Rinku Jha
Wednesday, February 3, 2016
पांच साल में 70 फीसदी तक बढ़ गये प्राइवेट स्कूलों की फीस
- हर साल 10 से 20 फीसदी तक का होता है इजाफा
रिंकू झा, पटना
नया सेशन जहां अभिभावकों को बच्चे के नये क्लास में जाने की खुशी देता है, उससे अधिक जेब ढीली होने की परेशानी दे जाता है. मार्च महीने तक आते ही अभिभावकों पर बढ़े हुए ट्यूशन फी का पहाड़ फोड़ दिया जाता है. हर साल स्कूल औसतन 10 से 15 फीसदी की ट्यूशन फी में बढ़ोतरी करता है. कई स्कूल तो 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी करता है. अगर हम पिछले पांच साल का आकलन करें तो इस दौरान अब तक 70 फीसदी तक ट्यूशन फी में बढ़ोतरी हो गयी है.
- सात सौ से बढ़ कर 16 सौ पर आया ट्यूशन फी
हर साल फी में बढ़ोतरी होती है. सौ दो सौ देने में अभिभावकों को पता नहीं चलता है. जहां 2010 में अधिकांश स्कूलों की मंथली फी 6 सौ से 7 सौ थे, वहीं 2015 में 15 सौ से 16 सौ तक पहुंच गया है. इस पर कोई रोक नहीं लगाया गया है. सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड के पास इसकी जानकारी समय पर नहीं जाने के कारण कुछ कार्रवाई भी नहीं हो पाती है.
- बोर्ड को दिखाने के लिए दो और तीन महीने पर स्कूल लेता है ट्यूशन फी
अभिभावकों को ट्यूशन फी दो महीने या तीन महीने पर जमा करना होता है. कुछ स्कूल दो महीने तो कुछ स्कूल तीन महीने पर एक साथ मंथली फी लेते है. इसके पीछे स्कूल का मकसद सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड को कम ट्यूशन फी दिखाना होता है. एक फेमस स्कूल के टीचर ने बताया कि बोर्ड द्वारा इंक्वायरी करने पर स्कूल मंथली फी कम करके दिखाता है. अगर हर महीने फी लेंगे तो स्कूल के लिए यह करना संभव नहीं हो पायेगा. दो महीने और तीन महीने पर फी लेने से स्कूल बोर्ड को कम फी करके बता देता है.
- टीचर के सैलरी के नाम पर बढ़ाते है ट्यूशन फी
स्कूल वाले टीचर्स की सैलरी और स्कूल डेवलपमेंट के नाम पर ट्यूशन फी में बढ़ोतरी करते है. नाम नहीं छापने के शर्त पर एक टीचर ने बताया कि टीचर्स की सैलरी में पांच फीसदी तक ही बढ़ोतरी होती है. लेकिन ट्यूशन फी में हर साल 10 से 20 फीसदी तक स्कूल वाले बढ़ोतरी करते है. कई स्कूलाें में तो 20 साल से टीचिंग कर रहे पुराने टीचर्स को अभी तक डीए आदि की सुविधा तक नहीं दी गयी है.
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