Wednesday, December 30, 2015

एक क्लिक पर मिलेगा अभिभावकों काे रिपोर्ट कार्ड

 सीबीएसइ स्कूलों के नये सेशन से शुरू होगा शाला दर्पण

संवाददाता, पटनाअब अभिभावकों को बार-बार स्कूल की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी. बच्चे की जानकारी के लिए स्कूल से संपर्क नहीं करना पड़ेगा. क्योंकि अब अभिभावक अपनी मरजी से जब चाहे, बच्चे का फीडबैक ले पायेंगे. सीबीएसइ स्कूलों में नये सत्र से ऑन लाइन शाला दर्पण खोला जा रहा है. डिजटल भारत की थीम पर इसकी शुरूआत तमाम स्कूलों में इस सत्र से किया जा रहा है. इसके तहत स्कूलों की डेटा को ऑन लाइन सुरक्षित किया जायेगा. इसमें शिक्षकों की ड्यूटी के अलावा बच्चों की पूरी जानकारी ऑन लाइन उपलब्ध होगी.
- रिपोर्ट कार्ड होगा ऑन लाइनहर स्कूल स्टूडेंट्स के रिपोर्ट कार्ड को ऑन लाइन करेगा. अगर किसी अभिभावक को रिपोर्ट कार्ड मिलने के दिन समय का अभाव हो, स्कूल जाकर रिपोर्ट कार्ड नहीं ले पा रहे हो तो ऐसे में अभिभावक ऑन लाइन स्कूल के वेबसाइट पर जाकर बच्चे का रिपोर्ट कार्ड देख पायेंगे. इसके अलावा अभिभावक चाहे तो बच्चे का एटेंडेंस सीट भी ऑन लाइन वीकली या मंथली देख सकते है. क्योंकि हर क्लास का ऑन लाइन एटेंडेंस भी अब देखा जा सकेगा.
- बधाई भी मिलेगी शाला दर्पण के माध्यम से शिक्षकों को मोबाइल से जोड़ा जायेगा. इसके तहत जन्मदिन, शिक्षकों को उनके शिक्षण के लिए सात दिनों बधाइ दी जायेगी. शिक्षकों की नियुक्ति से लेकर सेवानिवृति की स्थिति भी उपलब्ब्ध होगी. इसके अलावा जिस दिन किसी स्टूडेंट का बर्थडे होगा, उसकी भी जानकारी स्कूल की ओर से दी जायेगी. और इसके लिए बधाई दी जायेगी.
ये सारी चीजें रहेंगी उपलब्ध- बिहार के तमाम सीबीएसइ स्कूलों को इससे जोड़ा जायेगा
- इसके तहत हर टीचर्स की लाॅगिंग बनायी जायेगी - स्कूल की पूरी सूचनाएं एक जगह से प्रेसित की जायेगी
- सभी स्कूलों को डेटा बेस बनाया जायेगा - स्कूल के समय के अनुसार मॉनिटरिंग की जायेगी
- नामांकन की वास्तवित स्थिति रहेगी - बोर्ड की रिजल्ट की पूरी जानकारी इसके तहत दिया जायेगा
- विद्यालय के पूरी जानकारी ऑन लाइन दिया जायेगा. देश के किसी भी कोने से किसी भी स्कूल के बारे में मिल सकेगा - क्लास की संख्या, बिजली, कंप्यूटर और अन्य आइटी सूचना भी ऑन लाइन लिया जा सकेगा
कोटशाला दर्पण से स्कूल की कई चीजें ऑन लाइन होगी. इससे अभिभावक को काफी सुविधा मिल जायेगा. बच्चे के फीडबैक के लिए अब स्कूल आने की आवश्यकता नहीं होगी. बच्चे भी अब कोई भी गलती अभिभावक से छुपा कर स्कूल में नहीं कर पायेंगे. पूरी जानकारी स्कूल के माध्यम से अभिभावक तक पहुंच सकेगा.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया \\B

एआइपीएमटी के आवेदन में किया देरी तो देना पड़ जायेगा दुगुना फाइन

संवाददाता, पटना

ऑल इंडिया प्री मेडिकल एंड प्री डेंटल एंट्रांस एग्जामिनेशन (एआइपीएमटी) की आवेदन के पंद्रह दिन रह गये है. इस दस दिनों में जल्द से जल्द आवेदन भर ले, क्योंकि अगर इस दस दिनों में आवेदन नहीं भरा तो अभ्यर्थी को दुगुना फाइन देना पड़ जायेगा. सीबीएसइ ने इस बार से एआइपीएमटी के लेट फाइन को बढ़ा कर दुगुना कर दिया है. जहां अभी अभ्यर्थी को आवेदन फार्म भरने में 14 सौ रूपये देने पड़ रहे है, वहीं 15 जनवरी के बाद 28 सौ लेट फाइन के तौर पर देना पड़ेगा. इसकी सूचना सीबीएसइ ने आवेदन की तिथि निकालने के साथ ही दे दिया है. - 15 जनवरी से 6 फरवरी तक लेट फाइन लगेगा
एआइपीएमटी के आवेदन करने की तिथि 15 जनवरी तक रखा गया है. इस बीच आवेदन करने पर 14 सौ रूपया लगेंगे. वहीं 15 जनवरी से 6 फरवरी तक लेट फाइन के द्वारा आवेदन भरें जायेंगे. इस बीच आवेदन भरने पर 28 सौ लेट फाइन के तौर पर देना होगा. - नहीं मिलेगा आवेदन को सही करने का समय
सीबीएसइ ने इस बार एआइपीएमटी के आवेदन फार्म में हुई गलती को सही करने का आप्सन नहीं दिया है. सीबीएसइ की माने तो अभ्यर्थी एक बार ही आवेदन फार्म भर सकते है. अगर अभ्यर्थी आवेदन भरने में किसी तरह की गलती करेंगे तो उन्हें सही करने के लिए समय नहीं मिलेगा. 

Monday, December 28, 2015

दो डीएवी को मिली नोटिस, बाकी की हो रही जांच

- सीबीएसइ के विजिलेंस डिपार्टमेंट ने डीएवी प्रशासन को जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा

संवाददाता, पटनाफर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट मामले में सीबीएसइ विजिलेंस डिपार्टमेंट के आदेश पर डीएवी प्रशासन ने दो असिस्टेंट रीजनल डायरेक्टर (एआरडी) को नोटिस दिया है. डीएवी कॉलेज मैनेजमेंट कमिटी ने गोला रोड डीएवी के असिस्टेंट रीजनल डायरेक्टर इंद्रजीत राय और मुजुफ्फरपुर डीएवी के असिस्टेंट रीजनल डायरेक्टर एसके झा को नोटिस दिया है. इन दोनों एआरडी पर फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट देने का आरोप है. इसके बाद बीएड की डिग्री लेने के बाद फिर डीएवी में टीचर के पद पर नियुक्त भी कर दिया. दोनो एआरडी से डीएवी प्रशासन ने फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट देने का कारण बताने को कहा है.
- पूरे बिहार के डीएवी पर है सीबीएसइ की नजर सीबीएसइ सूत्रों की माने तो पूरे बिहार के डीएवी की मिली भगत से फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट का मामला चल रहा था. इस कारण पूरे बिहार के डीएवी प्रशासन पर इसकी जांच होगी. इसकी जांच डीएवी कॉलेज मैनेजमेंट कमेटी की ओर से की जा रही है. अभी तक लगभग दस डीएवी जांच के घेरे में है. सीबीएसइ विजिलेंस की ओर से कुछ डीएवी की लिस्ट डीएवी प्रशासन को उपलब्ध करवाया गया है. इन डीएवी की जांच की जा रही है.
इन डीएवी पर चल रहा जांच - एके जेना, प्रिंसिपल और असिस्टेंट रीजनल डायरेक्टर, रोटरी कैंपस, गया
- केके सिन्हा, प्रिंसिपल और असिस्टेंट रीजनल डायरेक्टर, भागलपुर डीएवी - मीरा श्रीवास्तव, प्रिंसिपल, डीएवी, धनुपरा, आरा
- एसी जैन, प्रिंसिपल, डीएवी खगौल नोट - इन सभी के उपर फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट निर्गत करने का आरोप है
- विभा मिश्रा, डीएवी नवादाडीएवी नवादा को सीबीएसइ की मान्यता नहीं है, लेकिन मान्यता प्राप्त लिख कर फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट निर्गत किया गया.
कोटडीएवी में फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट लेकर बीएड करने के बाद टीचर बनने का कई मामला है. फर्जी रूप से टीचर के पद पर लगभग सभी डीएवी में मामला है. सीबीएसइ विजिलेंस की जांच के बाद अब सामने यह आ रहा है.
निखिल कुमार, महासचिव, डीएवी टीचर्स एसोसिएशन \\B

सीबीएसइ के तीन कोर्स को यूजीसी ने दिया मान्यता

- प्लस टू करने के बाद सीधा नामांकन हो पायेगा कॉलेजों में

संवाददाता, पटनासेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) के तीन कोर्स को यूजीसी ने मान्यता दे दी है. अब इन तीनों कोर्स में नामांकन सीधे कॉलेजों में हो पायेगा. ये कोर्स कंप्यूटर साइंस, इंफार्मेटिक्स प्रैक्टिस, मल्टीमीडिया और वेब टेक्नोलॉजी है. 11वीं और 12वीं में दो साल की पढ़ाई के बाद ये कोर्स काॅलेजों में मुख्य विषय के रूप में लिये जा सकेंगे. कॉलेजों में ये विषय वैकल्पिक विषय के रूप में नहीं बल्कि मुख्य विषय के रूप में पढ़े जा सकेंगे.
- मेन सब्जेक्ट में किया जायें शामिल इन कोर्स को लेकर सीबीएसइ ने कुछ दिनों पहले यूजीसी को एक पत्र लिख कर इन कोर्सो को मेन सब्जेक्ट के रूप में शामिल करने को कहा था. इसके बाद यूजीसी ने इन कोर्स को कॉलेजों में नामांकन के लिए मान्यता दे दिया है. अब इन कोर्स से प्लस टू करने के बाद स्टूडेंट्स नामांकन ले पायेंगे. इन कोर्स में नामांकन लेते समय इसके अंक को यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा में जोड़ा जायेगा.
- विवि और कॉलेजों को लिखा गया लेटर इसको लेकर यूजीसी ने तमाम विश्वविद्यालय और कॉलेजों को पत्र जारी कर दिया है. पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि सीबीएसइ के इन नये सब्जेक्ट को अहमियत दिया जायें. इन कोर्स को वोकेशनल के रूप में कोई स्टूडेट अप्लाई करें तो उनके अंक का वेटेज दिया जायेगा.
- सितंबर में शुरू किया था सीबीएसइ ने इन कोर्स को इन तीनों कोर्स को प्लस टू लेवल पर सीबीएसइ ने 2015 सितंबर से ही शुरू किया था. पहले इन कोर्स की पढ़ाई सीबीएसइ स्कूलों में 9वीं और 10वीं में होता था. इन कोर्स को 10वीं लेवल पर भी वोकेशनल कोर्स के रूप में ही पढ़ाई होती थी. इसके बाद इसे प्लस टू में शुरू किया गया. लेकिन इससे फायदा स्टूडेंट्स को नहीं हो पा रहा था. वोकेशनल होने के कारण इसे स्टूडेंट पढ़ना भी नहीं चाहते थे.
कोटइन कोर्स को मुख्य विषय के रूप में यूजीसी की मान्यता मिलने से प्लस टू लेवल पर इन कोर्स में नामांकन बढ़ेगा. अब स्टूडेंट का रूझान इन कोर्स की ओर बढ़ेगा. अब स्कूल भी इन कोर्स को शुरू करेंगे. इससे अधिक से अधिक स्टूडेंट इन कोर्स में नामांकन ले पायेंगे.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ \\B

Sunday, December 27, 2015

दो छात्र को पढ़ा रहे नौ शिक्षक

- सिमुलतला आवासीय विद्यालय में काॅमर्स और आर्ट्स में है छात्रों से अधिक शिक्षकों की संख्या

रिंकू झा, पटनाबिहार में भले शिक्षकों की कमी हो, विषयवार शिक्षकों के नहीं होने से क्वालिटी एजुकेशन पर असर हो रहा हो, लेकिन इसका उल्टा सिमुलतला आवासीय विद्यालय में शिक्षकों की संख्या छात्रों से अधिक है. जहां आर्ट्स विषय में दो छात्र है वहीं काॅमर्स में छात्रों की संख्या तीन ही है. लेकिन अगर शिक्षकों की बात करें तो आर्ट्स में शिक्षकों की संख्या नौ है. वहीं काॅमर्स में शिक्षकों की संख्या चार है. 2015 में पहली बार 10वीं बोर्ड की परीक्षा में सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्र और छात्राएं शामिल हुए थे. 120 छात्रों में मात्र 53 छात्रो ने ही 11वीं में नामांकन सिमुलतला आवासीय विद्यालय में लिया.
- 40 का सेक्शन भी नहीं पूरा कर पाया स्कूल नामांकन लेने में स्कूल तो फेल हो ही रहा है. वहीं 11वीं में 40 छात्रों का सेक्शन भी पूरा नहीं हो पाया है. पहली बार 11वीं में नामांकन लिया गया. 11वीं में कुल 53 नामांकन में 48 छात्रों साइंस में नामांकन लिया. इसमें 29 छात्र मैथ और 19 छात्र बायोलॉजी में नामांकन लिये. साइंस, आर्ट्स और काॅमर्स तीनों ही स्टीम में एक भी सेक्शन पूरा नहीं हो पाया.
- छह करोड़ सालाना खर्च है विद्यालय का बिहार सरकार का इस विद्यालय पर सालाना छह करोड़ रूपये का खर्च है. वर्तमान में विद्यालय में चार सौ छात्र पर 26 शिक्षक है. वहीं सेक्यूरिटी गार्ड की संख्या 18 है. आवासीय होने के कारण खाना और रहना भी मुफ्त मिलता है. छात्रों के रहने, देखभाल और विद्यालय के रख रखाव पर सालाना छह करोड़ रूपये का खर्च बिहार सरकार को करना पड़ता है.
- बिना इक्यूपमेंट के चल रहा लैब विद्यालय में 11वीं में नामांकन हुए लगभग दस महीने से अधिक हो गया. लेकिन अभी तक 11वीं में एक भी प्रैक्टिकल नहीं हो पाया. विद्यालय सूत्रो की माने तो विद्यालय में मौजूद लैब में 10वीं क्लास तक के लिए ही इक्यूपमेंट है. प्लस टू लेवल का इक्यूपमेंट नहीं होने के कारण लैब में प्रैक्टिकल नहीं हो पाया है. प्लस टू के सिलेबस में 18 प्रैक्टिकल और 18 एक्टिविटी का प्रावधान है. लेकिन अभी तक एक भी ना तो प्रैक्टिकल हो पाया और ना ही एक्टिविटी ही हो पायी है. तीन महीने के बाद सारे छात्र 12वीं में चले जायेंगे.
साइंस
छात्रों की संख्या - 48 शिक्षकों की संख्या - 9
आर्ट्स छात्रों की संख्या - 2
शिक्षको की संख्या - 9 काॅमर्स
छात्रों की संख्या - 3 शिक्षकों की संख्या - 4
कोट11वीं में नामांकन काफी कम हुआ. इसको लेकर बिहार बोर्ड से कई बार विज्ञप्ति निकालने को भी कहा गया. इससे बाहरी छात्रों का भी नामांकन सीधे तौर पर लिया जा सकता था. लेकिन विज्ञप्ति नहीं निकला. इससे छात्रों की संख्या नहीं बढ़ पायी.
राजीव रंजन, प्रिंसिपल, सिमुलतला आवासीय विद्यालय \\B

