Rinku Jha
Sunday, September 6, 2015
फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट पर बन गये सारे ट्रेंड टीचर
- 7 फरवरी 2012 में ही विजिलेंस विभाग के पास आया मामला, अब तक नहीं हुई कार्रवाई
संवाददाता, पटना
फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट लेकर बीएड की डिग्री लिया. डिग्री लेने के बाद फिक्स स्कूल में ही टीचर के पद पर कार्यरत भी हुए. इसके बाद महज पांच सालों में ही ये टीचर ट्रेंड टीचर की केटेगरी में भी आ गये. सीबीएसइ के कई स्कूलोें में ये टीचर वर्तमान में सीनियर टीचर के रूप में कार्यरत भी है. सीबीएसइ के विजिलेंस डिपार्टमेंट के अनुसार कई स्कूलों में ऐसे सैकडों टीचर कार्यरत है, जिन्हें टीचिंग का एक्सपेरियेंस नहीं है, लेकिन वो ट्रेंड टीचर्स की केटेगरी में आ चुके है. इसका असर एकेडमिक पर काफी हो रहा है.
10वीं और 12वीं के मूल्यांकन में करते है गड़बड़ी
हर स्कूलों में फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट लेकर सैकड़ों टीचर ट्रेंड टीचर बन गये है. सीबीएसइ के 10वीं और 12वीं के आंसर कॉपी के मूल्यांकन में ट्रेंड टीचर्स को ही लगाया जाता है. ऐसे में इन ट्रेंड टीचर को ही मूल्यांकन कार्य में लगाया जाता है. इससे मूल्यांकन में भी कई स्तर पर गडबडी सीबीएसइ को प्राप्त हुआ है. मूल्यांकन में कई बार ट्रेंड की जगह अनट्रेंड टीचर्स को लगा दिया जाता है. इससे स्टूडेंटस के माक्स पर भी असर होता है.
नहीं हुई कार्रवाई, बन रहे फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट पर टीचर
सीबीएसइ विजिलेंस डिपार्टमेंट के पास 7 फरवरी 2012 को मामला आया. इसके बाद विभाग की ओर से डीएवी प्रबंधन को मामले की जानकारी दी गयी. तीन साल से अधिक हो जाने के बाद भी अभी तक डीएवी प्रबंधन की ओर से स्कूल के प्रिंसिपल पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. इस संबंध में डीएवी टीचर्स एसोसिएशन के महासचिव निखिल कुमार ने बताया कि कई सालों से डीएवी के साथ कई स्कूलों में फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट पर टीचर्स काे फिक्स स्कूल में नियुक्त किया जा रहा है. सर्टिफिकेट देने वाले प्राचार्य को क्षेत्रीय निदेशक बना दिया गया है. ऐसे में क्षेत्रीय निदेशक के रूप में यह सर्टिफिकेट देना और आसान हो जाता है.
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