना देना पड़े, इससे अभिभावक करते हैं लापरवाही
पटना के कई बड़े स्कूल के पास अपना निजी वाहन नहीं हैं. ऐसे में प्राइवेट ऑटो, वैन और रिक्शा का इस्तेमाल स्कूल आने और जाने के लिए किया जाता है. जिस एरिया के बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ते हैं, उस एरिया के बच्चे एक ही साथ स्कूल एक ही वाहन में जाते हैं. ऐसे में अभिभावक उसी वाहन में बच्चे को भेजना चाहते हैं. अगर किसी ऑटो में सीट फुल हो जाती है, तो भी अभिभावक जबरदस्ती उसी ऑटो में बच्चें को भेजना चाहते हैं. एक सीट पर दो बच्चे को ले जाने के लिए ऑटो वाले भी पैसे कम लेते हैं. नॉट्रेडम एकेडमी और लोयेला हाई स्कूल में ऑटो चला रहा ड्राइवर दिनेश ने बताया कि ऑटो में सारी सीटें भर जाने के बाद भी अभिभावक के जिद के आगे हमें बच्चे को लेना होता हैं. ऐसे में एक सीट पर दो बच्चे को हम बैठाते हैं. इससे किराया आधा हो जाता हैं. दो अभिभावकों के बीच किराये के पैसे बंट जाते हैं.
- पीछे की सीटों पर उघते रहते हैं बच्चे
कई बार ऑटो वाले पीछे के सीटों पर बच्चों को बैठा देते हैं. ऐसे में बच्चे पीछे की सीट पर बैठकर उघते रहते हैं. कई बार तो कई बच्चे सो तक जाते हैं. उनके पांव पर ही भारी बैग भी ऑटो वाले रख देते हैं. इतना ही नहीं अगर कोई बच्च शैतान होता हैं तो आपस में लड़ाई झगड़े तक होता रहता हैं, लेकिन ऑटो वाले अपनी धुन में रहते हैं. इसके अलावा आगे की सीटों पर ड्राइवर के दोनों ही बगल में बच्चे को बैठा दिया जाता हैं. आगे के सीटों पर बच्चे को बैठा तो लिया जाता हैं, लेकिन सुरक्षा को लेकर कुछ भी पकड़ने के लिए नहीं होता है, इससे बच्चे जान जोखिम में डाल कर आगे की सीट पर बैठे रहते हैं.


ये नियम बने से स्कूली वाहनों के लिए
स्कूली बस के लिए
- जितनी सीटें उतनी ही बच्चे को बैठा जायेगा
- बच्चे के स्कूली बैग को रखने के लिए जगह होना चाहिए
- ड्राइवर के बगल वाली सीटों पर बच्चे को नही बैठना हैं
- बस की गेट वहीं खुलेगा जहां पर स्टॉपेज होगा
- बस की स्पीड अधिकतम 20 किलोमीटर होना चाहिए

स्कूली वैन के लिए
- स्कूली वैन में दोनों ओर सीसे लगे होंगे
- बेंच देकर वैन में बच्चे को नहीं बैठाया जायेगा
- वैन के आगे के सीट पर बच्चे को नहीं बैठाना हैं
- स्कूल बैग वैन के अंदर ही रखा जायें. उसके लिए एक जगह फिक्स हेानी चाहिए

स्कूली ऑटो के लिए
- तीन सीट वाले ऑटो में तीन बच्चे को ही बैठाया जायेगा
- बड़े ऑटो में छह बच्चे से अधिक नहीं होना चाहिए
- सीट के एक तरफ से ही उतरने की सुविधा दी जायेगी. दूसरी ओर लोहा लगा रहेगा
- ड्राइवर के बगल में बच्चे नहीं बैठेंगे
- ऑटो की स्पीड लिमिट हो
- पीछे और आगे की सीटों पर बच्चों को नहीं बैठाया जा सकता हैं 

स्कूलों में आरटीआइ की सीटें खाली, 30 जुलाई से पहले लें नामांकन

- शिक्षा के अधिकार के तहत 308 में मात्र 49 प्राइवेट स्कूलों में ही हुआ नामांकन
- 30 जुलाई तक है नामांकन की अंतिम तिथि
संवाददाता, पटना
नये सत्र की पढ़ाई तमाम स्कूलों में शुरू हो चुकी हैं. लेकिन अभी भी शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन लिये जा रहे हैं. ऐसे अभिभावक जिन्हें अपने बच्चे का नामांकन प्राइवेट स्कूल में आरटीइ ( राइट टू एजुकेशन) करवाना हैं, तो वो उन स्कूलों में नामांकन के लिए जा सकते हैं जहां पर अभी नामांकन लिये जा रहें हैं. सर्व शिक्षा अभियान के तहत पटना जिला के ऐसे 308 स्कूलों का लिस्ट जारी किया गया हैं जहां पर आरटीइ या शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन लिये जायेंगे. ये वो स्कूल हैं जो बिहार सरकार से रजिस्टर्ड हैं और सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड के सिलेबस को फॉलो कर रहें हैं. इन स्कूलों को 30 जुलाई तक का समय दिया हैं. इस बीच स्कूलों में नामांकन ले लेने हैं.
- 308 में 50 स्कूलों ने ही दिया नामांकन की सूचना
शिक्षा के अधिकार के तहत 308 स्कूलों का रजिस्ट्रेशन अब तक किया गया हैं. इसमें से मात्र 50 स्कूलों ने ही अब तक नामांकन लेने की सूचना विभाग को दिया है. नामांकन कितना हुआ हैं. किस स्कूल में शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन की क्या सूची हैं. इसकी भी जानकारी स्कूलों ने अभी तक दिया हैं. अब विभाग की ओर से 30 जुलाई अंतिम तिथि निर्धारित की गयी हैं. इस बीच तमाम स्कूलों को नामांकन संबंधित सारी जानकारी विभाग को उपलब्ध करवानी हैं.
- 12640 बच्चों में 3080 बच्चे का होगा नामांकन
आरटीइ के तहत हर स्कूलों का कुल सीट का 25 फीसदी सीटों पर आरटीइ के तहत नामांकन लेना हैं. अगर एक सेक्शन में 40 बच्चे में 25 परसेंट की बात करें तो 10 बच्चे का नामांकन लेना हैं. ऐसे में 308 स्कूलों की बात करें तो लगभग 12,640 बच्चे का नामांकन क्लास वन के लिए लिया गया. इसमें से शिक्षा के अधिकार के तहत 3080 बच्चे का नामांकन लेना चाहिए. लेकिन विभाग के पास अभी किसी भी प्राइवेट स्कूलों नामांकन संबंधित कोई डाटा विभाग को उपलब्ध नहीं करवाया हैं. विभाग को स्कूलों यह भी नहीं बताते हैं कि स्कूल में कितने बच्चे क्लास वन में पढ़ रहें हैं और आरटीइ के तहत कितने बच्चे के लिए सीटें स्कूल में उपलब्ध हैं.
2014-15 सत्र में 690 बच्चों का ही हुआ था नामांकन
 शिक्षा के अधिकार के तहत रजिस्ट्रेशन तो हो गया, लेकिन नामांकन लेने में प्राइवेट स्कूल अभी भी नजर अंदाज किये हुए हैं.   2014-15 सत्र में मात्र 49 स्कूलों ने आरटीइ के तहत नामांकन लिया. 2014-15 सत्र में मात्र 168 स्कूलों का ही रजिस्ट्रेशन किया गया था. 168 स्कूलों में से ही 49 स्कूलों ने 2014-15 सत्र में शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन लिया. इसमें से 119 स्कूलों ने नामांकन नहीं लिया. इसके बाद जनवरी 2015 से जुलाई 2015 के बीच 140 स्कूलों का रजिस्ट्रेशन बिहार सरकार की ओर से किया गया. रजिस्ट्रेशन तो इन स्कूलों को मिल गया, लेकिन सत्र बीत जाने के बावजूद इन स्कूलों ने नामांकन नहीं लिया. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिन स्कूलों को रजिस्ट्रेशन किया गया हैं, उन्हें सत्र के शुरुआत में ही नामांकन लेने को कह दिया गया था.
इन स्कूलों को मिला परमिशन, ले सकते हैं  यहां पर नामांकन
- सरस्वती विद्या मंदिर, बलदेव सहाय पथ, कदमकुंआ
- एस किड्स कांवेंट हाई स्कूल, एलआइसी कॉलोनी
- प्रयास भारती विद्यालय, सी-83, कृष्णा अपार्टमेंट, बोरिंग रोड
- ग्रीन फिल्ड कांवेंट स्कूल, केशरीनगर, पटना
- प्रेमा लोक मिशन, कंकड़बाग
- लॉर्ड जीजस स्कूल, महेशपुर, थाना मेंहदी गंज, पटना सिटी
- सेंट पॉल्स हाई स्कूल, फेयर फिल्ड कॉलोनी, दीघा
- सेंट मेरी एकेडमी, आशियाना नगर
- न्यू दिल्ली पब्लिक स्कूल, एसके पुरी
- इशान इंटरनेशनल गल्र्स स्कूल, बेली रोड
- चिल्ड्रेन हेवेन स्कूल, टेलीग्राफ कॉलोनी, किदवईपुरी
- स्कोलर अबोड, शंकर कॉलोनी, अनिसाबाद
- पीजेएम पब्लिक स्कूल, गुलजारबाग, आलमगंज
- न्यू एरा पब्लिक स्कूल, एमआइजी 237, लोहिया नगर, कंकड़बाग
- शिवम पब्लिक स्कूल, मीठापुर
- प्रारंभिका,  एसके पुरी
- कृष्णा पाटलिपुत्र गल्र्स स्कूल, पाटलिपुत्र कॉलोनी
- होली मिशन स्कूल, रोड नं-14, राजीव नगर
- जिसस एंड मेरी स्कूल, मनेर दानापुर
- सुदर्शन पब्लिक स्कूल, आइएएस कॉलोनी, न्यू बेली रोड, दानापुर
- मांटेसरी स्कूल, गंगा बालकेश्वर भवन, यारपुर

