Monday, September 28, 2015

सीबीएसइ ने इंप्रूवमेंट परीक्षा का बदला पैटर्न, जेइइ अभ्यर्थी सुधार सकेंगे अपना मार्क्स सीट

- 2016 से होगा लागू

संवाददाता, पटनाज्वांइट एंट्रांस एग्जामिनेशन (जेइइ) एडवांस में सेलेक्शन होने के बावजूद प्लस टू के अंक के कारण पिछड़ गये. प्लस टू में मार्क्स कम आने के कारण रैंक अच्छा नहीं मिला. तो अब चिंता नहीं कीजिए. सीबीएसइ ने ऐसे स्टूडेंट को अपने मार्क्स सुधार के लिए दोबारा मौका देने का फैसला लिया है. जो स्टूडेंट्स 2015 के प्लस टू में कम अंक प्राप्त किये है वो सीबीएसइ के इंप्रूवमेंट परीक्षा में सारे विषयों की परीक्षा देकर अपने मार्क्स में सुधार कर सकते है. सीबीएसइ ने ऐसे तमाम स्टूडेंट को इंप्रूवमेंट की परीक्षा सारे विषयो में देने का परमिशन दे दिया है, जिन्हें 2015 की प्लस टू में कम अंक आये हो.
15 अक्तूबर तक है आवेदन भरने की तिथिअपने मार्क्स सीट में सुधार करने के लिए जो भी स्टूडेंट इंप्रूवमेट देना चाहते है, उन्हें 15 अक्तूबर तक आवेदन भर देना है. सीबीएसइ के अनुसार हर विषय के स्टूडेंट को 250 से 600 रूपये तक आवेदन फी देना होगा. ज्ञात हो कि अभी तक स्टूडेंट एक या दो विषयो में ही इंप्रूवमेंट दे पाते थे. लेकिन 2016 मार्च में होने वाली प्लस टू बोर्ड परीक्षा में सारे विषयों में इंप्रूवमेंट लिया जायेगा.
छात्रों को होगा फायदा सीबीएसइ के इस नियम से उन छात्रों को काफी फायदा होगा जो प्लस टू के मार्क्स के कारण अपना जेइइ एडवांस मे अच्छा रैंक प्राप्त नहीं कर पायें. प्लस टू में मार्क्स अच्छे नहीं आने के कारण ऑल इंडिया रैंक में ऐसे छात्र पिछड़ जाते है. उन्हें जेइइ एडवांस में अच्छे अंक आने के बावजूद उनका रैंक कम हो जाता है.
कोटइसका फायदा काफी संख्या में स्टूडेंट्स को होगा. इससे एक बार प्लस टू में मार्क्स कम हो जाने के बाद भी स्टूडेंट को मार्क्स बढ़ाने का मौका मिलेगा. यह राहत की बात है.
आर आर मीणा, रीजनल आॅफिसर, सीबीएसइ पटना \\B

आइसीएसइ शुरू कर रहा ऑन लाइन कॉपी इवैल्यूशन, 2016 से होगा लागू

- जल्द स्कूलों को भेजा जायेगा गाइड लाइन

संवाददाता, पटनासीबीएसइ के बाद अब अाइसीएसइ बोर्ड ने भी ऑन लाइन आंसर कॉपी का इवैल्यूएशन प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है. तैयारी पूरी हो चुकी है. 2016 में ली जाने वाली 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा के मूल्यांकन प्रक्रिया में इसे लागू किया जायेगा. इस संबंध में बोर्ड ने स्कूलों के लिए एक गाइड लाइन भी जारी किया है. गाइड लाइन जल्द ही स्कूलों को उलब्ध करवाया जायेगा. ज्ञात हो कि आइसीएसइ बोर्ड इस बार ऑन लाइन ही सारे विषयों का मूल्यांकन करने जा रहा है.
कनेक्ट होंगे एक दूसरे से स्कूल ऑन लाइन इवैल्यूएशन के लिए बोर्ड की आेर से एक वेबसाइड डेवलप किया जा रहा है. यह वेबसाइट इंटर्नल रूप में काम करेगा. इस वेबसाइट का एक पासवर्ड बनाया जायेगा. इस पासवर्ड को हर स्कूल ऑथोरिटी को दिया जायेगा. इससे सारे स्कूल मूल्यांकन के समय एक दूसरे स्कूल से जुड़ जायेंगे. इससे एक साथ पूरे देश में ऑन लाइन मूल्यांकन प्रक्रिया चलेगी.
कहां पर किस विषय की होगी कॉपी, हर स्कूल को होगा पता कौन से स्कूल की अांसर कॉपी कहां पर जांची जा रही है. आंसर काॅपी जांचने में किसी तरह की परेशानी तो टीचर्स या स्कूल को नहीं हो पा रहा है, इस पर बोर्ड की माॅनिटरिंग आसानी से किया जा सकेगा. बोर्ड सूत्रों की माने तो ऑन लाइन मूल्यांकन होन से कम समय में ही मूल्यांकन को पूरा किया जा सकेगा. इससे रिजल्ट भी जल्द निकल सकता है. 

डीपीएस में 2016-17 नामांकन का ले जा रहा आवेदन

संवाददाता, पटना

दिल्ली पब्लिक स्कूल पटना में अपने बच्चे का नामांकन करवाने के इच्छुक अभिभावकों के लिए अच्छी खबर है. स्कूल की ओर से 2016-17 सत्र के लिए नामांकन के लिए अावेदन लेना शुरू कर दिया गया है. आवेदन 2 नवंबर तक ऑन लाइन लिया जायेगा. नामांकन नर्सरी, क्लास वन और क्लास टू के लिए लिया जायेगा. इस संबंध में अधिक जानकारी स्कूल के वेबसाइट पर अक्तूबर के तीसरे सप्ताह में डाला जोयेगा. 

बापू की पांच सर्वश्रेष्ठ बातें बताअो, एक्सप्रेशन सीरीज में नाम होगा दर्ज

संवाददाता, पटना

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कौन सी सर्वश्रेष्ठ बातें है जिससे वो इतने महान व्यक्तित्व बने. बापू के पांच सर्वश्रेष्ठ बातें क्या है जो आप अपने जीवन में अमल कर रहे है. बापू के पांच बातें बताने वाले को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन एक्सप्रेशन सीरीज में नाम दर्ज करेगा. सीबीएसइ ने यह ऑफर क्लास वन से पांचवीं तक के स्टूडेंट्स को दिया है. पहली बार सीबीएसइ की ओर से महात्मा गांधी के जयंती समारोह को सेलिब्रेट करने का फैसला लिया गया है. 2 अक्तूबर को गांधी जी के जयंती समारोह पर सीबीएसइ द्वारा एक्सप्रेशन सीरिज आयोजित किया जा रहा है. - निबंध, कविता और चित्र बन सकता है माध्यम
महात्मा गांधी पर अपनी अभिव्यक्ति को स्टूडेंट्स तीन माध्यम से व्यक्त कर सकते है. बोर्ड ने इसके लिए निबंध, कविता और चित्र का माध्यम स्टूडेंट को दिया है. स्टूडेंट के अभिव्यक्ति भेजने के लिए लाइन खोल दी गयी है. सुबह 8 बजे से 2 अक्तूबर के रात 12 बजे तक स्टूडेंट ऑन लाइन भेज सकते है. मोबाइल पर भी भेजने का आप्सन बोर्ड ने स्टूडेंट को दिया है. - 36 बेस्ट अभिव्यक्ति को जायेगा चुना
महात्मा गांधी पर अभिव्यक्ति देने वाले हर केटेगरी में 36 अभिव्यक्ति को सीबीएसइ चुनेगा. हर केटेगरी से 36 बेस्ट इंट्री को सीबीएसइ की ओर से 25 सौ रूपये का इनाम भी मिलेगा. इसके अलावा सीबीएसइ सर्टिफिकट भी उपलब्ध करवायेगा. हर क्लास के लिए अलग-अलग रखा गया है एक्सप्रेशन सीरिज
क्लास वन से पांचवी तक - दस सर्वश्रेष्ठ बातें जो मैने महात्मा गांधी के जीवन और कार्याे से सीखीं, टॉपिक दिया गया है.
- स्टूडेंट अपनी अभिव्यक्ति 250 शब्दों में लिख कर ऑन लाइन भेजेंगे - मोबाइल पर भेजने के लिए 7065963925 नंबर दिया गया है
क्लास छठीं से आठवी तक - महात्मा गांधी एंव उनका शिक्षा दर्शन. टॉपिक दिया गया है
- स्टूडेंट अपनी अभिव्यक्ति पांच सौ शब्दों में लिख कर ऑन लाइन भेंजेंगे - मोबाइल पर भेजने के लिए 7065963926 नंबर दिया गया है
क्लास 9वीं से 12वीं तक - महात्मा गांधी : शांति एवं अहिंसा के प्रचारक. टॉपिक दिया गया है
- स्टूडेंट अपनी अभिव्यक्ति सात सौ शब्दों में लिख कर भेंजेंगे - मोबाइल पर भेजने के लिए 7065963927 नंबर दिया गया है

नये मेरिट लिस्ट पर ही इंटर टॉपर होंगे सम्मानित, बोर्ड ने शुरू की तैयारी

- अक्तूबर दूसरे सप्ताह में जारी होगा टॉपर लिस्ट

संवाददाता, पटनानये टॉपर लिस्ट पर ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति बिहार के टॉपर्स को सम्मानित करेगी. इसकी तैयारी समिति ने शुरू कर दिया है. अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में स्क्रूटनी का काम समाप्त हो जायेगा. इसके बाद अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में समिति टॉपर्स की मेरिट लिस्ट जारी करेगी. इसी मेरिट लिस्ट के आधार पर टाॅपर्स को सम्मानित किया जायेगा. ज्ञात हो कि इंटर साइंस का रिजल्ट 20 मई 2015 को घोषित किया गया था. लेकिन इस बार प्रोविजनल टॉपर लिस्ट समिति ने जारी किया था. क्योंकि स्क्रूटनी के बाद टॉपर लिस्ट में बदलाव होने की संभावना बोर्ड को थी.
- साइंस के साथ ऑट्स और काॅमर्स का भी जारी होगा टॉपर लिस्ट समिति साइंस के साथ ऑट्स और काॅमर्स का भी दुबारा टॉपर लिस्ट जारी करेगा. समिति के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि रिजल्ट के समय तो केवल साइंस का ही प्राेविजनल टॉपर लिस्ट जारी किया गया था. लेकिन स्क्रूटनी के बाद आर्ट्स और काॅमर्स में भी कुछ बदलाव हुआ है. ऐसे में अब तीनों ही स्ट्रीम साइंस, आटर्स और काॅमर्स के टॉपर लिस्ट को जारी किया जायेगा. तैयारी शुरू कर दी गयी है. स्क्रूटनी का काम लगभग पूरा हो चुका है. अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में टॉपर लिस्ट जारी कर दिया जायेगा.
- तीन दिसंबर को सम्मानित होंगे टॉपर बिहार बोर्ड की ओर से तीन दिसंबर को मैट्रिक और इंटर के टॉपर को हर साल सम्मानित किया जाता है. इसमें स्टेट टॉपर के साथ टाॅप टेन छात्र शामिल होते है. राजेंद्र प्रसाद के जन्म दिवस पर बोर्ड की ओर से यह सम्मान समारोह आयोजित की जाती है. टॉपर के अलावा जिला शिक्षा पदाधिकारी, प्राचार्य आदि को भी बोर्ड सम्मानित करता है. 

5 अक्तूबर से मैट्रिक का शुरू होगा रजिस्ट्रेशन

संवाददाता, पटना

मैट्रिक का रजिस्ट्रेशन 5 अक्तूबर से शुरू होगा. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से मैट्रिक के रजिस्ट्रेशन की तैयारी पूरी कर ली गयी है. समिति के अध्यक्ष लालकेशवर प्रसाद सिंह ने बताया कि तमाम जिला शिक्षा कार्यालय में चार अक्तूबर को रजिस्ट्रेशन फार्म भेज दिया जायेगा. स्कूलों में पांच अक्तूबर से मैट्रिक का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया जायेगा. पांच अक्तूबर से 29 अक्तूबर तक बिना विलंब शुल्क के रजिस्ट्रेशन होगा. 30 अक्तूबर से 7 नवंबर तक विलंब शुल्क के साथ छात्र अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते है. 

प्राइमरी टीचर जांच रहे सीबीएसइ के 10वीं व 12वीं की आंसर कॉपियां

- स्कूलों को सीबीएसइ नोटिस देने की कर रहा तैयारी

संवाददाता, पटनारिजल्ट आता है तो अपने मार्क्स को लेकर स्टूडेंट परेशान होते है. स्क्रूटनी के अप्लाई करते है. स्क्रूटनी में पता चलता है कि जो अांसर सही लिखा, उसका भी मार्क्स नहीं दिया गया. फिर जाकर आंसर कॉपी में एक्स्ट्रा मार्क्स मिलते है. इसके लिए स्टूडेंट को पैसे भी खर्च करने पड़ते है. सीबीएसइ पटना रीजनल ऑफिस में हर साल ऐसे मामले आते है. जब इसकी जांच की गयी तो पता चला के काफी संख्या में 10वीं और 12वीं के आंसर कॉपी की जांच प्राइमरी टीचर और एडहॉक टीचर्स के द्वारा करवायी जाती है. सीबीएसइ अब उन स्कूलों काे नोटिस देने की तैयारी कर रहा है जो प्राइमरी और एडहॉक टीचर्स को इवैल्यूशन में हेड एग्जामिनर और एग्जामिनर के रूप में नाम बोर्ड के पास भेजते है.
आरटीआइ में मांगी गयी जानकारी से बोर्ड काे चला पता सीबीएसइ पटना जोन के अंतर्गत कई स्कूलों में यह काम कई सालों से चल रहा है. लेकिन सीबीएसइ के सामने अभी एक आरटीआइ के तहत मांगी गयी जानकारी के बाद सामने आया. आरटीअाइ एक्टिविस्ट निखिल कुमार ने बताया कि डीएवी समेत कई स्कूल इसमें शामिल है. जहां पर प्राइमरी और एडहॉक टीचर को इवैल्यूएशन में लगाया जाता है. इन टीचर्स का कोई डाटा भी सीबीएसइ के पास नहीं होता है. 2005 से ही यह चल रहा है. कई बार तो प्राइमरी टीचर्स को हेड एग्जामिनर बना दिया गया है. ज्ञात हो कि सीबीएसइ ने पूरे बिहार से लगभग तीन सौ टीचर्स को जांच के घेरे में डाला है.
2011 में रिजल्ट हुआ था खराब रिजल्ट की भारी गड़बड़ी 2011 में देखने को मिला था. काफी संख्या में प्लस टू के स्टूडेंट का रिजल्ट खराब हो गया था. कई स्टूडेंट तो ऐसे थे जो आइआइटी तो कंपीट कर गये थे, लेकिन प्लस टू की परीक्षा में फेल हो गये थे. उस समय तात्कालिक पटना रीजनल ऑफिसर एमवी प्रसादा राव ने कहा था कि स्कूल द्वारा बोर्ड को ऐसे लिस्ट प्रोवाइड करवाये जाते है, जिसमें टीचर को पीजीटी बताया जाता है. इसके बाद सीबीएसइ ने जांच भी किया था. कई टीचर पकड़ में भी आयें थे.
सब्जेक्ट वाइज बनता है एग्जामिनेशन सेंटर सीबीएसइ सब्जेक्ट वाइज सेंटर बनाता है. सेंटर के लिए हेड एग्जामिनर और एक एडिशनल हेड एग्जामिनर रखा जाता है. इनका काम आंसर कॉपी की मार्किंग की माॅनिटरिंग करना होता है. इसके लिए सीबीएसइ ने कुछ रूल्स बना रखे है. उसके अनुसार 10वीं के हेड एग्जामिनर उसे ही बनाया जा सकता है जिसने टीजीटी कोर्स कर रखा हो. जिसे कम से कम पांच साल की टीचिंग का एक्सपेरियंस हो. वहीं प्लस टू के हेड एग्जामिनर उसे ही बनाया जा सकता है जिसने पीजीटी कोर्स कर रखा हो. साथ ही जिसे पांच साल की टीचिंग का एक्सपेरियंस हो.
क्वालिफिकेशन ऑफ एग्जामिनर - टीचर जिस सब्जेक्ट में पोस्ट ग्रेजुएट है, उसी में सब्जेक्ट के एग्जामिनर बनेंगे
- तीन साल का सेंकेंडरी, सीनियर सेंकेडरी और हायर एजुकेशन क्लास में पढ़ाने का अनुभव हो - एक टीचर को एक से अधिक सब्जेक्ट का एग्जामिनर नहीं बनाया जा सकता
- ऐसे किसी भी टीचर को एग्जामिनर नहीं बनाया जा सकता जिस पर किसी प्रकार का आरोप स्टूडेंट ने लगाया हो
कोटआंसर कॉपी मूल्यांकन में सीबीएसइ के कई रूल्स है. रूल्स के अनुसार ही हर एग्जामिनर सेंटर पर हेड एग्जामिनर और एग्जामिनर को नियुक्त किया जाता है. बोर्ड परीक्षा समाप्त होने के पहले ही मार्किंग स्कीम के साथ अन्य बातों की जानकारी सीबीएसइ स्कूलों को भी भेजता है.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया \\B