एस्से कंपीटिशन में हो शामिल, मिलेगा एक लाख इनाम

- अधिक से अधिक स्टूडेट्स को शामिल करने के लिए सीबीएसइ ने दिया इनाम का ऑफर

संवाददाता, पटनाएक छोटा सा कंपीटिशन स्टूडेंट को लखपति बना सकता है. अधिक से अधिक स्टूडेंट सीबीएसइ द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में शामिल हो, इसके लिए सीबीएसइ ने इनाम की राशि कई गुणा बढ़ा दी है. पहली बार सीबीएसइ की ओर से रिपब्लिक डे पर एक एस्से कंपीटिशन का आयोजन किया जा रहा है. कंपीटिशन में हर क्लास के लिए अलग-अलग टाॅपिक दिया गया है. छह दिनों तक चलने वाले एस्से कंपीटिशन का रिजल्ट 26 जनवरी को निकाला जायेगा. इसमें जिन स्टूडेंट का सेलेक्शन होगा, उन्हें सर्टिफिकेट के अलावा इनाम के तौर पर पैसे दिये जायेंगे. इनाम के तौर पर 50 हजार से एक लाख तक रखा गया है.
- 10 से 16 जनवरी तक होगा आयोजन एस्से कंपीटिशन का आयोजन स्कूलो में 10 से 16 जनवरी तक करने का निर्देश सीबीएसइ ने दिया है. कंपीटिशन के बाद हर स्कूल चुने हुए एस्से को सीबीएसइ को भेजेगा. सीबीएसइ द्वारा हर केटेगरी से टॉप पांच एस्से को चुना जायेगा. बोर्ड ने निर्देश दिया है कि हर एस्से स्कूल से एटेस्टेड होना चाहिए. साथ में स्टूडेंट का एड्रेस, नाम, स्कूल का नाम, एस्से की टाइटल आदि एस्से के उपर वाले पेज पर लिखा होना चाहिए.
हर केटेगरी के लिए अलग-अलग टॉपिक
क्लास वन से चौथी तक - मैं अपने देश को कैसा बनाना चाहता हूं
- हमारा स्कूल एक हैपी प्लेस हो, इसके लिए क्या कर सकते है- देश के नागरिक होने के नाते, हमारी ड्यूटी क्या है
- एक छोटी क्या भूमिका हो जो हमें दूसरे से बड़ा बनाता है नोट - 150 से 200 शब्दों में लिखना है
क्लास पांचवीं से आठवीं तक - हमारे अच्छे काम पर हमारी सोसाइटी निर्भर है
- डेमोक्रेटिक सोसायटी की भूमिका और महत्व के बारे में बतायें - नागरिक की जिम्मेवारी और कर्तव्य
- सोसायटी का सच्चा हीरो कौन है नोट - 200 से 300 शब्दों में लिखना है
क्लास 9वीं से 12वीं तक - हम खुद को कैसे समाज के हीरो बना सकते है
- वोट देने का अधिकार हमारा मूल अधिकार है, इसको लेकर समाज को कैसे अवेयर करेंगे - देश के स्वतंत्र होने के बाद नागरिक के तौर पर हमारी भूमिका कैसे चेंज हो गयी है
- कम्यूनिटी को चलाने के लिए हम क्या कर सकते हैनोट - इसे लिखने के लिए 300 से 400 शब्द होने चाहिए
कंपीटिशन की मुख्य बातें - एस्से कंपीटिशन में क्लास वन से 12वीं तक के स्टूडेंट शामिल होंगे
- हर क्लास के लिए अलग-अलग टॉपिक दिया गया है - स्टूडेंट अपना एस्से की स्कैन कॉपी को इ-मेल के माध्यम से बोर्ड को भेजेंगे
- बोर्ड ने rdcompetition2016@gmail.com पर भेजने को कहा है- हर केटेगरी से 25 इंट्री को चुना जायेगा.
- इसका रिजल्ट 26 जनवरी 2016 काे सीबीएसइ के वेबसाइट पर आयेगा - सर्टिफिकेट के अलावा 50 से 1 लाख तक का इनाम दिया जायेगा
- इनाम के तौर पर क्लास वन से चौथी तक 50 हजार, क्लास पांचवीं से आठवीं तक 75 हजार और 9वीं से 12वीं तक के स्टूडेंट को एक लाख रूपये इनाम के रूप में मिलेगा. 

30 फीसदी अभ्यर्थियों ने नहीं दिया नेट एग्जाम

- पटना में 30 और भागलपुर में 8 परीक्षा केंद्र पर लिया गया यूजीसी नेट की परीक्षा

संवाददाता, पटनानेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट की परीक्षा में 30 फीसदी अभ्यर्थी शामिल नहीं हो पाये. पूरे बिहार में यूजीसी नेट की परीक्षा में कुल 21 हजार अभ्यर्थी को शामिल होना था. इसमें से लगभग 12 हजार अभ्यर्थी ही परीक्षा में शामिल हो पायें. सीबीएसइ पटना रिजन से मिली जानकारी के अनुसार काफी संख्या में अभ्यर्थी यूजीसी नेट की परीक्षा में एबसेंट थे. लगभग 30 फीसदी अभ्यर्थी ने नेट की परीक्षा नहीं दिया. इस बार नेट की परीक्षा के लिए कुल 38 परीक्षा केंद्र बनाये गये थे. इसमें पटना में 30 और भागलपुर में 8 परीक्षा केंद्र पर नेट की परीक्षा ली गयी. हर परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी की कमी देखी गयी है.
- एडमिट कार्ड के अलावा कुछ भी ले जाने की अनुमित नहीं यूजीसी नेट देने वाले अभ्यर्थी की हर परीक्षा केंद्र पर पूरी जांच के बाद ही परीक्षा केंद्र पर जाने दिया गया, अभ्यर्थी को एडमिट कार्ड के अलावा किसी भी तरह की कागजात ले जाने की अनुमति नहीं थी. मोबाइल और किसी भी तरह के डिवाइस को ले जाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगी हुई थी. जिन अभ्यर्थी के पास किसी भी तरह का डिवाइस पाया गया तो उन्हें बाहर ही रखने के निर्देश दिये गये थे.
- फरवरी में आयेगा रिजल्ट सीबीएसइ की माने तो यूजीसी नेट का रिजल्ट फरवरी के दूसरे सप्ताह में आ जायेगा. चुकी 28 दिसंबर 2014 को हुई नेट की परीक्षा का रिजल्ट देने में सीबीएसइ को लगभग चार महीने लग गये थे. इस कारण 28 जून की नेट की परीक्षा देने में अभ्यर्थी को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. रिजल्ट नहीं निकलने के कारण छात्र दूबारा आवेदन नहीं भर पायें थे. लेकिन इस बार सीबीएसइ जनवरी लास्ट या फरवरी के पहले सप्ताह में रिजल्ट दे देगा.
कोटनेट की परीक्षा काफी बढ़िया से हो गया. कदाचार मुक्त परीक्षा के लिए बोर्ड की ओर से पूरी एहतियात रखी गयी थी. हर छात्र की पूरी जांच के बाद ही परीक्षा हॉल में जाने की अनुमति दी गयी थी. मोबाइल आदि ले जाने पर पूरी तरह से पाबंदी थी. परीक्षा केंद्र पर समय का पूरा ख्याल रखा गया.
आर आर मीणा, रीनजल ऑफिसर, सीबीएसइ पटना \\B

Saturday, December 26, 2015

स्कूल गेट के बाहर लगाते है स्टूडेंट्स बाइक और स्कूटी, अभिभावक पर दबाव डाले प्रशासन

- स्कूल प्रशासन को पता ही नहीं होता कि स्टूडेंट चला रहे बाइक और स्कूटी

संवाददाता, पटनास्कूली स्टूडेंट्स बाइक और स्कूटी के साथ स्कूल कैंपस में आते है, इसकी जानकारी ही स्कूल प्रशासन को नहीं होती है. स्कूल गेट के अंदर तो स्टूडेंट पैदल ही आते है. पटना के कई स्कूल में कैंपस के अंदर बाइक या स्कूटी लेकर आने पर पूरी तरह से पाबंदी है. लेकिन इसके बावजूद स्कूल यूनिफार्म में स्टूडेंट सड़क पर नजर आते है. स्कूल प्रशासन को पता ही नहीं होता है कि स्टूडेंट्स बाइक या स्कूटी से स्कूल आ रहे है.
- स्कूल है अनजान, स्टूडेंट चला रहे बाइक और स्कूटी स्कूल कैंपस में भले पार्किंग ना हो, बाइक या स्कूटी लाने का परमिशन ना हो. लेकिन मंगलवार चले अभियान में काफी संख्या में ऐसे बड़े स्कूल के स्टूडेट्स पकड़े गये, जिनके पास स्कूटी और बाइक है. पुलिस द्वारा बताये जाने पर स्कूल को पता चलता है कि स्टूडेंट बाइक और स्कूटी से स्कूल आते है.
- स्कूल की स्टूडेंट का हो गया था एक्सीडेंट कई सालों पहले सेंट माइकल की एक गर्ल स्टूडेंट का एक्सीडेंट स्कूटी चलाते हुए हो गया था. इसके बाद स्कूल में पूरी तरह से बाइक और स्कूटी चलाने पर रोक लगा दी गयी थी. स्कूल में इसके लिए स्टूडेंट को अवेयर किया गया था. इसके बाद जो भी स्टूडेंट बाइक या स्कूटी से आते थे, उनके अभिभावक को बुला कर इसके लिए मना किया जाता था. स्कूल में सिर्फ साइकिल से आने की नोटिस लगी हुई है. स्कूल प्रशासन के अनुसार गेट के बाहर भी अब कोई बाइक लगी होती है तो स्टूडेंट्स से पूछताछ की जाती है.
- स्कूटी से आने पर मिलती है स्कूल में सजा स्कूल स्टूडेंट स्कूटी चला कर नहीं आयें, इसके लिए स्कूल अपने स्तर से स्टूडेंट्स को अवेयर करते है. कई स्कूल तो इसके लिए स्टूडेंट को सजा भी देते है. लाइसेंस तक रख लिया जाता है. लेकिन इसके बाद भी स्टूडेंट सुधरते नहीं है. माउंट कार्मेल हाई स्कूल में तो स्कूटी से आने पर स्टूडेंट काे कई बार एबसेंट लगाया गया. डिसीप्लीन तोड़ने की सजा भी दी गयी, लेकिन स्टूडेंट फिर भी स्कूटी से स्कूल आती है. स्कूल कैंपस के बाहर स्कूटी लगी रहती है. जब पुलिस की तरफ से स्कूटी पकड़ा जाता है तो स्कूल प्रशासन को पता चलता है. मंगलवार को भी कोतवाली थाने के पुलिस की ओर से माउंट कार्मेल की चार लड़की को स्कूटी के साथ पकड़ा गया था. जब पुलिस स्टूडेट को लेकर स्कूल पहुंची तो प्रिंसिपल सिस्टर सुजाता ने अभिभावक से शिकायत करने को कहा.
कोटस्कूल में बाइक और स्कूटी से बच्चे स्कूल ना आयें, इसके लिए अभिभावकों के उपर दबाव डालने की जरूरत है. क्योंकि स्कूल में बाइक लाने का एलाउ नहीं है. प्रशासन को अभिभावक पर इतना दबाव डालना चाहिए, जिससे बच्चों को बाइक या स्कूटी खरीद कर ही ना दिया जायें.
फादर पीटर, प्रिंसिपल, सेंट माइकल हाई स्कूल स्कूल कैंपस में स्कूटी लाने का पाबंदी कई सालों पहले ही लगा दिया गया था. लेकिन इसके बाद भी स्टूडेंट स्कूटी से आते है. कई बार चाबी लेकर स्कूटी का जब्द भी कर लिया, लेकिन इसके बाद भी स्टूडेंट स्कूटी चलाते हुए नजर आ जाती है. अभिभावक को समझना चाहिए. अभिभावक ही इस पर रोक लगा सकते है.
सिस्टर सुजाता, प्रिंसिपल, माउंट कार्मेल हाई स्कूल बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाने को लेकर स्कूल कैंपस में स्टूडेंट को अवेयर किया जाता है. स्कूल डायरी पर भी इसकी जानकारी दी जाती है. अभिभावक को भी समझने की जरूरत है. जब तक अभिभावक गाड़ी देते रहेंगे, बच्चे तो चलायेंगे ही.
ब्रदर सतीश, प्रिंसिपल, लोयेला हाई स्कूल \\B

स्टूडेंट तो बढ़े, स्कूल है जस का तस

- शिक्षा के अधिकार के तहत नहीं बढ़ रहे स्कूल

संवाददाता, पटनाशिक्षा के अधिकार की तो हम सब बातें करते है. इसको लेकर नियम भी बनते है, लेकिन अभी तक शिक्षा के अधिकार को सही से लागू नहीं किया जा सका है. पटना जिला के स्कूलों की बात करें तो शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन की बस खानापूर्ति ही होती है. पिछले कई सालों की बात करें तो स्कूलों में नामांकन की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन स्कूल की संख्या जस की तस है. जहां 2014-15 में शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन 49 स्कूलों में किया गया था. सारे स्कूलों को मिला कर 690 बच्चों का नामांकन क्लास वन में लिया गया है. वहीं 2015-16 सत्र की बात करें ताे 7 दिसंबर 2015 तक 1364 बच्चों का नामांकन शिक्षा के अधिकार के तहत लिया गया है.
- 1649 में मात्र सौ स्कूलों में ही नामांकन पटना जिला की बात करें तो सीबीएसइ, आइसीएसइ और सरकारी प्रस्वीकृत स्कूलों की संख्या लगभग 1649 सौ हैं. इसमें अभी तक मात्र सौ स्कूलों में शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन लिया जा सका है. यह जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मिली है. आरटीआई एक्टिविस्ट अजय कुमार चौरसिया ने बताया कि 2015-16 सत्र में कुछ नामांकन तो बढ़े है, लेकिन वहीं स्कूलों में नामांकन बढ़ा है जहां पर पहले से ही नामांकन हुआ है. नये प्राइवेट स्कूलों काफी कम जुड़े है. पटना जिला में 1649 स्कूलों ने राज्य सरकार से प्रस्वीकृत के लिए आवेदन दिया है. लेकिन स्कूलों को अभी तक राज्य सरकार से प्रस्वीकृत नहीं मिला है. अभी तक मात्र 308 स्कूलों को ही राज्य सरकार ने प्रस्वीकृति दिया है. इसमें 2015-16 सत्र में मात्र 100 स्कूलों में ही आरटीइ के तहत नामांकन लिया गया है. बांकी 208 स्कूलों में अभी तक एक भी नामांकन नहीं लिया जा सका है.
- हर स्कूलों को लेना है 25 फीसदी नामांकन शिक्षा के अधिकार कानून 2011 में लागू किया गया था. इसके तहत वंचित और गरीब बच्चों का नामांकन प्राइवेट स्कूलों में क्लास वन में लिया जायेगा. बच्चों के नामांकन के लिए राज्य सरकार की ओर से स्कूलों को अनुदान के तौर पर पैसे भी दिये जाते है. लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी कई प्राइवेट स्कूल में एक भी नामांकन आरटीइ के तहत नहीं लिया गया है.
- हर बड़ा स्कूल है आरटीइ से गायब पटना शहरी क्षेत्र की बात करें तो हर बड़ा स्कूल आरटीइ से गायब है. जहां डीपीएस ने अभी तक एक भी नामांकन नहीं लिया वहीं डीएवी के 12 ब्रांच पटना शहरी क्षेत्रों में चलता है. लेकिन अगर आरटीइ के तहत नामांकन की बात होगी तो मात्र डीएवी खगौल में 11 बच्चों का नामांकन लिया गया.
कोटहम कोशिश कर रहे है कि सारे प्राइवेट स्कूल में शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन लिया जायें. स्कूलों के उपर दबाव डाला जाता है तभी स्कूल नामांकन लेते है. 2016-17 में अभियान चला कर नामांकन दिलवाया जायेगा.
रामसागर सिंह, निदेशक, सर्व शिक्षा अभियान 

तीन महीने बाद नया सेशन, अभी भी चल रहा नामांकन

- शिक्षा के अधिकार के तहत दिसंबर में हो रहा नामांकन

संवाददाता, पटना स्कूलों में भले नया सेशन अप्रैल से शुरू हो जाता है. सेशन शुरू होने से पहले नये नामांकन की सारी प्रक्रियाएं भी पूरी कर ली जाती है. लेकिन अगर शिक्षा के अधिकार की बात करें तो इसके नामांकन की कोई समय तय नही है. पूरे साल तक एक ही क्लास का नामांकन चलता रहता है. यह खुलासा सूचना के अधिकार के मिली जानकारी से हुई है. 2014-15 का नामांकन जहां जनवरी 2015 तक चलता रहा वहीं 2015-16 सत्र में भी यहीं हाल रहा. आरटीआई एक्टिविस्ट अजय कुमार की माने तो 2015-16 सत्र में जून से लेकर 7 दिसंबर 2015 तक आरटीइ के तहत नामांकन लिया गया है.
- तीन महीने बाद शुरू होगा नया सेशन कई स्कूलों में सिलेबस खत्म हो चुका है. कई स्कूलों में सिलेबस अंतिम चरण में चल रहा है. तीन महीने का सेशन खत्म होने वाला है. ऐसे में नये नामांकन लिये जा रहे है. शिक्षा के अधिकार के तहत 2015-16 सत्र में 1364 बच्चों का नामांकन लिया गया है. इसमें लगभग पांच सौ बच्चों का नामांकन शिक्षा के अधिकार के तहत नवंबर और दिसंबर में प्राइवेट स्कूलों द्वारा लिया गया है.
- कब पढ़ेंगे और कब अगले क्लास मे जायेंगे बच्चे दिसंबर में जिन स्कूलों में क्लास वन में नामांकन बच्चों का लिया गया है. उनके पास बस तीन महीने का समय है. दिसंबर में जाड़े की छुट्टी के बाद जनवरी, फरवरी और मार्च ही बचता है. इस तीन महीने में बस एग्जाम का दौर चलेगा. ऐसे में नये नामांकित बच्चे की पढ़ाई पूरी होगी नहीं और वो अगले क्लास में चले जायेंगे. इससे क्वालिटी एजुकेशन कैसे पूरा हो पायेगा.
कोटहमारी कोशिश रहती है कि समय पर नामांकन हो जायें. लेकिन प्राइवेट स्कूल शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन नहीं लेना चाहते है. ऐसे में हमारे दबाव देने पर ही नामांकन लेते है. इस कारण देरी होती है.
राम सागर सिंह, निदेशक, सर्व शिक्षा अभियान \\B