शिक्षा के अधिकार के तहत अब तक हुआ नामांकन
सत्र           -        कुल नामांकन
2011-12   -        319
2012-13   -        329
2013-14   -        700
2014-15    -       690

कोट
प्राइवेट स्कूल शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन लेने में काफी आना कानी करते है. स्कूलों को कई बार सूचना भेजी गयी है कि शिक्षा के तहत नामांकन लें, लेकिन स्कूलों ने अभी तक रिपोर्ट नहीं भेजा हैं. अभी 30 जुलाई तक का समय स्कूलों को दिया गया है. इस बीच स्कूलों को नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर लेनी हैं. जिन स्कूलों को जनवरी से जुलाई के बीच रजिस्ट्रेशन किया गया हैं. उन स्कूलों में मात्र 50 स्कूलों ने ही अभी तक नामांकन लेने की सूचना दी है. लेकिन कोई रिपोर्ट नहीं दिया है.
 राम सागर सिंह, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान 

Sunday, July 19, 2015

सीबीएसइ के एक्सप्रेशन सीरीज में पटना से चुने गये दो स्टूडेंट्स

 पटना
अपने एक्सप्रेशन को दूसरे तक पहुंचाना भी एक कला हैं. माध्यम कोई भी हो, लेकिन जो अपना मैसेज दूसरों तक पहुंचा देता हैं, वहीं कलाकार होता हैं. सीबीएसइ द्वारा स्टूडेंट्स के इस टैलेंट को जानने के लिए हर साल एक्सप्रेशन सीरीज का आयोजन किया जाता है . 10 और 11 जुलाई को इसका आयोजन देश भर के स्कूलों में किया गया था. इस एक्सप्रेशन सीरीज में देश भरसे 108 स्टूडेंट्स को चुना गया हैं. इसमें बिहार से दो स्टूडेंट्स ने भी अपना नाम दर्ज करवाया हैं. लोयेला हाई स्कूल का स्टूडेंट निहाल श्रेष्ठ ने क्लास वन से पांचवी तक में अपना जगह बनाया हैं. देश भर के 36 सफल स्टूडेंट्स में निहाल का चयन किया गया हैं. वहीं नॉट्रेडेम एकेडमी की प्राची अरूनिमा को क्लास छठी से आठवीं तक में चुना गया हैं. प्राची का चयन देश भर से चुने गये 11 सफल स्टूडेंट्स के बीच हुआ हैं.  

30 से 40 सेकेंड तक होगी एक अभ्यर्थी की जांच

- सीबीएसइ ने विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हर स्कूलों को दी जानकारी
- लोकल थाने से स्कूलों को लेनी हैं मदद
संवाददाता, पटना
इस बार ऑल इंडिया प्री मेडिकल प्री डेंटल एंट्रांस टेस्ट (एआइपीएमटी) की परीक्षा देने वाले एक अभ्यर्थी को 30 से 40 सेकेंड तक परीक्षा के पहले जांच घेरे में रहना होगा. मेंटर डिटेक्टर से जांच के बाद कान, आंख पर लगे चश्मे, बाल आदि की भी जांच होगी. यह निर्देश सीबीएसइ ने विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पटना के तमाम परीक्षा केंद्र को शुक्रवार को दिया हैं. अपने निर्देश में सीबीएसइ ने कहा हैं कि जिस तरह से इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पैसेंजर की समानों के साथ पूरी जांच होती हैं, उसी तरह से एआइपीएमटी की परीक्षा में अभ्यर्थी की जांच की जायेगी. इसके लिए परीक्षा केंद्र को अपने स्तर से भी तैयारी करनी होगी. तमाम परीक्षा केंद्र पर जांच संबंधी कोई भी कमी नहीं होनी चाहिए.
- लोकल थाने की ले मदद, पकड़ में आयें तो तुरंत परीक्षा से बेदखल करें अभ्यर्थी को
सीबीएसइ के एआइपीएमटी विंग के माध्यम से पटना के हर परीक्षा केंद्र से लोकल थाने की मदद लेने को कहा गया है . पुलिस बल के साथ मेंटर डिटेक्टर भी हर परीक्षा केंद्र पर लगाये जायेंगे. सीबीएसइ ने स्पष्ट कर दिया है कि जिस भी परीक्षा केंद्र पर परीक्षा संबंधित कोई चूक होती हैं तो ऐसे में उस केंद्र पर कार्रवाई भी होगी. सीबीएसइ के टॉल फ्री नंबर पर अगर किसी सेंटर के बारे में किसी तरह की सूचना दी जायेगी तो तुरंत उस स्कूल की जांच बोर्ड के द्वारा करवाया जायेगा. इसके अलावा अभ्यर्थी को लेकर भी सीबीएसइ ने कड़ा रूख का निर्देश जारी किया है. हर परीक्षा केंद्र के सुप्रीडेंटेंड को निर्देश दिया गया हैं कि जो भी अभ्यर्थी सीबीएसइ के बनाये नियम के अनुसार परीक्षा केंद्र पर ना आयें, उसे तुरंत परीक्षा से बाहर कर दिया जायें.

कोट
सीबीएसइ की ओर से तमाम परीक्षा केंद्र को विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से निर्देश दिये जा रहे हैं. परीक्षा के पहले और परीक्षा के दौरान किन-किन चीजों का ध्यान रखना हैं, इसकी जानकारी दी जा रही हैं. परीक्षा केंद्र पर किसी तरह की गड़बड़ी होने पर परीक्षा केंद्र पर भी कार्रवाई इस बार सीबीएसइ करेगा. इस कारण अभी से कदचार मुक्त परीक्षा को लेकर निर्देश जारी की जा रही हैं.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ पटना

क्लास वन में ही एफिलिएटेड स्कूल में करवाये नामांकन

- सीबीएसइ ने निकाला सकूर्लर
- नॉन एफिलिएटेड स्कूल के बच्चे का नामांकन नहीं होगा एफिलिएटेड स्कूल में
 पटना
अब सोच समझ कर बच्चे का नामांकन स्कूल में अभिभावक करवायें. क्लास वन में नामांकन लेने के समय ही यह देख ले कि स्कूल सीबीएसइ से एफिलिएटेड हैं या नहीं. अगर सीबीएसइ ने मान्यता प्राप्त स्कूल होगा तभी सीनियर क्लासेज (9वीं में) में नामांकन स्टूडेंट्स का हो पायेगा. सीबीएसइ ने गुरुवार को एक सकूर्लर जारी किया हैं. इस सकूर्लर के अनुसार किसी भी स्टूडेंट्स का नामांकन 9वीं में तभी लिया जायेगा, जब वह स्टूडेंट एफिलिएटेड स्कूल से उस स्कूल में आयें हों. अगर स्टूडेंट क्लास वन से 8वीं तक नॉन एफिलिएटेड स्कूल में नामांकित करवाये होंगे तो ऐसे में स्टूडेंट को नामांकन मान्यता प्राप्त किसी भी सीबीएसइ स्कूल में अब नहीं होगा.
-  40 से 50 हजार करते हैं हर साल अप्लाई
क्लास वन में नामांकन के लिए हर साल पटना शहर के स्कूलों में हजारों की संख्या में आवेदन दिये जाते हैं. लेकिन नामांकन मात्र पांच से छह हजार स्टूडेंट्स का ही हो पाता है. ऐसे में बांकी बचे हुए बच्चे का नामांकन प्ले स्कूल या नॉन एफिलिएटेड स्कूलों ही हो पाता है. सीबीएसइ द्वारा ना तो नये स्कूलों को एफिलिएशन दिया जा रहा हैं और ना ही स्कूलों में क्लास वन या दूसरे क्लास में सेक्शन की संख्या ही बढ़ायी जा रही हैं. ऐसे में काफी बड़ी संख्या में हर साल बच्चे नामांकन नहीं ले पाते हैं.
- कई सालों से नहीं मिला एफिलिएशन
कई स्कूल सीबीएसइ से एफिलिएशन लेने के कतार में खड़े हैं. इन स्कूलों ने सीबीएसइ के पास तीन साल पहले ही अप्लाई भी कर दिया है. 7वीं में पढ़ रहें स्टूडेंट्स अब 9वीं क्लास में भी जा चुके हैं. एफिलिएशन के लिए स्कूलों ने मोटी रकम भी फी तौर पर सीबीएसइ को दिया हैं. लेकिन सीबीएसइ ने अभी तक इन स्कूलों की जांच तक नहीं करवायी है. ऐसे में इन स्कूलों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स का भविष्य अधर में लटक जायेगा. क्योंकि इन स्कूलों के स्टूडेंट्स सीबीएसइ के 9वीं के रजिस्ट्रेशन में शामिल नहीं हो पायेंगे. और इससे 2017 के 10वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल नहीं हो पायेंगे.

