Rinku Jha
Sunday, February 28, 2016
थोड़ी सी लापरवाही, कर गये 2706 नवजात को अनाथ
बिहार में हर साल बच्चों के जन्म के समय हो जाती है मांओं की मौत
संवाददाता, पटना
कभी आक्सीजन की कमी तो कभी समय पर ब्लड नहीं दिया गया. कभी समय पर डाक्टर उपलब्ध नहीं तो कभी इलाज में कमी मौत का कारण बन जाती है. नौ महीने बच्चे को गर्भ में रखने का बाद थोड़ी ही लापरवाही से उसे मौत गले लगा लेता है. भले हम मेडिकल ट्रीटमेंट की आधुनिकीकरण की बात करें,लेकिन सच तो सही है कि आज भी हमारे राज्य बिहार में बच्चे के जन्म के समय मांओं की मौत हो जा रही है. यह हम नहीं बल्कि वो आंकड़े बता रहे हैं जो राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से हाल मे मानवाधिकार आयोग को दिया गया है. मातृ मृत्यु दर की वर्तमान स्थिति जानने के लिए आयोग की ने विभाग से पांच साल का लिस्ट मांगा. 2011 से 2015 की बात करें तो पूरे बिहार में 2706 मांओं की मौत हो चुकी है. पांच साल के आंकड़ों की बात करें तो 2010-11 में 39, 2011-12 में 252, 2012-13 में 1040, 2013-14 में 850 और 2014-15 में 525 मांओं की मौत बच्चे के जन्म के समय हो गयी.
- 2012 से 2013 में हुई सबसे अधिक मौतें
पांच साल के आंकड़े बताते है कि सबसे मातृ मृत्यु दर सबसे अधिक 2012 से 2013 में हुई. इस साल में पूरे 1040 मौतें हो गयी. सबसे अधिक 222 सीवान जिले में मातृ मृत्यु दर रहा. उसके बाद पूर्वी चंपारण में 178 और दरभंगा में 104 मांओं ने बच्चे के जन्म के समय दम तोड़ दिया. इसके अलावा कई ऐसे जिले है जहां पर 20 से ज्यादा आंकड़े है जिसमें बच्चे के जन्म के समय मौत हो गयी. पिछले पांच साल की बात करें तो सबसे ज्यादा मौतें 2012 से 2013 के बीच हुआ है. इसके बाद के साल में मातृ मृत्यु दर कम हुआ है.
- पांच साल में सारण में एक भी मौत नहीं
प्रदेश में कुछ ऐसे भी जिले है जहां पर मातृ मृत्यु दर पर काफी कंट्रोल कर लिया गया है. इससे इन जिलों में मातृ मृत्यु दर शुन्य है. सारण ऐसा जिला है जहां पर पिछले पांच साल मे एक भी मातृ मृत्यु दर नहीं है. 2010 से 2015 तक शुन्य मातृ मृत्यु दर रखने वाला सारण जिला बिहार का पहला जिला बन गया है. इसके अलावा 2014-15 में भागलपुर, जमुई, सहरसा, प. चंपारण, सारण और सीतामढ़ी ऐसे जिले है जहां पर मातृ मृत्यु दर शुन्य रहा है.
जिला - 2010-11 2011-12 2012-13 2013-14 2014-15
अररिया - 0 0 4 27 54
अरवल - 0 2 30 11 06 औरंगाबाद - 0 10 31 24 09
बांका - 0 4 13 21 15बेगूसराय - 0 5 8 4 1
भागलपुर - 0 1 5 56 0 भोजपुर - 10 17 16 30 5
बक्सर - 0 1 2 0 3 दरभंगा - 0 0 104 90 10
गया - 7 5 19 23 51 गोपालगंज - 4 0 14 25 6
जमुई - 0 1 12 7 0 जहानाबाद - 0 24 29 9 3
कैमूर - 0 2 5 1 17 कटिहार - 2 3 14 16 9
खगड़िया - 0 2 3 6 1किशनगंज - 3 17 30 19 33
लखीसराय - 0 3 18 3 10 मधेपुरा - 1 3 7 5 3
मधुबनी - 0 0 0 21 28 मुंगर - 2 1 8 4 3
मुजफ्फरपुर - 0 1 12 90 60 नालंदा - 0 1 39 28 14
नवादा - 0 7 20 5 2 प. चंपारण - 0 0 0 24 0
पटना - 0 1 2 0 5 पूर्वी चंपारण - 0 5 178 180 99
पूर्णिया - 8 1 24 44 34रोहतास - 2 2 25 9 1
सहरसा - 0 5 0 6 0 समस्तीपुर - 0 54 61 3 7
सारण - 0 0 0 0 0 शेखपुरा - 0 4 0 2 3
शिवहर - 0 9 1 5 5 सीतामढ़ी - 0 5 24 2 0
सीवान - 0 52 222 42 19 सुपौल - 0 1 7 5 4
वैशाली - 0 3 53 3 5
...जिसने किया लिखने के लिए इंस्पायर, जाने के बाद वहीं बन गयी सेल्फ मोटिवेटर
मां की मौत से टूट चुकी स्वाति आज बन रही दूसरों के लिए इंस्पीरेशन
संवाददाता, पटना
मुझमे कहीं आज भी जिंदा है तू, समंदर की लहरों सी बहती है मुझमे तू, हर पल थी मेरे जीने की मकसद, आज भी तेरे सपनों से मुझे राह दिखाती है तू.... अक्सर हम जिंदगी से हार कर उन चीजों को छोड़ देते है जो हमें परेशान करती है. लेकिन अगर उसी परेशानी को अपनी ताकत बना कर हम आगे बढ़े तो दूसरों के लिए इंस्पीरेशन बन जाते है. मां के मौत के बाद स्वाति के लिए हर पल काफी मुश्किल था. पूरी तरह से टूट चुकी स्वाति ने मां की कहीं गयी बातों को सेल्फ मोटिवेटर बनाया और चल पड़ी अपने रास्ते खुद बनाने को. कमजोर, दूसरों पर निर्भरता, दुर्बल समझी जाने वाली औरत के पहचान को बदल कर ताकत और आत्मनिर्भर बन स्वाति ने मां को सेल्फ मोटिवेटर बनाया और अपनी हर बातें लिखती चलीं गयी. आज स्वाति की यह लेखनी एक नॉवेल का रूप ले चुकी है. पटना ही नहीं, देश और अब विदेशों में भी काफी डिमांड में है. विदाउट ए गुडबाइ नाम का यह नॉवेल स्वाति के लिए जहां ताकत बन गयी है वहीं दूसरों के लिए इंस्पीरेशन बन रही है.
- बचपन की लेखनी, जिंदगी का बन गया मकसद
स्वाति को बचपन से ही लिखने का शौक था. हाई स्कूल कानपुर से करने के बाद स्वाति 2007 में पटना आ गयी. मगध विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने के बाद नेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस, बंग्लोर से एमबीए किया. इसी बीच एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत 2012 में छह महीने के लिए फ्रांस जाने का भी मौका मिला. इसी बीच 2012 अक्टूबर में मां की मौत ने स्वाति को पूरी तरह से तोड़ दिया. बंग्लोर में नौकरी छोड़ स्वाति पटना आ गयी. आंसू थे जो आंख का साथ नहीं छोड़ रहे थे. कैरियर खत्म हो चुका था. जिंदगी ब्रेक डाउन हो गया था. स्वाति ने बताया कि जिंदगी से कोई प्यार नहीं रह गया था. इसी में एक पल के लिए लगा कि आखिर मेरा रियल लाइफ क्या है. मै किस चीज से भाग रही हूं. फिर मैने मां को सेल्फ मोटिवेटर के तौर पर लेना शुरू कर दिया. उनकी स्थिति और उनकी बातों को लिखना शुरू कर दिया. अपनी लाइफ से खुद लड़ाई करना शुरू किया. धीरे-धीरे वो मेरी ताकत बनती गयी. यही वहज है कि आज मुझे लोग लेखिका के नाम से जानते है.
- दो आैरतों की कहानी बयां करती विदाउट ए गुडबाइ
हम भले कहें कि समाज में औरतों की स्थित सुधर गयी है. लेकिन ऐसा नहीं है, आज भी हमारा समाज औरतों को सेल्फ डिसीजन लेने नहीं देता है. तरह तरह से दबाव डाले जाते है. औरतों के दो रूपों की कहानी इस नॉवेल के माध्यम से स्वाति ने रखी है. एक वो जो आज की जेनरेशन की लड़की है. और वहीं दूसरी उसी जेनरेशन की लड़की की मां की कहानी. जो आज भी पिता के उपर निर्भर है. अपने नॉवेल के बारे में स्वाति बताती है कि किस तरह से एक मां खुद के जिंदगी से लाचार हो कर अपनी बेटी का समाज का सीख देती है. अपने लिए रास्ते खुद चूनने का अधिकारी बताती है. औरत के जिंदगी के दो अलग-अलग पहलूंओं को इस नॉवेल के माध्यम से रखने की कोशिश की गयी है.
- ऑन लाइन कॉमेंट पहुंच चुका है दस हजार के उपर
पटना बुक फेयर में खासा चर्चा में रही स्वाति की यह नॉवेल देश के कई विवि ने लाइब्रेरी में जगह दिया है. इतना ही नहीं हाल में दिल्ली विवि की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में स्वाति मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थी. स्वाति ने बताया कि ऑन लाइन बुक को देश के साथ विदेशों से काफी कॉमेंट मिले है. अभी तक दस हजार से उपर इस नॉवेल को कॉमेंट मिल चुके है. कविताओं और कहानी लिखने की शौकिन स्वाति का अपना ब्लॉग भी है. स्वाति ने बताया कि वो महिलाओं के उन मुददों को वो अपनी लेखनी के माध्यम से उठाना चाह रही है जो समाज में दब कर रह गया है.
Wednesday, February 24, 2016
वैशाली के तीन स्कूल गये बोर्ड अध्यक्ष, कहा - वैशाली ने किया पिछले साल बिहार बोर्ड को बदनाम
परीक्षार्थी के प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिका पलट कर किया गया जांच
संवाददाता, पटना
इंटर की परीक्षा, कदाचार मुक्त करवाने की चुनौती, सुबह दस बजते ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में हरकत शुरू हो गयी. समिति अध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव सभी के सभी बोर्ड पहुंच गये. परीक्षा के पहले दिन कोई गड़बड़ी ना हो, इसके लिए समिति के अध्यक्ष हाजीपुर के लिए रवाना हुए. एक घंटे में अध्यक्ष प्रो. लालकेश्वर प्रसाद सिंह की गाड़ी हाजीपुर के तीन स्कूलों का दौरा किया. हर स्कूलों में सीसी टीवी कैमरा, पुलिस बल की तैनाती, विडियोग्राफी आदि का जायजा बोर्ड अध्यक्ष ने लिया. अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने स्कूल प्रशासन और जिला प्रशासन से परीक्षा कदाचार मुक्त लेने को कहा. अध्यक्ष ने कहा कि पिछले साल वैशाली जिले के कुछ सेंटर पर नकल होने के कारण ही बिहार बोर्ड की बहुत बदनामी हुई थी.
स्कूल - टाउन उच्च माध्यमिक विद्यालय
समय - 11.02 से 11.07
इस स्कूल में तीन कमरों में परीक्षा चल रही थी. एक बेंच पर दो-दो छात्राएं बैठी थी. कुल 66 छात्राएं यहां पर परीक्षा दे रही थी. स्कूल के बाहर अभिभावक एक दो कहीं-कहीं नजर आ रहे थे. वही स्कूल के मुख्य द्वार पर तीन चार पुलिस बल की भी तैनाती थी. स्कूल का गेट बंद था. इस स्कूल में अध्यक्ष और संयुक्त सचिव देवशील पांच मिनट रूके. छात्राओं से प्रश्न पत्र के बारे में पूछा.
स्कूल - एसएस बालिक उच्च विद्यालय
समय - 11.15 से 11.30
टाउन उच्च माध्यमिक विद्यालय, हाजीपुर से तीन मिनट की दूरी पर एसएस बालिका उच्च विद्यालय है. यहां पर सीसी टीवी कैमरा सही से काम नहीं कर रहा था. इस विद्यालय में जेपी इंवनिंग कॉलेज, हाजीपुर का केंद्र था. बुधवार को कुल 123 परीक्षार्थी शामिल थे. इसमें से दो अनुपस्थित थे. प्रशासन की ओर से स्कूल में सीसी टीवी कैमरा तो लगा दिया गया, लेकिन सीसी टीवी कैमरा का अपडेट देखने के लिए डिस्प्ले स्क्रीन नहीं दिया गया था. इससे सीसी टीवी कैमरा की जानकारी नहीं मिली.
स्कूल - जी ए इंटर स्कूल, हाजीपुर
समय - 11.35 से 11.45
इस स्कूल के बाहर एक भी अभिभावक मौजूद नहीं थे. कर्फ्यू जैसी स्थिति स्कूल के मुख्य द्वार के बाहर लगी हुई थी. यहां पर भी एक बेंच पर दो छात्र ही नजर आ रहे थे. यहां पर कुल 208 परीक्षार्थी बुधवार की परीक्षा में शामिल होना था. लेकिन 47 परीक्षार्थी अनुपस्थित थे. इस परीक्षा केंद्र पर भी प्रशासन द्वारा लगाया गया सीसी टीवी कैमरा बस मुख्य गेट के पास की ही जानकारी दे रहा था. पीछे या स्कूल के कॉडिडोर में कोई कैमरा नहीं लगा हुआ था.
इंटर की परीक्षा शुरू, पांच सौ परीक्षार्थी किये गये निष्कासित
पहले दिन साइंस, आर्ट्स, कॉमर्स और वोकेशनल चारों स्ट्रीम की हुई परीक्षा
संवाददाता, पटनाइंटरमीडिएट की परीक्षा बुधवार से शुरू हो गया. परीक्षा के पहले दिन दो पाली में परीक्षा ली गयी. प्रथम पाली में साइंस के बायोलाॅजी और कॉमर्स के इंटरपेन्याेशिप विषय की परीक्षा ली गयी. वहीं द्वितीय पाली में आर्ट्स के फिलॉस्फी और वोकेशनल स्ट्रीम के राष्ट्रभाषा हिंदी की परीक्षा आयोजित की गयी. दो पाली मिला कर लगभग तीन लाख परीक्षार्थी पहले दिन परीक्षा में शामिल हुए. 24 फरवरी से पांच मार्च तक चलने वाले इंटर की परीक्षा के पहले दिन पांच सौ के लगभग परीक्षार्थी निष्कासित किये गये.
- निष्कासित में मूंगेर टॉप पर तो औरंगाबाद उसके नीचे इंटर परीक्षा के पहले ही दिन परीक्षार्थी ने नकल करने की कोशिश किया. नकल करते हुए प्रदेश भर से लगभग पांच सौ परीक्षार्थी को परीक्षा से निष्कासित किया गया. इसमें सबसे अधिक मुंगेर जिला से 49 परीक्षार्थी निष्कासित किये गये. वहीं दूसरे स्थान पर औरंगाबाद से 48 और तीसरे स्थान में सारण जिला रहा. सारण जिला से 46 परीक्षार्थी को निष्कासित किया गया. हर जिले से निष्कासन हुआ है.
