Wednesday, November 25, 2015

पान का डिमांड कम, फिर भी पान का स्टॉल आनंद मेला का है शान

- तीन दिनों का विद्यापति समारोह बाल मेला और आनंद मेले के साथ हुआ समाप्त

संवाददाता, पटना1975 से पान का स्टाॅल लगा रही प्रेम लता मिश्र के पान की आज भी उसी दाम पांच रूपये में ही मिलता है. प्रेम लता बताती है कि पान के स्टॉल के बिना आनंद मेला का मजा अधूरा है. पान का डिमांड अब कम हो गया है, लेकिन फिर भी लोग शौक से मेले में पान खाते है. कुछ ऐसा ही सरिता झा के सकरौरी (दूध और बुंदिया से बना एक मीठा व्यंजन) का था. 20 साल से सरिता जी आनंद मेला में स्टॉल लगा रही है. सरिता जी के अनुसार कुल व्यंजन हम लोग घर से बना कर लाते है तो कुछ व्यंजन मेला में ही बना कर परोसते है. हर किसी का अपना स्टॉल था. हर स्टॉल पर अलग- अलग मिथिलांचल की खुशबू की महक थी. विद्यापति समारोह के तीन दिनों के कार्यक्रम में अंतिम दिन बाल मेला और आनंद मेला का आयोजन किया जाता है. मैथिली महिला संघ द्वारा आयोजित इस मेले का उद्घाटन कांग्रेस की विद्यालय भावना झा ने किया.
- मछली और चूरा का दिखा अभाव इस बार आनंद मेला में मछली और चूरा का अभाव दिखा. मीठा और नमकीन बगिया की स्टॉल पर बैठी प्रो. अरूणा चौधरी ने बताया कि हर बार मै मेला में मछली और चूरा का ही स्टॅाल लगाती थी. लेकिन इस बार कार्तिक पूर्णिमा होने के कारण यह व्यंजन नहीं बनायी हूं. इस बार मिथिलांचल की बगिया से लोग आनंदित हो रहे है. चार घंटे तक चले इस मेले में मिथिलांचल के कई प्रसिद्ध व्यंजनों का स्टॉल लगाया गया था. इसमें मखान की खीर, तिलकोर का तरूवा, अरकोच पत्ता का तरूवा आदि मुख्य रूप से शामिल था.
- तीन दिनों का समारोह हुआ समाप्त
बाल मेला, आनंद मेला और शाम में मैथिली नाटक के साथ तीन दिनों तक चल रहा विद्यापति समारोह बुधवार को समाप्त हो गया. मैथिली नाटक ऑब्जेक्क्शन मी लॉड का मंचन किया गया. बिहार अभियंता सेवासंघ के प्रांगण में आयोजित इन कार्यक्रम में काफी लोगों मौजूद थे. कलम मोहन चून्नू के निदेशन में अायोजित मैथिली नाटक का मंचन किया गया. इस मौके पर चेतना समिति के अध्यक्ष विजय कुमार मिश्र, सचिव वासुकीनाथ झा, विवेकानंद ठाकुर, मिडिया प्रभारी सुजीत चौधरी समेत कई लोग मौजूद थे. 

प्रश्न पत्र देख कर करें परीक्षा की तैयारी, सीबीएसइ ने डाला वेबसाइट पर

- ओटबा का सिलेबस देख कर ही करें परीक्षा की तैयारी

संवाददाता , पटनापरीक्षा का समय नजदीक आने लगा है. समय पर परीक्षा की तैयारी हो, इसके लिए स्कूल के साथ सीबीएसइ ने भी तैयारी शुरू कर दी है. सीबीएसइ ने इसकी शुरुआत ओपेन टेस्ट बेस्ड असेसमेंट (ओटबा) के सिलेबस से किया है. 9वीं और 11वीं के लिए सीबीएसइ ने प्रश्न पत्र में पूछे जाने वाले टॉपिक के बारे में स्टूडेंट को जानकारी दे दी है. इसी प्रश्न पत्र के आधार पर स्टूडेंट परीक्षा की तैयारी करेंगे. सीबीएसइ के अनुसार 9वीं और 11वीं में 20 फीसदी प्रश्न ओटबा से आते है. ऐसे में स्टूडेंट का फाइनल परीक्षा की तैयारी समय से हो, इसके लिए सीबीएसइ ओटबा का सिलेबस जारी किया है.
- 10वीं और 12वीं में ओटबा को किया गया खत्म सीबीएसइ ने इस साल से 10वीं अौर 12वीं में ओटबा को खत्म कर दिया है. इस कारण इस बार केवल 9वीं और 11वीं मे ही ओटबा के तहत प्रश्न पूछे जायेंगे. ज्ञात हो कि ओटबा के तहत 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा ली जाती थी. लेकिन स्टूडेंट की शिकायत के बाद सीबीएसइ ने इसे बंद कर दिया है. ओटबा के तहत 20 फीसदी प्रश्न का सेट सीबीएसइ स्टूडेंट को उपलब्ध करवाती है. इसके तहत 9वीं और 11वीं के फाइनल एग्जाम में जो प्रश्न पूछे जायेंगे, उसके टॉपिक की जानकारी सीबीएसइ परीक्षा के तीन महीने पहले ही दे देता है. इन टॉपिक के आधार पर ही प्रश्न पत्र बनाये जाते है.
9वीं में इन टॉपिक को पढ़ेंगे स्टूडेंट्स सब्जेक्ट - सिलेबस - ओटबा का सिलेबस
हिंदी अ - पर्यावरण संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण - पर्यावरण और महिला सशक्तिकरण इंगलिश - रिडिंग सेक्शन - लेट्स वेलकम, एक्सेप्ट एंड रिस्पेक्ट
मैथमेटिक्स - यूनिट-2 लिनियर इक्वेशन - चाइल्डवुड ओवेसिटी इन इंडया, एनर्जी बचाव साइंस - यूनिट-फोर आवर इंवायरमेंट - सूखा से देश का बचाव, कंजरवेशन ऑफ वाटर
11वीं का सिलेबस सब्जेक्ट - सिलेबस - ओटबा का सिलेबस
जोगरफी - यूनिट-5 वाटर - करेंट ओसियन, ओसियन रिर्सोस बायोलॉजी - यूनिट-5 हियूमन साइकोलॉजी - टेक केयर, हवा
इकोनॉमिक्स - यूनिट-6 डेलवपमेंट एक्सपेरियेंस ऑफ इंडिया - स्पेशल इकोनॉमिक जोन, इंडो-पाक ट्रेड रिलेशन 

उत्तर पुस्तिका की जांच में पकड़े गये फर्जी टीचर, सीबीएसइ ने स्कूलों को दिया नोटिस

- टीचर्स के फर्जी ग्रेड दिखा कर 10वीं और 12वीं बोर्ड की उत्तर पुस्तिका की होगी है जांच

संवाददाता, पटनासेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने उन स्कूलों को पकड़ना शुरू कर दिया है जो 10वीं और 12वीं बोर्ड की उत्तर पुस्तिका जांच में फर्जी टीचर्स की लिस्ट बोर्ड को उपलब्ध करवाते है. इसके पहले चरण में बिहार के तीन स्कूलों का नाम सामने आया है. इसमें डीएवी के तीन स्कूल अलग-अलग एरिया के है. डीएवी गोला रोड, डीएवी गया और डीएवी रोहतास, ये तीन स्कूलों को सीबीएसइ जल्द ही नोटिस भेजने जा रही है.
- कई और स्कूल है सीबीएसइ के जांच के घेेरे में सीबीएसइ के फर्जी डिग्री दिखा कर कॉपी मूल्यांकन में शामिल होने में बिहार के कई स्कूल शामिल है. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो अभी तीन स्कूलों का नाम सामने आया है. कई स्कूल इसमें और शामिल है. जल्द ही इन स्कूलों के नाम भी सामने आयेगा. बिहार में यह मामला 2005 से ही चल रहा है. ऐसे में हर साल की टीचर्स की लिस्ट को भी देखा जा रहा है.
- टीचर्स की पूरी डिटेल्स लिया है सीबीएसइ नेसीबीएसइ इन स्कूलों की जांच पिछले दो महीने से कर रहा है. जांच के दौरान स्कूलों से तमाम टीचर्स की लिस्ट मांगी गयी है. बोर्ड के पास इन स्कूलों के उन टीचर्स की लिस्ट है जो या तो कभी स्कूल में टीचर के तौर पर नहीं रहें, या टीचर रहें भी तो उनके पास डिग्री नहीं जो 10वीं और 12वीं के उत्तर पुस्तिका की जांच के लिए डिग्री चाहिए था. सीबीएसइ के परीक्षा नियमावली को ताक पर रख कर इन स्कूलों ने उत्तर पुस्तिका की जांच स्कूल में करवाया. ऐसे में अब उन टीचर्स पर भी कार्रवाई बोर्ड की ओर से की जा सकती है.
- मान्यता जा सकती है स्कूल की जो भी स्कूल परीक्षा नियमावली के इस फर्जी टीचर्स लिस्ट देने में पकड़ में आयेगा, उन स्कूलों की मान्यता भी जा सकती है. सीबीएसइ ने इसके लिए अभी से स्कूलों को अगाह करना शुरू कर दिया है. जो भी स्कूल इसमे पकड़ में आयेगा, उस स्कूल का मान्यता 2016 में खतरे में पड़ सकती है.
- प्राथमिक और अस्थायी टीचर करते है उत्तर पुस्तिका की जांच 10वीं और 12वीं के मूल्यांकन के लिए सीबीएसइ द्वारा स्कूलाें से टीचर्स की लिस्ट मांगी जाती है. इस लिस्ट के आधार पर ही टीचर्स को मूल्यांकन कार्य में लगाया जाता है. टीचर्स का सेलेक्शन उनके डिग्री के अाधार पर किया जाता है. जो टीचर पोस्ट ग्रेजुएट होते है, वहीं 12वीं के उत्तर पुस्तिका की जांच करेंगे. 

Monday, November 23, 2015

फरवरी के दूसरे सप्ताह में इंटर और मार्च के प्रथम सप्ताह में मैट्रिक की परीक्षा

संवाददाता, पटना

रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद मैट्रिक और इंटर की परीक्षा फार्म की तिथि जल्द ही निकाला जायेगा. इससे पहले बिहार विद्यालय परीक्षा समिति इंटर और मैट्रिक की परीक्षा तिथि भी जल्द घोषित करने जा रही है. इस बार इंटर की परीक्षा फरवरी के दूसरे सप्ताह में लिये जाने की संभावना है. वहीं मैट्रिक की परीक्षा मार्च के प्रथम सप्ताह में शुरू होने की संभावना है. चुकी होली इस बार मार्च के अंतिम सप्ताह में हो रहा है. इस कारण इससे पहले मैट्रिक की परीक्षा ले ली जायेगी. बोर्ड अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि इस महीने के अंत तक परीक्षा की तिथि घोषित कर दी जायेगी. फरवरी के दूसरे सप्ताह इंटर और मार्च के प्रथम सप्ताह में मैट्रिक की परीक्षा होने की संभावना है. 

केंद्रीय विद्यालय में ऑन लाइन नामांकन फरवरी से

- नये नामांकन के लिए केंद्रीय विद्यालय इस बार लेगा ऑन लाइन आवेदन

संवाददाता, पटनाकेंद्रीय विद्यालय संगठन ने इस सत्र से स्कूल एडमिशन की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने का फैसला किया है. इसके बाद अभिभावक घर से ही अपने बच्चे का फार्म भर सकेंगे. अब स्कूल से नामांकन फार्म लाने की जरूरत नहीं होगी. और ना ही जमा करने के लिए लंबी लाइन में लगना होगा. अॉन लाइन आवेदन प्रक्रिया होने से अभिभावक आसानी से आवेदन कर पायेंगे. हाल में केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से शाला दर्पण कार्यक्रम शुरू किया गया है. इसके तहत सारी प्रक्रिया अब ऑन लाइन ही की जायेगी.
- पहली कक्षा से होगा शुरू केवीएस से मिली जानकारी के अनुसार केंद्रीय विद्यालय में सबसे अधिक नामांकन पहली कक्षा के लिए किया जाता है. ऐसे में सबसे पहले इसी कक्षा से ऑन लाइन प्रक्रिया शुरू किया जायेगा. इसके बाद दूसरे क्लास के लिए भी नामांकन अॉन लाइन किया जायेगा. ज्ञात हो कि केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से अब ऑन लाइन स्कूल फी ली जा रही है. इसके अलावा जल्द ही लैब और लाइब्रेरी को भी केवीएस में ऑन लाइन जोड़ा जायेगा. 

मेडिकल और इंजीनियरिंग परीक्षा के लिए सीबीएसइ ने जारी किया गाइड लाइन

- दिसंबर तक सीबीएसइ ने स्कूलों को 12वीं का कोर्स पूरा करने का दिया निर्देश

संवाददाता, पटना जेइइ मेन के लिए आवेदन की तिथि निकाली जा चुकी है. वहीं एआइपीएमटी का आवेदन जल्द ही निकलने की संभावना है. आवेदन निकलने के साथ ही सीबीएसइ ने गाइड लाइन भी जारी कर दिया है. स्कूल में 12वीं की सिलेबस को पूरा करने के साथ परीक्षा की तैयारी को लेकर भी गाइड लाइन जारी किया गया है. बोर्ड ने जहां दिसंबर तक सिलेबस को पूरा करने का निर्देश जारी किया है, वहीं तैयारी को लेकर मॉक टेस्ट के बारे में भी जानकारी स्टूडेंट को दे रहा है.
- बच गये है सिर्फ पांच से छह महीने एआइपीएमटी की परीक्षा के लिए अब सिर्फ छह महीने ही बचे है. वहीं जेइइ मेन की परीक्षा के लिए पांच महीने का समय अब परीक्षाथी के पास है. एग्जाम अप्रैल और मई में ली जायेगी. इस बार सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा आयोजित कराने की चर्चा है, लेकिन इस पर अभी तक अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. दिसंबर के पहले सप्ताह में एआइपीएमटी के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी. एआइपीएमटी के आधार पर देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएसइ और बीडीएस की लगभग 3500 सीटों पर नामांकन होता है.
अभी से करें एग्जाम का टाइम मैनेजमेंट एआइपीएमटी में मुख्यत: तीन सब्जेक्ट आते है. इनमें फिजिक्स, केमेस्ट्री और बायाेलॉजी शामिल है. एग्जाम में फिजिक्स के क्वेश्चंस सबसे ज्यादा आते है. इसलिए फिजिक्स को 40 प्रतिशत समय, केमेस्ट्री को 35 फीसदी और शेष समय बायोलॉजी के लिए निकाले. ताकि आपकी फिजिक्स हो सके. एक्सपर्ट पीके सिंह ने बताया कि एआइपीएमटी के स्टूडेंट अक्सर गलती कर जाते है. बॉयोलाजी पर अधिक समय देते है. लेकिन सबसे अधिक प्रश्न फिजिक्स से आता है. इस कारण इसका ख्याल अभी से करना चाहिए .
- दिसंबर तक कोर्स कर ले कंपलीट, जनवरी में करें रिवीजन एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि इस एग्जाम में शामिल होने वाले परीक्षाथी को स्टडी पर पूरा फोकस करना चाहिए. इसके लिए सबसे बेहतर विकल्प है कि स्टूडेंट्स को दिसंबर तक सिलेबस खत्म कर ले. इसके बाद जनवरी से मार्च तक रिवीजन और अप्रैल में मॉक टेस्ट और पुराने पेपर साॅल्व करना चाहिए. इससे परीक्षाथी का आत्मविश्वास बढ़ेगा. इसके अलावा मॉक टेस्ट देने से एग्जाम का डर भी खत्म हो जाता है. साथ ही एक्यूरेसी के साथ-साथ स्पीड भी बढ़ जाती है. इस वर्ष इसमें परीक्षाथी की संख्या भी बढ़ सकती है.
जेइइ मेन के लिये जा रहे आवेदन आइआइटी में एडमश्न के लिए होने वाले कॉमन एंट्रेंस एग्जाम यानी जेइइ एडवांस-2016 में 22 मई को होगा. इस बार जेइइ एडवांस का आयोजन आइआइटी गुवाहाटी द्वारा किया जा रहा है. इससे पूर्व जेइइ मेन का आयोजन चार अप्रैल को होगा. इस बार जेइइ मेन में सफल दो लाख प्रतिभागियों को जेइइ एडवांस देने का मौका मिलेगा. जेइइ मेन के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया चाल है. 31 दिसंबर तक यह चलेगा.
आन लाइन हल करें क्वेश्चंसमेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए प्रतिभागियों को जेइइ एडवांस की वेबसाइट पर ऑनलाइन मॉक टेस्ट भी दे सकते है. इसके लिए www.jeeadv.ac.in पर जाना होगा. इसकी मदद से प्रतियोगी पेपर की प्रैक्टिस कर सकते है. इस वेबसाइट पर आइआइटी के तैयारी को लेकर कोर्स की भी जानकारी दी गयी है.
यह रहेगा एग्जाम शेड्यूल जेइइ मेन ऑन लाइन एप्लीकेशन की अंतिम तिथि - दिसंबर का अंतिम सप्ताह
आवेदन में करेक्क्शन का समय - जनवरी के सेकेंड वीक तक एडमिट कार्ड - एक मार्च से मिलना शुरू हो जायेगा
जेइइ मेन का पेन एंड पेपर बेस्ड परीक्षा - अप्रैल के प्रथम सप्ताह में 