Saturday, September 26, 2015

एफिलिएशन जांच कर ही 9वीं और 11वीं में कराएं बच्चों का रजिस्ट्रेशन

- मान्यता खत्म होने के बावजूद एडमिशन लेने वाले स्कूलों के करीब पांच हजार बच्चों का फंस सकता है भविष्य

- सीबीएसइ ने मान्यता समाप्त स्कूलों का रजिस्ट्रेशन लेने से किया इंकारसंवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन (सीबीएसइ) ने उन सभी स्कूलों को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया से बाहर कर दिया है जिनका एफिलिएशन मई में खत्म कर दिया गया था. इन तमाम स्कूलों में 9वीं और 11वीं का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जायेगा. लेकिन पटना में कई स्कूल ऐसे है जो मान्यता नहीं हाेने के बावजूद 9वीं और 11वीं में नामांकन ले लिया था. अब ये स्कूल चाहते है के उन्हें रजिस्ट्रेशन की परमिशन मिले, लेकिन सीबीएसइ इसको लेकर साफ मना कर चुका है. ऐसे में स्कूल की गलती की सजा उन स्टूडेंट को मिलेगा. पांच हजार स्टूडेंटस का फंस जायेगा भविष्य
सीबीएसइ ने मई 2015 को बिहार के 14 स्कूलों का एफिलिएशन समाप्त कर दिया था. एफिलिएशन समाप्त करने के साथ सीबीएसइ ने स्कूलों को 9वीं और 11वीं में नामांकन नहीं लेने का आदेश भी दिया था. लेकिन कई स्कूलों ने नामांकन ले लिया. सीबीएसइ पटना की माने तो लगभग पांच हजार स्टूडेंट है जिनका इस बार रजिस्ट्रेशन नहीं हो पायेगा. क्योंकि ये सारे स्टूडेंट उन स्कूलों में पढ़ रहे है जिनकी मान्यता सीबीएसइ ने समाप्त कर दिया है. डीएवी खगौल और डीएवी बीएसइबी भी है शामिल
डीएवी खगौल का मान्यता का डयूरेशन मार्च 2014 में ही समाप्त हो गया था. इसके बाद अभी तक सीबीएसइ की ओर से स्कूल की जांच ही चल रही है. ऐसे में सीबीएसइ ने स्कूल को आदेश दिया था कि जब तक जांच चल रही है, स्कूल में कोई नया एडमिशन नहीं लिया जायेगा. लेकिन स्कूल में एडमिशन का दौर चालू रखा. अब स्कूल के 11वीं क्लास के 171 और 9वीं क्लास के 170 स्टूडेंट का भविष्य अंधेर में होने जा रहा है. क्योंकि सीबीएसइ ने रजिस्ट्रेशन करने से मना कर दिया है. कुछ यहीं स्थित डीएवी बीएसइबी के साथ भी हुआ है. पटना रीजनल ऑफिस की ओर से डीएवी बीएसइबी के 11वीं के स्टूडेंट का रजिस्ट्रेशन करने की अनुमति नहीं दिया है. पटना सीबीएसइ का लगा रहे चक्कर
रजिस्ट्रेशन की अनुमति मिल जायें, इसके लिए रजिस्ट्रेशन की तिथि तय होने के साथ ही स्कूल प्रशासन सीबीएसइ पटना रीजनल ऑफिस का चक्कर भी लगा रहे है. लेकिन उन्हें वहां से खाली हाथ वापस जाना पड़ रहा है. सीबीएसइ सूत्रो की माने तो स्कूल वाले रजिस्ट्रेशन का परमिशन लेने को आ रहे है, लेकिन उन्हें परमिशन नहीं दिया जा रहा है. ऐसे में अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत है. फर्जी स्कूल से बचने के लिए ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन
फर्जी स्कूलों से सीबीएसइ बच सके, इसके लिए इस बार रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया ऑन लाइन ही की जा रही है. आॅन लाइन रजिस्ट्रेशन में वही स्कूल के स्टूडेंटस फॉर्म भर पायेंगे, जब रजिस्ट्रेशन के समय स्कूल का एफिलिएशन नंबर डाला जायेगा. इसके लिए सीबीएसइ ने रजिस्ट्रेशन टाइट कर दिया है. इसे पढ़ ले अगर स्कूल में अपने बच्चे का रजिस्ट्रेशन करवाने जा रहे है
- स्कूल के एफिलिएशन नंबर की जांच सीबीएसइ के एफिलिएशन वेबसाइट पर जाकर कर लें- स्कूल की बातों को नजरअंदाज कर सीबीएसइ पटना रीजनल ऑफिस से संपर्क करें
- इस बार रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑन लाइन है, ऑन लाइन स्कूल का एफिलिएशन नंबर जरूर जांच लें - जिस दिन स्कूल की ओर से रजिस्ट्रेशन फी जमा करने को कहा जायें, उसका स्लिप लेना ना भूले
- जिस स्कूल में आपका बच्चा पढ़ रहा है, उसी स्कूल से रजिस्ट्रेशन करवायेंये स्कूल है डिस-एफिलिएटेड
- एवीएन इंगलिश स्कूल, राजीव नगर- डीएवी बीएसइबी, पुनाईचक
- डेनोबिली मिशन स्कूल, पहाड़ी - दून पब्लिक स्कूल, इंदिरा नगर
- पटना मुसलिम स्कूल, बीएम दास रोड- शेरवुड स्कूल, राजीव नगर
- टी रजा हाई स्कूल, फुलवारीशरीफनोट - इन स्कूलों की लिस्ट सीबीएसइ के वेबसाइट पर डाला हुआ है

कोटजिस भी स्कूल की मान्यता खत्म मई में खत्म कर दी गयी थी. उन स्कूलों को रजिस्ट्रेशन से बाहर रखा गया है. सीबीएसइ ने मान्यता खत्म करने के साथ ही यह कहा था कि इन स्कूलों में 9वीं और 11वीं में एडमिशन नहीं होंगे. ऐसे किसी भी स्कूल को रजिस्ट्रेशन की अनुमति नहीं दी जायेगी.
अार आर मीणा, रीजनल ऑफिसर, पटना जोन
सीबीएसइ की ओर से शो कॉज नोटिस आया था. इसका जबाव सीबीएसइ को भेज दिया गया है. अभी स्क्रूटनी चल रही है. जांच के बाद ही एडमिशन किया जायेगा. रजिस्ट्रेशन के लिए सीबीएसइ में कोई मना नहीं किया है.रामाशीष राय, प्रिंसिपल, डीएवी, खगौल\\B

अक्टूबर से नवंबर तक स्कूलों में 15 दिनों की छुट्टी

- फेस्टिवल के अलावा बिहार विधानसभा चुनाव का होगा फायदा

संवाददाता, पटनाइस बार स्कूल के स्टूडेंट को छुट्टी का भरपूर मजा मिलने जा रहा है. फेस्टिवल के साथ बिहार विधानसभा चुनाव की वजह से छुट्टी की संख्या बढ़ गयी है. लेकिन यह छुट्टी लगातार नहीं होगा, इस कारण आप कहीं वैकेशन पर तो नहीं जा पायेंगे, लेकिन छुट्टी का पूरा मजा आप ले सकते है. कई स्कूल दुर्गापूजा से लेकर पटना में चुनाव होने तक लगातार बंद रखेंगे, वहीं कई स्कूल दशहरे की छुट्टी के बाद एक या दो दिन स्कूल को खोलेंगे.
रविवार का भी मिलेगा फायदा दशहरा से लेकर चुनाव की तिथि के बीच शनिवार और रविवार हो रहा है. इसका भी फायदा इस बार स्टूडेंट को मिल जायेगा. 22 अक्तूबर को विजयदशमी है और 23 अक्तूबर को एक दिन स्कूल बंद किया जायेगा. इसके बाद 24 और 25 अक्तूबर को शनिवार और रविवार होने से अधिकांश स्कूल बंद रहेंगे. 28 अक्तूबर को पटना में चुनाव होने के बाद 31 अक्तूबर और 1 नवंबर को शनिवार और रविवार को फिर फायदा होगा.
दीपावली से छह तक छह दिनों की छुट्टी अधिकांश स्कूल दीपावली से लेकर छठ तक बंद रखते है. छह दिनों के इस छुट्टी में कई स्कूलों ने एक दो दिनों के लिए स्कूल खोलने का प्लानिंग तो किया है, लेकिन इस बीच में भी शनिवार और रविवार का फायदा स्टूडेंट को मिलेगा. शनिवार आैर रविवार होने के कारण दीपावली से छठ के बीच भी स्कूल बंद ही रहेंगे.
ऐसे बंद होगा स्कूल दशहरा की छुट्टी - 17 से 22 अक्तूबर
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर बंद - 26 से लेकर 29 अक्तूबर शनिवार और रविवार की छुट्टी - 24 और 25 अक्तूबर, 31 अक्तूबर और 1 नवंबर, 14 और 15 नवंबर
दीपावली की छुट्टी - 11 नवंबर छठ की छुटटी - 16 और 17 नवंबर
कोटइस बार बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर स्कूल के अलग से भी बंद करना होगा. इसी बीच सारे फेस्टिवल भी है. चुनाव में स्कूल के बस को चुनाव प्रक्रिया में लगाया जाता है. इस कारण स्कूल को बंद करना पड़ेगा. दीपावली और छठ के बीच एक दो दिनो के लिए स्कूल को खोला जा सकता है.
राजीव रंजन सिन्हा, प्रिंसिपल, वाल्डविन एकेडमी \\B

लेडी पुलिस की कमी से नहीं चल पा रहा रोमियो वैन

सारे कामों के निपटारा को लेकर महिला थाना को चाहिए 70 लेडी पुलिस

संवाददाता, पटनाएक समय था जब पटना के सड़क पर किसी लड़की को छेड़ना लड़कों के लिए काफी भारी पड़ता था. कॉलेज कैंपस हो या सड़क हो, अगर लड़की की ओर लड़के देखते नजर आ गया तो उसकी शामत है. क्योंकि हर लड़कों पर रोमियो वैन की नजर होती थी. रोमियो वैन कब किसे रंगे हाथ पकड़ ले, इसका डर हर लंफगे को रहता था. लेकिन अब सीन बदल चुका है. रोमियो वैन के बंद हो जाने से फिर एक बार लंफगें हरकतें करने लगे है. महिला थाना हर मामले का निपटारा करना चाहती है. लेकिन लेडी कांस्टेबल की कमी होने से सारे कामों का निपटारा नहीं हो पाता है. सूत्रों की माने तो शहर में महिलाओं की पूरी सुरक्षा के लिए 70 के लगभग लेडी कांस्टेबल हो तो काफी हद तक छेड़खानी आदि जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है.
22 लेडी कांस्टेबल कर रही कॉलेज और स्कूल की सुरक्षा महिला थाना के पास लेडी कांस्टेबल की कमी चल रही है. गर्ल्स कॉलेज और स्कूलों की सुरक्षा को लेकर 22 लेडी कांस्टेबल को कैंपस में लगाया गया है. इसके अलावा दिन भर के पेट्रोलिंग के लिए भी दस के लगभग लेडी कांस्टेबल की ड़्यूटी लगायी गयी है. इसके अलावा बांकी दूसरे कामों के लिए लेडी कांस्टेबल की जरूरत है. अगर
मार्केट में भी लेडी कांस्टेबल की है जरूरत जिन मार्केट में महिलाओं और गर्ल्स का आना जाना होता है. लेडिज स्पेशल मार्केट में भी लेडी कांस्टेबल लगाने की बात हुई थी. जब किसी कॉलेज में घटना घटती है तो आस पास के मार्केट में भी पेट्रोलिंग की जाती है. पटना मार्केट, खेतान मार्केट आदि जगहों पर हर दिन लड़कियों का आना जाना लगा रहता है. यहां पर छेड़खानी की भी घटनाएं होती है.
ये सारी योजनाएं गयी थी बनायी - लंफगों को पकड़ने के लिए रोमियो वैन
- महिला थाने तक लड़कियां आयें, उसके लिए थाने का नंबर जगह-जगह डिसप्ले करना - स्कूल और कॉलेज के खुलने और छुट्टी के समय लेडी कांस्ट्रेबल
- हर काॅलेज और स्कूलों में लेडी कांस्टेबल की नियुक्ति - स्कूल और कॉलेज में अवेयरनेस प्रोग्राम
कोटकुछ कांस्टेबल को तो कॉलेज और स्कूलों की सुरक्षा में लगाया गया है. रोमियो वैन तो अभी नहीं चल रहा है, लेकिन पैट्रोलिंग का काम हम करते है. कॉलेज और स्कूल एरिया में लेडी पुलिस कांस्टेबल को लगाया जाता है. अगर थोड़ी और लेडी पुलिस हो तो हम और अच्छे से काम कर पायेंगे.
नीलमणि, अध्यक्ष, पटना महिला थाना \\B

उम्र सीमा में फंस रहे हर स्कूल से दस स्टूडेंट्स

- सीबीएसइ के 9वीं में रजिस्ट्रेशन की उम्र सीमा फिक्स कर देने अभिभावक हो रहे परेशान

संवाददाता, पटनासेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) के एक नियम ने अभिभावकों के साथ स्कूल को भी परेशान कर रखा है. रजिस्ट्रेशन के लिए वहीं स्टूडेंट इलिजिबल होंगे, जिनकी उम्र एक अगस्त 2015 को 13 साल हो चुका हो. अब इस नियम में कौन स्टूडेंट आ रहे है और कौन स्टूडेंट नहीं आ रहे है, इसकी जानकारी सीबीएसइ ने ना तो स्कूल को दिया है और ना ही अभिभावकों के लिए कोई गाइड लाइन ही जारी किया है. अब स्कूलों की स्थित यह हो रही है कि हर दस स्टूडेंट की उम्र सीमा रजिस्ट्रेशन के लिए पूरी नहीं कर पा रहा है.
अचानक से किया गया नियम को लागू उम्र सीमा के इस नियम को सीबीएसइ ने सितंबर में लागू कर दिया है. अक्तूबर से तमाम स्कूलों में रजिस्ट्रेशन शुरू किया जायेगा. अचानक से इस नियम के होने से परेशानी बढ़ गयी है. ज्ञात हो कि 10वीं बोर्ड की परीक्षा में स्टूडेंट की उम्र चौदह साल की हो, यह नियम पहले से ही लागू है. लेकिन रजिस्ट्रेशन के पहले 13 साल की उम्र स्टूडेंट पूरी करता हो, यह पहली बार लागू किया गया है.
दो या तीन महीने का भी नहीं मिलेगा रिलैक्सेशन सीबीएसइ सूत्रों की माने तो जिन स्टूडेट की उम्र एक अगस्त 2015 को 13 साल नहीं हो पा रहा है. स्टूडेंट की उम्र में दो से पांच महीने का अंतर पाया जा रहा है तो ऐसे में उन स्टूडेंट को कोई रिलैक्सेशन नहीं दिया जायेगा. सूत्रों की माने तो एक महीने का ही केवल रिलैक्सेशन स्टूडेंट को मिलेगा. ऐसे में सैकड़ों स्टूडेंट बोर्ड परीक्षा से भी वंचित हो जायेंगे.
अभिभावक की परेशानीअभी एक सप्ताह पहले स्कूल से सूचना मिली है कि रजिस्ट्रेशन में उम्र सीमा तय कर दी गयी है. इस कारण बच्चे का फ्रेश रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. हमने क्लास वन में एडमिशन के समय डेट ऑफ बर्थ का सर्टिफिकेट जमा किया था. लेकिन उसमें अभी पांच महीने का अंतर आ गया है. अब मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें.
रोहित कुमार, अभिभावक मेरी बेटी का एक अगस्त 2015 को 12 साल तीन महीने हो रहा है. ऐसे में छह महीने का डयूरेशन को कैसे सही किया जायेगा. ऐसे में हमारी परेशानी बहुत बढ़ गयी है. सीबीएसइ को पहले ही बताया चाहिए था.
पल्लवी मिश्रा, अभिभावककोट
इसी बार के रजिस्ट्रेशन मे इस तरह का नियम बनाया गया है. ऐसे में स्टूडेंट और अभिभावक के साथ स्कूलों की भी परेशानी बढ़ गयी है. उम्र वाले इस नियम के कारण कई स्टूडेंट का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पायेगा. राजीव रंजन सिन्हा, प्रिंसिपल, वाल्डविन एकेडमी 

इंटर का रजिस्ट्रेशन 29 से, देने होंगे 350 रूपये

संवाददाता, पटना

इंटर के रजिस्ट्रेशन के लिए इस बार कोई शुल्क मे बढ़ोतरी नहीं किया गया है. पिछले साल की तरह ही इस बार सामान्य केटेगरी के छात्रों को 350 रूपये ही रजिस्ट्रेशन चार्ज के रूप में देना होगा. रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होगा. 17 अक्तूबर तक छात्र को कोई विलंब शुल्क नहीं लगेगा. 17 से 30 अक्तूबर तक रजिस्ट्रेशन करवाने वाले छात्रों को 450 सौ रूपया देना होगा. विलंब शुल्क के रूप में 100 रूपये फाइन के रूप में देना हाेगा. इसके अलावा दूसरे बोर्ड यानी सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड से मैट्रिक पास छात्र को अनुमति शुल्क के रूप में तीन सौ रूपये अलग से देना होगा. बोर्ड सचिव हरिहर नाथ झा ने बताया कि हर स्कूल और कॉलेज को शुल्क जमा करने के लिए इलाहाबाद बैंक का खाता दिया गया है. शुल्क के पैसे बैंक में ही जमा करना है. 

