Tuesday, December 1, 2015

शौक बनी आदत ने छुड़ाया परिवार

- शराब से बर्बादी का पार्ट वन

संवाददाता, पटनानशा कोई भी हो, हमेशा नुकसान ही करता है. भले हम इसे शौक के तौर पर पीना शुरू करते है, लेकिन यह कब हमारी आदत बन जाती है, इसका पता भी नहीं चलता. जब पता चलता है तब तक काफी देर हो चुकी रहती है. इसका आदत लग चुका रहता है. हम इसके गिरफ्त में आ चुके रहते है. चाहते हुए भी हम इससे पीछा नहीं छुड़ा पाते है. बिहार सरकार ने शराबबंदी की घोषणा करके एक सराहनीय कदम उठाया है. शराब ने कैसे कई जिंदगी को बर्बाद कर दिया. परिवार छुट गया. परिवार के लोग नफरत करने लगे. ऐसे ही कुछ लोगाें की कहानी को हम आपके लिए लाये है. प्रभात खबर की ओर से आज से इसकी शुरूआत की जा रही है. इसमें हम ऐेसे लोगों की कहानी उन्हीं के जुबानी आपके पास रखेंगे, जिनकी जिंदगी कैसे अर्श से फर्श पर आ गयी है.
शराब के कारण टूट गयी बहन की शादी : कहानी पीड़ित की जुबानीमैने सोचा भी नहीं था कि बहन की शादी टूटने का कारण मै बनूंगा. मेरी दो बहन है. दोनों को मै बहुत ही प्यार करता हूं. मेरे पापा बिहार सचिवालय में एक बड़े पद का कार्यरत थे. अब रिटायर हो चुके है. जब मै 15 साल का था तो दोस्तों के बीच हंसी मजाक में कभी कभार शराब थोड़ा बहुत पी लेता था. मै पढ़ने में बहुत ही अच्छा है. एक बार में होटल मैनेजमेंट के एंट्रांस की परीक्षा पास कर गया. पूणे में काेर्स करने गया. वहां पर दोस्तों के संगत में कभी कभार शराब और सिगरेट पी लेता था. लेकिन बाद में आये दिन दोस्त जबरदस्ती शराब पिलाने लगे. इसके बाद तो शराब पीने की वजह हम ढूढ़ने लगे. धीरे-धीरे हर दिन हम लोग शराब पीने लगे. हमार आदत बन गयी. इसका असर यह हुआ कि कई बार मै गाड़ी चलाते हुए एक्सीडेंट भी कर गया. अभी तक पांच से छह बार मेरा एक्सीडेंट हो चुका है. मै हमेशा नशे में रहता था. पढ़ाई पर ध्यान देना कम हो गया. इससे मै होटल मैनेजमेंट के तीसरे साल में आकर फेल कर गया. तीन विषयों में मुझे बैक लग गया. पढ़ाई छूट गयी. मैने वापस पटना अपने घर आ गया. उसी समय बड़ी बहन की शादी ठीक हो रही थी. मेरे बारे में लड़के वालों को पता चल गया. इसके बाद लड़के वालों ने शादी तोड़ दिया. इससे परिवार टूट गया. अभी भी बहन की शादी नहीं हुई है. मै अब इस शराब से पीछा छुड़ाना चाहता हूं. मै बीमार रहने लगा हूं. मेरा लीवर कमजोर हो गया है.
कुदंन किशोर (बदला हुआ नाम)कोट
हमारे यहां शराब से पूरी तरह गिरफ्त में आ चुके लोग आते है. हम उनका इलाज करते है. कई बार इलाज से लोग ठीक हो कर चले जाते है. इसमें युवाओं की संख्या बहुत हो रही है. अधिकांश लोग संगत में आकर ही शराब पीने के आदी हो रहे है. डा. विवेक विशाल, हितैषी हैपीनेस होम \\B

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