Saturday, November 21, 2015

पांच सालों तक टीचर्स का नहीं होगा ट्रांसफर

- सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने दिया निर्देश

संवाददाता, पटनाअब स्कूल किसी भी टीचर्स का ट्रांसफर नहीं कर सकता है. जो टीचर जिस स्कूल के लिए नियुक्त किये जायेंगे, वो उसी स्कूल में रहेंगे. स्कूल प्रशासन किसी भी तरह का फेल बदल नहीं कर सकता है. टीचर्स को लेकर सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने स्कूलों को निर्देश दिया है. निर्देश में कहा गया है कि टीचर्स अपनी मरजी से स्कूल छोड़ना चाहे तो छोड़ सकता है, लेकिन स्कूल किसी भी टीचर्स पर ट्रांसफर या स्कूल छोड़ने का दबाव नहीं डाल सकता है.
स्कूल की गलती पकड़ा जायेगा डाटा टीचर्स बैंक से स्कूल किसी भी टीचर्स को जब चाहे निकाल ना दे, इसको लेकर सीबीएसइ ने एक डाटा टीचर्स बैंक बनाया है. इसमें हर स्कूलों को टीचर्स संबंधित तमाम जानकारी डालना है. इस डाटा बैंक को खुद टीचर्स की अपनी सारी जानकारी देकर भरेंगे. सीबीएसइ के पास अब तमाम स्कूलों के टीचर्स की जानकारी रहेगी. इससे बोर्ड को यह भी पता चलेगा कि किस स्कूल में कितने टीचर है. इससे परमानेंट और एडहॉक टीचर्स के बारे में भी सीबीएसइ की पकड़ में स्कूल आसानी से आ जायेगा. डाटा टीचर्स बैंक के माध्यम से सीबीएसइ समय-समय पर स्कूल की जांच भी करेगा.
हर पांच से छह महीने पर बदल देते है टीचर्स पटना के कई स्कूल टीचर्स बदलने में ना तो सेशन देखते है और ना एग्जाम का समय. जब चाहा स्कूल में टीचर्स बदल देते है. इतना ही नहीं कई स्कूल तो एफिलिएटेड स्कूल से टीचर्स का ट्रांसफर ब्रांच स्कूल में कर देते है. ऐसे में टीचर्स को स्कूल छोड़ने पर मजबूर होना पड़ता है. इसका असर स्कूल मे क्वालिटी एजुकेशन पर पड़ता है. स्टूडेंट टीचर्स की पढ़ाई समझ नहीं पाते, उससे पहले ही टीचर्स को हटा दिया जाता है या फिर ट्रांसफर कर दिया जाता है. इसकाे लेकर कई टीचर्स से सीबीएसइ के पास शिकायत भी किया है.
कोटएक स्कूल में टीचर्स लंबे समय तक रहते है तो वहां के स्टूडेंट के लिए काफी फायदा होता है. टीचर्स अौर स्टूडेंट के बीच एक हेल्दी रिलेशन भी बन जाता है. बार-बार टीचर्स को बदलने से क्वालिटी एजुकेशन पर असर होता है. ऐसे में सीबीएसइ का यह पहल काफी अच्छा है. इससे टीचर्स में भी डर नहीं बना रहेगा.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया \\B

सीबीएसइ 12वीं के पैटर्न पर होगा आइसीएसइ 12वीं का साइंस क्वेशचन पेपर

- बोर्ड ने लिया फैसला, 2018 से होगा लागू

संवाददाता, पटनाइंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (आइसीएसइ) के स्टूडेंट के लिए राहत की खबर है. अब आइसीएसइ बोर्ड के 12वीं के स्टूडेंट भी सीबीएसइ पैटर्न पर परीक्षा दे पायेंगे. बोर्ड की ओर से सीबीएसइ पैटर्न पर प्रश्न पत्र करने का फैसला लिया गया है. पहले साइंस विषय में इसकी शुरुआत होगी. इसके बाद दूसरे स्टीम में भी इसे लागू किया जायेगा. ज्ञात हो कि अभी तक आइसीएसइ बोर्ड का अपने सिलेबस के अनुसार ही पढ़ाई होती थी. लेकिन 2017 से 12वीं परीक्षा के साइंस स्टीम के परीक्षा पैटर्न में चेंज किया जा रहा है.
सारे प्रतियोगी परीक्षा सीबीएसइ पैटर्न पर इंजीनियरिंग और मेडिकल के सारे प्रतियोगी परीक्षा अब सीबीएसइ पैटर्न पर लिया जाता है. ऐसे में आइसीएसइ बोर्ड के स्टूडेंट को काफी परेशानी होती थी. उन्हें अपने सिलेबस के अलावा सीबीएसइ सिलेबस पर भी ध्यान देना होता था. इस कारण बोर्ड अब इसमें बदलाव करने जा रहा है. इससे आइसीएसइ बोर्ड के स्टूडेंट की परेशानी कम होगी. इस संबंध में आइसीएसइ बोर्ड के सेक्रेटरी जेरी एरेथून ने बताया कि 2017 से इसे लागू किया जायेगा. बोर्ड अब सीबीएसइ के पैटर्न पर ही साइंस का क्वेशचन पेपर करने जा रहा है. 

दो सेट में होगा सीबीएसइ का अब क्वेशचन पेपर

- 12वीं के बोर्ड एग्जाम में बनाये जायेंगे तीन की जगह दो सेट

संवाददाता, पटनासेंट्रल बोर्ड ऑफ सेेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने 2016 की बोर्ड परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी है. परीक्षा पैटर्न में इस बार बदलाव किया जायेगा. जहां कदाचार मुक्त परीक्षा को लेकर सीबीएसइ कई नियम बना रहा है. तो वहीं क्वेशचन पेपर सेट को लेकर भी इस बार बदलाव किया जायेगा. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो अभी तक 12वीं की परीक्षा में चार सेट बनाये जाते थे. लेकिन 2016 की 12वीं की परीक्षा में दो सेट की क्वेशचन पेपर होगा. सीबीएसइ ने यह बदलाव कई सालों के बाद करने जा रहा है. अभिभावकों और स्कूल प्रशासन से फीडबैक लेने के बाद सीबीएसइ क्वेशचन पेपर में बदलाव करने जा रहा है.
दो सेट, क्वेश्चन रहेगा अलग-अलग अभी तक सीबीएसइ हर स्ट्रीम में क्वेशचन पेपर चार सेट तक तैयार करता रहा है. इन सेट में क्वेश्चन तो एक जैसे ही रहते है, लेकिन क्वेश्चन का नंबर अलग-अलग रहता है. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. सीबीएसइ ने अब दो ही सेट बनाने की सोची है. लेकिन ये सेट में जो भी प्रश्न रहेंगे, वो बिल्कुल ही अलग होगा. दो सेट के एक भी प्रश्न एक जैसा नहीं होगा. दो सेट के प्रश्न अलग होने से कदाचार की संभावना कम हो जायेगी.
इस बार साइंस में, अगले साल से आर्ट्स और कॉमर्स में पहली बार यह बदलाव किया जा रहा है. 2016 की परीक्षा में यह बदलाव केवल इस बार साइंस स्ट्रीम में किया जायेगा. अगले साल यानी 2017 में आर्ट्स और कॉमर्स स्ट्रीम के साथ भी सीबीएसइ यह बदलाव करेगा. इस बार साइंस विषय में यह बदलाव किया जायेगा.
नकल और चोरी की संभावना होगी कम एआइपीएमटी से सबक लेकर सीबीएसइ ने यह बदलाव किया है. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो सेट की संख्या कम होन से बोर्ड का एक्स्ट्रा क्वेश्चन पेपर पर होने वाले खर्च को कम किया जा सकेगा. इसके अलावा एग्जामिनेशन हॉल में स्टूडेंट को बैठाने में भी सावधानी नहीं रखनी पड़ेगी. दो अलग-अलग सेट देकर एक ही बेंच पर दो परीक्षाथी परीक्षा दे पायेंगे. इससे नकल या चोरी की संभावना काफी कम हो जायेगी.
कोटसीबीएसइ की परीक्षा में कई सालों के बाद यह बदलाव किया जा रहा है. इससे परीक्षाथी को दूसरे सेट देखने और नकल करने की आदत पर लगाम लगेगा. प्रश्न अलग होने से परीक्षा लेना आसान हो जायेगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ \\B

दो बार की फुटबाॅल चैम्पियन सोनी पढ़ाई और खेलने को दूसरे की हो रही मोहताज

- अंडर-13 नेशनल प्लेयर सोनी के पास ना घर है और ना ही पढ़ाने को पैसे

रिंकू झा, पटनादेश के लिए तो सोनी का एक गोल काफी होता है. खेल मैदान पर गोल कर उसने कई बार देश को नेशनल चैम्पियन बना डाला है. लेकिन आज सोनी अपने जीवन के गोल (लक्ष्य) में पिछड़ रही है. 2010 से फुटबाल खेल रही सोनी के पास ना तो घर है और ना ही पढ़ने के लिए समुचित व्यवस्था. 9वीं में पढ़ने के लिए उसे स्कूल से छात्रवृति मिलती है तो वहीं फुटबॉल की प्रैक्टिस कोच सुनील सर की मदद से करती है. घर का खर्च जैसे तैसे पिता के तांगे चला कर चल रहा है. सोनी को ऐसे मददगार की जरूरत है जिसकी थोड़ी से मदद से सोनी अपना इंटरनेशनल खिलाड़ी बनने का सपना पूरा कर सके.
2012 में बिहार सरकार ने किया था सम्मानित सोनी का फुटबॉल ना सिर्फ हॉवी है बल्कि जु
नून है. जिसे वो इंटरनेशनल लेवल पर पहुंच सके. सोनी बस फुटबॉल के क्षेत्र में अपना नाम देश के साथ जोड़ना चाह रही है. 2012 में अंडर-13 के इंटरनेशनल फुटबाॅल मैच कोलंबो में हुआ था. इसमें पहले स्थान पर भारत और दूसरे स्थान पर इरान आया था. सोनी बताती है कि इस जीत के बाद जब वापस आयें तो बिहार सरकार की आेर से सम्मानित किया गया था. 11 हजार रुपये भी सरकार ने मुझे दिया. इसके बाद कोई मदद सरकार की ओर से नहीं हुआ है. सोनी ने बताया कि सभी मेरी गरीबी के बारे में पूछ कर चले जाते है. मदद के लिए कोई नहीं आता है.
छात्रवृति से खरीदी मोबाइल सोनी ने बताया कि उसके पास मोबाइल नहीं था. इससे उसे काफी दिक्कतें होती थी. जब 9वीं क्लास में आयी तो छात्रवृति मिली. इस छात्रवृति से एक मोबाइल लिया और छोटी बहन के लिए किताबें खरीदी. भाई के लिए स्कूल बैग खरीदा. अब अगले साल छात्रवृति के पैसे मिलेंगे तो भाई और बहन को प्राइवेट स्कूल में एडमिशन करवायेगी. जिससे उनकी पढ़ाई अच्छी से हो सकेगा.
2015 में किया था कैप्टन के रूप में प्रतिनिधित्व सोनी अंडर-13 के लिए खेलती है. अभी तक तीन बार देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी है. अंडर-13 के लिए 2012 और 2013 में लगातार दो साल भारत चैम्पियन भी रहा है. काेलंबो श्रीलंका में खेला गया यह दोनो इंटरनेशनल मैच में भारत प्रथम स्थान पर रहा है. इसके बार 2015 में अंडर-13 की मैच काठमांडू नेपाल में खेला गया. लेकिन भूकंप आने के कारण मैच बीच में स्थगित कर देना पड़ा. सोनी ने बताया कि जीत कर जब आते है तो काफी सम्मान मिलता है. लेकिन हमारी गरीबी पर कोई कुछ नहीं करता है. मुझे मेरे कोच सुनील वर्मा काफी मदद करते है. अगर वो नहीं होते तो मै आज यहां तक नहीं पहुंचती.
कोटमै ही सोनी के पढ़ाई से लेकर सारा खर्च उठाता हूं. हर महीने तीन हजार के लगभग मैं सोनी पर खर्च करता हूं. उसके पास इतने पैसे नहीं है जो वो अपनी पढ़ाई कर सके. इस बच्ची में फुटबाल का जुनून मैने देखा. इस कारण मैने इसे मदद करने लगा. आज ये बच्ची देश का नाम रौशन कर रही है. लेकिन गरीबी इतनी है कि आगे बढ़ने में काफी दिक्कतें हो रही है.
सुनील वर्मा, सोनी के कोच \\B

Thursday, November 19, 2015

सीबीएसइ ने जारी किया डिस-एफिलिएटेड स्कूल का लिस्ट

 - सीबीएसइ ने अभिभावक को किया सचेत

संवाददाता, पटनाअभिभावक ठगे ना जायें, अभिभावक को स्कूल के बारे में सही जानकारी समय से मिल जायें. इसको लेकर सीबीएसइ ने एक बार फिर डिस-एफिलिएटेड स्कूलों की लिस्ट जारी किया है. इन स्कूलों को अभी ही अभिभावक देख ले, क्योंकि इन स्कूलों में किया गया कोई भी एक्टिविटी सीबीएसइ द्वारा मान्य नहीं होगा. इसकाे लेकर सीबीएसइ ने स्पष्ट कर दिया है कि इन स्कूलों के ना तो नामांकन मान्य होगा और ना ही इन स्कूलों से भरे गये परीक्षा फार्म ही बोर्ड मानेगा.
- 2016 के बोर्ड परीक्षा में नहीं हो पायेंगे शामिल सीबीएसइ ने जिन स्कूलों का 2015 में डिस एफिलियेट किया है, उन स्कूलों में 2015 में 9वीं और 11वीं में रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया है. वहीं इस 10वीं बोर्ड की परीक्षा में अंतिम बार ही लिया जायेगा. सीबीएसइ ने अभिभावकों को सचेत करते हुए कहा है कि 2015 में इन स्कूलों में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया नहीं किया गया है. वहीं परीक्षा फार्म 2016 से नहीं भराया जायेगा.
- एफिलिएशन प्रोसेस सीबीएसइ ने किया टफ सीबीएसइ ने इन स्कूलों के लिए एफलिएशन दुबारा लेना टफ कर दिया है. जिन प्वाइंट पर इन स्कूलों का एफिलिशन गया था, उन स्कूलों को जब तक स्कूल सही नहीं करेगा, तब तक एफिलिएशन नहीं मिलेगा. सीबीएसइ ने एफिलिएशन बाइ लॉज, चैप्टर 5 के तहत 15 कंडीशन इन स्कूलों को दिया है. इन 15 कंडीशन को पूरा करने के बाद ही स्कूल को मान्यता मिलेगी. मान्यता के लिए स्कूलों को सीबीएसइ के पास अप्लाई करना होगा.
इन प्वाइंट पर स्कूल हुआ था डिस-एफिलिएटेड - स्टूडेंट की संख्या जरूरत से ज्यादा होगा
- सेक्सन में स्टूडेंट की संख्या 40 से अधिक होना - सीबीएसइ बाइलॉज के अनुसार जरूरत से अधिक सेक्शन चलाना
- एडहॉक पर टीचर्स की नियुक्ति करना - टीचर्स और नॉन टीचिंग स्टॉफ को सही से सैलरी नहीं देना
- स्कूल में प्ले ग्राउंड आदि ना होना- एक्टिविटी के नाम पर स्कूल में कुछ नहीं होना
- सुरक्षा को लेकर स्कूल में इंतजाम में कमी होना - एग्जामिनेशन पैटर्न सीबीएसइ के अनुसार ना होना
इन स्कूलों का लिस्ट सीबीएसइ ने किया है जारीस्कूल                                     - एफिलिशन नंबर
एवीएन इगलिश स्कूल, एसके पुरी - 330095एवीएन स्कूल, राजीव नगर            - 330237
डीएवी पब्लिक स्कूल, पुनाइचक - 330054 देनोबिली मिशन स्कूल, पहाड़ी - 330302
दून पब्लिक स्कूल, इंदिरानगर - 330177 पटना मुसलिम स्कूल, बीएम दास रोड - 330067
प्लाज्मा पाथ वे स्कूल, परसा बाजार - 330087 रामाश्रय राय पब्लिक स्कूल, लहेरियासराय, दरभंगा - 330205
स्काॅलर एवोर्ड स्कूल, फुलवारीसरीफ - 370197 सेरॉन पब्लिक स्कूल, रूपसपुर - 330305
शेरवुड स्कूल, राजीव नगर - 330135 