मैथेमेटिक्स के सेकेंड टर्म का सिलेबस सीबीएसइ ने किया चेंज

संवाददाता, पटना

समेटिव असेसमेंट वन यानी फर्स्ट टर्म अभी चल रहा है. 9वीं और 10वीं के फर्स्ट टर्म में अप्रैल से सितंबर तक के सिलेबस से ही प्रशन पूछे जाते है. इसके बाद अक्तूबर से मार्च तक के सिलेबस में अलग टॉपिक स्टूडेंट को पढ़ना पड़ता है. सेकेंड टर्म यानी समेटिव असेसमेंट टू के लिए सीबीएसइ ने मैथेमेटिक्स विषय के सिलेबस में चेंज किया है. फिलहाल यह परिवर्तन 9वीं क्लास के लिए ही किया गया है. 2015-16 में मार्च में होने वाले 9वीं के फाइनल परीक्षा में बोर्ड द्वारा बताये गये सिलेबस से ही प्रश्न पूछे जायेंगे. बोर्ड के अनुसार अल्ज्रेबा, ज्योमेट्री, मैनसूरेशन से फर्स्ट टर्म के सिलेबस को ही रखा गया है. वहीं स्टैटिक्स, प्रोवैबिलटी दो चैप्टर को नया जोड़ा गया है. कुल 90 अंकों की परीक्षा में अल्ज्रेबा से 10 अंक, ज्योमेट्री से 38 अंक, मैनसूरेशन से 22 अंक, स्टैटिक्स से 12 अंक और प्रोवैबिलटी से 8 अंक के प्रश्न पूछे जायेंगे. इस संबंध में सीबीएसइ की एकेडेमिक और ट्रेनिंग इंचार्ज डीटी सुदर्शन राव ने बताया कि मैथेमेटिक्स के इस बदलाव को मार्च 2016 में होने वाली 9वीं के फाइनल परीक्षा में लागू किया जायेगा. इस संबंध में किसी भी तरह की जानकारी 011-23216220 पर लिया जा सकता है. 

पहले इलाज, फिर न्याय मिलता महिला थाना में

- पीड़िता को फर्स्ट एड की सुविधा देता महिला थाना

संवाददाता, पटनाकेस वन - पार्वती देवी (बदला हुआ नाम) का अपने पति के साथ अक्सर लड़ाई होती थी. घरेलू हिंसा की शिकार पार्वती देवी के साथ एक दिन उसके पति ने काफी मारपीट किया. जान बचाने को पार्वती देवी महिला थाना पहुंची. उसके सिर से खून निकल रहा था. महिला थाना प्रभारी की ओर से तुरंत उसे इलाज के लिए पीएमसीएच भेजा गया. मलहम पट्टी होने के बाद ही पार्वती देवी का मामला थाने में दर्ज किया गया.
केस टू - कंकड़बाग की रहने वाली सोनी देवी (बदला हुआ नाम) अचानक से एक दिन महिला थाना पहुंच गयी. उसके दांये हाथ के कलाई पर किसी ने चाकू से वार किया था. इससे काफी खून निकल रहा था. पूछने पर पता चला कि मामला जमीन विवाद का था. सोनी देवी को तुरंत हास्पीटल ले जाया गया. उसका वहां पर इलाज हुआ. घटना रात के 10 बजे की थी. इलाज होने के दूसरे दिन सोनी देवी से आवेदन लिया गया अौर फिर उसे कंकड़बाग थाना रेफर किया गया. अभी तक हम महिला थाना के बारे में बस इतना जानते थे कि वहां पर पीड़िता से आवेदन लिये जाते है. उस आवेदन के अनुसार काउंसिलिंग होती है. पीड़िता को न्याय दिलाने की कोशिश की जाती है. लेकिन अब महिला थाना में पीड़िता को न्याय मिलने के साथ उनके इलाज की व्यवस्था भी की जाती है. अगर कोई पीड़िता घायल रूप में महिला थाना आता है. पीड़िता को कहीं चोट आया होता है. तो पहले उसके इलाज की व्यवस्था थाने की ओर से की जाती है. इसके बाद ही उससे आवेदन लिये जाते है.
- इलाज के साथ रखती है सबूत जो भी पीड़ता का इलाज महिला थाना की ओर से किया जाता है. उसके मेडिकल रिपोर्ट को भी थाना अपने पास ही रखता है. इससे पीड़िता को न्याय मिलने मेंं भी मदद मिलती है. थाने की ओर से जो भी इलाज होता है, उसका पूरा सबूत भी थाना अपने पास रखती है. इसके लिए पीड़ता का पूरा बयान भी थाना अपने पास रखती है.
कोटहां यह सही है कि महिला थाना में पीड़िता आकर आवेदन डालती है. लेकिन मानवता भी तो कोई चीज है. कोई भी महिला हमारे पास बहुत ही उम्मीद के साथ आती है. ऐसे में हमारी थोड़ी सी मदद से उसका सही इलाज हो जाता है. कई पीड़िता काफी घायल रूप में हमारे पास आती है. ऐसे में उसका इलाज होना पहली प्राथमिकता होती है.
नीलमणि, अध्यक्ष, महिला थाना पटना\\B

अप्रैल में लागू होगा नयी शिक्षा नीति : छठी से 12वीं तक का सिलेबस जायेगा बदल

- सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के निर्देश पर एनसीइआरटी तैयार करेगा सिलेबस

रिंकू झा, पटनानये सिलेबस के साथ नये कोर्स को जल्द ही मंजूरी मिल जायेगी. इसके साथ अप्रैल 2016 सत्र से हर क्लास में नये सिलेबस को लागू कर दिया जायेगा. कोर्स को लागू करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है. नये सिलेबस में एक्टिविटी को फोकस किया जायें या पुराने स्टाइल में ही पढ़ाई को रखा जायें, इसको लेकर स्कूल के प्रिंसिपल से राय मांगी गयी है. मिनिस्ट्री ऑफ हियूमन रिसाेर्स डेवलपमेंट की तरफ से फीडबैक मांगा गया है. हर प्रिंसिपल को अपना फीडबैक पांच अक्तूबर तक ऑन लाइन भेज देना है.
दो केटेगरी में बांटा गया है क्वेशचनायर प्रिंसिपल से दो केटेगरी में क्वेशचनायर दिया गया है. एक केटेगरी में क्लास छठी से आठवीं तक को शामिल किया गया है. वहीं 9वीं और 10वीं के लिए क्वेशचनायर को अलग किया गया है. इसके अलावा 11वीं और 12वीं क्लास के भी तीन तरह के क्वश्चनायर बनाया गया है. कुल 28 क्वेश्चनायर पर अपनी राय प्रिसिपल को देनी होगी.
नये सिलेबस को तैयार करेगा एनसीइआरटी बोर्ड द्वारा सिलेबस तैयार करने के बाद इसे किताब का रूप एनसीइआरटी द्वारा दिया जायेगा. बोर्ड सूत्रों की माने तो अक्तूबर अंत तक बोर्ड द्वारा सिलेबस को अंतिम रूप दे देना है. इसके बाद नवंबर से एनसीइआरटी द्वारा नये सिलेबस पर किताबें प्रिंट किया जायेगा. इस बार मार्केट में मार्च में सारे किताबें को लाया जायेगा.
1984 के बाद होगा बदलावशिक्षा नीति में इस बड़े पैमाने पर बदलाव लगभग 20 सालों के बाद होने जा रहा है. सिलेबस में थोड़ बहुत बदलाव होे रहे है. लेकिन इस बार हर विषय में बड़े पैमाने पर बदलाव होगा. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो इससे पहले 1984 में शिक्षा नीति में बदलाव किया गया था.
ये सारे फीडबैक मांगे गये है- स्कूल में इंस्ट्रक्शन का माध्यम हिंदी हो या इंगलिश में हो
- म्यूजिक, ड्रांस, ड्रामा आदि के क्लासेज में किस भाषा का उपयोग करें - साइंस,सोशल साइंस, मैथेमेटिक्स में एक्टिविटी को फोकस दिया जाना चाहिए
- स्कूल में सेल्फ स्टडी के लिए अलग से क्लास होना चाहिए - हर विषय के लिए ग्रुप डिस्कशन करवाया जायें
- स्कूल लाइब्रेरी में विषय के अनुसार रिफ्रेंस बुक होना चाहिए - सिलेबस में स्टोरी बुक इंगलिश, हिन्दी या किसी और भाषा में होना चाहिए
- लाइब्रेरी में न्यूज पेपर, मैग्जींस आदि किस भाषा में होना चाहिए - इंगलिश, साइंस, सोशल साइंस, सोशियोलॉजी, पोलिटिकल साइंस, जोगरफी आदि विषय में बुक के अलावा चार्ट, मॉडल, ऑडियो और वीडियो को सिलेबस में शामिल किया जायें
- छठी से आठवी क्लास तक के विषयों में डिजिटल टेक्नोलॉजी बेस्ड सिलेबस हो - आंसर काॅपी इवैल्यूएशन में को-काॅलिकुलम को शामिल किया जायें
- स्कूल कैंपस में सबसे अधिक सेफ्टी की जरूरत कहां पर हैं- स्कूल में फैसिलिटी के तौर पर क्या सब होना चाहिए
- स्टूडेंट के सेफ्टी पर अलग से सिलेबस होना चाहिए टीचर्स के लिए होगा यह गाइड लाइन
- टीचर्स को प्राइवेट ट्यूशन बंद करना होगा - स्कूल खत्म होने के बाद टीचर्स द्वारा कमजोर स्टूडेंट के लिए स्पेशल क्लास चलाये जायेंगे
- कठिन टॉपिक पर टीचर्स को अधिक समय देना होगा - स्टूडेंट और टीचर्स के बीच रिस्पेक्ट की भावना होना चाहिए
कोटअप्रैल 2016 में नयी शिक्षा नीति को लागू कर दिया जायेगा. इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है. सिलेबस को लेकर हर किसी से फीडबैक लिया जा रहा है. अभी प्रिसिपल से मांगा गया है. इससे पहले स्टूडेंट से भी फीडबैक लिया गया था.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया \\B

Wednesday, September 23, 2015

उड़ान प्रोजेक्ट का निकला रिजल्ट, एक हजार छात्राएं हुई सेलेक्ट

संवाददाता, पटना

सीबीएसइ के उड़ान प्रोजेक्ट 2015-17 का रिजल्ट घोषित कर दिया गया है. देश भर से एक हजार छात्राओं को इस प्रोजेक्ट के तरह सेलेक्ट किया गया है. छात्राएं अपना रिजल्ट सीबीएसइ के वेबसाइट पर देख सकते है. इसके लिए छात्राओं को अपना एप्लीकेशन नंबर, वेरिफकेशन कोड डाल कर रिजल्ट देख सकती है. ज्ञात हो के सीबीएसइ ने उड़ान प्रोजेक्ट के तहत देश भर से एक हजार छात्राओं को चुनता है. इसमें 11वीं पास छात्राएं ही सेलेक्ट होती है. जो छात्राएं इसमें सेलेक्ट हुई है, उन्हें सीबीएसइ की ओर से ऑनलाइन इंजीनियरिंग की तैयारी करवायेगा. 

क्लिंटन ने जिसे लिया गोद, उसके पास स्कूल जाने के पैसे भी नहीं

- जमसौत मुसहरी की चार साल की रानी को अमेरीका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने लिया था गोद

संवाददाता, पटनाजब रानी एक साल की थी तभी उसका भविष्य लिखा जा रहा था. माता पिता के साथ आस पास के लोग भी उसके भविष्य को लेकर निश्चिंत हो चुके थे. हो भी क्यूं नहीं, अमेरीका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने जो रानी गोद लिया था. कहा था कि इस बच्ची के पढ़ाई लिखाइ के साथ सारा खर्च बिल क्लिंटन फाउंडेशन के द्वारा किया जायेगा. अब इस घटना को चार साल होने जा रहा है, लेकिन ना तो बिल क्लिंटन ने दुबारा रानी का हाल चाल लिया और ना ही कोई सुविधा अभी तक उसे दी गयी है. जमसौत मुसहरी की रहने वाली रानी स्कूल जाने के लायक हो गयी है, लेकिन उसके माता पिता के पास इतने पैसे नहीं जो उसे स्कूल में पढ़ा सके.
- बस फोटो खिचवाया, दिया कुछ नहीं चार भाई बहनों में सबसे छोटी रानी को लेकर आस पास के लोग बातें बनाने लगे है. मां रूकनी देवी ने बताया कि जब विदेशी बाबू आयें थे तो मै खेत में काम कर रही थी. वहां से मुझे बुलाया गया था. जब मै आयी तो उन्होंने अंग्रेजी में कुछ कहा. मुझे समझ में नहीं आया. उनके साथ जो आयें थे, उन्हाेंने बताया कि विदेशी साहब रानी को गोद लेना चाह रहे है. फिर विदेशी साहब ने रानी के साथ फोटो भी खिंचवाया. मेरे घर के अंदर भी आकर उन्हाेने फोटो खिंचवायें. सभी चले गये. कुछ दिया नहीं लेकिन कहा कि इस बच्ची के भविष्य का सारा खर्च वो ही उठायेंगे. उसके बाद सब चले गये.
- अभी भी है गांव को क्लिंटन का इंतजारदो सौ की आवादी वाले इस गांव में लाेगों को अभी भी क्लिंटन का इंतजार है. मजदूरी का काम कर रहे अधिकांश लोगो का कहना है कि पेपर में फोटो खिंचवाने के लिए लोग हमारे पास तो आते है, लेकिन कोई मदद नहीं करता है. पांचवीं तक के एक सरकारी स्कूल ही मात्र है. एक स्वास्थ्य केंद्र है, वहां पर कभी भी दवा नहीं मिलता है. ज्ञात हो कि अमेरीका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने इस गांव में एक हेल्थ रिसर्च सेंटर खाेलने की भी घोषणा की गयी थी, लेकिन हेल्थ रिसर्च सेंटर तो दूर, गांव में हेल्थ के नाम पर कोई सुविधा नहीं है.
कोटइस मुसहरी गांव में मै पिछले 21 साल से काम कर रही हूं. दो सौ लोगों के आबादी वाले इस गांव में इंदिरा आवास के माध्यम से मकान बनवाया गया है. इसके अलावा शौचालय बनाया गया. इसके अलावा सरकारी स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र आदि भी चल रहे है. क्लिंटन द्वारा घोषणा की गयी थी. मैने भी सुना था, लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया जा सका है.
पद्म श्री सुधा वर्गीज, सोशल एक्टिविस्ट