- सीसी टीवी कैमरा ने दिया धोखा बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से प्रत्येक सेंटर पर सीसी टीवी कैमरा लगाने का निर्देश दिया गया था. इसके लिए समिति की ओर से दो करोड़ रूपये भी खर्च किये गये थे. तमाम परीक्षा केंद्रों पर दो या तीन सीसी टीवी कैमरा लगाने को कहा गया था. कई परीक्षा केंद्र पर सीसी टीवी कैमरा खराब रहा तो वहीं कई सेंटर पर सीसी टीवी कैमरा तो था लेकिन डिस्प्ले स्क्रीन नहीं होने से सीसी टीवी कैमरा का स्टेट्स का पता नहीं चला.
- समिति का कंट्रोल रूम में नहीं लग रहा था फोन समिति कंट्रोल रूम में फोन नहीं लगने की भी शिकायत परीक्षार्थी का रहा. एडमिट कार्ड में गड़बड़ी होने और सेंटर पर परीक्षार्थी को हुई परेशानी के बाद कंट्रोल रूम फोन किया गया. लेकिन कंट्रोल रूम में फोन नहीं लगा. नेटवर्क की प्राॅब्लम का असर परीक्षार्थी को भी दिन भर झेलना पड़ा.
- आज होगा भाषा और कंप्यूटर साइंस की परीक्षा इंटर की परीक्षा में गुरूवार को आर्ट्स विषय का भाषा की परीक्षा आयोजित की जायेगी. वहीं द्वितीय पाली में आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स और वोकेशनल स्ट्रीम की परीक्षा ली जायेगी. आर्ट्स, साइंस और काॅमर्स के एक्स्ट्रा विषय कंप्यूटर साइंस और मल्टी मीडिया एंड वेब टेक्नाेलॉजी की परीक्षा ली जायेगी. वहीं वोकेशनल के फाउंडेशन कोर्स की परीक्षा द्वितीय पाली में ली जायेगी.
- निष्कासन का रिपोर्ट देखने के बाद होगी अगली कार्रवाई बुधवार की परीक्षा में जो भी परीक्षार्थी निष्कासित किये गये है, उनके भविष्य का फैसला समिति सेंटर से आने वाले रिपेार्ट के अनुसार करेगा. समिति के अध्यक्ष प्रो. लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि जो भी परीक्षार्थी निष्कासित होंगे, वो इस साल के पूरे परीक्षा से निष्कासित हो जायेंगे. हर दिन की परीक्षा में निष्कासित परीक्षार्थी की रिपोर्ट समिति मंगवाया जायेगा. रिपोर्ट में निष्कासन का कारण देखा जायेगा. अगर परीक्षार्थी की गलती पायी गयी तो आगे की परीक्षा से भी उन्हें निष्कासित कर दिया जायेगा. यह फैसला रिपोर्ट आने के बाद किया जायेगा. अगर वीक्षक की गलती होगी तो उसे शिक्षा विभाग भेजा जायेगा.
इन जिलों में निष्कासित परीक्षार्थी की संख्या जिला - निष्कासित परीक्षार्थी की संख्या
शेखपुरा - 15 औरंगाबाद - 48
कटिहार - 01 सहरसा - 14
सुपौल - 06 सारण - 46
अररिया - 01 लखीसराय - 05
खगड़िया - 04 जमुई - 10
समस्तीपुर - 11 गोपालगंज - 11
अरवल - 08 नालंदा - 12
गया - 07 बक्सर - 05
पूर्णिया - 01 सीतामढ़ी - 03
मुंगेर - 49 भोजपुर - 24
रोहतास - 27 प. चंपारण - 02
पूर्वी चंपारण - 02 सारण - 46
जहानाबाद - 33 नवादा - 12
पटना - 14 दरभंगा - 01
सीवान - 13 शिवहर - 04
बेगसराय - 05 मुजफ्फरपुर - 08
भवुआ - 05
Sunday, February 21, 2016
मोबाइल और बाइक स्कूल करेगा जब्त, तीन हजार तक लगेगा जुर्माना
- नामांकन के समय ही स्कूल भरवायेगा शपथ पत्र
रिंकू झा, पटना
स्कूल में माेबाइल और बाइक लाना स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों के लिए अब महंगा पड़ने वाला है. अभिभावक अगर बच्चों को स्कूल बाइक से भेजेंगे तो बाइक को अब स्कूल जब्त करेगा. इतना ही नहीं जिन स्टूडेंट्स के पास मोबाइल पाया जायेगा, उनके मोबाइल को स्कूल जब्त करेगा. जो मोबाइल जब्त होगा, उस मोबाइल को अभिभावकों को लौटाया नहीं जायेगा. इसके अलावा मोबाइल के साथ पकड़े जाने वाले स्टूडेंट्स पर तीन हजार तक का जुर्माना भी स्कूल की तरफ से लगाया जायेगा. ये सारे फैसले क्रिश्यचन माइनोरिटी स्कूल एसोसिएशन की ओर से लिया गया है. हाल में हुए स्कूलों की आपसी बैठक में यह निर्णय लिया गया है.
- शपथ पत्र भरने के बाद ही नामांकन होगा स्टूडेंट्स का
बोर्ड परीक्षा होने के कारण स्कूल मोबाइल और बाइक पर प्रतिबंध तत्काल नहीं लगा रहा है. क्योंकि एक मार्च से बोर्ड परीक्षा और उसके बाद स्कूल की फाइनल एग्जाम होने के बाद स्कूल बंद हो जायेगा. एक अप्रैल से नये सेशन के साथ यह नियम लागू किये जायेंगे. डान बास्को एकेडमी की प्रिंसिपल मेरी अल्फांसो ने बताया कि किसी भी क्लास में नामांकन के लिए इस बार अभिभावकों से शपथ पत्र भरवाया जायेगा. शपथ पत्र भरने के बाद भी अगर स्टूडेंट्स माेबाइल लेकर या बाइक से स्कूल आयेंगे तो जुर्माना अधिक कर दिया जायेगा. वहीं शपथ पत्र भरने के बाद ही स्टूडेंट्स का नामांकन स्कूल में हो पायेगा.
- स्कूल गेट के बाहर की गाड़ी ट्रैफिक पुलिस करेगा जब्त
स्कूल के अंदर बाइक से आने पर स्कूल जब्त करेगा. वहीं जो स्टूडेंट्स स्कूल के बाहर बाइक लगायेंगे तो ऐसे बाइक को ट्रैफिक पुलिस को जब्त करने को स्कूलों की ओर से कहा गया है. पिछले सप्ताह पटना ट्रैफिक पुलिस के साथ स्कूल प्रशासक की बैठक हुई है. इस बैठक में स्कूल प्रशासक की ओर से ट्रैफिक एसपी पीके दास को स्कूल गेट के बारह खड़े तमाम बाइक को जब्त करने का अाग्रह किया गया है. ज्ञात हो कि स्कूल में बाइक लाने पर पाबंदी लगा देने के बाद स्टूडेंट्स स्कूल गेट के बाहर बाइक और स्कूटी लगाते है. इससे स्कूल चाहते हुए भी कार्रवाई नहीं कर पाते है.
- डीपीएस में पांच हजार तक लगता है जुर्माना
डीपीएस में मोबाइल लाने पर सजा दी जाती है. डीपीएस के प्रिंसिपल बी विनोद ने बताया कि अगर कोई स्टूडेंट्स स्कूल में मोबाइल लेकर आता है तो इसके लिए उनके ऊपर पांच हजार का जुर्माना लगाया जाता है. मोबाइल के साथ पकड़े जाने पर किसी तरह की माफी नहीं दी जाती है. किसी स्टूडेंट्स के साथ इमरजेंसी होने पर स्कूल की तरफ से फोन आदि की मदद दी जाती है.
स्टूडेंंट्स और अभिभावक मोबाइल को लेकर स्कूल के पास बनाते है तरह-तरह के बहाना
- स्कूल के बाद कोचिंग जाना होता है, इस कारण माेबाइल लाने दिया जाये- स्कूल में इमरजेंसी होने पर मोबाइल की जरूरत होगी है
- स्कूल के छुट्टी के बाद अगर कोई जरूरत हो तो बिना मोबाइल के अभिभावक से कैसे संपर्क होगा - मोबाइल पास होने से अभिभावक और बच्चे के बीच संपर्क बना रहता है
- बच्चे के पास मोबाइल होने से अभिभावक को चिंता नहीं रहती है
कोट
डीएम के साथ बैठक में मोबाइल और बाइक पर पाबंदी लगाने की बात कहीं गयी थी. इसके बाद हमने आपस में बैठक कर कुछ फैसले लिये है. इस बार नामांकन के समय अभिभावकों से शपथ पत्र भरवाया जायेगा. कोई भी स्टूडेंट्स बाइक और मोबाइल के साथ पकड़ें जायेंगे तो उसे जब्द कर लिया जायेगा. जुर्माना भी लगाया जायेगा.
जी जे गॉल्स्टॉन, प्रेसिडेंट, क्रिश्चयन माइनोरिटी स्कूल एसोसिएशन
स्कूल की ओर से मोबाइल और बाइक पर रोक क्यूं नहीं लगायी जाती है. स्कूल की ओर से इस पर कड़े निर्णय लिये जायें. स्कूल के स्टूडेंट्स के पास ड़ाइविंग लाइसेंस नहीं होता है. ऐसे में बाइक पर पूरी तरह से पाबंदी स्कूल को लगाना है. अभिभावकों को इसके लिए स्कूल अपनी ओर से निर्देश जारी करें.
संजय कुमार अग्रवाल, डीएम, पटना (11 फरवरी की बैठक में डीएम ने दिया था निर्देश)
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गदर आंदोलन पर चली मिथिला की निब, बिहार से पहुंचा कनाडा
मिथिला पेंटिंग को अलग स्वरूप दे रही है पटना की अलका दास
संवाददाता, पटना
उन दिनों देश पर अंग्रेजों का शासन था. अंग्रेजों के शासन से बचने के लिए पंजाब के किसान कनाडा चले गये. वहां पर उन्हें भारतीय मजदूर बना कर कनाडा में रखा गया. जहाज से महीनों उन्हें कनाडा जाने में लगा. कनाडा में मजदूरी और शोषण से परेशान होकर लोग वापस देश आना चाहते थे, लेकिन उन्हें कनाडा से नहीं आने दिया जा रहा था. 1890 से 1910 ईश्वी तक चला गदर आंदोलन की शुरूआत लाला हरदयाल सिंह ने किया. गदर आंदोलन को अगर चित्रों से समझना अलका दास की पेंटिंग में आपको वो हर पहलू नजर आयेगा, जो अभी तक आपने किताबाें में पढ़ा होगा. बिहार की बेटी अलका दास ने पंजाब के किसान और उनकी मजबूरी को अपने निब से बखूबी बताया है. किस तरह किसान से अंग्रेजों से खेत छीना और वो कनाडा मे जाकर मजदूर बन गये. मिथिला पेंटिंग को एक अलग पहचान देने की कोशिश अलका दास कर रही है. 16 पेंटिंग के माध्यम से पूरा गदर आंदोलन को अलका दास ने बताने की कोशिश की है.
- मिथिला पेंटिंग ने लिया आंदोलन का स्वरूप
अभी तक मिथिला पेंटिंग में मिथिलांचल की सुगंध की मिलती रही है. सीता राम विवाह, कोबर और मिथिलांचल के आवोहवा ही मिथिला पेंटिंग की पहचान हुआ करती थी. लेकिन अब स्वतंत्रता संग्राम से लेकर पर्यावरण सुरक्षा में भी मिथिलांचल ने अपना जगह बनाना शुरू कर दिया है. अलका दास ने बताया कि वो मिथिला पेंटिंग में अलग-अलग टॉपिक पर काम कर रही है. इससे लोगों का रूझान मिथिला पेंटिंग पर अलग तरीके से हो रहा है. उन्होंने बताया कि मिथिला पेंटिंग में प्रयोग नहीं हुआ है, इससे इसकी मार्केटिंग सिमट सी गयी है. कुछ अलग करने की चाह ने उन्हें अलग टॉपिक पर काम करने का प्रेरणा दी है.
- सती प्रथा और दहेज को बनायेगी अपना मुददा
अलका दास का अब अगला टॉपिक देश में उन आंदोलन पर फोकस करना है जिसके कारण देश में आंदोलन की जरूरत पड़ी. इसमें सती प्रथा, बाल विवाह जैसे समाजिक कुरीतियों के विराेध में चले आंदोलन शामिल है. अलका दास ने बताया कि अभी देश में दहेज प्रथा काफी ज्वलंत मुददा है. दहेज प्रथा को खत्म करना जरूरी है. चित्रों के माध्यम से लोगों को खासकर मिथिलांचल वासी को अवेयर किया जायेगा.
- नेचुरल रंगों का करती है प्रयाेग
अलका दास मार्केट से रंग खरीद कर नहीं बल्कि खुद का भी रंग तैयार कर पेंटिंग काे अलग रंग देने की कोशिश करती है. गोबर और कोयला को मिला कर काला रंग तैयार करती है. तो गेंदा फूल से पीला रंग, सीम के पत्ते से हरा रंग और चुकंदर से पिंक रंग तैयार कर पेंटिंग में रंगों को भरती है. अलका दास ने बताया कि प्राकृतिक रंगों से पेंटिंग में प्राकृतिक खुशबू आती है.
- समाज के विरोध कर करना पड़ रहा सामना
रामायण, महाभारत और मिथिलांचल के रीति रिवाज को ही अब तक मिथिला पेंटिंग तक सीमित रखा गया है. ऐसे में जब अलका दास ने इसे आगे बढ़ाना चाहा तो उन्हें समाजिक विराेध का भी समाना करना पड़ा. अलका दास ने बताया कि हमारे समाज में आज भी मेरे पेंटिंग का विराेध होता है. लोगों का विरोध कर कहते है कि मिथिला पेंटिंग मिथिला तक ही होता है. सीता राम और उनसे जुड़े हुए चीजों तक ही मिथिला पेंटिंग काे माना जाता है. दूसरे टॉपिक पर मिथिला पेंटिंग को नहीं माना जायेगा.
आंख से कमजोर परीक्षार्थियों के लिए तैयार हुआ स्क्रीन रीडिंग सॉफ्टवेयर, कई गुणा बड़ा दिखेगा अक्षर
सीबीएसइ ने 10वीं और 12वीं बोर्ड ब्लाइंड परीक्षार्थी के लिए किया खास इंतजाम
संवाददाता, पटना
जिनके आंख कमजोर है, जिन्हें काफी कम दिखायी देता है, जिन्हें छोटे अक्षर देखने में प्राॅब्लम होता है और वो सही से उसे पढ़ नहीं पाते है, आंख में रोशनी कम होने के कारण उसे छोटे अक्षर दिखायी नहीं देते है. ऐसे आंख से कमजोर परीक्षार्थी के लिए सीबीएसइ ने इस बार स्क्रीन रीडिंग सॉफ्टवेयर तैयार किया है. 10वीं और 12वीं बोर्ड के परीक्षार्थी के लिए पहली बार सीबीएसइ ने यह सुविधा दी है. इस साॅफ्टवेयर की मदद से कोई भी अक्षर कई गुणा बड़ा करके देखा जा सकेगा.