स्कूल में पार्किंग नहीं, सड़क पर होता है स्कूल बसों और ऑटो की पार्किंग

- पटना के अधिकांश स्कूल के बाहर ही खड़े होते है स्कूली बस और ऑटो

संवाददाता, पटनास्कूल की छुट्टी हुई की नहीं सारे बच्चे स्कूल के बाहर. इसके बाद अपने बस तक जाना, बैठना. एक-एक कर सारे बच्चे जब ऑटो या बस में बैठेंगे तभी तो बस आगे बढ़ेगी. इस सारी प्रक्रिया में लगभग आधे घंटे का समय लग जाता है. बच्चे के बस और ऑटो में बैठने के बाद बस अपनी दिशा की ओर टर्न लेगी. इसके लिए उन्हें स्पेश चाहिए. आगे पीछे सवारी करने के लिए भी काफी देर तक जददोजहद चलता है. इतने में ही तो सड़क पर जाम की स्थिति बन जाती है. यह कोई एक दिन नहीं बल्कि हर दिन का हाल है. पटना में अधिकांश स्कूलों के बाहर ही स्कूली बस, ऑटो और स्कूली वैन लगे होते है. स्कूल के बाहर चल रहे नो पार्किंग में पार्किंग की वजह से ही सबसे अधिक जाम लगता है. अगर इन स्कूली बसो, ऑटो और वैन को स्कूल कैंपस में लगाने की जगह मिल जायें तो इस जाम से बचा जा सकता है. इसके अलावा बच्चे भी सुरक्षित रह पायेंगे.
- स्कूल गेट के बाहर लगे होते है स्कूली बसे और ऑटो पटना के अधिकांश स्कूल शहर के मेन रोड पर ही है. ऐसे में सड़क किनारे स्कूली बसों और ऑटो के रहने से जाम की समस्या हो रही है. चार साल पहले पटना ट्रैफिक पुलिस की तरफ से यह प्रयास शुरू भी किया गया था. लेकिन एक दो स्कूल को छोड़ किसी ने इसे फॉलो नहीं किया.
- हर इलाका होता है इफेक्टस्कूल की छुट्टी के समय का जाम भले उन इलाको में लगे जिन इलाको में स्कूल है. लेकिन इसका असर कई घंटों तक पूरे शहर में देखने को मिलता है. सेंट जोसफ कांवेंट स्कूल की बात करें या माउंट कार्मेल की बात करें. जब स्कूल की की छुट्टी होती है तो बेली रोड से लेकर अशोक राजपथ तक सड़क जाम हो जाता है. अशोक राजपथ तो कई घंटों तक पैक हो जाता है. वहीं हाल हाइ कोट वाले सड़क की होती है. सड़क पर ही स्कूल की सवारी लगे होते है.
- स्टूडेंट के सुरक्षा पर रहता है सवाल स्कूल की छुट्टी के बाद जब स्टूडेंट स्कूल के बाहर होते है तो उन्हें टोकने के लिए टीचर्स होते है और ना ही अभिभावक का ही डर बना रहता है. ऐसे बच्चे पूरी तरह से फ्री होते है. उन्हें ना तो सड़क क्रास का ध्यान और ना ही ऑटो या बस में बैठने का होश. 15 से 20 मिनट तक काफी धमा चौकड़ी करते है. इससे बच्चों की सुरक्षा पर भी अब सवाल उठने लगा है. स्कूल की छुट्टी के समय थोड़ी ही देर सही, बच्चों की सुरक्षा खतरे में होती है. लेकिन इस पर ना तो पुलिस प्रशासन का ध्यान होता है और ना स्कूल प्रशासन का ही.
- छुट्टी के समय अभिभावक की गाड़ियां भी बनती है वजह चुकी स्कूल का अपना कंवियेंस नहीं है. ऐसे में छुट्टी के समय उन अभिभावकों की प्राइवेट गाड़ियां भी होती है जो बच्चों को स्कूल से लेने आते है. सड़क पर ही बच्चे अपनी गाड़ी में बैठते है, ऐसे में जाम लगना तय है. हर स्कूलों में ऐसे अभिभावको की संख्या काफी होती है. अभिभावक भी स्कूल की छुट्टी के दस से पंद्रह मिनट ही स्कूल के पास आकर खड़े हो जाते है.
- सेंट माइकल ने लिया इनिसिएटिव सेंट माइकल हाई स्कूल, कुर्जी के बाहर स्कूल की छुट्टी के समय हर दिन घंटे दो घंटे के लिए जाम लगता था. इससे दीघा, दानापुर आदि तरफ से आने वाली सवारी घंटों तक जाम में फंसी रहती थी. इतना ही नहीं स्कूली स्टूडेंट्स भी घंटों जाम में जूझते रहते थे. जाम की सबसे बड़ी वजह स्कूल गेट के बाहर स्कूली बसाें का लगना था. स्कूल की छुट्टी के समय तमाम स्टूडेंट एक साथ बाहर निकलते थे. इससे जाम लगती थी. लेकिन पटना ट्रैफिक पुलिस के निर्देश के बाद सेंट माइकल हाई स्कूल ने तमाम प्राइवेट स्कूली बसों को स्कूल कैंपस में लगाने की इजाजत दे दिया. अब छुटटी होने के साथ सारे स्टूडेंट्स कैंपस मे ही बस में बैठते है. इससे उस इलाके में अब जाम नहीं लगता है.
कोटपटना ट्रैफिक पुलिस का निर्देश हमें 2012 में मिला था. इसके बाद मैने यह इनिसिएटिव उठाया. पहले इस इलाके में स्कूल की छुट्टी के समय काफी जाम लग जाता था. इससे हमारे बच्चों के साथ हम लोगों को भी काफी परेशानी होती थी. लेकिन अब ऐसा नहीं होता है. अब स्कूल कैंपस में ही बच्चे स्कूल बस पर बैठ कर घर जाते है.
फादर पीटर, प्रिंसिपल, सेंट माइकल हाई स्कूल जो स्कूल मुख्य सड़क के किनारे है. उन स्कूलों में तो यह शुरू होना चाहिए. इससे बच्चे की सुरक्षा होगी. इसके अलावा उन इलाको मे जाम की समस्या से भी निजाद मिलेगा. इसको लेकर हम डीएम को एक लेटर देंगे. स्कूल के लगने के समय और छुट्टी के समय स्कूली बसों और स्कूली आॅटो को स्कूल कैंपस में ही लगाया जायें. इससे बच्चों की सुरक्षा हो पायेगी.
डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार राज्य पब्लिक चिल्ड्रेन एसोसिएशन \\B

89 के बदले बिहार बोर्ड ने गणित में दिया 21 अंक, सूचना के अधिकार से चला पता

- स्क्रूटनी में रिजल्ट सही होने के बाद भी बिहार बोर्ड का पांच महीने से सुमित राणा लगा रहा चक्कर

संवाददाता, पटनासारे विषय मे अच्छे अंक आयें. गणित विषय में भी उसे 89 अंक आयें. लेकिन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के शिक्षकों की मेहरवानी ऐसी की मात्र 21 अंक देकर सुमित राणा को मैट्रिक 2015 की परीक्षा में फेल कर दिया गया. गणपति सिंह उच्च विद्यालय कहलगांव, भागलपुर का छात्र सुमित राणा (रौल नंबर 1500329 रौल कोड 31064) को यह जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मिली. गणित विषय में फेल सुमित राणा ने स्क्रूटनी के लिए आवेदन दिया. स्क्रूटनी में 21 की जगह 89 अंक तो मिले, पर इसकी जानकारी स्क्रूटनी के रिजल्ट के तौर पर भी सुमित राणा को नहीं दिया गया. इसके बाद सुमित राणा ने हार नहीं मानी, उसके सूचना के अधिकार के तहत अपनी गणित की उत्तर पुस्तिका निकलवायी. इसके बाद सही रिजल्ट सुमित राणा को पता चला.
- 22 जून से भटक रहा सुमित राणा20 जून को मैट्रिक का रिजल्ट निकला. 22 जून को सुमित राणा ने स्क्रूटनी के लिए अप्लाई किया. जुलाई में स्क्रूटनी का रिजल्ट मिला. संस्कृत में तो दो अंक बढ़े, लेकिन गणित में अंक जस के तस रहे. इसके बाद सुमित राणा ने सूचना के अधिकार के तहत गणित विषय की उत्तर पुस्तिका के लिए आवेदन दिया. 22 अक्टूबर को सुमित राणा को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने उत्तर पुस्तिका उपलब्ध करवाया. इसके बाद सुमित राणा ने बोर्ड सचिव से मिल कर सारी बातें बतायी. बोर्ड सचिव ने 10 दिनों के अंदर रिजल्ट देने का आश्वासन दिया. लेकिन अभी तक सुमित राणा अपने ऑरिजनल रिजल्ट नहीं मिल पाया है.
- शिक्षा मंत्री के कहने के बावजूद नहीं मिला अब तक रिजल्ट रिजल्ट के लिए सुमित राणा बुधवार को फिर बोर्ड सचिव से मिला. लेकिन बोर्ड सचिव समिति कार्यालय में मौजूद नहीं थे. इसके बाद गुरूवार को शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी के जनता दरबार में जाकर अपनी बातें मंत्री जी के सामने रखा. सुमित राणा ने बताया कि गुरूवार को शिक्षा मंत्री को सारी बातें बतायी. शिक्षा मंत्री ने बोर्ड सचिव हरिहरनाथ झा को तुरंत फोन कर मेरा रिजल्ट देने को कहा. मंत्री जी के कहने के बाद मै 2.30 बजे सचिव से मिलने बोर्ड आया. लेकिन मुझे फिर पांच दिनों में रिजल्ट भेजने देने का आश्वासन ही मिला.
- दो विषयों में किया था स्क्रूटनी को आवेदन सुमित राणा ने दो विषय गणित और संस्कृत के लिए स्क्रूटनी मे आवेदन दिया था. सुमित राणा ने बताया कि संस्कृत में दो अंक बढ़े. 63 की जगह 65 अंक आयें. लेकिन गणित में अंक नहीं बढ़ा. बोर्ड के वेबसाइट पर जब रौल नंबर देकर चेक किया तो गणित में ना तो अंक बढ़ा दिखाया और ना ही नो चेंज का आप्सन ही आया.
- उत्तर पुस्तिका में 78 को शिक्षक ने कर दिया था 21 अंक सुमित राणा को गणित में 78 अंक आयें थे. लेकिन शिक्षक की लापरवाही कहें या जानकारी का अभाव, शिक्षक कुल अंक को जोड़ने में गलती कर गये. और उत्तर पुस्तिका के मुख्य पृष्ठ पर 78 की जगह 21 अंक दे दिया. इसके बाद जब सुमित राणा के उत्तर पुस्तिका की स्क्रूटनी हुई तो 78 से भी बढ़ कर कुल अंक 89 हो गया. इसके बावजूद सुमित राणा को समय पर सूचना बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से नहीं दिया गया.
- प्लस टू में नहीं ले पाया अब तक नामांकन मैट्रिक में फेल होने के कारण सुमित राणा अभी तक प्लस टू में नामांकन नहीं ले पाया है. जब तक उसे ऑरिजनल अंक पत्र नहीं मिल जाता है, तब तक उसका नामांकन प्लस टू में नहीं हो पायेगा. सुमित राणा ने बताया कि मेरा एक साल बर्बाद हो गया.
सुमित राणा का रिजल्ट हिंदी - 68
संस्कृत - 63 (बाद में स्क्रूटनी के बाद 65 हुआ)गणित - 21 (बाद में स्क्रूटनी के बाद 89 हुआ)
साइंस - 73 सोशल साइंस - 62
इंगलिश - 51 कोट
छात्र मिलने आया था. उसका रिजल्ट जल्द से जल्द देने की कोशिश की जा रही है. शिक्षक की लापरवाही के कारण ऐसा हुआ था. जल्द उसे रिजल्ट मिल जायेगा. हरिहर नाथ झा, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति \\B

स्कूलों में अब इंट्री और आउट की होगी अलग-अलग मुख्य गेट

- पेशावर की घटना और सीबीएसइ के गाइड लाइन पर कई स्कूलों ने उठाया इनीशियेटिव

संवाददाता, पटनाअब स्कूल में एक गेट नहीं बल्कि कम से कम तीन गेट होंगे. कई स्कूलों ने स्कूल के मुख्य गेट बनाने की शुरूआत कैंपस में कर भी दिया है. कई स्कूल जहां तीन गेट स्कूल में बना रहे है तो वहीं कई स्कूलों ने तो पांच-पांच मुख्य द्वार दे रहे है. नये सत्र 2016 से इसका शुरूआत भी स्कूल में कर दिया जायेगा. स्कूल में एक नहीं बल्कि तीन से लेकर पांच मुख्य द्वार होने चाहिए. इसको लेकर सीबीएसइ ने कई महीनों पहले स्कूलों को निर्देश जारी किया था. निर्देश में कहा गया है कि हर स्कूल बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा सतर्क रहें.
- बच्चों की सुरक्षा के लिए कई गेट है जरूरी सीबीएसइ के अनुसार हर स्कूल में एक मुख्य गेट के अलावा और भी गेट होना चाहिए. एक गेट बच्चों के स्कूल आने का होगा तो वहीं दूसरा गेट जाने के लिए होगा. इसके अलावा एक इमरजेंसी गेट भी होना जरूरी है. सीबीएसइ के निर्देश के अनुसार बच्चों के स्कूल आने और जाने का एक गेट नहीं होना चाहिए. इसके अलावा स्कूलों में सीसी टीवी कैमरा हर कमरे में लगाया जाना भी अनिवार्य किया गया है.
- पांच गेट खोलेगा सेंट माइकल नये सेशन से सेंट माइकल हाई स्कूल में पांच गेट चालू किये जायेंगे. अभी वर्तमान में जो गेट है उससे स्कूल छात्र केवल स्कूल की छुट्टी के बाद बाहर निकलेंगे. वहीं मेन रोड पर ही कुछ दूरी पर एक गेट बनाया गया है, इस गेट से स्टूडेट की इंट्री होगी. इसके अलावा स्कूल में पीछे की आेर दो गेट खोला जायेगा. ये गेट इमरजेंसी गेट होगा. इसके अलावा मेन रोड पर स्पोर्ट्स ग्राउंड की ओर एक और गेट खोला जायेगा.
इन स्कूलों ने खोले है कई मुख्य द्वारसेंट माइकल हाई स्कूल - पांच गेट
नॉट्रेडम एकेडमी - तीन गेटलोयेला हाई स्कूल - दो गेट
वाल्डविन एकेडमी - तीन गेटसेंट कैरेंस हाई स्कूल - दो गेट
सेंट डॉमिनिक सोवियोज हाई स्कूल - तीन गेट कोट
सीबीएसइ के गाइड लाइन पर स्कूल में पांच गेट खोले जायेंगे. पेशावर में पिछले साल जो आतंकवादी घटना हुई थी, उसी को लेकर यह इनीसीएटिव लिया जा रहा है. नये सत्र से इसे चालू कर दिया गया जायेगा. फादर पीटर, प्रिंसिपल, सेंट माइकल हाई स्कूल

एडमिशन अभी तक नहीं, तो पढ़ाई होगी कब

- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आदेश के बाद भी सिमुलतला आवासीय विद्यालय में 2015-16 सत्र का नहीं हुआ नामांकन