एआइपीएमटी अभ्यथी के पैसे नहीं लौटाया सीबीएसइ ने

- एआइपीएमटी के कैंसिल हुए परीक्षा में चैलेंज के नाम पर प्रति प्रशन एक हजार रूपया लिया था सीबीएसइ ने

संवाददाता, पटनाऑल इंडिया प्री मेडिकल एंड प्री डेंटल एग्जामिनेशन के अभ्यथी अभी तक इंतजार में ही है. सीबीएसइ ने घोषणा करने के बाद भी उनके पैसे नहीं लौटाये है. कई महीने बीत जाने के बाद भी जब अभ्यथी को पैसे नहीं मिले तो अब मानव संसाधन मंत्रालय के पास शिकायत की है. अभ्यथी ने लिखित शिकायत एचआरडी डिपार्टमेंट को दिया है. अभ्यथी के शिकायत के बाद एचआरडी डिपार्टमेंट ने सीबीएसइ को नोटिस दिया है. इसमें सीबीएसइ को जल्द से जल्द अभ्यथी के पैसे लौटाने काे कहा गया है.
- परीक्षा कैंसिल होने के बाद पैसे लौटाये जाने का सीबीएसइ ने किया था वादाइस बार एआइपीएमटी 5 मई को लिया गया था. प्रश्न पत्र लीक हो जाने के बाद परीक्षा कैंसिल कर दिया गया. इसके पहले परीक्षा होने के बाद सीबीएसइ ने प्रश्न पर चैलेंज करने को अभ्यथी से कहा था. चैलेंज करने के लिए प्रति प्रश्न अभ्यथी से एक हजार रूपये लिये गये थे. परीक्षा कैंसिल होने के बाद सीबीएसइ ने तमाम अभ्यथी के पैसे लौटाने की बात कहीं थी. सितंबर में इसके लिए एक सप्ताह का समय भी सीबीएसइ ने निकाला था. पैसे अभ्यथी के एकाउंट में ही सीधे दिया जाता. लेकिन अभी तक एक भी अभ्यथी को पैसे नहीं मिले है.
बातचीत मैने तीन प्रश्नों पर चैलेंज किया था. इसके लिए मैने तीन हजार रूपये सीबीएसइ के पास जमा किया था. लेकिन मुझे अभी तक एक रूपया भी रिटर्न नहीं हुआ. मैने कई बार सीबीएसइ को भी लिखा है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा है.
आयुश रंजन, अभ्यथी, एआइपीएमटी दो प्रश्न पर चैलेंज किया था. लेकिन अभी तक कोई प्रक्रिया नहीं हुइ है. कहा गया था कि पैसे सीबीएसइ देगी, लेकिन अभी तक नहीं मिला है. एेसे में अब तो उम्मीद भी छोड़ दिये है.
पिंकी शर्मा, अभ्यथी, एआइपीएमटी \\B

3 अप्रैल को जेइइ मेन, 1 दिसंबर से भरे जायेंगे ऑन लाइन आवेदन

संवाददाता, पटना

सीबीएसइ ने ज्वाइंट एंट्रांस एग्जामिनेशन (जेइइ) के मेन परीक्षा की तिथि घोषित कर दी है. जेइइ मेन की परीक्षा 3 अप्रैल को देश भर में लिया जायेगा. इसके लिए अभ्यथी 1 दिसंबर से ऑन लाइन आवेदन सीबीएसइ के जेइइ मेन के वेबसाइट www.jeemain.nic.in पर जाकर कर सकेंगे. ऑन लाइन अावेदन 31 दिसंबर तक किया जा सकेगा. परीक्षा दो पार्ट में लिया जायेगा. फर्स्ट पेपर 9.30 बजे से 12.30 बजे तक अौर सेंकेड पेपर 2 बजे से 5 बजे तक ली जायेगी. 

स्क्रूटनी में आया नो चेंज, आरटीआइ में पता चला उत्तर पुस्तिका की जांच ही नहीं हुई

- सुपौल की विनिता कुमारी इंगलिश उत्तर पुस्तिका की जांच बिना शिक्षक ने दे दिया 14 अंक, हो गयी फेल

संवाददाता, पटनासारे विषयों में अच्छे अंक आयें. इंगलिश में फेल हो गयी. स्क्रूटनी को आवेदन दिया तो बोर्ड ने नो चेंज कर रिजल्ट जस का तस रखा. अब जब सूचना के अधिकार के तहत इंगलिश की उत्तर पुस्तिका निकाली गयी तो पता चला कि उत्तर पुस्तिका की जांच ही नहीं हुई. सुपौल की विनिता कुमारी (रौल नंबर 1500113, रौल कोड 42038) गुुरुवार को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में इंगलिश के उत्तर पुस्तिका लेकर बोर्ड अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने मिली. अध्यक्ष ने जल्द से जल्द सही रिजल्ट देने का वादा भी किया है.
- शिक्षक की गलती की सजा भुगत रही छात्रा सारे विषयो में पास होने के बावजूद विनीता कुमारी फेल हो गयी. शिक्षक की एक गलती की वजह से विनीता कुमारी फेल हो गयी और उसका नामांकन प्लस टू में नहीं हो पाया. विनीता कुमारी के अनुसार 17 मार्च 2015 को द्वितीय पाली में इंगलिश की परीक्षा हुई थी. उत्तर पुस्तिका में सारे प्रश्न के जवाब भी लिखे हुए है. शिक्षक ने उत्तर पुस्तिका की जांच किये बिना ही उत्तर पुस्तिका में 14 अंक डाल दिया. आश्चर्य की बात है कि उत्तर पुस्तिका के प्रथम पृष्ठ पर हर प्रश्न के अलग-अलग अंक भी चढ़ाये गये है. लेकिन अंदर के पृष्ठ पर एक भी प्रश्न की जांच नहीं हुई है. इंगलिश में पास करने के लिए विनीता को 30 अंक चाहिए था. हाई स्कूल जदिया, सुपौल की छात्रा विनीता कुमारी ने मैट्रिक के द्वितीय पाली की परीक्षा जेनरल हाई स्कूल त्रिवेणीगंज, सुपौल में जाकर दिया था.
- जून में किया था उत्तर पुस्तिका लेने के लिए अप्लाई रिजल्ट में गड़बड़ी होने के बाद विनीता कुमारी ने तुरंत स्क्रूटनी के लिए अप्लाई किया. इसके साथ ही सूचना के अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिका लेने का अप्लाई किया. विनीता कुमारी के पिता प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि स्क्रूटनी में नो चेंज आ गया. उसके बाद बोर्ड का चक्कर लगाते रहे कि उत्तर पुस्तिका जल्द से जल्द मिले. लेकिन उत्तर पुस्तिका 19 नवंबर 2015 को छह महीने के बाद मिला है. उत्तर पुस्तिका देखने के बाद पता चला है कि उत्तर पुस्तिका की जांच ही नहीं हुई है.
- इंगलिश के अंक नहीं जुड़ते हैवैसे बिहार बोर्ड के मैट्रिक में इंगलिश की परीक्षा में छात्र को बस एपियर होना ही जरूरी होता है. इंगलिश के अंक कुल अंकों में नहीं जुड़ते है. ऐसे में छात्र का नामांकन बिहार के किसी भी स्कूल या कॉलेज में तो हो जाता है, लेकिन बिहार के बाहर दूसरे कॉलेज या स्कूल में नामांकन नहीं हो पाता है. कुछ ऐसा ही विनीता कुमारी के साथ भी हुआ. विनीता को रांची में प्लस टू में नामांकन लेना था, लेकिन विनीता कुमारी का नामांकन अभी तक नहीं हो पाया है. क्याेंकि नामांकन के लिए उसे इंगलिश में 70 फीसदी के उपर मार्क्स होना चाहिए.
अन्य विषयों में विनीता के आयें ये अंक विषय - कुल अंक
मैथेमेटिक्स - 68 संस्कृत - 76
साइंस - 72 हिन्दी - 65
सोशल साइंस - 58 कोट
विनीता कुमारी का उत्तर पुस्तिका मैने भी देखा है. इस मामले को तुरंत सही किया जायेगा. एक सप्ताह के अंदर उत्तर पुस्तिका की जांच के बाद सही अंक दिया जायेगा. शिक्षक की गलती की वजह से छात्रा परेशान हुई है. कॉपी का मूल्यांकन किस सेंटर पर हुआ, इसका पता लगाया जायेगा. लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति \\B

स्कूल होगा 59 दिन, कोर्स है 30 फीसदी बाकी

- स्कूलों में शुरू होगा एग्जाम का दौर

संवाददाता, पटनादीपावली की छुट्टी के बाद स्कूल फिर से शुरू हो गये. पिछले दो महीने अक्तूबर और नवंबर में स्कूल लगभग 29 दिनों तक बंद रहा. अब जब स्कूल खुला है तो कोर्स पूरा करने पर फोकस देना शुरू कर दिया गया है. स्कूलों की अगले तीन महीने की एकेडेमिक कैलेंडर की माने तो अब केवल रेगूलर रूप से मात्र 59 दिन ही स्कूल चल पायेगा. ऐसे में स्कल के पास 30 फीसदी बचे हुए कोर्स को पूरा करना एक चुनौती बन गयी है. सभी स्कूलों में 16 फरवरी से होम एग्जाम शुरू हाे जायेगा. फरवरी लास्ट या मार्च पहले सप्ताह से 10वीं और 12वीं के बोर्ड एग्जाम होने है. इसको देखते हुए 15 फरवरी से स्कूलों में पढ़ाई बंद और एग्जाम का दौर या एग्जाम की तैयारी को लेकर लीव दिया जायेगा. ऐसे में स्कूल का पूरा ध्यान अब कोर्स को पूरा करने में होने लगा है.
- स्कूल होगा एक्स्ट्रा क्लासेज कुछ स्कूलों ने सप्ताह में एक्स्ट्रा क्लासेश शुरू करने जा रही है. वहीं कुछ स्कूल जल्द ही एक्स्ट्रा क्लासेज शुरू करने जा रहा है. दीपावली के बाद तमाम स्कूल प्रशासन का फोकस काेर्स पूरा करने पर रहेगा. इसको लेकर स्कूलों ने काेर्स की समय सारणी भी बना ली है. लोयेला हाई स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार कोर्स तेजी से कंपलीट किया जा रहा है. जनवरी मध्य से तो रिवीजन शुरू कर दिया जायेगा. ताकि बच्चों के अगर कोई डाउट्स हो तो उसे क्लीयर किया जा सकेगा.
- 59 में से 10 दिन तो डांस और स्पोर्टस में बीतेंगे 59 दिनों में स्कूलों को बचे हुए कोर्स के साथ एजुअल फंक्शन, स्पोर्ट्स एक्टिविटी, साइंस एग्जीविशन और पिकनिक भी करना है. एनुअल फंक्शन के तहत पांच से सात दिन तक अलग-अलग कांम्पीटिशन कराये जाते है. पांच से छह दिन तक तो बच्चे डांस और ड्रामा की प्रैक्टिस करते है. कुछ स्कूलों में ये शुरू भी हो चुका है. दिसंबर में ही कई स्कूल एक से तीन दिनों के एजुकेशन टूर पर भी रहेंगे.
ऐसे जानिए 59 दिन का गणित नवंबर - 25 नवंबर गुरूनानक जयंती, 22 से 29 नवंबर को संडे की छुट्टी यानी स्कूल लगेगा सिर्फ 9 दिन दिसंबर - 24 दिसंबर ईद-ए-मिलद, 23 दिसंबर से 28 दिसंबर तक क्रिसमस पर छह दिन की छुट्टी, 6, 13, 20 और 27 दिसंबर को संडे की छुट्टी यानी 31 दिन में 12 दिन छुट्टी तो स्कूल लगेगा कुल 19 दिन
जनवरी - 26 जनवरी गणतंत्र दिवस, 14 जनवरी मकर संक्राति, 10, 17, 24 और 31 संडे की छुट्टी, जनवरी महीने में कम से कम सात दिन फॉर्मेटिव असेसमेंट फोर्थ और प्री बोर्ड एग्जाम में बीतेंगे फरवरी - 7 और 14 संडे की छुट्टी रहेगा. 16 फरवरी तक स्कूल 13 दिनों तक चलेगा. 19 नवंबर से 16 फरवरी तक कुल 59 दिन ही स्कूल चलेगा.
सीबीएसइ स्कूलों में आगे ऐसा होगा एकेडेमिक एक्टिविटी 1. एफए थर्ड और यूनिट टेस्ट सेकेंड एंड थर्ड - 30 नवंबर
2. 12वीं प्री बोर्ड प्रैक्टिकल एग्जाम - 4 से 10 जनवरी3़ 12वीं प्री बोर्ड एग्जाम - 10 से 23 जनवरी
4़ फॉर्मेटिव असेसमेंट फोर्थ - 16 से 30 जनवरी 5़ 12वीं प्रैक्टिकल एग्जाम - 20 जनवरी से 15 फरवरी
6़ 10वीं प्री बोर्ड एग्जाम - 1 फरवरी से 15 फरवरी 7़ 11वीं प्रैक्टिकल एग्जाम - 10 फरवरी से 20 फरवरी
8़ प्रायमरी क्लास का एसए टू - 16 फरवरी से 15 मार्च 9़ 6ठी से 11वीं तक का एसए टू - 1 मार्च से 24 मार्च
10. प्राइमरी और मिडिल क्लास का रिजल्ट - 18 से 25 मार्च 11. न्यू सेश्न स्टार्ट - 25 मार्च से 1 अप्रैल के बीच
काेटसीबीएसइ ने पहले ही एकेडेमिक कैलेंडर जारी कर दिया है. हर परीक्षा का शेड्यूल भी जारी कर दिया है. ऐसे में स्कूल को कोर्स जल्द से जल्द पूरा करना होगा. क्योंकि परीक्षा के पहले ही सारा कोर्स पूरा करना होगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ\\B