- हर शहर में होगा एक स्पेशल परीक्षा केंद्र
सीबीएसइ की ओर से हर शहर में एक परीक्षा केंद्र ऐसे बनाये जायेंगे, जहां पर कंप्यूटर में इस साॅफ्टवेयर काे लगाया जा सकेगा. इसी परीक्षा केंद्र पर आंख से कमजोर परीक्षार्थी आकर बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे. परीक्षार्थी को इसकी जानकारी अपने रीजनल ऑफिस में परीक्षा के तीन दिन पहले देना होगा. ऐसे परीक्षार्थी को उस परीक्षा केंद्र के बारे मे बताया जायेगा.
- पटना जोन से 764 परीक्षार्थी होंगे शामिल
इस बार पटना जोन से आंख से कमजोर परीक्षार्थी की संख्या 764 है. इसमें 10वीं बोर्ड में 500 और बांकी परीक्षार्थी 12वीं बोर्ड के शामिल होंगे. सीबीएसइ के अनुसार परीक्षा सेंटर बिहार और झारखंड में लगभग तीन-तीन शहरों में बनाया जायेगा. सेंटर पर इस साॅफ्टवेयर काे स्टूडेंट की संख्या के अनुसार कंप्यूटर में लगाया जायेगा. परीक्षा शुरू होते ही प्रश्न पत्र खुल जायेगा. स्टूडेंट अपनी सुविधा के अनुसार अक्षर का साइज बड़ा और छोटा कर सकते है़
- ओमान में पढ़ रहा मृणाल को सीबीएसइ ने दिया था सुविधा
2015 में 10वीं बोर्ड की परीक्षा में पहली बार इस साॅफ्टवेयर का इंतजाम किया गया था. पटना का मृणाल ओमान की राजधानी मस्टक में सीबीएसइ स्कूल में पढ़ रहा था. 10वीं बोर्ड की परीक्षा के समय स्कूल प्रशासन की ओर से सीबीएसइ को इस सॉफ्टवेयर पर ही मृणाल की परीक्षा लेने की अनुमति मांगी गयी थी. इस साॅफ्टवेयर की वजह से मृणाल को सीबीएसइ 10वीं की परीक्षा देने में काफी आसानी हुई. मृणाल अच्छे अंकों से पास भी किया. रिजल्ट के बाद मानव संसाधन मंत्रालय की मंत्री स्मृति ईरानी से मृणाल के जज्बे को लेकर बधाई पत्र भी भेजा था.
स्क्रीन रीडिंग साॅफ्टवेयर से होगा ये सारे फायदे
- जिन परीक्षार्थी को पांच या दस फीसदी तक भी दिखायी देता है, तो वो इस साॅफ्टवेयर से परीक्षा दे पायेगा
- इस सॉफ्टवेयर में ब्रेल लिपि से परीक्षा देने की जरूरत नहीं होती है- इस सॉफ्टवेयर की मदद से किसी भी अक्षर को कई गुणा बड़ा करके देखा और पढ़ा जा सकेगा
- प्रश्नों को बड़ा रूप मे परीक्षार्थी देख पायेंगे, इससे उन्हें दूसरे की मदद नहीं लेनी पड़ेगी - पहले से ही इस सॉफ्टवेयर पर प्रश्न पत्र रख दिया जायेगा. परीक्षा का समय शुरू होने पर इसे स्टूडेंट खोल पायेंगे
कोट
इस साॅफ्टवेयर से परीक्षार्थी को काफी सुविधा होगी. जिन स्टूडेंट्स के आंख कमजोर होते है. उन्हें अक्षर नहीं दिखायी देने के कारण ब्रेल लिपि में ही परीक्षा देने की मजबूरी होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. ऐसे परीक्षार्थी अब सामान्य परीक्षार्थी की तरह परीक्षा दे पायेंगे.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ
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इंटर एडमिट कार्ड की गड़बड़ी से परेशान हैं परीक्षार्थी, रौल नंबर साइंस का और सब्जेक्ट हो गया आर्ट्स
- एडमिट कार्ड की गड़बड़ी पर स्कूल और कॉलेज प्राचार्य को दिये गये कई अधिकार
संवाददाता, पटना
रौल नंबर है साइंस का अौर एडमिट कार्ड आर्ट्स का मिल गया. परीक्षार्थी ने आर्ट्स की तैयारी की है. अब साइंस की परीक्षा में कैसे शामिल हो. किस स्ट्रीम की परीक्षा दे, इससे परेशान इंटर के परीक्षार्थी अब काउंसिल पहुंच रहे है. तीन दिनों के बाद इंटर की परीक्षा शुरू होगा, लेकिन कई परीक्षार्थी को उनका सही एडमिट कार्ड नहीं मिल पाया है. इंटर के एडमिट कार्ड में कई तरह की गड़बड़ी पायी गयी है. कई कॉलेज और स्कूलों में तो रोल नंबर और सब्जेक्ट की गड़बड़ियां कई परीक्षार्थी के साथ हो गया है.
- कंप्यूटर से करना होगा ठीक
बिहार बोर्ड के अनुसार एडमिट कार्ड की यह गड़बड़ी कंप्यूटर से ठीक करना होगा. परीक्षा फाॅर्म भरने के समय स्कूल की गलती के कारण ऐसा होता है. जिन छात्रों से परीक्षा फाॅर्म भरने के समय विषय में परिवर्तन किया होगा, उन्हें इसकी जानकारी बोर्ड को देना चाहिए था. चुकी बोर्ड के पास उन छात्रों के डिटेल्स में रजिस्ट्रेशन वाला ही सब्जेक्ट कंप्यूटर में था. लेकिन परीक्षा फार्म भरते समय सबजेक्ट चेंज हो गया. लेकिन रौल नंबर तो रजिस्ट्रेशन के अनुसार ही दिया गया है. इस कारण यह गड़बड़ी हुई.
- फोटो और सेंटर की गड़बड़ी हो तो प्राचार्य करें ठीक
अगर किसी छात्र के एडमिट कार्ड में स्कैन फोटो ना हो, फोटो गलत हो, फोटाे नहीं हो, जन्मतिथि गलत हो, सेंटर का नाम गलत हो, नाम में गलती हो गया हो, इन सभी गलती को तत्काल ठीक करने का अधिकार इस बार स्कूल और कॉलेज के प्राचार्य को दिया गया है. फोटो संबंधित एडमिट कार्ड पर गलती होगी तो प्राचार्य छात्र का ऑरिजनल फोटो लगा कर उसे वेरिफाई करेंगे. उसी तरह जन्मतिथि, नाम में गलती आदि होने पर भी सही जानकारी देकर प्राचार्य उसे वेरिफाई करेंगे. लेकिन इसे रिजल्ट निकलने के पहले छात्र इंटर काउंसिल से सही करवाना होगा.
कोट
एडमिट कार्ड में किसी तरह की गड़बड़ी होगी तो उसे सही किया जायेगा. इस बार प्राचार्य को कई अधिकार दिये गये है. प्राचार्य अपने स्तर से एडमिट कार्ड को वेरिफाई कर सकेंगे.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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आज से शुरू हुई बोर्ड परीक्षा, 22 से आइएससी और 24 से इंटर की परीक्षा होगी शुरू
- अगले हफ्ते सीबीएसइ 12वीं की परीक्षा होगी शुरू
संवाददाता, पटना
बोर्ड परीक्षा की उल्टी गिनती खत्म हो चुकी है. सोमवार से बोर्ड परीक्षा का दौर शुरू हो जायेगा. आइसीएसइ बोर्ड के आइएससी (12वीं) की परीक्षा 22 फरवरी से शुरू हो रही है. पहले दिन कंप्यूटर साइंस सब्जेक्ट का एग्जाम होगा. वहीं 24 फरवरी से बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा लिया जाने वाला इंटर की परीक्षा शुरू होगी. इंटर की परीक्षा 5 मार्च तक चलेगा. एक मार्च से सीबीएसइ 12वीं की बोर्ड परीक्षा शुरू होगा. इस बार विभिन्न बोर्ड को मिला कर लगभग 26 लाख परीक्षार्थी 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा में बिहार से शामिल होंगे.
- मई तक चलेगा बोर्ड परीक्षा
फरवरी अंतिम सप्ताह से बोर्ड परीक्षा शुरू होगा. यह परीक्षा मार्च से अप्रैल तक चलेगा. अप्रैल में बिहार राज्य मदरसा बोर्ड और मई में संस्कृत शिक्षा बोर्ड की परीक्षा ली जायेगी. बिहार बोर्ड के इंटर और मैट्रिक की परीक्षा तो मार्च में ही समाप्त हो जायेगा. लेकिन सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड की 10वीं ओर 12वीं बोर्ड अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक चलेगा. हर बोर्ड ने परीक्षा को लेकर अपनी तैयारी पूरी कर ली है.
बोर्ड परीक्षा संबंधित जानकारी
आइसीएसइ बोर्ड
12वीं बोर्ड - 22 फरवरी से 8 अप्रैल तक परीक्षार्थी की संख्या - पांच हजार
10वीं बोर्ड - 29 फरवरीसे 31 मार्च तक परीक्षार्थी की संख्या - 20 हजार
परीक्षा के लिए बनाये गये सेंटर - 17
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
इंटर - 24 फरवरी से 5 मार्च परीक्षार्थी की संख्या - 11 लाख 57 हजार 970
मैट्रिक - 11 मार्च से 18 मार्च तक परीक्षार्थी की संख्या - लगभग 15 लाख
परीक्षा के लिए बनाये गये सेंटर - 150
सीबीएसइ
12वीं बोर्ड - 1 मार्च से 22 अप्रैल तक परीक्षार्थी की संख्या - 86 हजार
परीक्षा के लिए बनाये गये सेंटर - 110510वीं बोर्ड - 2 मार्च से 28 मार्च
परीक्षार्थी की संख्या - एक लाख 50 हजार
कोट
सोमवार से 12वीं बोर्ड के थ्योरी पेपर शुरू होगा. कंप्यूटर साइंस की पहले दिन पेपर है.12वीं में स्टूडेंट्स कम होते है. इससे एक दो ही स्कूल में एग्जामिनेशन सेंटर बनाया गया है.
मेरी अल्फांसो, प्रिंसिपल, डान बास्को एकेडमी
एक मार्च से सीबीएसइ 12वीं की परीक्षा शुरू होगा. इस बार साइंस के मुख्य विषय की परीक्षा 18 मार्च तक ले ली जायेगी. आर्ट्स के कुछ विषयों की परीक्षा अप्रैल तक चलेगा.
राजीव रंजन सिन्हा, प्रिंसिपल, वाल्डविन एकेडमी
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परीक्षा में नकल की कहानी, कभी नहीं होगी पुरानी
- नकल बदल देता परीक्षा की सूरत, फिर भी बिना नकल के परीक्षा नहीं होती पूरी
रिंकू झा, पटना
परीक्षा में नकल करना कोई नयी बात नहीं है. स्कूल लेबल के परीक्षा की बात हो या बोर्ड परीक्षा हो, नकल होना तय है. बोर्ड परीक्षा में परीक्षार्थी नकल ना करे, इसके लिए कई उपाय किये जाते है. नियम भी बनाये जाते है. परीक्षा के पहले धमकी भी दी जाती है, लेकिन नकल करने वाला उसमें भी अपने लिए उपाय निकाल ही लेता है. परीक्षा खासकर बोर्ड परीक्षा में नकल की कहानी, कभी पुराना नहीं हुआ है, हां भले इसके तरीके चेंज हो गये है. स्कूल की परीक्षा तक चिट-पूर्जे से काम चल जाता है, तो वहीं बोर्ड परीक्षा में कैमरा पेन और उत्तर पुस्तिका की अदला बदली करते है. वहीं जब यहीं छात्र प्रतियोगी परीक्षा तक पहुंचते है तो मोबाइल और ब्लूट्रूथ का इस्तेमाल नकल के रूप में करते है. यानी अब नकल का दायरा क्लास रूम से निकल कर बाहर तक पहुंच गया है.
- नकल के कारण परीक्षा करना पड़ता है कैंसिल
बोर्ड परीक्षा से आगे बढ़ कर अब तो नकल प्रतियोगी परीक्षा तक पहुंच गया है. कई बार तो नकल इतना अधिक हो जाता है कि परीक्षा तक को कैंसिल करना पड़ता है. कई सालों पहले आइआइटी एंट्रांस में करना पड़ा था. वहीं पिछले साल 2015 अप्रैल में हुआ एआइपीएमटी में बड़े पैमाने पर नकल किया गया था. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. इसके बाद दुबारा एआइपीएमटी लिया गया. इस परीक्षा में कई राज्य में ब्लूट्रूथ से नकल की घटना हुई थी.
परीक्षा में नकल से जुड़ी कुछ सच्ची घटनाएं
खांसी करके एक दूसरे को बताते थे वस्तुनिष्ट प्रश्न
हमारे 10वीं बोर्ड का एग्जाम था. उस समय सीबीएसइ बोर्ड में ऑब्जेक्टिव प्रश्न भी पूछे जाते थे. फिजिक्स की परीक्षा की थी. 10 मार्क्स के आब्जेक्टिव प्रश्न थे. मुझे केवल पांच के ही उत्तर आ रहे थे. फिर क्या था चार बेंच आगे बैठा मेरे दोस्त से आंखों से इशारा किया. इसके बाद हम खांसी करके उत्तर की संख्या बताने लगे. परीक्षा के दौरान थोड़ी-थोड़ी देर पर खांसी करते थे. एक बार खांसी करके लगातार दो बार खांसी किया तो पता चल गया कि प्रश्न संख्या एक का उत्तर दो होगा. इसी तरह से दस प्रश्न का उत्तर हमने लिखा.
मोनू, छात्र, 10वीं, सीबीएसइ
पेन के ढ़क्कन में रखती थी चिट
परीक्षा की तैयारी से अधिक समय मै चिट को तैयार करने में देती थी. परीक्षा होने के एक दिन पहले मै छोटे-छोटे कागज को इक्टठा किया. उसमें छोटे-छोटे अक्षरों में उत्तर लिखी. ऐसे लगभग 100 चिट मै तैयार कर लिया. सारे चिट को पेन के ठक्कन में डाल कर उसमें पेन डाल कर सुरक्षित रख लिया. जब प्रश्न पत्र मिला तो मुझे यह पता चल गया कि किस प्रश्न का उत्तर वाला चिट हमारे पास है. परीक्षा शुरू होने के आधे घंटे के बाद बाथरूम का बहाना बना कर क्लास रूम से निकल गयी. बाथरूम में जाकर पेन से वो चिट निकाल कर स्कर्ट में छुपा लिया, जिसमें आंसर लिखा हुआ मिला.
सुरभि, छात्रा, इंटर, बिहार बोर्ड
स्कूल यूनिफाॅर्म के दुपट्टे पर लिख कर लायी थी उत्तर
मेरी 12वीं बोर्ड की परीक्षा थी. मुझे मैथ में बहुत डर लग रहा था. तैयारी नहीं थी. फर्मूला याद नहीं रहता था. मै फर्मूला का चिट तैयार कर लिया. फिर सोचा अगर चिट के साथ पकड़े जायेंगे तो बहुत मुश्किल हो जायेगा. इसके बाद मैने अपने यूनिफार्म के दुपट्टे पर सारा फर्मूला लिख लिया. यूनिफार्म का दुपट्टा हमें फोल्ड करके पहनना होता था. उसमे पिन लगाया जाता था, इससे अंदर लिख कर मै सुरक्षित थी. जब एग्जाम शुरू हुआ तो मै दुपट्टे का पिन खोल दिया. इसके बाद जहां पर फर्मूला लिखा था, उसे आसानी से देख पा रही थी. फर्मूला की मदद से मैने प्रश्न का उत्तर दिया.
