Wednesday, September 23, 2015

डॉक्टर-अटेंडेंट की लड़ाई में कराह रही नवादा की सोनी

- 42 फीसदी हिस्सा जला, फिर भी दस दिन से इलाज के भटक रही दर-ब-दर

रिंकू झा, पटनातेजाब की जलन से उसका चहेरा 42 फीसदी जल चुका है. आंखें काम नहीं कर रही. पूरे शरीर में जलन हो रहा है. जिंदा लाश बन कर रह गयी है. यह हालत नवादा जिले की सोनी परवीन की है, जिसे देखने वाला कोई नहीं. इसी लड़की के इलाज को लेकर शनिवार की शाम पीएमसीएच इमरजेंसी में डॉक्टर व अटेंडेंट के बीच हंगामा हुआ, जिसके बाद डॉक्टर हड़ताल पर चले गये. डॉक्टर व अटेंडेंट की लड़ाई में व
ह पिछले नाै दिनों से दर्द से कराह रही है. उसे देखने वाला कोई नहीं. हंगामे के बाद भी डीएम के दवाब में भले ही उसे पीएमसीएच में भरती रखा गया हो, लेकिन उसे ना तो दवा मिल पा रही है और ना ही दर्द से आराम मिले इसके लिए पंखा या कूलर आदि का सहारा ही है.
मां बहा रही आंसू, पिता कर रहे डॉक्टरों की खुशामद मां नुरैसा खातून के आंख से आंसू नहीं थम रहे है तो वहीं पिता बेहतर इलाज के लिए लोगो का खुशामद कर रहे है. बेटी को सही से इलाज मिले इसको लेकर पिता ने सोशल एक्टिविस्ट वर्षा से अनुरोध किया. वर्षा जब सोनी परवीन के सही इलाज के लिए पीएमसीएच पहुंची. मामला कुछ और हो गया. सोशल एक्टिविस्ट वर्षा और डाक्टर सतपाल के बीच सोनी परवीन के इलाज को लेकर झड़प हो गया. झगड़ा इतना बढ़ गया कि जूनियर डाक्टर हड़ताल पर चले गये. इस आपसी लड़ाई में नुकसान हुआ तो बस सोनी परवीन का. अभी भी उसके दर्द की स्थिति जस की तस है.
एक साल किया यौन उत्पीड़न, फिर फेंका तेजाब दरअसल नवादा के अकबरपुर स्थित राजहत थाना की रहने वाली सोनी परवीन और उसकी बहन अफसरी परवीन घर में सो रही थी. गांव का मो. एहसान 13 सितंबर की रात 12 बजे घर में घुस कर सोनी परवीन के उपर तेजाब डाल दिया. इससे पहले एक साल तक मो. एहसान सोनी परवीन का यौन उत्पीड़न कर रहा था. पिता मो. गयास खां ने बताया कि रास्ते में रोककर अश्लील हरकतें करता था. शादी नहीं करने पर तेजाब फेंकने की भी धमकी दिया था. गांव के पंचायत में इसकी शिकायत करने पर मो. एहसान ने पूरे पंचायत के सामने मुझसे माफी भी मांगी.
डीएम के कहने पर दुबारा हुई पीएमसीएच में भर्ती घटना के बाद पहली बार पीड़िता के पिता मो. ग्यास खान ने 14 सितंबर को नवादा सदर हास्पीटल से रेफर अपनी बेटी सोनी परवीन को पीएमसीएच में भर्ती करवाया. कोई सुविधा नहीं मिलने के कारण 14 सितंबर को ही प्राइवेट हास्पीटल में लेकर गये. बाइपास के पास इस प्राइवेट हास्पीटल में भी कोई सुविधा नहीं था. मुझे जब पता चला तो एक्टिविस्ट वर्षा ने पटना डीएम प्रतिमा वर्मा के पास आवेदन दिया. इसके बाद डीएम के कहने पर दुबारा 16 सितंबर को दुबारा पीड़िता को एडमिट किया गया.
आमने सामने डाॅक्टर ने मेरे साथ बदतमीजी किया
सोशल एक्टिविस्ट वर्षा ने बताया कि 13 सितंबर को तेजाब से जली सोनी परवीन के इलाज में कोताही की शिकायत पर वह 19 सितंबर की पांच बजे शाम पीएमसीएची के भर्ती वार्ड नंबर 303 में सोनी परवीन को देखने गयी तो वहां पर कोई सुविधा नहीं था. पंखा-कूलर कुछ भी नहीं होने से उसकी हालत खराब हो रही थी. ड्यूटी पर मौजूद डा. नागमनी ने बात की और उसके बाद सीनियर डाक्टर डा. अजय कुमार सोनी को आइसीयू में भर्ती करने का अनुरोध किया. साेनी को आइसीयू में शिफ्ट किया ही जा रहा था कि तभी डा. सतपाल पहुंच गये. सोनी परवीन को शिफ्ट होते देख डा. सतपाल ने इसका विरोध शुरू कर दिया. इसके बाद डा. सतपाल मेरे पास आयेे. मेरे शरीर को छूकर अभद्र व्यवहार किया. मेरे साथ छेड़खानी किया. मैने रोकने की कोशिश की तो मेरे उपर हाथ तक उन्होंने उठाया. मेरी साड़ी पकड़कर खींचा. वहां पर मौजूद लोगों की मदद से मै बच पायी. फिर तब तक गार्ड भी गया. मेरी साथी सुनिता को भी मारा और अभद्र व्यवहार किया. मेरे सिर पर भी चोट लगी है. फिर पीरबहोर थाना पुलिस के पहुंचने के बाद मै वहां से निकल पायी. पीएमसीएच से निकल कर वर्षा पीरबहाेर थाना पहुंची. डा. सतपाल के खिलाफ सेक्सुअल हरेसमेंट का केस दर्ज करवाया है. वर्षा ने बताया कि जूनियर डाक्टरों ने मेरे साथ काफी बदतमीजी किया है. मुझे जानकारी दिये बिना पेंसेट को वार्ड से निकाल रहे थे
इस संबंध में पीएससीएच के डा. सतपाल ने बताया कि तेजाब पीड़िता मेरे ही वार्ड में भर्ती थी. मै उसे देख रहा था. बिना मुझे जानकारी दिये सोनी परवीन को वहां से शिफ्ट किया जा रहा था. जब शिफ्ट किया जा रहा था तो मै वहीं पर दूसरे पेसेंट को देख रहा था. डाक्टर सतपाल ने बताया कि किसी भी पेसेंट को वार्ड से हटाने से पहले वार्ड में ऑन ड्यूटी में रहे डाक्टर को बताना होता है. मैने जब यह देखा तो इसको लेकर मैने अपने जूनियर डा. नागमणि से बात किया. इसके बाद मैने इसका विरोध किया. क्योंकि मेरे जानकारी में रखे बिना उसे वहां से ले जाया जा रहा था. इस पर वहां खड़ी महिला विरोध करने लगी. और उन्होंने मुझे बुरा भला कहा. मैने इग्नोर किया. लेकिन वो बार-बार बोले जा रही थी.

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