अभिभावकों की परेशानी
- अभिभावको के पास आप्सन ही नहीं होता हैं
- एफिलिएटेड स्कूल में नामांकन नहीं होने के बाद अभिभावक जानते हुए नॉन एफिलिएटेड स्कूल में नामांकन करवाते है
- हर साल 40 से 50 हजार स्टूडेंट्स का नामांकन के लिए अप्लाई क्लास वन में सिर्फ पटना शहर में होता हैं
- अभिभावक गलत स्कूलों के झांसे में आ जाते हैं
- स्कूल इसका फायदा उठा कर अभिभावकों से मोटी रकम भी वसूलता हैं
- फी भी जरूरत से अधिक अभिभावकों को देना होता है

स्कूलों की दिक्कतें
- सीबीएसइ एफिलिएशन देने में काफी देरी करता हैं
- अप्लाई के बावजूद समय पर नहीं मिलता एफिलिएशन
- हर साल स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ने के बावजूद स्कूल नामांकन बस लिमिट सीटों पर ही ले पाता हैं
- सीटों की संख्या स्कूल सीबीएसइ के आदेश के बिना नहीं बढ़ा सकते हैं
- सीबीएसइ के एफिलिएशन बाइलॉज के अनुसार ही स्कूल कुछ एक्स्ट्रा कर सकता हैं

सीबीएसइ की समस्या
- स्कूल एफिलिएशन लेकर सीबीएसइ के नाम का गलत यूज करता हैं
- एक बार एफिलिएशन लेने के बाद स्कूल मनमानी करने लगता हैं
- सीबीएसइ ने अब एफिलिएशन के नियम को कड़ा कर दिया हैं. इस कारण स्कूलों को एफिलिएशन नहीं मिल पाता हैं
- सीबीएसइ के नाम्स का स्कूल पालन नहीं करते हैं
- जिन स्कूलों को सीबीएसइ ने एफिलिएशन दिया हैं, उसका भी एफिलिएशन सीबीएसइ ले रहा हैं 

Friday, July 17, 2015

एआइपीएमटी के लिए जारी हुआ टॉल फ्री नंबर

 पटना
कदाचार मुक्त एआइपीएमटी की परीक्षा लेने के लिए सीबीएसइ ने टॉल फ्री नंबर जारी किया हैं. अभ्यर्थी, अभिभावक या आम आदमी में से किसी को भी कदाचार संबंधी किसी भी बात की जानकारी मिले तो बोर्ड के टॉल फ्री नंबर 1800118002 पर जानकारी दे सकता हैं. इसके अलावा बोर्ड की ओर से एक हेल्प डेस्क भी बनाया गया हैं. इस हेल्प डेस्क पर फोन कर अभ्यर्थी परीक्षा संबंधी कोई भी जानकारी ले सकते हैं. हेल्प डेस्क का नंबर 011-22041807 और 22041808 बोर्ड द्वारा जारी किया गया हैं. सीबीएसइ ने तमाम लोगों से   एआइपीएमटी की परीक्षा लेने में सहयोग देने की अपील किया हैं. ज्ञात हो कि एआइपीएमटी की परीक्षा 25 जुलाई को देश भर में आयोजित किया जायेगा. देश भर से छह लाख अभ्यर्थी इस परीखा

आंसर कॉपी पर फोटोग्राफ

- आइसीएसइ बोर्ड के स्टूडेंट्स की फोटो अब लगेगी आंसर कॉपी पर
संवाददाता, पटना
अभी तक एडमिट कार्ड और मार्क्‍स सीट पर ही स्टूडेंट्स के फोटो ग्राफ होते थे. लेकिन अब यह फोटोग्राफ आंसर कॉपी पर भी नजर आयेगा. पहली बार यह पहल आइसीएसइ बोर्ड की ओर से शुरू किया जा रहा है. इसको लेकर अभी से बोर्ड ने स्कूलों को निर्देश देना शुरू कर दिया है. 2016 सत्र की परीक्षा में इसे लागू किया जायेगा. फिलहाल इसे 10वीं और 12वीं के बोर्ड की परीक्षा में शुरू किया जायेगा. बोर्ड की परीक्षा में सक्सेस होने के बाद आइसीएसइ बोर्ड के स्कूलों में स्कूल लेवल की परीक्षा में भी इसे शुरू किया जायेगा. स्कूल लेवल पर भी अब आंसर कॉपी में स्टूडेंट्स की फोटो ग्राफ लगाया जायेगा.
- फार्म भराने के साथ शुरू होगी प्रक्रिया
आंसर कॉपी में स्टूडेंट्स के फोटो ग्राफ की प्रक्रिया बोर्ड द्वारा अगस्त से शुरू कर दिया जायेगा. जो भी छात्र बोर्ड के लिए रजिस्ट्रेशन करवायेंगे. उनके फोटो ग्राफ रजिस्ट्रेशन के समय में ही ले लिया जायेगा. रजिस्ट्रेशन के बाद स्टूडेंट्स के एडमिट कार्ड में वही फोटो लगे रहेंगे जो रजिस्ट्रेशन के समय दिया जायेगा. क्योंकि एडमिट कार्ड और आंसर कॉपी पर अब एक जैसे फोटो ग्राफ होंगे. स्टूडेंट्स को परीक्षा के दौरान मिलने वाले आंसर कॉपी अब फोटो के साथ मिलेगा.
- अब नहीं होगा आंसर कॉपी में अंतर
अभी तक आइसीएसइ बोर्ड के आंसर कॉपी में स्टूडेंट्स के नाम और एड्रेस को हटा दिया जाता था. लेकिन अब स्टूडेंट की फोटो लगी होगी. इससे आंसर कॉपी में किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होगी. बोर्ड की माने तो एडमिट कार्ड, मार्क्‍स सीट और आंसर कॉपी में एक जैसा ही फोटो होगा.

आंसर कॉपी में फोटो होने से मिलने वाले लाभ
- स्टूडेंट्स के आंसर कॉपी इधर उधर नहीं होगा
- टीचर्स यह समझ पायेंगे कि कॉपी लड़का का है या लड़की का
- टीचर के लिए कॉपी जांचना आसान हो जायेगा
- आंसर कॉपी के रिइवैल्यूशन के समय खोजना आसान होगा

आंसर कॉपी में फोटो होने से होने वाले नुकसान
- कौन सा आंसर कॉपी किस स्टूडेंट्स का है यह पता चल जायेगा
- शिक्षक भेदभाव कर सकते है
- अभी तक कॉपी के बारे में गुप्त रखा जा रहा था कि कॉपी कहां से किस सेंटर से आया है, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पायेगा
- कहां का और किस स्कूल का कॉपी है यह जानने से धां

कोट
हां बोर्ड की ओर से यह सूचना आयी है. रजिस्ट्रेशन के साथ इसको लेकर प्रक्रिया शुरू होगी. अभी तक एडमिट कार्ड और मार्क्‍स सीट पर ही स्टूडेंट्स के फोटोग्राफ लगाये जाता था. लेकिन अब आंसर कॉपी में भी फोटो लगेगे.
जी जे रोजेरियो, डायरेक्टर,  डॉन बास्को एकेडमी

कम एटेडेंस के नाम पर स्कूल लेता हैं चाजर्

- सीबीएसइ के पास आये कई केस
- स्कूलों को नोटिस भेजने की सीबीएसइ कर रहा तैयारी
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ के अनुमति के बिना किसी भी तरह के चार्ज स्टूडेंट्स से नहीं लिया जा सकता हैं. अगर कोई स्कूल इस तरह के चार्ज लेता हैं तो इसकी शिकायत को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता हैं. सीबीएसइ ने ऐसे कई स्कूलों को नोटिस देने की तैयारी कर रहा हैं, जिसमें स्कूलों ने स्टूडेंट्स से एटेंडेंस कम होने पर चाज्रेज लिये हैं. सीबीएसइ के अनुसार 2015 की बोर्ड परीक्षा में कई स्कूलों ने स्टूडेंट्स से पैसे लेकर परीक्षा फार्म भरवाने की अनुमति दे दिया था. स्टूडेंट्स ने क्लास भी नहीं किया और परीक्षा में भी शामिल हो गये.
- अभिभावको के शिकायत पर सीबीएसइ ने लिया एक्शन
सीबीएसइ के पास पटना के लगभग 1200 अभिभावकों ने इसकी शिकायत की हैं. शिकायत में सीबीएसइ को अभिभावकों ने बताया है कि  कम एटेंडेंस पर स्कूल ने मोटी रकम लिया और परीक्षा फार्म भरा दिया गया है. जो स्टूडेंट्स मोटी रकम देने में अक्षम नहीं थे, उन्हें परीक्षा फार्म नहीं भरने दिया गया है. ऐसे में स्टूडेंट बोर्ड परीक्षा देने से वंचित हो गये. अभिभावको की आयी शिकायत के अनुसार कई केस में स्कूलों ने मोटी रकम भी ले लिया और परीक्षा फार्म भी नहीं भरने दिया.
- 75 फीसदी एटेंडेंस जरूरी
सीबीएसइ के एकेडेमिक रूल्स के अनुसार हर स्टूडेंट्स को 75 फीसदी एटेंडेंस जरूरी होता हैं. तभी स्टूडेंट्स परीक्षा फार्म भर सकते है. अगर किसी स्टूडेंट के 75 फीसदी एटेंडेंस पूरा नहीं हो रहा है तो ऐसे में मात्र 15 फीसदी एटेंडेंस की ही माफी होगी. 15 फीसदी एटेंडेंस की माफी भी मेडिकल के संबंध में ही होगा. स्कूल में स्टूडेंट्स पूरा क्लास करें, इसके लिए सीबीएसइ ने 75 फीसदी एटेंडेंस को कंप्लसरी किया था.
- राहुल के मामले में सीबीएसइ ने लिया एक्शन
कम एटेंडेंस के मामले में सीबीएसइ का यह एक्शन राहुल सिंह के मामले में हुआ हैं. राहुल सिंह डीएवी मुंगेर का स्टूडेंट हैं. राहुल सिंह 2014 मार्च में 10वी बोर्ड की परीक्षा दिया. इससे पहले राहुल सिंह से स्कूल ने कम एटेंडेंस के नाम पर पांच सौ रुपये भी ले लिया. लेकिन परीक्षा के बाद ना तो मार्क्‍स सीट दिया और ना ही माइग्रेशन सर्टिफिकेट ही दिया. इससे राहुल का पूरा साल बर्बाद हो गय. 11वीं में नामांकन नहीं ले पाया. जब राहुल सीबीएसइ के पास अपनी शिकायत की तो अब सीबीएसइ स्कूल को नोटिस भेजा हैं.