साक्षी, 12वीं, सीबीएसइ
चिट और आपसी पूछ ताछ के अलावा बोर्ड परीक्षा में नकल के कुछ नये तरीके
1़ पेन कैमरा से करते है नकल -
पेन कैमरा का इस्तेमाल एक दो साल से बोर्ड परीक्षा में स्टूडेंट्स करते है. इस पेन की खासियत होती है कि इस पेन से लिखने पर कागज पर कुछ नजर नहीं आता है. कागज पूरा सादा ही दिखता है. पेन के दूसरे हिस्से में लाइट लगी होती है. इस लाइट को कागज पर ले जाने से लिखा हुआ मैटर नजर आता है. परीक्षा के दौरान स्टूडेंट क्वेश्चन पेपर पर अांसर लिख कर क्वेश्चन पेपर की अदला बदली करते है. इस पेन को पकड़ना टीचर्स के लिए मुश्किल हो रहा है.
2़ कैलकुलेटर वाली घड़ी का करते इस्तेमाल -
10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा में इस घड़ी का इस्तेमाल कर नकल करते है. यह ऐसा कैलकुलेटर होता है जो देखने में घड़ी के जैसा लगता है. लेकिन यह केवल कैलकुलेटर होता है. इसे हाथ में पहन कर स्टूडेंट्स आ जाते है. परीक्षा के दौरान कैलकुलेशन संबंधित सारा कुछ इससे आसान हो जाता है. टीचर भी पकड़ नहीं पाते है. ऐसे में अब कुछ स्कूलों ने परीक्षा के दौरान घड़ी पहनने पर रोक लगा दी है.
बोर्ड परीक्षा में सामान्य तरीके से नकल करके पास हो गये, लेकिन प्रतियोगी परीक्षा के लिए हाइटेक नकल चलता है.
चिट-पूर्जे से काम नहीं चलता है. प्रतियोगी परीक्षा में इन चीजों का नकल के रूप में होता है इस्तेमाल
- ब्लू टूथ वाॅच के साथ इयरपीस
- ब्लू टूथ नेक के साथ इयरपीस सेट - ब्लू टूथ शर्ट के साथ इयरपीस सेट
- ब्लू टूथ पेन सेट- ब्लू टूथ मैग्नेटिक इयरपीस सेट
- ब्लू टूथ जैकेट के साथ इयरपीस सेट- ब्लू टूथ कैप सेट
- ब्लू टूथ इरेजर - ब्लू टूथ ताबीज
- ब्लू टूथ मोबाइल वाॅच
परीक्षा में नकल के कुछ सामान्य तरीके
- आंख से इशारे में बातें करना - पलक झपका कर वस्तुनिष्ठ प्रश्न का नंबर बताना
- खांसी करके उत्तर की संख्या बताना - कॉपी बदल लेना
- प्रश्न पत्र पर उत्तर लिख कर एक दूसरे को अदला बदली करना- वस्तुनिष्ठ प्रश्न का उत्तर उंगली की संख्या से एक दूसरे को बताते है
- टीचर्स के आपस मे बात करने से एक दूसरे से पूछ कर करते है नकल - एक ही समय पर पानी पीने या बाथरूम के लिए बाहर जाना
- फुल शर्ट को फोल्ड करके उसमें चिट डाल कर ले जाना
परीक्षा के दौरान इन उपायों से टीचर रोकते है नकल
- परीक्षा हॉल में छात्र के पीछे जाकर हो जाते है खड़े - हमेशा क्लास रूम में एक जगह से दूसरे जगह पर जाना
- छात्र के अांख से उसे नकल करने की टेडेंसी को पकड़ना - आपस में बात करते हुए छात्र को पकड़ना
- प्रश्न पत्र पर लिखा हुआ रौल नंबर की चेकिंग की जाती है
टीचर्स की बातें
एग्जाम शुरू होने के पंद्रह मिनट तक मै पूरी तरह से रिलैक्स रहता हूं. इससे क्लास रूम में उन छात्राें को पकड़ना आसान हो जाता है, जो नकल करने के मूड में होते है. उनकी एक्टिविटी से हम उन्हें पहले वाच कर लेते है. उसके बाद पूरे परीक्षा के दौरान उन पर नजर रखी जाती है. कई बार नकल करते हुए रंगे हाथ भी स्टूडेंट्स पकड़ में आते है.
संजय कुमार, मैथ टीचर, लोयेला हाई स्कूल
नकल करने के लि पहले से ही आपस में सेटिंग करते है. हर स्टूडेंट्स की चेकिंग की जाती है. स्कूल एग्जाम में तो जूनियर के साथ सीनियर को बैठा कर परीक्षा ली जाती है. इससे जूनियर स्टूडेंट्स सीनियर को नकल करते देखते है तो टीचर को जाकर बता देते है. एग्जाम के दौरान हर स्टूडेंट्स के एक्टिविटी पर नजर रखती हूं. किस पेन से आंसर कर रहे है, उसे चेंक करते है.
पुष्पा सिंह, सोशल स्टडी टीचर, लिट्रा वैली हाई स्कूल
सीटीइटी संपन्न, 86 फीसदी कैंडिडेंट्स हुए शामिल
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ द्वारा लिया जाने वाला सेंट्रल टीचर इलिजिब्लिटी टेस्ट (सीटीइटी) रविवार को संपन्न हो गया. पूरे बिहार में इसके लिए 39 परीक्षा केंद्र बनाये गये थे. 29 परीक्षा केंद्र पटना में और 10 केंद्र मुजफ्फरपुर में बनाये गये थे. टेस्ट दो पाली में लिया गया. पहली पाली में सेकेंड पेपर जिसमें क्लास 6ठीं से 8वीं तक के टीचर बनने वाले कैंडिडेंट्स शामिल हुए. वहीं दूसरी पाली में फर्स्ट पेपर क्लास वन से 5वीं तक के लिए टीचर बनने वाले कैंडिडेंट्स शामिल हुए. पहली पाली सुबह 10 बजे से 12.30 बजे तक और दूसरी पाली 2 बजे से 4.30 बजे तक आयोजित किया गया.
- 86 फीसदी कैंडिडेंट्स हुए शामिल
सीबीएसइ पटना रीजनल आॅफिस के अनुसार सीटीइटी में इस बार 43 हजार कैंडिडेंट्स शामिल ने फार्म भरा था. इसमें 26 हजार कैंडिडेंट्स ही परीक्षा में शामिल हुए. 19 हजार कैंडिडेंट्स पटना में आयोजित सेंटर पर परीक्षा में शामिल हुए, वहीं 7 हजार कैंडिडेंट्स मुजफ्फरपुर में परीक्षा दिये है. बोर्ड के अनुसार इस बार 86 फीसदी कैंडिडेंटस ही शामिल हुए. लगभग 14 फीसदी कैंडिडेंट्स टेस्ट नहीं दे पायें. इसमें कई कैंडिडेंट्स के सेंटर पर देरी से पहुंचने के कारण परीक्षा नहीं देने दिया गया. इसके अलावा मोबाइल के साथ भी कई कैंडिडेंटस पकड़ में आने के कारण टेस्ट नहीं दे पायें. बोर्ड के अनुसार एडमिट कार्ड और परिचय पत्र के साथ ही कैंडिडेंटस को परीक्षा देने की अनुमति दी गयी थी.
- 6 अप्रैल को निकलेगा सीटीइटी रिजल्ट
21 फरवरी को सीटीइटी की परीक्षा और 6 अप्रैल को इसका रिजल्ट घोषित किया जायेगा. सफल अभ्यर्थी को अंक तालिका और प्रमाण पत्र 6 जून से मिलना शुरू हो जायेगा.
Wednesday, February 17, 2016
नकल पर सख्ती का असर, एक लाख ने छोड़ी इंटर की परीक्षा
- रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फाॅर्म में आया एक लाख छात्रों का अंतर
संवाददाता, पटना
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने कदाचार मुक्त परीक्षा लेने का क्या मन बनाया कि हजारों छात्रों ने इंटर की परीक्षा का फाॅर्म ही नहीं भरा. इंटर में नकल पर समिति के कड़े निर्णय लेने का छात्रो पर परीक्षा के पहले ही ऐसा असर हो गया कि उन्होंने इंटर का परीक्षा देने से ही इंकार कर दिया. यह मामला इंटरमीडिएट के रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फाॅर्म भरे जाने वाले छात्रों की संख्या के बाद पता चला. इंटर में इस बार कुल 12 लाख 46 हजार परीक्षार्थी ने रजिस्ट्रेशन करवाया था. लेकिन इंटर के परीक्षा फाॅर्म भरने वाले कुल परीक्षार्थी की संख्या 11 लाख 58 हजार है. कुल एक लाख 12 हजार परीक्षार्थी इस रजिस्ट्रेशन तो करवाया,लेकिन परीक्षा फाॅर्म नहीं भरें.
- रजिस्ट्रेशन के बाद नकल पर रोक लगाने का हुआ था निर्णय
इंटर के रजिस्ट्रेशन का काम अगस्त से सितंबर तक चला. रजिस्ट्रेशन होने के बाद इंटर और मैट्रिक को कदाचार मुक्त परीक्षा लेने का निर्णय लिया गया. इसके लिए बिहार सरकार की ओर से कई नियम भी बनाये गये. परीक्षा केंद्र पर पुलिस बल लगाने का फैसला लिया गया जिससे बाहर से नकल करने में छात्रों की कोई मदद ना कर सके. इसके अलावा विडियाे ग्राफी और एक बेंच पर दो छात्रों के बैठाने का निर्णय लिया गया. दिसंबर से कदाचार मुक्त परीक्षा को लेकर काम शुरू हुआ.
- 14 लाख परीक्षार्थी के शामिल होने की थी उम्मीद
जिस तरह से हर साल इंटर में परीक्षार्थी की संख्या बढ़ रही है. उससे 2016 के इंटर की परीक्षा में 14 लाख के लगभग परीक्षार्थी के शामिल होने की उम्मीद थी. लेकिन रजिस्ट्रेशन में ही छात्रों की संख्या कम रही. इसके बाद परीक्षा फार्म मात्र 11 लाख 58 हजार परीक्षार्थी ने ही भरा. 2015 की बात करें तो 2016 में 42 हजार अधिक छात्र ही इंटर की परीक्षा में बढ़े है.
पांच साल में सबसे कम बढ़े इस बार इंटर में परीक्षार्थी
साल - कुल परीक्षार्थी की संख्या
2012 - 7 लाख 45 हजार 532013 - 8 लाख 78 हजार 65
2014 - 9 लाख 87 हजार 78 2015 - 11 लाख 10 हजार
2016 - 11 लाख 58 हजार
कोट
इस बार पूरी तरह कदाचार मुक्त परीक्षा ली जायेगी. नकल रोकने के लिए कई इंतजाम किये जा रहे है. रजिस्ट्रेशन में छात्रों की संख्या 12 लाख थी. लेकिन परीक्षा फाॅर्म के बाद छात्रों की संख्या कम हो गयी है.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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अब बच्चे से मारपीट की तो माता-पिता को होगी जेल
- किशोर न्याय अधिनियम के तहत काॅरपोरल पनिशमेंट में अभिभावक भी जोड़े गये
संवाददाता, पटना
अभी तक बच्चों को पनिशमेंट देने, डांटने और मारपीट करने पर स्कूल प्रशासन पर ही कार्रवाई होती थी, लेकिन अब अगर कोई अभिभावक अपने बच्चे के साथ मारपीट करते है. बच्चे को पनिशमेंट देते है तो ऐसे में उन माता-पिता पर भी कार्रवाई की जायेगी. कार्रवाई के तौर पर माता पिता को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है. इस संबंध में तमाम सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के साथ तमाम स्टेट बोर्ड के स्कूलों को सूचना दी गयी है. स्कूल के पास आयी सूचना के अनुसार अभी तक कारपोरल पनिशमेंट में केवल टीचर्स या स्कूल प्रशासन ही शामिल होते थे, लेकिन किशोर न्याय अधिनियम के तहत इसमें अभिभावक को भी जोड़ दिया गया है. इस नियम के अनुसार 15 साल तक के बच्चों के साथ माता पिता मारपीट नहीं कर सकते है.
- तीन से दस साल तक होगी सजा
बच्चो से मारपीट करने पर माता-पिता को तीन से दस साल तक की सजा हो सकती है. इसके अलावा पांच लाख रूपये तक का जुर्माना भी अभिभावक पर लगाया जा सकता है. अगर कोई अभिभावक अपने बच्चे के ऊपर किसी तरह का दबाव भी डालते है, तो वो भी काॅरपोरल पनिशमेंट के अंदर में आ जायेंगे. ऐसे में अगर अभिभावक की शिकायत कोई भी करता है तो उन अभिभावक के उपर कार्रवाई की जायेगी.
- स्कूल लेगा बच्चों से फीडबैक
स्कूल अपने स्तर से इस बात की जांच करेगा कि किसी बच्चे के ऊपर अभिभावक का कोई प्रेशर तो नहीं है. इसके लिए स्कूल की ओर से रेगुलर बच्चे की काउंसेलिंग की जायेगी. अगर काउंसेलिंग में अभिभावकों के मारपीट या किसी तरह के प्रताड़ना की जानकारी स्कूल को मिलती है तो स्कूल इसकी सूचना तुरंत बोर्ड के पास भेजेगा. ऐसे अभिभावक के उपर बोर्ड की ओर केस की जायेगी.
- बाल अधिकार संरक्षण अायोग को भी किया गया शामिल
किशोर न्याय अधिनियम लागू हो इसके लिए बाल अधिकार संरक्षण आयोग, बिहार सरकार काे भी शामिल किया गया है. आयोग के पास किसी तरह की सूचना अभिभावकों के खिलाफ आयेगी तो उस पर आायेग तुरंत अपने स्तर से संज्ञान लेगा. सारी प्रक्रियाएं आयोग को पूरी किया जायेगा. इसके लिए आयोग अपनी तरफ से अभिभावक के उपर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा.
अभिभावक की बात
माता पिता बच्चों को उनके हित के लिए डांटते या मारते है. इस तरह के नियम बनाने से पहले सरकार को सोचना चाहिए था. इससे हमारे समाज पर बुरा असर पड़ेगा.
प्रीति सिंह, अभिभावक, बेली रोड
हमारे देश में माता पिता के डर का सिस्टम रहा है. अगर बच्चों में माता पिता का डर खत्म हो जायेगा तो इसका असर उनके भविष्य पर पड़ेगा. ऐसे में यह कानून गलत है. समाज के लिए यह सही नहीं है.
