Rinku Jha
Sunday, December 6, 2015
शराब कर रही जिंदगी बर्बाद
संवाददाता, पटना
शराब की लत एक बार लगे तो कुछ भी हो जायें, यह बुरी आदत जल्दी पीछा नहीं छोड़ती है. अब चाहे इसके लिए परिवार छोड़ दे या फिर जिंदगी दांव पर लग जायें. कुछ ऐसे भी लाेग है जिनका शराब के कारण सबकुछ खत्म हो गया. संपत्ति चली गयी, एक- एक पैसे के लिए मोहताज हो रहे है. परिवार उन्हें अच्छी नजर से नहीं देखता है. डरा सहमा परिवार है. बच्चे इंट्रोवर्ट हो गये है. लेकिन इसके बावजूद वो शराब को नहीं छोड़ना चाहते. आज हम ऐसे ही एक व्यक्ति के बारे में पढ़ेंगे जिन्हें परिवार तो छोड़ा ही, दोस्त भी नहीं है, यहां तक की सॉफ्ट वेयर इंजीनियर की नौकरी भी जारी रही. शराब पीकर ऑफिस का माहौल खराब करने के कारण एक दिन डायरेक्टर से सारे स्टॉफ के सामने बेइज्जती कर उन्हें नौकरी ने निकाल दिया.
शराब के कारण बेइज्जती कर नौकरी से कर दिया गया सस्पेंड
मै बचपन से ही पढ़ने में बहुत ही अच्छा था. 12वीं करने के बाद तुरंत इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन हो गया. चार साल के कोर्स करने के बाद मेरी नौकरी बंगलोर में ही सॉफ्टवेयर कंपनी में लग गयी. यहां तक मेरा सारा कुछ सही चल रहा था. कंपनी में ही कुछ ऐसे दोस्त बन गये जो शराब के शौकीन थे. शुरूआत में तो मै एकदम नहीं पीता था. बाद में थोड़ा बहुत पीने लगा. इसी बीच मेरी शादी भी हो गयी. पत्नी को मेरा शराब पीना पसंद नहीं था. इस बात को आपस में अक्सर लड़ाई भी होती थी. हमेशा वो मायके जाने की धमकी भी देती थी. एक दिन मै घर में ही बैठ कर काफी शराब पीने लगा, यह देखकर पत्नी मुझे छोड़ कर चली गयी. इसके बाद भी मेरा शराब पीने की आदत नहीं छूटी. मै शराब पीता रहा. कुछ दिन में तो यह हालत हो गयी 24 घंटे शराब के नशे में ही रहता था. एक दिन सुबह शराब पीकर मै आॅफिस चला गया. ऐसे में एक महिला कलिंग ने मेरी शिकायत डायरेक्टर से कर दी. इसके बाद डायरेक्टर सभी स्टॉफ के सामने मेरी बहुत बेइज्जती किये. इसके बाद तुरंत नौकरी से संस्पेंड कर दिया गया. मै काफी परेशान हो गया. घर भी गया और नौकरी भी चली गयी. इसके बाद मै शराब से पीछा छुड़ाने का उपाय करने लगा. छह महीने इलाज होने के बाद मेरी हालत कुछ ठीक हुई. एक साल इलाज के बाद पत्नी भी मेरे पास आ गयी. अभी नौकरी का प्रयास दुबारा शुरू किया हूं. उम्मीद है अच्छी नौकरी मिल जायेगी.
करण (बदला हुआ नाम)
कोट
इस तरह के केस हमारे लिए मुश्किल होते है. क्योंकि ऐसे केस में मरीज शरीर के साथ मानसिक रूप से भी काफी कमजोर हो जाता है. ऐसे में हमें मरीज के साथ काफी दोस्ताना व्यवहार करना पड़ता है. उसकी काउंसिलिंग करनी होती है.
राखी, संचालक, दिशा नशा विमुक्ति केंद्र
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