कोट
किसी भी क्लास के लिए 75 फीसदी एटेंडेंस जरूरी हैं. क्योंकि बिना एटेंडेंस के क्लास के फाइनल परीक्षा में भी बैठने का एलाउ नहीं होता है. एटेंडेंस को पूरा करने के लिए स्कूल किसी तरह का चार्ज नहीं ले सकता है. अगर कोई स्टूडेंट का एटेंडेंस पूरा नहीं होता हैं तो इसकी जानकारी सीबीएसइ के पास सीधे जाती हैं. क्योंकि ऐसे स्टूडेंट्स फार्म नहीं भर सकते हैं.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर सीबीएसइ पटना

एआइपीएमटी देंगे या अभ्यर्थी को मिलेगी सजा

- सीबीएसइ के बेतुके नियम एआइपीएमटी को अभ्यर्थी के लिए बना रहा सजा
- एलक्ष्डी टॉर्च से कान की होगी जांच तो थाने वाले करेंगे मेंटर डिटेक्टर से बॉडी की जांच
संवाददाता, पटना
एआइपीएमटी देने वाले अभ्यर्थी ने परीक्षा की तैयारी के साथ अपने लिए ड्रेस बनवाने की भी तैयारी शुरू कर दी हैं. क्या करें सीबीएसइ के नियम इतने सख्त हैं कि ऐसा कोई ड्रेस किसी के पास होगा नहीं जो पहन कर परीक्षा देने जाया जा सके. सीबीएसइ ने जो ड्रेस कोड डिसाइड किया हैं, उसके लिए हर अभ्यर्थी को ड्रेस की खरीदने के अलावा कोई चारा नहीं हैं. ऑल इंडिया प्री मेडिकल प्री डेंटल टेस्ट (एआइपीएमटी) को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीएसइ को कैंसिल क्या करना पड़ा, हर दिन बोर्ड नये नियम अभ्यर्थी के उपर थोप रहा हैं. ये सारे नियम ऐसे बनाये जा रहा हैं जो अभ्यर्थी के लिए सजा से कम नहीं लग रहा हैं. परीक्षा से पहले से लेकर परीक्षा देने तक अभ्यर्थी के साथ ऐसा सलूक किया जायेगा, जिससे परीक्षा भय और डर के साये में संपन्न होगा. जहां सीबीएसइ खुला और पीसफुल माहौल देने पर विश्वास करती हैं, वहां एआइपीएमटी में शामिल होना सजा के बराबर कर दिया हैं.

सीबीएसइ के कुछ बेतुके नियम कायदें

1. एलक्ष्डी टॉर्च से होगी कान की जांच  - कान के अंदर अभ्यर्थी ने कोई ब्लूटूथ तो नहीं लगा रखा हैं, इसके लिए तमाम परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी के कान को एलक्ष्डी टार्च से जांचा जायेगा. इसके लिए सीबीएसइ ने परीक्षा केंद्र के कंट्रोलर से एलक्ष्डी टॉर्च खरीदने का निर्देश हैं.
2. बड़े बटन वाले नहीं हो कुर्ता  - एआइपीएमटी देने वाले अभ्यर्थी को आधे बाजू वाले शर्ट पहनने होंगे. कुर्ता ऐसा जिसमें बड़े बटन ना लगी हो. शर्ट में ना तो कोई बैज और ना ही कोई पिन ही लगा हो.
3. सलवार के उपर हो सिंपल कुर्ता  - गल्र्स अभ्यर्थी को एकदम सिंपल कुर्ता पहन कर आने का निर्देश दिया गया हैं. सलवार के उपर बिना किसी भड़काउ वाले कुर्ता पहनना हैं. कुर्ता में बड़े साइज के बटन नहीं लगा होना चाहिए
4. जूता नहीं चप्पल है जरूरी - अभ्यर्थी को जूता पहन के आने पर पाबंदी लगायी गयी हैं. हर अभ्यर्थी को चप्पल ही पहनना हैं. ऐसा चप्पल जो खुला हो. इसमें पूरा पांव दिखता हो
5. कलाई घड़ी घर पर छोड़ कर आयें  - किसी भी तरह की घड़ी या कलाई घड़ी पर पाबंदी लगा दी गयी है.
6. अंगूठी के साथ चेन नहीं होगा एलाउ  - किसी भी तरह की अंगूठी अभ्यर्थी नहीं पहन का जा सकते हैं. इसके अलावा चेन, कंगन, झूमके, बैज, ताबीज पहन कर आने पर कार्रवाई की जायेगी
7. बेल्ट, टोपी और स्कार्फ की मनाही - बेल्ट लगा कर आने को मना किया गया है. इसके अलावा टोपी और स्कार्फ या स्टॉल भी लाने से मना किया गया हैं
8. पानी का बोतल पर पाबंदी - अभ्यर्थी अपने साथ ना तो खाने का कोई चीज ला सकते हैं और ना ही पानी का बोतल लाना हैं.
9. पेन या पेंसिल नहीं ला सकते - अभ्यर्थी को पेन या पेंसिल साथ में नहीं लाने का निर्देश दिया गया हैं. इसके अलावा स्केल, लेखन बोर्ड, रबर आदि भी नहीं लाया जा सकता हैं
10. मनी पर्स और हैंड बैग पर लगी पाबंदी - मनी पर्स और गल्र्स अभ्यर्थी के हैंड बैग लाने पर पाबंदी लगा दी गयी हैं.
11. तीन घंटे पहले ही आये सेंटर पर - परीक्षा भले 10.30 बजे से शुरू होगा, लेकिन तमाम अभ्यर्थी को 7.30 बजे सुबह में ही केंद्रों पर पहुंच जाना हैं.
12. बैंडेज ना लगा हो  - अगर किसी अभ्यर्थी के अंगुली या कहीं पर किसी चीज से कट गया हो तो, ऐसे अभ्यर्थी को परीक्षा नहीं देने दिया जायेगा. क्योंकि किसी भी मेडिकल बैंडेज लगे होने पर पाबंदी हैं
13. धूप चश्मा, हेयर पिन और बैंड पर पाबंदी  - अभ्यर्थी धूप चश्मा लगा कर नहीं आ सकते है . इसके अलावा गल्र्स अभ्यर्थी हेयर पिन और हेयर बैंक लगा कर नहीं आ सकती हैं. 

Thursday, July 16, 2015

12वीं कंपार्टमेंटल परीक्षा संपन्न, 40 फीसदी परीक्षार्थी रहें एबसेंट

- बिहार में आठ सेंटर और झारखंड में बनाये गये थे 10 सेंटर
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से 12वीं और 10वीं कंपार्टमेंटल परीक्षा गुरुवार को आयोजित किया गया. 12वीं कंपार्टमेंटल एक ही दिन लिया गया. वहीं 10वीं कंपार्टमेंटल की परीक्षा 16 से 27 जुलाई के बीच लिया जायेगा. सीबीएसइ की माने तो 12वीं कंपार्टमेंटल की परीक्षा में पटना जोन से  लगभग 13 हजार परीक्षार्थी ने परीक्षा फार्म भरा था. लेकिन 40 परसेंट परीक्षार्थी परीक्षा में एबसेंट पायें गये. वहीं 10वीं कंपार्टमेंटल की परीक्षा में 23 सौ परीक्षार्थी शामिल हुए हैं. परीक्षा सुबह 10.30 बजे से 1.30 बजे तक लिया गया. कंपार्टमेंटल परीक्षा के लिए पटना में आठ परीक्षा केंद्र बनाये गये थे. इसमें पटना स्थित चार केंद्रीय विद्यालय के अलावा लोयेला हाई स्कूल, आर्मी स्कूल, सेंट डॉमिनिक सोवियोज और सेंट कैरेंस हाई स्कूल, खगौल में बनाया गया था. वहीं झारखंड में रांची और बोकारो में चार-चार परीक्षा केंद्र और धनबाद में तीन परीक्षा केंद्र पर 10वीं और 12वीं के कंपार्टमेंटल परीक्षा का आयोजन किया गया. ज्ञात हो कि 12वीं कंपार्टमेंटल परीक्षा में वहीं स्टूडेंट्स शामिल होते हैं, जो 12वीं के एक विषय में फेल होते हैं. वहीं 10वीं कंपार्टमेंटल की परीक्षा में एक से अधिक कितने भी विषय में फेल होने पर परीक्षा में शामिल ह 

चार सेंटरों के माध्यम से दी जायेगी प्रिंसिपल और टीचर्स को ट्रेनिंग

- सीबीएसइ ने बनाया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
संवाददाता, पटना
स्कूल के प्रिंसिपल और टीचर्स को ट्रेनिंग स्कूल लेवल पर नहीं दिया जायेगा. और ना ही सीबीएसइ की ओर से कोई रिसोर्स पर्सन ही ट्रेंनिंग प्रोग्राम में शामिल होंगे. अब ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए सीबीएसइ ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को माध्यम बनाया हैं. देश भर में तीन जगहों पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की गयी हैं. इसी सेंटर के माध्यम से अब सारे ट्रेनिंग प्रोग्राम सीबीएसइ के द्वारा संचालित किये जायेंगे. गुड़गांव, पंचकुला, पुणो और कंकिंदा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना सीबीएसइ की ओर से किया गया हैं. अब किसी भी ट्रेनिंग प्रोग्राम को इस सेंटर से संचालित किया जायेगा. सीबीएसइ की ओर से इसकी पूरी जानकारी सीबीएसइ के एकेडेमिक वेबसाइट पर डाल दिया जाता हैं. सीबीएसइ के ज्वाइंट सेक्रेटरी डी टी सुदर्शन राव ने बताया कि  ट्रेनिंग प्रोग्राम को सही तरह से संचालित हो, इसके लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना किया गया हैं. अब सारे ट्रेनिंग प्रोग्राम इसी माध्यम से किया जायेगा. हर सेंटर के लिए हर स्टेट को बांट दिया गया हैं. बिहार में होने वाले तमाम ट्रेनिंग प्रोग्राम गुड़गांव 

