Wednesday, September 23, 2015

स्कूलों की मनमानी रोकने को बना एजुकेशन ट्रिब्यूनल, शिकायत होगी अब दूर

- 26 साल के बाद बिहार में बना एजुकेशन ट्रिब्यूनल

संवाददाता, पटनास्कूलों की मनमानी रोकने के लिए देश भर में एजुकेशन ट्रिब्यूनल गठन करने को कहा गया था. 1989 में आये एक फैसले के बाद कई स्टेट गवर्नमेंट ने इसका गठन किया था. लेकिन बिहार में अब जाकर एजुकेशन ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है. इसके अंतर्गत सरकारी और गैर सरकारी यानी तमाम प्राइवेट स्कूल के प्रायमरी से लेकर हाई स्कूल तक के मामले दर्ज हो पायेंगे. 26 सालों के बाद बिहार में इसका गठन किया गया है.
- स्टेट के साथ जिला स्तर पर करेगा काम एजुकेशनल ट्रिब्यूनल स्टेट के साथ हर जिला स्तर पर भी काम करेगा. जिला स्तर पर ट्रिब्यूनल में दो सदस्य होंगे. दो सदस्य में बिहार ज्यूडिशियल सर्विस के रिटायर ऑफिसर और बिहार एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस या बिहार एजुकेशनल सर्विस के रिटायर ऑफिसर इसके मेंबर होंगे. वहीं स्टेट लेवल के ट्रिब्यूनल में इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के प्रिसिंपल सेक्रेटरी रैंक के रिटायर ऑफिसर इसके मेंबर होंगे.
- जाहिद हुसैन केस पर होगा पहला फैसलाबिहार एजुकेशन ट्रिब्यूनल के तहत पहला फैसला 28 सितंबर को लिया जायेगा. नॉट्रेडेम एकेडमी, मुंगेर के शिक्षक जाहिद हुसैन को स्कूल से 9 जून 1998 को निकाल दिया गया था. जाहिद हुसैन क वकील रोहित ने बताया कि गर्मी की छुटटी के बाद स्कूल के खुलने के दिन जाहिद उसी दिन ज्वाइन नहीं किया. क्योंकि उनके बच्चे की तबीयत खराब हो गयी थी. जानकारी देने के बावजूद जाहिद हुसैन को स्कूल ने निकाल दिया. मामला हाई कोर्ट पहुंचा था. अब एजुकेशन ट्रिब्यूनल के तहत इसका फैसला 28 सितंबर को लिया जायेगा.
स्कूल में है परेशान तो करें यहां पर शिकायत - स्कूल में किसी तरह की शिकायत हो तो ट्रिब्यूनल में जा सकते है
- शिकायत 30 दिनों के अंदर ही करना होगा - शिकायत के 90 दिनों के अंदर केस का निपटारा हो जायेगा
- टीचर, नॉन टीचिंग स्टाफ, पैरेंट्स, स्टूडेंट्स आदि अपनी शिकायत रख सकते है- स्कूल के मनमरजी को साबित करना होगा
एजुकेशन ट्रिब्यूनल का यह है काम - प्राइवेट स्कूलक मनमाना फी व गलत तरीके से पैसा लेने को रोकना
- स्कूल के एफिलिएशन या एनओसी देने की अंतिम मुहर - सीबीएसइ, आइसीएसइ और स्टेट बोर्ड की मान्यता देने का अंतिम निर्णय लेना
- शिक्षा के अधिकार के तहत हर तरह का फैसला लेना- स्कूल की मनमानी वाले फैसले को रोकना
- स्कूल पर कार्रवाई और एनओसी रोकने का भी अधिकार स्टूडेंट और अभिभावकों को मिलेगी राहत
- स्कूल मनमाने रूप से स्टूडेंटस को स्कूल से नहीं निकाल पायेगा - एबसेंट होने की स्थिति में स्कूल द्वारा स्टूडेंटस को सजा देने पर राहत मिलेगी
- कारपोरल पनिशमेंट पर स्टूडेंट एजुकेशन ट्रिब्यूनल में जा सकते है- बोर्ड के नियम के खिलाफ स्कूल के मनमाना को ट्रिब्यूनल में चैलेंज किया जा सकता है
टीचर्स को मिलेगी राहत - वेतन आदि पर स्कूल की मरजी नहीं चलेगी
- इंक्रीमेंट अब रेगूलर होगा - ट्रांसफर या स्कूल से निकालने जैसे स्कूल की तानाशाही पर रोक लगेगा
- टीचर्स अपनी बात रख पायेंगे - एडहॉक टीचर्स को भी उनकी क्वालिफिकेशन के अनुसार वेतन आदि मिलेगा
ऐसे चल रहा स्कूलों की मनमरजी - एडहॉक पर टीचर्स को रख कर जब चाहा निकाल दिया
- स्कूल की ओर से हमेशा टीचर्स, नॉन टीचिंग स्टाॅफ को दबा कर रखा जाता है- किसी बात का विरोध करने पर स्कूल तुरंत ट्रांसफर, टर्मिनेट आदि कर देता है
- स्टूडेंट को बिना किसी वजह से स्कूल से निकाल दिया जात है- अभिभावकों को फी, यूनिफार्म आदि को लेकर आये दिन प्रेसर दिया जाता है
- स्कूल अपनी मनमरजी से फी में बढ़ोतरी कर देता हैकोट
एजुकेशन ट्रिब्यूनल के गठन से कई समस्याओं का निदान हो सकेगा. एजुकेशन ट्रिब्यूनल के बनने से अभिभावकाें और स्टूडेंट को काफी राहत मिलेगी. अपनी शिकायतों को रखने का एक प्लेटफार्म टीचर्स के साथ अभिभावकों और स्टूडेंट को मिलेगा. डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार प्राइवेट चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन, बिहार
अब टीचर्स भी अपनी शिकायत यहां पर दर्ज करवा सकेगे. टीचर्स को न्याय मिलेगा. अभी हर स्कूल टीचर्स के मामले में मनमाना करते है. जब चाहा किसी को भी स्कूल से निकाल दिया जाता है. लेकिन इसके गठन से टीचर्स को काफी राहत मिली है. निखिल कुमार, महासचिव, डीएवी टीचर्स एसोसिएशन\\B

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