Rinku Jha
Monday, September 28, 2015
प्राइमरी टीचर जांच रहे सीबीएसइ के 10वीं व 12वीं की आंसर कॉपियां
- स्कूलों को सीबीएसइ नोटिस देने की कर रहा तैयारी
संवाददाता, पटना
रिजल्ट आता है तो अपने मार्क्स को लेकर स्टूडेंट परेशान होते है. स्क्रूटनी के अप्लाई करते है. स्क्रूटनी में पता चलता है कि जो अांसर सही लिखा, उसका भी मार्क्स नहीं दिया गया. फिर जाकर आंसर कॉपी में एक्स्ट्रा मार्क्स मिलते है. इसके लिए स्टूडेंट को पैसे भी खर्च करने पड़ते है. सीबीएसइ पटना रीजनल ऑफिस में हर साल ऐसे मामले आते है. जब इसकी जांच की गयी तो पता चला के काफी संख्या में 10वीं और 12वीं के आंसर कॉपी की जांच प्राइमरी टीचर और एडहॉक टीचर्स के द्वारा करवायी जाती है. सीबीएसइ अब उन स्कूलों काे नोटिस देने की तैयारी कर रहा है जो प्राइमरी और एडहॉक टीचर्स को इवैल्यूशन में हेड एग्जामिनर और एग्जामिनर के रूप में नाम बोर्ड के पास भेजते है.
आरटीआइ में मांगी गयी जानकारी से बोर्ड काे चला पता
सीबीएसइ पटना जोन के अंतर्गत कई स्कूलों में यह काम कई सालों से चल रहा है. लेकिन सीबीएसइ के सामने अभी एक आरटीआइ के तहत मांगी गयी जानकारी के बाद सामने आया. आरटीअाइ एक्टिविस्ट निखिल कुमार ने बताया कि डीएवी समेत कई स्कूल इसमें शामिल है. जहां पर प्राइमरी और एडहॉक टीचर को इवैल्यूएशन में लगाया जाता है. इन टीचर्स का कोई डाटा भी सीबीएसइ के पास नहीं होता है. 2005 से ही यह चल रहा है. कई बार तो प्राइमरी टीचर्स को हेड एग्जामिनर बना दिया गया है. ज्ञात हो कि सीबीएसइ ने पूरे बिहार से लगभग तीन सौ टीचर्स को जांच के घेरे में डाला है.
2011 में रिजल्ट हुआ था खराब
रिजल्ट की भारी गड़बड़ी 2011 में देखने को मिला था. काफी संख्या में प्लस टू के स्टूडेंट का रिजल्ट खराब हो गया था. कई स्टूडेंट तो ऐसे थे जो आइआइटी तो कंपीट कर गये थे, लेकिन प्लस टू की परीक्षा में फेल हो गये थे. उस समय तात्कालिक पटना रीजनल ऑफिसर एमवी प्रसादा राव ने कहा था कि स्कूल द्वारा बोर्ड को ऐसे लिस्ट प्रोवाइड करवाये जाते है, जिसमें टीचर को पीजीटी बताया जाता है. इसके बाद सीबीएसइ ने जांच भी किया था. कई टीचर पकड़ में भी आयें थे.
सब्जेक्ट वाइज बनता है एग्जामिनेशन सेंटर
सीबीएसइ सब्जेक्ट वाइज सेंटर बनाता है. सेंटर के लिए हेड एग्जामिनर और एक एडिशनल हेड एग्जामिनर रखा जाता है. इनका काम आंसर कॉपी की मार्किंग की माॅनिटरिंग करना होता है. इसके लिए सीबीएसइ ने कुछ रूल्स बना रखे है. उसके अनुसार 10वीं के हेड एग्जामिनर उसे ही बनाया जा सकता है जिसने टीजीटी कोर्स कर रखा हो. जिसे कम से कम पांच साल की टीचिंग का एक्सपेरियंस हो. वहीं प्लस टू के हेड एग्जामिनर उसे ही बनाया जा सकता है जिसने पीजीटी कोर्स कर रखा हो. साथ ही जिसे पांच साल की टीचिंग का एक्सपेरियंस हो.
क्वालिफिकेशन ऑफ एग्जामिनर
- टीचर जिस सब्जेक्ट में पोस्ट ग्रेजुएट है, उसी में सब्जेक्ट के एग्जामिनर बनेंगे
- तीन साल का सेंकेंडरी, सीनियर सेंकेडरी और हायर एजुकेशन क्लास में पढ़ाने का अनुभव हो - एक टीचर को एक से अधिक सब्जेक्ट का एग्जामिनर नहीं बनाया जा सकता
- ऐसे किसी भी टीचर को एग्जामिनर नहीं बनाया जा सकता जिस पर किसी प्रकार का आरोप स्टूडेंट ने लगाया हो
कोट
आंसर कॉपी मूल्यांकन में सीबीएसइ के कई रूल्स है. रूल्स के अनुसार ही हर एग्जामिनर सेंटर पर हेड एग्जामिनर और एग्जामिनर को नियुक्त किया जाता है. बोर्ड परीक्षा समाप्त होने के पहले ही मार्किंग स्कीम के साथ अन्य बातों की जानकारी सीबीएसइ स्कूलों को भी भेजता है.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया
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