Rinku Jha
Sunday, November 15, 2015
भगवान के प्रति अटूट विश्वास और आस्था का पर्व है छठ
संवाददाता, पटना
भगवान भास्कर के प्रति अटूट विश्वास और आस्था से जुड़ा हुआ पर्व है छठ. यह एक ऐसा पर्व है जिसमें किसी मूर्ति की पूजा नहीं हाेती है. प्रकृति के स्वरूप भगवान सूर्य की पूजा की जाती है. जहां तक मेरी जानकारी है छठ पर्व की शुरूआत मगध की धरती से हुई है. जब बौद्ध धर्म अपने चरम पर था. बौद्ध धर्म को हटाने के लिए सूर्य की पूजा लोगों ने शुरू किया. चूंकि यह प्रकृति से जुड़ा हुआ है, इससे लोग इस पर्व से जल्दी ही जुड़ गये. मगध से निकला यह पर्व बिहार के दूसरे जिलों में फैला और अब तो यह देश के हर हिस्सों में मनाया जाता है. विदेशों में भी छठ अब मनाये जाने लगा है. मेरे यहां छठ नहीं होता है. मै संथाल परगणा का रहने वाला हूं. उन दिनों हमारे जिले में छठ नहीं होता था. लेकिन जब मै बड़ा हुआ तो इस पर्व के प्रति आस्था बनने लगी. यह पर्व हर पर्व से बिल्कुल ही अलग होता है. इस पर्व की सबसे अच्छी बात है कि इसमें किसी पंडित या पुरोहित की जरूरत नहीं होती, लेकिन फिर भी इस पर्व में हर वर्ग के लोगों की जरूरत होती है. सूर्य को हम प्रकृति के रूप में जानते हैं. इस कारण हर धर्म, जाति के लाेग का इस पर्व के प्रति आस्था है. इस पर्व में कोई भेदभाव नहीं होता है. यह जनमानस का पर्व है. इससे हर कोई सीधे जुड़ा हुआ है. हर वर्ग के लोग एक साथ एक जगह नदी, तालाब आदि में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते है. चार दिनों के इस महापर्व में ऐसा दिखता है कि हर कोई बस सूर्य की ही उपासना में लगा रहता है. भगवान भास्कर का उनके उपर कृपा बनी रहे, इसके लिए हर कोई इस पर्व से जुड़ता है. मुझे ऐसा लगता है कि हर साल इस पर्व से सैकड़ों लोग जुड़ते है. जो भी एक बार इस पर्व से जुड़ जाता है, वो हर साल इस पर्व में जुड़ना चाहता है. इस पर्व की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी है. गरीब हो या अमीर, इस पर्व में हर कोई एक समान होता है. जिनके घर छठ नही होता है, वो भी अपने आप को किसी ना किसी रूप में इस पर्व से जोड़ते है. कोई साफ सफाई तो कोई सेवा कर इस पर्व से जुड़ जाता है. चार दिनों के अनुष्ठान में पहले दिन से लेकर अंतिम अर्घ्य देने दिन तक इस पर्व में महता बनी रहती है. इस पर्व से सीधा जुड़ाव भगवान से होता है. तभी तो चार दिनों के अनुष्ठान और खास कर लगातार 36 घंटे तक निर्जला व्रत करना आसानी से हो जाता है. भगवान सूर्य की आराधना करने से मनोकामना तुरंत पूरा होता है. वर्तमान में हमारे कई पर्व त्योहार आधुनिकता में बदल चुका है. लेकिन छठ पर्व में आज भी ट्रेडिशनल का ख्याल रखा जाता है. आज भी इस पर्व में पारंपरिक चीजों का ही ख्याल रखा जाता है.
खगेंद्र ठाकुर, साहित्यकार
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