Friday, September 11, 2015

पीएसए एग्जाम हो जायेगा बंद

9वीं क्लास के स्टूडेंट इस बार नहीं देंगे पीएसए

संवाददाता, पटनाप्राब्लम सॉल्विंग असेसमेंट (पीएसए) देने से अब सीबीएसइ स्टूडेंट्स बच जायेंगे. उनको पीएसए की अलग से तैयारी नहीं करनी पड़ेगी, क्योंकि सीबीएसइ पीएसए को बंद करने की प्लानिंग करने जा रहा है. जल्द ही इसको लेकर निर्देश भी जारी कर दिया जायेगा. हाल में हुए सीबीएसइ की एक बैठक में यह फैसला लिया गया है. इसके तहत अब 9वीं और 10वीं के स्टूडेंट को पीएसए की परीक्षा नहीं देनी होगी. अब एक ही परीक्षा फाइनल मार्च में देना होगा. ज्ञात हो कि पीएसए की परीक्षा में 9वीं और 10वीं के स्टूडेंट्स शामिल होते है.
9वीं के स्टूडेंट नहीं देंगे पीएसए 2016 9वीं फाइनल की परीक्षा में शामिल होने वाले स्टूडेंट को पीएसए नहीं देना होगा. सीबीएसइ जल्द ही इसको लेकर स्कूलों को सूचित भी करने जा रहा है. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो इस बार 10वीं के स्टूडेंटस ही पीएसए की परीक्षा में शामिल होंगे. लेकिन 9वीं क्लास के स्टूडेंट केवल फाइनल परीक्षा ही देंगे. पीएसए अलग से उन्हें अब नहीं देना होगा. सीबीएसइ अगले साल से पीएसए को पूरी तरह से बंद करने की तैयारी कर रहा है.
पीएसए के अंक जुडते है टोटल मार्क्स में 9वीं के फाइनल एग्जाम और 10वीं बोर्ड के रिजल्ट में पीएसए का अंक जुडता है. 9वीं के फाइनल और 10वीं बोर्ड की परीक्षा होने के पहले पीएसए की परीक्षा ली जाती है. मैथ, साइंस, सोशल साइंस और लैंग्वेज विषय की परीक्षा इसके तहत ली जाती है. 40 अंक के पीएसए की परीक्षा के हर विषयों का एवरेज मार्किंग निकाल कर टोटल अंक में जोडा जाता है, उसके बाद फाइनल रिजल्ट स्टूडेंट को दिया जाता है.
ऐसे बदलता गया पीएसए का सिस्टम सीबीएसइ की ओर से 10वीं बोर्ड में सीसीइ (कंटीन्यूअस एंड कंप्रीहेसिव इवैल्यूएशन) लागू करने के बाद पीएसए को जोडा गया. शुरूआत में पीएसए आप्सनल किया गया था. लेकिन स्टूडेंट की उपस्थित काफी कम होने के बाद साल में चार बार लिये जाने वाले एफए-4 (फार्मेटिव एसेसमेंट) के बदले पीएसए को कर दिया गया. ऐसे में पीएसए को 9वीं और 10वीं स्टूडेंट के लिए कंपल्सरी कर दिया गया.
पीएसए बंद होने से नुकसान - पीएसए की तैयारी के लिए सब्जेक्ट के अतिरिक्त स्टूडेंट को तैयारी करनी पडती थी
- प्रतियोगी परीक्षा को लेकर स्टूडेंट को तैयार किया जाता था - सब्जेक्ट के रटने की आदत से स्टूडेंट को छुटकाना मिलता था
- स्टूडेंट क्रियेटिव सोच नहीं कर पायेंगे 

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