मदरसा बोर्ड वस्तानिया और मौलवी का रिजल्ट घोषित, लड़कियों का रहा बेहतर रिजल्ट

- मौलवी में 90.28 फीसदी और वस्तानिया में 93 फीसदी छात्र हुए पास
- वस्तानिया में भागलपुर की हसीना खातून बनी स्टेट टॉपर और मौलवी में पुर्णिया के मो. अरमान को मिला प्रथम स्थान
संवाददाता, पटना
बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के वस्तानिया और मौलवी का रिजल्ट गुरुवार को घोषित कर दिया गया. वस्तानिया में जहां 93 फीसदी छात्र-छात्रओं को सफलता मिली है वहीं मौलवी में 90.28 फीसदी छात्र-छात्रओं को सफलता हासिल हुई है. मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुमताज शमशाद हुसैन ने रिजल्ट को बोर्ड के वेबसाइट 666.ु2ेीु.ू.्रल्ल  पर घोषित किया. अध्यक्ष मुमताज आलम ने बताया कि रिजल्ट को बेवसाइट पर डाल दिया गया हैं. अभ्यर्थी चार बजे शाम के बाद अपना रिजल्ट देख पायेंगे. उन्होंने बताया कि  इस बार छात्रओं का रिजल्ट छात्रों से अधिक अच्छा हुआ हैं. यहीं नहीं छात्रओं की संख्या भी मदरसा बोर्ड में बढ़ी हैं. यह हर साल के रिजल्ट में दिख जा रहा हैं. जहां छात्रओं ने टॉप टेन मेरिट लिस्ट में अपनी जगह बनायी हैं.  वस्तानिया के टॉप टेन में तीन छात्रओं ने अपनी जगह बनायी हैं. वहीं मौलवी में इस बार टॉप टेन में चार छात्रओं ने अपनी जगह बनायी हैं. वस्तानिया के रिजल्ट में इस बार स्टेट टॉपर भी छात्र ही रही है. मदरसा टूल ख्वादिया सादिया, नया टोला, भागलपुर की हसीना खातून (रॉल नंबर 02147) स्टेट टॉपर बनी हैं. वहीं मौलवी का स्टेट टॉपर मदरसा महमूदिया विशनपुर, परसरिया, टॉलीटोला पुर्णिया का मो. अरमान (रॉल नंबर 1733) को घोषित किया गया हैं. दिन में 12.30 बजे रिजल्ट की घोषणा के समय अध्यक्ष के अलावा बोर्ड के सचिव खुर्शीद आलम, एकेडेमिक हेड नरूल इस्लाम, रिजवान आदि मौजूद थे.
- अलग से जारी हुआ छात्रओं का मेरिट लिस्ट
छात्रओ के हर साल बेहतर रिजल्ट को देखते हुए इस बार मदरसा बोर्ड ने छात्रओं का अलग से प्रदेश भर का मेरिट लिस्ट जारी किया हैं. वस्तानिया और मौलवी के लिए इस चार तरह के मेरिट लिस्ट निकाला गया हैं. स्टेट मेरिट लिस्ट के अलावा छात्र और छात्रओं का अलग से भी मेरिट लिस्ट निकाला गया हैं. इसके अलावा नॉन मुस्लिम परीक्षार्थी का भी मेरिट लिस्ट अलग से निकाला गया हैं. मेरिट लिस्ट में इस बार परीक्षार्थी के विषय वार अंकों की भी जानकारी दी दी गयी हैं.
- जल्द जारी होगा एकेडेमिक कैलेंडर
मदरसा बोर्ड के सत्र को सही करने के लिए जल्द ही मदरसा बोर्ड की ओर से एकेडेमिक कैलेंडर जारी किया जायेंगा. इस बात की जानकारी बोर्ड अध्यक्ष शमशाद हुसैन ने दिया. श्री हुसैन ने कहा कि अगले सत्र से सेशन को पूरा सही किया जायेगा. सत्र देरी होने से रिजल्ट देरी से निकलता हैं, इस वजह से मदरसा बोर्ड के छात्रों को काफी नुकसान होता हैं. अब एकेडेमिक कैलेंडर के अनुसार ही सारी प्रक्रियाएं की जायेगी. एकेडेमिक कैंलेंडर बन कर तैयार है, बस फाइनल करके जारी किया जायेगा.
- प्रिंसिपल के साथ टीचर्स और स्टूडेंट्स की होगी काउंसिलिंग
बोर्ड अध्यक्ष शमशाद हुसैन ने बताया कि मदरसों में पढ़ाई की व्यवस्था को सही करने के लिए  प्रिंसिपल की काउंसिलिंग की जायेगी. इसके लिए मदरसों के प्रिंसिपल को बुलाया गया है. प्रिंसिपल की काउंसिलिंग के बाद टीचर्स और फिर समय-समय पर छात्रों की काउंसिलिंग की जायेगी. श्री शमशाद हुसैन ने कहा कि जब समय पर सिलेबस खत्म होगा तो फिर सत्र अपने आप ही सही हो जायेगा.

वस्तानिया का रिजल्ट
कुल विद्यार्थी की संख्या  - 126327
कुल पास की संख्या  - 117510 (93 फीसदी)
प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण छात्र  - 40119 (84.70 फीसदी)
द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण छात्र  - 3775  (7.98 फीसदी)
तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण छात्र  - 72  (0.15 फीसदी)
प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण छात्रएं - 66177 (83.80 फीसदी)
द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण छात्रएं - 7192 (9.10 फीसदी)
तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण छात्रएं -  1246 (1.58 फीसदी)

मौलवी का रिजल्ट
कुल विद्यार्थी की संख्या  - 35036
कुल पास की संख्या  - 31631 (90.28 फीसदी)
प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण छात्र  - 10359 (76.20 फीसदी)
द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण छात्र  - 1599  (11.76 फीसदी)
प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण छात्रएं - 15976 (74.50 फीसदी)
द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण छात्रएं - 3696 (17.23 फीसदी)

मौलवी का टॉप दस मेरिट लिस्ट
1. मो. अरमान, मदरसा महमूदिया, विशनपुर, परसारिया, पूर्णिया  कुल प्राप्तांक -  1063
2. अबूबाकर गुफरान, मदरसा अंजूमान इस्लामिया, खजांची हाट, पूर्णिया, कुल प्राप्तांक -  1049
3. फाताम खातून, मदरसा क्वासिमूल अलूम कुसमाहवा, पूर्वी चंपारण, कुल प्राप्तांक  - 1036
4. शगुफ्ता नज, मदरसा इस्लामिया कैथाटिकर, नारायणपुर, बांका, कुल प्राप्तांक  - 1026
5. सलमा प्रवीण, मदरसा फोकानिया बरगेला घाट, दरभंगा, कुल प्राप्तांक  - 1024
6. मो. फिरोज शादब, मदरसा मदनी बसाहिया शेख, शिवहर, कुल प्राप्तांक  -  1023
7. मो. मुबारक हुसैन, मदरसा डारूल होदा कथोटिया, कटिहार, कुल प्राप्तांक  -  1021
8. मो. मेहराज, मदरसा डारूल होदा कथोटिया, कटिहार, कुल प्राप्तांक -  1021
9. रफत शाहिद, मदरसा असाटूल अलूम, पूर्णिया, कुल प्राप्तांक  -  1020
10. मो. शादम आलम, मदरसा फलाहूल मुस्लिम, शिवहर, कुल प्राप्तांक - 10.20

वस्तानिया का मेरिट लिस्ट

वस्तानिया के
1. हसीना खातून, मदरसा ख्वादिया सादिया, नया टोला, भागलपुर, कुल प्राप्तांक  - 953
2. मो, आघज अनवर, मदरसा जामिया सिद्धिकी दागरवाहट, पूर्णिया, कुल प्राप्तांक -  949
3. सवा खानम, मदरसा इस्लामिया हतिम उल उलूम समराहन, पूर्वी चंपारण, कुल प्राप्तांक - 945
4. मो. दानिश मुस्तफा, मदरसा इस्लामिया महमुदिया, मुबारकपुर, सहरसा, कुल प्राप्तांक -  943
5. मो. मेराज, मदरसा मोहम्मदिया दियोधा, मधुबनी, कुल प्राप्तांक - 927
6. मो. वाहब आलम, मदरसा इस्लामिया हातिम उल उलूम समराहन, पूर्वी चंपारण, कुल प्राप्तांक - 918
7. रजि कमल, मदरसा फैज-इ-आम बारी फुलवारिया, सीतामढ़ी, कुल प्राप्तांक  -  914
8. मो. शाकिद नूर, मदरसा साघिरिया झलकी, कटिहार, कुल प्राप्तांक  -  908
9. नौशाब खानम, मदरसा इस्लामिया हतिम उल उलूम समराहन, पूर्वी चंपारण, कुल प्राप्तांक - 905
10. मो. जिलाउल्लाह, मदरसा हसमिया परसाही नवाब बाकर कोशी कोलोनी, सुपौल, कुल प्राप्तांक - 904

