Wednesday, November 25, 2015

पान का डिमांड कम, फिर भी पान का स्टॉल आनंद मेला का है शान

- तीन दिनों का विद्यापति समारोह बाल मेला और आनंद मेले के साथ हुआ समाप्त

संवाददाता, पटना1975 से पान का स्टाॅल लगा रही प्रेम लता मिश्र के पान की आज भी उसी दाम पांच रूपये में ही मिलता है. प्रेम लता बताती है कि पान के स्टॉल के बिना आनंद मेला का मजा अधूरा है. पान का डिमांड अब कम हो गया है, लेकिन फिर भी लोग शौक से मेले में पान खाते है. कुछ ऐसा ही सरिता झा के सकरौरी (दूध और बुंदिया से बना एक मीठा व्यंजन) का था. 20 साल से सरिता जी आनंद मेला में स्टॉल लगा रही है. सरिता जी के अनुसार कुल व्यंजन हम लोग घर से बना कर लाते है तो कुछ व्यंजन मेला में ही बना कर परोसते है. हर किसी का अपना स्टॉल था. हर स्टॉल पर अलग- अलग मिथिलांचल की खुशबू की महक थी. विद्यापति समारोह के तीन दिनों के कार्यक्रम में अंतिम दिन बाल मेला और आनंद मेला का आयोजन किया जाता है. मैथिली महिला संघ द्वारा आयोजित इस मेले का उद्घाटन कांग्रेस की विद्यालय भावना झा ने किया.
- मछली और चूरा का दिखा अभाव इस बार आनंद मेला में मछली और चूरा का अभाव दिखा. मीठा और नमकीन बगिया की स्टॉल पर बैठी प्रो. अरूणा चौधरी ने बताया कि हर बार मै मेला में मछली और चूरा का ही स्टॅाल लगाती थी. लेकिन इस बार कार्तिक पूर्णिमा होने के कारण यह व्यंजन नहीं बनायी हूं. इस बार मिथिलांचल की बगिया से लोग आनंदित हो रहे है. चार घंटे तक चले इस मेले में मिथिलांचल के कई प्रसिद्ध व्यंजनों का स्टॉल लगाया गया था. इसमें मखान की खीर, तिलकोर का तरूवा, अरकोच पत्ता का तरूवा आदि मुख्य रूप से शामिल था.
- तीन दिनों का समारोह हुआ समाप्त
बाल मेला, आनंद मेला और शाम में मैथिली नाटक के साथ तीन दिनों तक चल रहा विद्यापति समारोह बुधवार को समाप्त हो गया. मैथिली नाटक ऑब्जेक्क्शन मी लॉड का मंचन किया गया. बिहार अभियंता सेवासंघ के प्रांगण में आयोजित इन कार्यक्रम में काफी लोगों मौजूद थे. कलम मोहन चून्नू के निदेशन में अायोजित मैथिली नाटक का मंचन किया गया. इस मौके पर चेतना समिति के अध्यक्ष विजय कुमार मिश्र, सचिव वासुकीनाथ झा, विवेकानंद ठाकुर, मिडिया प्रभारी सुजीत चौधरी समेत कई लोग मौजूद थे. 

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