स्कूलों की मनमानी रोकने को बना एजुकेशन ट्रिब्यूनल, शिकायत होगी अब दूर

- 26 साल के बाद बिहार में बना एजुकेशन ट्रिब्यूनल

संवाददाता, पटनास्कूलों की मनमानी रोकने के लिए देश भर में एजुकेशन ट्रिब्यूनल गठन करने को कहा गया था. 1989 में आये एक फैसले के बाद कई स्टेट गवर्नमेंट ने इसका गठन किया था. लेकिन बिहार में अब जाकर एजुकेशन ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है. इसके अंतर्गत सरकारी और गैर सरकारी यानी तमाम प्राइवेट स्कूल के प्रायमरी से लेकर हाई स्कूल तक के मामले दर्ज हो पायेंगे. 26 सालों के बाद बिहार में इसका गठन किया गया है.
- स्टेट के साथ जिला स्तर पर करेगा काम एजुकेशनल ट्रिब्यूनल स्टेट के साथ हर जिला स्तर पर भी काम करेगा. जिला स्तर पर ट्रिब्यूनल में दो सदस्य होंगे. दो सदस्य में बिहार ज्यूडिशियल सर्विस के रिटायर ऑफिसर और बिहार एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस या बिहार एजुकेशनल सर्विस के रिटायर ऑफिसर इसके मेंबर होंगे. वहीं स्टेट लेवल के ट्रिब्यूनल में इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के प्रिसिंपल सेक्रेटरी रैंक के रिटायर ऑफिसर इसके मेंबर होंगे.
- जाहिद हुसैन केस पर होगा पहला फैसलाबिहार एजुकेशन ट्रिब्यूनल के तहत पहला फैसला 28 सितंबर को लिया जायेगा. नॉट्रेडेम एकेडमी, मुंगेर के शिक्षक जाहिद हुसैन को स्कूल से 9 जून 1998 को निकाल दिया गया था. जाहिद हुसैन क वकील रोहित ने बताया कि गर्मी की छुटटी के बाद स्कूल के खुलने के दिन जाहिद उसी दिन ज्वाइन नहीं किया. क्योंकि उनके बच्चे की तबीयत खराब हो गयी थी. जानकारी देने के बावजूद जाहिद हुसैन को स्कूल ने निकाल दिया. मामला हाई कोर्ट पहुंचा था. अब एजुकेशन ट्रिब्यूनल के तहत इसका फैसला 28 सितंबर को लिया जायेगा.
स्कूल में है परेशान तो करें यहां पर शिकायत - स्कूल में किसी तरह की शिकायत हो तो ट्रिब्यूनल में जा सकते है
- शिकायत 30 दिनों के अंदर ही करना होगा - शिकायत के 90 दिनों के अंदर केस का निपटारा हो जायेगा
- टीचर, नॉन टीचिंग स्टाफ, पैरेंट्स, स्टूडेंट्स आदि अपनी शिकायत रख सकते है- स्कूल के मनमरजी को साबित करना होगा
एजुकेशन ट्रिब्यूनल का यह है काम - प्राइवेट स्कूलक मनमाना फी व गलत तरीके से पैसा लेने को रोकना
- स्कूल के एफिलिएशन या एनओसी देने की अंतिम मुहर - सीबीएसइ, आइसीएसइ और स्टेट बोर्ड की मान्यता देने का अंतिम निर्णय लेना
- शिक्षा के अधिकार के तहत हर तरह का फैसला लेना- स्कूल की मनमानी वाले फैसले को रोकना
- स्कूल पर कार्रवाई और एनओसी रोकने का भी अधिकार स्टूडेंट और अभिभावकों को मिलेगी राहत
- स्कूल मनमाने रूप से स्टूडेंटस को स्कूल से नहीं निकाल पायेगा - एबसेंट होने की स्थिति में स्कूल द्वारा स्टूडेंटस को सजा देने पर राहत मिलेगी
- कारपोरल पनिशमेंट पर स्टूडेंट एजुकेशन ट्रिब्यूनल में जा सकते है- बोर्ड के नियम के खिलाफ स्कूल के मनमाना को ट्रिब्यूनल में चैलेंज किया जा सकता है
टीचर्स को मिलेगी राहत - वेतन आदि पर स्कूल की मरजी नहीं चलेगी
- इंक्रीमेंट अब रेगूलर होगा - ट्रांसफर या स्कूल से निकालने जैसे स्कूल की तानाशाही पर रोक लगेगा
- टीचर्स अपनी बात रख पायेंगे - एडहॉक टीचर्स को भी उनकी क्वालिफिकेशन के अनुसार वेतन आदि मिलेगा
ऐसे चल रहा स्कूलों की मनमरजी - एडहॉक पर टीचर्स को रख कर जब चाहा निकाल दिया
- स्कूल की ओर से हमेशा टीचर्स, नॉन टीचिंग स्टाॅफ को दबा कर रखा जाता है- किसी बात का विरोध करने पर स्कूल तुरंत ट्रांसफर, टर्मिनेट आदि कर देता है
- स्टूडेंट को बिना किसी वजह से स्कूल से निकाल दिया जात है- अभिभावकों को फी, यूनिफार्म आदि को लेकर आये दिन प्रेसर दिया जाता है
- स्कूल अपनी मनमरजी से फी में बढ़ोतरी कर देता हैकोट
एजुकेशन ट्रिब्यूनल के गठन से कई समस्याओं का निदान हो सकेगा. एजुकेशन ट्रिब्यूनल के बनने से अभिभावकाें और स्टूडेंट को काफी राहत मिलेगी. अपनी शिकायतों को रखने का एक प्लेटफार्म टीचर्स के साथ अभिभावकों और स्टूडेंट को मिलेगा. डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार प्राइवेट चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन, बिहार
अब टीचर्स भी अपनी शिकायत यहां पर दर्ज करवा सकेगे. टीचर्स को न्याय मिलेगा. अभी हर स्कूल टीचर्स के मामले में मनमाना करते है. जब चाहा किसी को भी स्कूल से निकाल दिया जाता है. लेकिन इसके गठन से टीचर्स को काफी राहत मिली है. निखिल कुमार, महासचिव, डीएवी टीचर्स एसोसिएशन\\B

29 सितंबर से शुरू होगा इंटर का रजिस्ट्रेशन

- 17 सितंबर तक बिना विलंब दंड का होगा रजिस्ट्रेशन

संवाददाता, पटनाबिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से इंटर के रजिस्ट्रेशन की तिथि घोषित कर दी गयी है. इंटर का रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया स्कूलों में 29 सितंबर से शुरू होगा. समिति की ओर से 28 सितंबर को तमाम जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में रजिस्ट्रेशन का ओएमआर सीट भेज दिया जायेगा. इसके बाद संबंधित स्कूलों और कॉलेजों में 29 सितंबर से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होगा. समिति के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि 29 सितंबर से 17 अक्तूबर तक बिना विलंब दंड के रजिस्ट्रेशन होगा. 18 अक्तूबर से 30 अक्तूबर तक विलंब दंड के साथ रजिस्ट्रेशन फार्म छात्र भर पायेंगे. 

डॉक्टर-अटेंडेंट की लड़ाई में कराह रही नवादा की सोनी

- 42 फीसदी हिस्सा जला, फिर भी दस दिन से इलाज के भटक रही दर-ब-दर

रिंकू झा, पटनातेजाब की जलन से उसका चहेरा 42 फीसदी जल चुका है. आंखें काम नहीं कर रही. पूरे शरीर में जलन हो रहा है. जिंदा लाश बन कर रह गयी है. यह हालत नवादा जिले की सोनी परवीन की है, जिसे देखने वाला कोई नहीं. इसी लड़की के इलाज को लेकर शनिवार की शाम पीएमसीएच इमरजेंसी में डॉक्टर व अटेंडेंट के बीच हंगामा हुआ, जिसके बाद डॉक्टर हड़ताल पर चले गये. डॉक्टर व अटेंडेंट की लड़ाई में व
ह पिछले नाै दिनों से दर्द से कराह रही है. उसे देखने वाला कोई नहीं. हंगामे के बाद भी डीएम के दवाब में भले ही उसे पीएमसीएच में भरती रखा गया हो, लेकिन उसे ना तो दवा मिल पा रही है और ना ही दर्द से आराम मिले इसके लिए पंखा या कूलर आदि का सहारा ही है.
मां बहा रही आंसू, पिता कर रहे डॉक्टरों की खुशामद मां नुरैसा खातून के आंख से आंसू नहीं थम रहे है तो वहीं पिता बेहतर इलाज के लिए लोगो का खुशामद कर रहे है. बेटी को सही से इलाज मिले इसको लेकर पिता ने सोशल एक्टिविस्ट वर्षा से अनुरोध किया. वर्षा जब सोनी परवीन के सही इलाज के लिए पीएमसीएच पहुंची. मामला कुछ और हो गया. सोशल एक्टिविस्ट वर्षा और डाक्टर सतपाल के बीच सोनी परवीन के इलाज को लेकर झड़प हो गया. झगड़ा इतना बढ़ गया कि जूनियर डाक्टर हड़ताल पर चले गये. इस आपसी लड़ाई में नुकसान हुआ तो बस सोनी परवीन का. अभी भी उसके दर्द की स्थिति जस की तस है.
एक साल किया यौन उत्पीड़न, फिर फेंका तेजाब दरअसल नवादा के अकबरपुर स्थित राजहत थाना की रहने वाली सोनी परवीन और उसकी बहन अफसरी परवीन घर में सो रही थी. गांव का मो. एहसान 13 सितंबर की रात 12 बजे घर में घुस कर सोनी परवीन के उपर तेजाब डाल दिया. इससे पहले एक साल तक मो. एहसान सोनी परवीन का यौन उत्पीड़न कर रहा था. पिता मो. गयास खां ने बताया कि रास्ते में रोककर अश्लील हरकतें करता था. शादी नहीं करने पर तेजाब फेंकने की भी धमकी दिया था. गांव के पंचायत में इसकी शिकायत करने पर मो. एहसान ने पूरे पंचायत के सामने मुझसे माफी भी मांगी.
डीएम के कहने पर दुबारा हुई पीएमसीएच में भर्ती घटना के बाद पहली बार पीड़िता के पिता मो. ग्यास खान ने 14 सितंबर को नवादा सदर हास्पीटल से रेफर अपनी बेटी सोनी परवीन को पीएमसीएच में भर्ती करवाया. कोई सुविधा नहीं मिलने के कारण 14 सितंबर को ही प्राइवेट हास्पीटल में लेकर गये. बाइपास के पास इस प्राइवेट हास्पीटल में भी कोई सुविधा नहीं था. मुझे जब पता चला तो एक्टिविस्ट वर्षा ने पटना डीएम प्रतिमा वर्मा के पास आवेदन दिया. इसके बाद डीएम के कहने पर दुबारा 16 सितंबर को दुबारा पीड़िता को एडमिट किया गया.
आमने सामने डाॅक्टर ने मेरे साथ बदतमीजी किया
सोशल एक्टिविस्ट वर्षा ने बताया कि 13 सितंबर को तेजाब से जली सोनी परवीन के इलाज में कोताही की शिकायत पर वह 19 सितंबर की पांच बजे शाम पीएमसीएची के भर्ती वार्ड नंबर 303 में सोनी परवीन को देखने गयी तो वहां पर कोई सुविधा नहीं था. पंखा-कूलर कुछ भी नहीं होने से उसकी हालत खराब हो रही थी. ड्यूटी पर मौजूद डा. नागमनी ने बात की और उसके बाद सीनियर डाक्टर डा. अजय कुमार सोनी को आइसीयू में भर्ती करने का अनुरोध किया. साेनी को आइसीयू में शिफ्ट किया ही जा रहा था कि तभी डा. सतपाल पहुंच गये. सोनी परवीन को शिफ्ट होते देख डा. सतपाल ने इसका विरोध शुरू कर दिया. इसके बाद डा. सतपाल मेरे पास आयेे. मेरे शरीर को छूकर अभद्र व्यवहार किया. मेरे साथ छेड़खानी किया. मैने रोकने की कोशिश की तो मेरे उपर हाथ तक उन्होंने उठाया. मेरी साड़ी पकड़कर खींचा. वहां पर मौजूद लोगों की मदद से मै बच पायी. फिर तब तक गार्ड भी गया. मेरी साथी सुनिता को भी मारा और अभद्र व्यवहार किया. मेरे सिर पर भी चोट लगी है. फिर पीरबहोर थाना पुलिस के पहुंचने के बाद मै वहां से निकल पायी. पीएमसीएच से निकल कर वर्षा पीरबहाेर थाना पहुंची. डा. सतपाल के खिलाफ सेक्सुअल हरेसमेंट का केस दर्ज करवाया है. वर्षा ने बताया कि जूनियर डाक्टरों ने मेरे साथ काफी बदतमीजी किया है. मुझे जानकारी दिये बिना पेंसेट को वार्ड से निकाल रहे थे
इस संबंध में पीएससीएच के डा. सतपाल ने बताया कि तेजाब पीड़िता मेरे ही वार्ड में भर्ती थी. मै उसे देख रहा था. बिना मुझे जानकारी दिये सोनी परवीन को वहां से शिफ्ट किया जा रहा था. जब शिफ्ट किया जा रहा था तो मै वहीं पर दूसरे पेसेंट को देख रहा था. डाक्टर सतपाल ने बताया कि किसी भी पेसेंट को वार्ड से हटाने से पहले वार्ड में ऑन ड्यूटी में रहे डाक्टर को बताना होता है. मैने जब यह देखा तो इसको लेकर मैने अपने जूनियर डा. नागमणि से बात किया. इसके बाद मैने इसका विरोध किया. क्योंकि मेरे जानकारी में रखे बिना उसे वहां से ले जाया जा रहा था. इस पर वहां खड़ी महिला विरोध करने लगी. और उन्होंने मुझे बुरा भला कहा. मैने इग्नोर किया. लेकिन वो बार-बार बोले जा रही थी.