9वीं से 12वीं तक के स्टूडेंट्स नहीं शामिल होंगे इंटरनेशनल ओलंपियाड में

- जूनियर के बाद रिजनल और फिर होगा इंटरनेशनल लेवल मैथेमेटिकल ओलंपियाड
- स्कूल लेवल मैथेमेटिकल ओलंपियाड के लिए 1 अगस्त होगा एग्जाम
 पटना
ओलंपियाड में शामिल होना और सफल होना हर स्टूडेंट का सपना होता है. अधिक से अधिक स्टूडेंट्स का ओलंपियाड तक पहुंच हो. लेकिन अब यह सपना 9वीं से 12वीं तक के स्टूडेंट्स को बीच में ही छोड़ना पड़ेगा. 2015 से मैथेमेटिकल ओलंपियाड के नियम में चेंज कर दिया गया हैं. अब मैथेमेटिकल ओलंपियाड के इंटरनेशनल लेवल में 9वीं से 12वीं तक के स्टूडेंट्स शामिल नहीं हो पायेंगे. इसकी सूचना तमाम स्कूलों के पास भी भेज दिया गया हैं. केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) की ओर से आयोजित इस ओलंपियाड में सीबीएसइ, आइसीएसइ, नवोदय विद्यालय आदि के स्टूडेंट्स शामिल होते हैं.
- तीन फेज में लिया जायेगा मैथेमेटिकल ओलंपियाड
2015 से मैथेमेटिकल ओलंपियाड को थ्री फेज में लिया जायेगा. फस्र्ट फेज में जूनियर ओलंपियाड का आयोजन किया जायेगा. इसके बाद रिजनल लेवल या स्कूल लेवल ओलंपियाड का आयोजन होगा. अंतिम फेज इंटरनेशनल मैथेमेटिकल ओलंपियाड के लिए रखा गया हैं. जूनियर लेवल मैथेमेटिकल ओलंपियाड में 17 साल तक के स्टूडेंट्स शामिल होंगे. वहीं रिजनल लेवल मैथेमेटिकल ओलंपियाड के लिए जूनियर लेवल से 60 से 70 स्टूडेंट्स को चुना जायेगा. 60-70 सेलेक्ट स्टूडेंट्स में से टॉप 30 स्टूडेंट्स का चुनाव रिजनल लेवल पर किया जायेगा. इन स्टूडेंट्स को इंडियन नेशनल मैथेमेटिकल ओलंपियाड की ओर से ट्रेनिंग दी जायेगी. ये 30 स्टूडेंट्स नेशनल लेवल मैथेमेटिकल ओलंपियाड में शामिल होंगे.
- 9वीं से 12वीं तक के स्टूडेंट्स नहीं होंगे अब ओलंपियाड में शामिल
केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से निर्देश दिया गया है कि इंटरनेशनल लेवल मैथेमेटिकल ओलंपियाड में अब 9वीं से 12वीं तक के स्टूडेंट्स शामिल नहीं होंगे. अब स्कूल लेवल तक के मैथेमेटिकल ओलंपियाड में ही 9वीं और 10वीं के स्टूडेंट्स शामिल होंगे. जिन स्टूडेंट्स को जूनियर लेवल मैथेमेटिकल ओलंपियाड में 70 परसेंट तक मार्क्‍स आयेंगे, वहीं रिजनल या स्कूल लेवल मैथेमेटिकल ओलंपियाड में शामिल होगा.
- सेट्रेलाइज होगा क्वेशचन पेपर
केवीएस के अनुसार रिजनल या स्कूल लेवल ओलंपियाड के लिए सेट्रेलाइज क्वेशचन पेपर बनाया जायेगा. इसकी तैयारी अभी से शुरू कर दी गयी हैं. स्कूल लेवल मैथेमेटिकल ओलंपियाड के लिए 1 अगस्त को टेस्ट लिया जायेगा. सुबह 9 बजे से 12 बजे तक आयोजित की जायेगी.

स्कूल लेवल मैथेमेटिकल ओलंपियाड के लिए
- स्टूडेंट्स 9वीं या 10वीं के होने चाहिए.
- मैथ विषय में स्टूडेंट ने ए-वन या ए-टू ग्रेड पाया हो
जूनियर मैथेमेटिकल ओलंपियाड के लिए
- स्टूडेंट्स क्लास 9वीं या 10वीं के हों
- स्कूल लेवल ओलंपियाड में 70 फीसदी अंक लायें हों
- 10वीं में सारे विषयों को मिला कर ए-वन या ए-टू ग्रेड पाया हो
- कॉमन क्वेशचन पेपर बनाया जायेगा

88 सीबीएसइ और आइसीएसइ स्कूलों में 20 स्कूलों ने लिया राज्य सरकार से मान्यता

- 308 स्कूलों में 220 स्कूलों के बच्चे पढ़ रहें हैं नॉन एफिलिएटेड स्कूल में
- बांकी 80 स्कूल अभी हैं आरटीइ से बाहर
 पटना
शिक्षा का अधिकार कानून तो लागू हो गया, लेकिन अभी भी बच्चों के लिए दिल्ली दूर है. 2011 में लागू हुआ शिक्षा का अधिकार कानून अभी भी काफी स्कूलों तक नही पहुंच पाया हैं. पटना में अभी 88 स्कूल हैं जो सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं, लेकिन इसमें से मात्र 20 स्कूलों ही शिक्षा के अधिकार कानून के अंतर्गत आते है. इन 20 स्कूलों ने ही राज्य सरकार के सर्व शिक्षा अभियान के तहत रजिस्ट्रेशन करवाया है. सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार 88 स्कूलों मे 68 स्कूल अभी भी शिक्षा के अधिकार कानून से अपने को लग किये हुए हैं. आरटीआई एक्टिविस्ट अजय कुमार ने बताया कि अभी तक पटना जिला में 308 स्कूलों का रजिस्ट्रेशन किया गया हैं. इसमें मात्र 49 स्कूलों में ही शिक्षा का अधिकार कानून लागू हो पाया हैं.
- 220 नॉन एफिलिएटेड स्कूल में पढ़ रहे बच्चे
शिक्षा के अधिकार के तहत 2011 से ही राज्य सरकार से रजिस्ट्रेशन करवाने का नियम बनाया गया था. इसके लिए कई बार शिक्षा विभाग की ओर से रजिस्ट्रेशन करवाने के नोटिस भी निकाले गये. लेकिन अभी भी यह ठंडे बस्ते में ही रखा हुआ लगता हैं. 2011 में 1649 स्कूलों ने राज्य सरकार से रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन दिया. इसके बाद कई चरण में रजिस्ट्रेशन का काम पूरा किया गया. जुलाई 2015 तक पटना जिला के 308 स्कूलों ने रजिस्ट्रेशन करवाया भी हैं. लेकिन इसमें अधिकांश स्कूलों ना तो सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त हैं और ना ही आइसीएसइ बोर्ड से ही मान्यता लिया हुआ हैं. ऐसे में 220 नॉन एफिलिएटेड स्कूल में जो भी बच्चों का नामांकन क्लास वन के लिए लिया जाता हैं, वो बस इन स्कूलों में 8वीं तक ही पढ़ाई कर सकते हैं. इसके बाद इन बच्चों का आगे की पढ़ाई के लिए सरकारी स्कूलों पर ही निर्भर रहना पड़ेगा.
कोट
शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने के लिए हर स्कूलों को राज्य सरकार से रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी हैं. इसमें सरकारी और प्राइवेट दोनों ही स्कूल शामिल हैं. रजिस्ट्रेशन होने के बाद ही शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन की प्रक्रिया लागू होता है. अभी पटना जिला में स्कूलों की संख्या तो काफी हैं, लेकिन रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है. काफी स्कूलों ने रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया हैं.
राम सागर सिंह, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान

पटना जोन के 53 फीसदी स्कूलों में ट्वायलेट नहीं, बिन टॉयलेट छात्रएं हो रही बीमार

- सीबीएसइ ने पटना जोन के स्कूलों को भेजा नोटिस
- एफिलिएशन बाइ लॉज के तहत स्कूलों की जांच में निकल कर आया सर्वे
रिंकू झा, पटना
केस वन :  रश्मि प्रिया क्लास सातवीं की छात्र हैं.  स्कूल में रश्मि को आठ घंटे रहना पड़ता था. स्कूल में टायलेट नहीं होने के कारण रश्मि प्रिया टायलेट नहीं जा पाती थी. कई घंटे टायलेट रोकने के कारण रश्मि प्रिया को कुछ दिनों के बाद पेट में प्राब्लम शुरू हो गया. टायलेट नहीं जाना पड़े, इस कारण रश्मि प्रिया स्कूल में रहते हुए पानी भी काफी कम पीती थी. पेट का प्राब्लम जब काफी बढ़ गया तो डाक्टर से दिखाने पर पता चला कि किडनी में इफेक्शन हो गया हैं. काफी इलाज के बाद रश्मि प्रिया सही हो पायी.
केस टू : आसीन सुबह 7 बजे से 2 बजे तक टायलेट नहीं जाती थी. कई-कई घंटे टायलेट रोकने के कारण आसीन यूरिन इफेक्शन हो गया. आसीन अभी 12वीं की स्टूडेंट हैं. लेकिन यूरिन इफेक्शन का असर उसे अभी भी ङोलना पड़ रहा हैं. आसीन बताती के जिस स्कूल में वो पढ़ती हैं, वहां पर एक भी गल्र्स टायलेट नहीं हैं. इस कारण तमाम गल्र्स को काफी प्राब्लम होता हैं. यूरिन इफेक्शन होने के कारण आसीन को 10वीं बोर्ड की परीक्षा ओपेन स्कूलिंग से प्राइवेट कैंडिडेंट्स के रूप में देना पड़ा

