Sunday, February 21, 2016

परीक्षा में नकल की कहानी, कभी नहीं होगी पुरानी

- नकल बदल देता परीक्षा की सूरत, फिर भी बिना नकल के परीक्षा नहीं होती पूरी

रिंकू झा, पटनापरीक्षा में नकल करना कोई नयी बात नहीं है. स्कूल लेबल के परीक्षा की बात हो या बोर्ड परीक्षा हो, नकल होना तय है. बोर्ड परीक्षा में परीक्षार्थी नकल ना करे, इसके लिए कई उपाय किये जाते है. नियम भी बनाये जाते है. परीक्षा के पहले धमकी भी दी जाती है, लेकिन नकल करने वाला उसमें भी अपने लिए उपाय निकाल ही लेता है. परीक्षा खासकर बोर्ड परीक्षा में नकल की कहानी, कभी पुराना नहीं हुआ है, हां भले इसके तरीके चेंज हो गये है. स्कूल की परीक्षा तक चिट-पूर्जे से काम चल जाता है, तो वहीं बोर्ड परीक्षा में कैमरा पेन और उत्तर पुस्तिका की अदला बदली करते है. वहीं जब यहीं छात्र प्रतियोगी परीक्षा तक पहुंचते है तो मोबाइल और ब्लूट्रूथ का इस्तेमाल नकल के रूप में करते है. यानी अब नकल का दायरा क्लास रूम से निकल कर बाहर तक पहुंच गया है.
- नकल के कारण परीक्षा करना पड़ता है कैंसिल बोर्ड परीक्षा से आगे बढ़ कर अब तो नकल प्रतियोगी परीक्षा तक पहुंच गया है. कई बार तो नकल इतना अधिक हो जाता है कि परीक्षा तक को कैंसिल करना पड़ता है. कई सालों पहले आइआइटी एंट्रांस में करना पड़ा था. वहीं पिछले साल 2015 अप्रैल में हुआ एआइपीएमटी में बड़े पैमाने पर नकल किया गया था. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. इसके बाद दुबारा एआइपीएमटी लिया गया. इस परीक्षा में कई राज्य में ब्लूट्रूथ से नकल की घटना हुई थी.
परीक्षा में नकल से जुड़ी कुछ सच्ची घटनाएं खांसी करके एक दूसरे को बताते थे वस्तुनिष्ट प्रश्न
हमारे 10वीं बोर्ड का एग्जाम था. उस समय सीबीएसइ बोर्ड में ऑब्जेक्टिव प्रश्न भी पूछे जाते थे. फिजिक्स की परीक्षा की थी. 10 मार्क्स के आब्जेक्टिव प्रश्न थे. मुझे केवल पांच के ही उत्तर आ रहे थे. फिर क्या था चार बेंच आगे बैठा मेरे दोस्त से आंखों से इशारा किया. इसके बाद हम खांसी करके उत्तर की संख्या बताने लगे. परीक्षा के दौरान थोड़ी-थोड़ी देर पर खांसी करते थे. एक बार खांसी करके लगातार दो बार खांसी किया तो पता चल गया कि प्रश्न संख्या एक का उत्तर दो होगा. इसी तरह से दस प्रश्न का उत्तर हमने लिखा. मोनू, छात्र, 10वीं, सीबीएसइ
पेन के ढ़क्कन में रखती थी चिट परीक्षा की तैयारी से अधिक समय मै चिट को तैयार करने में देती थी. परीक्षा होने के एक दिन पहले मै छोटे-छोटे कागज को इक्टठा किया. उसमें छोटे-छोटे अक्षरों में उत्तर लिखी. ऐसे लगभग 100 चिट मै तैयार कर लिया. सारे चिट को पेन के ठक्कन में डाल कर उसमें पेन डाल कर सुरक्षित रख लिया. जब प्रश्न पत्र मिला तो मुझे यह पता चल गया कि किस प्रश्न का उत्तर वाला चिट हमारे पास है. परीक्षा शुरू होने के आधे घंटे के बाद बाथरूम का बहाना बना कर क्लास रूम से निकल गयी. बाथरूम में जाकर पेन से वो चिट निकाल कर स्कर्ट में छुपा लिया, जिसमें आंसर लिखा हुआ मिला.
सुरभि, छात्रा, इंटर, बिहार बोर्ड स्कूल यूनिफाॅर्म के दुपट्टे पर लिख कर लायी थी उत्तर
मेरी 12वीं बोर्ड की परीक्षा थी. मुझे मैथ में बहुत डर लग रहा था. तैयारी नहीं थी. फर्मूला याद नहीं रहता था. मै फर्मूला का चिट तैयार कर लिया. फिर सोचा अगर चिट के साथ पकड़े जायेंगे तो बहुत मुश्किल हो जायेगा. इसके बाद मैने अपने यूनिफार्म के दुपट्टे पर सारा फर्मूला लिख लिया. यूनिफार्म का दुपट्टा हमें फोल्ड करके पहनना होता था. उसमे पिन लगाया जाता था, इससे अंदर लिख कर मै सुरक्षित थी. जब एग्जाम शुरू हुआ तो मै दुपट्टे का पिन खोल दिया. इसके बाद जहां पर फर्मूला लिखा था, उसे आसानी से देख पा रही थी. फर्मूला की मदद से मैने प्रश्न का उत्तर दिया. साक्षी, 12वीं, सीबीएसइ