Monday, November 16, 2015

छठ महा पर्व उत्सव नहीं व्रत है, तभी आस्था से इतना जुड़

संवाददाता, पटना

किसी भी पर्व या त्योहार की बात कर लीजिए, उन त्योहारों को हम उत्सव की तरह मनाते है. लेकिन छठ ऐसा नहीं होता है. छठ दूसरे तमाम पर्व त्योहार से अलग है. यह उत्सव नहीं बल्कि व्रत है. यह एक अनुष्ठान है, चार दिनों तक किया जाता है. यही कारण है कि छठ को महापर्व का दर्जा दिया गया है. व्रत की वजह से ही छठ के प्रति अटूट आस्था से जुड़ा है. इसमें भगवान सूर्य से सीधा संपर्क व्रती का होता है. ना तो पंडित की जरूरत होती है और ना ही कोई विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है. छठ महापर्व में हर साल मै भी व्रत करती थी. मैने लगभग 10-15 साल छठ का व्रत किया. मुझसे पहले मेरी सास करती थी. अब मेरी बहू करती है. हम लोग एएन सिन्हा के पास गंगा घाट पर जाकर छठ करते थे. चार दिनों के अनुष्ठान में हर दिन गंगा जल से ही सारी प्रक्रिया पूरी की जाती थी. नहाय खाय के दिन नदी में स्नान करना, खरना के दिन गंगा नदी में स्नान करने के बाद शाम और सुबह के अर्घ के समय गंगा घाट पर ही जाते थेे. गंगा घाट पर पानी में खड़ा होना और भगवान सूर्य को अर्घ देने का अलग ही अनुभव होता था. घाट पर जाने का जो कष्ट होता है, वह और भगवान के नजदीक ला देता है. कई लोग तो शाम में जाने के बाद सुबह का अर्घ देने के बाद ही घाट से वापस आते थे. यह अनुभव बहुत ही अच्छा लगता था. लेकिन अब पटना के कई घाटों से गंगा दूर चली गयी है. इससे लोग अब घरों में अधिक छठ करने लगे है. घर में छठ करना अब लोगों की मजबूरी हो गयी है, लेकिन वो अनुभव नहीं मिलता है जो घाट पर जाकर मिलता है. अब अपने पारिवार के बीच ही लोग छठ व्रत संपन्न करते है. पहले ऐसा नहीं होता था. घाट पर ऐसे कई लोग होते है जो समाज के होते है. जो व्रती को प्रणाम करते है और व्रती उन्हें आशीर्वाद देतीं है. समाज का यह दृश्य बहुत ही अच्छा होता है. लगता है कि हर कोई एक परिवार हो गया है. छठ एक ऐसा महापर्व है जिसमें अपना पराये का सारा भेदभाव ही खत्म कर देता है. छठ महापर्व सामूहिक पर्व है. इसमें हम एक दूसरे का सहयोग लेकर अनुष्ठान पूरा करते है. व्रत और उसके प्रति आस्था के कारण ही लाखों लोग छठ व्रत से जुड़ते जा रहे है. यह एक ऐसा अनुष्ठान है जिसमें डूबते और उगते हुए सूर्य की पूजा की जाती है. भगवान को अर्घ देकर ही इस अनुष्ठान का समापन होता है. छठ व्रती चारों दिन भगवान सूर्य की पूजा करते है.
उषा किरण खान, साहित्यकार \\B

स्कूल बदल देते है प्रिंसिपल, सीबीएसइ होता बेखबर

- कई सीबीएसइ स्कूलों के प्रिंसिपल की हो चुकी मृत्यु, सीबीएसइ को जानकारी तक नहीं

संवाददाता, पटनाकेस वन - राकेश शर्मा डीएवी खगौल के प्रिंसिपल 1999-2000 के दौरान थे. 2001 में उन्होंने स्कूल छाेड़ दिया. 2004 के दौरान राकेश शर्मा की मृत्यु हो गयी. इसके बाद चार प्रिंसिपल भी स्कूल के चेंज हो चुके है. लेकिन आज भी सीबीएसइ के रिकार्ड में इस स्कूल के प्रिंसिपल के तौर पर राकेश शर्मा का ही नाम दर्ज है. राकेश शर्मा के नाम से स्कूल सीबीएसइ से स्कूल को कोई पत्र भी आता है.
केस टू - रेडियेंट इंटरनेशनल स्कूल के प्रिंसिपल सीबी सिंह को स्कूल को छोड़े हुए लगभग दो साल होने जा रहा है. रेडियेंट इंटरनेशनल स्कूल में अभी मिस्टर रहमान प्रिंसिपल के तौर पर है. सीबी सिंह ने स्कूल जनवरी 2013 में ही छोड़ दिया, लेकिन सीबीएसइ के रिकार्ड में आज भी रेडियेंट इंटरनेशनल स्कूल के प्रिंसिपल के तौर पर सीबी सिंह को ही दिखाया जा रहा है. किस स्कूल मे कौन प्रिंसिपल है, इसकी जानकारी सीबीएसइ के पास नहीं है. सीबीएसइ एफिलिएशन देने के समय प्रिंसिपल का रिकार्ड लेता है. लेकिन बाद में उसे चेंज नहीं करता है. कई स्कूल के प्रिंसिपल बदल जाते है. लेकिन इसकी जानकारी बोर्ड को नहीं होता है. पटना में हर साल स्कूलों के प्रिंसिपल बदल दिये जाते हैं. हर साल एक प्रिंसिपल दूसरे स्कूल को बदल लेते है, लेकिन सीबीएसइ के पास उसी प्रिंसिपल का नाम स्कूल के रिकार्ड में दर्ज होता है, जो एफिलिएशन देने के समय स्कूल की ओर से दिया जाता है. यह हाल पटना में कोई एक स्कूल का नहीं है, बल्कि अधिकांश स्कूलों का यही हाल है.
स्कूल भेजता नहीं और सीबीएसइ जांचता नहीं किसी भी स्कूल के प्रिंसिपल को अगर चेंज किया जाता है तो इसकी जानकारी स्कूल को तुरंत सीबीएसइ को देना होता है. प्रिंसिपल को चेंज करने का कारण भी बताना होता है. सीबीएसइ के परमिशन के बाद ही स्कूल दूसरा प्रिंसिपल रखेगा. लेकिन स्कूल वाले ऐसा नहीं करते है. आपसी छोटे मोटे झगड़े होने पर भी स्कूल प्रशासन प्रिंसिपल को चेंज कर देते है. वहीं सीबीएसइ रेंडमली जांच के दौरान भी इस बात की जांच नहीं करता है कि सीबीएसइ के रिकार्ड के अनुसार वहीं प्रिंसिपल है या दूसरा कोई और है. सीबीएसइ अपने वेबसाइट पर भी प्रिंसिपल का नाम चेंज नहीं करता है.
प्रिंसिपल की डिग्री की जांच के बाद ही मिलती है मान्यता किसी भी स्कूल को तभी मान्यता मिलती है जब वहां के प्रिंसिपल की डिग्री सही हो. प्रिंसिपल के डिग्री की जांच होने के बाद ही वो स्कूल का प्रिंसिपल रहेगा. हर स्कूलों के प्रिंसिपल की डिग्री सीबीएसइ के पास रहता है. इसके अलावा 15 सालों का वर्क एक्सपेरियेंस भी प्रिंसिपल बनने के लिए होना चाहिए. वर्क एक्सपेरियेंस 15 साल का उस स्कूल का होना चाहिए, जो सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त हो.
कोटसीबीएसइ स्कूलों में हर साल प्रिंसिपल चेंज कर दिये जाते है. इसकी जानकारी हमें तब मिलती है जब हम स्कूल की जांच के लिए जाते है. सीबीएसइ के पास से जो लेटर आता है, उसमें किसी और प्रिंसिपल का नाम होता है, और जांच करने के समय कोई और प्रिंसिपल मिलते है. इसकी जानकारी हम सीबीएसइ को भेजते है.
डीएस सिंह, मेंबर, सीबीएसइ मान्यता जांच कमेटी \\B

आस्था की राह में धर्म नहीं बनती रोड़ा

- पिछले दस सालों से कई मुसलिम परिवार छठ व्रती के सेवा भाव में करते है सड़क और गलियों की सफाई

रिंकू झा, पटनाधर्म कभी भी अलग करने के लिए नहीं बल्कि साथ चलने की प्रेरणा देता है. कोई भी धर्म अच्छे व्यवहार से ही समाज में सही संदेश देता है. कुछ ऐसा ही संदेश छठ महापर्व में भी देखने को मिलता है. जब मुसलिम परिवार के लोग छठ व्रतियों को अपने तरीके से सहयोग देते है. छठ व्रतियों को कोई दिक्कतें ना हो, चार दिनों के छठ महापर्व के अनुष्ठान को सही से कर सके, इसके लिए दस दिन पहले से ही मुसलिम परिवार के लोग काम शुरू कर देते है. दरियापुर इलाके के रहने वाले कुछ मुसलिम परिवार छठ महापर्व में अपना पूरा सहयोग देते है.
प्याज लहसून तक रखते है वर्जित छठ महापर्व के प्रति हर किसी की आस्था है. तभी तो छठ व्रती की सेवा करने के लिए प्याज लहसून तक खाना बंद कर देते है. सब्जीबाग की रहने वाली शहजादी बेगन ने बताया कि छठ महापर्व के प्रति हमारी काफी अास्था है. ऐसे में हम अपनी तरफ से छठ व्रतियों के लिए कुछ करना चाहते है. छठ व्रतियों की सेवा करने के लिए हम एक सप्ताह पहले से ही प्याज लहसून तक छोड़ देते है. हम भी उनकी तरह शुद्ध होकर सेवा करना चाहते है. वहीं शहनाज बेगम ने बताया कि मुहल्ले भर में मीट आदि के बिकने पर भी रोक लगा दिये जाते है.
छठ व्रतियों के लिए सड़क पर बिछाते है कालीन पहले सड़क की सफाई, फिर सड़क पर पानी का छिड़काव, चूना से सारी गंदगी को हटाया जाता है. दरियापुर रोड से लगभग दो हजार छठ व्रती गंगा घाट के लिए गुजरती है. ऐसे में छठ व्रतियों के लिए पूरे सड़क पर कालीन बिछाया जाता है. दरियापुर के रहने वाले इरफाना खातून ने बताया कि छठ व्रती के लिए हम दस दिन पहले से ही सड़क, गली आदि की सफाई शुरू कर देते है. शाम के अर्घ के समय व्रतियों के लिए सड़क पर कालीन बिछाया जाता है. दो दिनों तक सड़क को पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है. इस दौरान बस पैदल ही लोग चलते है.
व्रती मांगेंगी तो भगवान जरूर सुनेंगेछठ व्रती भगवान भास्कर से हमारे लिए प्रार्थना करें, इसके लिए शाम और सुबह के अर्घ के समय घाट पर भी जाते है. इरफाना खातून ने बताया कि छठी व्रती हमारे लिए भगवान सूर्य से प्रार्थना करते है. हम खुद तो मन्नतें नहीं मांगते, लेकिन हमें विश्वास होता है कि अगर छठ व्रती हमारे लिए भगवान से कुछ कहेगे तो भगवान जरूर सूनेंगे. एेसा होता भी है. हमें इस सेवा भाव से काफी सूकून मिलता है.
मिश्री घाट की करते थे सफाई अभी एक साल से मिश्री घाट को प्रशासन से खतरनाक घाट घोषित कर दिया है. इस कारण अब मुसलिम परिवार मिश्री घाट की सफाई नहीं कर पाते है. सब्जीबाग के रहने वाले तौफिक आलम ने बताया कि मिश्री घाट की सफाई हम हर साल करते थे. लेकिन अभी एक साल से नहीं कर पाते थे. इससे अब दरियापुर रोड की पूरी सफाई करते है. छठ व्रतियों की सुविधा के लिए हर काम करते है. 

Sunday, November 15, 2015

अपार्टमेंट में चल रहा स्कूल, जहां देखो वहीं पर खुल जाते स्कूल

- इंद्रपूरी और राजीव नगर इलाके में जहां तहां खुला है स्कूल

संवाददाता, पटनाना तो स्कूल की बिल्डिंग है और ना ही कैंपस, स्कूल के नाम पर चार कमरे और स्कूल के नाम का साइन बोर्ड ही दिखता है. लेकिन यह सीबीएसइ ने एफिलिएटेड स्कूल है. प्रभात खबर के ऑन स्पॉट स्कूल पड़ताल में कई ऐसे स्कूल दिखे जहां पर स्पेश के नाम पर बस चार क्लास रूम है. कई स्कूल अपार्टमेंट में चल रहे है तो कई स्कूल गलियों में चल रहे है. राजीव नगर के हर रोड नंबर में एक या दो स्कूल प्राइवेट घर या अपार्टमेंट में चल रहे है. खुद को सीबीएसइ से एफिलिएटेड बता रहे इन स्कूलों की लिस्ट सीबीएसइ के वेबसाइट पर नहीं है. लेकिन सीबीएसइ के नाम पर अभिभावक मोटी रकम देकर अपने बच्चे का नामांकन करवा रहे है.
अपार्टमेंट के दो फ्लोर पर चल रहे स्कूल इंद्रपूरी स्थित सैकरेड पब्लिक स्कूल कुलानंद कुंज अपार्टमेंट में चल रहा है. मेन रोड पर ही स्थित इस अपार्टमेंट के सेकेंड फ्लोर पर तीन कमरे में चल रही है. मॉटेसरी, प्रायमरी और सेकेंडरी के लिए एक-एक कमरे में स्कूल चलता है. फी के नाम पर मोटी रकम भी स्कूल में नामांकन के समय लिया जाता है. सीबीएसइ ने इस स्कूल को मान्यता नहीं दिया हुआ है, लेकिन यह स्कूल सीबीएसइ के नाम पर स्कूल चला रहा है.
मान्यता खत्म, फिर भी चल रहा स्कूलकई ऐसे स्कूल है जहां की मान्यता सीबीएसइ ने दो साल तीन साल पहले खत्म कर दिया है, लेकिन आज भी ये स्कूल सीबीएसइ के नाम पर चल रहे है. शेरवुड स्कूल की मान्यता को सीबीएसइ ने तीन साल पहले ही खत्म कर दिया था. लेकिन यह स्कूल आज भी अपने साइन बोर्ड पर सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त लिख कर कमाई कर रहा है. इसके अलावा न्यू दिल्ली पब्लिक स्कूल और अंकुर पब्लिक स्कूल की भी मान्यता सीबीसइ ने 2014 में खत्म दिया है. फिर स्कूल सीबीएसइ के नाम पर ही चल रहा है.
मान्यता मिला नहीं और चला रहे सीबीएसइ के नाम पर स्कूल - शेरवुड स्कूल, राजीव नगर
- सैकरेड हर्ट पब्लिक स्कूल, इंद्रपुरी - आइडियल पब्लिक स्कूल, राजीव नजर
- लेटर्स स्कूल, राजीव नगर - भारती पब्लिक स्कूल, इंद्रपुरी
- वीणा भारती स्कूल, राजीव नगर - विधा भारती निकेतन, राजीव नगर
- अंकुर पब्लिक स्कूल- न्यू दिल्ली पब्लिक स्कूल 

एफिलिएशन मिलने के बाद सीबीएसइ के नियम ताक पर

- सीबीएसइ से एक बार एफिलिएशन मिलने के बाद स्कूल करते है अपनी मनमानी

संवाददाता, पटना
नियम से अलग हट कर सेक्शन चला रहे है. टीचर्स की संख्या कम है. एक सेक्शन में 40 से अधिक स्टूडेंट का नामांकन लिया जाता है. स्कूल में प्ले ग्राउंड नहीं है. क्लास रूम की कमी है. स्कूल कैंपस में कोचिंग संस्थान खुले हुए है. स्कूल के टीचर्स बाहर में ट्यूशन करते है. पटना के कई स्कूल सीबीएसइ के नियम को ताक पर रख कर स्कूल चला रहे है. सीबीएसइ से मान्यता लेने के समय भले पटना के स्कूल सारे नियम को फॉलो करते हों, लेकिन जैसे ही सीबीएसइ से एक बार एफिलिएशन मिल जाता है तो सारे नियम से परे हट कर स्कूल अपनी मनमानी करता है. बाहर में ट्यूशन करते है कई स्कूलों के टीचर्स
सीबीएसइ की माने तो दो साल पहले बोर्ड ने तमाम टीचर्स के लिए एक सर्कूलर जारी किया. इसमें कहा गया था कि कोई भी सीबीएसइ स्कूल के टीचर स्कूल के अलावा बाहर प्राइवेट ट्यूशन नहीं कर सकते है. लेकिन पटना में तमाम स्कूलों के कई टीचर्स बाहर प्राइवेट ट्यूशन करते है. कई टीचर्स को काेचिंग संस्थान तक खोल रखा है. इसके अलावा कई स्कूल कैंपस में ही कोचिंग संस्था चल रहे है. स्कूल की पढ़ाई के बाद कोचिंग में स्टूडेंट को क्लास करना पड़ता है. इसके लिए स्टूडेंट को अलग से फी भी देना होता है. एडहॉक पर भरते है टीचर्स
पटना के स्कूलों में एडहॉक पर टीचर्स को रख कर काम चलाया जाता है. ऐसे में कम पैसे पर ही टीचर्स काे स्कूल वाले रखते है. इससे क्वालिटी एजुकेशन पर काफी असर होने लगा है. टीचर्स भी आयें दिन स्कूल में बदल दिये जाते है. एक स्कूल के टीचर ने बताया कि दो से तीन हजार सैलरी के नाम पर मिलता है. ऐसे में क्वालिटी एजुकेशन कहां से आयेगा. एडहॉक पर हमें कुछ महीनों के लिए रखा जाता है. ऐसे में हम भी काम चलाने के लिए ही पढ़ाते है. परमिशन से अधिक चल रहे सेक्शन
सीबीएसइ के अनुसार क्लास वन से लेकर 12वीं तक एक समान सेक्शन ही स्कूल में रखा जायेगा. अगर क्लास वन में तीन सेक्शन चल रहे है तो 12वीं तक तीन ही सेक्शन हर क्लास में होगा. लेकिन पटना के अधिकांश स्कूल में क्लास वन से 12वीं तक के सेक्शन में अंतर है. क्लास वन में तीन सेक्शन तो 10वीं तक यह 7 से आठ सेक्शन हो जाते है. इसी को लेकर 2014 में सीबीएसइ ने पटना के सेंट माइकल के साथ कई स्कूलों को फिक्स सेक्शन चलाने का निर्देश दिया था. लेकिन दो साल लगभग हो जाने के बाद भी स्कूल अपनी मरजी के ही सेक्शन चला रहे है.
मान्यता प्राप्त स्कूलों को इन नियम को करना है पालन - जितने सेक्शन चलाने का परमिशन मिले, उतने ही सेक्शन स्कूल को चलाना है
- एक सेक्शन में 40 से अधिक स्टूडेंट नहीं होना चाहिए - 40 स्टूडेंट पर दो टीचर्स होने चाहिए
- स्कूल में मेन गेट के अलावा दो और गेट होने चाहिए - स्कूल में क्लास रूम के अलावा सीढ़ी, लिफ्ट, मेन गेट आदि में सीसी टीवी कैमरा लगा हो
- स्कूल में आउट डोर गेम के लिए प्ले ग्राउंड हो. इंडोर गेम के लिए हॉल होने चाहिए - स्कूल अाने और जाने को स्टूडेंट के लिए कंवियेंस की व्यवस्था स्कूल करें
- ट्रेंड टीचर्स की ही नियुक्ति स्कूल में हो - एंटी सेक्सुल हेरेसमेंट, एंटी रैंगिग सेल भी स्कूल में हो
- फर्स्ट एड, रेस्ट रूम और डाक्टर की व्यवस्था स्कूल में हो - टीचर्स की सैलरी सीबीएसइ द्वारा फिक्स सैलरी ही दी जायेगी 

