Rinku Jha
Friday, December 25, 2015
बच्चों ने दबायी स्कूल वैन की गियर, होते-होते बचा हादसा ...
रिपोर्टर लाइव : आंखों देखी
- डीएम साहब, अब तो नोटिस दीजिए, स्कूल कहीं और स्कूल बस और वैन लगते है कहीं और
संवाददाता, पटना
जगह
: श्रीकृष्ष्णापुरी पार्क.
समय
: 1.30 बजे. सेंट कैरेंस हाई स्कूल में छुट्टी हुआ. स्कूल से थोड़ी दूर पर लगे स्कूल के बस, वैन और ऑटो मे बैठने के लिए स्टूडेंट आने लगे. पार्किंग में लगे एक स्कूल वैन में तीन बच्चे आकर बैठते है. एक बच्चा वैन का गियर दबा देता है. इसके साथ ही वैन चलने लगता है. वैन चलते हुए सड़क के दूसरी ओर खड़ी दूसरी गाड़ी को धक्का देकर निकलने लगती है. लेकिन तब तक ड्राइवर की नजर वैन पर पड़ती है. वो जल्दी से आकर वैन की चाबी निकाल कर वैन को रोकता है. तीनों बच्चों का चोट आयी. लेकिन एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया. सोमवार को 1.40 बजे यह घटना एसके पुरी पार्क के पास सेंट कैरेंस के स्कूल वैन में स्कूल के स्टूडेंट के साथ घटी. यह तो एक उदाहरण है जो आज घटी. इस तरह की घटनाएं आये दिन स्कूल में हाेती रहती है.
बच्चे आधे घंटे तक करते रहे वैन मालिक का इंतजार
घटना के बाद वैन के आगे की लाइट टूट गया. गियर खराब हो गया. इसके बाद सारे बच्चे को 45 मिनट तक वैन के नीचे सड़क के किनारे खड़ा कर दिया गया. इसके बाद वैन का मालिक आया. उसने ड्राइवर धर्मेंद्र को डांटा. इसके बाद फिर उसी वैन में बच्चे को बैठा कर उन्हें घर ले जाया गया. मौके पर मौजूद बच्चों ने बताया कि ड्राइवर काफी तेज गाड़ी चलाते है. इससे हमें चोट भी लगती रहता है.
डीएम साहब, अब तो ध्यान दीजिए
डीएम साहब, किसी भी स्कूल के गेट के पास आप जाकर देख सकते हैं. स्कूल के गेट पर इस तरह की घटनाएं घटती रहती है. इसकी खबर तक ना तो स्कूल को होता है और ना ही अभिभावकों को. क्योंकि ड्राइवर की गलती पर उसका मालिक डांट देता है. इसके बाद पहले की ही तरह बच्चे को स्कूल बस और वैन लेकर जाने लगते है.
स्कूल चलता गली में और बस लगती सड़क पर
गली मुहल्ले मे चलने वाले स्कूल की बसें मुख्य सड़क पर लगती हैं. स्कूल की छुट्टी होने के बाद तमाम बच्चे मुख्य सड़क पर आते हैं. फिर बस और स्कूल वैन में बैठ कर घर जाते हैं. इस समय अगर बस में या स्कूल वैन में किसी तरह की घटना होती है तो इसकी जानकारी तक अभिभावक को नहीं मिलता है. स्कूल छुट्टी के लगभग 45 मिनट तक इस तरह की घटनाएं होती रहती है.
आये दिन घायल होते हैं बच्चे
सड़क पर चलते हुए स्कूल वैन और स्कूल बस पर कोई लगाम नहीं होता है. ड्राइवर अपनी मरजी से बस की स्पीड रखते है. ऐसे में किसी को चोट लग रही है या कोई गिर रहा है, इसपर कोई ध्यान नहीं होता है. यह हालत हर स्कूल के बस का है. सेंट जोसफ कांवेंट हाई स्कूल की स्टूडेंट पल्लवी ने बताया कि सीट से अधिक बस में बच्चों को बैठाते है. जिसे बैठने के लिए जगह नहीं मिला, तो उसकी तो सामत है. ड्राइवर अचानक से ब्रेक लगाते है. इससे हमें कई बार चोट भी लग जाते है.
कोट
हमारे यहां जिन बसों को हमने अलॉट किया हुआ है, सारी बसें हमारे कैंपस में ही लगता है. लेकिन इसके बाद भी काफी संख्या मे बच्चे प्राइवेट ऑटो से आते है. इन बच्चाें के ऑटो अगर देरी से आते है तो ये बच्चे सड़क पर घूमते रहते है. यह हमारे लिए भी चिंता का विषय है.
मेरी अल्फांसो, प्रिंसिपल, डान बाॅस्को एकेडमी
स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमने कई बार डीएम को आवेदन दिया है. 2013 से लेकर 2015 तक लगभग दस बार हमने डीएम को इस आेर ध्यान देने को कहा है. लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है. मंगलवार को फिर हमलोग आवेदन देंगे.
राकेश कुमार, सचिव, गुलशन कुमार फाउंडेशन
मैने डीएम से स्कूल बस को कैंपस में लगाने की बात कहीं थी. बच्चों की सुरक्षा को लेकर हर स्कूल को यह करना जरूरी है. अभी तक डीएम ने कोई आदेश नहीं दिया है. मंगलवार को हम दोबारा एसोसिएशन की आेर से डीएम से मिलेंगे.
डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार राज्य प्राइवेट चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन
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