राकेश पाल, अभिभावक, अल्पना मार्केट, पाटलिपुत्र
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सीबीएसइ 12वीं में आठ हजार बढ़े परीक्षार्थी, 10वीं स्कूल बोर्ड में घटे फिर स्टूडेंट्स
- 1 मार्च से शुरू हाेगा सीबीएसइ बोर्ड एग्जाम, पटना जोन में बनाये गये 250 एग्जामिनेशन सेंटर
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) में इस बार 12वीं बोर्ड देने में परीक्षार्थी की संख्या आठ हजार के लगभग बढ़ गयी है. 2016 में सीबीएसइ 12वीं देने वाले परीक्षार्थी की संख्या 85 हजार है. 2015 की बात करें तो 76,676 ही सीबीएसइ 12वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल हुए थे. इस बार 8,324 परीक्षार्थी अधिक सीबीएसइ 12वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल होंगे. वहीं दूसरी ओर इस बार 10वीं स्कूल बोर्ड देने वाले परीक्षार्थी फिर कम हो गये है. इस बार एक मार्च से सीबीएसइ की 12वीं बोर्ड शुरू होगा. वहीं 10वीं बोर्ड परीक्षा 2 मार्च से शुरू होगा. 10वीं स्कूल बोर्ड 10 मार्च से लिया जायेगा.
- बिहार में 140 परीक्षा केंद्र पर लिया जायेगा बोर्ड एग्जाम
सीबीएसइ 12वीं और 10वीं बोर्ड की परीक्षा के लिए पटना जोन (बिहार और झारखंड) में 250 परीक्षा केंद्र बनाये गये है. इसमें बिहार में 140 केंद्र और झारखंड में 110 परीक्षा केंद्र पर बोर्ड परीक्षा लिया जायेगा. हर सेंटर पर सेंटर मेेटेरियल भेजने का काम शुरू कर दिया गया है. कहीं पर ऑन लाइन तो कहीं पर मैनुअल सेंटर मेटेरियल भेजे जा रहे है. ज्ञात हो कि ऑन लाइन सेंटर मेटेरियल भेजने का काम सीबीएसइ द्वारा पहली बार किया गया है. इस कारण पटना रीजन के कई स्कूलों में ऑन लाइन सिस्टम नहीं होने के कारण मैनृुअल ही सेंटर मेटेरियल भेजे जा रहे है.
- एक लाख 50 हजार देंगे 10वीं बोर्ड
देश भर से इस बार 13 लाख परीक्षार्थी सीबीएसइ 10वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल होंगे. पटना जोन से एक लाख 50 हजार परीक्षार्थी 10वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल होंगे. एक लाख 50 हजार में से 90 हजार परीक्षार्थी 10वीं बोर्ड की परीक्षा देंगे, वहीं 60 हजार के लगभग परीक्षार्थी 10वीं स्कूल बोर्ड में शामिल होंगे. ज्ञात हो कि हर साल स्कूल बोर्ड देने वाले परीक्षार्थी की संख्या कम होती जा रही है. 2015 में 10वीं बोर्ड में स्कूल बोर्ड देने वाले परीक्षार्थी लगभग 70 हजार थे. इस बार 10 हजार और कम हो गये.
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बोर्ड परीक्षा की तैयारी अंतिम चरण में है. सेंटर मेटेरियल तमाम सेंटर पर भेजे जा रहे है. जहां पर ऑन लाइन व्यवस्था है वहां पर ऑन लाइन सेंटर मेटेरियल भेजा गया है. एडमिट कार्ड तमाम स्कूलों में भेज दिया गया है. एक मार्च से 12वीं बोर्ड शुरू होगा.
आरआर मीणा, रीजनल ऑफिसर, सीबीएसइ पटना
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कम हो रहे इंटर साइंस पढ़ने वाले विद्यार्थी की संख्या
- 2016 में एक लाख 17 हजार 240 विद्यार्थी साइंस स्ट्रीम में हुए कम
संवाददाता, पटना
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में इंटर साइंस पढ़ने वाले विद्यार्थी की संख्या इस बार कम हो गयी है. जहां पिछले तीन सालों से इंटर साइंस की परीक्षा देने में लाख दो लाख छात्र बढ़ते थे, वहीं इस बार एक लाख के लगभग विद्यार्थी कम हो गये है. 2015 की बात करें तो छह लाख 24 हजार 662 परीक्षार्थी केवल साइंस विषय में परीक्षा में शामिल हुए थे. लेकिन इस बार कुल विद्यार्थी की संख्या कम हो गयी है. 2016 में पांच लाख सात हजार 422 परीक्षार्थी इंटर साइंस की परीक्षा में शामिल होंगे. ज्ञात हो कि 2013 से 2015 तक साइंस स्ट्रीम में विद्यार्थी की संख्या बढ़ती रही है. लेकिन 2016 में एक लाख 17 हजार 240 विद्यार्थी ही इंटर साइंस की परीक्षा में शामिल होंगे.
- छात्राएं नहीं पढ़ना चाहती साइंस
बिहार बोर्ड की छात्राएं साइंस नहीं पढ़ना चाहती. तभी तो हर साल साइंस की परीक्षा में शामिल होने में छात्राओं की संख्या घटती जा रही है. पिछले दो सालों की बात करें तो मात्र एक लाख के लगभग ही छात्राएं साइंस से इंटर परीक्षा में शामिल हो रही है. इस बार इंटर साइंस की परीक्षा में नौ लाख 57 हजार 950 परीक्षार्थी शामिल हो रहे है. इसमें पांच लाख सात हजार 422 परीक्षार्थी साइंस स्ट्रीम से परीक्षा में शामिल होंगे. साइंस की परीक्षा देने में छात्र की संख्या चार लाख नौ हजार 229 है. वहीं छात्राओं की संख्या एक लाख 51 हजार 193 है.
- आर्ट्स में बढ़ रहा छात्र की संख्या
इस बार इंटर साइंस के साथ आर्ट्स स्ट्रीम में भी छात्र की संख्या बढ़ी है. 2015 की बात करें तो आर्ट्स विषय में छात्र डेढ़ लाख के लगभग इंटर आर्ट्स में छात्र शामिल हुए थे. 2016 में आर्ट्स विषय में भी छात्रो की संख्या बढ़ी है. 2016 के इंटर आर्ट्स में दो लाख 12 हजार 104 परीक्षार्थी शामिल होंगे. वहीं आर्ट्स मेंं तीन लाख 14 हजार 191 छात्राएं शामिल होंगी.
- वोकेशनल कोर्स में फिर घटे छात्र
इंटर की परीक्षा में वोकेशनल कोर्स में छात्र की संख्या इस बार भी कम हो गयी है. वोकेशनल में हर साल विद्यार्थी कम होते जा रहे है. 2014 में जहां वोकेशनल कोर्स में 19 सौ परीक्षार्थी शामिल हुए थे. वहीं 2015 में संख्या 18 सौ पर आ गया था. 2016 में इसकी संख्या कम हो कर 16 सौ पर आ गया है.
साल - विषय - कुल विद्यार्थी की संख्या
2013 - साइंस - 3 लाख 62 हजार 049
2014 - साइंस - 4 लाख 63 हजार 305 2015 - साइंस - 6 लाख 24 हजार 662
2016 - साइंस - 5 लाख 7 हजार 422
Monday, February 15, 2016
सीबीएसइ ने कहा - यूजर आइडी और पासवर्ड रखें तैयार, तभी मिलेगी बोर्ड एग्जाम मेटेरियल
- 10वीं और 12वीं बोर्ड एग्जाम का मेटेरियल इस बार ऑन लाइन भेजेगा सीबीएसइ
संवाददाता, पटना
बोर्ड एग्जाम संबंधित सेंटर मेटेरियल उन्हीं स्कूलों को मिलेगा जिनके पास यूजर आइडी और पासवर्ड होगा. इसके लिए सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को निर्देश दिये है. सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को ई-मेल करके कहा है कि जिन स्कूलों का यूजर आइडी और पासवर्ड बोर्ड के पास मौजूद है, उन्हें ही 10वीं अौर 12वीं बोर्ड एग्जाम संबंधित सेंटर मेटेरियल भेजा जायेगा. यूजर आइडी और पासवर्ड के माध्यम से ही स्कूल एग्जाम संबंधित मेटेरियल के लिए लॉगिग कर पायेंगे.
- एलओसी और अटेंडेंस सीट मिलेगा ऑन लाइन
अभी तक सीबीएसइ द्वारा सेंटर मेटेरियल को ऑफ लाइन भेजा जाता था. सीबीएसइ के कर्मचारियों द्वारा एग्जामिनेशन सेंटर पर एटेंडेंस सीट, सेंटर एलओसी को भेजा जाता था, लेकिन इस बार सारा कुछ ऑन लाइन ही भेजा जायेगा. सीबीएसइ के अनुसार सेंटर मेटेरियल भेजने का काम शुरू कर दिया गया है. ज्ञात हो कि इस बार यूजर आइडी और पासवर्ड के माध्यम से ही एडमिट कार्ड भी जेनरेट किया जा रहा है. इसके अलावा स्कूलों ने जो लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स (एलओसी) भरा है, उसे भी सीबीएसइ एग्जामिनेशन सेंटर को पास भेजेगा. इससे जिस स्कूल में बोर्ड परीक्षा का सेंटर बनाया गया है, उन्हें पहले ही पता स्टूडेंट्स की संख्या और स्टूडेंट्स संबंधित सारी जानकारी मिल जायेगी.
- फर्जी यूजर आइडी बनाया तो भी पकड़ में आ जायेंगे स्कूल
अगर किसी स्कूल ने फर्जी यूजर आइडी बनाया तो भी वो सीबीसइ के पकड़ में आ जायेंगे. यूजर आइडी और पासवर्ड के अलावा सीबीएसइ ने एक सेक्योरिटी पिन भी दिया है. इस सेक्योरिटी पिन को यूजर आइडी और पासवर्ड के साथ डालने के बाद ही स्कूल लॉगिंग कर पायेंगे. सीबीएसइ के अनुसार इस सिस्टम से उन स्कूलों और उन स्टूडेंट्स को पकड़ना आसान हो जायेगा जो गलत तरीके से सीबीएसइ 10वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल होते है. खासकर 10वीं के स्कूल बोर्ड देने वाले स्टूडेंट्स को पकड़ना आसान हो जायेगा.
कोट
इस बार बोर्ड एग्जाम संबंधित सारे सेंटर मेटेरियल को ऑन लाइन ही स्कूलो को भेजा जा रहा है. इससे समय की बचत होगी. समय से सारे स्कूलों को मिल जायेगा. स्कूल अपने अनुसार उसे डाउनलोड कर पायेंगे. एग्जाम की तैयारी में स्कूल को सुविधा होगी.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया काम्प्लेक्स
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नकल पर सख्ती का असर, एक लाख ने छोड़ी इंटर की परीक्षा
- रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फाॅर्म में आया एक लाख छात्रों का अंतर
संवाददाता, पटना
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने कदाचार मुक्त परीक्षा लेने का क्या मन बनाया कि हजारों छात्रों ने इंटर की परीक्षा का फाॅर्म ही नहीं भरा. इंटर में नकल पर समिति के कड़े निर्णय लेने का छात्रो पर परीक्षा के पहले ही ऐसा असर हो गया कि उन्होंने इंटर का परीक्षा देने से ही इंकार कर दिया. यह मामला इंटरमीडिएट के रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फाॅर्म भरे जाने वाले छात्रों की संख्या के बाद पता चला. इंटर में इस बार कुल 12 लाख 46 हजार परीक्षार्थी ने रजिस्ट्रेशन करवाया था. लेकिन इंटर के परीक्षा फाॅर्म भरने वाले कुल परीक्षार्थी की संख्या 11 लाख 58 हजार है. कुल एक लाख 12 हजार परीक्षार्थी इस रजिस्ट्रेशन तो करवाया,लेकिन परीक्षा फाॅर्म नहीं भरें.
- रजिस्ट्रेशन के बाद नकल पर रोक लगाने का हुआ था निर्णय
इंटर के रजिस्ट्रेशन का काम अगस्त से सितंबर तक चला. रजिस्ट्रेशन होने के बाद इंटर और मैट्रिक को कदाचार मुक्त परीक्षा लेने का निर्णय लिया गया. इसके लिए बिहार सरकार की ओर से कई नियम भी बनाये गये. परीक्षा केंद्र पर पुलिस बल लगाने का फैसला लिया गया जिससे बाहर से नकल करने में छात्रों की कोई मदद ना कर सके. इसके अलावा विडियाे ग्राफी और एक बेंच पर दो छात्रों के बैठाने का निर्णय लिया गया. दिसंबर से कदाचार मुक्त परीक्षा को लेकर काम शुरू हुआ.
- 14 लाख परीक्षार्थी के शामिल होने की थी उम्मीद
जिस तरह से हर साल इंटर में परीक्षार्थी की संख्या बढ़ रही है. उससे 2016 के इंटर की परीक्षा में 14 लाख के लगभग परीक्षार्थी के शामिल होने की उम्मीद थी. लेकिन रजिस्ट्रेशन में ही छात्रों की संख्या कम रही. इसके बाद परीक्षा फार्म मात्र 11 लाख 58 हजार परीक्षार्थी ने ही भरा. 2015 की बात करें तो 2016 में 42 हजार अधिक छात्र ही इंटर की परीक्षा में बढ़े है.
पांच साल में सबसे कम बढ़े इस बार इंटर में परीक्षार्थी
साल - कुल परीक्षार्थी की संख्या
2012 - 7 लाख 45 हजार 532013 - 8 लाख 78 हजार 65
2014 - 9 लाख 87 हजार 78 2015 - 11 लाख 10 हजार
2016 - 11 लाख 58 हजार
कोट
इस बार पूरी तरह कदाचार मुक्त परीक्षा ली जायेगी. नकल रोकने के लिए कई इंतजाम किये जा रहे है. रजिस्ट्रेशन में छात्रों की संख्या 12 लाख थी. लेकिन परीक्षा फाॅर्म के बाद छात्रों की संख्या कम हो गयी है.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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Wednesday, February 10, 2016
सिलेबस की जानकारी नहीं, प्रैक्टिकल एग्जाम स्कूल और कॉलेज लेते अपनी मरजी से
- इंटर के प्रैक्टिकल एग्जाम में नहीं होता एससीइआरटी द्वारा बनाये गये नियम का फॉलो
संवाददाता, पटना
इंटर के प्रैक्टिकल में एक एक्सपेरिमेंट आठ अंक के होने चाहिए. वहीं एक एक्टिविटी भी करवानी है. एक्टिविटी भी आठ अंक का होगा. एक प्रोजेक्ट वर्क चार अंक का लेना है. इसके अलावा पांच अंक का वाइवा और पांच अंक छात्रों को कॉपी पर दिये जायेंगे. एससीइआरटी ने इंटर के प्रैक्टिकल एग्जाम के लिए यह सिलेबस बना रखा है. लेकिन इस नियम को फॉलो प्रैक्टिकल के एग्जाम में नहीं किया जाता है. बोर्ड जो प्रैक्टिकल का फाॅर्मेट स्कूल और कॉलेज को भेजती है, उसे भर कर तो स्कूल और कॉलेज बोर्ड को भेज देते है. लेकिन प्रैक्टिकल के सिलेबस को अपनी मरजी से चलाते हैं.
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आठ अंक की जगह 20 अंक का होता है एक्सपेरिमेंट
प्रैक्टिकल के नाम पर बस खानापूर्ति ही की जाती है. ना ताे एक्टिविटी करवायी जाती है और ना ही प्रोजेक्ट वर्क ही करवाया जाता है. प्रैक्टिकल के नाम पर बस 20 अंक का एक एक्सपेरिमेंट अौर पांच अंक का वाइवा और पांच अंक कॉपी पर दिये जाते है. 30 अंक का प्रैक्टिकल बस यही करके खत्म कर दिया जाता है. स्कूल सूत्रों की माने ताे हमें प्रैक्टिकल के सिलेबस की जानकारी स्कूल को नहीं है. बस एक्सपेरिमेंट करके मार्क्स दिया जाता है. वाइवा के लिए शिक्षक बाहर के दूसरे स्कूल से आते है.