स्टूडेंट्स की हर एक्टिविटी पर होगी अब टीचर्स और अभिभावक की नजर

- सीबीएसइ ने लांच किया सारांश प्रोजेक्ट, 7 नवंबर से हुआ लागू

संवाददाता, पटनाक्लास में बच्चे का पफार्मेंस कैसा है. क्लास की पढ़ाई में अापका बच्चा किस पोजिशन पर है. बच्चे का रिकार्ड कार्ड हर महीने का कैसा आ रहा है. सब्जेक्ट वाइड स्टूडेंट का डेवलपमेंट कैसा हो रहा है. स्टेट, नेशनल आदि लेवल पर स्टूडेंट का परफार्मेंस कैसा है. अब इन चीजों की जानकारी जहां पैरेंट्स के लिए आसान हो जायेगा, वहीं टीचर्स भी आसानी से स्टूडेंट के बारे में जान पायेंगे. सीबीएसइ की ओर से सारांश पोर्टल लांच किया गया है. 7 नवंबर को शुरू किया गया सारांश पोर्टल के तहत स्कूल के एग्जामिनेशनल सिस्टम में पारदर्शिता लायी जायेगी. डिजिटल इंडिया प्रोग्राम को लेकर इसे शुरू किया गया है. इसकी शुरुआत 9वीं से 12वीं क्लास के लिए किया जा रहा है.
एजुकेशन में किया जायेगा इंप्रूव सीबीएसइ की माने तो सारांश पोटर्ल से स्टूडेंट के एजुकेशन सिस्टम को इंप्रूव किया जा सकेगा. इससे पैरेंट्स और स्कूल के बीच इंट्रैक्शन बढ़ेगा. पैरेंट्स को स्टूडेंट के बारे में जानने के लिए टीचर्स या स्कूल से संपर्क नहीं करना पड़ेगा. सारांश पोर्टल पर जाकर सारी जानकारी उन्हें मिल जायेगी. सारांश पोर्टल से स्कूल और पैरेंट्स खुद का सेल्फ रिव्यू कर पायेंगे.
पैरेंट्स ऐसे रख सकेंगे नजर - सारांश पोर्टल पैरेंट्स के पास मौजूद रहेगा. स्कूल स्टडी कैसा चल रहा है, इसकी जानकारी पैरेंट्स को मिल जायेगी
- पैरेंट्स को सारांश पोर्टल में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. - हर पैरेंट्स को एक रजिस्ट्रेशन नंबर और बच्चे का रौल नंबर दिया जायेगा. इसके आधार पर पैरेंट्स जानकारी ले पायेंगे
- स्कूल की अोर से पैरेंट्स को यूजर नेम और एक पासवर्ड दिया जायेगा. हर पैरेंट्स को उनके मोबाइल और ई-मेल पर पासवर्ड भेजा जायेगा. - यह पासवर्ड ऑथेंटिक पैरेंट्स को ही मिलेगा.
स्कूल सारांश पोर्टल से स्टूडेंट्स पर रख सकेगा नजर - सारांश प्रोजेक्ट हर सीबीएसइ मान्यता प्राप्त स्कूलों को दिया गया है
- हर स्कूल को एफिलिएशन नंबर और स्कूल कोड देने के बाद बोर्ड द्वारा सारांश पोटर्ल से जोड़ा जायेगा - बोर्ड द्वारा स्कूल को यूजर नेम और पासवर्ड प्रोवाइड करवाया जायेगा
- 9वीं और 11वीं में रजिस्ट्रेशन होने के साथ ही स्टूडेंट का सारा डाटा सारांश पोर्टल से जुड़ जायेगा. कोट
सारांश पोर्टल से एजुकेशन क्षेत्र में पारदर्शिता आयेगा. पैरेट्स और टीचर्स को सारी जानकारी स्टूडेंट के बारे में पता चलेगा. स्टूडेट्स के एजुकेशन के बारे में तमाम जानकारी ली जा सकेगी. हर स्कूल को इससे जोड़ा गया है. राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ \\B

भगवान के प्रति अटूट विश्वास और आस्था का पर्व है छठ

संवाददाता, पटना

भगवान भास्कर के प्रति अटूट विश्वास और आस्था से जुड़ा हुआ पर्व है छठ. यह एक ऐसा पर्व है जिसमें किसी मूर्ति की पूजा नहीं हाेती है. प्रकृति के स्वरूप भगवान सूर्य की पूजा की जाती है. जहां तक मेरी जानकारी है छठ पर्व की शुरूआत मगध की धरती से हुई है. जब बौद्ध धर्म अपने चरम पर था. बौद्ध धर्म को हटाने के लिए सूर्य की पूजा लोगों ने शुरू किया. चूंकि यह प्रकृति से जुड़ा हुआ है, इससे लोग इस पर्व से जल्दी ही जुड़ गये. मगध से निकला यह पर्व बिहार के दूसरे जिलों में फैला और अब तो यह देश के हर हिस्सों में मनाया जाता है. विदेशों में भी छठ अब मनाये जाने लगा है. मेरे यहां छठ नहीं होता है. मै संथाल परगणा का रहने वाला हूं. उन दिनों हमारे जिले में छठ नहीं होता था. लेकिन जब मै बड़ा हुआ तो इस पर्व के प्रति आस्था बनने लगी. यह पर्व हर पर्व से बिल्कुल ही अलग होता है. इस पर्व की सबसे अच्छी बात है कि इसमें किसी पंडित या पुरोहित की जरूरत नहीं होती, लेकिन फिर भी इस पर्व में हर वर्ग के लोगों की जरूरत होती है. सूर्य को हम प्रकृति के रूप में जानते हैं. इस कारण हर धर्म, जाति के लाेग का इस पर्व के प्रति आस्था है. इस पर्व में कोई भेदभाव नहीं होता है. यह जनमानस का पर्व है. इससे हर कोई सीधे जुड़ा हुआ है. हर वर्ग के लोग एक साथ एक जगह नदी, तालाब आदि में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते है. चार दिनों के इस महापर्व में ऐसा दिखता है कि हर कोई बस सूर्य की ही उपासना में लगा रहता है. भगवान भास्कर का उनके उपर कृपा बनी रहे, इसके लिए हर कोई इस पर्व से जुड़ता है. मुझे ऐसा लगता है कि हर साल इस पर्व से सैकड़ों लोग जुड़ते है. जो भी एक बार इस पर्व से जुड़ जाता है, वो हर साल इस पर्व में जुड़ना चाहता है. इस पर्व की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी है. गरीब हो या अमीर, इस पर्व में हर कोई एक समान होता है. जिनके घर छठ नही होता है, वो भी अपने आप को किसी ना किसी रूप में इस पर्व से जोड़ते है. कोई साफ सफाई तो कोई सेवा कर इस पर्व से जुड़ जाता है. चार दिनों के अनुष्ठान में पहले दिन से लेकर अंतिम अर्घ्य देने दिन तक इस पर्व में महता बनी रहती है. इस पर्व से सीधा जुड़ाव भगवान से होता है. तभी तो चार दिनों के अनुष्ठान और खास कर लगातार 36 घंटे तक निर्जला व्रत करना आसानी से हो जाता है. भगवान सूर्य की आराधना करने से मनोकामना तुरंत पूरा होता है. वर्तमान में हमारे कई पर्व त्योहार आधुनिकता में बदल चुका है. लेकिन छठ पर्व में आज भी ट्रेडिशनल का ख्याल रखा जाता है. आज भी इस पर्व में पारंपरिक चीजों का ही ख्याल रखा जाता है.
खगेंद्र ठाकुर, साहित्यकार \\B

छठ महापर्व अब बिहार नहीं देश का हो गया पर्व

संवाददाता, पटना

छठ महापर्व पूरी तरह से हमारी आस्था से जुड़ा हुआ पर्व है. इसे महापर्व का नाम दिया गया है, क्याेंकि हर साल इस महापर्व से लाखाें लोग जुड़ते है. एक बार अगर कोई इस पर्व से जुड़ जायें तो उसकी आस्था इस पर्व से अटूट हो जाती है. चार दिनों के इस महापर्व में लोग इस तरह डूब जाते है कि बस हर तरफ आस्था ही आस्था नजर आती है. मेरे यहां पर छठ महापर्व नहीं होता है, लेकिन मै खुद को इससे जुड़ा हुआ महसूस करता हूं. बचपन से ही इस पर्व के प्रति काफी अास्था है. यह पर्व बिहार का पर्व है, लेकिन अब यह देश क्या विदेशों में भी होने लगा है. जहां पर भी बिहार के लोग है, अब धीरे-धीरे हर जगहों पर छठ महापर्व होने लगा है. बिहार के लोगों के साथ वहां के स्थानीय लोग भी इस पर्व से जुड़ने लगे है. एक बार मै नागालैंड और मिजोरम में था. वहां के लोगों को हिंदी नहीं आती थी, लेकिन छठ के प्रति ऐसी आस्था थी कि हर कोई सुबह में सूर्य के दर्शन काे नदी, तालाब पर पहुंच गया था. मुबंई में तो समुद्र किनारे छठ पर लाखों लोग भगवान भास्कर को अर्घ्य देते हैं. पूरी रात लोग घाट पर ही रहते है. दीपावली हो या दशहरा हो, इन पर्व में भगवान की पूजा घरों तक ही सीमित रहती है. लेकिन छठ का छटा, घर से लेकर बाहर तक दिखती है. जिस तरह की साफ सफाई छठ में दिखती है, वह किसी और पर्व में नहीं दिखती है. स्थानीय लोग खुद ही साफ सफाई करते है. छठ व्रती को भगवान का दर्जा दिया जाता है. घाट तक व्रती के पहुंचने कोई दिक्कतें ना हो, इसके लिए हर कोई एकजुट रहता है. अापसी प्रेम और भाईचारा जितना इस पर्व में दिखता है, उतना किसी और पर्व या त्योहार में नहीं दिखता है. हर जाति, धर्म के लोग इस पर्व से किसी ना किसी रूप से जुड़ जाते है. प्रकृति का एक अद्भुत रूप भी इस महापर्व में दिखता है. लंबे इंतजार के बाद जब उगते हुए सूर्य का दर्शन होता है तो आस्था और बढ़ जाती है.
अभय सिन्हा, रंगकर्मी \\B

भगवान भास्कर को साक्षात देख कर नजदीक होने का मिलता है अनुभव

संवाददाता, पटना

चार दिनों के उपवास के बाद जब उगते हुए सूर्य के दर्शन होते है, तो अजीब सी एनर्जी मिलती है. यह ऐसा एनर्जी होता है जो सालों भर कुछ भी करने से नहीं मिलता. चार दिनों के अनुष्ठान और लगातार 36 घंटे के व्रत का पता ही नहीं चलता है. पिछले 40 सालों से छठ व्रत कर रही डा. शांति राय ने बताया कि हर साल का छठ एक नया अनुभव देता है. छठ महापर्व के व्रत का अनुभव अद्भुत होता है.
20 सालों से गंगा नदी नहीं, घर पर ही करती हूं छठ गंगा नदी दूर होती जा रही है. वहीं छठ व्रतियों की भीड़ भी गंगा नदी में बढ़ती जा रही है. ऐसे में गंगा घाट पर जाने से पूजा कम, खुद को संभालना ही अधिक पड़ता है. भगवान सूर्य का दर्शन करना तक कठिन हो जाता है. डा. शांति राय की माने तो गंगा नदी में छठ व्रत करना बहुत कठिन होता है. डा. शांति राय ने बताया कि लगभग 20 साल पहले ही गंगा नदी पर जाना छोड़ दिया. अब घर पर ही छठ में सूर्य को अर्घ्य देती हूं. उन्होंने बताया कि 1990-91 के बीच एक्सीडेंट होने के कारण उस साल गंगा नदी में छठ करने पर रोक लगा दी गयी थी. इसके बाद से मै छठ अपने घर पर ही कर रही हूं.
चार दिनों में हर केस हो जाता सफल आम तौर पर डा. शांति राय छठ व्रत के दौरान पेंसेट को नहीं देखती है. लेकिन जब सीरियस केस आता है तो ऐसे पेसेंट को छाेड़ती भी नहीं है. बताती है डा. शांति राय कि चार दिन मै पूरी तरह से भगवान को समर्पित करती हूं. इस दौरान मै छुट्टी लेकर बस भगवान की आराधना में लगी रहती हूं. लेकिन जब भी इस दौरान कोई सीरियस पेंसेंट आता है तो उसका इलाज भी करती हूं. अपना अनुभव शेयर करते हुए डा. शांति राय ने बताया कि मैने अभी तक देखा है कि चार दिनों के अंदर जो भी पेंसेंट का इलाज किया, उसे केस बिलकुल ही सही रहा.
हर साल मिलता नया अनुभव छठ महापर्व का अनुभव हर साल डा. शांति राय के लिए नया होता है. वो बताती है कि हर साल का व्रत एक नया अनुभव देता है. चार दिनो के व्रत के बाद जब सूर्य का दर्शन होता है तो लगता है कि सारी मनोकामना पूरी हो गयी. चार दिन कैसे निकल जाते है पता ही नहीं चलता है. 1974 में पहली बार अपने छठ व्रत का अनुभव शेयर करते हुए डा. शांति बताती है कि पहली बार जब छठ किया तो पता ही नहीं चला और चार दिनों तक व्रत करते चली गयी.
ससुराल में शुरू किया छठ करना डा. शांति राय ने बताया कि बचपन से ही छठ पर्व देखती आयी थी. हर साल में छठ पर्व का इंतजार रहता था. लेकिन जब शादी हुई और ससुराल आयी तो ससुराल में छठ व्रत नहीं होता था. जब छठ महापर्व आता था तो मुझे काफी कमी खलती थी. हमेशा लगता रहता था कि कुछ कमी है. इसके बाद मैने खुद छठ महापर्व करना शुरू किया. 

