Rinku Jha
Friday, December 4, 2015
शराब से हो रही जिंदगी बर्बाद
पार्ट थ्र्री
संवाददाता, पटना
कहते है नशा इंसान को नहीं छोड़ता है. एक बार इसकी आदत लग जाने के बाद इंसान को अपने तरीके से नचाता रहता है. पहले हम अपनी मरजी से जीते है,लेकिन शराब का नशा होने के बाद शराब हमें उसके तरीके से जीने को मजबूर करता है. इस प्रक्रिया में सारा कुछ पीछे छूट जाता है. यह कहानी किसी एक के साथ नहीं बल्कि आये दिन शराब पीने वालों के साथ होती है. ऐसे व्यक्ति माता पिता के लिए तो अभिशाप बनते ही है. अगर उनकी शादी हो जायें तो पत्नी से भी रिश्ता सही नहीं रहता हैं. ऐसे ही एक शराब के आदी हो चुके व्यक्ति की कहानी हम उन्हीं की जुबानी आपको पढ़ा रहे है.
शादी के तीन महीने बाद ही पत्नी छोड़ कर चली गयी
बचपन से ही मै पढ़ने में बहुत ही अच्छा रहा. हमेशा पढ़ाई पर ध्यान रहता था. चुकी मेरे पिता पटना साइंस कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे. इस कारण पढ़ाई से लगाव काफी था. प्लस टू करने के बाद दोस्तों के संगत में एक दो बार शराब का सेवन किया. इसके बाद अक्सर शराब की पार्टी दोस्तों संग होने लगता था. इस बीच मेडिकल की पढ़ाई के लिए मास्को गया. वहां पर शराब की बुरी लत लग गयी. हालत ऐसी हो गयी कि पढा़ई बीच में छोड़ कर आना पड़ गया. जैसे तैसे एमबीए का कोर्स किया. जॉब करने लगा. लेकिन शराब नहीं छूटा. इसी बीच मेरी शादी हो गयी. पत्नी बहुत ही अच्छी थी. लेकिन शादी के तुरंत बाद ही मै उसके साथ काफी मारपीट करने लगा. वो विरोध नहीं करती थी. मेरा एक बेटा भी है. अब वो छह साल का हो गया है. मेरे शराब पीने के कारण वो मुझसे काफी डरता है. इससे वो डिप्रेशन में चला गया है. पत्नी तो मुझे तीन महीने शादी होने के बाद ही छोड़ कर चली गयी. कोर्ट में तलाक का केस भी चला. मैने कोशिश की कि पत्नी छोड़ कर नहीं जायें. लेकिन मैने उसके साथ ऐसा व्यवहार किया था कि वो मेरे पास वापस नहीं आना चाहती थी. एक साल बाद मेरा तलाक हो गया. मेरे शराब पीने के कारण पिता बीमार पड़ने लगे. बीमार पिता को भी मै देख नहीं पाता हूं. बेटा मेरे पास नहीं आना चाहता हैं. मै शराब छोड़ना चाहता हूं. दिशा नशा मुक्ति केंद्र से इलाज भी करवा रहा हूुं. लेकिन अभी भी जब सहन नहीं होता हैं तो सड़क किनारे मिलने वाला पाउच वाला शराब भी मै पी लेता हूं. मै चाहता हूं कि अब शराब नहीं पीयू. मै फिजकली भी काफी कमजोर हो गया हूं. आंख काम नहीं करता है. पांव सही से काम नहीं कर रहा है.
कोट
शराब पीने वालों की हम लोग काउंसेलिंग करते है. शराब की गड़बड़ी की उन्हें जानकारी देते है. परिवार को सपोर्ट बहुत ही जरूरी है. इमोशनली उन्हें समझाने की जरूरत होती हैं. शराब पीने वालों के साथ बच्चों के जैसा हमें व्यवहार करना पड़ता है.
राखी, फाउंडर, दिशा नशा मुक्ति केंद्र
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