- एक्टिविटी की नहीं होती प्रैक्टिस
11वीं और 12वीं के पढ़ाई के दौरान भी एक्टिवटी पर कोई काम नहीं होता है. स्कूल या काॅलेज में प्रॉपर लैब नहीं होने से प्रैक्टिकल का काम भी नहीं होता है. शिक्षक प्रो. शंकर प्रसाद की माने तो एक्सपेरिमेंट के लिए इंक्यूमेंट की जरूरत होती है. लेकिन एक्टिविटी के माध्यम से लोकल मेटेरियल से एक्सपेरिमेंट करना सीखाना होता है. इसके लिए स्कूल में पढ़ाई और इंटर की परीक्षा में आठ अंक का एक्सपेरिमेंट करने को दिया जाता है. जिससे छात्रों को लो कास्ट में एक्सपेरिमेंट करना आयें.
- मार्च के दूसरे सप्ताह में होगा प्रैक्टिकल एग्जाम
24 फरवरी से 5 पांच तक इंटर की परीक्षा ली जायेगी. इसके बाद प्रैक्टिकल का एग्जाम लिया जायेगा. इंटर में तीन विषयों में प्रैक्टिकल एग्जाम लिया जाता है. फिजिक्स, केमेस्ट्री और बायोलाॅजी विषय में 70 अंकों का थ्योरी और 30 अंकों का प्रैक्टिकल होता है. इस बार इंटर की परीक्षा में 12 लाख 50 हजार परीक्षार्थी शामिल होंगे.
कोट
प्रैक्टिकल एग्जाम के लिए जो फार्मेट भेजा जायेगा. उसे अच्छी तरह से देखा जायेगा. फार्मेट में अंकों का बंटवारा एससीइआरटी के आधार पर ही किया जायेगा. जैसा फार्मेट हो उसी तरह से अंक दिये जायेंगे.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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जेइइ मेन के एडमिट कार्ड के लिए देना होगा छात्रों का डिटेल्स
- 20 फरवरी तक सीबीएसइ ने तमाम स्टेट बोर्ड को डिटेल्स भेजना का दिया निर्देश
संवाददाता, पटना
जेइइ मेन का एडमिट कार्ड इस बार उन्हीं अभ्यर्थी को मिलेगा जिन अभ्यर्थी के 12वीं बोर्ड डिटेल्स सीबीएसइ के पास होगा. इसको लेकर सीबीएसइ ने तमाम स्टेट बोर्ड को 20 फरवरी तक का समय दिया है. सीबीएसइ के अनुसार 2016 में 12वीं बोर्ड में शामिल होने वाले तमाम छात्रों के एडमिट कार्ड को सीबीएसइ के पास भेजना होगा. छात्रों के 12वीं के एडमिट कार्ड देखने और जेइइ मेन के आवेदन फार्म में छात्रों के द्वारा दी गयी जानकारी के साथ मिलान करने के बाद ही जेइइ मेन के लिए एडमिट कार्ड भेजा जायेगा.
- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को भी भेजी गयी सूचना
सीबीएसइ ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को भी 20 फरवरी तक एडमिट कार्ड को सीबीएसइ के पास भेजने का कहा गया है. सीबीएसइ की माने तो 12वीं बोर्ड के एडमिट कार्ड में छात्रों के सारे डिटेल्स होते है. नाम के साथ अभिभावक के नाम और विषयों की सारी जानकारी होती है. उसी तरह जेइइ मेन के आवेदन फार्म में भी अभ्यर्थी से सारी जानकारी मांगी जाती है. इन दोनों ही जानकारी का मिलान सीबीएसइ द्वारा किया जायेगा. ऐसे में उन फर्जी अभ्यर्थी को पकड़ना आसान हो जायेगा, जो दाेनों जगह पर अलग-अलग जानकारी दिये होंगे.
- 2014-15 सत्र के अभ्यर्थी के डिटेल्स की होगी जांच
जो अभ्यर्थी 2014-15 में जेइइ मेन में शामिल हुए थे. और वो इस बार भी शामिल होंगे. ऐसे अभ्यर्थी के पूरा डिटेल्स सीबीएसइ अपने स्तर से ही जांच कर रहा है. क्योंकि इन अभ्यर्थी के 12वीं के पूरा डिटेल्स सीबीएसइ के पास मौजूद है. ऐसे में जो अभ्यर्थी इस बार आवेदन भरे है, उनके आवेदन फार्म और 12वीं के डिटेल्स को सीबीएसइ अपने स्तर से ही जांच कर रही है. जिन अभ्यर्थी ने इस बार आवेदन भरने में जानकारी अलग दिया होगा, तो उन अभ्यर्थी को जेइइ मेन का एडमिट कार्ड नहीं मिल पायेगा.
- मार्च दूसरे सप्ताह में मिलेगा जेइइ मेन का एडमिट कार्ड
जेइइ मेन में शामिल होने वाले अभ्यर्थी अपना एडमिट कार्ड मार्च के दूसरे सप्ताह से डाउनलोड कर पायेंगे. इसके लिए सीबीएसइ ने सूचना जारी कर दिया है. इससे पहले सीबीएसइ ने स्टेट बोर्ड से 12वीं के छात्रों का एडमिट कार्ड मांगा है. ज्ञात हो कि इस बार तीन अप्रैल को जेइइ मेन का ऑफ लाइन एग्जाम और 9 और 10 अप्रैल को ऑन लाइन एग्जाम लिया जायेगा.
मदरसा बोर्ड में बढ़ी छात्राओं की संख्या, परीक्षा देने में छात्र से आगे हुई छात्राएं
- एक लाख 33 हजार में 73 हजार छात्राएं देंगी परीक्षा
संवाददाता, पटना
मदरसा बोर्ड में हर साल छात्राओं की संख्या बढ़ती है. इस बार फोकानियां और मौलवी देने वाले कुछ विद्यार्थी में 60 फीसदी छात्राओं की संख्या है. बिहार राज्य मदरसा बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार इस बार फोकानियां और मौलवी दोनों में ही छात्राओं की संख्या छात्रो से अधिक है. पिछले साल की तुलना में इस बार लगभग दस हजार विद्यार्थी फोकानियां और मौलवी में अधिक शामिल होंगे. फोकानियां में जहां 87 हजार परीक्षार्थी शामिल होंगे, उसमें 49 हजार छात्रा परीक्षार्थी रहेंगी. वहीं छात्र परीक्षार्थी की संख्या 38 हजार है. मौलवी में कुछ परीक्षार्थी 46 हजार है. इसमें 24 हजार छात्राएं और 22 हजार छात्र परीक्षार्थी रहेंगी.
- अप्रैल के दूसरे सप्ताह में शुरू होगा बोर्ड परीक्षा
मदरसा बोर्ड की माने तो बोर्ड परीक्षा की तैयारी पूरी कर ली गयी है. परीक्षा फार्म भराने का काम पूरा हो चुका है. अब एडमिट कार्ड तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है. बोर्ड सचिव खुर्शीद आलम की माने तो अप्रैल के दूसरे सप्ताह में फोकानियां और मौलवी की परीक्षा ली जायेगी. इसके लिए सेंटर बनाने को लेकर परीक्षार्थी की लिस्ट संबंधित जिलों के जिलाधिकारी को भेज दिया गया है. ज्ञात हो कि लगभग तीन सौ परीक्षा केंद्र फोकानियां और मौलवी की परीक्षा में लगाया जाता है.
विधुत बोर्ड ने दिया डीएवी को स्कूल हटाने का नोटिस, बोर्ड परीक्षा के बाद कार्रवाई
- सीबीएसइ ने डीएवी, विधुत बोर्ड का किया निरीक्षण, कई प्वाइंट पर उठे सवाल
संवाददाता, पटना
विधुत बोर्ड ने डीएवी प्रशासन से स्कूल हटाने का नोटिस दिया है. जल्द ही अब डीएवी, बीएसइबी को वहां से हटा दिया जायेगा. चुकी मार्च में सीबीएसइ 10वीं और 12वीं का बोर्ड एग्जाम है. बोर्ड एग्जाम के बाद स्कूल को हटाने का आदेश फिर विधुत बोर्ड की ओर से दिया जायेगा. इससे पहले मंगलवार यानी 9 फरवरी को डीएवी, बीएसइबी की निरीक्षण भी सीबीएसइ की ओर से किया गया है.
- सीबीएसइ ने जांच में उठाये कई सवाल
मंगलवार को सीबीएसइ द्वारा डीएवी बीएसइबी का निरीक्षण किया गया. सीबीएसइ दिल्ली से दो सदस्यीय टीम ने स्कूल का दौरा किया. जांच में टीम ने कई तरह के सवाल उठायें. इसमें 2015 में 12वीं की परीक्षा में 88 स्टूडेंट्स का मामला सामने आया. डीएवी बीएसबीए ने 88 स्टूडेंट्स को 11वीं में फेल कर दिया और पैसे लेकर 12वीं बोर्ड दिलवाया है. इसके अलावा 94 फर्जी टीचर्स की लिस्ट पर भी स्कूल पर सवाल उठे है. स्कूल में नामांकित स्टूडेंट्स, 9वीं और 11वीं में रजिस्ट्रर्ड स्टूडेंट्स और 10वीं और 12वीं में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स के हेराफेरी पर भी स्कूल पर सवाल सीबीएसइ ने खड़ा किया है.
- दुबारा एफिलिएशन के लिए डीएवी ने किया है अप्लाई
डीएवी की मान्यता सीबीएसइ ने 2015 में समाप्त कर दिया था. इसके बाद 2015 में डीएवी ने दो बार एफिलिएशन के लिए अप्लाई किया है. दोनों ही बार सीबीएसइ द्वारा निरीक्षण भी किया गया. लेकिन दोनों ही बार सीबीएसइ ने मान्यता नहीं दिया. अब फिर एक बार सीबीएसइ द्वारा स्कूल का निरीक्षण किया. अब डीएवी को सीबीएसइ मान्यता देता है या नहीं, इसका फैसला मई के दूसरे में हो जायेगा.
- दो सालों से नहीं हो रहा नया नामांकन
डीएवी बीएसइबी में दो सालों से नया नामांकन नहीं लिया गया है. क्लास वन में 2015 और 2016 में नामांकन नहीं लिया गया है. वहीं सीबीएसइ द्वारा 2015 में मान्यता छीन जाने के बाद 9वीं और 11वीं में नामांकन पर बोर्ड ने रोक लगा दी थी. पिछले दो साल से स्कूल में क्लास वन की सीटें वैकेंट हो गया है.
कोट
स्कूल को हटाने के लिए हमने डीएवी प्रशासन से कहा है. यह स्कूल विधुत बोर्ड का प्रोजेक्ट स्कूल है. ऐसे में यहां पर 80 फीसदी बच्चे विधुत बोर्ड पढ़ते है. लेकिन सीबीएसइ की मान्यता जाने के बाद स्कूल का भविष्य अधर में लटक गया है. बोर्ड परीक्षा के बाद हम कार्रवाई करेंगे.
राजीव रंजन, अध्यक्ष, डीएवी बीएसइबी लोकल मैनेजिंग कमिटी
डीएवी बीएसइबी में फर्जी टीचर्स का खूब खेल चलता है. बिना डिग्री के टीचर्स को रखा जाता है. अगर कोई टीचर कुछ बोलता है तो उसका ट्रांसफर कर दिया जाता है. ट्रांसफर होने वाले टीचर्स को भी स्कूल फर्जी टीचर्स लिस्ट में शामिल कर सीबीएसइ को भेज देता है.
निखिल कुमार, महासचिव, डीएवी टीचर्स वेलफेयर एसोसिशन
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सीबीएसइ एग्जाम में नकल किया तो होगा तीन साल तक का सजा
संवाददाता, पटना
बोर्ड परीक्षा का काउन डाउन शुरू हो चुका है. परीक्षार्थी को तैयारी करने की टिप्स दी जा रही है. इसके बावजूद कई ऐसे स्टूडेंट्स होते है जो नकल की जुगाड़ में होते है. जहां बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने नकल रोकने के लिए कई उपाय करने शुरू कर दिये है, वहीं सीबीएसइ ने भी नकल को लेकर निर्देश तमाम स्कूलो को जारी कर दिया है. 10वीं और 12वीं एगजाम के दौरान अगर कोई स्टूडेंट नकल करते हुए पकड़े जाते है तो सीबीएसइ की ओर से उन पर कई तरह की कार्रवाई की जा सकती है. बोर्ड की माने तो नकल साबित होने और स्टूडेंट के झूठ बोलने पर तीन साल तक की सजा का भी बोर्ड में प्रावधान है.
नकल रोकने के लिए सीबीएसइ ने कर रखा है ये सारे प्रावधान
- रंगे हाथ पकड़ में आने पर -
अगर कोई स्टूडेंट को रंगे हाथ नकल करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके आंसर कॉपी, चिट और एडमिट कार्ड को तुरंत एक स्पेशल इंवेलप में डाल कर सीबीएसइ ऑफिस भेज दिया जाता है. ऐसे स्टूडेंट को सीबीएसइ जुर्माना अपनी मरजी से लगाती है.
- एक साल के लिए सस्पेंड -
परीक्षा के दौरान नकल करने और पकड़ में आने पर परीक्षार्थी दुबारा परीक्षा नहीं दे सकता है. उसे एक साल के लिए तुरंत सस्पेंड कर दिया जाता है. इसके अलावा बोर्ड चाहे तो एक और साल के लिए उसे परीक्षा देने से रोक दे
- 10 हजार तक जुर्माना
- नकल करते हुए पकड़े जाने पर बोर्ड 10 हजार तक का जुर्माना भी स्टूडेट पर लगा सकती है. ऐसे में स्टूडेंट के अभिभावक को बुला कर सीबीएसइ सारी जानकारी देती है. इसके बाद सजा के तौर पर 10 हजार रूपये तक का जुर्माना भी बोर्ड की ओर से लगाया जा सकता है.
कोट
सीबीएसइ में नकल कर घटना कम होती है. लेकिन बोर्ड ने कई प्रावधान बना रखें है. परीक्षा होने के पहले इसकी जानकारी तमाम सेंटर को दी जाती है. जो भी नकल करते हुए स्टूडेंट पकड़े जाते है, उनके आंसर कॉपी को तुरंत सेंटर सीबीएसइ दिल्ली भेज दिया जाता है. इसके लिए एक स्पेशल इंवेलप होता है.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ पटना
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स्टेट डेटा सेंटर से जुड़ेगा बिहार बोर्ड, रिजल्ट के लिए होगा नया वेबसाइट
- रिजल्ट देखने में नहीं होगी छात्रों को परेशानी
संवाददाता, पटना
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति अब स्टेट डेटा सेंटर से जुड़ने की तैयारी कर रहा है. 2016 का इंटर और मैट्रिक का रिजल्ट भी स्टेट डेटा सेंटर पर ही डाला जायेगा. इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी गयी है. रिजल्ट देखने के लिए छात्र किस वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट ऑन लाइन देखेंगे, इसके लिए स्टेट डेटा सेंटर से ही उन्हें नया वेबसाइट दिया जायेगा. अभी इसको लेकर समिति आइटी इंफार्मेशन विभाग से लगातार संपर्क में है. अगर सारा कुछ सही रहा तो इस बार मैट्रिक और इंटर के परीक्षार्थी को अपना रिजल्ट अासानी से दिखेगा.