संवाददाता, पटनाएक सत्र तो जीरो सेशन में चला गया. दूसरे सत्र को जीरो सेशन होने से बचाने के लिए नामांकन की प्रक्रिया की गयी, लेकिन अभी तक नामांकन नहीं हो पाया है. सिमुलतला आवासीय विद्यालय भले 2015 में मैट्रिक का बेहतर रिजल्ट दिया हो, लेकिन वर्तमान में इस विद्यालय की स्थित बेहतर नहीं है. एक तरफ जहां विद्यालय का 2014-15 सत्र में नया नामांकन की प्रक्रिया नहीं होने से जीरो सत्र चला गया है. वहीं 2015-16 में नामांकन की प्रक्रिया तो किया गया, लेकिन अभी तक नामांकन नहीं हो पाया है.
- अभी तक नामांकन की लिस्ट तैयार नहीं चार महीने पहले सिमुलतला आवासीय विद्यालय के क्लास वन के नामांकन के लिए रिजल्ट निकाल दिया गया था. दिसंबर बीत रहा है लेकिन अभी तक नामांकन शुरू नहीं किया जा सका है. एक अप्रैल से 2016-17 सत्र शुरू होगा. लेकिन अभी तक 2015-16 सत्र का नामांकन ही नहीं हो पाया है. विद्यालय की माने तो अभी नामांकन की लिस्ट तैयार नहीं है. उसे फाइनल किया जा रहा है. फाइनल लिस्ट तैयार होने के बाद ही नामांकन प्रक्रिया शुरू होगा. फाइनल लिस्ट जनवरी तक तैयार हो पायेगा.
- विशेष परीक्षा देकर जल्द नामांकन की प्रक्रिया करने का आदेश दिया था सीएम ने सिमुलतला आवासीय विद्यालय में नामांकन की प्रक्रिया जल्द से जल्द हो, इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आदेश दिया. जिसके बाद एक ही विशेष परीक्षा का आयोजन करके छात्रों का सेलेक्शन किया गया. 2015-16 सत्र जीरो सेशन ना हो, इसके लिए सारी प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की गयी.
- अगस्त में हुआ था लिखित परीक्षा सिमुलतला आवासीय विद्यालय में नामांकन के लिए जुलाई में आवेदन लिये गये अौर 16 अगस्त को इसकी लिखित परीक्षा ली गयी. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने लिखित परीक्षा के एक महीने के बाद सितंबर में इसके रिजल्ट की घोषणा कर दिया. लिखित परीक्षा के आधार पर मेरिट लिस्ट निकाल कर विद्यालय को सौंप दिया गया.
- 240 छात्रों की निकाली गयी थी लिस्ट बिहार बोर्ड की ओर से 240 छात्रों की लिस्ट जारी की गयी थी. इसमें 120 छात्र मेरिट लिस्ट में और 120 छात्र वेटिंग लिस्ट में थे. विद्यालय में 60 छात्र और 60 छात्राओं का नामांकन हर साल किया जाता है.
कोटसिमुलतला आवासीय विद्यालय का रिजल्ट सितंबर में समिति द्वारा घोषित कर दिया गया था. 120 छात्र मेरिट लिस्ट और 120 छात्रों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया था. नामांकन संबंधित जानकारी हमें नहीं पता है.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने जो मेरिट लिस्ट दिया था उसमे से कई छात्र मेडिकल में छंट गये. वहीं कई छात्र एबसेंट हो गये. ऐसे में वेटिंग लिस्ट से छात्रों को लिया जा रहा है. अभी हम उसी लिस्ट को तैयार कर रहे है. एक सप्ताह दस दिनों में लिस्ट तैयार हो जायेगा. इसके बाद नामांकन की प्रक्रिया शुरू की जायेगी.
राजीव रंजन, प्रिंसिपल, सिमुलतला आवासीय विद्यालय \\\\B

सीबीएसइ का नियम ताक पर, नहीं होते स्कूली बस में टीचर

- बिना टीचर के ही स्कूली बस में होते है स्टूडेंट्स

संवाददाता, पटनापटना के प्राइवेट स्कूलों के लिए तो नियम बस तोड़ने के लिए ही बनाये जाते है. स्कूलों को लेकर नियम तो कई बने है, लेकिन अधिकांश स्कूल उस नियम को ताक पर रख कर चलते है. इसी में से एक नियम स्कूल बस को लेकर है. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड की माने तो हर स्कूल की बस में टीचर को होना जरूरी है. हर बस में एक टीचर होंगे जिनके संरक्षण में स्टूडेट स्कूल से आयेंगे और छुट्टी के समय घर जायेंगे. लेकिन इस नियम का पालन कुछ स्कूलों को छोड़ दे तो कहीं पर नहीं होता है.
- एक से दो घंटे स्टूडेंट को देखने वाला कोई नहीं स्कूल की छुट्टी के बाद एक से दो घंटे का ऐसा समय होता है जब स्टूडेंट अकेले होते है. यहीं हाल सुबह स्कूल आने में होता है. बस स्टॉपेज पर तो अभिभावक बच्चे को बस में चढ़ा देते है, लेकिन उसके बाद स्कूल तक जाने में बस में
टीचर नहीं होते है. छुट्टी के बाद भी कुछ ऐसा ही होता है. स्कूल बस किस रास्ते से आ रहा है, कहां जा रहा है, इसकी जानकारी ना तो अभिभावकों को होती है और ना ही स्कूल प्रशासन को. अगर किसी बस को आने में देरी हो जायें तो अभिभावक को ड्राइवर के अलावा किसी से कंट्रैक्ट करने का आप्सन नहीं होता है. - टीचर का बस में होना अति आवश्यक है
सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने हाल में भी एक सक्रूलर निकाल कर स्कूलों को निर्देश दिया है कि हर स्कूल की बस में कम से कम एक टीचर का रहना आवश्यक है. स्कूल बस में टीचर सबसे पहले बैठेंगे. इसके बाद उस एरिया के बच्चों को बस में लिया जायेगा. ऐसा ही छुट्टी के बाद भी होगा. छुट्टी के बाद सारे बच्चे को घर छोड़ने के बाद ही टीचर घर जायेंगे. बोर्ड के द्वारा इस नियम को हर साल तमाम स्कूलों को बताया जाता है. लेकिन आज तक पटना के अधिकांश स्कूलों में इसे लागू नहीं किया जा सका है. - टीचर बस में हो तो बच्चे रहेंगे अनुशासन में
अगर स्कूल की बस में टीचर के साथ स्टूडेंट को घर भेजा जायेगा तो स्कूल से लेकर रास्ते भर तक बच्चे अनुशासन में रहेंगे. ऐसा नहीं होने से स्कूली बस में बच्चों के बीच आपसी लड़ाई झगड़े भी काफी होते है. इसके अलावा छुट्टी के बाद स्टूडेंट के उपर रोक टोक करने वाला भी कोई नहीं होता है. एक दो स्कूलों को छोड़ कर तमाम स्कूल की बस प्राइवेट है. ऐसे में कोई भी स्कूल इस ओर ध्यान नहीं देता है. बच्चे कैसे आ रहे है, इसकी कोई जिम्मेवारी नहीं लेता है.कोट
स्कूल की यह जिम्मेवारी है. बच्चे कैसे स्कूल आयेगे और छुट्टी के बाद कैसे जायेंगे. हम इसके लिए सोमवार को डीएम से बात करेंगे. क्योंकि बच्चे की सुरक्षा सभी की जिम्मेवारी है. अधिकांश स्कूल में इसका पालन नहीं होता है. डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार राज्य प्राइवेट चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन
स्कूल के पास तमाम ड्राइवर के मोबाइल नंबर होते है. जो स्कूल की बस के रूट आदि की भी पूरी जानकारी स्कूल अपने पास रखता है, लेकिन जहां पर प्राइवेट स्कूल बस की सुविधा है, वहां तो बस बस के मालिक पर ही निर्भर रहना पड़ता है. राजीव रंजन सिन्हा, प्रिंसिपल, वाल्डविन एकेडेमी
\\B

सिमुलतला में नामांकन में देरी, करना होगा अगले सेशन में भी इंतजार

- नवंबर में ही शुरू होता है सिमुलतला आवासीय विद्यालय का नामांकन प्रक्रिया

संवाददाता, पटनाबिहार का नेतरहाट कहा जाने वाला सिमुलतला आवासीय विद्यालय में नये नामांकन की प्रक्रिया अगले सत्र 2016-17 में भी लेट होने की पूरी संभावना बननी शुरू हो चुकी है. नामांकन की प्रक्रिया हर साल नवंबर में ही शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार भी अभी तक कोई प्लानिंग नहीं किया गया है. विद्यालय की माने तो अभी विद्यालय प्रशासन 2015-16 सत्र के नामांकन की प्रक्रिया में व्यस्त है. इस प्रक्रिया के होने के बाद ही अगले सत्र का नामांकन शुरू किया जायेगा.
- जनवरी के बाद ही होगा नामांकन शुरू 2016-17 सत्र के लिए नामांकन की प्रक्रिया इस बार भी तीन महीने लेट ही शुरू होगा. विद्यालय सूत्रों की माने तो फरवरी से पहले नये सेशन का नामांकन प्रक्रिया नहीं शुरू हो पायेगा. ऐसे में इस बार भी नामांकन एक ही लिखित परीक्षा के आधार पर लिया जा सकता है. अप्रैल के पहले सप्ताह में नया सेशन शुरू होता है.
- विद्यालय जल्द भेजेगा बिहार बोर्ड को प्रस्ताव नये सत्र के नामांकन की प्रक्रिया के लिए जल्द ही विद्यालय बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को प्रस्ताव भेजेगा. इसके बाद समिति की आेर से परीक्षा की प्लानिंग की जायेगी. समिति की ओर से प्लानिंग के बाद ही परीक्षा ली जायेगी. लेकिन इंटर और मैट्रिक की परीक्षा फरवरी और मार्च में होने के कारण इसमें भी दिक्कतें आ सकती है.
- पांच महीने के प्रक्रिया के बाद होता है 120 बच्चे का नामांकन सिमुलतला आवासीय विद्यालय में नामांकन की पूरी प्रक्रिया पांच महीने चलता है. पहले नवंबर में आवेदन करने की तिथि निकाली जाती है. इसके बाद जनवरी में प्रथम चरण की परीक्षा ली जाती है. प्रथम चरण में जो बच्चे सेलेक्ट होते है, उसके लिए फरवरी में लिखित परीक्षा या मुख्य परीक्षा ली जाती है. इस परीक्षा के बाद 120 बच्चों का मेरिट लिस्ट निकाला जाता है. इसके अलावा 120 बच्चों को वेटिंग लिस्ट में रखा जाता है. मेरिट लिस्ट वाले 120 बच्चों का मेडिकल होता है. जो बच्चे मेडिकल में पास हो जाते है, उन्हीं 120 बच्चों का नामांकन सिमुलतला आवासीय विद्यालय में होता है.
कोटअभी पिछले सत्र के नामांकन में हम लोग व्यस्त है. इसके बाद ही नये सत्र 2016-17 के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगा. जनवरी में नामांकन को लेकर बिहार बोर्ड के पास एक प्रस्ताव बना कर भेजा जायेगा.
राजीव रंजन, प्रिंसिपल, सिमुलतला आवासीय विद्यालय

एडमिशन की पहली सीढ़ी से ही स्कूल की लूट शुरू

- एडमिशन आवेदन फार्म का पांच सौ से लेकर 15 सौ तक वसूल लेते है स्कूल

संवाददाता, पटनास्कूलों में न्यू एडमिशन प्रोसेस शुरू हो चुका है. इस बार भी स्कूलों ने एडमिशन फार्म के लिए दिया जाने वाला आवेदन फार्म का दाम मनमाने तरीके से रखा है. नामांकन की पहली सीढ़ी से ही अभिभावक को लूटना शुरू कर दिया जाता है. स्कूल मनमरजी से नामांकन फार्म का दाम रखते है, अभिभावक की मजबूरी है कि उन्हें उतने ही पैसे देकर फार्म लेना होता है.
- पांच सौ से लेकर 15 सौ तक है फार्म का दामपटना के स्कूलों में नामांकन को लेकर हर क्लास मे लूट है. नये नामांकन के नाम पर स्कूल वाले पांच सौ से लेकर 15 सौ तक वसूल लेते है. नर्सरी और क्लास वन में नामांकन के लिए पांच सौ से शुरू होता है. सेंट माइकल हाई स्कूल में 2016 में नर्सरी और क्लास वन में नामांकन के आवेदन फार्म के लिए छह सौ रूपया अभिभावक को देना होगा.
- ऑन लाइन हो या ऑफ लाइन पैसे में नहीं होता चेंज इस बार कई स्कूलो ने नामांकन के लिए आवेदन फार्म ऑन लाइन ही डाउन लोड करने की सुविधा स्कूलों को दिया है. इससे अभिभावको को लंबी लाइन में नहीं लगनी पड़ेगी. लेकिन पैसे में कोई कमी नहीं है. ऑन लाइन में भी अभिभावकों को उतने ही पैसे देने होंगे जितना स्कूल मांग रहा है.
- नहीं कर सकते है कोई चैलेंज अभिभावक जो नामांकन के अावेदन फार्म का पैसा देते है, उसके लिए स्कूल किसी तरह की रसीद नहीं देता है. ऐसे में बच्चे का नामांकन नही होने या स्कूल द्वारा गलत किये जाने के बाद भी अभिभावक कुछ नहीं कर पाते है. क्योंकि उनके पास कोई प्रूव नहीं होता है. अगर नामांकन नहीं हुआ तो अभिभावक स्कूल के खिलाफ कुछ नहीं कर सकते है.
- नामांकन की गारंटी नहीं, पैसे नहीं होगा वापस हर स्कूल नामांकन को लेकर हर साल नोटिस निकालता है. नोटिस में स्पष्ट रूप से स्कूल यह बता देता है कि स्कूल में नामांकन होने की गारंटी नहीं है. नामांकन नहीं होने पर आवेदन के कोई पैसे वापस नहीं होंगे. आवेदन फार्म के नाम पर जो भी पैसे लिये जायेंगे उस पर अभिभावक को कोई चैलेंज नहीं कर सकते है.
- लाखों की होती है कमाई स्कूलों द्वारा एडमिशन के आवेदन फार्म बेच कर लाखों की कमाई हर साल किया जाता है. स्कूल में नर्सरी या क्लास वन में भले सीटों की संख्या 100 या 120 हो, लेकिन आवेदन फार्म दो से तीन हजार तक स्कूलों मे बिक जाते है. यह कोई एक स्कूल नहीं बल्कि तमाम स्कूलों का हाल है. आवेदन फार्म के नाम पर मोटी कमाई हर स्कूल करता है.
- सुप्रीम कोर्ट ने मात्र सौ रूपये लेने का दिया था निर्देश दो साल पहले न्यू नामांकन को लेकर अभिभावकों ने सुप्रीम कोर्ट में प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ केस किया था. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को नामांकन के लिए आवेदन फार्म का दाम सौ रूपये करने का आदेश दिया था. 2014 में दिया गया यह आदेश के बाद दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में मात्र सौ रूपया ही नामांकन के आवेदन फार्म का लिया जाता है. लेकिन पटना में किसी भी स्कूल में इसका पालन नहीं होता है.
- केंद्रीय विद्यालय में लगता है बस 25 रूपया अगर हम बात केंद्रीय विद्यालय संगठन की करे तो केंद्रीय विद्यालय में नामांकन फार्म के नाम पर बस 25 रूपया लिया जाता है. कई सालों से केंद्रीय विद्यालय में नामांकन फार्म में कोई चेंज नहीं किया गया है. केवीएस से मिली जानकारी के अनुसार फार्म में बढ़ोतरी होने की जानकारी एक साल पहले ही दे दिया जाता है.
पटना के कुछ बड़े स्कूल और वहां पर मिलने वाले फार्म के प्राइसस्कूल                         - आवेदन फार्म के दाम
सेंट माइकल हाई स्कूल - 600 (नर्सरी और क्लास वन के लिए)सेंट जेवियर हाई स्कूल - 500 नर्सरी के लिए
माउंट कार्मेल             - 500 एलकेजी के लिए लोयेला हाई स्कूल - 500 मांट टू के लिए
नॉट्रेडम एकेडमी - 500 मांट वन के लिए सेंट जोसफ मैरी वार्ड किंडर गार्डेन - 300 एलकेजी के लिए
इंटरनेशनल स्कूल - 500 नर्सरी के लिए सेंट कैरेंस हाई स्कूल - 600 नर्सरी के लिए 

