Friday, March 18, 2016

खुद की जिंदगी से लिया सीख और बना डाला फुटबाॅल टीम

- दस गांवों में दस फुटबॉल टीम तैयार कर चुकी है प्रतिमा
संवाददाता, पटना

अपनी जिंदगी को बनाया किताब, उसे पढ़ा और सीख लेकर चल पड़ी बदलाव करने को. खुद से बस एक कंमिटमेंट किया कि जो उसके साथ हुआ, वो दूसरी बेटियों के साथ नहीं होने देगी. चली तो थी अकेले, बढ़ती गयी और कारवां तैयार होता चला गया. प्रतिमा ने अपनी लड़ाई शुरू तो किया अकेले, लेकिन आज वो छह सौ लड़कियों को आत्मनिर्भर बना चुकी और आगे उनका प्रयास चल रहा है. परसा बाजार की रहने वाले प्रतिमा की शादी कम उम्र में कर दिया गया था. इससे प्रतिमा शारीरिक रूप से काफी परेशान रही. प्रतिमा ने बताया कि हमारे समाज में आज भी बाल विवाह या कम उम्र में लड़कियों की शादी कर दी जाती है. इससे काफी परेशानी होती है. ऐसे में शादी के लिए रोका नहीं जा सकता है. ऐसे में फुटबाल के माध्यम से खेल और प्रजनन स्वास्थ्य अधिकार के बारे अवेयर करना शुरू किया. शुरूआत में तो मै अकेले ही सारा कुछ करती थी. लेकिन 2013 से इंटरनेशनल संस्था क्रिया की मदद मिल रही है. अभी हमारी आठ लोगों की टीम है. 
- फुटबाल की दस टीम बन कर है तैयार
प्रतिमा के प्रयास से आज दस गांव में दस फुटबाल टीम तैयार हो चुका है. इसमें से कई टीम को दिल्ली के कैंप में ले जाने की तैयारी चल रही है.  दस गांव में सकरौंचा, ढिवड़ा, लालकोठी, मुरगिराचक, जानीपुर, नगमा, वधनपुरा, मोहली, सीरापर, अधपा शामिल है. ये सारे गांव पटना के परसा बाजार से शुरू होता है. प्रतिमा ने बताया कि इन दस गांवों में दस टीम तैयार हो चुका है. इन तमाम टीमाें में 95 फीसदी ऐसी लड़कियां है जो फुटबाल के बारे में जानती तक नहीं थी. इन्हें फुटबाल के बारे में बताना और फिर फुटबाल खेलना सीखया जाता है. फुटबाल खेलने से इन लड़कियों के बीच आत्मविश्वास बढ़ता है. ये पढ़ना और खेल मे आगे बढ़ना चाहती है. प्रतिमा ने बताया कि गांव स्तर पर फुटबाल की दस टीमों के बीच प्रतियोगिता करवाने की तैयारी चल रही है. इसके बाद जिला स्तर पर आयोजित की जायेगी. - 2008 से शुरू किया अभियान को पहुंचा चुकी है 25 गांवों तक
प्रतिमा का अपना अभियान 2008 में शुरू किया. गौवर ग्रामीण महिला विकास मंच अपने संस्था का नाम रखा. इसके बाद हर गांव में जाकर लोगों को अवेयर करना शुरू किया. कम उम्र में शादी होने से लड़कियों को किस तरह की परेशानी से गुजरना पड़ता है, इसकी जानकारी दिया. गांवों में महिलाओं, पुरूष आदि को अवेयर करने के बाद उस गांव के बेटियों को आपस में जोड़ना शुरू किया. बताती है प्रतिमा कि शुरूआत में तो कोई तैयार नहीं होता है. लेकिन समझाने और कैंप आदि लगाने से लोगों को समझ मे आया. अब लोग बेटियों को पढ़ाना चाहते है. अभी 25 गांव में काम चल रहा है.
- 100 से अधिक बाल विवाह को रोकने में हुई सफल
प्रतिमा के इस फुटबाल टीम का एेसा असर हुआ है कि इन गांवों में अब बाल विवाह या कम उम्र में शादी का प्रचलन खत्म होता जा रहा है. बेटियां पढ़ना चाहती है और अभिभावक अब पढ़ाना चाहते है. ज्ञात हो कि पटना के आसपास के इन गांवों में बाल विवाह का प्रचलन काफी है. बेटियों 12 साल की होती नहीं है कि उनकी शादी कर दी जाती है. ऐसे में फुटबाल खेलना बेटियों के लिए वरदान साबित हो रहा है. प्रतिमा ने बताया कि अभी तक सौ से अधिक बाल विवाह को रोका गया है. अब लड़कियां खुद बोलती है कि वो पढ़ना चाहती है. अभी शादी नहीं करेगी.

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