- नहीं होगा लिंक फेल और सर्वर डाउन
बिहार सरकार का स्टेट डेटा सेेंटर एनआइसी और बेट्रॉन के सर्वर से काफी हाइटेक है. यहां से कोई भी चीज देखने में सर्वर डाउन और लिंक फेल की समस्याएं नहीं होती है. इस बार इंटर और मैट्रिक के परीक्षार्थी भी रिजल्ट घोषणा के साथ अॉन लाइन रिजल्ट आसानी से देख पायेंगे. एक साथ लाखों परीक्षार्थी रिजल्ट देख पायेंगे.
- 2017 में होगा बिहार बोर्ड का अपना वेबसाइट
इस बार स्टेट डेटा सेंटर द्वारा दिये जाने वाले वेबसाइट पर इंटर और मैट्रिक का रिजल्ट छात्र देख पायेंगे. वहीं 2017 से बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का अपना वेबसाइट होगा. अभी समय कम होने के कारण बोर्ड का अपना वेबसाइट बनना संभव नहीं है. समिति सूत्रों की माने तो बोर्ड का अपना वेबसाइट बनने में समय लगेगा. इस कारण स्टेट डेटा सेंटर से रिजल्ट देखने की व्यवस्था की जायेगी.
- 2015 में हुआ था हंगामा
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने 2015 में रिजल्ट डॉट कॉम पर रिजल्ट घोषित कर दिया था. इसको लेकर काफी हंगामा हुआ. रिजल्ट देखने में छात्रों को काफी परेशानी हुई. एक तो छात्र बिहार बोर्ड के वेबसाइट को खोजते रहे, लेकिन रिजल्ट किसी और वेबसाइट पर था. रिजल्ट देखने के दौरान लगातार रिजल्ट डॉट कॉम अपना प्रचार करता रहा. रिजल्ट के लिए स्पेश भी काफी कम दिया गया था. इसके अलावा लिंक फेल और सर्वर डाउन होने की भी समस्या आती रही.
- नहीं जाना होगा अब रिजल्ट डॉट कॉम पर
2015 के इंटर और मैट्रिक का रिजल्ट के लिए प्राइवेट एजेंसी का घोषित किया गया था. रिजल्ट डॉट कॉम पर बिहार बोर्ड का मैट्रिक और इंटर का रिजल्ट घोषित किया गया था. लेकिन इस बार छात्रों को रिजल्ट देखने के लिए रिजल्ट डॉट काॅम पर नहीं जाना होगा.
कोट
इस बार मैट्रिक और इंटर का रिजल्ट आॅन लाइन देखने में छात्रों को परेशानी नहीं होगी. हम बोर्ड का अपना वेबसाइट होने का प्रयास कर रहे है. जल्द ही इस पर कोई सही फैसला हम लेंगे.
हरिहर नाथ झा, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति हमने इसको लेकर संपर्क किया है. स्टेट डेटा सेंटर में अगर रिजल्ट रखना चाहते है तो हम इसके लिए उन्हें पूरी मदद करेंगे. सेंटर के सर्वर का इस्तेमाल रिजल्ट के लिए किया जा सकता है.
राहुल सिंह, एमडी, इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी, बिहार सरकार
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Sunday, February 7, 2016
उत्तर पुस्तिका को लेकर बिहार बोर्ड हुआ सख्त, भुलाया तो केंद्राधीक्षक की जिम्मेवारी
- 2015 में इंटर के स्क्रूटनी के दौरान गायब हुई थी सात सौ उत्तर पुस्तिकाएं
संवाददाता, पटना
उत्तर पुस्तिका में किसी तरह की गड़बड़ी इस बार केंद्राधीक्षक को महंगा पड़ सकता है. इंटर और मैट्रिक के परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिका को मूल्यांकन केंद्र पर रखना, मूल्यांकन करवाना और स्क्रूटनी के लिए उत्तर पुस्तिका को संभाल कर रखना, इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेवारी अब उस केंद्राधीक्षक की होगी. जिनके केंद्र पर उत्तर पुस्तिका रखी होगी. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने उत्तर पुस्तिका की सुरक्षा को लेकर नियम बनाया है. ज्ञात हो कि 2015 में इंटर के कई उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन केंद्र से गायब हो गया. स्क्रूटनी के लिए जब मूल्यांकन केंद्र पर उत्तर पुस्तिका को खोजा गया तो उत्तर पुस्तिका नहीं मिला. पूरे प्रदेश के विभिन्न मूल्यांकन केंद्रों से लगभग सात सौ उत्तर पुस्तिका गायब हो गया.
- उत्तर पुस्तिका गायब होगा तो जवाब देंगे केंद्राधीक्षक
समिति ने इस बार स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी मूल्यांकन केंद्र से अगर उत्तर पुस्तिका गायब होता है तो इसका जवाब अब केंद्राधीक्षक को भी देना होगा. अगर कोई परीक्षार्थी अपने अंक से संतुष्ट ना हो. ऐसे में परीक्षार्थी सूचना के अधिकार के तहत अपना उत्तर पुस्तिका मांगते है. अगर मूल्यांकन केंद्र पर उत्तर पुस्तिका उपलब्ध नहीं होता है तो इसका जवाब संबंधित केंद्राधीक्षक की होगी. अगर छात्र इसको लेकर हाई कोर्ट जाते है तो वहां पर भी केंद्राधीक्षक को ही जवाब देना होगा.
- केंद्राधीक्षक को दी जायेगी जानकारी
इंटर के परीक्षा के पहले 18 फरवरी से तमाम केंद्राधीक्षकों की बैठक समिति द्वारा बुलायी गयी है. दो दिनों के इस बैठक में केंद्राधीक्षक को उनकी जिम्मेवारी बतायी जायेगी. केंद्राधीक्षक को उत्तर पुस्तिका को सुरक्षित रखने के बारे में बताया जायेगा. समिति के अनुसार उत्तर पुस्तिका को हर केंद्र पर सुरक्षित रखने की जिम्मेवारी केंद्राधीक्षक की होती है. इस बात की जानकारी बैठक के दौरान केंद्राधीक्षक को दी जायेगी.
- स्क्रूटनी वाले उत्तर पुस्तिका रखे जायेंगे समिति में
मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट निकलने के बाद उत्तर पुस्तिका को समिति कार्यालय में रखा जायेगा. स्क्रूटनी के लिए जो भी अावेदन आयेगा. उन तमाम उत्तर पुस्तिका को समिति अपने पास रखेगी. इसके बाद एक्सपर्ट से स्क्रूटनी करवायी जायेगी. समिति के अनुसार इस बार स्क्रूटनी के लिए अप्लाई छात्र अपने जिलों में ही करेंगे. अॉन लाइन अप्लाई भी लिया जायेगा. अप्लाई होने के बाद स्क्रूटनी का काम समिति कार्यालय में किया जायेगा.
कोट
उत्तर पुस्तिका को लेकर समिति को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. मूल्यांकन केंद्र पर उत्तर पुस्तिका सुरक्षित रखें जायें, इसकी जिम्मेवारी संबंधित केंद्राधीक्षक की होगी. इसकी जानकारी मूल्यांकन के लिए आयोजित बैठक में केंद्राधीक्षक को दी जायेगी.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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एफिलिएशन के लिए इस बार 110 स्कूलों की जांच, सीबीएसइ बना रहा टीम
- सीबीएसइ ने तीन केटेगरी में बांटा स्कूलों को
संवाददाता, पटना
किसे मिलेगा एफिलिएशन और किसे करना पड़ेगा फिर एक साल इंतजार. कौन जांच में होगा पास और कौन हो जायेगा फेल. स्कूलों ने अप्लाई करके तो अपना काम कर लिया है. अब सीबीएसइ की बारी है कि वो स्कूलों की जांच करें. स्कूलों की जांच के लिए सीबीएसइ ने टीम बनानी शुरू कर दी है. मार्च और अप्रैल तक स्कूलों की जांच होगी. रेंडमली फिजिकल वेरिफिकेशन सीबीएसइ द्वारा टीचर्स आैर स्टूडेंट्स का किया जायेगा. इसके बाद मई में नये एफिलिएशन की लिस्ट बोर्ड जारी करेगा. एफिलिएशन की प्रक्रिया की तैयारी सीबीएसइ ने करनी शुरू कर दी है.
- 110 स्कूल है इस बार लाइन में
सीबीएसइ से एफिलिएशन के दौर में इस बार पटना जोन से 110 स्कूल अप्लाई किये है. बिहार झारखंड मिला कर इन स्कूलों को बोर्ड ने तीन केटेगरी में बांट दिया है. पहले केटेगरी में वैसे स्कूल है जो पहली बार एफिलिएशन लेंगे. वहीं दूसरे केटेगरी मे वैसे स्कूल है जिनका एफिलिएशन सीबीएसइ ने खत्म कर दिया है. तीसरे और अंतिम केटेगरी में उन स्कूलों को रखा गया है जिनका एफिलिएशन 2016 में समाप्त हो रहा है. इन तमाम स्कूलों की जांच भी के नियम भी इस बार अलग- अलग बनाये गये है.
- हर स्कूल के लिए अलग-अलग होगी टीमें
इस बार स्कूलों की जांच के लिए टीमें भी अलग-अलग होगी. टीम में सीबीएसइ के मेंबर के साथ स्थानीय स्कूल के प्रिंसिपल को भी रखा जायेगा. टीम में सीबीएसइ रीजनल ऑफिस के भी अधिकारी शामिल होंगे. टीम पूरी तरह से कांफिडेंसिलय होगा. ज्ञात हो कि अब तक स्कूलों की जांच के लिए तीन या चार टीमें बनायी जाती थी. यहीं टीमें अलग-अलग दिन जाकर स्कूलों की जांच करती थी. लेकिन इस बार हर केटेगरी में शामिल स्कूलों के अनुसार टीम की संख्या होगी.
- लेट फाइन देकर कर सकते है अप्लाई
सीबीएसइ ने उन स्कूलों को समय दिया है जो अभी तक अप्लाई नहीं किया है. ऐसे स्कूल 31 मार्च तक अप्लाई कर सकते है. लेकिन इसके लिए स्कूल को फाइन देना होगा. फाइन दस हजार से लेकर 50 हजार तक रखा गया है.
एफिलिएशन संबंधित जानकारी
पहली बार एफिलिएशन के लिए अप्लाई करने वाले स्कूल की संख्या - 30
ऐसे स्कूल जिनका एफिलिएशन सीबीएसइ ने पिछले दो सालें में खत्म कर दिया है - 50 ऐसे स्कूल जिनका एफिलिएशन ड्यूरेशन 2017 में खत्म हो जायेगा - 30
Saturday, February 6, 2016
इंट्रोडक्शन में पूरी जानकारी नहीं, तो बीसीइसीइ कर देगा ओएमआर को रिजेक्ट
- पूरी जानकारी सही से नहीं देने के कारण कर दिया जाता है आंसर काॅपी रिजेक्ट
संवाददाता, पटना
एग्जाम में जितना जरूरी आंसर लिखना होता है, उतना ही जरूरी अभ्यर्थी को अपनी जानकारी देना भी होता है. अगर जानकारी आधी अधूरी या कॉलम को खाली छोड़ दिया जायेगा तो ऐसे अभ्यर्थी के ओएमआर को रिजेक्ट कर दिया जाता है. ऐसे में अभ्यर्थी की परीक्षा कितना भी अच्छा क्यूं ना गया हो, लेकिन उसके आेएमआर सीट की जांच ही नहीं की जाती है. बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (बीसीइसीइ) की ओर से हर साल ऐसे सौ दो आेएमआर सीट की जांच ही नहीं होती है जिसमें अभ्यर्थी इंट्रोडक्शन काॅलम को सही से नहीं भरते है. ऐसे अभ्यर्थी को सेलेक्ट होने के बावजूद छांट दिया जाता है.
- हर कॉलम को भरना है जरूरी
बिहार मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षा के दौरान अभ्यर्थी को इंट्रोक्शन लिया जाता है. इसमें अभ्यर्थी से कई तरह की जानकारी मांगी जाती है. कुछ कॉलम दिये होते है. सारे कॉलम भरना जरूरी होता है. खासकर हैंडराइटिंग मिलान के लिए अभ्यर्थी को उनकी हैंडराइटिंग में सौ शब्द का एक टेक्स्ट दिया जाता है. इसे जस का तस अभ्यर्थी को अपने हैंडराइटिंग में एक बाक्स में रिपीट कर लिख देना होता है. इसमें जो भी कुछ लिखा होता है, उसका कम से कम 50 फीसदी लिखना पड़ता है. लेकिन कई बार अभ्यर्थी उसे इग्नोर कर देते है. या तो लिखते नहीं या लिखते है तो आधी अधूरी लिख डालते है. ऐसे अभ्यर्थी के आंसर कॉपी को बोर्ड रिजेक्ट कर देता है. उनकी काॅपी की जांच नहीं होती है.
- हाई कोर्ट में भी गया था मामला
2015 में बीसीइसीइ के खिलाफ कई अभ्यर्थी हाई कोर्ट में केस किया. जिसमें अभ्यर्थी के दो विषयों बायोलॉजी और केमेस्ट्री में अच्छे अंक थे. वहीं एक विषय फिजिक्स के आंसर कॉपी की जांच ही नहीं हुई. इसके बाद जब अभ्यर्थी ने सूचना के अधिकार के तहत बोर्ड से इसका कारण पूछा तो पता चला कि इंट्रोडक्शन में अभ्यर्थी ने पूरी जानकारी नहीं दिया था. हैंडराइटिंग मिलान वाले बाक्स काे भरा ही नहीं था. ज्ञात हो कि फर्जी छात्रों को रोकने के लिए बीसीइसीइ हैंडराइटिंग का मिलान अभ्यर्थी से करवाती है.
कोट
कई बार अभ्यर्थी सिग्नेचर करने में भी गलती करते है. हिंदी की जगह इंगलिश में सिग्नेचर कर देते है. इंट्रोडक्शन में पूरी जानकारी सही से भरा जाना चाहिए. हर कॉलम को सही से और स्पष्ट भरना चाहिए. लेकिन कई अभ्यर्थी गलती कर देते है.
अनिल कुमार, ओएसडी, बीसीइसीइ
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पंद्रह दिन बाद इंटर की परीक्षा, मगर कई विषयों के सिलेबस का ही पता नहीं
- आठ साल में भी नहीं बन पाया नॉन हिंदी, कंप्यूटर साइंस व सोशियोलॉजी का सिलेबस
रिंकू झा, पटना
इंटर की परीक्षा की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है. पंद्रह दिनों के बाद इंटर की परीक्षा शुरू होगी. लेकिन नॉन हिंदी व कंप्यूटर सहित कई विषयों का अभी तक सिलेबस ही नहीं मिला है. अब जब परीक्षा को कदाचार मुक्त लेने की बात हो रही है तो छात्र परेशान है कि बिना कदाचार के इन विषयों में पास कैसे करेंगे. नाॅन हिंदी (50 हिंदी और 50 इंगलिश), कंप्यूटर के अलावा सोसियोलॉजी का सिलेबस कुछ और है और स्कूल में पढ़ाई कुछ और हाे रही है. जिस स्कूल में शिक्षक को जैसे समझ में आता है, उसी हिसाब से पढ़ा देते है.
