आज मेरी पहचान पति से नहीं, मेरे खुद के काम से है
- लोगों के कॉमेंट का नजरअंदाज करके शुरू किया मीनाक्षी झा ने अपना कामसंवाददाता, पटना
नाम गुम जाता है, आपका रास्ता बदल जाता है. लेकिन अगर कुछ याद रहता है तो वो आपका काम है. जिंदगी में एक समय ऐसा आता है जब आपके काम ही आपकी पहचान बनती है. आपको नहीं बल्कि आपके काम को लोग पहचानते है. कुछ ऐसा ही पहचान दानापुर की मीनाक्षी बना चुकी है. दानापुर मिथिला कॉलोनी की रहने वाली मीनाक्षी ने हर मुश्किलों का सामान किया. लेकिन हार नहीं मानी. पढ़ाई का सपना तो पूरा नहीं कर पायी, लेकिन खुद की पहचान बनाने में पीछे नहीं हटी. तभी तो आज अपने पति से नहीं बल्कि खुद की पहचान से मीनाक्षी जानी जाती है. मीनाक्षी ने बताया कि पहले लोग मुझे मेरे ससुराल या पति के नाम से जानते थे, आज मेरी खुद की पहचान है.
- पहले सीखा अब देती है दूसरों को ट्रेनिंग
मीनाक्षी ने अपनी प्रयास अकेले शुरू किया था. कई सालों तक प्रयास करने के बाद आज मीनाक्षी खुद का ट्रेनिंग सेंटर चला रही है. मीनाक्षी ने बताया कि मै- पहले सीखा अब देती है दूसरों को ट्रेनिंग मधुबनी पेंटिंग, फेवरिक पेंटिंग, टेडी वियर, जड़ी कढ़ाई, मशीन की कढ़ाई, सिल्क आर्ट, क्ले आर्ट सभी सीखा है. आज मै हर तरह का हैंड वर्क कर सकती हूं. जो सीखा अब उसे दूसरों को सीखा हूं. मैने अपना काम 40 हजार रूपये लगा कर शुरू किया था. अभी 40 से 50 हजार रूपये कमा रही हूं. घर से ही सारा काम करती हूं. आर्डर लेने के साथ उसे पूरा करके देना ही मेरी प्राथमिकता होती है.
- क्ले आर्ट में पहचान बना चुकी है मीनाक्षी
मीनाक्षी ने बताया कि क्ले आर्ट में उनकी सबसे अधिक पहचान है. क्ले आर्ट से बनी मूर्तियां लोगों को काफी पसंद है. क्ले आर्ट में अलग-अलग डिजाइन की मूर्तियां बनती है. इसे सीखने वालों की भी काफी डिमांड रहता है. अभी अलग-अलग चीजों को सीखने के लिए लगभग 40 से 50 महिलाएं हमारे पास ट्रेनिंग के लिए आती है. क्ले आर्ट के अलावा दूसरे आर्ट के लिए स्कूल से भी आफर आ रहे है.
- मुहल्ले वाले करते थे काॅमेंट
मूल रूप से मधुबनी की रहने वाली मीनाक्षी झा की शादी पटना रहने वाले प्रकाश चंद्र झा से हुइ. शादी के बाद परिवार आदि में व्यस्त होने के कारण मीनाक्षी अपने कैरियर को आगे नहीं कर पायी. बताती है मीनाक्षी की शादी के बाद परिवार में बिजी हो गयी. मै पढ़ाई करके एलएलबी करना चाहती थी. वकालत का लाइन मुझे पसंद था. लेकिन मै नहीं कर पायी. इसी बीच मेरे भाई का निधन हो गया. इससे मै पूरी तरह से टूट गयी. लेकिन बाद में खुद को इंगेज करने के लिए हैंड वर्क आदि की ट्रेनिंग लेना शुरू किया. घर से जब ट्रेनिंग लेने जाती तो आस पास के लोग कॉमेंट करते थे कि पैसे की कमी है, इस कारण मै ट्रेनिंग ले रही हूं. इसके बाद जब खुद का काम शुरू किया और बोर्ड घर बाहर लगाया तो लोग फिर कॉमेंट करने लगे कि पैसा नहीं है इस कारण मै दूसरों को सीखा रही हूं.
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