Sunday, September 20, 2015

मृणाल के जज्बे को सीबीएसइ ने किया सलाम, बनाया रोल मॉडल

- केंद्रीय शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी ने पत्र लिख कर दी जानकारी

संवाददाता, पटनाअगर इंसान चाह ले तो कोई भी काम कठिन नहीं है. जरूरत बस दृढ़ इच्छाशक्ति की है. कुछ ऐसी ही इच्छा शक्ति मृणाल के अंदर भी है. मृणाल एक आंख से देख नहीं पाता है. उसके दूसरे अांख में भी रोशनी काफी कम है. लेकिन पटना के कंकड़बाग निवासी 14 वर्षीय मृणाल ने अपनी इस कमजोरी को ताकत बना लिया और इस साल सीबीएसइ के 10वीं बोर्ड की परीक्षा 7़.2 सीजीपीए से पास की. उसकी इस मेहनत, जज्बा और लगन के आगे सेंट्रल बोर्ड आॅफ सेकेंड्री एजुकेशन (सीबीएसइ) ने भी अपना सलाम मृणाल को दिया है. पटना के मृणाल को देश की शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी ने एक पत्र लिख का उसे उसके जज्बे को सलाम किया है. शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी से अपने पत्र में मृणाल को 10वीं बोर्ड में अच्छे अंक से पास करने को लेकर बधाई दिया है. साथ में मृणाल को देश का स्पेशल पर्सन बताया है.
बनाया सीबीएसइ का रोल मॉडलछोटे अक्षर को बड़े करके पढ़ना, देखकर नहीं बल्कि सुन कर पढ़ने की आदत डालना आदि को लेकर अपनी हर कमजोरी को पिछे छोड़ बस मृणाल आगे बढ़ता चला गया. मृणाल के इस हौंसले को सीबीएसइ देश के हर कोने में पहुंचाना चाहती है. सीबीएसइ जल्द ही मृणाल को रोल माॅडल बनाने जा रही है. इससे स्पेशल बच्चे के साथ उन स्कूलों को भी मैसेज दिया जायेगा जो स्पेशल चाइल्ड का एडमिशन नॉर्मल स्कूल नहीं लेता है. मृणाल के हर कोशिश और पढ़ाई के इनोवेशन को सीबीएसइ अपने सर्कुलर में डालने वाली है़
देश के किसी भी स्कूल नहीं हुआ था नामांकन मृणाल के पिता संतजीव कुमार ने बताया कि मृणाल का आंख जन्म से ही खराब था. जब दो महीने का था तभी हमें पता चला कि यह देख नहीं पा रहा है. इसके बाद कई डाॅक्टर से दिखाया, लेकिन डाॅक्टर ने साफ कह दिया कि यह कभी भी देख नहीं पायेगा. लेकिन भगवान की मरजी कहें, जब तीन साल का हुआ तो इसका एक आंख में थोड़ी रोशनी आयी़. यह अपना काम करने लगा. हमने कभी भी इसे स्पेशल चाइल्ड नहीं समझा. इस कारण मै इसे नॉमर्ल स्कूल में ही एडमिशन करवाना चाह रहा था़. पटना से लेकर बंगलोर आदि जगहों पर भी कोशिश कर लिया, लेकिन इसका एडमिशन किसी भी स्कूल में नहीं लिया गया. इसके बाद मुझे पता चला कि मस्टक (ओमान की राजधानी) में सीबीएसइ का स्कूल इंडियन स्कूल है जहां पर ऐसे बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था है. फिर मैने वहीं पर नौकरी के भी अप्लाई किया. पिछले दस सालों से मै अपने बच्चे के कारण मस्टक में ही हूं. दूसरी क्लास में मैने उसका एडमिशन मस्टक में करवाया था़
पढ़ाई के साथ बोर्ड परीक्षा में भी स्पेशल व्यवस्थामृणाल अभी 11वीं क्लास में पढ़ रहा है. मृणाल की मां शोभा कुमारी बताती है कि हमने तो उम्मीद ही छोड़ ली थी कि मृणाल नॉमर्ल बच्चों की तरह पढ़ पायेगा, लेकिन मृणाल के अपने प्रयास और स्कूल की मदद से आज वह बोर्ड परीक्षा पास कर पाया. मृणाल को बड़े अक्षर कर पढ़ाने की व्यवस्था स्कूलों ने किया था. पटना में रह रही मृणाल की बुआ ने बताया कि स्कूल में मृणाल को आगे की सीट पर बैठाया जाता है. इसके अलावा 10वीं बोर्ड की परीक्षा के लिए स्कूल ने सीबीएसइ ने बड़े अक्षर के प्रश्नपत्र उपलब्ध करवाने का आग्रह किया था.  

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