स्पेशल पेन से सीबीएसइ लेगी 12वीं बोर्ड की परीक्षा

- स्टूडेंट को परीक्षा केंद्र पर जायेंगे यूनिफाॅर्म में

रिंकू झा, पटनासेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से 2016 के बोर्ड परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी गयी है. परीक्षा केंद्र पर परीक्षा को कदाचार मुक्त करने के लिए बोर्ड की ओर से इस बार कई चेंजेज किये जायेंगे. पहली बार 12वीं बोर्ड के परीक्षाथी को जहां स्पेशल पेन मिलेगा, वहीं तमाम परीक्षार्थियों को स्कूल यूनिफाॅर्म में परीक्षा केंद्र पर जाने का निर्देश दिया गया है. सीबीएसइ की ओर से निर्देश जल्द ही तमाम स्कूलों को भेजा जायेगा. परीक्षा संबंधित सारी जानकारी स्कूलों को एक महीने पहले अवगत करवाया जायेगा.
एक जैसे इंक से देंगे परीक्षाथी परीक्षा सीबीएसइ सूत्रों की माने तो इस बार 12वीं के तमाम परीक्षाथी एक जैसे इंक से ही परीक्षा देंगे. परीक्षाथी पेंसिल का काम तो अपने लाये हुए पेंसिल से करेंगे, लेकिन बॉल पेन बोर्ड द्वारा उपलब्ध करवाया जायेगा. इसकी तैयारी भी बोर्ड ने शुरू कर दी है. हाल में हुए एआइपीएमटी और सीटीइटी की परीक्षा में पहले ही सीबीएसइ स्पेशल पेन से परीक्षा ले चुकी है. इन दाेनों परीक्षाओं में मिली सफलता के बाद बोर्ड ने 12वीं बोर्ड की परीक्षा में भी इसे करने का निर्णय लिया है.
स्कूल यूनिफाॅर्म में परीक्षा केंद्र पर जायें स्टूडेंट सीबीएसइ ने इस बार बोर्ड परीक्षा में यूनिफाॅर्म पहनने का भी निर्देश दिया है. अभी तक परीक्षाथी अपनी मर्जी से यूनिफाॅर्म या फाॅर्मल ड्रेस पहन कर परीक्षा केंद्र पर जाते है. लेकिन अब तमाम 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा केंद्र पर यूनिफाॅर्म में परीक्षार्थी को जाना होगा. सीबीएसइ की माने तो यूनिफाॅर्म में होने से उन परीक्षार्थी को पकड़ में लाया जा सकेगा जो दूसरे स्कूल से परीक्षा देते है. किस स्कूल का कौन से स्टूडेंट है, इसे पकड़ा जा सकेगा. यह नियम स्कूल बेस्ड 10वीं बोर्ड की परीक्षा में भी लागू होगा.
दो साल पहले आउट हो गया था प्रश्न पत्र 2014 में 12वीं बोर्ड की परीक्षा में फिजिक्स का पेपर लीक हो गया था. इसको लेकर सीबीएसइ ने परीक्षा सेंटर पर सीसीटीवी लगाये जाने का भी निर्देश दिया था. इस बार परीक्षा केंद्र पर बाहर और अंदर में भी सीसी टीवी कैमरा लगाया जायेगा. इसके अलावा मनी पर्स, हाथ घड़ी आदि पहनने पर भी पाबंदी लगाये जाने की संभावना है.
कोटहर साल की अपेक्षा इस बार बोर्ड परीक्षा संबंधित परीक्षा केंद्रों पर कई बदलाव किया जायेगा. परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा को लेकर कई इंतजाम किये जायेंगे. वहीं परीक्षार्थी पर भी कड़ी निगाह रखी जायेगी. इससे कदाचार संबंधित कोई घटना ना हो.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया\\B

यहां मन्नतों की है मान्यता, पर अब गंगा हुई दूर

- पटना के कई घाटों से जुड़ी लोगों की आस्था

रिंकू झा, पटनाशहर के कई घाटों को लेकर लोगों की अपनी-अपनी मान्यता व आस्था जुड़ी हुई हैं. भले ही समय के साथ इन घाटों का स्वरूप बदला हो, लेकिन इनका महत्व नहीं घटा है. गंगा का पानी दूर चले जाने की वजह से यहां पर छठ पूजा करना संभव नहीं रहा, फिर भी बड़े दूर-दूर से लोग मनौती लेकर यहां छठ पूजा करने पहुंच रहे हैं. मान्यता है कि जिस घाट पर मनौती मांगी जाती है, उसी घाट पर छठ व्रत पूरा करना होता है. ऐसा ही एक कलेक्ट्रियट घाट है, जहां पर जहानाबाद से आये परमहंस और रूबी सिंह नहाय खाय से लेकर पूरा पर्व करने की तैयारी में हैं. उनकी मान्यता है कि कभी इसी घाट पर छठ पूजा की मनौती मांगने पर उनके घर बेटा हुआ था. इसलिए यहां पर पर्व पूरा करेंगे. यहीं आस्था सैकड़ों लोगों की है जो अन्य घाटों से भी जुड़ी है. हर साल पटना में सैकड़ों लोग इसी आस्था से छठ व्रत करने को आते हैं.
कई गोद में आयी खुशहाली गंगा नदी अब कई घाटों से दूर जा चुकी है. लेकिन छठ व्रतियों के लिए आज भी वहीं घाट महत्वपूर्ण हैं, जहां पर उनकी मनोकामना पूरी हुई थी. आज भी कई परिवार कलेक्ट्रेट घाट पर आकर छठ करते है. कलेक्ट्रेट घाट के बारे में मान्यता है कि इस घाट पर खड़े होकर जिसने भी जो मनोकामना की, उसकी पूरी हुई है. पांच साल पहले तक कलेक्ट्रेट कैंपस में हजारों श्रद्धालु आया करते थे. अब व्रतियों की संख्या इस घाट पर कम हो गयी है. लेकिन इसके वाबजूद छठ व्रती इस घाट पर अाकर खरना करते है.
कृष्णा घाट पर खुद मां बोलती है गंगा की कल-कल घारा से आशीर्वाद मिलता रहता है. यू तो अब पानी कम हैं, लेकिन आस्था कम नहीं हुई है. यहां की मान्यात को लेकर राजीव कुमार बताते है कि कई तरह की बीमारी यहां पर स्नान करने से दूर हो जाती है. पुरानी मान्यता हवाला देते हुए राजीव ने बताया के महेंद्रू घाट और कृष्णा घाट का काफी महत्व हुआ करता था. वक्त बदल गया है, मगर आस्था आज भी इस घाट के प्रति वहीं है.
तीन मां का वरदान दरभंगा महाराज की हवेली से होकर मां काली की पूजा और फिर गंगा के किनारे छठ व्रत करने की परंपरा काफी पुरानी है. इस घाट को लेकर अलग-अलग लोगों का अपना अनुभव है. इस घाट के प्रति मान्यता है कि इस घाट पर आने से सभी की मन्नतें पूरी होती हैं. तीन मां एक साथ उसे आशीष देती है. रूक्मिणी देवी ने बताया के तीनों मां का आशीर्वाद उनके घर पर बना रहता है.
आस्था के आगे कुछ नहीं दिखता अदालत घाट पर छठ के दौरान भगदड़ को एक हादसा मनाने वाले छठ व्रतियों ने बताया कि यह पूरा का पूरा आस्था से जुड़ा है. जिसकी जहां पर आस्था होती है वो उसी घाट पर आकर छठी मइया की पूरा अर्चना करते है. भगवान भास्कर को अर्घ्य देते है और अपनी मनोकामना पूरा करने के लिए गुहार भी लगाते है. राजीव ने बताया कि वे लोग शाम के अर्घ्य के लिए सुबह से ही घाट किनारे आ जायेंगे.
पटना विवि घाट पर मांगते है मनौती पटना के गंगा नदी की महिमा हर तरफ है. प्रदेश के दूसरे जगहो से भी लोग यहां पर छठ करने को आते है. लोग शुभ काम करने के लिए यहां आते है. बच्चों का मुंडन से लेकर पूजा पाठ और कर्म कांड करवाया जाता है. पटना विवि घाट उन लोगों के लिए था जो पटना में छठ करने आना चाहते थे. आज भी बाहरी लोगों के लिए यह घाट काफी महत्वपूर्ण है. लोग बाहर से आकर यहां पर छठ करते है.
बिना घाट पर गये नहीं होता पूजा पूरीतमाम छठ व्रती गंगा के किसी ना किसी घाट पर जरूर जाते है. नहाय खाय से लेकर खरना के बीच व्रती एक बार गंगा नदी में जाकर स्नान और फिर वहां से जल भरती है. डा. शांति राय ने बताया के गंगा नदी में भीड़ अधिक होने से हम लाेग अब घर में ही छठ करते है. लेकिन चार दिनों के अनुष्ठान में एक बार जरूर गंगा घाट जाकर स्नान करते है. 

Monday, November 9, 2015

स्वच्छता को लेकर सीबीएसइ देगा स्वच्छ माॅनिटर सम्मान

- सीबीएसइ ने स्कूलों को दिया निर्देश

संवाददाता, पटना कई ऐसे बीमारी है जिससे स्वच्छ वातावरण में रह कर बचा जा सकता है. स्कूल की साफ सफाई बहुत ही जरूरी है. क्योंकि हर बच्चा अपना अधिकांश समय स्कूल में ही गुजारता है. ऐसे में स्कूल में स्वच्छता को लेकर अवेयरनेस बहुत ही जरूरी है. स्वच्छ स्कूल कैंपस को लेकर सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को निर्देश दिया है. इसके तहत कहा गया है कि जिस स्कूल में स्वच्छता पर ध्यान दिया जायेगा, उस स्कूल में एक स्टूडेंट को स्वच्छ माॅनिटर का सम्मान दिया जायेगा. इसकी जानकारी तमाम सीबीएसइ स्कूलों को भेज दिया गया है.
स्कूल को करों क्लीन, मिलेगा इनाम सीबीएसइ ने स्वच्छ स्कूल कैंपस के तहत स्कूलों को कई निर्देश जारी किया है. इस निर्देश के तहत ही स्कूलों को अपने स्तर से साफ सफाई करनी है. अभी तक स्कूलों को क्लीन स्कूल के तरह इनाम मिलता रहा है, लेकिन अब इसके लिए सीबीएसइ उस स्कूल के उस स्टूडेट को चुनेगा जो स्कूल की साफ सफाई पर अधिक ध्यान देगा. हर स्कूल के एक ऐसे स्टूडेंट को स्वच्छ मार्निटर बनने का भी मौका सीबीएसइ की ओर से दिया जायेगा.
छह महीने पर होगी स्कूल की जांचसीबीएसइ की आेर से हर छह महीने पर स्कूलों की जांच भी करवायी जायेगी. बोर्ड द्वारा जांच के बाद और सैटिसफाइड होने के बाद ही उस स्कूल में स्वच्छ मार्निटर बनाये जायेंगे. सीबीएसइ की माने तो पहले क्लास लेवल पर मार्निटर चुने जायेंगे, उसके बाद स्कूल लेवल पर एक मुख्य मार्निटर होगा. यह मार्निटर स्कूल के हर साफ सफाई संबंधित चीजों में शामिल होगा.
ये है सारे निर्देश - स्कूल में गर्ल्स और ब्वॉयज के लिए अलग-अलग टॉयलेट हो
- टॉयलेट की सफाई हर दिन हो- टॉयलेट की साफ सफाई में स्टूडेट का योगदान को देखा जायेगा
- क्लास रूम की साफ सफाई को स्टूडेंट अपने स्तर से देखेंगे - क्लास रूम में कौन सा समान कहां पर रहेगा, इस पर भी स्टूडेंट ध्यान रखेंगे
- स्कूल कैंपस की साफ सफाई काे कार्ययोजना बनाया जायें कोट
स्वच्छता को लेकर सीबीएसइ का यह पहल काफी बढ़िया है. इससे स्टू्डेंट्स में स्वच्छता को लेकर अवेयरनेस आयेगा. स्कूल में साफ सफाई को लेकर अपने स्तर से तो प्रयास किया जाता है. लेकिन अगर स्टूडेंट इस साफ सफाई से जुड़े तो काफी हद तक स्कूल की साफ सफाई अच्छे से होगा. राजीव रंजन प्रसाद, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ\\B

अपार्टमेंट में चल रहा स्कूल, जहां देखो वहीं पर खुल जाते स्कूल

- इंद्रपूरी और राजीव नगर इलाके में जहां तहां खुला है स्कूल

संवाददाता, पटनाना तो स्कूल की बिल्डिंग है और ना ही कैंपस, स्कूल के नाम पर चार कमरे और स्कूल के नाम का साइन बोर्ड ही दिखता है. लेकिन यह सीबीएसइ ने एफिलिएटेड स्कूल है. प्रभात खबर के ऑन स्पॉट स्कूल पड़ताल में कई ऐसे स्कूल दिखे जहां पर स्पेश के नाम पर बस चार क्लास रूम है. कई स्कूल अपार्टमेंट में चल रहे है तो कई स्कूल गलियों में चल रहे है. राजीव नगर के हर रोड नंबर में एक या दो स्कूल प्राइवेट घर या अपार्टमेंट में चल रहे है. खुद को सीबीएसइ से एफिलिएटेड बता रहे इन स्कूलों की लिस्ट सीबीएसइ के वेबसाइट पर नहीं है. लेकिन सीबीएसइ के नाम पर अभिभावक मोटी रकम देकर अपने बच्चे का नामांकन करवा रहे है.
अपार्टमेंट के दो फ्लोर पर चल रहे स्कूल इंद्रपूरी स्थित सैकरेड पब्लिक स्कूल कुलानंद कुंज अपार्टमेंट में चल रहा है. मेन रोड पर ही स्थित इस अपार्टमेंट के सेकेंड फ्लोर पर तीन कमरे में चल रही है. मॉटेसरी, प्रायमरी और सेकेंडरी के लिए एक-एक कमरे में स्कूल चलता है. फी के नाम पर मोटी रकम भी स्कूल में नामांकन के समय लिया जाता है. सीबीएसइ ने इस स्कूल को मान्यता नहीं दिया हुआ है, लेकिन यह स्कूल सीबीएसइ के नाम पर स्कूल चला रहा है.
मान्यता खत्म, फिर भी चल रहा स्कूलकई ऐसे स्कूल है जहां की मान्यता सीबीएसइ ने दो साल तीन साल पहले खत्म कर दिया है, लेकिन आज भी ये स्कूल सीबीएसइ के नाम पर चल रहे है. शेरवुड स्कूल की मान्यता को सीबीएसइ ने तीन साल पहले ही खत्म कर दिया था. लेकिन यह स्कूल आज भी अपने साइन बोर्ड पर सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त लिख कर कमाई कर रहा है. इसके अलावा न्यू दिल्ली पब्लिक स्कूल और अंकुर पब्लिक स्कूल की भी मान्यता सीबीसइ ने 2014 में खत्म दिया है. फिर स्कूल सीबीएसइ के नाम पर ही चल रहा है.
मान्यता मिला नहीं और चला रहे सीबीएसइ के नाम पर स्कूल - शेरवुड स्कूल, राजीव नगर
- सैकरेड हर्ट पब्लिक स्कूल, इंद्रपुरी - आइडियल पब्लिक स्कूल, राजीव नजर
- लेटर्स स्कूल, राजीव नगर - भारती पब्लिक स्कूल, इंद्रपुरी
- वीणा भारती स्कूल, राजीव नगर - विधा भारती निकेतन, राजीव नगर
- अंकुर पब्लिक स्कूल- न्यू दिल्ली पब्लिक स्कूल 

Friday, November 6, 2015

सीबीएसइ ने परमिशन दिया नहीं, स्कूल ने ले लिया नामांकन

- पटना के कई स्कूल 2015-16 सत्र के लिए ले लिया 11वीं में नामांकन

संवाददाता, पटनासीबीएसइ ने 11वीं में नामांकन पर रोक लगा दिया. फिर भी स्कूल ने नामांकन ले लिया. अभिभावकों को जानकारी है नहीं और स्टूडेंट्स नामांकन लेकर पढ़ाई भी कर रहे है. सीबीएसइ ने 11वीं में नामांकन पर रोक लगा दिया है. लेकिन स्कूल मनमानी करके नामांकन ले लिया है. ऐसा ही एक मामला इन दिनों पटना सीबीएसइ रीजनल ऑफिस पटना में चल रहा है. डीएवी खगौल को सीबीएसइ ने सख्त हिदायत 11वीं में नामांकन नहीं लेने के बारे में दिया गया था. स्कूल को 2015-16 में 11वीं में नामांकन नहीं लेने को कहा गया था. लेकिन डीएवी खगौल ने 2015-16 सत्र के लिए 181 स्टूडेंट का नामांकन 11वीं में लिया है.
- 2017 में फंसेगे सारे स्टूडेंट्स 11वीं में नामांकित सारे 181 स्टूडेंट 2017 की 12वीं बोर्ड की परीक्षा में फंस जायेंगे. ये स्टूडेंट ना तो बोर्ड से 11वीं रजिस्ट्रर्ड हो पायेंगे और ना ही 2017 की परीक्षा में शामिल हो पायेंगे. सीबीएसइ सूत्रो की माने तो जिन स्कूलों को मान्यता खत्म करता है या नामांकन नही लेने की नोटिस देता है, ऐसे स्कूल की कोई जानकारी बोर्ड के पास नहीं होता है. चुकी अब सारा कुछ ऑन लाइन हो गया है. ऐसे में 12वीं का परीक्षा फार्म भी स्टूडेंट नहीं भर पायेंगे. इस संबंध में डीएवी टीचर्स एसोसिएशन के महासचिव निखिल कुमार ने बताया कि डीएवी खगौल में 11वीं में इस बार नामांकन हुआ है. टीचर्स एसोसिएशन की ओर से विराेध करने के बावजूद नामांकन लिया गया.
कोट2015-16 को लेकर डीएवी खगौल को 11वीं में नामांकन लेने पर रोक लगाया गया था. इसके लिए 9 फरवरी 2015 को ही स्कूल को नोटिस भेज दिया गया था. ऐसे में स्कूल को 11वीं में नामांकन नहीं लेना है. हमारे नॉलेज में यह बात आयी है. इन तमाम स्टूडेंट का 11वीं में रजिस्ट्रेशन नहीं हो पायेगा.
जोसफ इमैन्युअल, सचिव, सीबीएसइ \\B