7 जनवरी तक निकलेगा सीबीएसइ 10वीं और 12वीं का शेडयूल

संवाददाता, पटना

सेट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने 10वीं और 12वीं का शेडयूल अभी तक जारी नहीं किया है. अभी एग्जाम शेडयूल के लिए 10वीं और 12वीं के परीक्षार्थी को इंतजार करना होगा. क्योंकि इस बार निर्धारित समय के बाद ही परीक्षा का शेडयूल जारी किया जायेगा.ज्ञात हो कि हर साल दो जनवरी को 10वीं और 12वीं के शेड्यूल सीबीएसइ जारी करता था. लेकिन इस बार 2 और तीन जनवरी शनिवार और रविवार होने के कारण बोर्ड बंद रहेगा. चार जनवरी को बोर्ड खुलेगा. इसके बाद ही शेड्यूल जारी किया जायेगा. - 15 जनवरी से शुरू होगा प्रैक्टिकल एग्जाम
सीबीएसइ के 10वीं और 12वीं के प्रैक्टिकल एग्जाम 15 जनवरी से शुरू किया जायेगा. प्रैक्टिकल एग्जाम 15 फरवरी तक चलेगा. इससे पहले 10वीं और 12वीं का एडमिट कार्ड भेजा जायेगा. परीक्षा का शेड्यूल जारी होने के बाद एडमिट कार्ड भेजा जायेगा. एडमिट कार्ड स्कूल के वेबसाइट पर बोर्ड भेजेगा. परीक्षार्थी को एडमिट कार्ड स्कूल के द्वारा डाउनलोड करने के बाद मिलेगा. कोट
सीबीएसइ हर साल दो जनवरी को नये साल में बोर्ड के खुलने के बाद ही शेड्यूल जारी किया जाता है. लेकिन इस बार दो जनवरी को बोर्ड बंद रहेगा. इस कारण चार जनवरी को बोर्ड के खुलने के बाद ही शेड्यूल जारी किया जायेगा. सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया \\B

10वीं और 12वीं का मार्किंग स्कीम में हुआ बदलाव, भेजा गया स्कूल

- सब्जेक्स वाइज मार्किंग स्कीम आया स्कूलों में

संवाददाता, पटनासेंट्रल बोर्ड आॅफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने 2016 की होने वाली 10वीं और 12वीं परीक्षा के मार्किंग स्कीम में परिवर्तन किया है. परिवर्तन मार्किंग स्कीम को स्कूलों में भेजा जा रहा है. बोर्ड परीक्षा होने के बाद आंसर कॉपी का इवैल्यूएशन इस बार इसी मार्किग स्कीम पर किया जायेगा. सीबीएसइ ने मार्किंग स्कीम को पूरा प्रैक्टिकल रूप में बनाया है. इससे इवैल्यूएशन में टीचर्स को किसी तरह की दिक्कतें ना हो.
- मार्किंग स्कीम की होगी जांच सीबीएसइ इस बार मार्किंग स्कीम की जांच भी करेगा. इवैल्यूएशन के बाद रेंडमली आंसर कॉपी को निकाला जायेगा. इन काॅपियों को सीबीएसइ रीजनल आॅफिस भेजा जायेगा. इस कॉपियों की एक्सपर्ट के माध्यम से रेंडमली जांच होगी. इसमे देखा जायेगा कि बोर्ड द्वारा दिये गये मार्किंग स्कीम को फॉलो किया गया है या नहीं. 10वीं बोर्ड के स्कूल बेस्ड बोर्ड और बोर्ड बेस्ड बोर्ड दोनों के लिए अलग-अलग मार्किंग स्कीम निकाला गया है.
- स्टेप वाइज में देखे एग्जामपल सीबीएसइ ने स्टेप वाइज मार्किंग में भी अंतर किया है. स्टेप वाइज में इस बार एग्जामपल को देखने का निर्देश दिया है. जो स्टूडेंट आंसर लिखने में एग्जामपल का इस्तेमाल किया है, उसे मार्किंग बेहतर किया जायें. स्टेप वाइज आंसर में अगर स्टूडेंट ने एग्जामपल देकर उत्तर लिखा हो तो यह स्टूडेंट का एक्स्ट्रा एफर्ट होगा, इसके लिए स्टूडेंट को एक्स्ट्रा मार्क्स दिये जायेंगे.
- प्रश्न पत्र के साथ बताया गया है मार्किंग स्कीम को सीबीएसइ ने 10वीं और 12वीं दोनों के लिए मार्किंग स्कीम निकाला है. हर विषय के प्रश्न पत्र के साथ मार्किंग स्कीम को बताया है. किस प्रश्न का उत्तर स्टूडेंट ने किस तरह से दिया है. हर प्रश्न के उत्तर में मार्किंग स्कीम को कैसे उपयोग करना है, इसे भी इस बार सीबीएसइ ने बताया है.
कोट
मार्किंग स्कीम हर स्कूलों को इवैल्यूशन को लेकर भेजा जा रहा है. इसी के आधार पर इवैल्यूएशन का काम होता है. इस बार काफी क्लियर करके मार्किंग स्कीम को समझाया गया है. मार्किंग स्कीम का सही से उपयोग टीचर्स करें, इसके लिए निर्देश दिये गये है. राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ \\B

बिहार मेडिकल और इंजीनियरिंग एंट्रांस में लगाये जायेंगे जैमर

- बीसीइसीइ ने लिया फैसला, मुख्य परीक्षा में लगाये जायेंगे जैमर

संवाददाता, पटनाबिहार मेडिकल और इंजीनियरिंग एंट्रांस देने वाले अभ्यर्थी के उपर इस बार जैमर की नजर होगी. कदाचार करने वाले अभ्यर्थी जैसे ही मोबाइल या ब्लूट्रूथ का इस्तेमाल करेंगे, उन्हें तुरंत पकड़ा जा सकेगा. इसकी तैयारी अभी से बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (बीसीइसीइ) ने करना शुरू कर दिया है. 2016 की मेडिकल और इंजीनियरिंग की मुख्य परीक्षा में इसे शुरू किया जायेगा. वहीं 2017 की बीसीइसीइ मेडिकल और इंजीनियरिंग की पीटी की परीक्षा में जैमर लगाया जायेगा.
- तुरंत पकड़ में आ जायेगे अभ्यर्थी बिहार मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षा हर साल विवादित रहता है. एंट्रांस परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक होने और ब्लूट्रूथ के इस्तेमाल का आरोप भी बीसीइसीइ पर लगता रहा है. इसकाे देखकर इस बार जैमर की सुविधा तमाम परीक्षा केंद्रों पर दिया जायेगा. हर परीक्षा केंद्र के हर कमरे मे जैमर लगाया जायेगा.
- जनवरी के दूसरे सप्ताह में निकलेगा आवेदन की तिथि बीसीइसीइ के मेडिकल और इंजीनियरिंग की पीटी अप्रैल के अंतिम सप्ताह में होती है. वहीं मुख्य परीक्षा मई के अंतिम सप्ताह में ली जाती है. इसके लिए आवेदन की तिथि जल्द घोषित की जायेगी. बीसीइसीइ की माने तो जनवरी के दूसरे सप्ताह में आवेदन के लिए तिथि निकाली जायेगी.
- 70 हजार पीटी और 22 हजार मुख्य परीक्षा में होते है शामिल बीसीइसीइ की परीक्षा में हर साल लगभग 70 हजार अभ्यर्थी पीटी में शामिल होते है. इसमें से लगभग 20 से 22 हजार अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा तक पहुंच पाते है. इसके बाद कुछ अभ्यर्थी डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन में भी छंट जाते है. बिहार के तमाम मेडिकल कॉलेज में 15 फीसदी सीटों पर एआइपीएमटी के अभ्यर्थी का नामांकन लिया जाता है. इसके बाद बचे हुए सीट पर बीसीइसीइ में सफल हुए अभ्यर्थी का नामांकन लिया जाता है.
कोटबीसीइसीइ की दो बार परीक्षा ली जाती है. इस बार बीसीइसीइ के मुख्य परीक्षा में जैमर लगाया जायेगा. इस बार मुख्य परीक्षा और अगले साल से पीटी की परीक्षा भी जैमर के बीच लिया जायेगा.
अनिल कुमार सिन्हा, अोएसडी, बीसीइसीइ \\B

यूजीसी नेट एग्जाम आज, 38 केंद्रों पर 21 हजार छात्र देंगे परीक्षा

- सात बजे पहुंचे परीक्षा केंद्र, नौ बजे के बाद नहीं मिलेगा इंट्री

संवाददाता, पटनासीबीएसइ द्वारा लिया जाने वाला नेशनल इजीबिलिटी टेस्ट (नेट) की परीक्षा रविवार को लिया जायेगा. देश भर में आयोजित इस परीक्षा के लिए बिहार से लगभग 21 हजार परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं. इसके लिए पूरे प्रदेश में दो जिलो में परीक्षा केंद्र बनाया गया है. पटना में जहां 30 परीक्षा केंद्र पर परीक्षा ली जायेगी, वहीं भागलपुर जिले में यूजीसी नेट के लिए आठ परीक्षा केंद्र बनाये गये हैं. सीबीएसइ पटना रीजनल ऑफिस की ओर से सारी तैयारी कर ली गयी है. ज्ञात हो कि 28 जून 2015 को आयोजित यूजीसी नेट की परीक्षा में 18 हजार 500 परीक्षार्थी शामिल हुए थे. इसके लिए पूरे प्रदेश में 37 परीक्षा केंद्र बनाये गये थे, इसमें पटना में 29 और भागलपुर में 8 परीक्षा केंद्र बनाये गये थे.
- स्पेशल पेन से होगा यूजीसी नेट की परीक्षा सीबीएसइ पटना रीजनल ऑफिस की ओर से अभ्यर्थी परीक्षा संबंधित निर्देश जारी किया गया है. परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी को सात बजे ही पहुंचने का निर्देश दिया गया है. सीबीएसइ पटना रीजनल ऑफिस के अनुसार 9 बजे के बाद किसी भी अभ्यर्थी की इंट्री केंद्र पर नहीं होगी. परीक्षा होने से पहले तीन जगहों पर अभ्यर्थी की जांच की जायेगी. इस कारण सात बजे ही सेंटर पर अभ्यर्थी को आने काे कहा गया है. इस बार नेट की परीक्षा के लिए अभ्यर्थी को स्पेशल पेन प्रोवाइट करवाया जायेगा. परीक्षा शुरू होने के पहले तमाम अभ्यर्थी को स्पेशल पेन मिलेगा.
- केवल एडमिट कार्ड लेेकर आयें अभ्यर्थी कोई भी अभ्यर्थी एडमिट कार्ड के अलावा कोई भी चीज साथ में ना लायें. मनी पर्स और जूता आदि पहन कर भी अाने पर रोक लगाया गया है. अभ्यर्थी की जांच परीक्षा केंद्र के मुख्य गेट पर ही किया जायेगा. एडमिट कार्ड के अलावा कोई भी चीज अभ्यर्थी के पास नहीं होना चाहिए. पहला और दूसरा पेपर जहां 100-100 अंकों का होगा, वहीं तीसरा पेपर 150 अंकों का लिया जायेगा. तीनों पेपर के लिए समय निर्धारित कर दिया गया है.
- दो पेपर के बीच दिया जायेगा आधे घंटे का ब्रेक इस बार यूजीसी नेट की परीक्षा पैटर्न में चेंज किया गया है. अभ्यर्थी की सुविधा के लिए सीबीएसइ ने पहले और दूसरे पेपर के बीच में आधे घंटे का ब्रेक दिया है. एक पेपर देने के बाद अभ्यर्थी थोड़ा रिलैक्स हो जायेंगे. दूसरे पेपर का ओएमआर सीट भरने के लिए अब अभ्यर्थी को पूरा समय मिल पायेगा. ज्ञात हो कि अभी तक के नेट की परीक्षा में पहले और दूसरे पेपर के बीच ब्रेक नहीं मिलता था.
एग्जाम शेडयूल
पेपर             - परीक्षा का समय पहला पेपर - 9.30 बजे से 10.45 तक
दूसरा पेपर - 11.15 से 12.30 बजे तक तीसरा पेपर - 2 बजे से लेकर 4.30 बजे तक 

Friday, December 25, 2015

बच्चों ने दबायी स्कूल वैन की गियर, होते-होते बचा हादसा ...

रिपोर्टर लाइव : आंखों देखी

- डीएम साहब, अब तो नोटिस दीजिए, स्कूल कहीं और स्कूल बस और वैन लगते है कहीं और संवाददाता, पटना
जगह : श्रीकृष्ष्णापुरी पार्क. समय : 1.30 बजे. सेंट कैरेंस हाई स्कूल में छुट्टी हुआ. स्कूल से थोड़ी दूर पर लगे स्कूल के बस, वैन और ऑटो मे बैठने के लिए स्टूडेंट आने लगे. पार्किंग में लगे एक स्कूल वैन में तीन बच्चे आकर बैठते है. एक बच्चा वैन का गियर दबा देता है. इसके साथ ही वैन चलने लगता है. वैन चलते हुए सड़क के दूसरी ओर खड़ी दूसरी गाड़ी को धक्का देकर निकलने लगती है. लेकिन तब तक ड्राइवर की नजर वैन पर पड़ती है. वो जल्दी से आकर वैन की चाबी निकाल कर वैन को रोकता है. तीनों बच्चों का चोट आयी. लेकिन एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया. सोमवार को 1.40 बजे यह घटना एसके पुरी पार्क के पास सेंट कैरेंस के स्कूल वैन में स्कूल के स्टूडेंट के साथ घटी. यह तो एक उदाहरण है जो आज घटी. इस तरह की घटनाएं आये दिन स्कूल में हाेती रहती है. बच्चे आधे घंटे तक करते रहे वैन मालिक का इंतजार
घटना के बाद वैन के आगे की लाइट टूट गया. गियर खराब हो गया. इसके बाद सारे बच्चे को 45 मिनट तक वैन के नीचे सड़क के किनारे खड़ा कर दिया गया. इसके बाद वैन का मालिक आया. उसने ड्राइवर धर्मेंद्र को डांटा. इसके बाद फिर उसी वैन में बच्चे को बैठा कर उन्हें घर ले जाया गया. मौके पर मौजूद बच्चों ने बताया कि ड्राइवर काफी तेज गाड़ी चलाते है. इससे हमें चोट भी लगती रहता है. डीएम साहब, अब तो ध्यान दीजिए
डीएम साहब, किसी भी स्कूल के गेट के पास आप जाकर देख सकते हैं. स्कूल के गेट पर इस तरह की घटनाएं घटती रहती है. इसकी खबर तक ना तो स्कूल को होता है और ना ही अभिभावकों को. क्योंकि ड्राइवर की गलती पर उसका मालिक डांट देता है. इसके बाद पहले की ही तरह बच्चे को स्कूल बस और वैन लेकर जाने लगते है. स्कूल चलता गली में और बस लगती सड़क पर
गली मुहल्ले मे चलने वाले स्कूल की बसें मुख्य सड़क पर लगती हैं. स्कूल की छुट्टी होने के बाद तमाम बच्चे मुख्य सड़क पर आते हैं. फिर बस और स्कूल वैन में बैठ कर घर जाते हैं. इस समय अगर बस में या स्कूल वैन में किसी तरह की घटना होती है तो इसकी जानकारी तक अभिभावक को नहीं मिलता है. स्कूल छुट्टी के लगभग 45 मिनट तक इस तरह की घटनाएं होती रहती है.आये दिन घायल होते हैं बच्चे
सड़क पर चलते हुए स्कूल वैन और स्कूल बस पर कोई लगाम नहीं होता है. ड्राइवर अपनी मरजी से बस की स्पीड रखते है. ऐसे में किसी को चोट लग रही है या कोई गिर रहा है, इसपर कोई ध्यान नहीं होता है. यह हालत हर स्कूल के बस का है. सेंट जोसफ कांवेंट हाई स्कूल की स्टूडेंट पल्लवी ने बताया कि सीट से अधिक बस में बच्चों को बैठाते है. जिसे बैठने के लिए जगह नहीं मिला, तो उसकी तो सामत है. ड्राइवर अचानक से ब्रेक लगाते है. इससे हमें कई बार चोट भी लग जाते है.कोट
हमारे यहां जिन बसों को हमने अलॉट किया हुआ है, सारी बसें हमारे कैंपस में ही लगता है. लेकिन इसके बाद भी काफी संख्या मे बच्चे प्राइवेट ऑटो से आते है. इन बच्चाें के ऑटो अगर देरी से आते है तो ये बच्चे सड़क पर घूमते रहते है. यह हमारे लिए भी चिंता का विषय है. मेरी अल्फांसो, प्रिंसिपल, डान बाॅस्को एकेडमी
स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमने कई बार डीएम को आवेदन दिया है. 2013 से लेकर 2015 तक लगभग दस बार हमने डीएम को इस आेर ध्यान देने को कहा है. लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है. मंगलवार को फिर हमलोग आवेदन देंगे. राकेश कुमार, सचिव, गुलशन कुमार फाउंडेशन
मैने डीएम से स्कूल बस को कैंपस में लगाने की बात कहीं थी. बच्चों की सुरक्षा को लेकर हर स्कूल को यह करना जरूरी है. अभी तक डीएम ने कोई आदेश नहीं दिया है. मंगलवार को हम दोबारा एसोसिएशन की आेर से डीएम से मिलेंगे.
डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार राज्य प्राइवेट चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन \\B

