Saturday, December 26, 2015

स्कूल में पार्किंग नहीं, सड़क पर होता है स्कूल बसों और ऑटो की पार्किंग

- पटना के अधिकांश स्कूल के बाहर ही खड़े होते है स्कूली बस और ऑटो

संवाददाता, पटनास्कूल की छुट्टी हुई की नहीं सारे बच्चे स्कूल के बाहर. इसके बाद अपने बस तक जाना, बैठना. एक-एक कर सारे बच्चे जब ऑटो या बस में बैठेंगे तभी तो बस आगे बढ़ेगी. इस सारी प्रक्रिया में लगभग आधे घंटे का समय लग जाता है. बच्चे के बस और ऑटो में बैठने के बाद बस अपनी दिशा की ओर टर्न लेगी. इसके लिए उन्हें स्पेश चाहिए. आगे पीछे सवारी करने के लिए भी काफी देर तक जददोजहद चलता है. इतने में ही तो सड़क पर जाम की स्थिति बन जाती है. यह कोई एक दिन नहीं बल्कि हर दिन का हाल है. पटना में अधिकांश स्कूलों के बाहर ही स्कूली बस, ऑटो और स्कूली वैन लगे होते है. स्कूल के बाहर चल रहे नो पार्किंग में पार्किंग की वजह से ही सबसे अधिक जाम लगता है. अगर इन स्कूली बसो, ऑटो और वैन को स्कूल कैंपस में लगाने की जगह मिल जायें तो इस जाम से बचा जा सकता है. इसके अलावा बच्चे भी सुरक्षित रह पायेंगे.
- स्कूल गेट के बाहर लगे होते है स्कूली बसे और ऑटो पटना के अधिकांश स्कूल शहर के मेन रोड पर ही है. ऐसे में सड़क किनारे स्कूली बसों और ऑटो के रहने से जाम की समस्या हो रही है. चार साल पहले पटना ट्रैफिक पुलिस की तरफ से यह प्रयास शुरू भी किया गया था. लेकिन एक दो स्कूल को छोड़ किसी ने इसे फॉलो नहीं किया.
- हर इलाका होता है इफेक्टस्कूल की छुट्टी के समय का जाम भले उन इलाको में लगे जिन इलाको में स्कूल है. लेकिन इसका असर कई घंटों तक पूरे शहर में देखने को मिलता है. सेंट जोसफ कांवेंट स्कूल की बात करें या माउंट कार्मेल की बात करें. जब स्कूल की की छुट्टी होती है तो बेली रोड से लेकर अशोक राजपथ तक सड़क जाम हो जाता है. अशोक राजपथ तो कई घंटों तक पैक हो जाता है. वहीं हाल हाइ कोट वाले सड़क की होती है. सड़क पर ही स्कूल की सवारी लगे होते है.
- स्टूडेंट के सुरक्षा पर रहता है सवाल स्कूल की छुट्टी के बाद जब स्टूडेंट स्कूल के बाहर होते है तो उन्हें टोकने के लिए टीचर्स होते है और ना ही अभिभावक का ही डर बना रहता है. ऐसे बच्चे पूरी तरह से फ्री होते है. उन्हें ना तो सड़क क्रास का ध्यान और ना ही ऑटो या बस में बैठने का होश. 15 से 20 मिनट तक काफी धमा चौकड़ी करते है. इससे बच्चों की सुरक्षा पर भी अब सवाल उठने लगा है. स्कूल की छुट्टी के समय थोड़ी ही देर सही, बच्चों की सुरक्षा खतरे में होती है. लेकिन इस पर ना तो पुलिस प्रशासन का ध्यान होता है और ना स्कूल प्रशासन का ही.
- छुट्टी के समय अभिभावक की गाड़ियां भी बनती है वजह चुकी स्कूल का अपना कंवियेंस नहीं है. ऐसे में छुट्टी के समय उन अभिभावकों की प्राइवेट गाड़ियां भी होती है जो बच्चों को स्कूल से लेने आते है. सड़क पर ही बच्चे अपनी गाड़ी में बैठते है, ऐसे में जाम लगना तय है. हर स्कूलों में ऐसे अभिभावको की संख्या काफी होती है. अभिभावक भी स्कूल की छुट्टी के दस से पंद्रह मिनट ही स्कूल के पास आकर खड़े हो जाते है.
- सेंट माइकल ने लिया इनिसिएटिव सेंट माइकल हाई स्कूल, कुर्जी के बाहर स्कूल की छुट्टी के समय हर दिन घंटे दो घंटे के लिए जाम लगता था. इससे दीघा, दानापुर आदि तरफ से आने वाली सवारी घंटों तक जाम में फंसी रहती थी. इतना ही नहीं स्कूली स्टूडेंट्स भी घंटों जाम में जूझते रहते थे. जाम की सबसे बड़ी वजह स्कूल गेट के बाहर स्कूली बसाें का लगना था. स्कूल की छुट्टी के समय तमाम स्टूडेंट एक साथ बाहर निकलते थे. इससे जाम लगती थी. लेकिन पटना ट्रैफिक पुलिस के निर्देश के बाद सेंट माइकल हाई स्कूल ने तमाम प्राइवेट स्कूली बसों को स्कूल कैंपस में लगाने की इजाजत दे दिया. अब छुटटी होने के साथ सारे स्टूडेंट्स कैंपस मे ही बस में बैठते है. इससे उस इलाके में अब जाम नहीं लगता है.
कोटपटना ट्रैफिक पुलिस का निर्देश हमें 2012 में मिला था. इसके बाद मैने यह इनिसिएटिव उठाया. पहले इस इलाके में स्कूल की छुट्टी के समय काफी जाम लग जाता था. इससे हमारे बच्चों के साथ हम लोगों को भी काफी परेशानी होती थी. लेकिन अब ऐसा नहीं होता है. अब स्कूल कैंपस में ही बच्चे स्कूल बस पर बैठ कर घर जाते है.
फादर पीटर, प्रिंसिपल, सेंट माइकल हाई स्कूल जो स्कूल मुख्य सड़क के किनारे है. उन स्कूलों में तो यह शुरू होना चाहिए. इससे बच्चे की सुरक्षा होगी. इसके अलावा उन इलाको मे जाम की समस्या से भी निजाद मिलेगा. इसको लेकर हम डीएम को एक लेटर देंगे. स्कूल के लगने के समय और छुट्टी के समय स्कूली बसों और स्कूली आॅटो को स्कूल कैंपस में ही लगाया जायें. इससे बच्चों की सुरक्षा हो पायेगी.
डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार राज्य पब्लिक चिल्ड्रेन एसोसिएशन \\B

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