Rinku Jha
Sunday, November 15, 2015
यहां मन्नतों की है मान्यता, पर अब गंगा हुई दूर
- पटना के कई घाटों से जुड़ी लोगों की आस्था
रिंकू झा, पटना
शहर के कई घाटों को लेकर लोगों की अपनी-अपनी मान्यता व आस्था जुड़ी हुई हैं. भले ही समय के साथ इन घाटों का स्वरूप बदला हो, लेकिन इनका महत्व नहीं घटा है. गंगा का पानी दूर चले जाने की वजह से यहां पर छठ पूजा करना संभव नहीं रहा, फिर भी बड़े दूर-दूर से लोग मनौती लेकर यहां छठ पूजा करने पहुंच रहे हैं. मान्यता है कि जिस घाट पर मनौती मांगी जाती है, उसी घाट पर छठ व्रत पूरा करना होता है. ऐसा ही एक कलेक्ट्रियट घाट है, जहां पर जहानाबाद से आये परमहंस और रूबी सिंह नहाय खाय से लेकर पूरा पर्व करने की तैयारी में हैं. उनकी मान्यता है कि कभी इसी घाट पर छठ पूजा की मनौती मांगने पर उनके घर बेटा हुआ था. इसलिए यहां पर पर्व पूरा करेंगे. यहीं आस्था सैकड़ों लोगों की है जो अन्य घाटों से भी जुड़ी है. हर साल पटना में सैकड़ों लोग इसी आस्था से छठ व्रत करने को आते हैं.
कई गोद में आयी खुशहाली
गंगा नदी अब कई घाटों से दूर जा चुकी है. लेकिन छठ व्रतियों के लिए आज भी वहीं घाट महत्वपूर्ण हैं, जहां पर उनकी मनोकामना पूरी हुई थी. आज भी कई परिवार कलेक्ट्रेट घाट पर आकर छठ करते है. कलेक्ट्रेट घाट के बारे में मान्यता है कि इस घाट पर खड़े होकर जिसने भी जो मनोकामना की, उसकी पूरी हुई है. पांच साल पहले तक कलेक्ट्रेट कैंपस में हजारों श्रद्धालु आया करते थे. अब व्रतियों की संख्या इस घाट पर कम हो गयी है. लेकिन इसके वाबजूद छठ व्रती इस घाट पर अाकर खरना करते है.
कृष्णा घाट पर खुद मां बोलती है
गंगा की कल-कल घारा से आशीर्वाद मिलता रहता है. यू तो अब पानी कम हैं, लेकिन आस्था कम नहीं हुई है. यहां की मान्यात को लेकर राजीव कुमार बताते है कि कई तरह की बीमारी यहां पर स्नान करने से दूर हो जाती है. पुरानी मान्यता हवाला देते हुए राजीव ने बताया के महेंद्रू घाट और कृष्णा घाट का काफी महत्व हुआ करता था. वक्त बदल गया है, मगर आस्था आज भी इस घाट के प्रति वहीं है.
तीन मां का वरदान
दरभंगा महाराज की हवेली से होकर मां काली की पूजा और फिर गंगा के किनारे छठ व्रत करने की परंपरा काफी पुरानी है. इस घाट को लेकर अलग-अलग लोगों का अपना अनुभव है. इस घाट के प्रति मान्यता है कि इस घाट पर आने से सभी की मन्नतें पूरी होती हैं. तीन मां एक साथ उसे आशीष देती है. रूक्मिणी देवी ने बताया के तीनों मां का आशीर्वाद उनके घर पर बना रहता है.
आस्था के आगे कुछ नहीं दिखता
अदालत घाट पर छठ के दौरान भगदड़ को एक हादसा मनाने वाले छठ व्रतियों ने बताया कि यह पूरा का पूरा आस्था से जुड़ा है. जिसकी जहां पर आस्था होती है वो उसी घाट पर आकर छठी मइया की पूरा अर्चना करते है. भगवान भास्कर को अर्घ्य देते है और अपनी मनोकामना पूरा करने के लिए गुहार भी लगाते है. राजीव ने बताया कि वे लोग शाम के अर्घ्य के लिए सुबह से ही घाट किनारे आ जायेंगे.
पटना विवि घाट पर मांगते है मनौती
पटना के गंगा नदी की महिमा हर तरफ है. प्रदेश के दूसरे जगहो से भी लोग यहां पर छठ करने को आते है. लोग शुभ काम करने के लिए यहां आते है. बच्चों का मुंडन से लेकर पूजा पाठ और कर्म कांड करवाया जाता है. पटना विवि घाट उन लोगों के लिए था जो पटना में छठ करने आना चाहते थे. आज भी बाहरी लोगों के लिए यह घाट काफी महत्वपूर्ण है. लोग बाहर से आकर यहां पर छठ करते है.
बिना घाट पर गये नहीं होता पूजा पूरी
तमाम छठ व्रती गंगा के किसी ना किसी घाट पर जरूर जाते है. नहाय खाय से लेकर खरना के बीच व्रती एक बार गंगा नदी में जाकर स्नान और फिर वहां से जल भरती है. डा. शांति राय ने बताया के गंगा नदी में भीड़ अधिक होने से हम लाेग अब घर में ही छठ करते है. लेकिन चार दिनों के अनुष्ठान में एक बार जरूर गंगा घाट जाकर स्नान करते है.
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