Rinku Jha
Monday, November 16, 2015
आस्था की राह में धर्म नहीं बनती रोड़ा
- पिछले दस सालों से कई मुसलिम परिवार छठ व्रती के सेवा भाव में करते है सड़क और गलियों की सफाई
रिंकू झा, पटना
धर्म कभी भी अलग करने के लिए नहीं बल्कि साथ चलने की प्रेरणा देता है. कोई भी धर्म अच्छे व्यवहार से ही समाज में सही संदेश देता है. कुछ ऐसा ही संदेश छठ महापर्व में भी देखने को मिलता है. जब मुसलिम परिवार के लोग छठ व्रतियों को अपने तरीके से सहयोग देते है. छठ व्रतियों को कोई दिक्कतें ना हो, चार दिनों के छठ महापर्व के अनुष्ठान को सही से कर सके, इसके लिए दस दिन पहले से ही मुसलिम परिवार के लोग काम शुरू कर देते है. दरियापुर इलाके के रहने वाले कुछ मुसलिम परिवार छठ महापर्व में अपना पूरा सहयोग देते है.
प्याज लहसून तक रखते है वर्जित
छठ महापर्व के प्रति हर किसी की आस्था है. तभी तो छठ व्रती की सेवा करने के लिए प्याज लहसून तक खाना बंद कर देते है. सब्जीबाग की रहने वाली शहजादी बेगन ने बताया कि छठ महापर्व के प्रति हमारी काफी अास्था है. ऐसे में हम अपनी तरफ से छठ व्रतियों के लिए कुछ करना चाहते है. छठ व्रतियों की सेवा करने के लिए हम एक सप्ताह पहले से ही प्याज लहसून तक छोड़ देते है. हम भी उनकी तरह शुद्ध होकर सेवा करना चाहते है. वहीं शहनाज बेगम ने बताया कि मुहल्ले भर में मीट आदि के बिकने पर भी रोक लगा दिये जाते है.
छठ व्रतियों के लिए सड़क पर बिछाते है कालीन
पहले सड़क की सफाई, फिर सड़क पर पानी का छिड़काव, चूना से सारी गंदगी को हटाया जाता है. दरियापुर रोड से लगभग दो हजार छठ व्रती गंगा घाट के लिए गुजरती है. ऐसे में छठ व्रतियों के लिए पूरे सड़क पर कालीन बिछाया जाता है. दरियापुर के रहने वाले इरफाना खातून ने बताया कि छठ व्रती के लिए हम दस दिन पहले से ही सड़क, गली आदि की सफाई शुरू कर देते है. शाम के अर्घ के समय व्रतियों के लिए सड़क पर कालीन बिछाया जाता है. दो दिनों तक सड़क को पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है. इस दौरान बस पैदल ही लोग चलते है.
व्रती मांगेंगी तो भगवान जरूर सुनेंगे
छठ व्रती भगवान भास्कर से हमारे लिए प्रार्थना करें, इसके लिए शाम और सुबह के अर्घ के समय घाट पर भी जाते है. इरफाना खातून ने बताया कि छठी व्रती हमारे लिए भगवान सूर्य से प्रार्थना करते है. हम खुद तो मन्नतें नहीं मांगते, लेकिन हमें विश्वास होता है कि अगर छठ व्रती हमारे लिए भगवान से कुछ कहेगे तो भगवान जरूर सूनेंगे. एेसा होता भी है. हमें इस सेवा भाव से काफी सूकून मिलता है.
मिश्री घाट की करते थे सफाई
अभी एक साल से मिश्री घाट को प्रशासन से खतरनाक घाट घोषित कर दिया है. इस कारण अब मुसलिम परिवार मिश्री घाट की सफाई नहीं कर पाते है. सब्जीबाग के रहने वाले तौफिक आलम ने बताया कि मिश्री घाट की सफाई हम हर साल करते थे. लेकिन अभी एक साल से नहीं कर पाते थे. इससे अब दरियापुर रोड की पूरी सफाई करते है. छठ व्रतियों की सुविधा के लिए हर काम करते है.
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