- आठ साल पहले चेंज हुआ था प्लस टू का सिलेबस
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के माध्यमिक और उच्च माध्यमिक वर्ग के सभी विषयों के सिलेबस को आठ साल पहले अपडेट किया गया था. इसमें कई विषयो में नये चैप्टर जोड़े गये थे तो वहीं कई विषयों में चैप्टर को हटाया भी गया था. नये सिलेबस बनने के बाद उसे स्कूलों में लागू किया गया. सिलेबस बनाने के क्रम में नॉन हिंदी का सिलेबस बनाया ही नहीं गया. सिलेबस नहीं होने से पिछले आठ साल से बस नॉन हिंदी के पढ़ाई के नाम पर बस खानापूर्ति ही होती है. या तो स्कूल में क्लास नहीं होता, अगर क्लास होता है तो 100 हिंदी और 100 इंगलिश के सिलेबस से आधे सिलेबस को पढ़ा दिया जाता है.
- 300 अंक के भाषा की परीक्षा जरूरी
इंटर की परीक्षा में साइंस, आर्ट्स और कामॅर्स तीनों ही स्टीम के छात्रों को तीन सौ अंक के भाषा की परीक्षा देनी होती है. इसमें हिंदी, इंगलिश और नॉन हिंदी तीन आप्सन दिये जाते है. इसमें जो छात्र दो सौ का इंगलिश लेता है, उसे नॉन हिंदी 50 हिंदी-50 इंगलिश लेना जरूरी है. साइंस और कॉमर्स के अधिकांश छात्र इसी को चुनते है. वहीं जो छात्र सौ हिंदी लेते है. उन्हें या तो सौ इंगलिश पढ़ना पड़ता है या फिर 50 हिंदी-50 इंगलिश लेते है. आर्ट्स के भी अधिकांश छात्र नॉन हिंदी को ही भाषा के रूप में चुनते हैं.
- 80 अंक की जगह 100 अंक की परीक्षा देते हैं छात्र
समाजशास्त्र का सिलेबस कुछ और है और पढ़ाया कुछ और ही जाता है. सिलेबस के अनुसार 80 अंक का थ्योरी और 20 अंक का सोशल प्रोजेक्ट का काम छात्रों को करना होता है. लेकिन स्कूलों में 100 अंक का समाजशास्त्र पढ़ाया जाता है. इतना ही नहीं इंटर की परीक्षा में भी 100 अंक के प्रश्न आते है. बोर्ड ने जो सिलेबस तैयार किया है, वो भी सौ अंक का ही बनाया है.
- कंप्यूटर साइंस के सिलेबस स्पष्ट नहीं
साइंस के छात्र चौथे विषय के रूप में कंप्यूटर की पढा़ई करते है. इसमें एक कंप्यूटर आइपी और दूसरा कंप्यूटर साइंस लेना होता है. दोनों ही सौ-सौ अंक के होते है. लेकिन इन दोनों की विषयों में किस टॉपिक को पढ़ना है. इसका सिलेबस क्या है, इसकी जानकारी छात्राें को नहीं है. यह भी बिना सिलेबस ही ही खानापूर्ति पर चल रहा है.
कोट
हां सही है नॉन हिंदी का सिलेबस अभी तक नहीं बनाया गया है. हम इस बात को स्वीकार करते है. परीक्षा देने में छात्रों को दिक्कतें होगी ही. लेकिन अभी अंतिम समय में तो कुछ नहीं किया जा सकता है. अगले साल इसे सही कर दिया जायेगा. जिस विषय में जो दिक्कतें है, उसे सही किया जायेगा.
डा़ मुरली मनोहर सिंह, डायरेक्टर, एससीइआरटी
सिलेबस नहीं है. इसका जानकारी हमें नहीं थी. यह तो सही है बिना सिलेबस के परीक्षा देने में तो छात्रों को परेशानी होगी. छात्रों का कहना सही है. जब सिलेबस ही पता नहीं तो वो परीक्षा कैसे देंगे.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति \\
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बीसीइसीइ की परीक्षा में पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ ले जाना होगा अनिवार्य
- अभ्यर्थियों को मिलेगी आंसर की कार्बन कॉपी
- एआइपीएमटी के नियमों पर एग्जाम लेगा बीसीइसीइ
संवाददाता, पटना
एग्जाम को कदाचार मुक्त बनाने, फर्जी अभ्यर्थी को पकड़ने आदि को लेकर बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (बीसीइसीइ) ने कई नियम को लागू किया है. जहां इस बार अभ्यर्थी को ओएमआर सीट की कॉर्बन कॉपी दिया जायेगा, वहीं पहली बार एआइपीएमटी की तरह फोटोग्राफ की मिलान भी किया जायेगा. पहली बार बीसीइसीइ की परीक्षा में एडमिट कार्ड के स्कैन फोटो का मिलान अभ्यर्थी के दूसरे फोटोग्राफ से किया जायेगा. इसके लिए तमाम अभ्यर्थी अपनी पासपोर्ट साइज फोटो लाने को कहा गया है. अभ्यर्थी जो फोटोग्राफ साथ में लायेंगे, उससे एडमिट कार्ड के स्कैन फोटोग्राफ से मिलान किया जायेगा. फोटो में अंतर होने पर अभ्यर्थी परीक्षा नहीं दे पायेंगे. इस बार बीसीइसीइ के पहले चरण की परीक्षा 17 अप्रैल को जबकि दूसरे चरण की परीक्षा 15 मई को ली जानी है. दूसरे चरण की परीक्षा में केंद्रों पर मोबाइल का इस्तेमाल रोकने के लिए जैमर भी लगाया जाना है.
- आवेदन के साथ ही दी गयी जानकारी
बीसीइसीइ ने इसकी जानकारी अभ्यर्थी को आवेदन फाॅर्म भरने के साथ ही दिया गया है. प्रॉस्पेक्टस में बीसीइसीइ ने फोटो के साइज के बारे में विस्तार से बताया है. फोटोग्राफ के नीचे में अभ्यर्थी के नाम, अभिभावक के नाम, रौल नंबर आदि की भी जानकारी एग्जामिनेशन हॉल में अभ्यर्थी को देना होगा. इसके अलावा इस बार ओएमआर सीट का कार्बन कॉपी भी दिया जायेगा. आंसर की से अभ्यर्थी अपने उत्तर का मिलान कर पायेंगे.
कोट
इस बार परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी को अपनी फोटोग्राफ लेकर जाना होगा. एडमिट कार्ड के साथ फोटोग्राफ होगा तभी केंद्र में अभ्यर्थी प्रवेश कर पायेंगे. फोटाेग्राफ के साथ एडमिट कार्ड के स्कैन फोटो का मिलान किया जायेगा.
अनिल कुमार, ओएसडी, बीसीइसीइ
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हो जायें तैयार, कल से बोर्ड परीक्षा का दौर होगा शुरू
- आइसीएसइ 12वीं से शुरू होगा बोर्ड परीक्षा का सिलसिला
संवाददाता, पटना
बोर्ड परीक्षा की तैयारी हो चुकी है. हर बोर्ड अपने तरीके से तैयारी को अंतिम रूप दे दिया है. फरवरी से बोर्ड परीक्षा शुरू होगा. जो अप्रैल तक चलेगा. इसकी शुरूआत आइसीएसइ के 12वीं बोर्ड के प्रैक्टिकल एग्जाम से हो रहा है. 8 फरवरी से आइसीएसइ बोर्ड के 12वीं का प्रैक्टिकल एग्जाम शुरू होगा. प्रैक्टिकल एग्जाम खत्म होने के साथ ही थ्योरी पेपर शुरू हो जायेगा.
- स्टूडेंट्स नहीं टीचर्स का बदलता है सेंटर
आइसीएसइ बोर्ड के 10वीं और 12वीं की परीक्षा में स्टूडेंट्स का होम सेंटर ही रहता है. लेकिन बोर्ड टीचर्स को चेंज कर देता है. टीचर्स एग्जामिनर बन कर दूसरे स्कूल में जा कर ड्यूटी देते है. यह ड्यूटी प्रैक्टिकल एग्जाम में भी किया जाता है. बोर्ड की ओर से स्कूलों को टीचर्स के ड्यूटी की लिस्ट भेज दी गयी है. टीचर्स अपने-अपने एग्जामिनेशन सेंटर पर जाकर परीक्षा कंडक्ट करवायेंगे. प्रैक्टिकल के एग्जाम में हर स्टूडेंट को 30 मिनट का समय दिया जाता है.
- मुख्य विषयों की परीक्षा पहले हो जायेगी खत्म
इस बार सीबीएसइ ने सारे मुख्य विषयों की परीक्षा होली से पहले समाप्त कर दिया है. वैसे सीबीएसइ की 10वीं बोर्ड की परीक्षा 31 मार्च को समाप्त होगा, लेकिन मुख्य सारे विषयों की परीक्षा 19 मार्च को समाप्त हो जायेगा. वहीं 12वीं के साइंस विषय के मुख्य परीक्षाएं 21 मार्च को समाप्त हो जायेगा. वैसे आर्ट्स के परीक्षा की बात करें तो 16 अप्रैल को फिलॉस्फी विषय की परीक्षा के बाद समाप्त होगा.
- एडमिट कार्ड इसी सप्ताह से
सीबीएसइ 12वीं और 10वीं के परीक्षार्थी अपना एडमिट कार्ड इसी हफ्ते से डाउनलोड कर पायेंगे. इस बार ऑन लाइन स्कूल के यूजर नंबर और पासवर्ड के माध्यम से एडमिट कार्ड डाउनलोड किया जा सकता है. वैसे स्कूल के माध्यम से भी एडमिट कार्ड स्टूडेंट को मिलेगा. सीबीएसइ की ओर से इस बार 20 दिन एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए दिया जायेगा.
एग्जाम संबंधित जानकारी
आइसीएससी बोर्ड
12वीं प्रैक्टिकल एग्जाम - 8 फरवरी से 20 फरवरी12वीं बोर्ड एग्जाम - 22 फरवरी से 8 अप्रैल
10वीं बोर्ड एग्जाम - 29 फरवरी से 31 मार्च
सीबीएसइ
12वीं बोर्ड एग्जाम - 1 मार्च से 22 अप्रैल 10वीं बोर्ड एग्जाम - 2 मार्च से 28 मार्च
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
इंटर की परीक्षा - 24 फरवरी से 5 मार्च
मैट्रिक की परीक्षा - 11 मार्च से 18 मार्च
...यहां तो स्कूल के नाम पर फिक्स होता है नोटबुक का दाम
- एक ही नोटबुक का अलग-अलग स्कूलों में अलग-अलग दाम
संवाददाता, पटना
यह सेंट कैरेंस हाई स्कूल की कॉपी है, आप इसे खरीदते है तो आपको 180 पेज की कॉपी के लिए 30 रूपये देने पड़ेंगे. सेंट डॉमिनिक हाई स्कूल का नाम लिखा हुआ नोट बुक लेते है, तो 180 पेज के इस नोटबुक के लिए आपको 27 रुपये देने होंगे. अगर डीएवी स्कूल के लिए नोटबुक लेते है, तो आपको 29 रुपये देने पड़ेंगे. और वही नोटबुक अगर आप सामान्य दुकान से लेंगे तो उसका दाम 15 से 20 रुपये पड़ेगा. मतलब, एक ही नोटबुक, एक ही दुकान, लेकिन दाम अलग-अलग है. इससे अंजान अभिभावक दुकान पर जाते है. उन्हें जिस स्कूल का लेना होता है, लिस्ट थमाते है और स्कूल के नाम की नोटबुक खरीदना पड़ता है. कहा जायें तो हर स्कूल के नाम पर स्कूल में चलने वाले नोटबुक के प्राइस फिक्स होते है.
- हर स्कूल के लिए अलग-अलग काउंटर
हर दुकान पर बुक्स और नाेटबुक के लिए अलग-अलग काउंटर बने होते है. अभिभावक जब दुकान पर बुक्स और नोटबुक लेने जाते है तो पहले उनसे स्कूल का नाम पूछा जाता है. स्कूल का नाम जानने के बाद अभिभावक को उस स्कूल के काउंटर पर भेज दिया जाता है. काउंटर पर स्कूल द्वारा दी गयी लिस्ट मांगा जाता है. उसे पहले जमा कर लिया जाता है. काउंटर पर क्लास का नाम पूछा जाता है. उसी के अनुसार बुक्स दे दिया जाता है. कौन से बुक्स के लिए कौन सी नोटबुक चाहिए, यह सारा कुछ दुकान वाले काे पता होता है.
- 15-20 के बदले मिलते है 40 रुपये का नोटबुक
आमतौर पर जो नोटबुक दुकान में 15 से 20 रुपये में मिलता है, उसी नोटबुक पर केवल स्कूल का नाम देने से मात्र से दाम बढ़ जाता है. जो नोटबुक 20 रुपये में मिलता है, उसका प्राइस स्कूल के नाम जुड़ने से 40 रुपये हो जाता है. ज्ञान गंगा, ड्रेस गंगा आदि दुकान के सूत्रों की माने तो जो स्कूल जितना पैसा नोटबुक पर स्कूल का नाम लिखने के लिए देते है, उसी के अनुसार नोटबुक पर प्राइस को लगा दिया जाता है. इस कारण हर स्कूल के नाेटबुक के प्राइस अलग-अलग होते है. यह प्राइस स्कूल के उपर निर्भर करता है. इस संबंध में ड्रेस गंगा दुकान के मैनेजर पंकज ने बताया कि हर स्कूलों का प्राइस अलग-अलग है. स्कूल के नाम लिखने से दाम में फर्क हो जाता है.
नोटबुक के प्राइस में उलटफेल का खेल
सेंट कैरेंस हाई स्कूल
नोटबुक में पेज की संख्या - 180 नोटबुक का प्राइस - 30
वाल्डविन एकेडमी
नोटबुक में पेज की संख्या - 180
नोटबुक का प्राइस - 35
डीपीएस
नोटबुक में पेज की संख्या - 180 नोटबुक का प्राइस - 40
इंटरनेशनल स्कूल
नोटबुक में पेज की संख्या - 180
नोटबुक का प्राइस - 40
केंद्रीय विद्यालय
नोटबुक में पेज की संख्या - 180 नोटबुक का प्राइस - 30
सेंट डॉमिनिक हाई स्कूल
नोटबुक में पेज की संख्या - 180
नोटबुक का प्राइस - 27
स्कूल और नोटबुक मिलने के दुकान फिक्स
डीपीएस - विद्यार्थी इंटरप्राइजेजसेंट कैंरेंस हाई स्कूल, सेंट डॉमिनिक हाई स्कूल, डीएवी, सेंट पाल्स हाई स्कूल - ड्रेस गंगा
केंद्रीय विद्यालय, नॉट्रेडम एकेडमी, रेडियेंट इंटरनेशनल स्कूल, होली मिशन, सेंट जोसफ कांवेंट, वाल्डविन एकेडमी - आकाशगंगा इंटरनेशनल स्कूल, इशान इंटरनेशनल स्कूल, ज्ञान निकेतन - ज्ञान गंगा
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