आरटीइ में नामांकन लेने में सीबीएसइ व आइसीएसइ स्कूल फेल, 100 में 7 ने ही लिया नामांकन

- 2015-16 सत्र में भी प्राइवेट स्कूलों ने नहीं दिखाया शिक्षा के अधिकार में इंट्रेस्ट

रिंकू झा, पटनाशिक्षा का अधिकार हर बच्चे का है. हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिले, इसके लिए प्राइवेट स्कूलों को नामांकन लेने का निर्देश दिया गया. लेकिन 2010 में बिहार में लागू हुआ शिक्षा का अधिकार अभी भी बस कागजों पर सिमट कर रह गया है. आज भी काफी संख्या में ऐसे स्कूल है जहां पर आरटीइ के नाम पर बस खानापूर्ति होता है. कुछ ऐसी ही जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मिली है. जिसमें पाया गया है कि 2015-16 सत्र के लिए शिक्षा के अधिकार की तहत नामांकन उन स्कूलों में अधिक हुआ जो सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड से मान्यता प्राप्त है ही नहीं.
दस फीसदी भी नहीं हुआ नामांकन 2015-16 सत्र में दस फीसदी सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के स्कूलों ने नामांकन नहीं लिया. इस सत्र में 100 स्कूलों ने शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन लिया. लेकिन इसमें मात्र सात ही स्कूल ऐसे हैं जो सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड से मान्यता प्राप्त है. आरटीइ एक्टिविस्ट अजय कुमार ने बताया कि इस बार भी नामांकन की प्रतिशत काफी कम रहा. इसमें वैसे स्कूलों की संख्या अधिक है, जो बिहार सरकार से तो मान्यता प्राप्त है, लेकिन सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं है.
इन सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने ही लिया केवल नामांकन स्कूल             - आरटीइ के तहत कुल नामांकन
पटना सेंट्रल स्कूल -             10 कृष्णा निकेतन -            10
आरपीएस रेसिडेंसियल स्कूल - 10 बीडी पब्लिक स्कूल - 10
आरपीएस गर्ल्स पब्लिक स्कूल - 10 मेय फ्लावर स्कूल - 9
वाल्डविन एकेडमी - 14 

जब तक नहीं आयेगा ऑटो और बस, तब तक स्कूल कैंपस में ही रहेंगे स्टूडेंट्स

प्रभात खबर की पहल का असर

- स्कूल वाहन को लेकर डॉन बास्को एकेडमी ने जारी किया सर्कुलर संवाददाता, पटना
जब तक सारे बच्चे स्कूल से घर नहीं चले जाते है, तब तक स्कूल कैंपस खुला रहेगा. स्कूल का गार्ड उन बच्चों की देखभाल करेगा. स्कूल के कुछ टीचर्स भी उस समय तक स्कूल में ही रहेंगे जब तक सारे बच्चे स्कूल से चले ना जायें. बच्चों की सुरक्षा को लेकर डॉन बास्को एकेडमी की ओर से यह सर्कुलर तीन दिन पहले तमाम अभिभावकों को दिया गया है. सर्कुलर में यह स्प्ष्ट लिखा गया है कि कोई भी स्टूडेंट स्कूल कैंपस के बाहर छुट्टी के बाद घूम नहीं सकता है. स्कूल के संरक्षण में ही उन्हें रहना होगा. प्रभात खबर के स्कूल वाहन के लिए पार्किंग की व्यवस्था स्कूल मे ही हो, इसके अवेयर होकर डॉन बास्को एकेडमी द्वारा यह शुरू किया जा रहा है. - छुट्टी के बाद सड़क पर घूमते है स्टूडेंट्स
पटना के अधिकांश स्कूलों में स्टूडेट के आने जाने के लिए प्राइवेट स्कूल बस या ऑटो की व्यवस्था है. यह व्यवस्था अभिभावकों के द्वारा किया जाता है. कई बार ये प्राइवेट स्कूल बस या ऑटो छुट्टी के समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते है. ऐसे में स्टूडेंट अपनी सवारी का इंतजार स्कूल के गेट के बाहर करते है. क्योंकि स्कूल तो छुट्टी के बाद बंद हो जाता है. ऐसे में इन स्टूडेंट को देखने वाला कोई नहीं होता है. इसी को देखकर डान बास्को एकेडमी प्रशासन की ओर से यह प्रयास शुरू किया गया है. स्कूल प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार जब तक सारे बच्चों की सवारी नहीं आ जायेगी, तब तक स्कूल कैंपस बंद नहीं होगा. - प्रिंसिपल की होगी बैठक
स्कूली बस और ऑटो के लिए स्कूल कैंपस में हो पार्किंग मुददे पर कई स्कूल अब सामने आ रहा है. जनवरी के पहले समप्ता हमें स्कूल प्रिंसिपल की एक बैठक होगी, इसमें इस बात को रखा जायेगा. इस संबंध में सेंट डॉमिनिक सोवियोज हाई स्कूल और सीबीएसइ के पूर्व सिटी कोर्डिनेटर जी जे गॉल्स्टॉन ने बताया कि प्रभात खबर ने इस मुददेे को उठाया है. अभी तो क्रिसमस को लेकर स्कूल बंद हो गया है, इस कारण अभी बैठक नहीं किया जा सकता है. जनवरी के पहले सप्ताह में एक बैठक होगी. इसमें तमाम स्कूल के प्रिंसिपल शामिल होंगे. वहां पर इस मुददे को रखा जायेगा. इसको लेकर हम अपनी तरफ से प्रयास करेंगे. - सीबीएसइ सहोदया भी आया आगे
सीबीएसइ स्कूल में यह शुरू किया जायें, इसके लिए सीबीएसइ पाटलिपुत्र सहोदया की ओर से भी तमाम स्कूलों का निर्देश भेजा जायेगा. पाटलिपुत्र सहोदया के सचिव सीबी सिंह ने कहा कि सहोदया से जुड़े तमाम स्कूलों को निर्देश दिया जा रहा है. जनवरी में स्कूल खुलने के बाद यह हर स्कूलों को शुरू करना होगा. अब बच्चे स्कूल के बाहर आकर अपनी गाड़ी में नहीं बैेठेगे. स्कूल कैंपस में ही सारी गाड़ी लगाये जायेंगे. बच्चों की सुरक्षा को लेकर हर स्कूल को यह करना चाहिए. कोट
स्कूल का जो अपना बस है, उससे जो स्टूडेंट्स स्कूल आते है, उनके तो बस कैंपस में लगे होते है, वो छुट्टी के बाद घर चले जाते है. लेकिन काफी संख्या में ऐसे बच्चे होते है जो सड़क पर अपनी सवारी का इंतजार करते है. ऐसे में अभिभावको के लिए एक सर्कुलर जारी किया गया है. ऐसे बच्चाें के लिए स्कूल कैंपस खुला रहेगा. जब तक की हर एक स्टूडेंट की सवारी नहीं आ जाती है. ये सारी जिम्मेवारी स्कूल की होगी. मेरी अल्फांसो, प्रिंसिपल, डान बास्को एकेडमी
डीएम के पास एसोसिएशन की तरफ आवेदन दिया गया है. डीएम ने आदेश देने का आश्वासन भी हमें दिया है. बुधवार को डीएम से मिलने का समय मिला है. ऐसे में तमाम बातों से डीएम को अवगत करवाया जायेगा. स्कूल कैंपस में ही स्कूल बस और ऑटो की पार्किंग हो, इसके बारे में डीएम से कहा जायेगा. डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार राज्य प्राइवेट चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन \\B

ऑन लाइन चेक लिस्ट देख सकेंगे बिहार बोर्ड के छात्र

- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के वेबसाइट पर डाला गया इंटर और मैट्रिक का चेकलिस्ट

संवाददाता, पटनाइंटरमीडिएट और मैट्रिक का चेक लिस्ट तैयार हो चुका है. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने तमाम कॉलेज और स्कूलों में चेक लिस्ट भेज भी दिया है. इसके अलावा चेक लिस्ट को बोर्ड ने अपने वेबसाइट पर भी डाला है. छात्र अपना लिस्ट बिहार बोर्ड के वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते है. अगर चेक लिस्ट में किसी तरह की त्रुटि हो तो उसे संबंधित स्कूल या कॉलेज में जाकर सही करवाया जा सकता है.
- 22 से लेकर 8 जनवरी तक कर सकेंगे सुधारसमिति के अनुसार छात्र अपने चेक लिस्ट में सुधार 22 से लेकर 8 जनवरी तक ही कर पायेंगे. समिति की ओर से हर जिले के लिए हर दिन समय निर्धारित किया है. पूर्णियां भागलपुर, कोशी और मुंगेर प्रमंडल को 22 दिसंबर से, तिरहुत एवं दरभंगा प्रमंडल को 24 दिसंबर से, पटना एवं मगध प्रमंडल को 28 दिसंबर और सारण प्रमंडल को 30 दिसंबर से 8 जनवरी का समय दिया गया है. इस बीच ही चेक लिस्ट में सुधार हो सकता है.
- रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ एडमिट कार्ड भी बनेगा चेक लिस्ट में जो जानकारी छात्राें की होगी, उसी के अाधार पर समिति छात्रों के रजिस्ट्रेशन नंबर तैयार करती है. इसके बाद एडमिट कार्ड और मार्क्स सीट और सर्टिफिकेट भी उसी के आधार पर बनाये जाते है. इस कारण अगर चेक लिस्ट में गलती हुई तो फिर उसमें सुधार करना मुश्किल होगा.
चेक लिस्ट में इन चीजों की होती है जांच - छात्र अपना नाम जांच सकते है. अगर गलती हो तो उसे स्कूल स्तर पर ही सही किया जा सकता है
- अभिभावक के नाम, स्कूल या कॉलेज के नाम में अगर गलती हो गयी है तो उसे भी सही किया जा सकता है- जन्मतिथि, कोटि, जाति, क्षेत्र आदि की भी गलती को सही किया जा सकेगा
कोटइस बार ऑन लाइन चेक लिस्ट डाल दिया गया है. छात्र अपनी सारी जानकारी चेक लिस्ट में देख सकते है. चेक लिस्ट में अगर कोई त्रुटि हो तो छात्र उसे स्कूल या कॉलेज में जाकर सही करवा ले. इसके लिए समय निर्धारित कर दिया गया है.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति\\\\B

तीन सेट का होगा इंटर प्रश्न पत्र, कदाचार पर लगेगी रोक

- सीबीएसइ के पैटर्न पर होगी बिहार इंटरमीडिएट की परीक्षा

संवाददाता, पटनाइंटर की परीक्षा के लिए इस बार तीन सेट प्रश्न पत्र का इस्तेमाल किया जायेगा. परीक्षार्थी के बीच तीन सेट प्रश्न पत्र बांटे जायेंगे. इसको लेकर इंटर काउंसिल अभी से तैयारी शुरू कर दिया है. हर चौथे परीक्षार्थी के प्रश्न पत्र अलग होंगे. इससे ना सिर्फ कदाचार पर रोक लगेगी, बल्कि परीक्षार्थी नकल नहीं कर पायेगे. सीबीएसइ पैटर्न पर पहली बार इसे इंटर की परीक्षा में शुरू किया जायेगा.
- एक्सपर्ट ने बनाये चार सेट प्रश्न पत्र इस बार इंटर के तीन स्टीम साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स के लिए चार सेट प्रश्न पत्र तैयार किया गया है. हर विषय के लिए चार सेट प्रश्न पत्र तैयार किया गया है. इसमें से तीन सेट प्रश्न पत्र परीक्षा में पूछा जायेगा. इंटर काउंसिल सूत्रों की माने तो हर विषय के चार सेट बनाये गये है. एक्सपर्ट ने प्रश्न पत्र तैयार कर बोर्ड को सौंप दिया है. हर सेट में प्रश्न तो वहीं रहेगा, लेकिन प्रश्नों की संख्या अलग-अलग होगी. इससे परीक्षार्थी को पता नहीं चलेगा कि किस छात्र के पास कौन सा सेट है.
- एक बेंच पर होंगे दो परीक्षार्थीकदाचार रोकने के लिए इस बार एक बेंच पर दो परीक्षार्थी के बैठने की व्यवस्था की जायेगी. समिति की ओर से परीक्षा संबंधित निर्देश तमाम परीक्षा केंद्र को भेजा जायेगा. ज्ञात हो कि अभी तक इंटर या मैट्रिक की परीक्षा में एक बेंच पर कई सेंटरों पर एक साथ कई परीक्षार्थी को बैठाया जाता था. लेकिन इस बार दो परीक्षार्थी से अधिक नहीं बैठायें जायेंगे.

कोटकदाचार मुक्त परीक्षा के लिए हम इस बार ऐसा करने जा रहे है. इससे कदाचार पर रोक लग सकेगी. प्रश्न पत्र के सेट अलग होने से छात्र आपस में पूछ ताछ भी नहीं कर पायेगे.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति\\\\B

पहले माने शर्त, फिर कर सकेंगे स्कूल एजुकेशनल टूर

- सीबीएसइ ने एजुकेशनल टूर पर लगाया रोक

संवाददाता, पटनाकोई भी स्कूल अब बिना सीबीएसइ को जानकारी में दिये बगैर एजुकेशनल टूर आयोजित नहीं कर सकता है. स्कूल को अब एजुकेशन टूर की पूरी जानकारी बोर्ड को देना होगा, इसके बाद बोर्ड से परमिशन मिलने के बाद ही एजुकेशनल टूर पर स्टूडेंट को ले जाया जा सकता है. सीबीएसइ ने यह निर्देश तमाम स्कूलों को भेजा है. सीबीएसइ ने स्कूलों को स्पष्ट कहा है कि एजुकेशनल टूर संबंधित जो नियम बोर्ड ने जारी किया है, उसे हर हालत में स्कूलों को मानना होगा. बिना शर्त कोई भी स्कूल एजुकेशनल टूर आयोजन नहीं कर सकता है.
- हर तरह के एजुकेशनल टूर पर होगा लागू सीबीएसइ ने यह नियम हर तरह के एजुकेशनल टूर पर लगाया है. अब चाहे लोकल हो या आसपास के एरिया या फिर दूसरे राज्य में जाने की बात हो, सभी जगहों पर जाने के लिए यह नियम लागू किया जायेगा. ज्ञात हो कि कई स्कूल एजुकेशनल टूर पर विंटर की छुट्टी या समर की छुट्टी में स्टूडेंट को लेकर जाते है. एक दिन या फिर 15 दिनो तक का एजुकेशनल टूर होता है.
- अभिभावक के शिकायत पर बोर्ड करेगा कार्रवाई सीबीएसइ ने अभिभावक के लिए भी निर्देश निकाला है. इसमे कहा गया है कि अगर स्कूल की ओर से एजुकेशनल टूर पर जाने का प्रेशर किया जायेगा तो ऐसे स्कूल पर कार्रवाई की जायेगी. अगर कोई भी अभिभावक सीबीएसइ के पास इस तरह की कोई शिकायत करेंगे तो ऐसे स्कूल पर सीबीएसइ कार्रवाई करेगा. अभिभावक का नाम गुप्त रखा जायेगा.
इन शर्ताे को करना होगा पूरा- एजुकेशनल टूर कब, कहां और कितने दिनो की है, इसकी जानकारी सीबीएसइ को देना होगा
- एजुकश्नल टूर के पहले तमाम स्टूडेंट्स का हेल्थ चेकअप करवाना होगा - टूर के पहले स्टूडेंट के पैरेंट्स से इजाजत लेनी होगी. पैरेंट्स के मना करने पर स्कूल जबरदस्ती नहीं कर सकता है
- टूर के लिए जिस शहर या जगह को चुना गया है, वहां के मौसम के बारे में पूरी जानकारी स्कूल को रखना होगा - भौगोलिक नक्शा के बारे में जानकारी रखनी होगी
- टूर पर जाने से पहले उस शहर के जिलाधिकारी से संपर्क करना होगा - टूर की जानकारी संबंधित जिलाधिकारी को स्टूडेंट की पूरी जानकारी के साथ देना होगा
- टूर के साथ में स्टूडेंट के अलावा कम से कम दो टीचर और डाक्टर भी साथ में रहेगे - फर्स्ट एड की पूरी जानकारी टूर पर जाने के पहले तमाम स्टूडेंट को दिया जायेगा
- एजुकेशनल टूर पर नजदीक के प्लेस को ही स्कूल प्रेफर दे कोट
एजुकेशनल टूर के दौरान कई हादसें हाे चुके है. इसको लेकर सीबीएसइ ने यह नियम बनाया है. इस नियम को हर स्कूलों को मानना होगा. एजुकेशनल टूर के पहले तमाम नियम को करने के बाद ही स्कूल टूर कर पायेगा. राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ \\B

