Friday, December 4, 2015

पैटर्न है एनसीइआरटी और बुक्स चलता है बिहार टेस्ट बुक का, ऐसा क्यूं

- बिहार बोर्ड द्वारा सम्मानित होने आये मैट्रिक के टॉपर ने उठाया प्रश्न

संवाददाता, पटनाजब 9वीं और 10वीं में एनसीइआरटी के पैटर्न को बिहार बोर्ड में लागू किया गया है तो फिर बिहार टेस्ट बुक के किताबें कोर्स में क्यूं चलाये जा रहे है. बिहार टेस्ट बुक के किताबों में काफी गलती है. 2005 के बाद किताबों का नया प्रिंट भी नहीं किया गया है. हमें पुराने किताबों से ही काम चलाना पड़ता है. बिहार बोर्ड द्वारा आयोजित मैट्रिक और इंटरमीडिएट के टॉपर्स के सम्मान समारोह में टॉपर ने कहा कि शिक्षा में सुधार तभी होगा जब किताबों को चेंज किया जायेगा. सीबीएसइ के पैटर्न को फॉलो कर रही बिहार बोर्ड के स्कूलों में एनसीइआरटी की बुक्स नहीं बल्कि बिहार टेस्ट पब्लिकेशन के बुक चलते है. प्रभात खबर से बातचीत के दौरान मैट्रिक के टॉपर जहां किताबों में परिवर्तन और इंगलिश को कंपलशरी करने की बातों पर जोर दिया, वहीं इंटरमीडिएट के टॉपर्स ने कहा कि परीक्षा में क्वेशचन का पैटर्न बहुत ही कमजोर होता है. इसमें सुधार होना चाहिए. टॉपर से बातचीत के मुख्य अंश
किताबों में किया जायें बदलावहमने एक साल तक गलत किताबो से पढ़ाई की है. बिहार टेस्ट बुक की किताबाें में काफी गलती है. इसे सही किया जाना चाहिए. बिहार टेस्ट बुक से पढ़ाई करें तो हम मैट्रिक में पास भी नहीं हो पायेंगे. कई स्तर पर किताबों में गलतियां है. लेकिन यह कई सालों से चलता आ रहा है.
नीरज रंजन, फर्स्ट टॉपर, मैट्रिक इंगलिश में निकाला जायें किताबें
बिहार टेस्ट बुक के हर विषयों की किताबें हिंदी में होती है. ऐसे में हम केवल हिंदी में ही कोर्स पढ़ पाते है. हमें इंगलिश में पढ़ने के लिए एनसीइआरटी की बुक की मदद लेनी होती है. मार्केट में बिहार टेस्ट बुक की किताबों इंगलिश में मौजूद नहीं होने से हमें काफी दिक्कतें होती है. कुणाल जिज्ञासू, फर्स्ट टॉपर, मैट्रिक
टीचर्स की बहुत है कमी स्कूल की पढ़ाई से लेकर बाहर तक में टीचर्स की काफी कमी है. ऐसे में स्कूलों में टीचर्स की संख्या बढ़ायी जायें. क्योंकि पहले हमें टीचर्स की जरूरत होती है. टीचर्स की गाइड मिलने पर ही हम सेल्फ स्टडी करते है. टीचर्स की कमी स्कूल स्तर पर होने के कारण हमें सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाता है.
अभिनव कुमार, सेकेंड टॉपर, मैट्रिक एनसीइआरटी बुक ही चले स्कूलों में
जब एनसीइआटी के पैटर्न पर 9वीं और 10वीं का कोर्स चलता है तो फिर स्कूलों में एनसीइआरटी की बुक क्यों नहीं चलाये जाते है. ऐसे हमें इंटरमीडिएट लेवल पर बहुत ही प्राब्लम होता है. अचानक से इंगलिश में एनसीइआरटी पढ़ने से हमें समझ में ही नहीं आता है. मुकुल रंजन, सेकेंड टॉपर, मैट्रिक
रेगूलर नहीं होता है क्लासेज स्कूल की पढ़ाई पर जोर देना चाहिए. एक तो स्कूल में टीचर्स की कमी है, वहीं स्कूल में रेगूलर क्लासेज नहीं होता है. इससे पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर होता है. परीक्षा का समय आ जाता है और हमारे कोर्स पूरे नहीं होते है. इस कारण इन कमियो को स्कूल लेवल पर सही करने की जरूरत है.
विवेश वैभव, थर्ड टॉपर, मैट्रिक इंगलिश को कंप्लसरी किया जायें
बिहार बोर्ड में मैट्रिक मे इंगलिश को कंप्लसरी किया जायें. कंप्लसरी नहीं होने के कारण स्कूलों में इंगलिश का क्लासेज ही नहीं होता है. इसके अलावा इंगलिश की किताबें भी नहीं मिलती है. मैट्रिक लेवल पर इंगलिश की पढ़ाई बहुत कम हम कर पाते है. सोनू कुमार, थर्ड टॉपर, मैट्रिक
क्वेशचन का पैटर्न चेंज होना चाहिए इंटर लेवल पर जो परीक्षा होती है, उसका प्रश्नों का स्तर बहुत ही कमजोर होता है. सीबीएसइ की बात करें तो प्रश्न काफी स्टैंडर्ड का होता है. इससे हमें अपने तैयारी का स्तर पता चलता है. लेकिन इंटर साइंस की परीक्षा में बहुत ही कमजोर प्रश्न पत्र रहता है. प्रश्नों के स्तर में सुधार होना चाहिए.
विकास कुमार सिंह, सेकेंड टॉपर, इंटर साइंस
टीचर्स होने चाहिए स्कूल या कॉलेज में टीचर्स की कमी है. उसे सही किया जायें. क्योंकि टीचर्स होंगे तभी क्वालिटी एजुकेशन की बातें होगी. हम सेल्फ स्टडी करके ही अपनी तैयारी किये है. लेकिन हर कोई ऐसा नहीं कर पाता है. टीचर्स की कमी को पूरा किया जाना चाहिए.
शादमा खान, फर्स्ट टॉपर, इंटर आर्ट्स साइंटिफिक को प्रश्न पत्र
इंटर कॉमर्स में जो प्रश्न पूछे जाते है, उसे बहुत ही नार्मल होता है. प्रश्न पत्र को साइंटिफिक बनाना चाहिए. इससे हमें थोड़ा चैलेंज लगे. प्रश्न थोड़ा लेवल का होना चाहिए. क्योंकि इससे हमारा बेस की कमजोर हो रहा है.कैट आदि प्रतियोगी परीक्षा में हमें तैयारी करने में कहीं सफल नहीं हो रहे है.आर्यन, फर्स्ट टॉपर, इंटर कॉमर्स \\B

No comments:

Post a Comment