Saturday, December 26, 2015

सीबीएसइ का नियम ताक पर, नहीं होते स्कूली बस में टीचर

- बिना टीचर के ही स्कूली बस में होते है स्टूडेंट्स

संवाददाता, पटनापटना के प्राइवेट स्कूलों के लिए तो नियम बस तोड़ने के लिए ही बनाये जाते है. स्कूलों को लेकर नियम तो कई बने है, लेकिन अधिकांश स्कूल उस नियम को ताक पर रख कर चलते है. इसी में से एक नियम स्कूल बस को लेकर है. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड की माने तो हर स्कूल की बस में टीचर को होना जरूरी है. हर बस में एक टीचर होंगे जिनके संरक्षण में स्टूडेट स्कूल से आयेंगे और छुट्टी के समय घर जायेंगे. लेकिन इस नियम का पालन कुछ स्कूलों को छोड़ दे तो कहीं पर नहीं होता है.
- एक से दो घंटे स्टूडेंट को देखने वाला कोई नहीं स्कूल की छुट्टी के बाद एक से दो घंटे का ऐसा समय होता है जब स्टूडेंट अकेले होते है. यहीं हाल सुबह स्कूल आने में होता है. बस स्टॉपेज पर तो अभिभावक बच्चे को बस में चढ़ा देते है, लेकिन उसके बाद स्कूल तक जाने में बस में
टीचर नहीं होते है. छुट्टी के बाद भी कुछ ऐसा ही होता है. स्कूल बस किस रास्ते से आ रहा है, कहां जा रहा है, इसकी जानकारी ना तो अभिभावकों को होती है और ना ही स्कूल प्रशासन को. अगर किसी बस को आने में देरी हो जायें तो अभिभावक को ड्राइवर के अलावा किसी से कंट्रैक्ट करने का आप्सन नहीं होता है. - टीचर का बस में होना अति आवश्यक है
सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने हाल में भी एक सक्रूलर निकाल कर स्कूलों को निर्देश दिया है कि हर स्कूल की बस में कम से कम एक टीचर का रहना आवश्यक है. स्कूल बस में टीचर सबसे पहले बैठेंगे. इसके बाद उस एरिया के बच्चों को बस में लिया जायेगा. ऐसा ही छुट्टी के बाद भी होगा. छुट्टी के बाद सारे बच्चे को घर छोड़ने के बाद ही टीचर घर जायेंगे. बोर्ड के द्वारा इस नियम को हर साल तमाम स्कूलों को बताया जाता है. लेकिन आज तक पटना के अधिकांश स्कूलों में इसे लागू नहीं किया जा सका है. - टीचर बस में हो तो बच्चे रहेंगे अनुशासन में
अगर स्कूल की बस में टीचर के साथ स्टूडेंट को घर भेजा जायेगा तो स्कूल से लेकर रास्ते भर तक बच्चे अनुशासन में रहेंगे. ऐसा नहीं होने से स्कूली बस में बच्चों के बीच आपसी लड़ाई झगड़े भी काफी होते है. इसके अलावा छुट्टी के बाद स्टूडेंट के उपर रोक टोक करने वाला भी कोई नहीं होता है. एक दो स्कूलों को छोड़ कर तमाम स्कूल की बस प्राइवेट है. ऐसे में कोई भी स्कूल इस ओर ध्यान नहीं देता है. बच्चे कैसे आ रहे है, इसकी कोई जिम्मेवारी नहीं लेता है.कोट
स्कूल की यह जिम्मेवारी है. बच्चे कैसे स्कूल आयेगे और छुट्टी के बाद कैसे जायेंगे. हम इसके लिए सोमवार को डीएम से बात करेंगे. क्योंकि बच्चे की सुरक्षा सभी की जिम्मेवारी है. अधिकांश स्कूल में इसका पालन नहीं होता है. डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार राज्य प्राइवेट चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन
स्कूल के पास तमाम ड्राइवर के मोबाइल नंबर होते है. जो स्कूल की बस के रूट आदि की भी पूरी जानकारी स्कूल अपने पास रखता है, लेकिन जहां पर प्राइवेट स्कूल बस की सुविधा है, वहां तो बस बस के मालिक पर ही निर्भर रहना पड़ता है. राजीव रंजन सिन्हा, प्रिंसिपल, वाल्डविन एकेडेमी
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