Wednesday, February 3, 2016

महाराष्ट्र-राजस्थान में फी निर्धारण कानून तो बिहार में क्यों नहीं ?

- देश में कई राज्यों में लागू है फी निर्धारण कानून

रिंकू झा, पटनास्कूलों के मनमाने फी बढ़ोतरी हर साल अभिभावकों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द होता है. पटना ही नहीं बल्कि पूरे बिहार के प्राइवेट स्कूल मनमाने ढंग से अपनी मरजी से हर साल स्कूल फी में बढ़ोतरी करते है. इन प्राइवेट स्कूलों पर ना तो प्राइवेट चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन वाले रोक लगा पाते है, और ना ही राज्य सरकार का कोई लगाम इन स्कूलों पर है. दूसरे राज्य की तरह अगर बिहार में भी फी निर्धारण कानून हो तो प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लग सकती है.
- कई राज्यों में फी निर्धारण कानून कर रहा काम तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक राज्य में पिछले कई सालों से फी निर्धारण कानून काम कर रहा है. फी निर्धारण कानून बनने के पहले इन राज्यों में भी मनमाने ढंग से फी में बढ़ोतरी की जाती थी. लेकिन कानून बनने के बाद हर स्कूलों में एक कमेटी बनायी गयी. इसके बाद से इन राज्यों में हर साल अभिभावकों के ऊपर फी का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता है. सबसे पहले 2011 में तमिलनाडु ने हाइकोर्ट के आदेश पर फी निर्धारण कानून लागू किया. उसके बाद महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों ने पहल की.
- प्रस्ताव पारित होने के बाद ही बढ़ेगा फी इस कानून के तहत किसी स्कूल में तभी फी बढ़ोतरी हो सकती है जब प्रस्ताव को कार्यकारी कमेटी पारित करेगी. नये सेशन शुरू करने के पहले हर स्कूल की कमेटी एक प्रस्ताव तैयार करती है. इस प्रस्ताव को राज्य सरकार द्वारा संचालित कार्यकारी कमेटी के पास भेजा जाता है. कार्यकारी कमिटी में पास होने के बाद ही संबंधित स्कूल फी में बढ़ोतरी कर सकता है. कौन सा स्कूल कितना फीसदी फी बढ़ोतरी करेगा, इसका भी निर्णय कार्यकारी कमेटी ही लेता है.
- 25 हजार स्कूल, मात्र आठ हजार रजिस्ट्रर्ड राज्य में अभी छोटे बड़े तमाम स्कूलों को मिला दे तो लगभग 25 हजार स्कूल है. हर साल सौ दो सौ स्कूल खुल रहे है. लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक मात्र आठ हजार स्कूलों को ही रजिस्टर्ड किया है. प्रदेश भर के स्कूलों को राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त होना आवश्यक है. इसके लिए 2011 में राज्य सरकार ने तमाम स्कूलों को मान्यता लेने का आदेश दिया था. प्रदेश भर से कुल 12 हजार स्कूलों ने आवेदन दिया था. इसमें से जनवरी 2015 तक आठ हजार स्कूलों को ही मान्यता मिल पाया है. राज्य सरकार की तरफ से दुबारा आवेदन भी नहीं लिया गया है.
फी निर्धारण कानून में है ये सारे प्रावधान - कोई भी स्कूल अपनी मरजी के फी का निर्धारण नहीं कर सकता है
- किसी भी स्कूल में फी तभी बढ़ेगा जब कानून के तहत उसे पारित किया जायेगा - फी निर्धारण कानून हर स्कूल में स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुसार लागू होगा
- स्कूल स्तर पर एक कमेटी काम करती है. - राज्य स्तर पर भी एक कमेटी काम करती है. राज्य स्तर पर फी निर्धारण कार्यकारी कमिटी में रिटायर जज चेयरमैन होते है. वहीं तीन अन्य जज इसके मेंबर होते है.
स्कूल में कुछ फी तीन सालों तक होंगे फिक्स - टर्म फी
- लाइब्रेरी फी - लैब फी
- जिम फी - एग्जामिनेशन फी
- होस्टल फी एंड मेस चार्ज - एडमिशन फी
फी निर्धारण कानून के तहत बनने वाली स्कूल स्तर पर कार्यकारी कमिटी 1. चेयरपर्सन - स्कूल के प्रिंसिपल या हेड मास्टर
2़ वाइस चेयरपर्सन - संबंधित स्कूल के कुछ स्टूडेंट के पैरेंट्स 3़ सेक्रेटरी - संबंधित स्कूल के कुछ टीचर्स
4. टू ज्वाइंट सेक्रेटरी - पैरेंट्स 5़ मेंबर्स - हर क्लास के एक पैंरेंट्स और एक टीचर
कुछ जरूरी बातें राज्य में कुल प्राइवेट स्कूलों की संख्या - 30 हजार
फी बढ़ाने वाले स्कूलों की संख्या - 25 हजार 300 20 फीसदी फी बढ़ाने वाले स्कूलों की संख्या - 5,250
15 फीसदी फी बढ़ाने वाले स्कूलों की संख्या - 15,57010 फीसदी फी बढ़ाने वाले स्कूलों की संख्या - 4,480

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