31 लाख परीक्षार्थी देंगे मैट्रिक और इंटर की परीक्षा

- 10 फीसदी छात्रों में हुआ इजाफा

संवाददाता, पटनाइंटर और मैट्रिक के परीक्षा को लेकर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने तैयारी शुरू कर दी है. हर साल समिति के पास छात्रों की बढ़ रही संख्या एक चुनौती होती है. हर साल एक से दो लाख छात्रों की संख्या बढ़ती है. समिति की माने तो इस बार हर साल से अधिक छात्रों की संख्या मैट्रिक और इंटर की परीक्षा में शामिल होंगे. समिति के अनुसार लगभग 31 लाख परीक्षार्थी इंटर और मैट्रिक की परीक्षा में शामिल होंगे. इसमें इंटर में लगभग 14 लाख और मैट्रिक में लगभग 17 लाख परीक्षार्थी शामिल होंगे. इस बार इंटर और मैट्रिक दोनों में ही 10 से 15 फीसदी छात्रों का इजाफा हो रहा है.
तीन लाख मैट्रिक में हुए थे फेल 2015 में तीन लाख मैट्रिक में छात्र फेल कर गये थे. इसके अलावा इंटर में साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स मिलाकर एक लाख 20 हजार छात्र फेल कर गये थे. समिति सूत्रों की माने तो इंटर में कंपार्टमेंटल की परीक्षा नहीं होती है. इस कारण सारे फेल छात्र भी इंटर की परीक्षा में दुबारा शामिल हाेंगे. इसके अलावा स्क्रूटनी वाले छात्र भी परीक्षा में शामिल होंगे.
कोटइस बार पिछले साल की तुलना में छात्रों की संख्या बढ़ेगी. लगभग 31 लाख छात्र इस बार मैट्रिक और इंटर की परीक्षा में शामिल होंगे. इसकी तैयारी अभी से हमने शुरू कर ली है. इतनी संख्या में छात्रों की परीक्षा लेना समिति के लिए चुनौती है.
हरिहर नाथ झा, सचिव,बिहार विद्यालय परीक्षा समिति \\B

परमानेंट एफिलिएशन देगा सीबीएसइ, कई स्कूलों ने किया अप्लाई

- सीबीएसइ के जांच टीम के विजिट के बाद ही मिलेगा एफिलिएशन

संवाददाता, पटनाअभी तक एक साल, तीन साल और पांच सालों के लिए ही सीबीएसइ से मान्यता मिलती थी. लेकिन अब अगर स्कूल में इंफ्रास्क्ट्रचर के साथ एकेडेमिक सीबीएसइ के नाॅम्स के अनुसार है तो ऐसे स्कूल को बोर्ड का परमानेंट एफिलिएशन भी मिल सकता है. सीबीएसइ ने परमानेंट एफिलिएशन को दुबारा शुरू किया है. इसके तहत बोर्ड की ओर से तीन लोगों की टीम भी बनायी गयी है. इसमें ज्वाइंट सेक्रेटरी के अलावा दो स्कूलों के प्रिसिंपल को शामिल किया गया है. टीम द्वारा जांच के बाद स्कूल को एफिलिएशन दिया जायेगा.
- कई स्कूलों ने दिया आवेदन सीबीएसइ के परमानेंट एफिलिएशन देने की बात सामने आते ही बिहार और झारखंड के कई स्कूलों ने इसके लिए आवेदन दे दिया है. इसमें बिहार से दो स्कूल और झारखंड से तीन स्कूल शामिल है. ज्ञात हो कि देश भर में 16 हजार 611 सीबीएसइ स्कूल है. इसमें से मात्र 163 को ही परमानेंट एफिलिएशन अभी तक दिया गया है.
- एक ही स्कूल के पास है परमानेंट एफिलिएशन अभी बिहार में मात्र एक स्कूल नाॅट्रेडेम एकेडमी, जमालपुर को ही परमानेंट एफिलिएशन मिला हुआ है. इस स्कूल को 2004 में परमानेंट एफिलिएशन सीबीएसइ ने दिया था. इसके बाद सीबीएसइ ने परमानेंट एफिलिएशन देना बंद कर दिया है. अब फिर एक बार परमानेंट एफिलिएशन को लेकर सीबीएसइ ने प्लानिंग किया है. जो भी स्कूल परमानेंट एफिलएशन को लेकर अप्लाई करेगा, उसकी जांच होने के बाद ही उसे एफिलिएशन दिया जायेगा.
इन स्कूलों ने किया है परमानेंट एफिलिएशन के लिए अप्लाई- सेंट माइकल हाई स्कूल, पटना
- डीपीएस, पटना- डीपीएस, रांची
- डीपीएस, बोकारो - राम कृष्ष्ण मिशन, देवघर
इन प्वाइंट पर हाेगी स्कूल की जांच - स्कूल को ए-प्लस केटेगरी प्राप्त हो
- स्कूल स्टेट के एजुकेशन डिपार्टमेंट से मान्यता प्राप्त हो - स्कूल में मीडिल क्लास के लिए 250 एकड़, सेकेडरी क्लास के लिए 500 एकड़ और सीनियर सेकेडरी क्लास के लिए 750 एकड़ में बिल्डिंग हो
- स्कूल में टीचर्स की सैलरी स्टेट गवर्नमेंट के पे स्केल के अनुसार होना चाहिए - स्कूल में सारे टीचर्स परमानेंट हों
- टीचर्स और स्टूडेंट्स का रेसियो 1:40 के अनुसार हो - क्लास रूम का मिनिमम साइज 8 और 6 मीटर हो
- सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी क्लास के लिए अलग-अलग फिजिक्स, केमेस्ट्री और बायोलॉजी का लैब हो - लाइब्रेरी का साइज 14 और 8 मीटर का होना चाहिए
- कंप्यूटर के साथ मैथ लैब होना चाहिए - म्यूजिक, डांस, आर्ट, स्पोर्ट आदि एस्ट्रा एक्टिविटी के लिए अलग से कमरे हों
- एडहॉक पर टीचर और नॉन टीचिंग स्टॉफ नहीं होना चाहिए - क्वालिटी एजुकेशन होना चाहिए
- प्रायमरी लेवल के क्लास में भी सीसीइ लागू हो - क्लास थ्री से फाइव तक में लाइफ स्कील एजुकेशन की पढ़ाई हो
- बोर्ड का रिजल्ट हर साल पिछले साल की तुलना में बेहतर हो 

Sunday, September 20, 2015

आचार संहिता के फेर में फंसे 250 स्कूल-कॉलेजों के करीब दस हजार छात्र

- संबद्धता नहीं मिलने की वजह से नहीं भर पायेंगे परीक्षा फॉर्म

- प्रदेश भर से 250 स्कूल और काॅलेजों ने संबंधता के लिए दो साल पहले दिया था आवेदन- आचार संहिता खत्म होने पर ही संबद्धता मिलने की उम्मीद
रिंकू झा, पटनापहले मान्यता मिलेगी तभी 11वीं में नामांकन लिया जा सकता है. पहले संबद्धता की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, तभी उस स्कूल या कॉलेज का 11वीं में नामांकन लेने की अनुमति दी जायेगी. लेकिन इस नियम को ना तो स्कूल कॉलेज ने माना और ना समय पर इन कॉलेजों और स्कूलों को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने संबद्धता ही दिया. अब स्कूल की गलती और बिहार बोर्ड की लापरवाही की सजा उन सैकड़ों छात्रों को मिलेगा जो अभी बिना संबद्धता वाले स्कूल और कॉलेजों में 11वीं में पढ़ रहे है़
अगस्त से दिसंबर 2014 तक दिया गया था अावेदन बिहार बोर्ड से संबंद्धता लेने के लिए अगस्त 2014 से दिसंबर 2014 के बीच कुल 250 स्कूल और कॉलेजों ने आवेदन दिया़ बोर्ड के नियम के अनुसार काॅलेज और स्कूल के आवेदन देने के छह महीने के अंदर उन स्कूल और कॉलेज के संबंद्धता की जांच हो जानी चाहिए थी. जांच के बाद बोर्ड यह तय करेगी कि किस कॉलेज या स्कूल को संबंद्धता दी जाये या नहीं दी जाये़
अक्तूबर 2014 के बाद नहीं हुयी बैठक संबंद्धता को लेकर बिहार बोर्ड में अक्तूबर 2014 के बाद एक भी बैठक आज तक नहीं हो पायी है. ऐसे में 250 स्कूल और कॉलेज अपनी संबंद्धता के लिए इंतजार करते रहे. इंटर काउंसिल सूत्रों की मानें तो जिन स्कूल और काॅलेजों ने दिसंबर 2014 तक आवेदन दिया था, उन्हें जुलाई 2015 सत्र शुरू होने से पहले संबंद्धता मिल जानी चाहिए थी. संबद्धता मिलने के बाद ही इन स्कूलों और कॉलेजों में 2015 में 11वीं में नामांकन लिये जाते हैं.
हजारों छात्रों ने ले लिया नामांकन संबद्धता मिल जाने की उम्मीद से इन 250 स्कूल कॉलेज ने जुलाई 2015 में 11वीं में नामांकन ले लिया है. अगर 250 स्कूल कॉलेज में एक सेक्शन (40 छात्र) में ही नामांकन लिया गया होगा तो दस हजार छात्र का नामांकन ले लिया गया होगा. अब इन छात्रों का अभी 12वीं में परीक्षा फार्म भरने नहीं दिया जायेगा. ऐसे में इन छात्रों का भविष्य दांव पर लग जायेगा.
कोटपिछले सप्ताह की संबंद्धता को लेकर एक बैठक बुलायी गयी थी, लेकिन उसी के एक दिन पहले आचार संहिता लागू कर दिया गया. अब जब तक चुनाव नहीं हो जाता है, तब तक संबंद्धता नहीं दी जा सकेगी. इससे कॉलेज और स्कूल को संबद्धता देने का काम दो महीना रूक गया. नवंबर के बाद ही अब संबंद्धता दी जा सकेगी़
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति\\B

मृणाल के जज्बे को सीबीएसइ ने किया सलाम, बनाया रोल मॉडल

- केंद्रीय शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी ने पत्र लिख कर दी जानकारी

संवाददाता, पटनाअगर इंसान चाह ले तो कोई भी काम कठिन नहीं है. जरूरत बस दृढ़ इच्छाशक्ति की है. कुछ ऐसी ही इच्छा शक्ति मृणाल के अंदर भी है. मृणाल एक आंख से देख नहीं पाता है. उसके दूसरे अांख में भी रोशनी काफी कम है. लेकिन पटना के कंकड़बाग निवासी 14 वर्षीय मृणाल ने अपनी इस कमजोरी को ताकत बना लिया और इस साल सीबीएसइ के 10वीं बोर्ड की परीक्षा 7़.2 सीजीपीए से पास की. उसकी इस मेहनत, जज्बा और लगन के आगे सेंट्रल बोर्ड आॅफ सेकेंड्री एजुकेशन (सीबीएसइ) ने भी अपना सलाम मृणाल को दिया है. पटना के मृणाल को देश की शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी ने एक पत्र लिख का उसे उसके जज्बे को सलाम किया है. शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी से अपने पत्र में मृणाल को 10वीं बोर्ड में अच्छे अंक से पास करने को लेकर बधाई दिया है. साथ में मृणाल को देश का स्पेशल पर्सन बताया है.
बनाया सीबीएसइ का रोल मॉडलछोटे अक्षर को बड़े करके पढ़ना, देखकर नहीं बल्कि सुन कर पढ़ने की आदत डालना आदि को लेकर अपनी हर कमजोरी को पिछे छोड़ बस मृणाल आगे बढ़ता चला गया. मृणाल के इस हौंसले को सीबीएसइ देश के हर कोने में पहुंचाना चाहती है. सीबीएसइ जल्द ही मृणाल को रोल माॅडल बनाने जा रही है. इससे स्पेशल बच्चे के साथ उन स्कूलों को भी मैसेज दिया जायेगा जो स्पेशल चाइल्ड का एडमिशन नॉर्मल स्कूल नहीं लेता है. मृणाल के हर कोशिश और पढ़ाई के इनोवेशन को सीबीएसइ अपने सर्कुलर में डालने वाली है़
देश के किसी भी स्कूल नहीं हुआ था नामांकन मृणाल के पिता संतजीव कुमार ने बताया कि मृणाल का आंख जन्म से ही खराब था. जब दो महीने का था तभी हमें पता चला कि यह देख नहीं पा रहा है. इसके बाद कई डाॅक्टर से दिखाया, लेकिन डाॅक्टर ने साफ कह दिया कि यह कभी भी देख नहीं पायेगा. लेकिन भगवान की मरजी कहें, जब तीन साल का हुआ तो इसका एक आंख में थोड़ी रोशनी आयी़. यह अपना काम करने लगा. हमने कभी भी इसे स्पेशल चाइल्ड नहीं समझा. इस कारण मै इसे नॉमर्ल स्कूल में ही एडमिशन करवाना चाह रहा था़. पटना से लेकर बंगलोर आदि जगहों पर भी कोशिश कर लिया, लेकिन इसका एडमिशन किसी भी स्कूल में नहीं लिया गया. इसके बाद मुझे पता चला कि मस्टक (ओमान की राजधानी) में सीबीएसइ का स्कूल इंडियन स्कूल है जहां पर ऐसे बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था है. फिर मैने वहीं पर नौकरी के भी अप्लाई किया. पिछले दस सालों से मै अपने बच्चे के कारण मस्टक में ही हूं. दूसरी क्लास में मैने उसका एडमिशन मस्टक में करवाया था़
पढ़ाई के साथ बोर्ड परीक्षा में भी स्पेशल व्यवस्थामृणाल अभी 11वीं क्लास में पढ़ रहा है. मृणाल की मां शोभा कुमारी बताती है कि हमने तो उम्मीद ही छोड़ ली थी कि मृणाल नॉमर्ल बच्चों की तरह पढ़ पायेगा, लेकिन मृणाल के अपने प्रयास और स्कूल की मदद से आज वह बोर्ड परीक्षा पास कर पाया. मृणाल को बड़े अक्षर कर पढ़ाने की व्यवस्था स्कूलों ने किया था. पटना में रह रही मृणाल की बुआ ने बताया कि स्कूल में मृणाल को आगे की सीट पर बैठाया जाता है. इसके अलावा 10वीं बोर्ड की परीक्षा के लिए स्कूल ने सीबीएसइ ने बड़े अक्षर के प्रश्नपत्र उपलब्ध करवाने का आग्रह किया था.  

फेल हो गये तो 15 दिनों में फिर परीक्षा

- सीबीएसइ और आइसीएसइ की ओर से चल रही तैयारी

संवाददाता, पटनास्कूलों की बोर्ड परीक्षाओं में फेल होने वाले छात्र-छात्राओं के लिए रिजल्ट आने के 15 दिन के भीतर दोबारा परीक्षा करायी जायेंगी. इस दूसरे प्रयास में पास हाने वाले विद्याथियों का साल बर्बाद नहीं होगा़ वे अगली क्लास में पहुंच जायेंगे. साथ ही ऐसे छात्र भी दूसरे छात्रों के साथ ही आगे की पढ़ाई कर पायेंगे. देश की प्रस्तावित नयी शिक्षा नीति कुछ ऐसे ही बदलाव के साथ लागू की जायेगी़ इसको लेकर बोर्ड की आेर से अपनी पहल शुरू कर दी गयी है़. यह फैसला फिलहाल 10वीं बोर्ड की परीक्षा देने वाले परीक्षाथी पर लागू होगा. ज्ञात हो कि अभी सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के रिजल्ट आने के एक महीने बाद ही कंपार्टमेंटल की परीक्षा ली जाती है. लेकिन अब इस नयी व्यवस्था से एक महीने के अंदर ही फेल स्टूडेंट को पास होने का दुबारा मौका दिया जायेगा. - नहीं होगा स्टूडेंट का समय बर्बाद
इस नयी व्यवस्था से स्टूडेंट का साल नहीं बर्बाद होगा. कई बार परीक्षा होने और लेट रिजल्ट आने से प्लस टू में एडमिशन की प्रक्रिया तमाम स्कूलों में खत्म हो जाती है. ऐसे में स्टूडेंट को या तो कहीं एडमिशन नहीं हो पाता या फिर छोटे मोटे कॉलेजों में एडमिशन से काम चलाना पड़ता है. इस नयी व्यवस्था से 10वीं बोर्ड के स्टूडेंट को काफी राहत मिलेगी. - स्कूल लेवल की परीक्षा में भी हो सकता है लागू
फेल स्टूडेंट को 15 दिनों के अंदर दुबारा परीक्षा देने का मौका मिले, इसे स्कूल लेवल पर भी शुरू करने का प्रस्ताव है. नयी शिक्षा नीति के तहत स्कूल लेवल पर भी इसे लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है़ इसके तहत फाइनल एग्जाम में जो स्टूडेंट फेल हो जायेंगे, उनके लिए स्कूल की ओर से रिजल्ट आने के 15 दिनों के अंदर दुबारा परीक्षा लिया जायेगा. जो पास करेगे उन्हें अगले क्लास में एडमिशन किया जायेगा. - महाराष्ट्र बोर्ड ने किया लागू
नयी शिक्षा नीति के इस प्रस्ताव को महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ने अपने यहां लागू कर दिया है. महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड में अब बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट निकलने के 15 दिनों के अंदर ही दूबारा परीक्षा ली जायेगी. इससे फेल होने वाले छात्रों की संख्या कम से कम की जा सकेगी. महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड के वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार 2016 की बोर्ड परीक्षा से इसे लागू कर दिया जायेगा. - डीएवी संस्थान के स्कूलों में चल रहा यह व्यवस्था
वहीं देश भर के डीएवी स्कूलों में यह व्यवस्था कई सालों पहले शुरू किया गया था़. डीएवी में क्लास के फाइनल परीक्षा में फेल होने वाले छात्रों को 15 दिनों के अंदर दुबारा परीक्षा देने का मौका मिलता है. खासकर 11वीं में जो छात्र फेल हो जाते है. उन्हें दुबारा मौका दिया जाता है, जिस परीक्षा को देकर वो पास हो सके. कोट
नयी शिक्षा नीति के तहत यह आया है. मै इसका स्वागत करता हूं. इस व्यवस्था स्टूडेंट में डिप्रेशन आदि नहीं होगा. इसके अलावा समय की बर्बादी भी स्टूडेंट की नहीं होगी. उन्हें तुरंत की दुबारा परीक्षा देने का मौका मिलेगा, इससे उनके अंदर कांफिडेंस भी आयेगा. सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया 