- सीबीएसइ के सर्वे रिपोर्ट में निकली बात, 537 में नहीं टायलेट
सीबीएसइ की ओर से देश भर के स्कूलों पर किये गये एक सर्वे के अनुसार अधिकांश सीबीएसइ स्कूलों में टॉयलेट और पीने के पानी की दिक्कतें हैं. काफी संख्या में ऐसे स्कूल हैं जहां पर लड़के और लड़कियां दोनों ही पढ़ते हैं, लेकिन स्कूल ऑथोरिटी ने टॉयलेट अलग-अलग नहीं बनवाया हैं. सर्वे में कहा गया है कि पटना जोन के 1014 स्कूल अभी सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त हैं. इसमें कुल 537 स्कूल ऐसे हैं जहां पर टॉयलेट नहीं हैं. इन स्कूलों को सीबीएसइ ने नोटिस जारी किया है . इन स्कूलों से पूछा गया है कि टॉयलेट और पीने के पानी की व्यवस्था स्कूल ने क्यूं नहीं किया. टॉयलेट नहीं होने के कारण आये दिन क्लास में स्टूडेंट्स की अनुपस्थिति भी देखी गयी है. जब सीबीएसइ ने स्कूल नहीं आने का कारण जाना तो पता चला कि अधिकांश स्टूडेंट्स बीमार हो रहें हैं. बीमार होने का कारण पेट से संबंधित अधिक हैं. इसमें छात्रओं में अधिक देर तक पेशाब रोके रखना पाया गया है.
- स्कूल छोड़ने की वजह भी बन रहा टायलेट
अभी तक सरकारी स्कूलों में ही टॉयलेट के कारण छात्रएं स्कूल नहीं जाती है, ये सुनते आ रहे थे. लेकिन ऐसा नहीं हैं. सीबीएसइ ने जो एफिलिएशन बाइलॉज के तहत स्कूलों की जांच की हैं, उसके मुताबिक टॉयलेट के कारण सीबीएसइ स्कूल से भी स्टूडेंट्स नाम कटवा कर दूसरे स्कूल में नामांकन ले रहें हैं. कई स्कूलों में तो डिसिप्लीनरी कमेटी के पास भी स्टूडेंट्स ने शिकायत किया हैं. डीएवी से मिली जानकारी के अनुसार कई छात्रओं ने सिर्फ इस कारण स्कूल आना बंद कर दिया क्योंकि स्कूल मे टॉयलेट नहीं था.
-अधिकांश स्कूलों ने नहीं दी है सीबीएसइ को जानकारी
स्कूल के सैनिटेशन और पीने के पानी के सर्वे के लिए सीबीएसइ ने स्कूलों के पास छह महीने पहले कुल प्रश्न भेजे थे. लेकिन अधिकांश स्कूलों ने सीबीएसइ को इसकी जानकारी नहीं दी. इसके बाद सीबीएसइ की ओर से एफिलिएशन के तहत की गयी जांच में इन प्वाइंट को देखा गया. इसके बाद सीबीएसइ को सारी जानकारी प्राप्त हुई.
- 537 में 400 में नहीं है पीने की पानी की व्यवस्था
सीबीएसइ के सैनिटेशन और ड्रिकिंग वाटर की उपलब्धता वाली रिपोर्ट के अनुसार पटना जोन के 400 ऐसे स्कूल हैं जहां पर पीने की पानी की व्यवस्था नहीं है . ऐसे में उन स्कूलों में स्टूडेंट्स को पानी भी अपने घर से ही लेकर आना होता हैं. स्कूल में ना तो आरओ ही लगे हैं और ना ही पानी को प्यूरिफाई करने की व्यवस्था की गयी है . लंच आवर में भी स्टूडेंट्स को घर के पानी पर ही निर्भर होना होता है . सीबीएसइ के अनुसार लगभग 2 सौ ऐसे स्कूल हैं जहां पीने के पानी की व्यवस्था तो हैं लेकिन चारों ओर काफी गंदगी पायी गयी है .
- सैनिटेशन और टायलेट हैं गंदा
सैनिटेशन में भी सीबीएसइ के रिपोर्ट के अनुसार कई स्कूल जीरो अंक प्राप्त करते हैं. सीबीएसइ के अनुसार स्कूल की साफ सफाई में स्कूल आथोरिटी बिलकुल ही ध्यान नहीं देता है . सीबीएसइ ने पटना जोन के 365 ऐसे स्कूलों की लिस्टींग की है जहां पर साफ सफाई नगण्य है. स्कूल के बाहर और अंदर कूड़ा का ढेर लगा होता हैं. इतना ही नहीं अगर किसी स्कूल में टायलेट हैं तो वह इतना गंदा हैं कि उससे भी काफी बीमारियां फैलती हैं. सीबीएसइ के अनुसार इन टायलेट की सफाई महीनों में एक बार होती हैं. टायलेट की बदबू भी आस  पास फैली रहती हैं.

पेशाब रोकने से होती ये सारी बीमारियां
- यूरिन इफैक्शन (इसके अंतर्गत यूकोलाइ, बीकोलाई आदि बीमारी आता हैं)
- किडनी प्राब्लम
- किडनी स्टोन
- यूरिन बर्निग (जलन)
- पेट के नीचे में दर्द होना
- रिकोलिया

पटना जोन के स्कूल संबंधित कुछ जानकारी
पटना जोन में स्कूलों की कुल संख्या -  1014
कितने स्कूलों के पास टॉयलेट नहीं   -  537
बिहार में स्कूूलों की कुल संख्या  -  610
झारखंड में स्कूलों की कुल संख्या  -  404
बिहार में कितने स्कूलों के पास टॉयलेट नहीं  - 341
पटना में कितने स्कूलों के पास टॉयलेट नहीं  -  12
झारखंड में कितने स्कूलों के पास टॉयलेट नहीं  - 196
बिहार के कितने स्कूलों में लड़के और लड़कियों दोनों के लिए टॉयलेट हैं  - 155
कितने स्कूलों में लड़कों के लिए ही बस टॉयलेट हैं  -  114


स्कूल   का नाम                                                                        स्टूडेंट्स की संख्या       -   टायलेट की संख्या
1. एएएम चिल्ड्रेन एकेडमी (एफिलिएशन नंबर 330108) -        2014                   -         जीरो
2. आर्मी पब्लिक स्कूल (एफिलिएशन नंबर 380001)            -         1933                    -      जीरो
3. भागवत विद्यापीठ  (एफिलिएशन नंबर 330171)                -         1576                    -    जीरो
4. डीएवी पब्लिक स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330006)         -         1324                     -    जीरो
5. दिग्दर्शन सेकेंडरी स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330189)       -       1200                     -     जीरो
6. दुखम राम डीएवी पब्लिक स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330124) -   1098                  -     जीरो
7. ज्ञान भारती मॉडल स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330173)         -       1356                -     जीरो
8. हिमालय पब्लिक स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330183)          -        1176              -      जीरो
9. सेंट पॉल स्कूल (एफिलिएशन नंबर  330045)                    -        987              -       जीरो
10.  विद्या बिहार रेजिडेंसियल हाई स्कूल (एफिलिएशन नंबर  330063)  -    1765        -      जीरो
नोट  - स्कलों की यह लिस्ट सीबीएसइ ने अपने वेबसाइट पर जारी किया हैं. इस लिस्ट में उन तमाम स्कूलों की पूरी रिपोर्ट हैं जहां पर टायलेट और पीने की पानी की व्यवस्था नहीं हैं. सैनिटेशन और ड्रिकिंग वाटर नाम के इस रिपोर्ट में सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों की पूरी रिपोर्ट डाली हैं.

स्टूडेंट्स स्पीक
हमारे स्कूल में गल्र्स के लिए दो टॉयलेट हैं. इस कारण हमें टॉयलेट जाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता हैं. कभी कभी तो लंच आवर में इतनी लंबी लाइन लगी होती हैं कि टॉयलेट जाने का मौका ही नहीं मिलता. इससे दिन भर बिना टॉयलेट के रहने से पेट में दर्द होने लगता हैं. कई बार तो क्लास के बीच में जा कर अपना काम निकालते हैं.
सोनम गुप्ता, स्टूडेंट

मेरे स्कूल में एक भी टॉयलेट नहीं हैं. ब्वायज तो स्कूल के बाहर जाकर अपना काम निकाल लेते हैं. लेकिन गल्र्स के लिए बहुत ही मुश्किल हो जाती है. कई बार तो कई लड़कियों की तबीयत भी खराब हो गयी हैं. टॉयलेट की वजह से कई लड़कियों ने स्कूल से नाम भी कटवा लिया हैं.
पिंकी सिंह, स्टूडेंट

पैरेंट्स स्पीक
मैने अपने बेटी का नाम पटना के बड़े स्कूल में लिखवाया. स्कूल का नाम मै नहीं लूंगा. गल्र्स स्कूल होने के वाबजूद उस स्कूल में टॉयलेट नहीं हैं. ऐसे में छह महीने में ही मेरी बेटी बीमार रहने लगी. उसके किडनी में प्राब्लम होने लगा. पता नहीं चल रहा था कि क्या हुआ. फिर बेटी से पूछा तो पता चला कि वो टॉयलेट नहीं जा पा रही हैं. मैने तुरंत उस स्कूल से बेटी का नाम कटवा दिया.
अभिषेक  कुमार, अभिभावक

पटना में स्कूल वाले बिल्डिंग तो खड़ा कर देते हैं, लेकिन टॉयलेट नहीं बनवाते हैं. मेरे दोनों की बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ते हैं. 800 बच्चे पर मात्र दो टॉयलेट लड़कों के लिए और तीन टॉयलेट लड़कियों के लिए हैं. इन दोनों टॉयलेट की स्थिति बहुत ही बुरी हैं. गंदगी इतनी की बच्चे जाना नहीं चाहते हैं.
सत्यप्रकाश, अभिभावक

कोट
यूरिन का प्राब्लम एक बड़ी समस्या टीन एजर्स में देखी जा रही है . आए दिन हमारे पास स्कूल की लड़कियां आती है जिन्हें यूरिन इफेक्शन की प्राब्लम होती हैं. बातचीत में पता चलता हैं टायलेट को देर तक रोकती हैं. अधिक देर तक टायलेट रोकने के कारण कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं. कभी भी टायलेट अधिक से अधिक आधे घंटे तक रोका जा सकता हैं. अधिक देर तक टायलेट रोकने से यह पूरे शरीर को इफेक्टेड कर देता हैं.
डा. रेखा रस्तोगी, गाइनोकोलॉजिस्ट

