Rinku Jha
Sunday, September 6, 2015
बिहार में दस हजार टीचर्स फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट पर नियुक्त
- फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट देने के मामले में डीएवी प्रबंधन को सीबीएसइ ने दिया प्रिंसिपल पर कार्रवाई करने निर्देश
- 2006 से चल रहा फर्जी सर्टिफिकेट बनाने का धंधा
संवाददाता, पटनाटीचर वहीं बन सकते हैं जिनके पास टीचर्स एक्सपेरियेंस का सर्टिफिकेट होगा. इग्नू हो या बीएचयू कहीं से भी बीएड करने के लिए अभ्यथी को दो या तीन सालाें का टीचर्स एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट देना होता है. लेकिन बिहार में ऐसे दस हजार टीचर्स हैं, जो फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफकेट लेकर पहले बीएड किया और अब स्कूल में टीचर बन कर पढा रहे है. इस बात का खुलासा सीबीएसइ विजिलेंस डिपार्टमेंट की ओर से किया गया है. डिपार्टमेंट की आेर से जांच के बाद बिहार के कई स्कूलों के प्रिंसिपल का नाम सामने आया है, जो मोटी रकम लेकर फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट बेचते थे.
- प्रिंसिपल पर कार्रवाई करने का निर्देश
सीबीएसइ के विजिलेंस डिपार्टमेंट ने इसमें कई प्रिंसिपल को पकडा है. इसको लेकर डिपार्टमेंट की ओर से प्रिंसिपल पर कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया है. इसमें सबसे पहला नाम डीएवी, हावडा मुजफ्परपुर के सहायक क्षेत्रिये निदेशक सह प्राचार्य एस के झा का है. विजिलेंस डिपार्टमेंट की ओर से डीएवी प्रबंधन दिल्ली को प्राचार्य एसके झा पर कार्रवाई करने की नोटिस भेजी गयी है. लेटर नंबर सीबीएसइ/विजिलेंस/एफ 13522 (42)/2015 द्वारा डीएवी प्रबंधन को भेजा गया है. प्राचार्य एस के झा पर आरोप है कि इन्हाेंने काफी संख्या में फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट दिया है.
- 2006 से चल रहा धंधा
बिहार में फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट स्कूलों से देने का काम 2006 से बडे पैमाने पर चल रहा है. इसमें बिहार के कई प्राइवेट स्कूलों का तार जुडा हुआ है. फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट जमा कर बीएड करने के बाद स्कूल में टीचर के रूप में कार्यरत भी है. विजिलेंस डिपार्टमेंट ने सीमा कुमारी जो डीएवी खगाैल में टीचर्स के रूप में कार्यरत है, इनका उदाहरण भी डीएवी प्रबंधन को दिया गया है. सीमा कुमारी ने फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट लेकर मगध विवि से बीएड की डिग्री लिया था.
- पकड में अाने पर रदद हो गया था नामांकन
इग्नू से बीएड करने के लिए जितेंद्र कुमार और शंकर झा ने फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट देकर नामांकन लेना चाहा. इन दाेनों की लिखित परीक्षा भी पास कर ली थी. लेकिन बाद में पकड में आ जाने के कारण इन दोनों के नामांकन को इग्नू की आेर से रदद कर दिया गया था.
कोटडीएवी में फर्जी और फेक एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट देने मामला सामने आया है. डीएवी में कई सालों से यह चल रहा है. मैने इस मामले को कई बार उठाया तो मेरे उपर भी प्रेशर दिलवाया गया.
निखिल कुमार, महासचिव, डीएवी पब्लिक स्कूल एसोसिएशन
मामला आया है. मेरे नॉलेज में भी आया है. लेकिन सीबीएसइ के विजिलेंस विभाग की ओर से कार्रवाई करने के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है.
एसके झा, सहायक क्षेत्रिय निदेशक सह प्राचार्य, डीएवी हावडा मुजफ्परपुर
नोट - डीएवी प्रबंधन संस्थान की डायरेक्टर नीशा पेसिन से बात करने की कोशिश की गयी. उन्हें वाट्सअप नंबर पर मैसेज डाला गया, लेकिन उन्होंने कोई जबाव नहीं दिया.
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