अब सेटेलाइट मैप से होगी स्कूलों में पढ़ाई

- एनसीइआरटी ने तैयार किया स्कूल भुवन सिलेबस

संवाददाता, पटनास्कूलों में अब जल्द ही सेटेलाइट मैपिंग से पढ़ाई की शुरूआत होगी. एनसीइआरटी द्वारा इसकी तैयारी भी कर ली गयी है. इसको लेकर एनसीइआरटी द्वारा एक स्कूल भुवन पोर्टल डेवलप किया गया है. इस पोर्टल के माध्यम से अभी टीचर्स और स्टूडेंट को सेटेलाइट मैपिंग के बारे में बताया जायेगा. सेटेलाइट मैपिंग के माध्यम से कोई भी चीज को पढ़ना आसान हो जायेगा. इस सिलेबस को स्कूलो में 2016 से लागू की जायेगी.
- स्कूल भुवन से अवेयर होंगे स्टूडेंटएनसीइआरटी के स्कूल भुवन पोर्टल से स्टूडेंट को कई नयी चीजें सीखने का मौका लगेगा. इस पोर्टल की मदद स्टूडेंट देश के नेचुअल रिसोर्स, इंवायरमेंट आदि के बारे में पता चलेगा. एनसीइआरटी ने स्कूल भुवन तैयार करने में हर बारीक चीजों का ख्याल रखा है. हर छोटी चीजों को इसमें शामिल किया गया है.
- इसरो से ली गयी है मदद एनसीइआरटी ने स्कूल भुवन के तहत सिलेबस तैयार करने में इसरो की मदद ली है. इसरो की मदद से ही मैप को तैयार करने में सेटेलाइट की मदद ली गयी है़
सेटेलाइट मैपिंग वाले सिलेबस से मिलेगी इन चीजों की जानकारी
- सेटेलाइट के माध्यम से देश, राज्य, जिलों की बाउंड्री को अच्छे से पढ़ा जा सकेगा
- देश आैर राज्य के एग्रीकल्चर संबंधित क्रॉपिंग पैटर्न, क्रॉप के विभिन्न टाइप आदि को अच्छे से समझा और पढ़ा जा सकेगा - वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट डाटा से स्टडी अच्छे से हो पायेगी. इसके अलावा नदी, झील, पोखर, झरना आदि को स्टूडेंट अच्छे से समझ पायेंगे
- मिट्टी के प्रकार और एरिया वाइज बांटने वाली जगहों को अच्छे से पढ़ा जा सकेगा. इसके अलावा कपड़ाें की प्रोडक्टिविटी को पढ़ा जा सकेगा - मौसम की रिपोर्ट भी अब सेटेलाइट के माध्यम से पढ़ा जा सकेगा. एनुअल रेनफाॅल, सीजरल रेनफॉल, मानसून का प्रकार आदि को भी सेटेलाइट के माध्यम से सिलेबस में शामिल किया गया है.

कोटअब हर क्लास के सिलेबस को सेटेलाइट मैपिंग से तैयार किया जा रहा है. खासकर जोगरफी विषय में मैप से पढ़ाई होती है. इससे पढ़ाई की व्यवस्था को अधिक एडवांस किया जायेगा़. स्टूडेंट को समझने मे भी आसानी होगी़
डीटी सुदर्शन राव, ज्वाइंट सेक्रेटरी, एकेडेमिक एंड ट्रेनिंग, सीबीएसइ \\B

नामांकन के एक साल बाद इंटर में होता रजिस्ट्रेशन, छात्र होते परेशान

- अक्टूबर 2014 का रजिस्ट्रेशन का नहीं निकला अब तक तिथि

संवाददाता, पटना11वीं में नामांकन भले हर साल जुलाई माह में हो जाती है, लेकिन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के छात्रों को रजिस्ट्रेशन के लिए एक साल इंतजार करना पड़ता है. एक साल बाद रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में जल्दबाजी और परीक्षा फार्म भरवाने के प्रेशर में छात्रों के रजिस्ट्रेशन नंबर से लेकर एडमिट कार्ड में गड़बड़ी हो जाती है. कई बार तो एडमिट कार्ड की गड़बड़ी के कारण छात्रों के रिजल्ट भी पेंडिंग हो जाता है. इसके बाद छात्र और अभिभावक बोर्ड का चक्कर लगाते रहते है.
- सीबीएसइ की तरह रजिस्ट्रेशन हो तो नहीं होगी दिक्कतें सीबीएसइ में 9वीं और 11वीं में नामांकन के दो महीने के बाद ही रजिस्ट्रेशन कर लिया जाता है. सीबीएसइ के पैटर्न पर चल रहे बिहार बोर्ड में जब छात्र 12वीं में जाते है तो उनके रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया की जाती है. 10वीं पास करने के बाद छात्र बिना रजिस्ट्रेशन के ही एक साल तक स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई करते है. ज्ञात हो कि समिति की ओर से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तीन चरणों में की जाती है. रजिस्ट्रेशन फार्म भरने के बाद तीन बार समिति क्रास लिस्ट स्कूल और कॉलेज भेजती है, जिससे तमाम छात्रों के नाम, एड्रेस आदि को वेरिफाई किया जाता है.
- 2009 के बाद बदल गया सिस्टम इंटर काउंसिल में 2009-10 सत्र तक नामांकन के साथ ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया की जाती थी. जुलाई में नामांकन होने के बाद सितंबर से दिसंबर तक के बीच 11वीं क्लास के लिए छात्राें का रजिस्ट्रेशन कर लिया जाता था. इसके बाद अगले साल 12वीं में जब छात्र जाते थे तो बस उनका परीक्षा फार्म भरवाया जाता था. इस बीच तमाम छात्रों के रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की पूरी जांच के बाद रजिस्ट्रेशन नंबर दे दिया जाता था. अगर किसी छात्र के रजिस्ट्रेशन नंबर में कोई गलती होती थी तो उसे सही करवाने के लिए लंबा समय भी होता था. इससे गलती की संभावना काफी कम होती थी.
- तीन महीने में करना है रजिस्ट्रेशन से परीक्षा फार्म भरवाने तक का काम 2014-16 सत्र के लिए अभी तक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू नहीं किया गया है. अब समिति के पास अक्तूबर से दिसंबर तक तीन महीने का समय है. इस बीच समिति को रजिस्ट्रेशन के साथ परीक्षा फार्म भी भरवा कर एडमिट कार्ड भी जेनरेट कर देना है. ऐसे में इस बार समिति के पास काफी चुनौती है.
कोट
रजिस्ट्रेशन के इस प्रक्रिया की जानकारी हमें नहीं है. नामांकन के साथ उसी साल अगर 11वीं में रजिस्ट्रेशन हो जायेगा तो समिति के लिए भी काफी आसानी हो जायेगी. अभी अफरातफरी से बचा जा सकेगा. हम इस पर विचार करेंगे. लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति \\B

एक अक्तूबर को 14 साल, तभी दे पायेंगे बोर्ड एग्जाम

- सीबीएसइ ने तमाम पैरेंट्स से जन्म प्रमाण पत्र लेने का दिया निर्देश

संवाददाता, पटना10वीं बोर्ड की परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स को पहले अपना जन्म प्रमाण पत्र जमा करना होगा, तभी वो बोर्ड परीक्षा में शामिल हो पायेंगे. सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को निर्देश दिया है. 2016 मार्च में 10वीं बोर्ड की परीक्षा में वहीं स्टूडेंट्स शामिल हो पायेंगे, जो एक अक्तूबर को 14 साल पूरा कर लेंगे. इसके लिए सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को जांच करने को कहा है. स्कूल अपने स्तर से जांच करने के बाद पैरेंट्स से भी जन्म प्रमाण पत्र लेकर बोर्ड को भेजेगा.
कम होने वाले स्टूडेंट छंट जायेंगे सीबीएसइ ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी स्टूडेंट की उम्र एक अक्तूबर को 14 साल नहीं होता है, तो ऐसे में वो स्टूडेंट 2016 की बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हो पायेंगे. एक अक्तूबर को स्टूडेंट की उम्र 14 साल होना अब आवश्यक है. अगर किसी स्टूडेंट की उम्र दो या तीन महीने भी कम होगी, तो उन्हें बोर्ड परीक्षा नहीं देने दिया जायेगा.
ट्रांसफर और फेल स्टूडेंट की देनी होगी जानकारीजो स्टूडेंट ट्रांसफर हो कर 10वी में नामांकन लिया हो या 2015 की बोर्ड परीक्षा में फेल कर गये हो तो ऐसे में इसकी जानकारी भी स्टूडेंट को परीक्षा फार्म भरने के साथ देना होगा. ट्रांसफर होने वाले स्टूडेंट को दोनों ही स्कूल की जानकारी देनी होगी. 

स्कूल में जांची गयी आंसर कॉपी की जांच करवायेगा सीबीएसइ

- इविडियेंस ऑफ असेसमेंट को लेकर बोर्ड ने बनायी टीम

संवाददाता, पटनाबाेर्ड के आंसर कॉपी की सही से जांच हुई या नहीं. कहीं एग्जामिनर ने आंसर काॅपी की जांच में कोई लापरवाही तो नहीं किया. मार्किंग स्कीम को सही से फॉलो किया गया है या नहीं, अब इन तमाम बातों की जांच सीबीएसइ करवाने जा रहा है. 2015 में ली गयी 10वीं बोर्ड परीक्षा के तमाम विषयों की रेंडमली जांच करवाने का फैसला सीबीएसइ के द्वारा लिया गया है. इस रेंडमली जांच में यह देखा जायेगा कि मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी तरह की गलती तो एग्जामिनर द्वारा नहीं किया गया है. सीबीएसइ पहली बार आंसर काॅपी की रेंडमली जांच करवा रही है. इविडियेंस ऑफ असेसमेंट के तहत आंसर काॅपी की जांच सीबीएसइ करवायेगी.
- बनायी गयी टीम बोर्ड की ओर से आंसर काॅपी की जांच के लिए एक टीम बनायी गयी है. इस टीम में में सब्जेक्ट एक्सपर्ट के साथ सीबीएसइ दिल्ली से मार्किंग स्कीम एक्सपर्ट को रखा गया है. जिस स्कूल में जिस विषय के आंसर काॅपी की रेंडमली जांच के लिए टीम जायेगी, उस स्कूल के किसी भी एग्जामिनर को उसमें शामिल नहीं किया जायेगा. इसके अलावा जिस स्कूल में जिस विषय का मूल्यांकन हुआ है, वहां पर उसी विषय के तीन अलग-अलग एक्सपर्ट को रखा गया है.
- अक्तूबर के सेकेंड वीक से होगा शुरू आंसर काॅपी की रेंडमली जांच अक्तूबर के सेकेंड वीक से शुरू होगा. जांच टीम की ओर से हर स्कूलों की लिस्ट तैयार कर ली गयी है. जिन स्कूलों में जिस विषय की आंसर कॉपी का मूल्यांकन हुआ है, उसी के आधार पर यह रेंडमली जंच करवायी जायेगी.
- सब्जेक्ट वाइज स्कूलों में होता मूल्यांकन कार्यग्रेडिंग सिस्टम होने के बाद सीबीएसइ बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन प्रक्रिया को चेंज कर दिया है. बोर्ड परीक्षा होने के बाद हर विषय के मूल्यांकन कार्य के लिए स्कूल को फिक्स किया जाता है. एक विषय के आंसर कॉपी की जांच एक ही स्कूल में किया जाता है. दूसरे स्कूल के सब्जेक्ट एक्सपर्ट एग्जामिनर भी उसी स्कूल में आते है. मूल्यांकन के बाद आंसर कॉपी को उसी स्कूल में रखा जाता है.
जांच में इन प्वाइंट पर होगा फोकस - आंसर कॉपी में मार्किंग स्कीम का ख्याल रखा गया है या नहीं
- मार्क्स देने में एग्जामिनर ने कोई लापरवाही तो नहीं की है - आंसर कॉपी में एग्जामिनर ने अपना सिग्नेचर किया है या नहीं
- हर आंसर में एग्जामिनर ने मार्क्स स्टेप वाइज दिया है या नहीं - कहीं किसी आंसर का मूल्यांकन करना एग्जामिनर से छूट तो नहीं गया
- आंसर काॅपी मूल्यांकन में टीचर का सेलेक्शन किस आधार पर किया गया 

Sunday, September 13, 2015

सीबीएसइ शुरू करायेगा स्कूल ऑडिट सिस्टम

- स्कूलों को अब ऑडिट रिपोर्ट पर ही मिलेगा ग्रेडिंग

संवाददाता, पटनाअब स्कूलों का ऑडिट किया जायेगा. इसके लिए सीबीएसइ ने अपने स्तर से ऑडिट सिस्टम की तैयारी शुरू कर दी है. देश भर के 17 हजार स्कूलों के लिए ऑडिट फर्मूला बोर्ड की ओर से तैयार किया गया है. इसमें पटना जाेन के भी 1157 स्कूल शामिल है. इन तमाम स्कूलों का अॉडिट सीबीएसइ की ओर से होगा. ऑडिट के आधार पर ही अब स्कूलों को ग्रेडिंग की जायेगी. सीबीएसइ ने कई सालों से चल रहे एक्रेडेशन प्रक्रिया को बंद करने का फैसला लिया है. सीबीएसइ की माने तो एक्रेडेशन की प्रक्रिया बहुत ही कठिन था, इस कारण काफी स्कूल चाहकर भी इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पा रहे थे. इसके अलावा एक्रेडेशन प्रक्रिया में काफी समय लगता था. लेकिन बोर्ड ने ऑडिट सिस्टम को काफी आसान बनाया है.
एक्सपर्ट की बनायी गयी कमिटी ऑडिट सिस्टम को स्कूलों में सही से लागू करने के लिए सीबीएसइ ने एक्सपर्ट की एक कमिटी बनायी है. यह कमिटी ऑडिट की गाइडलाइंस तैयार करेगा. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो इस कमेटी मेें स्कूल के प्रिंसिपल के साथ चार एजुकेशन एक्सपर्ट शामिल होंगे. कमिटी स्कूलों में एजुकेशन के मौजूदा सिस्टम को स्टडी करेगी. इसके आधार पर एक रिपोर्ट तैयार किया जायेगा. उस रिपोर्ट पर ही स्कूलों का ऑडिट किया जायेगा. कमिटी एफिलिएशन गाइडलाइंस को भी रिव्यू करेगी. इसके अलावा क्वॉलिटी असेसमेंट और एक्रेडेशन प्रोग्राम का भी रिव्यू किया जायेगा.
दो साल पहले शुरू हुआ था ग्रेडिंग प्रणालीसीबीएसइ ने दो साल पहले ग्रेडिंग प्रणाली की शुरूआत की थी. इसके तहत स्कूलों में चल रहे एजुकेशन क्वॉलिटी चेक करने के लिए एक्रेडेशन प्रक्रिया शुरू किया गया था. एक्रेडेशन रिपोर्ट के आधार पर स्कूलों को ग्रेडिंग दी जानी थी. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो अब एक्रेडेशन प्रणाली खत्म कर दी गयी है. अब स्कूलों के एजुकेशन स्टैंडर्ड चेक करने के लिए स्कूलों में ऑडिट सिस्टम शुरू किया जायेगा.
ऑडिट सिस्टम की इन चीजों पर रहेगी नजर - स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्या पर नजर रखी जायेगी
- स्कूल के एजुकेशन स्टैंडर्ड को चेक किया जायेगा - टीचिंग-लर्निंग को ऑडिट द्वारा चेक किया जायेगा
- टीचर्स की क्वालिफिकेशन और टीचर्स स्टूडेंट‌स रेसियो को देखा जायेगा - को-करिकुलम एक्टिविटीज पर भी कमेटी की नजर रहेगी
- स्कूल के अन्य स्टॉफ की सर्विस कंडिशन और उनकी सैलरी पर भी रिपोर्ट तैयार होगी - स्कूलों के हर क्लास के रिजल्ट पर स्टडी किया जायेगा
- ऑडिट के माध्यम से चेक लिस्ट भी तैयार किया जायेगा - रिजल्ट बेहतर नहीं करने वाले स्कूलों के रिजल्ट सही करने का कारण खोज जायेगा
कोटसीबीएसइ का एक्रेडेशन सिस्टम काफी बेचिदा था. कई स्कूलों ने इसके लिए आवेदन भी किया था. लेकिन इसकी जांच प्रक्रिया नहीं हो पायी. यह ऑडिट सिस्टम काफी बेहतर है. हर स्कूल इसमें शामिल हो पायेगा.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया\\B

75 फीसदी एटेंडेंस पूरा नहीं तो 12वीं बोर्ड परीक्षा का फाॅर्म नहीं भर पायेंगे स्टूडेंट‌स

