Rinku Jha
Tuesday, December 1, 2015
फर्जी एक्सप्रेरियेंस मामले में डीएवी करेगा दो प्रिंसिपल पर कार्रवाई
- प्रिंसिपल पर सीबीएसइ को गुमराह कर गलत सर्टिफिकेट पर टीचर रखने का मामला
संवाददाता, पटना
स्कूलों से दो साल का फर्जी एक्सप्रेरियेंस टीचिंग सर्टिफिकेट लेकर बीएड किया. इसके बाद पहले से फिक्स सीबीएसइ के स्कूल में टीचर बन गये. यह काम सीबीएसइ के कई स्कूलों के मिलीभगत से की जा रही थी. सीबीएसइ के जानकारी में आने के बाद इसकी जांच की जा रही है. इसमें डीएवी समेत कई स्कूल के नाम सामने आये हैं. सीबीएसइ के आदेश पर डीएवी प्रशासन ने दो डीएवी के प्रिंसिपल पर कार्रवाई करने जा रही है. इसको लेकर डीएवी प्रशासन से सीबीएसइ के पास एक लेटर भेजा है. लेटर नंबर सीबीएसइ / वीआइइ/एफ 13522 (42) 2015 /ए-327-328 से डीएवी ने प्रिंसिपल को भेजा है. इसमें डीएवी खगौल खगौल के प्रिंसिपल डा. डी राम और डीएवी मुजफ्फरपुर के प्रिंसिपल एसके झा है. इसमें डीएवी मुजफ्फरपुर के प्रिंसिपल एसके झा के उपर फर्जी सर्टिफिकेट बेचने का आरोप है तो वहीं डा. डी राम पर सीबीएसइ को गुमराह करने का आरोप है.
27 जनवरी को नोटिस और 29 सितंबर को कार्रवाई
सीबीएसइ ने जांच के बाद डीएवी प्रशासन से स्कूल प्रिंसिपल पर कार्रवाई करने का आदेश डीएवी को 27 जनवरी 2015 को ही दिया था. लेकिन डीएवी ने कार्रवाई करने में देरी कर दी. इस बीच सीबीएसइ ने कई बार डीएवी प्रशासन को रिमाइंडर भी भेजा है. अब जाकर डीएवी प्रशासन ने दो प्रिंसिपल पर डिसीप्लीनरी एक्शन के तहत कार्रवाई करने जा रही है.
शिक्षा विभाग को भी सीबीएसइ ने दिया था लेटर
बिहार के स्कूलों में चल रहे फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट देने की जानकारी सीबीएसइ विजिलेंस की ओर से शिक्षा विभाग बिहार सरकार को भी दिया गया था. शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को भी सीबीएसइ विजिलेंस की ओर से लेटर भेजा गया था. लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से भी कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की गयी है.
टीचर्स पर नहीं हुई अब तक कार्रवाई
स्कूल के दो प्रिंसिपल पर तो कार्रवाई हो रही है. लेकिन अभी भी काफी संख्या में ऐसे टीचर्स स्कूल में फर्जी एक्सप्रेरियेंस सर्टिफिकेट लेकर टीचिंग कर रहे है. ऐसे टीचर्स पर सीबीएसइ ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं किया है. इसका असर स्कूल के क्वालिटी एजुकेशन पर भी पड़ रहा है.
फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट देने का पूरा लिंक करता है काम
सीबीएसइ सूत्रों की माने तो बिहार में फर्जी सर्टिफिकेट का पूरा लिंक काम करता है. स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी लेवर तक इसका लिंक रहता है. जिस स्कूल से फर्जी सर्टिफिकेट बनता है, पहले वहां से शुरू होता है. सर्टिफिकेट मिलने के बाद बीएड करने के दौरान भी उस सर्टिफिकेट की कोई जांच यूनिवर्सिटी की तरफ से नहीं की जाती है. क्योंकि बीएड का टीचिंग एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट उसी स्कूल का लागू होगा जो किसी बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूल होगा. बीएड करने के बाद टीचिंग के लिए स्कूल भी फिक्स होता है. इस पूरे प्रकरण में मोटी रकम तय होती है.
कई और स्कूल है जांच के घेरे में
डीएवी के स्कूल इस प्रकरण में अधिक शामिल है. इसको लेकर सीबीएसइ ने डीएवी प्रशासन को लेटर दिया है. सीबीएसइ की विजिलेंस विभाग की ओर से स्कूलों की जांच की जा रही है. इसमें डीएवी, धनुपड़ा, आरा, बीएस डीएवी, नवादा, डीएवी बिहारसरीफ, डीएवी अनिसाबाद आदि शामिल है. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो 2016 मेें इन स्कूलों में कई की मान्यता भी जा सकती है. फर्जी सर्टिफिकेट देने का मामला बिहार में लगभग दस सालों से चल रहा है.
ये हो सकती है कार्रवाई
- स्कूल की मान्यता जा सकती है
- डिसीप्लीनरी एक्शन के तहत स्कूल का ब्लैक लिस्टेड किया जा सकता है- बोर्ड को गुमराह करने के कारण फाइनेंशियल कार्रवाई भी हो सकती है
- टीचर्स को स्कूल से निकाला जा सकता है
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