देश भर में एक जैसे होंगे 12वीं के एग्जाम

सीबीएसइ ने दिया प्रस्ताव, हर स्टेट बोर्ड से लिया जा रहा सलाह

रिंकू झा, पटनादेश भर में 12वीं का एग्जाम जल्द ही एक फॉर्मेट पर होगा. सभी प्रदेशों में 12वीं का प्रश्नपत्र एक समान होगा और उनकी परीक्षा भी एक समय में ली जायेगी. इसको लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय और सीबीएसइ ने मिल कर संयुक्त प्रस्ताव तैयार किया है. इस प्रस्ताव को स्टेट बोर्डों को भेज कर उस पर राय भी मांगी गयी है. रायशुमारी होने के बाद अगले सत्र से इसे लागू कर दिये जाने की संभावना है. इसके लागू होने पर स्टूडेंट्स को अधिक फायदा होगा.
एक ही जैसे प्रश्न पत्र पर ली जायेगी परीक्षा 12वीं के एग्जाम को लेकर तैयारी शुरू कर दी गयी है. 12वीं के एग्जाम के कुछ कॉमन फीचर तय किये गये है. जिस पर सारे एजुकेशन बोर्ड फॉलो करना होगा. सीबीएसइ की मानें तो इसकी शुरुआत कॉमन सिलेबस से होगी. क्वेश्चन पेपर का डिजाइन एक जैसा होगा. इसको लेकर सभी बोर्डस से सहमति ली गयी है, ताकि क्वालिटी और स्टैंडर्ड एक जैसा हो सके.
हर बोर्ड का अपना है सिलेबस वर्तमान में अलग-अलग एजुकेशन बोर्ड का सिलेबस अलग-अलग है. इसलिए मंत्रालय ने एक जैसा सिलेबस बनाने का प्रस्ताव दिया गया. फिलहाल सभी बोर्ड एग्जाम भी अलग-अलग डेट में होते है. इससे कई बार कुछ कॉम्पीटिशन एग्जाम की डेट को लेकर भी विवाद बना रहता है. डेट कई बार आगे पीछे करनी पड़ती है. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो अगर पूरे देश में 12वीं के एग्जाम एक ही तारीख में हो, तो इससे एग्जाम डेट भी क्रॉस नहीं होगी.
क्वेश्चन पेपर भी एक जैसा क्वेशचन पेपर का कॉमन फॉमेट रखने पर भी लगभग सभी बोर्ड्स के अधिकारियों ने सहमति जतायी. वर्तमान एग्जाम व्यवस्था में किसी बोर्ड में ज्यादा ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन होते है. किसी में ज्यादा सिलेक्टिव. इसलिए किसी बोर्ड के स्टूडेंटस ज्यादा मार्क्स ले आते है जबकि दूसरे बोर्ड के स्टूडेंट्स के उतने मार्क्स नहीं आ पाते है. इसलिए सहमति बनी कि कॉमन फॉमेंट बनाया जायेगा. जिसमें तय होगा कि कितने ऑब्जेक्टिव. ग्रेस मार्क्स को लेकर भी कॉमन सिस्टम की बात हुई.
कोट
12वीं बोर्ड की परीक्षा एक साथ अगर पूरे देश में ली जाती है तो इसमें बिहार के छात्रों को काफी फायदा होगा. क्योंकि बिहार के छात्र पिछड़ जातेे हैं. मार्क्स के कारण बिहार के छात्र पीछे नहीं रह पायेंगे. देश भर के लिस्ट में बिहार के छात्र का नाम होगा. लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
काॅमन परीक्षा होने से हर बोर्ड के छात्र को एक जैसा मौका मिलेगा. परीक्षा से लेकर रिजल्ट तक एक सिस्टम में होगा. हर स्टूडेंट की प्रतिभा एक जैसा सामने आयेगी. कॉमन परीक्षा का सिस्टम काफी अच्छा है. राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ

कैंपस है नहीं, किराये पर खोल लिया स्कूल

एक ही स्कूल में सीबीएसइ के दो तरह के नियम है चलते

रिंकू झा, पटनास्कूल - सेंट कैंरेंस प्रायमरी स्कूल. मकान नंबर - 138 डी. मकान मालिक - आरके सिन्हा. स्कूल होली मिशन गर्ल्स स्कूल. मकान नंबर - 135 डी. स्कूल - रेंडियेट इंटरनेशनल किड्स स्कूल. मकान नंबर - 341 बी. किराये के मकान में चल रहे इन स्कूल की मुख्य बिल्डिंग भले कहीं और हो. मुख्य बिल्डिंग में भले स्कूल खोलने के सारे नियमों का पालन हो रहा हो, लेकिन इन स्कूल के ब्रांच स्कूल भी चलते है. इन ब्रांच स्कूल में ना तो सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के नियम का पालन होता है और ना ही स्कूल का अपना बिल्डिंग ही है. गुरुवार को प्रभात खबर की ओर से बोरिंग रोड से कुर्जी मोड़ तक स्कूलों की पड़ताल की गयी. इसमें पाया गया कि कई बड़े स्कूल की मेन बिल्डिंग भले सारी सुविधाओं और बोर्ड के नियम के अनुसार चल रहे हो, लेकिन इसका उलटा ब्रांच स्कूल में सुविधा के नाम पर कुछ नहीं दिया जाता है.
किराये पर चलते है तमाम ब्रांच स्कूल पटना में कई एरिया में तमाम बड़े स्कूलों के ब्रांच स्कूल चलते है. अलग-अलग एरिया में चल रहे ब्रांच स्कूल अधिकांश किराये के मकान में चल रहे है. ये किराये का मकान किसी एडवोकेट या आइएएस ऑफिसर का है. इन स्कूलों में ना तो प्ले ग्राउंड है और ना ही कमरे में समुचित रोशनी ही आती है. कई क्लास रूम में तो काफी अंधेरा भी रहता है. स्कूल कैंपस में मेन गेट के निकलने ही रोड है. इससे छुट्टी के समय भारी जाम का भी सामना स्टूडेंट काे करना पड़ता है.
फी के नाम पर सारे चार्जेज लेता है स्कूल ब्रांच स्कूल में सुविधा मिले ना मिले, लेकिन फी लेने में स्कूल वाले पीछे नहीं रहते है. मोटी रकम के नाम पर हर महीने ट्यूशन फी के साथ कई अन्य चार्जेज भी लिये जाते है. प्ले ग्राउंड हो ना हो, लेकिन एक्टिवटी के नाम पर एनुअल चार्जेज लिये जाते है. होली मिशन गर्ल्स स्कूल के सूत्रो की माने तो स्कूल के दो ब्रांच चलते है. पहले ब्रांच एके पूरी के मकान नंबर 126 में चलता है. यहां पर क्लास वन से 10वीं तक की पढ़ाई होती है. वहीं दूसरे ब्रांच में 11वीं और 12वीं का क्लास चलता है. 135 डी मकान नंबर में चल रहे इस स्कूल में क्लास रूम अंधेरा है. लैब और लाइब्रेरी के नाम पर कुछ नहीं है. लेकिन स्कूल वाले चार्ज के रूप में मोटी रकम लेते है.
सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के अनुसार ऐसा हो स्कूल कैंपस - स्कूल की एक बिल्डिंग होगी
- स्कूल में प्ले ग्राउंड होना चाहिए - इंडोर गेम और आउट डोर गेम की सुविधा होनी चाहिए
- स्कूल कैंपस में सीसी टीवी कैमरा लगे होना चाहिए - एक क्लास में 40 स्टूडेट से अधिक नहीं होने चाहिए
- 10 स्टूडेंट पर दो टीचर्स होने चाहिए - स्कूल कैंपस में रैंप की व्यवस्था होना चाहिए
इन स्कूलों के चलते है कई कैंपस - सेंट कैरेंस हाई स्कूल
- होली मिशन स्कूल - होली मिशन इंटरनेशनल स्कूल
- होली क्रास इंटरनेशनल स्कूल - रेडियेंट इंटरनेशनल स्कूल
- सेंट डॉमिनिट सोवियोज हाई स्कूल - डाॅन बास्को एकेडमी

मूल्यांकन निदेशक पर होगी उत्तर पुस्तिका भुलाने की जिम्मेवारी

- 2015 के स्क्रूटनी के दौरान पकड़ में आये कई मूल्यांकन केंद्र, बिहार बोर्ड अध्यक्ष हुए सख्त

संवाददाता, पटनामूल्यांकन केंद्र पर से उत्तर पुस्तिका गुम हो जा रही है. उत्तर पुस्तिका की जिम्मेवारी मूल्यांकन केंद्र के निदेशक पर होती है. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से मूल्यांकन केंद्र को मैट्रिक और इंटरमीडिएट के उत्तर पुस्तिका की जिम्मेवारी सौंपी जाती है. ऐसे में अगर मूल्यांकन केंद्र से अगर कोई उत्तर पुस्तिका नहीं मिल रहा है तो इसकी पूरी जिम्मेवारी मूल्यांकन निदेशक पर होगा. इसको लेकर बिहार बोर्ड की आेर से एक चिट्ठी तमाम मूल्यांकन निदेशक को भेजा गया है. ज्ञात हो कि 2015 में स्क्रूटनी के दौरान यह पाया गया है के कई मूल्यांकन केंद्र से उत्तर पुस्तिका गुम हो गया. लगभग पांच सौ उत्तर पुस्तिका पायें गये है जो मूल्यांकन केंद्र से गायब हो गये है. ऐसे में स्क्रूटनी का काम नहीं हो पाया है.
सूचना के अधिकार के तहत जवाब देंगे मूल्यांकन निदेशक सूचना के अधिकार के तहत हर बोर्ड की यह जिम्मेवारी है कि बोर्ड परीक्षा के उत्तर पुस्तिका को दो सालों तक रखना है. अगर कोई छात्र सूचना के अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिका लेना चाहे तो, समिति को छात्र को उत्तर पुस्तिका उपलब्ध करवाना होगा. बोर्ड अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि अगर कोई छात्र सूचना के अधिकार के तहत अपना उत्तर पुस्तिका मांगता है तो ऐसे में मूल्यांकन निदेशक इसका जवाब देंगे. अगर छात्र कोर्ट में जाता है. तो कोर्ट में भी मूल्यांकन निदेशक पर ही जवाब देने की जिम्मेवारी होगी. 

नीचे दुकान, शो रूम और उपरी मंजिल पर चल रहा स्कूल

- सीबीएसइ करे एफआइआर तो 40 फीसदी स्कूल हो जायेगा बंद

तमाशा स्कूल पार्ट टू
संवाददाता, पटनासेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने भले स्कूल खोलने के नियम बना रखे हो. बिना नियम के स्कूल खोलने पर पाबंदी हो, लेकिन पटना में कई ऐसे स्कूल है जो सीबीएसइ के नियम को ताक पर रख कर स्कूल चला रहे है. अभी तक आपने पढ़ा कि पटना में कई ऐसे स्कूल है जिनके पास ना तो प्ले ग्राउंड है और ना ही सही क्लास रूम ही है, लेकिन फिर भी स्कूल चल रहे है. प्रभात खबर के ऑन स्पॉट पड़ताल के तहत ऐसे कई स्कूल सामने आयें जो ऐसे बिल्डिंग में चल रहे है, जिनके नीचे और उपर दुकान या शो रूम चल रहे है. बिल्डिंग के बीच के पार्ट में स्कूल चल रहा है. मीठापुर एरिया में चल रहे इन स्कूलों के ना तो बाउंड्री से घेरा हुआ है और ना ही सुरक्षा को लेकर कोई गार्ड आदि की व्यवस्था ही गयी है.
सीबीएसइ के नाम पर चला रहे स्कूल सीबीएसइ के नाम का इस्तेमाल वहीं स्कूल करेगा जो सीबीएसइ से या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त हो, लेकिन पटना के कई ऐसे स्कूल है जो बिना मान्यता प्राप्त ही सीबीएसइ के नाम का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे है. मीठापुर में आरकेपी पब्लिक स्कूल को सीबीएसइ का मान्यता प्राप्त नहीं है. लेकिन स्कूल ने अपने नेम प्लेट पर सीबीएसइ का नाम इस्तेमाल किया है. जिस तरह से पटना में स्कूल सीबीएसइ के नाम का इस्तेमाल कर रहे है, इससे अगर सीबीएसइ द्वारा एफआइआर किया जायें तो 40 फीसदी स्कूल बंद हो जायेगा.
खुशरुपुर में मेन स्कूल, ब्रांच चल रहे पटना में स्कूल को भले खुशरुपुर के एड्रेस पर सीबीएसइ ने मान्यता दिया हो, लेकिन स्कूल पटना स्थित मीठापुर में चल रहा है. एसआर विद्यापीठ सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त तो है, लेकिन सीबीएसइ ने खुशरुपुर एसआर विद्यापीठ को मान्यता दिया हुआ है. मीठापुर में स्कूल का एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस है. एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस में ही स्कूल चलाये जा रहे है. स्कूल के बाहर लकड़ी विक्रेता का दुकान है. इसका भी बोर्ड स्कूल के बोर्ड के साथ लगा हुआ है.
सड़क पर ही खड़ा कर रखा है स्कूल बिल्डिंग मीठापुर एरिया से जक्कनपुर तक ऐसे कई स्कूल है जिनके पास ना तो प्ले ग्राउंड है और ना ही कैंपस ही है. बस सड़क किनारे ही स्कूल की बिल्डिंग खड़ी है. छुट्टी के बाद स्टूडेंट सड़क पर ही निकल कर स्कूल वाहन में बैठते है. सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है. सड़क पर ही खड़े इन स्कूल बिल्डिंग में कोई सुविधा तक नहीं है.
सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के नियम को ताक पर रख कर चल रहे ये स्कूल - एनी बेसेंट स्कूल
- एसआर विद्यापीठ- आरकेपी पब्लिक स्कूल
- एनी बेसेंट नेशनल स्कूल- शिवम पब्लिक स्कूल
- विवेकानंद पब्लिक स्कूल - प्राकृतिक स्कूल
- सेंट एमजी पब्लिक स्कूल 

Monday, November 2, 2015

मैट्रिक के दस और इंटर के पांच-पांच टॉपर को सम्मानित करेगा बिहार बोर्ड

- तीन दिसंबर को सम्मानित होंगे टॉपर

संवाददाता, पटनाबिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से तीन दिसंबर को मैट्रिक के दस टॉपर को सम्मानित किया जायेगा. पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के जयंती समारोह पर हर साल बोर्ड की तरफ से मैट्रिक और इंटर के टॉपर्स को सम्मानित किया जाता है. 2015 के मैट्रिक के दस टॉपर के अलावा इंटरमीडिएट के हर स्ट्रीम से पांच-पांच टॉपर्स को भी सम्मानित किया जायेगा. इस संबंध में बोर्ड अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि मेरिट लिस्ट एक दो दिनों में तैयार हो जायेगा. नये मेरिट लिस्ट पर ही टॉपर को सम्मानित किया जायेगा. इसकी सूचना टॉपर को बोर्ड की तरफ से दिया जायेगा. इसके अलावा प्रदेश भर से दस जिला शिक्षा पदाधिकारी और दस जिलाधिकारी को भी बोर्ड सम्मानित करेगा. इसके अलावा प्रत्येक जिले के स्कूल टॉपर के प्रिंसिपल को भी समिति की ओर से सम्मानित किया जायेगा. इस बार समिति मॉडल पेपर तैयार करने में योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित करेगी. 2015 में मैट्रिक और इंटर के मॉडल पेपर तैयार करने वाले लगभग 70 टीचर्स को समिति इस बार सम्मानित करने जा रही है. 