सीटीइटी सर्टिफिकेट पर होगा जीडीटीआइ कोड, आॅनलाइन देखा जा सकेगा सर्टिफिकेट

- फरवरी 2015 के सर्टिफिकेट से होगा लागू

संवाददाता, पटनाअब सीटीइटी सर्टिफिकेट पर जीडीटीआइ (ग्लोबल डॉक्यूमेंट टाइप आइडेंटिफायर) कोड होगा. इससे उन अभ्यर्थी को फायदा होगा जिन्हें सीबीएसइ ने सीइटीइटी सर्टिफिकेट उपलब्ध करवाया होगा. इस कोड की मदद से अभ्यर्थी अपने सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन कर पायेंगे. सीबीएसइ सीटीइटी के अभ्यर्थी के लिए ऑन लाइन वेरिफिकेशन की सुविधा शुरू करने जा रहा है. इसके तहत अभ्यर्थी को एक जीडीटीआइ कोड दिया जायेगा. यह कोड सर्टिफिकेट पर भी अंकित होगा. इस कोड की मदद से अभ्यर्थी अपना ऑन लाइन सर्टिफिकेट देख सकेंगे. इस कोड की सुविधा फरवरी 2015 में हुई सीटीइटी के अभ्यर्थी को मिलेगा. इसके बाद जो भी सीटीइटी ली जायेगी, उसमें यह सुविधा सीबीएसइ द्वारा दिया जायेगा.
- जॉब में मिलेगी मदद ऑन लाइन सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन की सुविधा होने से अब अभ्यर्थी को जॉब में भी सुविधा होगी. अब एजुकेशनल इंस्टीच्यूट, एग्जामिनेशन बॉडिज या फिर रिक्यूटमेंट एजेंसी ऑन लाइन ही अभ्यर्थी के सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन कर पायेंगे. ऐसे में अभ्यर्थी को अब सर्टिफिकेट की फोटो कॉफी आदि देने की जरूरत नहीं होगी. बस अपना जीडीटीडी कोड बताना होगा.
- तीन स्टेप पर हो सकेगा अब सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन अब सीटीइटी के सर्टिफिकेट को देखने और लेने के लिए कोड की व्यवस्था रहेगी. इस कोड के माध्यम से तीन स्टेप से सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन होगा. इसके लिए सबसे पहले क्यूआर कोड स्कैनर को मोबाइल पर डाउनलाेड करना होगा. इसके बाद क्यूआर कोड से जीडीटीआइ कोड को मिलान करना होगा. इसके बाद आसानी से सर्टिफिकेट को वेरिफिकेशन किया जा सकेगा.
- सर्टिफिकेट पर अंकित होगा कोडअब सीटीइटी के सर्टिफिकेट पर जीडीटीअाइ कोड अंकित रहेगा. हर सर्टिफिकेट पर दांयी तरफ उपर की ओर यह कोड रहेगा. इस कोड के स्कैन करने के बाद अभ्यर्थी से संबंधित तमाम जानकारी मिल जायेगा. इसमें अभ्यर्थी का नाम, फोटोग्राफ, रॉल नंबर, सर्टिफिकेट मिलने की तिथि, मार्क्स आदि जाना जा सकता है.
कोटइस कोड से फर्जीगिरी पर अंकुश लगेगा. इसके अलावा अभ्यर्थी को सुविधा मिलेगी. अब अगर सर्टिफिकेट भुला भी गया, लेकिन कोड याद रहेगा तो ऑन लाइन सर्टिफिकेट निकाला जा सकेगा. इसके लिए अब दुबारा सीबीएसइ के पास अप्लाइ नहीं करना होगा.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया \\B

कमला नेहरू शिशु विहार को मिलेगी इंटर की मान्यता, 10 लाख रूपये मिलेगा डोनेशन

- शिक्षा मंत्री अशाेक चौधरी ने विद्यालय के वार्षिकोत्सव पर किया घोषणा

संवाददाता, पटनालंबे इंतजार के बाद कमला नेहरू शिशु विहार उच्च विद्यालय को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से इंटरमीडिएट की मान्यता मिल जायेगी. नये सत्र में इस विद्यालय में इंटर के लिए नामांकन लिये जायेंगे. इस बात की घोषणा विद्यालय के वार्षिकोत्सव पर बिहार के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने की. गुरुवार को स्कूल के वार्षिकोत्सव पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद श्री चौधरी ने कहा कि इस स्कूल के स्थापना के इतने साल होने के बावजूद इसे सरकारी मान्यता नहीं मिला है. स्कूल में शिक्षको को संगठित करने की जरूरत है. अपने एमएलसी फंड से विद्यालय को दस लाख रूपये का डोनेशन देेते हुए उन्होंने कहा कि जय प्रकाश नारायण की पत्नी प्रभावती और कमला नेहरू का सपनों का यह विद्यालय है. लेकिन अभी तक यह उपेक्षित रहा है. कार्यक्रम की शुरूआत स्कूल की प्राचार्य डा. सुनीता प्रसाद ने स्वागत भाषण से हुआ.
- 2006 में मिली मैट्रिक की मान्यता इस मौके पर स्कूल की प्राचार्य डा. सुनीता प्रसाद ने कहा कि इस स्कूल में 50 फीसदी बच्चे को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है. काफी प्रयास के बाद 2006 में विद्यालय को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से मान्यता मिली थी. इसके बाद 2007 से इंटर की मान्यता के लिए हम प्रयासरत है, लेकिन अभी तक मान्यता नहीं मिल पाया है. विद्यालय की 52वीं स्थापना दिवस पर स्कूल के छात्र-छात्राओं कई प्रस्तुतियां दिया. हर क्लास के बच्चों ने अपने तरीके से मुख्य अतिथि को अपने प्रस्तुतियों से अवगत कराया. इस मौके पर विद्यालय की सचिव मुक्ता सिन्हा, सागरिका मुखर्जी, एसपी सिन्हा के साथ तमाम छात्र और उनके अभिभावक मौजूद थे. 

फोटो में गड़बड़ी तो सुधार ले अपना जेइइ मेन आवेदन, नहीं तो आवेदन हो जायेगा कैंसिल

- सीबीएसइ ने जेइइ मेन के आवेदन में सुधार के लिए दिये 4 जनवरी तक का समय

संवाददाता, पटनाज्वांइट एंट्रांस एग्जामिनेशन में इस बार उन अभ्यर्थी के आवेदन को कैंसिल कर दिया जायेगा, जिनके फोटोग्राफ में गड़बड़ी पायी जायेगी. इस कारण अभ्यर्थी अपना आवेदन सही से भरे. सीबीएसइ ने यह निर्देश तमाम जेइइ मेन के अावेदन फार्म भरने वाले अभ्यर्थी को दिया है. निर्देश के अनुसार फोटाेग्राफ पर अभ्यर्थी का नाम और जन्म तिथि स्पष्ट होना चाहिए. जिनके फोटाेग्राफ में यह स्पष्ट नहीं होगा, उसके आवेदन कैंसिल भी बोर्ड कर सकता है. जिन अभ्यर्थी ने आवेदन भर दिया है. उसके सुधार के लिए बोर्ड ने 4 जनवरी तक का समय भी दिया है. अभ्यर्थी फोटोग्राफ की जांच कर उसे दुबारा अपलोड कर सकते है.
- 31 दिसंबर तक ऑन लाइन भेजे जायेंगे आवेदन जेइइ मेन के आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2015 तक का है. 1 दिसंबर से 31 दिसंबर तक ऑन लाइन आवेदन की समय सीबीएसइ ने दिया था. आवेदन में होने वाली गलती को लेकर बोर्ड ने अभ्यर्थी को सुधार करने के लिए 4 जनवरी तक का समय दिया है. इस बीच अभ्यर्थी अपने आवेदन के साथ फोटाेग्राफ में चेंज कर सकते है.
- 3, 9, 10 अप्रैल 2016 को लिये जायेंगे जेइइ मेन जेइइ मेन की परीक्षा इस बार तीन दिन लिया जायेगा. इसमें पहले दिन तीन अप्रैल को ऑफ लाइन जेइइ मेन ली जायेगी. वहीं 9 और 10 अप्रैल को ऑन लाइन परीक्षा ली जायेगी. ऑफ लाइन परीक्षा पेन और पेपर पर अभ्यर्थी देंगे. वहीं ऑन लइन कंप्यूटर पर ली जायेगी. 

रिजल्ट तो निकला समय पर, स्क्रूटनी के लिए भटकते रहे साल भर छात्र

शुक्रवार के लिए इयर इंडिंग रिपोर्ट

अलविदा 2015बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के लिए 2015 काफी उतार चढ़ाव भरा रहा. समय पर मैट्रिक और इंटर की परीक्षा लेना जहां समिति के लिए चुनौती भरा रहा, वहीं इस बार भी इंटर का रिजल्ट भी काफी विवादित रहा. समिति की ओर से 2015 का इंटर का रिजल्ट तो समय पर निकाल दिया गया, लेकिन मेरिट लिस्ट निकालने में समिति फेल हो गया. साइंस के मेरिट लिस्ट निकालने में समिति को पूरे आठ महीने लग गये. इसके अलावा स्क्रूटनी को लेकर भी समिति सालों भर विवादित रहा. समय पर रिजल्ट नहीं मिलने के कारण काफी संख्या में छात्र का नामांकन नहीं हो पाया. वहीं कर्मचारियों के हड़ताल के कारण भी समिति पूरे साल उतार चढ़ाव के दौर से गुजरता रहा. कर्मचारियों की मांग को भी 2015 में शिक्षा विभाग से मंजूरी दिलाने में समिति सफल नहीं हो पायी. पढ़िए रिंकू झा की रिपोर्ट......
- देश भर में बोर्ड की हुई बदनामी 2015 की मैट्रिक परीक्षा के दौरान हुई कदाचार के कारण बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की देश भर में काफी बदनामी हुई. वैशाली स्थित मनहार परीक्षा केंद्र पर कदाचार के कारण समिति को कदाचार वाला बोर्ड के रूप में पहचान बन गयी. समिति कार्यालय साल भर अपने कर्मचारियों हड़ताल में भी फंसा रहा. फरवरी 2015 के पहले कर्मचारियों की हड़ताल का सामना समिति को करना पड़ा. इसके बाद लगातार कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर बार-बार हड़ताल करते रहे. इस कारण कई बार समिति कार्यालय का काम भी बाधित हुआ.
- रिजल्ट निकलने के बाद टॉपर हाे गया चेंज समिति कार्यालय इस बार अपने रिजल्ट को लेकर भी काफी विवादित रहा. साइंस के रिजल्ट में गड़बड़ी होने से मेरिट लिस्ट दुबारा निकाला गया. 18 मई को रिजल्ट निकला तो समस्तीपुर का विकास कुमार साइंस टॉपर बना. लेकिन दस दिनों के बाद टॉपर लिस्ट में चेंज हो गया. विकास कुमार की जगह वैशाली का विशाल को साइंस टाॅपर घोषित कर दिया गया. इससे विशाल का नामांकन बिट्स पिलानी में नहीं हो पाया. वहीं विशाल जेइइ मेन में क्वालिफाई कर चुका था. टाॅपर बनने कारण विशाल ने जेइइ एडवांस नहीं दिया. इससे उसका पूरा साल बर्बाद हो गया.
- सारे प्रमंडल को किया जायेगा कंप्यूटरीकृत समिति को कंप्यूटरीकृत करने का काम शुरू कर दिया गया है. हर प्रमंडल के सारे जिलों के सारे कामों को कंप्यूटरीकृत किया जायेगा. इससे समिति में आने वाले छात्रों का काम आसान हो जायेगा. छात्रों से संबंधित सारे कामों को कंप्यूटर ट्रैकिंग से जोड़ा जा रहा है. इससे छात्र अपने घर पर बैठे ही अपने काम के प्रोसेस को जान पायेंगे. उन्हें समिति कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. इसके अलावा छात्रों की सुविधा के लिए स्क्रूटनी की प्रक्रिया में भी परिवर्तन किया गया है. स्क्रूटनी के लिए आवेदन के पैसे अब छात्र अपने ही जिलों के बैंक में जमा कर पायेंगे. समिति की ओर से यह व्यवस्था 2015 से ही शुरू किया गया है. काॅमर्स और आर्ट्स विषय के लिए 2015 में यह शुरू भी किया गया. 2016 से साइंस विषय में भी इसे शुरू किया जायेगा. अब स्क्रूटनी के लिए आवेदन के फी अब छात्र अपने ही जिला के बैंक में जमा कर पायेंगे.
उपलब्धियां - परीक्षा पैटर्न में बदलाव कर पुन: वस्तुनिष्ट प्रश्नों को जोड़ा गया
- इंटर के तीनो स्टीम के साथ मैट्रिक का माॅडल पेपर निकाला गया - मैट्रिक और इंटर की परीक्षा के अलावा सिमुलतला आवासीय विद्यालय के नामांकन परीक्षा भी समिति द्वारा लिया गया
- समिति की ओर से ई-बैंकिंग की सुविधा शुरू किया गया - उत्तर पुस्तिका जांच के पहले शिक्षकों का हुआ तीन दिनों की ट्रेनिंग
नाकामी - चार लाख के लगभग इस बार भी छात्र मैट्रिक और इंटर में फेल कर गये
- स्क्रूटनी की व्यवस्था समिति इस बार भी सुधार नहीं सकी - मेरिट लिस्ट के लिए छात्रों को आठ महीना इंतजार करना पड़ा
- मैट्रिक की परीक्षा में कदाचार होने से देश भर में समिति की हुई बदनामी - पूरे प्रदेश में समिति के नौ जिलों में क्षेत्रीय कार्यालय नहीं खोला जा सका
उम्मीदें - मैट्रिक और इंटर के 30 लाख अभ्यर्थी का समय पर परीक्षा लेना और रिजल्ट देना
- जेइइ मेन में क्वालिफाई करने वाले छात्रो का मार्क्स सीबीएसइ को समय पर उपलब्ध करवाना- इंटर काउंसिल और माध्यमिक विंग के बीच इंट्रानेट शुरू करना
- दोनों ही विंग में सोलर लाइट सिस्टम शुरू करना - 2016 की इंटर और मैट्रिक की परीक्षार्थी को ऑन लाइन एडमिट कार्ड उपलब्ध करवाना 