चिट और आपसी पूछ ताछ के अलावा बोर्ड परीक्षा में नकल के कुछ नये तरीके
1़ पेन कैमरा से करते है नकल - पेन कैमरा का इस्तेमाल एक दो साल से बोर्ड परीक्षा में स्टूडेंट्स करते है. इस पेन की खासियत होती है कि इस पेन से लिखने पर कागज पर कुछ नजर नहीं आता है. कागज पूरा सादा ही दिखता है. पेन के दूसरे हिस्से में लाइट लगी होती है. इस लाइट को कागज पर ले जाने से लिखा हुआ मैटर नजर आता है. परीक्षा के दौरान स्टूडेंट क्वेश्चन पेपर पर अांसर लिख कर क्वेश्चन पेपर की अदला बदली करते है. इस पेन को पकड़ना टीचर्स के लिए मुश्किल हो रहा है. 2़ कैलकुलेटर वाली घड़ी का करते इस्तेमाल - 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा में इस घड़ी का इस्तेमाल कर नकल करते है. यह ऐसा कैलकुलेटर होता है जो देखने में घड़ी के जैसा लगता है. लेकिन यह केवल कैलकुलेटर होता है. इसे हाथ में पहन कर स्टूडेंट्स आ जाते है. परीक्षा के दौरान कैलकुलेशन संबंधित सारा कुछ इससे आसान हो जाता है. टीचर भी पकड़ नहीं पाते है. ऐसे में अब कुछ स्कूलों ने परीक्षा के दौरान घड़ी पहनने पर रोक लगा दी है.
बोर्ड परीक्षा में सामान्य तरीके से नकल करके पास हो गये, लेकिन प्रतियोगी परीक्षा के लिए हाइटेक नकल चलता है. चिट-पूर्जे से काम नहीं चलता है. प्रतियोगी परीक्षा में इन चीजों का नकल के रूप में होता है इस्तेमाल - ब्लू टूथ वाॅच के साथ इयरपीस
- ब्लू टूथ नेक के साथ इयरपीस सेट - ब्लू टूथ शर्ट के साथ इयरपीस सेट
- ब्लू टूथ पेन सेट- ब्लू टूथ मैग्नेटिक इयरपीस सेट
- ब्लू टूथ जैकेट के साथ इयरपीस सेट- ब्लू टूथ कैप सेट
- ब्लू टूथ इरेजर - ब्लू टूथ ताबीज
- ब्लू टूथ मोबाइल वाॅचपरीक्षा में नकल के कुछ सामान्य तरीके
- आंख से इशारे में बातें करना - पलक झपका कर वस्तुनिष्ठ प्रश्न का नंबर बताना
- खांसी करके उत्तर की संख्या बताना - कॉपी बदल लेना
- प्रश्न पत्र पर उत्तर लिख कर एक दूसरे को अदला बदली करना- वस्तुनिष्ठ प्रश्न का उत्तर उंगली की संख्या से एक दूसरे को बताते है
- टीचर्स के आपस मे बात करने से एक दूसरे से पूछ कर करते है नकल - एक ही समय पर पानी पीने या बाथरूम के लिए बाहर जाना
- फुल शर्ट को फोल्ड करके उसमें चिट डाल कर ले जाना परीक्षा के दौरान इन उपायों से टीचर रोकते है नकल
- परीक्षा हॉल में छात्र के पीछे जाकर हो जाते है खड़े - हमेशा क्लास रूम में एक जगह से दूसरे जगह पर जाना
- छात्र के अांख से उसे नकल करने की टेडेंसी को पकड़ना - आपस में बात करते हुए छात्र को पकड़ना
- प्रश्न पत्र पर लिखा हुआ रौल नंबर की चेकिंग की जाती है टीचर्स की बातें
एग्जाम शुरू होने के पंद्रह मिनट तक मै पूरी तरह से रिलैक्स रहता हूं. इससे क्लास रूम में उन छात्राें को पकड़ना आसान हो जाता है, जो नकल करने के मूड में होते है. उनकी एक्टिविटी से हम उन्हें पहले वाच कर लेते है. उसके बाद पूरे परीक्षा के दौरान उन पर नजर रखी जाती है. कई बार नकल करते हुए रंगे हाथ भी स्टूडेंट्स पकड़ में आते है. संजय कुमार, मैथ टीचर, लोयेला हाई स्कूल
नकल करने के लि पहले से ही आपस में सेटिंग करते है. हर स्टूडेंट्स की चेकिंग की जाती है. स्कूल एग्जाम में तो जूनियर के साथ सीनियर को बैठा कर परीक्षा ली जाती है. इससे जूनियर स्टूडेंट्स सीनियर को नकल करते देखते है तो टीचर को जाकर बता देते है. एग्जाम के दौरान हर स्टूडेंट्स के एक्टिविटी पर नजर रखती हूं. किस पेन से आंसर कर रहे है, उसे चेंक करते है. पुष्पा सिंह, सोशल स्टडी टीचर, लिट्रा वैली हाई स्कूल 

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