Monday, November 16, 2015

छठ महा पर्व उत्सव नहीं व्रत है, तभी आस्था से इतना जुड़

संवाददाता, पटना

किसी भी पर्व या त्योहार की बात कर लीजिए, उन त्योहारों को हम उत्सव की तरह मनाते है. लेकिन छठ ऐसा नहीं होता है. छठ दूसरे तमाम पर्व त्योहार से अलग है. यह उत्सव नहीं बल्कि व्रत है. यह एक अनुष्ठान है, चार दिनों तक किया जाता है. यही कारण है कि छठ को महापर्व का दर्जा दिया गया है. व्रत की वजह से ही छठ के प्रति अटूट आस्था से जुड़ा है. इसमें भगवान सूर्य से सीधा संपर्क व्रती का होता है. ना तो पंडित की जरूरत होती है और ना ही कोई विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है. छठ महापर्व में हर साल मै भी व्रत करती थी. मैने लगभग 10-15 साल छठ का व्रत किया. मुझसे पहले मेरी सास करती थी. अब मेरी बहू करती है. हम लोग एएन सिन्हा के पास गंगा घाट पर जाकर छठ करते थे. चार दिनों के अनुष्ठान में हर दिन गंगा जल से ही सारी प्रक्रिया पूरी की जाती थी. नहाय खाय के दिन नदी में स्नान करना, खरना के दिन गंगा नदी में स्नान करने के बाद शाम और सुबह के अर्घ के समय गंगा घाट पर ही जाते थेे. गंगा घाट पर पानी में खड़ा होना और भगवान सूर्य को अर्घ देने का अलग ही अनुभव होता था. घाट पर जाने का जो कष्ट होता है, वह और भगवान के नजदीक ला देता है. कई लोग तो शाम में जाने के बाद सुबह का अर्घ देने के बाद ही घाट से वापस आते थे. यह अनुभव बहुत ही अच्छा लगता था. लेकिन अब पटना के कई घाटों से गंगा दूर चली गयी है. इससे लोग अब घरों में अधिक छठ करने लगे है. घर में छठ करना अब लोगों की मजबूरी हो गयी है, लेकिन वो अनुभव नहीं मिलता है जो घाट पर जाकर मिलता है. अब अपने पारिवार के बीच ही लोग छठ व्रत संपन्न करते है. पहले ऐसा नहीं होता था. घाट पर ऐसे कई लोग होते है जो समाज के होते है. जो व्रती को प्रणाम करते है और व्रती उन्हें आशीर्वाद देतीं है. समाज का यह दृश्य बहुत ही अच्छा होता है. लगता है कि हर कोई एक परिवार हो गया है. छठ एक ऐसा महापर्व है जिसमें अपना पराये का सारा भेदभाव ही खत्म कर देता है. छठ महापर्व सामूहिक पर्व है. इसमें हम एक दूसरे का सहयोग लेकर अनुष्ठान पूरा करते है. व्रत और उसके प्रति आस्था के कारण ही लाखों लोग छठ व्रत से जुड़ते जा रहे है. यह एक ऐसा अनुष्ठान है जिसमें डूबते और उगते हुए सूर्य की पूजा की जाती है. भगवान को अर्घ देकर ही इस अनुष्ठान का समापन होता है. छठ व्रती चारों दिन भगवान सूर्य की पूजा करते है.
उषा किरण खान, साहित्यकार \\B

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