Sunday, December 6, 2015

शराब से हो रही जिंदगी बर्बाद

संवाददाता, पटना

कभी कभी हमारे शौक और मजाक में किये गये काम हमारे लिए जान की आफत बन जाती है. भले कई लोग शराब शौक से पीते हो, लेकिन यह शौक उनके लिए कब उनकी आदत बन जाती है, ये उन्हें पता ही नहीं चलता. शौक में शुरू किये गये शराब के कारण कई बार उनकी जिंदगी जाते-जाते बचती है. कई बार एक्सीडेंट होता है. लेकिन फिर भी वो इस आदत को छोड़ नहीं पाते है. गाड़ी चलाने से जरूर डरते है, लेकिन शराब नहीं छोड़ पाते है. आज की कड़ी में ऐसे ही एक शक्स के बारे में हम जानेंगे, जिन्होंने अभी तक शराब के नशे में गाड़ी चलाते हुए दस से अधिक बार एक्सीडेंट कर चुके है. उनके पांव की कई बार ऑपरेशन हो चुका है. रीढ़ की हडडी टूट जाने के कारण छह महीने तक पूरी तरह बेड पर रहें, लेकिन शराब की ऐसी आदत जो वाे छोड़ नहीं पायें. शराब के कारण दस बार हो चुका मेरा एक्सीडेंट
मै बचपन से ही गाड़ी चलाने का शौक रखता था. बाइक से मै लहरिया कट चलाने में एक्सपर्ट था. गाड़ी चलाने में मेरे बैलेंस को देखकर मेरे सारे दोस्त काफी आर्श्चय करते थे. मै आंख बंद करके भी ऐसी गाड़ी चला लेता था. कभी कोई एक्सीडेंट नहीं हुआ. लेकिन अब मै यह नहीं कर पाता हूं. क्याेंकि मुझे शराब की बूरी आदत लग गयी है. जब से मै शरराब पीना शुरू किया, मेरा खुद पर से आत्मविश्वास खत्म हो गया. इसके अलावा खुद पर से बैंलेंस भी जाता रहा. गाड़ी चलाने में हो बैंलेस मुझे रहता था, वो अब नहीं है. शुरू में तो शराब शौक से पीता था. लेकिन बाद में शौक आदत बन गयी. मेरे दोस्त मुझे शराब पीकर गाड़ी चलाने का चैलेंज देते थे. जब शौक से शराब पीता था तो चैलेंज जीत भी गया. क्याेंकि उस समय बहुत ज्यादा नशा में नहीं रहता था. लेकिन जब शराब की लत लग गयी. और एक दिन इसी चैलेंज के चक्कर में मेरा एक्सीडेंस हो गया. दानापुर के पास ऊंचाई वाले जगह से नीचे गिर गया. मेरि सिर में काफी चोट आयी. तीन महीने तक बिस्तर पर लेटे रहा. इसके बाद से मेरा कांफिडेंस खत्म हो गया. गाड़ी चलाने से डरने लगा. लेकिन शराब नहीं छोड़ पाया. दोस्तों के संगत मे शराब नहीं छोड़ पाया. परिवार वालों ने मेरी गाड़ी बेच डाली. मै अब तक दस बार से अधिक कार और बाइक से एक्सीडेंट कर चुका हूं. पियूष रंजन (बदला हुआ नाम)
कोटशराब इंसान को जिददी बना देता है. ऐसे में मरीज के साथ काफी प्यार से पेश आना होता है. क्योंकि जिस काम के लिए उन्हें मना कीजिए वो उसी काम को करना चाहते है. ऐसे में उनकी काउंसिलिंग की जाती है. उन्हें उनके नुकसान के बारे मे बता कर उन्हें समझाया जाता है. कई बार डराया और धमकाया तक जाता है.
डा. विवेक विशाल, हितैसी हैप्पीनेस \\\\B

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