Saturday, November 21, 2015

पांच सालों तक टीचर्स का नहीं होगा ट्रांसफर

- सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने दिया निर्देश

संवाददाता, पटनाअब स्कूल किसी भी टीचर्स का ट्रांसफर नहीं कर सकता है. जो टीचर जिस स्कूल के लिए नियुक्त किये जायेंगे, वो उसी स्कूल में रहेंगे. स्कूल प्रशासन किसी भी तरह का फेल बदल नहीं कर सकता है. टीचर्स को लेकर सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने स्कूलों को निर्देश दिया है. निर्देश में कहा गया है कि टीचर्स अपनी मरजी से स्कूल छोड़ना चाहे तो छोड़ सकता है, लेकिन स्कूल किसी भी टीचर्स पर ट्रांसफर या स्कूल छोड़ने का दबाव नहीं डाल सकता है.
स्कूल की गलती पकड़ा जायेगा डाटा टीचर्स बैंक से स्कूल किसी भी टीचर्स को जब चाहे निकाल ना दे, इसको लेकर सीबीएसइ ने एक डाटा टीचर्स बैंक बनाया है. इसमें हर स्कूलों को टीचर्स संबंधित तमाम जानकारी डालना है. इस डाटा बैंक को खुद टीचर्स की अपनी सारी जानकारी देकर भरेंगे. सीबीएसइ के पास अब तमाम स्कूलों के टीचर्स की जानकारी रहेगी. इससे बोर्ड को यह भी पता चलेगा कि किस स्कूल में कितने टीचर है. इससे परमानेंट और एडहॉक टीचर्स के बारे में भी सीबीएसइ की पकड़ में स्कूल आसानी से आ जायेगा. डाटा टीचर्स बैंक के माध्यम से सीबीएसइ समय-समय पर स्कूल की जांच भी करेगा.
हर पांच से छह महीने पर बदल देते है टीचर्स पटना के कई स्कूल टीचर्स बदलने में ना तो सेशन देखते है और ना एग्जाम का समय. जब चाहा स्कूल में टीचर्स बदल देते है. इतना ही नहीं कई स्कूल तो एफिलिएटेड स्कूल से टीचर्स का ट्रांसफर ब्रांच स्कूल में कर देते है. ऐसे में टीचर्स को स्कूल छोड़ने पर मजबूर होना पड़ता है. इसका असर स्कूल मे क्वालिटी एजुकेशन पर पड़ता है. स्टूडेंट टीचर्स की पढ़ाई समझ नहीं पाते, उससे पहले ही टीचर्स को हटा दिया जाता है या फिर ट्रांसफर कर दिया जाता है. इसकाे लेकर कई टीचर्स से सीबीएसइ के पास शिकायत भी किया है.
कोटएक स्कूल में टीचर्स लंबे समय तक रहते है तो वहां के स्टूडेंट के लिए काफी फायदा होता है. टीचर्स अौर स्टूडेंट के बीच एक हेल्दी रिलेशन भी बन जाता है. बार-बार टीचर्स को बदलने से क्वालिटी एजुकेशन पर असर होता है. ऐसे में सीबीएसइ का यह पहल काफी अच्छा है. इससे टीचर्स में भी डर नहीं बना रहेगा.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया \\B

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