Sunday, September 6, 2015

असुरक्षित हैं हॉस्टल में छात्राएं

- हर महीने महिला थाना के साथ महिला हेल्प लाइन और महिला आयोग में आता है मामला

रिंकू झा, पटनारहने में सुविधा नहीं, खाने में हाइजीन का ख्याल नहीं, सुरक्षा के नाम पर ना तो गार्ड और ना ही वार्डन की सर्तकता रहती है. भले राजधानी पटना में लड़कियां कैरियर को सुरक्षित रखने के लिए हॉस्टल में आकर रहती है, लेकिन कैरियर को सुरक्षित करने में वो खुद ही असुरक्षित महसूस करती है. आयें दिन गर्ल्स हॉस्टल के कई मामले महिला थाना, महिला हेल्प लाइन ओर महिला आयोग में दर्ज होते है, जिसमें लडकियां अपनी सुरक्षा को लेकर मामला दर्ज करवाती है.
वार्डन के खिलाफ भी होता है मामला दर्ज पटना में हर एरिया के अनुसार हॉस्टल का चार्ज लगता है. ऐसे में चार हजार से लेकर सात हजार तक हॉस्टल चार्ज के रूप में देना होता है. लेकिन सुरक्षा और खान पान के नाम पर लड़कियों को कुछ भी नहीं दिया जाता है. ऐसे में परेशान होकर लड़कियां महिला थाना में मामला दर्ज करवाती हैं. बोरिंग रोड स्थित एक हॉस्टल की छात्रा ने बताया कि कई बार रात में डर से हम लोग सो नहीं पाते है. हॉस्टल लेने के समय गार्ड रहने की बात कहीं गयी थी, लेकिन ऐसा नहीं होता है. बई बार तो वार्डन से मिलने रात-रात को बाहरी लोग आते है.
नहीं रखा जाता है सुरक्षा का ख्याल - प्राइवेट हॉस्टल में सीट देने में बस पैसे लेने पर फोकस किया जाता है
- हाॅस्टल में गार्ड की व्यवस्था नहीं होती है - कई हॉस्टल में गार्जियन से मिलने को कोई समय नहीं होता है
- बिना रिसेप्शन का ही होता है कई हॉस्टल - खाने में खराब सब्जियों का इस्तेमाल किया जाता है
- बेड देते समय जिस मेन्यू को दिखाया जाता है, उसके अनुसार खाना नहीं दिया जाता है- पानी की शुद्धता के लिए आरओ या फिल्टर भी नहीं लगे होते. इससे अधिकांश लडकियां आये दिन बीमार भी होती है
कोटआये दिन हमारे पास ऐसे मामले आते है जिसमें हॉस्टल की लडकियां हॉस्टल के खिलाफ हमारे पास मामला दर्ज करवाने आती है. मामला दर्ज तो करवाने में उन्हें सबसे अधिक अपनी सुरक्षा का ख्याल रहता है. ऐसे में लड़कियां ये भी चाहती है कि उनकी बातें बाहर किसी को पता नहीं चले.
प्रमिला कुमारी, परियोजना प्रबंधक, महिला हेल्प लाइन\\B

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