...यहां होता है बेटियों का स्वयंवर

- दहेज नहीं लेने का लिया जाता है वर पक्ष से वादा, फिर होता रजिस्ट्रेशन

रिंकू झा, पटनासमाज में अगर दहेज नहीं हो तो बेटियां बोझ नहीं रहेगी. जिस बेटी को हम पड़ाई धन का नाम देते है, वो मानसिकता दूर होगी. कुछ इसी सोच से जन चेतना अभियान ने बेटियों के लिए स्वयंवर करना शुरू किया है. विवाह करवाने वाली जन चेतना अभियान अपने स्वयंवर के माध्यम से बेटियों के पास ऐसे लड़कों की लिस्ट प्रोवाइड करवाती है जिसके माध्यम से एक लड़की अपने लिए एक बेहतर जीवन साथी चुन सकती है. संस्था के पास जो भी वर पक्ष की ओर से लड़कों का प्रोफाइल आता है, उसे कन्या पक्ष को खासकर कन्या को दिखाया जाता है. कन्या के चुनने के बाद ही बात आगे बढ़ती है.
- दहेज नहीं लेने वाले वर पक्ष का ही होता है रजिस्ट्रेशन इसके माध्यम से वर पक्ष को ना सिर्फ दहेज नहीं लेने के प्रति अवेयर किया जाता है, बल्कि दहेज नहीं लेने पर ही वर पक्ष का रजिस्ट्रेशन किया जाता है. संस्था की संचालक सुनिता चौधरी ने बताया कि संस्था में मुफ्त में रजिस्ट्रेशन होता है. लेकिन रजिस्ट्रेशन से पहले हमारी कुछ शर्ते होती है, उसी के अनुसार हम रजिस्ट्रेशन करते है. इसका पूरा माॅनिटरिंग भी हम करते है कि कोई वर पक्ष वाले चोरी छुपे तो पैसे या दहेज के लिए कन्या पक्ष के लोगों पर दबाव नहीं डाल रहे है.
- पंडित से लेकर हर कुछ उपलब्ध होती है वर और कन्या पक्ष की आपस में सारी बातें होने के बाद शादी तय हो जाती है. इसके बाद शादी संबंधित सारी सामग्री भी संस्था उपलब्ध करवा देती है. सुनिता चौधरी ने बताया कि पंडित से लेकर हर जाति के अनुसार सारी चीजें उपलब्ध करवाया जाता है. शादी के बाद वर और कन्या पक्ष से हम लिस्ट लेते है. मिनिमम शुल्क में सारी चीजें उपलब्ध करवा दी जाती है.
- हर जाति और धर्म के रिश्ते बनते है यहां पर 2008 से चल रही इस संस्था की ओर से पहले ब्राहणों के लिए शदी विवाह के रिश्ते बनाये जाते थे. लेकिन लोगों के डिमांड को देखते हुए अब यह संस्था हर जाति और धर्म के रिश्ते की कड़ी बन गयी है. यहां तक की कई मुसलिम परिवार ने भी रजिस्ट्रेशन करवाया है. सुनीता चौधरी बताती है कि मुसलिस परिवार में शादी का जो भी सिस्टम है उसी के अनुसार हम उन्हें सारी चीजों उपलब्ध करवाते है. यहां तक की शादी करवाने वाले मौलवी भी हम उपलब्ध करवाते है. इसके अलावा और भी सारे इंतजाम हमारी ओर से करवा दी जाती है.
- चार की करवायी शादी और 20 है रजिस्टर्ड फिलहाल संस्था के पास 20 वर और कन्या पक्ष ने रजिस्ट्रेशन करवा लिया है. नवंबर 2015 के दौरान संस्था की ओर से चार बेटियों की बिना दहेज शादी भी करवायी गयी है. इस संबंध में कन्या पक्ष के ललन सिंह ने बताया कि भतीजी की शादी के लिए यहां पर रजिस्ट्रेशन करवाया था. महज तीन महीने के बाद ही कई वर पक्ष वाले की तरफ से बिना दहेज की शादी को लेकर ऑफर आने लगे. अभी नवंबर में भतीजी की शादी बिना दहेज संपन्न हो गया.
कोटहमारा मुख्य मकसद दहेज के विराेध में समाज को अवेयर करना है. अगर समाज से दहेज खत्म हो जायें तो बेटियों को लोग बोझ समझना बंद कर देंगे. कई लोग अवेयर हुए है. दहेज नहीं लेने के वादा के बाद ही रजिस्ट्रेशन होता है. शादी संबंधित सारे सामग्री भी हम उपलब्ध करवाते है.
सुजीत कुमार चौधरी, फाउंडर मेंबर, जन चेतना अभियान \\B

सीबीएसइ ने किया बोर्ड परीक्षा में बदलाव, 2017 से होगी केवल एक परीक्षा

- अब स्कूल बेस्ड बोर्ड परीक्षा से मिलेगा निजात

संवाददाता, पटनासेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) 2017 से 10वीं बोर्ड की परीक्षा में बदलाव करने जा रही है. 2017 से केवल 10वीं के बोर्ड बेस्ड एग्जाम ही लिये जायेंगे. अब स्टूडेंट के पास बाेर्ड परीक्षा देने के लिए आप्सन नहीं दिया जायेगा. बोर्ड परीक्षा के आप्सन को सीबीएसइ 2017 से खत्म करने जा रही है. अब स्टूडेंट के पास केवल बोर्ड परीक्षा देने का ही आप्सन होगा. ज्ञात हो कि सीबीएसइ की ओर से बोर्ड परीक्षा को लेकर दो आप्सन दिये जाते थे. स्टूडेंट या तो बाेर्ड बेस्ड एग्जाम दे सकते है या फिर स्कूल बेस्ड बोर्ड दे सकते थे.
- 2016 के रजिस्ट्रेशन से ही होगा बदलाव सीबीएसइ का यह बदलाव 2016 के 9वीं क्लास के रजिस्ट्रेशन के समय से ही शुरू किया जायेगा. 9वीं क्लास के रजिस्ट्रेशन के समय ही स्टूडेंट से बोर्ड परीक्षा ही देने के बारे मे बताया जायेगा. इसके बाद 2017 की बोर्ड परीक्षा देने वाले स्टूडेंट को आप्सनल नहीं दिया जायेगा.
- 2011 से सीबीएसइ ने किया था बदलाव सीबीएसइ ने 10वीं बोर्ड परीक्षा के पैटर्न में 2011 में बदलाव किया था. इसके तहत 10वीं बोर्ड की परीक्षा को खत्म कर दिया गया. इसके बदले बोर्ड परीक्षा को आप्सनल बना दिया गया. स्टूडेंट के बोर्ड एग्जाम के डर को खत्म करने के लिए इसे शुरू किया गया. इसमें बोर्ड की ओर से 9वीं क्लास में भी बोर्ड बेस्ड और स्कूल बेस्ड बोर्ड परीक्षा का आप्सन मांगा जाता था.
- स्कूल बेस्ड बोर्ड को अस्वीकार कर दिया अभिभावक और स्टूडेंट्स ने सीबीएसइ के बोर्ड एग्जाम को आप्सनल बनाये जाने के नियम को काफी संख्या में अभिभावक से स्वीकार नहीं किया. आये दिन इसकाे लेकर सीबीएसइ के पास लिखित शिकायत भी दिये जाते रहे है. 2011 में शुरू किया गया इस नियम को पहले स्कूलों की तरफ से प्रेशर देकर स्टूडेंट्स को स्कूूल बेस्ड परीक्षा के प्रति अवेयर किया जाता था. 2013 के बाद स्कूूल बेस्ड एग्जाम देने में स्टूडेट की संख्या कम होने लगी. 2014 और 2015 में पचास फीसदी स्टूडेंट स्कूल बेस्ड बोर्ड को अस्वीकार कर दिया. 

Wednesday, December 16, 2015


एआइपीएमटी अभ्यर्थियों से शपथ पत्र भरवायेगी सीबीएसइ

- आज से भरे जायेंगे एआइपीएमटी के आवेदन

संवाददाता, पटना सीबीएसइ ने ऑल इंडिया प्री मेडिकल एंड प्री डेंटल एंट्रांस एग्जामिनेशन (एआइपीएमटी) को लेकर सीबीएसइ दिशा निर्देश जारी करने जा रही है. पहली बार सीबीएसइ एआइपीएमटी के अभ्यर्थी से शपथ पत्र भरवाने जा रही है. इस शपथ पत्र को भरने के बाद ही अभ्यर्थी को एडमिट कार्ड मिलेगा. प्रत्येक अभ्यर्थी को आवेदन फार्म भरने के साथ ही शपथ पत्र का एक कॉलम भी भरना होगा. सीबीएसइ की मानें तो पहली बार बोर्ड की ओर से अभ्यर्थी से ऐसा शपथ पत्र भरवाया जा रहा है.
सीबीएसइ के नियम को तोड़ा तो नहीं देंगे तीन साल तक परीक्षा शपथ पत्र के माध्यम से सीबीएसइ हर अभ्यर्थी से परीक्षा के पहले ही लिखवा रही है कि सीबीएसइ के परीक्षा के किसी भी नियम को अभ्यर्थी नहीं तोड़ेंगे. अगर नियम को तोड़ा तो अगले तीन सालों तक एआइपीएमटी की परीक्षा में शामिल नहीं होंगे. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो कदाचार संबंधित नियम को तोड़ने वाले अभ्यर्थी को तीन साल तक परीक्षा नहीं देने दिया जायेगा.
15 दिसंबर से 12 जनवरी तक भरे जायेंगे आवेदन एआइपीएमटी की परीक्षा की तिथि घोषित होने के बाद सोमवार को आवेदन फाॅर्म भरने की तिथि भी घोषित कर दी गयी है. देर रात सीबीएसइ के वेबसाइट पर आवेदन फाॅर्म डाल दिया गया है. अभ्यर्थी 15 दिसंबर से आवेदन फाॅर्म भर सकेंगें. आवेदन फाॅर्म पूरी तरह से ऑन लाइन ही भरे जायेंगे. इस बार ऑन लाइन आवेदन करने की तिथि 12 जनवरी तक रखा गया है. लेट फाइन के द्वारा 13 फरवरी तक आवेदन अभ्यथी कर पायेंगे.
सामान्य अभ्यर्थी को देना हाेगा दो रुपये ज्यादा इस बार एआइपीएमटी के आवेदन फाॅर्म भरने में फी बढ़ा दिया गया है. सामान्य अभ्यर्थी को जहां दो सौ रूपये ज्यादा फी के तौर पर देना होगा. वहीं, एससी और एसटी अभ्यर्थी को एक सौ रुपये ज्यादा देना होगा. सीबीएसइ की मानें तो सामान्य अभ्यर्थी को इस बार 12 सौ की जगह 14 सौ रूपये आवेदन फी जमा करना होगा. वहीं एससी और एसटी अभ्यथी को 650 की जगह 750 रूपये आवेदन फी के तौर पर जमा करना होगा.
एक अप्रैल से मिलेगा एडमिट कार्ड एआइपीएमटी की परीक्षा के एक महीने पहले यानी एक अप्रैल से अभ्यर्थी अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर पायेंगे. सीबीएसइ इस बार एक महीने का समय अभ्यर्थियों को दे रहा है. इससे किसी भी तरह की एडमिट कार्ड में दिक्कतें हाेने पर अभ्यर्थी उसे सही करवा सकेंगे.
पांच जून को निकलेगा रिजल्टसीबीएसइ से एआइपीएमटी का रिजल्ट की तिथि भी घोषित कर दी है. पांच जून को एआइपीएमटी का रिजल्ट घोषित कर दिया जायेगा. ज्ञात हो कि देश भर के तमाम राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेज में 15 फीसदी नामांकन एआइपीएमटी में सफल अभ्यथी के लिए रिजर्व होता है. रिजल्ट निकलने के बाद रैंक के अनुसार अभ्यथी को कॉलेज एलॉट किया जाता है.

मैट्रिक परीक्षार्थियों को बिहार बोर्ड देगा शॉर्ट नोट

- 25 से 30 दिसंबर के बीच मिलेगा शॉर्ट नोट

संवाददाता, पटनामैट्रिक परीक्षा में बैठने वाले करीब पंद्रह लाख परीक्षार्थियों को परीक्षा की तैयारी के लिए शॉर्ट नोट दिया जायेगा. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा परीक्षार्थियों के लिए शॉर्ट नोट तैयार किया जा रहा है. शॉर्ट नोट मैट्रिक के सिलेबस पर तैयार किया गया है. इस शॉर्ट नोट में उन्हीं टॉपिक को रखा गया है जिससे परीक्षा में प्रश्न आयेंगे. समिति द्वारा मैट्रिक परीक्षार्थी की परीक्षा की तैयारी में मदद के लिए शॉर्ट नोट दिये जायेंगे. ज्ञात हो कि समिति द्वारा मैट्रिक के परीक्षाथी के लिए पांच सेट मॉडल पेपर समिति वेबसाइट पर डाला गया है. इस मॉडल पेपर के माॅडल उत्तर भी जल्द ही वेबसाइट पर उपलब्ध हो जायेंगे.
दिसंबर अंतिम तक मिल जायेगा शाॅर्ट नोटसमिति के अनुसार 25 से 30 दिसंबर के बीच शॉर्ट नोट परीक्षार्थियों को उपलब्ध हो जायेगा. इसको लेकर समिति के अध्यक्ष द्वारा पूरे बिहार के नौ प्रमंडल के अधिकारी के साथ बैठक किया जायेगा. बैठक में मैट्रिक परीक्षा संबंधित कई जानकारी दी जायेगी. अभी मैट्रिक की परीक्षा को लगभग तीन महीने का समय है. इसमें स्पेशल क्लासेज में छात्रों की उपस्थिति को बढ़ाने संबंधित निर्देश दिये जायेंगे.
डीइओ और प्रिंसिपल के माध्यम से मिलेगा शॉर्ट नोटछात्रों को कोर्स का शाॅर्ट नोट डीइओ और प्रिंसिपल के माध्यम से मिलेगा. समिति द्वारा 30 दिसंबर तक शॉर्ट नोट तैयार कर लिया जायेगा. इसे डीइओ और स्कूल के प्रिंसिपल को भेजा जायेगा. ज्ञात हो कि इस बार 15 लाख के अधिक छात्र मैट्रिक की परीक्षा में शामिल होंगे. मैट्रिक में फेल छात्रों की संख्या कम से कम हो, इसके लिए परीक्षा की तैयारी छात्रों को करवाया जायेगा.
कोटमैट्रिक परीक्षा में फेल छात्रों की संख्या को कम करने की इस बार कोशिश की जा रही है. अगर छात्रों की तैयारी होगी तो वो कदाचार नहीं करेंगे. इस बार छात्रों काे शॉर्ट नोट दिया जायेगा. शाॅर्ट नोट सिलेबस का संक्षिप्त रूप रहेगा. शॉर्ट नोट से ही परीक्षा में प्रश्न रहेंगे.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति 

इंटर टॉपर के कॉलेज सहित छह परीक्षा केंद्र हुये ब्लैक लिस्टेड, कदाचार वाले केंद्र पर नहीं होगी परीक्षा

- बिहार बोर्ड ने कदाचार वाले परीक्षा केंद्र की लिस्ट किया जारी

संवाददाता, पटनाइंटरमीडिएट साइंस का टॉपर विकास कुमार ने जिस स्कूल इंटर की परीक्षा दिया, उस परीक्षा केंद्र को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने ब्लैक लिस्टेड कर दिया है. वीआर कॉलेज किरतपुर, भगवानपुर, वैशाली का छात्र विकास कुमार का परीक्षा केंद्र सेंट फ्रांसिस हाई स्कूल, वैशाली में दिया गया था. इस परीक्षा केंद्र को समिति ने अब ब्लैक लिस्टेड कर दिया है. 2016 की इंटरमीडिएट और मैट्रिक की परीक्षा इस परीक्षा केंद्र पर नहीं लिया जायेगा. इसके अलावा पूरे बिहार में कई परीक्षा केंद्र को बिहार बोर्ड ने ब्लैक लिस्टेड कर दिया है. मैट्रिक और इंटर की परीक्षा को लेकर इस बार बिहार विद्यालय परीक्षा समिति काफी सतर्कता बरत रही है.
डीएम और डीइओ को भेजा गया स्कूल और कॉलेज की लिस्ट समिति की ओर से मैट्रिक और इंटर की परीक्षा केद्रों की लिस्ट जिलों के डीएम और डीइओ को भेज दिया गया है. समिति की ओर से इन केंद्रों पर परीक्षा नहीं लेने का निर्देश दिया गया है. इन केंद्रों पर ना तो मैट्रिक और ना ही इंटर की परीक्षा ली जायेगी. समिति की माने तो इस बार मैट्रिक और इंटरमीडिएट में लगभग 30 लाख परीक्षार्थी शामिल होंगे.
पुलिस फोर्स के बीच होगा इस बार मैट्रिक की परीक्षा समिति अध्यक्ष ने तमाम जिलों के डीएम से यह भी कहा है कि जिन परीक्षा केंद्र पर कदाचार का थोड़ा भी शक हो तो वहां पर अधिक से अधिक पुलिस फोर्स को लगाया जायें. चुकी इस बार पिछले साल से कई लाख छात्रों की बढ़ोतरी मैट्रिक में हो रहा है. लेकिन परीक्षा केंद्र सीमित है. ऐसे में अगर परीक्षा केंद्र ऐसे स्कूल और कॉलेज को बनाया जायेगा जहां पर थोड़ा बहुत कदाचार हो रहा है, तो इन केंद्रों पर पुलिस फोर्स के बीच परीक्षा लिया जायें.
इन स्कूलों को किया गया ब्लैक लिस्टेड- विद्या निकेतन, महनार, वैशाली
- सेंट फ्रांसिस हाइ स्कूल, वैशाली - रामलखन सिंह यादव काॅलेज, नवादा
- गायत्री शिक्षा निकेतन, सिमरी बख्तियारपुर - एमएम महिला कॉलेज, अारा
- राजकीय कन्या उच्च विद्यालय, आरा कोट
2015 की परीक्षा में जिन परीक्षा केंद्रों पर कदाचार किया गया था. इन केंद्रों पर 2016 मैट्रिक और इंटर की परीक्षा नहीं ली जायेगी. इसके लिए समिति की ओर से कुछ स्कूलों और काॅलेजों की लिस्ट संबंधित डीएम और डीइओ को भेज दिया गया है. लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति \\B