केवीएस में खुला शिकायत निवारण दिवस, हर दूसरे शनिवार को सुनी जायेगी शिकायत

- नवंबर से शुरू होगा हर स्कूल में शिकायत निवारण दिवस

संवाददाता, पटना स्टूडेंट, शिक्षक और तमाम कर्मचारियों की शिकायत का निबटारा जल्द से जल्द हो, इसके लिए तमाम केंद्रीय विद्यालय में शिकायत निवारण दिवस शुरू किया जा रहा है. इसके तहत कोई भी शिकायत को तुरंत सूनी जायेगी और उसका निवारण भी तुरतं किया जायेगा. इसको लेकर केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) की ओर से निर्देश जारी किया गया है.
- हर महीने के दूसरे शनिवार को शिकायतों का होगा निपटारा शिकायत निवारण दिवस नाम से शुरू हो रहा इसे तमाम केंद्रीय विद्यालय में नवंबर से ही शुरू करने को कहा गया है. प्रत्येक महीने के दूसरे शनिवार को सुबह 11 बजे से चार बजे तक शिकायतों को दर्ज किया जायेगा और उसका निपटारे की प्रक्रिया की जायेगी. अधिक भीड़ ना हो इसके लिए स्कूल अपने स्तर से इसके लिए अलग-अलग काउंटर भी बना सकता है. जो भी शिकायत दर्ज होगा, उसे पांच दिनों के अंदर निबटारा करना होगा. शिकायत दर्ज करने की संख्या और उसके निबटारे की संख्या और उसकी रिपोर्ट हर केवीएस के पास हर विद्यालय को भेजना है.
- मौजूद रहेंगे प्रिंसिपल और सारे हेड जिस दिन शिकायत निवारण दिवस रहेगा, उस दिन विद्यालय के प्रिंसिपल और सारे अधिकारी कोई दूसरा काम नहीं करेंगे. केवीएस के संयुक्त आयुक्त कार्मिक डा. इ प्रभाकर ने बताया कि शिकायत दिवस के दिन कोई भी प्रिंसिपल किसी दौरे पर नहीं रहेंगे. स्थानांतरण आदि के कोई भी काम नहीं होगा. ज्ञात को कि केवी में स्टूडेंट, शिक्षक और कर्मचारी शिकायत तो करते है, लेकिन उसका निपटारा नहीं हो पाता है. इससे हर महीने सैकड़ों शिकायत होती है. 

पैरेंट्स के एजुकेशनल क्वालिफिकेशन पर बच्चों को नामांकन में मिलेगा वेटेज

पटना के कई स्कूल न्यू एडमिशन प्रक्रिया में करने जा रहे चेंज

संवाददाता, पटनान्यू एडमिशन के लिए भले बच्चे की लिखित परीक्षा ना हो, इंटरव्यू से बच्चे को गुजरना ना पड़े, लेकिन पैरेंट्स का इंटरव्यू पर ही बच्चे का नामांकन निर्भर करेगा. अगर पैरेंट्स की एजुकेशन क्वालिफिकेशन कम होगी तो बच्चे के नामांकन में दिक्कतें हो सकती है. 2016 में नये नामांकन को लेकर स्कूलों ने इंटरनल तैयारी शुरू कर दी है. न्यू एडमिशन में उन बच्चों को प्राथमिकता दी जायेगी जिनके पैरेंट्स का क्वालिफिकेशन स्कूल के नाॅम्स अनुसार होगा.
कई प्वाइंट पर नामांकन में रखा जायेगा ध्यान नये नामांकन को लेकर स्कूलों ने वेटेज टेबल बनाया है. इस टेबल में कई प्वाइंट को शामिल किया गया है. नामांकन लेने में स्कूल इन प्वाइंट का ध्यान रखेंगे. ज्ञात हो कि शिक्षा के अधिकार कानून लागू होने के बाद से क्लास वन तक के नामांकन में लिखित परीक्षा या इंटरव्यू पर रोक लगा दिया गया है. ऐसे में स्कूल नये नामांकन में दूसरे कई चीजों को वेटेज देने लगे है. अभी तक बच्चे के एक्टिविटी आदि को नामांकन में फोकस किया जाता था. वेटेज दिया जाता था, लेकिन इस बार से कई स्कूल नामांकन के आवेदन के साथ पैरेंट्स के क्वालिफिकेशन सर्टिफिकेट भी मांगने वाली है.
प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन वाले पैरेंट्स काे मिलेगी प्राथमिकता दिल्ली पब्लिक स्कूल, सेंट माइकल हाई स्कूल आदि ने नये नामांकन में प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन रखने वाले पैरेंट्स को पहले प्राथमिकता दी जायेगी. नॉट्रेडम एकेडमी से मिली जानकारी के अनुसार मदर-फादर दोनों के क्वालिफिकेशन अच्छे होने चाहिए. हायर एजुकेशन वाले पैरेंट्स को नामांकन में पहले प्राथमिकता दी जायेगी.
स्कूल के वेटेज टेबल में ये सारी चीजें होंगी शामिल
वेटेज टेबल            - नर्सरी से पांचवी - छठी से आठवीं पैरेंट्स क्वालिफिकेशन - 40             - 50
गर्ल चाइल्ड - 10             - 5 सिबलिंग             -            20            - 15
इंट्रोडक्शन सेशन - 30             - 40 

टीचर्स जो पढ़ायेंगे, उसकी होगी अब रिकार्डिंग

- सीबीएसइ ने स्कूलों को क्लास रूम में डिवाइस लगवाने का दिये निर्देश

संवाददाता, पटनाटीचर्स क्लास रूम में कैसे पढ़ा रहे हैं? क्या पढ़ा रहे हैं? स्टूडेंट को समझ में आ भी रहा है या नहीं? स्टूडेंट के प्रश्नों का जवाब टीचर्स सही से दे पा रहे है या नहीं? अब इन तमाम चीजों पर सीबीएसइ की नजर होगी. अब स्कूल में जो भी टीचर्स पढ़ायेंगे, उसकी जानकारी सीबीएसइ के पास जायेगी. टीचर्स के टीचिंंग का सीबीएसइ खुद रिव्यू करेगा. अप्रैल 2016 सत्र से इसकी शुरुआत सीबीएसइ के तमाम स्कूलों में किया जायेगा.
हर क्लास रूम में लगेगा रिकॉर्डिंग डिवाइसटीचर्स की टीचिंग पर नजर रखने के लिए सीबीएसइ तमाम स्कूलों के क्लास रूम में रिकार्डिंग डिवाइस लगवाने जा रही है. इस डिवाइस से क्लास रूम में होने वाली तमाम गतिविधियों की रिकॉर्डिंग की जायेगी. इसके बाद रिकॉर्डिंग की सीडी बना कर स्कूल की तरफ से रीजनल ऑफिस में जमा किया जायेगा. रीजनल ऑफिस से सीडी को सीबीएसइ भेजा जायेगा. बोर्ड की ओर से क्लास रूम टीचिंग का रिव्यू किया जायेगा. इस रिव्यू में सीबीएसइ इस बात की जांच करेगी कि क्लास रूम टीचिंग पर टीचर्स का कितना ध्यान हाेता है. ज्ञात हो कि डिवाइस लगाने का खर्च सीबीएसइ की ओर से हर स्कूलों को दिया जायेगा.
टीचर्स को मिलेगा सर्टिफिकेट सीबीएसइ ने टीचर्स को बेस्ट टीचिंग का सर्टिफिकेट भी देने का प्लान बना रही है. क्लास रूम टीचिंग में जिस टीचर्स की टीचिंग सबसे बढ़िया होगी. ऐसे दस टीचर्स को हर महीने चुना जायेगा. इसके अलावा जो टीचर्स टीचिंग में लापरवाही करते हुए पायें जायेंगे, उन्हें बोर्ड की ओर से नोटिस दिया जायेगा. साथ में दो या तीन महीने का समय दिया जायेगा. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो इसके बाद भी अगर टीचर्स में सुधार नहीं होगा तो ऐसे टीचर्स को स्कूल से निकाला भी जा सकता है.
डिवाइस लगने से होगा ये सारे फायदे - टीचर्स क्लास बंक नहीं कर पायेंगे
- टीचिंग में लापरवाही नहीं हो पायेगी - टीचर्स द्वारा हर स्टूडेंट पर एक जैसा फोकस रहेगा
- फिजिकल पनिशमेंट पर लगेगा रोक - टीचर्स बिना कारण स्टूडेंट को डांटेंगे नहीं
- स्टूडेंट भी टीचर्स पर झूठा आरोप नहीं लगा सकेंगे - टीचर्स और स्टूडेंट के संबंध में सुधार होगा
- प्रिंसिपल को अलग से टीचर्स पर नजर नहीं रखना पड़ेगा - स्टूडेंट के पढ़ाई पर भी नजर रखा जा सकेगा
कोटशिक्षा के अधिकार के तहत यह शुरू किया जा रहा है. इससे एजुकेशन में तो सुधार होगा ही साथ में टीचर्स द्वारा पनिशमेंट जैसी चीजों पर भी रोक लगायी जा सकेगी. टीचर्स और स्टूडेंट्स दोनों ही क्लास रूम पढ़ाई को महत्व देंगे. अप्रैल 2016 से इसे लागू कर दिया जायेगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ \\B

Sunday, November 1, 2015

ऑन स्क्रीन मार्किंग जांच होगी 10वीं में

- सीबीएसइ ने 10वीं के ऑन स्क्रीन मार्किंग जांच के लिए मूल्यांकन केंद्र पर लगायेगा स्कैनर

संवाददाता, पटनासेंट्रल बोर्ड सेकेंडरी एजुकेशन ने 2016 की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी है. मार्च में 10वीं बोर्ड परीक्षा होने के साथ मूल्यांकन कार्य भी शुरू कर दिया जायेगा. इस बार फिर सीबीएसइ 10वीं में ऑन स्क्रीन मार्किंग जांच शुरू करने जा रहा है. मूल्यांकन में जो भी आंसर कॉपी की जांच टीचर्स करेंगे, उसकी दुबारा जांच की जायेगी. इसके लिए सीबीएसइ इस बार से मूल्यांकन केंद्र पर एक स्कैनर लगाने जा रही है. इस स्कैनर से आंसर कॉपी की जांच होगी.
टीचर्स की गलती को पकड़ लेगा स्कैनर मार्क्स को लेकर स्टूडेंट को किसी तरह की शिकायत ना हो, इसके लिए सीबीएसइ ने मूल्यांकन के समय ही सावधानी रखने का प्लान बनाया है. मूल्यांकन केंद्र पर स्कैनर से हर आंसर काॅपी की जांच होगी. सीबीएसइ सूत्रो की माने तो स्कैनर ब्रिटेन से मंगवाया जा रहा है. यह स्कैनर तुरंत टीचर्स की गलती को पकड़ लेगा. टीचर्स द्वारा कॉपी की जांच करने के बाद स्कैनर की मदद से हर आंसर काॅपी की जांच होगी. स्कैनर से एक बार में पांच सौ के लगभग आंसर कापॅी में टीचर्स द्वारा की गयी गलती को पकड़ा जा सकेगा.
स्कैनर से इन चीजों पर रहेगी नजर - आंसर कॉपी जांच में टीचर्स ने सही से मार्क्स दिया है या नहीं
- स्टेप वाइज मार्किंग हुई है या नहीं - हर आंसर काे टीचर्स से सही से जांचा है या नहीं
- आंसर के अनुसार मार्क्स दिये गये है या नहीं - जीरो मार्क्स तो नहीं दे दिया टीचर्स ने
- आंसर कॉपी के अंदर और उपर के मार्क्स में अंतर तो नहीं है कोट
ऑन स्क्रीन मार्किंग की जांच से मूल्यांकन में पारदर्शिता लाया जा सकता है. मार्क्स संबंधित स्टूडेंट की शिकायत को दूर किया जा सकेगा. कई बार आंसर कॉपी जांच में टीचर्स से मार्क्स संबंधित गलतियां हो जाती है. लेकिन इस व्यवस्था से इसे सही किया जा सकेगा. राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ 

ब्रांच स्कूल नहीं, सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त वाले स्कूल में करवाये नामांकन

- पटना में कई स्कूलों के चलते है ब्रांच स्कूल

संवाददाता, पटनासीबीएसइ के पास भले एक स्कूल का एक ही एड्रेस हो, सीबीएसइ भले एक स्कूल एक कैंपस पर ही मान्यता भी देता हो, लेकिन पटना में कई ऐसे स्कूल है, जिनके पास स्कूल तो एक है, लेकिन कैंपस कई है. ब्रांच के रूप में स्कूलों ने अलग-अलग एरिया में बांच स्कूल खोल रखे है. सीबीएसइ के पास इन स्कूलों ने अपने ब्रांच स्कूल के बारे में कोई जानकारी नहीं दिया है. अभी नामांकन का समय शुरू होने जा रहा है. ऐसे में अभिभावकों को स्कूल की पूरी जानकारी अभी से रखना शुरू कर देना चाहिए.
अासानी से हो जाता है नामांकन ब्रांच स्कूल चलाने वाले स्कूल में नामांकन भी काफी अासानी से हो जाता है. नामांकन के लिए कोई अंतिम तिथि तक नहीं होती है. आश्चर्य की बात तो तब हो जाती है जब मान्यता प्राप्त स्कूल में नामांकन का अंतिम तिथि निकलती है, लेकिन ब्रांच स्कूल में कभी भी नामांकन हो जाता है. नामांकन के समय स्कूल द्वारा अभिभावकों को सीनियर क्लास में ट्रांसफर हो जाने का आश्वासन भी दिया जाता है. लेकिन अब यह ट्रांसफर नहीं हो पायेगा. क्योंकि सीबीएसइ ने इसके उपर रोक लगा दी है.
ब्रांच स्कूल वाले बच्चे का नामांकन नहीं हो पायेगा सीबीएसइ के नये सक्रूलर के अनुसार ब्रांच स्कूल वाले बच्चे का नामांकन मान्यता प्राप्त वाले स्कूल में नहीं हो पायेगा. क्लास 5वीं के बाद नामांकन लेने पर स्टूडेंट के स्कूल की जांच होगी. सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त वाले स्कूल में पढ़ रहे स्टूडेंट का ही नामांकन हो पायेगा. जो बच्चे उसी स्कूल के ब्रांच स्कूल में पढ़ रहे हो, उस स्कूल में भी नामांकन नहीं हो सकता है.
मान्यता लेने के बाद ही स्कूल चला सकते है ब्रांच स्कूल कोई भी स्कूल अब ब्रांच स्कूल तभी चला सकता है, जब स्कूल ब्रांच स्कूल का भी सीबीएसइ से मान्यता लेता है. ब्रांच स्कूल की मान्यता लेने के लिए स्कूल को सारी फॉमिलिटी को पूरा करना होगा. सीबीएसइ की माने तो ब्रांच स्कूल चलाने के लिए स्कूल को पहले सीबीएसइ के पास आवेदन देना होगा. इसके बाद सीबीएसइ की ओर से जांच के बाद मान्यता मिलेगी. मान्यता मिलने के बाद ही स्कूल ब्रांच स्कूल चला सकता है.
बच्चे के नामांकन के समय स्कूल की जरूर करें जांच - नामांकन लेने से पहले सीबीएसइ के वेबसाइट को जरूर देखे
- सीबीएसइ के वेबसाइट पर हर स्कूल के डिटेल्स है. - वेबसाइट पर जो स्कूल का एड्रेस हो, उसी एड्रेस वाले स्कूल में नामांकन करवाये
- नामांकन से पहले स्कूल का एफिलिएशन नंबर जरूर देख ले - किसी स्कूल के न्यूज पेपर में एडवर्टिजमेंट पर ध्यान नहीं दे
- स्कूल के वेबसाइट की जरूर जांच करें कोट
अब कोई भी ब्रांच स्कूल में पढ़ रहे बच्चे का नामांकन मान्यता प्राप्त स्कूल में नहीं हो सकता है. सीबीएसइ के पास जिस स्कूल के एड्रेस दिया गया है, उसी स्कूल को मान्यता मिला हुआ है. ब्रांच स्कूल चलाने के लिए सीबीएसइ से मान्यता लेना होगा.जोसफ इमैन्युअल, सेक्रेटरी, सीबीएसइ