- 11वीं और 12वीं के लिए सीबीएसइ ने स्कूलों से एटेंडेंस सीट तैयार करने का दिया निर्देश

संवाददाता, पटनाक्लास बंक कर कोचिंग संस्थान जाकर क्लास करना अब स्टूडेंट को महंगा पड सकता है. जिन स्टूडेंट‌स का एटेंडेंस पूरा नहीं होगा उन्हें बोर्ड परीक्षा में बैठने की इजाजत नहीं दी जायेगी. सीबीएसइ ने 11वीं में 75 फीसदी और 12वीं में 75 फीसदी एटेंडेंस को मस्ट कर दिया है. इसकी जानकारी अब स्कूलों को परीक्षा फार्म भरवाने से पहले ही देना हाेगा. जिन स्टूडेंट का 75 फीसदी एटेंडेंस परीक्षा फार्म भरने के पहले पूरा नहीं हाेगा, वो 2016 की 12वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल नहीं हो पायेंगे. इसकी सही से माॅनिटरिंग हो, इसके लिए सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों स्टूडेंट की एटेंडेंस सीट बोर्ड के पास भेजने का निर्देश दिया है.
एटेंडेंस के साथ स्कूल और कोचिंग संस्थान आपस में करते है मैनेज सीबीएसइ के पास शिकायतें आ रही है कि स्टूडेंट स्कूल जाने की बजाय कोचिंग सेंटर पर मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे है. कोचिंग सेंटर पर में उन्हें 11वीं और 12वीं का सिलेबस भी पढाया जा रहा है. स्कूल और कोचिंग संस्थान के आपस में मिलीभगत से स्टूडेंट का एटेंडेंस स्कूल में मैनेज हो जाता है. हाल में हुए सीबीएसइ की गवर्निंग बॉडी की बैठक में इस मुददे को उठाया गया है. बैठक में यह फैसला लिया गया है कि कोचिंग संस्थान और स्कूल की मिलीभगत को रोकने के लिए परीक्षा फार्म भरवाने के पहले ही एटेंडेंस सीट की चेकिंग की जायेगी.
अभिभावकों को किया जायेगा अवेयर सीबीएसइ जल्द ही अभिभावकों को भी एक पत्र लिखने जा रही है. इसमें अभिभावकों को कहा जायेगा कि बच्चे का 11वीं में नामांकन स्कूल में करवायें, ना की कोचिंग संस्थान में. जानकारी के अभाव में अभिभावक 11वीं में ऐसे स्कूल में बच्चे का नामांकन करवा देते है जो स्कूल किसी कोचिंग संस्थान से जुडा होता है.
कोटएटेंडेंस के मामले में सीबीएसइ हमेशा से सख्त रहा है. हर साल परीक्षा होने के पहले इसकी जांच होती है. कई बार मजबूरी में सीबीएसइ को एडमिट कार्ड जारी करना पडता है, लेकिन अब परीक्षा फार्म के समय ही इसकी जांच होने से सही एटेंडेंस का पता चल जायेगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ\\B

काउंसिलिंग सेंटर से गांव के छात्रों को जोड़ेगा सीबीएसइ

- सीबीएसइ ने हर स्टेट में काउंसिलिंग सेंटर खोलने का लिया फैसला

संवाददाता, पटनाआइआइटी की तैयारी के लिए छात्राओं के लिए कोचिंग क्लास देने की शुरूआत करने के बाद अब सीबीएसइ गांव में रहने वाले छात्रो को काउंसिलिंग देने की सोच रहा है. इसके लिए बोर्ड की ओर से काउंसिलिंग सेंटर भी बनाया जायेगा. हर राज्य में बनने वाले इस काउंसिंलिंग सेंटर पर गांव के छात्रों को जोडा जायेगा. बोर्ड के अनुसार काउंसिलिंग सेंटर पर छात्रों का फ्री रजिस्ट्रेशन किया जायेगा. स्टूडेंट जब चाहे अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते है. छात्रों की संख्या के अनुसार काउंसिलिंग सेंटर की संख्या भी बढायी जायेगी. बिहार में पटना के अलावा मुजफ्फरपुर में खोला जायेगा.
बनायी गयी है एक्सपर्ट की कमिटी सीबीएसइ ने काउंसिलिंग सेंटर के लिए एक्सपर्ट की एक कमिटी भी बनायी है. इस कमिटी में अलग-अलग विषयों के एक्सपर्ट हैं जो हर छात्रों को उनकी जरूरत के अनुसार गाइड करेंगे. एक्सपर्ट में लोकल और सीबीएसइ की आेर से भी टीचर्स को रखा गया है. कमिटी को सीबीएसइ ने अधिक से अधिक छात्रों को जोडने का भी निर्देश दिया है.
दो सालों तक सीबीएसइ करेगा गाइड इस काउंसिलिंग सेंटर से स्टूडेंट को 11वीं और 12वीं दो सालों तक गाइड किया जायेगा. सीबीएसइ का यह प्रयास रहेगा कि गांव के हर स्टूडेंट को आइआइटी, मेडिकल आदि तक पहुुंचाने में मदद करें. काउंसिलिंग के अलावा बोर्ड की ओर से 10वीं में ही एक एप्टीच्यूट टेस्ट भी लिया जायेगा. इसमें से हर स्टेट से पांच सौ स्टूडेंट को चुना जायेगा. इन स्टूडेंट को सीबीएसइ अपने स्तर से प्लस टू में दो सालों के कोर्स में गाइड करेगी.
मुरादाबाद से हुई इसकी शुरूआत सीबीएसइ की ओर से पहला काउंसिलिंग सेंटर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में खोला गया है. मुरादाबाद में खोले गये इस काउंसिलिंग सेंटर से अब तक पांच हजार गांव के छात्रों का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है.
स्टूडेंट‌स की इन चीजों पर होगा सीबीएसइ का फोकस - 9वीं से 12वीं में छात्रों को उनके कैरियर को लेकर अवेयर करना
- कौन से विषय से किस तरह का कैरियर आप्सन है इसकी जानकारी मिलेगी - कैरियर के हर कंफ्यूजन को दूर किया जायेगा
- एप्टीच्यूट टेस्ट से छात्रों को काउंसिलंग की जायेगी - एप्टीच्यूट टेस्ट से छात्र कैरियर आप्सन बताया जायेगा
- जो स्टूडेंट‌स सेंटर से रजिस्ट्रर्ड होगे, उन्हें समय समय पर सीबीएसइ की ओर से गाइड किया जायेगा कोट
छात्राओं के लिए उडान प्रोजेक्ट के माध्यम से इंजीनियरिंग की तैयारी करवाने के बाद अब सीबीएसइ गांव के छात्रों से जुडने की शुरूआत की है. उत्तर प्रदेश से इसकी शुरूआत कर दी गयी है. 2016 के बोर्ड परीक्षा तक सारे स्टेट में यह काउंसिलिंग सेंटर खोला जायेगा. सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया \\B

पहली बार देंगें वोट, नागरिकता का मिल रहा एहसास

- पहली बार वोट करने को लेकर उत्साहित है वोटर

संवाददाता, पटनावोट देना हर किसी को नागरिक होने का एहसास करवाता है. वोट देने का अधिकार मिलने से देश की नागरिकता से जुडने का एहसास होता है. कुछ एेसा ही एहसास इस बार उन युवाओं को भी हो रहा है जिन्हें पहली बार नागरिकता बनने का एहसास हो रहा है. बिहार विधानसभा चुनाव में जिन वोटर्स को पहली बार वोट देने का अधिकार मिला है, जिनके हाथ में पहली बार उनके नाम का वोटर आइडी कार्ड है, वो काफी उत्साहित है. अभी से वोटिंग करने की प्लानिंग शुरू हो चुकी है. इस बार पटना जिला में 61 हजार ऐसे वोटर्स है जो पहली बार मतदान में शामिल होंगे.
डेढ माह में बढ गये नये वोटर्सनये वोटर्स की संख्या बढे, इसके लिए कई तरह के अवेयरनेस कार्यक्रम चलाये गये थे. मालूम हो कि जहां पटना जिला में कुल 43 लाख सात हजार 244 मतदाता ही थे. वहीं नये वोटर्स की संख्या जुडने के बाद यह संख्या 43 लाख 67 हजार 244 मतदाता हो गये. इससे 61 हजार नये मतदाता हैं जिन्हें पहली बार वोट करने का मौका मिलेगा.
- पुरूष के मुकाबले बढी महिला वोटर्स की संख्या
नये वोटर्स में जहां वोटर्स की संख्या बढी, वहीं इस बार पुरूषों के मुकाबले महिला वोटर्स की भी संख्या बढी है. जानकारी के मुताबिक महिला मतदाताओं की संख्या में दाे फीसदी इजाफा हुआ है. जहां एक हजार पुरूष मतदाताओं पर 855 महिला मतदाता थीं, वहीं इस बार एक हजार पुरूष मतदाताओं पर 857 महिला मतदाता हो गयी है. नये वोटर्स से बातचीत

पापा जिसे कहेगे उसे ही करेंगे वोट पहली बार वोटर आइडी कार्ड बना है. काफी उत्साहित हूं. लेकिन समझ में नहीं आता है कि किसे वोट करें. मै अपना पहला वोट ऐसे प्रत्याशी को देना चाहती हूं, जो सही मायने में काम करें. पापा जिसे कहेंगे उसे ही वोट दूंगी.क्याेंकि किसी भी नेता पर मुझे विश्वास नहीं है.
श्वेता कुमारी, थर्ड इयर स्टूडेंट, मगध महिला कॉलेज
उसे वोट करेगे जो सुरक्षा की बात करेगा
पहली बार मुझे अपनी बात कहने का मौका मिला है. अपने एक वोट के माध्यम से मुझे वो अधिकार मिला है जो मै इस्तेमाल करना चाहती हूं. हमारे शहर में अभी भी सुरक्षा को लेकर काफी संशय में रहता है. दिन में भी हम असुरक्षित महसूस करते है. ऐसे में वोट उसे ही देना है जो सुरक्षा की बात करेगा. साेनम कुमारी, पीजी प्रथम वष, पटना कॉलेज

अपनी मरजी का करेंगे इस्तेमालपहली बार वोट करूंगी. अपनी मरजी से करूंगी. अपनी मरजी से जिस पार्टी को वोट देने का मन करेगा, उसे ही करेंगे. हर चीजों पर दबाव हो सकता है, लेकिन वोट देने का मेरा अपना अधिकार है, इस कारण मै अपनी मरजी से इस्तेमाल करूंगी.
प्रगति, बीकॉम, मगध महिला कॉलेज
इसकी फोटो भी है. ग्रुप फोटो की हैँ \\B

रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फार्म में सीबीएसइ मांग रहा आधार नंबर

संवाददाता, पटना

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फार्म भरने में स्टूडेंट‌्स को आधार नंबर देने का भी एक आप्सन दिया है. जिन स्टूडेंट्स के पास आधार नंबर हो, वो अवश्य ही इसे बोर्ड को उपलब्ध करवायें. सीबीएसइ का आधार नंबर देने का नियम 9वीं और 11वीं के रजिस्ट्रेशन और 10वीं और 12वीं के परीक्षा फार्म भरने पर दिया गया है. पहली बार सीबीएसइ ने आधार नंबर को रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फार्म में देने का निर्देश स्टूडेंट को दिया है. इस संबंध में सीबीएसइ के सिटी कोर्डिनेटर राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि आधार नंबर को अभी कंपल्सरी नहीं किया गया है. आप्सनल है. जिन स्टूडेंट्स के पास आधार नंबर हो, वो फार्म भरते समय उसे डाल सकते है.

रेगुलर स्टुडेंट का वेरिफिकेशन करेगा सीबीएसइ

- एलओसी लिस्ट के साथ मांगा है रेगुलर स्टुडेंट की लिस्ट

संवाददाता, पटनास्कूलों में स्टूडेंट का एटेंडेंस कितना है. कितने स्टूडेंट‌‌स रेगूलर रूप में स्कूलों में क्लास किया है. अब इनकी जांच सीबीएसइ खुद ही करेगा. फिलहाल तो इस संबंध में स्कूलों से लिस्ट मांगी गयी है. बोर्ड ने तमाम स्कूलों को रेगूलर स्टुडेंट की लिस्ट उनके कांटैक्ट नंबर के साथ देने का निर्देश दिया है. यह निर्देश परीक्षा फार्म भराने के साथ दिया गया है. स्कूलों को एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंटस) फार्म अपलोड करने के साथ, रेगूलर स्टुडेंट की लिस्ट भी बोर्ड को सम्मिट करना होगा. पहली बार एटेंडेंस को लेकर सीबीएसइ ने इस तरह का प्रयास शुरू किया है.
दिसंबर से होगा रेंडमली जांच स्कूलों द्वारा सीबीएसइ को रेगुलर स्टुडेंट की लिस्ट भेजने के बाद बोर्ड उनकी जांच शुरू करेगा. जिन स्टुडेंट का नाम स्कूलों द्वारा भेजा जायेगा, उनसे पहले कांटैक्ट किया जायेगा. इसके बाद स्कूल कैंपस में रेंडमली जांच होगी. इस जांच में बोर्ड स्कूल के एटेंडेंस सीट की भी पूरे एक साल तक की जांच करेगा, जिसमें संबंधित स्टुडेंट के एटेंडेंस को देखा जायेगा. इसके अलावा उस दिन स्टुडेंट की उपस्थिति है या नहीं, यह भी बोर्ड देखेगा. यह जांच की प्रक्रिया एलओसी का फार्म भराने के बाद किया जायेगा.
स्कूल के गलत रिपोर्ट पर होगी कार्रवाईजो भी स्कूल गलत रेगूलर स्टूडेंट की रिपोर्ट बोर्ड को भेजेगें, उन स्कूलों पर कार्रवाई की जायेगी. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो कई सालों से ऐसा देखा जा रहा है कि स्टूडेंट साल भर क्लास नहीं करते और एडमिट कार्ड के समय उन स्टूडेंटस को लेकर स्कूल में हंगामा होता है. सीबीएसइ का यह नियम 10वीं ओर 12वीं दोनों ही बोर्ड की परीक्षा देने वाले स्टूडेंट पर लागू होगा. इस बार सीबीएसइ ने परीक्षा फार्म भराने से ही इस पर सख्ती कर दी है. ज्ञात हो कि इस बार जिन स्टूडेंट का 75 फीसदी एटेंडेंस नहीं होगा, वो परीक्षा फाॅर्म नहीं भर पायेंगे. 

