Rinku Jha
Tuesday, December 1, 2015
सुलतान की मोबाइल वाणी बन रही हर किसी की जुबानी
- बिहार के 16 जिलों में चल रहा मोबाइल वाणी
संवाददाता, पटना
सरकारी योजनाएं तो बन जाती है, लेकिन उसका लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता है. योजनाओं की जानकारी से लेकर उससे मिलने वाले सुविधा के लिए भी लोग तरसते रहते है. ऐसे में लोगों को मोबाइल से इस जानकारी को उपलब्ध करवाने का काम सुल्तान अहमद करते है. ग्राम वाणी से इंस्पायर होकर सुलतान अहमद ने माेबाइल वाणी की शुरुआत की है. इसके तहत राज्य और केंद्र सरकार के तमाम योजनाओं के बारे में जानकारी दी जाती है. इसके अलावा योजना संबंधित सुविधाएं भी लोगों तक पहुंचाया जाता है.
लोग करते शिकायत, घर पहुंचता सुविधा
मोबाइल वाणी की शुरुआत सुल्तान अहमद ने झारखंड से 2012 में शुरू किया. सुल्तान अहमद बताते हैं कि कम्यूनिटी रेडियो की शुरुआत की गयी थी. लेकिन कम्यूनिटी रेडियो आम लोगों तक पहुंचने में सफल नहीं हो पाया. कम्यूनिटी रेडियो के तहत ही ग्राम वाणी शुरू किया गया. इसमें लाेगों की समस्याओं को सुना तो जाता था, लेकिन समाधान नहीं हो पाता था. इसी के बाद मैने मोबाइल वाणी की शुरूआत किया. इससे लोगों की समस्याओं को सुनने के अलावा उसका समाधान भी निकाला जाता है.
हर दिन 20 हजार लोग करते हैं कॉल
सुल्तान अहमद बताते है कि मोबाइल नंबर पर आम लोगों को केवल मिस्ड कॉल करने को कहा जाता है. जो भी मिस्ड कॉल आते है, उसे हमारे वाेलेटियर द्वारा कॉल बैक किया जाता है. उनकी समस्याओं को सुना जाता है. समस्याओं की लिस्ट बनायी जाती है. महीने मे एक बार सारी समस्याओं काे देखा जाता है. उसके बाद संबंधित विभाग के पास उसे भेज कर संबंधित व्यक्ति का काम करवाया जाता है. हर दिन 20 हजार के लगभग कॉल हमारे पास पूरे बिहार से आते है.
छह सौ वॉलेंटियर करते हैं काम
इस काम मे पूरे बिहार में छह सौ वोलेटियर काम करते है. वॉलेंटियर को इसके लिए तीन महीने की ट्रेनिंग दी जाती है. हर जिले में वॉलेंटियर को लोगों के बीच समस्याओं को जानने आैर सुनने को भेजा जाता है. काम होने तक एक वॉलेंटियर संबंधित समस्याओं का फॉलो भी करता है. सुल्तान अहमद बताते हैं कि हर वॉलेंटियर से महीने की रिपोर्ट ली जाती है. ज्वलंत समस्याओं से संबंधित मामले सबसे अधिक आते हैं. इसके अलावा जनता दरबार से लौट कर भी कई मामले का निपटारा हमारे द्वारा किया जाता है.
तीन राज्यों में चलता है मोबाइल वाणी
मोबाइल वाणी की शुुरुआत झारखंड की गयी है. झारखंड में लाेगों का अच्छा जुड़ाव होने के बाद इसे बिहार में शुरू किया गया है. मोबाइल वाणी के फाउंडर सुल्तान अहमद ने बताया कि झारखंड में इसकी शुरुआत 2012 में किया गया. इसके बाद 2013 अक्तूबर में बिहार में शुरू किया गया. इसके एक साल बाद अक्तूबर 2014 में मध्य प्रदेश में चलाये जा रहे है. झारखंड के 20 जिलों में और मध्य प्रदेश के 8 जिलों में मोबाइल वाणी से लोगों काे सुविधाएं दी जा रही है.
बिहार में इन जिलों में चलता है मोबाइल वाणी
- लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, समस्तीपुर, मधुबनी, सीतामढ़ी, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सुपौल, गोपालगंज, सारण, भोजपुर, रोहतास, नवादा, जमुई.
इन मुद्दों से संबंधित आते है समस्याएं और होता है इसका निदान
- विधवा पेंशन योजना, इंदिया आवास योजना, डीजल अनुदान राशि, मिड डे मील, डोमेस्टिक वायलेंस, मैरेज एक्ट, जन सुरक्षा योजना, शिक्षा का अधिकार, पंचायती राज, एग्रीकल्चर.
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