रामानुज प्रसाद को प्रिंसिपल के पद से हटायेगा डीएवी

- पूर्व प्रिंसिपल रामानुज प्रसाद पर 20 करोड़ का घोटाला करने का आरोप
- सो कॉज नोटिस में पूछे गये 21 सवाल
संवाददाता, पटना
डीएवी पब्लिक स्कूल, बीएसइबी के पूर्व प्रिंसिपल रामानुज प्रसाद को जल्द प्रिंसिपल पद से हटा दिया जायेगा. इसको लेकर डीएवी मैनेजमेंट ने सो कॉज नोटिस भी कई पूर्व प्रिंपिल रामानुज प्रसाद को भेजा हैं. लेकिन अभी तक रामानुज प्रसाद ने सो कॉज नोटिस का जवाब डीएवी मैनेजमेंट को नहीं दिया है. डीएवी मैनेजमेंट ने रामानुज प्रसाद के उपर 20 करोड़ रुपये के घोटाला का आरोप लगाया है. डीएवी मैनेजमेंट के अनुसार 2013-14 के दौरान रामानुज प्रसाद ने डीएवी के पैसे के लेने देन में काफी गड़बड़ी किया था. इसकी जानकारी डीएवी मैनेजमेंट को 2013-14 के ऑडिट रिपोर्ट से मिली हैं. इसी ऑडिट रिपोर्ट को आधार बना कर डीएवी मैनेजमेंट ने पूर्व प्रिंसिपल रामानुज प्रसाद को सो कॉज नोटिस भेजा हैं. इसमें 21 प्वाइंट में सवाल डाले गये है. इस सवालों का जवाब डीएवी मैनेजमेंट रामानुज प्रसाद से मांगी हैं.
- सरकारी आवास के साथ हर सुविधा ले ली जायेगी
डीएवी मैनेजमेंट जल्द ही रामानुज प्रसाद को उनके पद से हमेशा के लिए निकाल देगी. ज्ञात हो कि स्कूल में नामांकन को लेकर गड़बड़ी के मामले में रामानुज प्रसाद को डीएवी संस्था ने प्रिंसिपल के पद से सस्पेंड (निलंबित) किया था. लेकिन इस ऑडिट रिपोर्ट में गड़बड़ी को लेकर डीएवी मैनेजमेंट अब रामानुज प्रसाद को प्रिंसिपल के पद से हटाने की तैयारी कर रहीं हैं. इसके लिए सो कॉज नोटिस डीएवी की डायरेक्टर नीशा पेशिन के द्वारा रामानुज प्रसाद को भेजा गया हैं. ऑडिट रिपोर्ट डीएवी के ऑडिट असिस्टेंट संतोष बारले, इंटर्नल ऑडिटर एसके रसतोगी और ऑडिट एओ इंद्रजीत सिंह शामिल थे.
- हाई कोट ने भी कर दिया खारिज
डीएवी के द्वारा प्रिंसिपल के पद से निलंबित किये जाने के बाद रामानुज प्रसाद ने निलंबन के खिलाफ हाई कोट में डीएवी के खिलाफ केस किया था. इसके तहत 3 जुलाई को हाई कोट से भी मामला खारिज कर दिया गया. केस नंबर 5974/2015 के तहत रामानुज प्रसाद के निलंबन को बरकरार रखे जाने का निर्देश हाई कोट ने दिया था.

ये सवाल जिसके घेरे में हैं पूर्व प्रिंसिपल. डीएवी मैनेजमेंट के ऑडिट रिपोर्ट में ये सारे आरोप लगाये गये हैं.

1. स्कूल के फर्निचर खरीदारी -  2013-14 में स्कूल में फर्निचर की खरीदारी की गयी. इसमें डीएवी मैनेजमेंट से पूछे बिना 54 लाख 13 हजार 789 रुपये खर्च कर दिये गये.
2. स्कूल मेटेरियल का पेमेंट में गड़बड़ी  - स्कूल मेटेरियल की खरीदारी में एकाउंट में काफी उलट फेर किया गया हैं. 2013 में किये गये इस खरीदारी में स्कूल के लिए रजिस्टर, स्क्रूटनाइजर का बिल आदि शामिल था. इसमें पूर्व प्रिंसिपल ने 1 करोड़ 22 हजार के पैसे का कोई हिसाब डीएवी को नहीं दिया गया.
3. एकेडेमिक डयूटी की लापरवाही - आये दिन स्कूलों में हल्ला हंगामे के कारण रामानुज प्रसाद पर एकेडेमिक ड्यूटी सही से नहीं निभाने का भी आरोप डीएवी मैनेजमेंट ने लगाया हैं. स्कूल के एटेंडेंस रजिस्टर पर स्टूडेंट्स की संख्या और नाम में काफी अंतर पाया गया हैं. कई एटेंडेंस रजिस्टर पर पेंसिल से एटेंडेंस बना दिया गया है. स्टूडेंट्स के डॉक्यूमेंट रखने में भी लापरवाही होती रही हैं.
4. डिग्री भी है शक के घेरे में  -  डीएवी मैनेजमेंट ने पूर्व पिं्रसिपल रामानुज प्रसाद के बीएड और एमए की डिग्री पर भी प्रश्न चिन्ह लगा दिया हैं. डीएवी मैनेजमेंट के अनुसार राम रति कमला उच्च विद्यालय, नालंदा में असिस्टेंट टीचर (1883 से 1987 के बीच) के रूप में कार्यरत रहते हुए रांची विवि से बीएड की डिग्री रेगूलर स्टूडेंट के रूप में कैसे ले लिया. इसके अलावा डीएवी पब्लिक स्कूल जहानाबाद में टीचर इंचार्ज और हेड मास्टर के रूप कार्यरत रहते हुए  1992 से 1997 के बीच बीएस कॉलेज, दानापुर से इकोनॉमिक्स से एमए की डिग्री कैसे ले लिया.
5. एक से अधिक बैंक एकाउंट खोलने से संबंधित -  18 लाख 36 हजार 374 रूपये 2013-14 के बीच स्कूल से अलग एक बैंक एकाउंट में रख लिया
6. गलत तरीके से  लोन और बस की खरीदारी  - पूर्व प्रिंसिपल रामानुज प्रसाद ने 13 टाटा विंगलर और तीन टाटा मैजिक की खरीदारी डीएवी मैनेजमेंट से पूछे बगैर कर लिया. इसमें 88.55 लाख रुपये की खर्च आयी
7. डीएवी के अलग-अलग ब्रांच खोले  - पटना के अलग- अलग एरिया में चल रहे डीएवी ब्रांच को खोलने से पहले डीएवी मैनेजमेंट से पूछा तक नहीं. इन डीएवी को खोलने और लीज पर लेने में चार लाख 80 हजार रुपये खर्च कर दिये गये.
8. बिल्ंिडग कंस्ट्रक्शन बिना अनुमति के  -  डीएवी बीएसइबी के फस्र्ट फ्लोर, सेकेंड फ्लोर और थर्ड फ्लोर के बनने में 5 करोड़ 50 हजार रूपये खर्च कर दिये.
9. कंप्यूटर की खरीदारी में गड़बड़ी  - डीएवी मैनेजमेंट को बताये बिना इंदू इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड स्कूल ने एग्रीमेंट कर लिया. इसके तहत 12 रुपये प्रति महीने प्रति छात्र के हिसाब से कंप्यूटर की ट्रेनिंग दिया. इसके लिए डीएवी ने इस कंपनी को 60 हजार रुपये पेमेंट किया.
10. नॉन एकाउंट ऑफ इंकम  - इसके तहत फूड फेस्ट प्रोग्राम, फेयरवेल फंक्शन के नाम पर जो भी स्टूडेंट्स से चाज्रेज लिये गये. उन तमाम पैसे को पूर्व प्रिंसिपल ने अपने पास ही रख लिया. फूड फेस्ट प्रोग्राम के तहत 2013-14 में 12 लाख 95 हजार 800 का कलेक्शन किया गया था.
11. टीए और डीए में गड़बड़ी  -  2013-14 के बीच पूर्व प्रिंसिपल दस बार दिल्ली का दौरा किया. इसके अलावा एक बार धनबाद और एक बार इलाहाबाद का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने आने जाने में हजारों रुपये खर्च किये. डीएवी के नाम पर इस पैसे को टीए और डीए के नाम पर उठा लिया.
12. मोबाइल फोन  - डीएवी मैनेजमेंट ने एक मोबाइल प्रोवाइड करवाया. लेकिन दो मोबाइल पूर्व प्रिंसिपल के पास थे. हर महीने हजारों रूपये मोबाइल बिल के नाम पर डीएवी को उठा रहे थे.
13. स्कूल के नाम पर ट्रांसपोर्ट की खरीदारी - 14 हजार प्रति महीने के हिसाब से अशोक कुमार नाम के व्यक्ति से बस किराये पर लिया.
14. बुक प्रिंट के नाम पर पेमेंट  -  2014-15 सेशन के लिए बुक की प्रिंटिंग करवायी गयी. इसके तहत 10 हजार बुक का प्रिंट 7 रुपये प्रति पृष्ट करवाया गया.
15. एडवांस के नाम पर पैसे निकाल लिये - स्कूल के बैंक एकाउंट से पैसे निकाल कर स्कूल के स्टॉफ को एडवांस के तौर पर दे दिया. इन पैसे की दुबारा निकासी भी नहीं हुआ.
16. टूर के नाम पर वसूली  - स्टूडेंट्स से टूर के नाम पर पैसे तो लिये जाते थे. लेकिन उसे डीएवी मैनेजमेंट को बताया नहीं जाता था. 17 स्टूडेंट से प्रति स्टूडेंट तीन हजार रूपये लिये जाते थे.
17. फंक्शन एक्सपेंस - हर साल फंक्शन (साइंस एग्जीविशन, सीसीइ ट्रेनिंग आदि) के नाम पर 2012-13 में 3 करोड़ 10 हजार 660 रूपया और 2013-14 में तीन करोड़ 56 हजार रुपये खर्च कर दिये गये
18. काउंसिलेशन फी के नाम पर - छात्रों से काउंसिलेश फी के नाम पर लाखों रुपये लिये जाते थे
19.  कैश प्राइज के नाम पर  - कैश प्राइज के नाम पर स्टूडेंट्स के बीच हजार ये 25 सौ रुपये तक दे दिये गये. इसमें 2013 में 4 लाख 12 हजार 400, 1 लाख 31 हजार और 63 सौ रुपये खर्च कर दिये गये
20. स्मार्ट क्लासेज के नाम पर  - स्कूल की ओर से स्मार्ट क्लासेज के नाम पर 45 लाख रूपये कमाये गये. इसमें फिजिक्स, केमेस्ट्री बायोलॉजी का क्लास 11वीं और 12वीं के स्टूडेंट्स के लिए करवाया गया था.
21. कंप्यूटर एजुकेशन के नाम पर  - स्कूल में कंप्यूटर एजुकेशन के नाम पर टीचर्स और स्टूडेंट्स से पैसे लिये. टीचर्स से जहां 25 रुपये प्रति महीने तो वहीं स्टूडेंट्स से 12 रुपये प्रति महीने लिया गया.