छात्र के पास असली और बोर्ड के पास नकली रिजल्ट

-छह सालों से इंटर के रिजल्ट की सीडी को नहीं किया गया अपडेट

रिंकू झा, पटनाकेस वन : राघव राज 2011-12 सत्र का छात्र है. इंटर साइंस में राघव राज सेकेंड डिवीजन से पास हुआ. ग्रेजुएशन में नामांकन भी लिया. अभी हाल में राघव राज का अंक पत्र खो गया, इसके बाद राघव राज ने इंटर काउंसिल में दूसरे अंक पत्र के लिए आवेदन दिया. अब काउंसिल की ओर से राघव राज को थर्ड डिवीजन का अंक पत्र दे दिया गया है. राघव राज परेशान है कि वो इंटर सेकेंड डिवीजन से पास किया तो अब थर्ड डिवीजन का अंक पत्र उसे क्यूं मिल गया.
केस टू : पीयूष कुमार 2012-13 सत्र का छात्र है. इंटर कामर्स में रिजल्ट खराब हो जाने के बाद पीयूष ने स्क्रूटनी करवायी. स्क्रूटनी के बाद पीयूष प्रथम श्रेणी में पास हुआ. अंक पत्र भी काउंसिल की ओर से दे दिया गया. अब जबकि पीयूष ने मूल प्रमाण पत्र के लिए आवेदन दिया तो उसे सेकेंड डिवीजन का अंक पत्र प्राप्त हुआ है. अब पीयूष इंटर काउंसिल का चक्कर लगा रहा है. लेकिन उसकी दिक्कतें सुनने वाला कोई नहीं है.असली नकली के फेर में फंस रहे छात्र
अभी तक नाम में सुधार, अंकों में सुधार, रिजल्ट में देरी जैसे मामले को ही लेकर बिहार बोर्ड चर्चा में रहता था. लेकिन अब परीक्षा के बाद छात्रों के रिजल्ट के रिकार्ड को भी बोर्ड सही से नहीं रख पा रहा है. हर साल सैकड़ों छात्रों के स्क्रूटनी करके रिजल्ट तो तत्काल दे दिया जाता है, लेकिन बोर्ड की ओर से रिजल्ट की सीडी को अपडेट नहीं किया गया है. काउंसिल सूत्रों की माने तो पिछले कई सालों से स्क्रूटनी के रिजल्ट की सीडी को अपडेट नहीं किया गया है. इससे छात्रों को तो तत्काल असली रिजल्ट मिल गया है, लेकिन बोर्ड के पास स्क्रूटनी के पहले वाला ही रिजल्ट है. इससे काफी संख्या में ऐसे छात्र है जिनके पास तो असली रिजल्ट है, लेकिन बोर्ड के रिकार्ड में उनका रिजल्ट पुराना वाला ही नकली है. इसकी जानकारी छात्रों को उस समय होती है जब उन्हें मूल प्रमाण पत्र की जरूरत होती है. बोर्ड का चक्कर लगाते है छात्र
ऐसे में छात्र के पास ऑरिजनल अंक पत्र तो होता है, लेकिन काउंसिल के पास उसी छात्र का नकली अंक पत्र यानी स्क्रूटनी होने के पहले वाला अंक पत्र रखा हुआ है. ऐसे में छात्र को जब मूल प्रमाण पत्र की जरूरत होती है तो छात्र को काउंसिल में चक्कर लगाना पड़ जाता है. ज्ञात हो कि इंटर के रिजल्ट की सीडी पटना के बाहर तैयार होती है. लेकिन रिजल्ट में सैकड़ों ऐसे छात्र होते है जिनके रिजल्ट में परिवर्तन होता है. लेकिन इन छात्रों के रिजल्ट को काउंसिल अपडेट नहीं कर पाता है. इससे पुराना ही रिजल्ट बोर्ड के पास मौजूद है.2009 से 2014 तक नहीं हुआ सीडी अपडेट
इंटरमीडिएट के रिजल्ट की सीडी कई सालों से अपडेट नहीं किया गया है. इंटर के रिजल्ट के समय तो सीडी तैयार होता है, उसे ही रिकार्ड के तौर पर काउंसिल में रखा जाता है. रिजल्ट निकलने के बाद काफी संख्या में छात्रों का रिजल्ट खराब हो जाता है. ऐसे में छात्र स्क्रूटनी के लिए अप्लाई करते है. लेकिन स्क्रूटनी के बाद जिन छात्रों के रिजल्ट सही हो जाता है, उसे अपडेट नहीं किया गया है. इंटर काउंसिल सूत्रों की माने तो 2009 से 2014 तक रिजल्ट की सीड को अपडेट नहीं किया गया है. हजारों की संख्या में होता है स्क्रूटनी के लिए अप्लाई
हर साल स्क्रूटनी के लिए हजारों की संख्या में छात्र अप्लाई करते है. उन्हें रिजल्ट भी मिल जाता है. लेकिन जब स्टूडेंट को मूल प्रमाण पत्र की जरूरत होती है और वो इसके लिए काउंसिल के पास अप्लाई करते है तो उन्हें काउंसिल की ओर से स्क्रूटनी के पहले वाला मूल प्रमाण पत्र दे दिया जाता है. इसके बाद छात्रों के शिकायत करने पर स्क्रूटनी का रिजल्ट देखा जाता है, जिसके आधार पर मूल प्रमाण पत्र दे दिया जाता है. स्क्रूटनी के बाद अंक पत्र खो गया तो नहीं मिल पायेगा मूल प्रमाण पत्र
इंटर काउंसिल की ओर से छात्र के रिजल्ट की सीडी को अपडेट नहीं होने का खामियाजा छात्र को भुगतना पड सकता है. अगर किसी छात्र ने स्क्रूटनी करवाना और उसका स्क्रूटनी वाला अंक पत्र खो गया तो फिर उसे ऑरिजनल अंक पत्र नहीं मिल पायेगा. क्योंकि काउंसिल के रिकार्ड वाले रिजल्ट में उस छात्र का अंक पत्र स्क्रूटनी होने से पहले वाला अंक पत्र है.माक्स वेरिफिकेशन में फंस जायेंगे छात्र
बीपीएसइ, बैंकिंग, आइपीएस, सैनिक आदि की प्रतियोगी परीक्षा में सफल होने के बाद रिजल्ट का वेरिफिकेशन होगा तो छात्र फंस जायेंगे. क्योंकि सफल छात्रों के माक्स वेरिफिकेशन का काम संस्थान से डायरेक्ट किया जाता है. ऐसे में संस्थान की ओर से जब इंक्वायरी की जायेगी तो छात्र का मामला फंस जायेगा. लेकिन इसके बाद भी काउंसिल की नजर इस पर नहीं है. कोट
हमें इसकी जानकारी नहीं है. रिजल्ट निकलने के समय रिजल्ट की सीडी तो तैयार होती है. स्क्रूटनी का रिजल्ट वेबसाइट पर दे दिया जाता है. सीडी अपडेट होने की जानकारी मुझे नहीं है. अगर ऐसा है तो हम उस सीडी को अपडेट करवायेंगे. लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति\\\\B

सुनिता से अनिता होने में लग गये 21 साल

- अनिता कुमारी को अपने नाम और पिता के नाम को सुधवाने में लग गया 21 साल

रिंकू झा, पटनाइसे लापरवाही कहें या छात्रों के काम को नजरअंदाज करना कहें, लेकिन इसकी वजह से जो परेशानी छात्रों को उठानी पडती है, उसका खामियाजा तो उस छात्र को ही भरना पडता है. कई बार तो ऐसी लापरवाही से छात्र का पूरा कैरियर ही खत्म हो जाता है. कुछ ऐसा ही मामला बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पास भी आया है. इंटर काउंसिल के कुछ कर्मचारियो की लापरवाही और नजरअंदाज करने के कारण अनिता कुमारी के नाम के सुधार में पूरा 21 साल लग गया. 1992-94 सत्र की अनिता कुमारी इंटर की परीक्षा तो अच्छे नंबर से पास कर गयी, लेकिन अनिता कुमारी के नाम और उनके पिता के नाम के स्पेलिंग में गलती हो गयी.
70 हजार रूपये खर्च करने के बाद नाम में हुआ सुधार डीसी इंटर कॉलेज, बरहरिया, सीवान की छात्रा अनिता कुमारी के सारे कागजाद में अनिता कुमारी नाम दर्ज था. लेकिन जब 2010 में अनिता कुमारी ने मूल प्रमाण पत्र के लिए अप्लाई किया तो मूल प्रमाण पत्र में अनिता कुमारी की जगह सुनिता कुमारी और पिता गौतम रावत की जगह जकन यादव हो गया था. इसके बाद मूल प्रमाण पत्र में सुधार करने के लिए अनिता कुमारी ने आवेदन दिया. केस काफी पुराना होने के कारण इसमें कोई भी काम नहीं करना चाहता था. कर्मचारियों ने इसे इग्नोर कर दिया. इसके बाद अनिता कुमारी लगातार इंटर काउंसिल का चक्कर लगाती रही. लेकिन इंटर काउंसिल के कर्मचारी उसे टालते रहे. इसके बाद अनिता कुमारी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. अनिता कुमारी के पिता गौतम रावत ने बताया कि हाई कोर्ट ने भी इंटर काउंसिल को 2011 में चार महीने के अंदर मूल प्रमाण पत्र के साथ तमाम कागजाद सही करके देने का आदेश दिया. लेकिन हाई कोर्ट के आदेश को भी इंटर काउंसिल ने नहीं माना. गौतम रावत ने बताया कि एक नाम में सुधार करवाने में मुझे 70 हजार रूपये खर्च करने पड गये.
हाई कोर्ट के आदेश पर 30 अगस्त 2015 को मिला मूल प्रमाण पत्र गौतम रावन ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद इंटर काउंसिल ने पिता के नाम में ताे सुधार किया,लेकिन छात्रा के नाम में कोई सुधार नहीं किया. इसके बाद हम दुबारा इंटर काउंसिल दौडते रहे. कर्मचारी हमारी बातें मानते नहीं थथे.बार-बार कॉलेज से कागजाद लाने को बोलते रहे. हमने सारे कागजाद पहले ही काउंसिल में जमा कर दिया था. अंत में थक कर हम दुबारा हाई कोर्ट गये. इसके बाद 17 अगस्त 2015 को हाई कोर्ट ने समिति को आदेश दिया कि एक सप्ताह के अंदर छात्रा के मूल प्रमाण पत्र में नाम में सुधार कर छात्रा काे उपलब्ध करवायें. इसके बाद 30 अगस्त 2015 को हमें अनिता कुमारी का सही मूल प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ है.
मूल प्रमाण पत्र मिलने पर गलती का पता चला अनिता कुमारी अगर अपने मूल प्रमाण पत्र लेने इंटर काउंसिल नहीं जाती तो गलती का पता भी नहीं चलता. इंटर काउंसिल के कर्मचारियों के द्वारा किये गये इस गलती का पता 16 सालों के पास अनिता कुमारी को पता चला. इसके बाद इसे सुधरवाने में पूरे पांच साल लग गये.
समिति ने तीन कर्मचारी को किया सस्पेंड अनिता कुमारी के नाम में सुधार नहीं करने और लापरवाही बरतने के कारण बाद में समिति ने तीन कर्मचारी प्रमोद सिंह, सुरेश गुप्ता, तुलसी रिषीदेव को सस्पेंड कर दिया. अनिता कुमारी को इंटर का मूल प्रमाण पत्र भी मिल गया, लेकिन इस सारे प्रकरण में अनिता कुमारी को 70 से 80 हजार रूपये खर्च करने पड़ गये.
कोटअनिता कुमारी के संबंध में जो भी कागजाद थे, समय पर ही काउंसिल को उपलब्ध करवा दिया गया था. मैट्रिक के साथ इंटर के नामांकन आदि का भी प्रमाण पत्र दे दिया गया था. लेकिन फिर भी इतना समय लग गया.
सुरेश प्रसाद यादव, पूर्व प्राचार्य, डीसी इंटर कॉलेज, बरहरिया, सीवान\\B

Friday, September 11, 2015

सीबीएसइ की सिंगल गर्ल चाइल्ड स्काॅलरशिप शामिल होंगी अब सैकडों बेटियां - सीबीएसइ ने सिंगल गर्ल चाइल्ड स्काॅलरशिप को किया आसान

संवाददाता, पटना

बेटियां पढेगी तो बढेंगी बेटियां. बेटियों को पढाई से जोडने के लिए सेंट्रल बोर्ड आॅफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने कई स्काॅलरशिप में बेटियों को सुविधा देने का प्लान किया है. इसकी शुरूआत बोर्ड की ओर से सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप के साथ किया गया है. सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप के तहत अब सैकडों बेटियों को फाइदा होने वाला है. सीबीएसइ ने स्काॅलरशिप की शर्त को काफी आसान बना दिया है.
- कम मार्क्स आने पर भी मिलेगा स्काॅलरशिप सीबीएसइ के अनुसार अब जिन बेटियों को 10वीं बोर्ड की परीक्षा में कम अंक प्राप्त होंगे, उन्हें भी स्कॉलरशिप से जोडा जायेगा. इसके तहत अब उन सिंगल गर्ल चाइल्ड को भी शामिल किया जायेगा जिन्हें 10वीं बोर्ड की परीक्षा में 60 फीसदी अंक प्राप्त होंगे. वहीं सीबीएसइ के 10वीं बोर्ड की परीक्षा में 6.2 सीजीपीए के तहत मार्क्स प्राप्त होंगे. सीबीएसइ द्वारा यह 2016 सत्र में 10वीं बोर्ड परीक्षा देने वाली स्टूडेंट पर लागू किया जायेगा. ज्ञात हो कि अब तक 80 फीसदी या 8.2 सीजीपीए लाने वाली स्टूडेंट ही सिंगल गर्ल चाइल्ड स्काॅलरशिप के तहत आवेदन दे पाती थी.
- एकलौती संतान को मिलता है स्काॅलरशिप सीबीएसइ द्वारा 10वीं बोर्ड के बाद लडकियों के लिए बेहतर शिक्षा को लेकर एकलौती संतान के रूप में बेटियों के लिए यह स्काॅलरशिप चल रहा है. लेकिन अब तक इस स्कॉलरशिप के साथ अधिकतर बेटियां मार्क्स कम आने के कारण छंट जाती थी. लेकिन अंक कम कर देने से अधिकतर बेटियों को जोडा जा सकेगा. इसके तहत हर महीने 500 रूपये की राशि स्टूडेंट को 12वीं की दो सालों की पढाई के लिए दिया जाता है.
कोटसीबीएसइ ने सिंगल गर्ल चाइल्ड स्काॅलरशिप के अंकों के शर्त को कम कर देने से काफी संख्या में स्टूडेंट को फाइदा होगा. कई सिंगल गर्ल चाइल्ड होने के बावजूद इसका फायदा नहीं मिल पा रहा था.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया \\B

पीएसए एग्जाम हो जायेगा बंद

9वीं क्लास के स्टूडेंट इस बार नहीं देंगे पीएसए

संवाददाता, पटनाप्राब्लम सॉल्विंग असेसमेंट (पीएसए) देने से अब सीबीएसइ स्टूडेंट्स बच जायेंगे. उनको पीएसए की अलग से तैयारी नहीं करनी पड़ेगी, क्योंकि सीबीएसइ पीएसए को बंद करने की प्लानिंग करने जा रहा है. जल्द ही इसको लेकर निर्देश भी जारी कर दिया जायेगा. हाल में हुए सीबीएसइ की एक बैठक में यह फैसला लिया गया है. इसके तहत अब 9वीं और 10वीं के स्टूडेंट को पीएसए की परीक्षा नहीं देनी होगी. अब एक ही परीक्षा फाइनल मार्च में देना होगा. ज्ञात हो कि पीएसए की परीक्षा में 9वीं और 10वीं के स्टूडेंट्स शामिल होते है.
9वीं के स्टूडेंट नहीं देंगे पीएसए 2016 9वीं फाइनल की परीक्षा में शामिल होने वाले स्टूडेंट को पीएसए नहीं देना होगा. सीबीएसइ जल्द ही इसको लेकर स्कूलों को सूचित भी करने जा रहा है. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो इस बार 10वीं के स्टूडेंटस ही पीएसए की परीक्षा में शामिल होंगे. लेकिन 9वीं क्लास के स्टूडेंट केवल फाइनल परीक्षा ही देंगे. पीएसए अलग से उन्हें अब नहीं देना होगा. सीबीएसइ अगले साल से पीएसए को पूरी तरह से बंद करने की तैयारी कर रहा है.
पीएसए के अंक जुडते है टोटल मार्क्स में 9वीं के फाइनल एग्जाम और 10वीं बोर्ड के रिजल्ट में पीएसए का अंक जुडता है. 9वीं के फाइनल और 10वीं बोर्ड की परीक्षा होने के पहले पीएसए की परीक्षा ली जाती है. मैथ, साइंस, सोशल साइंस और लैंग्वेज विषय की परीक्षा इसके तहत ली जाती है. 40 अंक के पीएसए की परीक्षा के हर विषयों का एवरेज मार्किंग निकाल कर टोटल अंक में जोडा जाता है, उसके बाद फाइनल रिजल्ट स्टूडेंट को दिया जाता है.
ऐसे बदलता गया पीएसए का सिस्टम सीबीएसइ की ओर से 10वीं बोर्ड में सीसीइ (कंटीन्यूअस एंड कंप्रीहेसिव इवैल्यूएशन) लागू करने के बाद पीएसए को जोडा गया. शुरूआत में पीएसए आप्सनल किया गया था. लेकिन स्टूडेंट की उपस्थित काफी कम होने के बाद साल में चार बार लिये जाने वाले एफए-4 (फार्मेटिव एसेसमेंट) के बदले पीएसए को कर दिया गया. ऐसे में पीएसए को 9वीं और 10वीं स्टूडेंट के लिए कंपल्सरी कर दिया गया.
पीएसए बंद होने से नुकसान - पीएसए की तैयारी के लिए सब्जेक्ट के अतिरिक्त स्टूडेंट को तैयारी करनी पडती थी
- प्रतियोगी परीक्षा को लेकर स्टूडेंट को तैयार किया जाता था - सब्जेक्ट के रटने की आदत से स्टूडेंट को छुटकाना मिलता था
- स्टूडेंट क्रियेटिव सोच नहीं कर पायेंगे