Rinku Jha
Friday, December 25, 2015
रिजल्ट तो निकला समय पर, स्क्रूटनी के लिए भटकते रहे साल भर छात्र
शुक्रवार के लिए इयर इंडिंग रिपोर्ट
अलविदा 2015
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के लिए 2015 काफी उतार चढ़ाव भरा रहा. समय पर मैट्रिक और इंटर की परीक्षा लेना जहां समिति के लिए चुनौती भरा रहा, वहीं इस बार भी इंटर का रिजल्ट भी काफी विवादित रहा. समिति की ओर से 2015 का इंटर का रिजल्ट तो समय पर निकाल दिया गया, लेकिन मेरिट लिस्ट निकालने में समिति फेल हो गया. साइंस के मेरिट लिस्ट निकालने में समिति को पूरे आठ महीने लग गये. इसके अलावा स्क्रूटनी को लेकर भी समिति सालों भर विवादित रहा. समय पर रिजल्ट नहीं मिलने के कारण काफी संख्या में छात्र का नामांकन नहीं हो पाया. वहीं कर्मचारियों के हड़ताल के कारण भी समिति पूरे साल उतार चढ़ाव के दौर से गुजरता रहा. कर्मचारियों की मांग को भी 2015 में शिक्षा विभाग से मंजूरी दिलाने में समिति सफल नहीं हो पायी. पढ़िए
रिंकू झा की रिपोर्ट......
- देश भर में बोर्ड की हुई बदनामी
2015 की मैट्रिक परीक्षा के दौरान हुई कदाचार के कारण बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की देश भर में काफी बदनामी हुई. वैशाली स्थित मनहार परीक्षा केंद्र पर कदाचार के कारण समिति को कदाचार वाला बोर्ड के रूप में पहचान बन गयी. समिति कार्यालय साल भर अपने कर्मचारियों हड़ताल में भी फंसा रहा. फरवरी 2015 के पहले कर्मचारियों की हड़ताल का सामना समिति को करना पड़ा. इसके बाद लगातार कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर बार-बार हड़ताल करते रहे. इस कारण कई बार समिति कार्यालय का काम भी बाधित हुआ.
- रिजल्ट निकलने के बाद टॉपर हाे गया चेंज
समिति कार्यालय इस बार अपने रिजल्ट को लेकर भी काफी विवादित रहा. साइंस के रिजल्ट में गड़बड़ी होने से मेरिट लिस्ट दुबारा निकाला गया. 18 मई को रिजल्ट निकला तो समस्तीपुर का विकास कुमार साइंस टॉपर बना. लेकिन दस दिनों के बाद टॉपर लिस्ट में चेंज हो गया. विकास कुमार की जगह वैशाली का विशाल को साइंस टाॅपर घोषित कर दिया गया. इससे विशाल का नामांकन बिट्स पिलानी में नहीं हो पाया. वहीं विशाल जेइइ मेन में क्वालिफाई कर चुका था. टाॅपर बनने कारण विशाल ने जेइइ एडवांस नहीं दिया. इससे उसका पूरा साल बर्बाद हो गया.
- सारे प्रमंडल को किया जायेगा कंप्यूटरीकृत
समिति को कंप्यूटरीकृत करने का काम शुरू कर दिया गया है. हर प्रमंडल के सारे जिलों के सारे कामों को कंप्यूटरीकृत किया जायेगा. इससे समिति में आने वाले छात्रों का काम आसान हो जायेगा. छात्रों से संबंधित सारे कामों को कंप्यूटर ट्रैकिंग से जोड़ा जा रहा है. इससे छात्र अपने घर पर बैठे ही अपने काम के प्रोसेस को जान पायेंगे. उन्हें समिति कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. इसके अलावा छात्रों की सुविधा के लिए स्क्रूटनी की प्रक्रिया में भी परिवर्तन किया गया है. स्क्रूटनी के लिए आवेदन के पैसे अब छात्र अपने ही जिलों के बैंक में जमा कर पायेंगे. समिति की ओर से यह व्यवस्था 2015 से ही शुरू किया गया है. काॅमर्स और आर्ट्स विषय के लिए 2015 में यह शुरू भी किया गया. 2016 से साइंस विषय में भी इसे शुरू किया जायेगा. अब स्क्रूटनी के लिए आवेदन के फी अब छात्र अपने ही जिला के बैंक में जमा कर पायेंगे.
उपलब्धियां
- परीक्षा पैटर्न में बदलाव कर पुन: वस्तुनिष्ट प्रश्नों को जोड़ा गया
- इंटर के तीनो स्टीम के साथ मैट्रिक का माॅडल पेपर निकाला गया - मैट्रिक और इंटर की परीक्षा के अलावा सिमुलतला आवासीय विद्यालय के नामांकन परीक्षा भी समिति द्वारा लिया गया
- समिति की ओर से ई-बैंकिंग की सुविधा शुरू किया गया - उत्तर पुस्तिका जांच के पहले शिक्षकों का हुआ तीन दिनों की ट्रेनिंग
नाकामी
- चार लाख के लगभग इस बार भी छात्र मैट्रिक और इंटर में फेल कर गये
- स्क्रूटनी की व्यवस्था समिति इस बार भी सुधार नहीं सकी - मेरिट लिस्ट के लिए छात्रों को आठ महीना इंतजार करना पड़ा
- मैट्रिक की परीक्षा में कदाचार होने से देश भर में समिति की हुई बदनामी - पूरे प्रदेश में समिति के नौ जिलों में क्षेत्रीय कार्यालय नहीं खोला जा सका
उम्मीदें
- मैट्रिक और इंटर के 30 लाख अभ्यर्थी का समय पर परीक्षा लेना और रिजल्ट देना
- जेइइ मेन में क्वालिफाई करने वाले छात्रो का मार्क्स सीबीएसइ को समय पर उपलब्ध करवाना- इंटर काउंसिल और माध्यमिक विंग के बीच इंट्रानेट शुरू करना
- दोनों ही विंग में सोलर लाइट सिस्टम शुरू करना - 2016 की इंटर और मैट्रिक की परीक्षार्थी को ऑन लाइन एडमिट कार्ड उपलब्ध करवाना
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