Friday, March 11, 2016

क्रियेटिव वर्क ने बना दिया समाज में अलग पहचान

 विलुप्त हो रही बिहार की परंपरागत कला को सुमिता प्रकाश दे रही नया रूप

संवाददाता, पटनाजहां चाह है वहां राह है. अगर कुछ करने की चाह हो तो हम उसके लिए अपना रास्ता बना ही लेते है. अब चाहे जीवन में कितनी भी परेशानियां क्यूं ना आ जायें. कुछ ऐसा ही रास्ता अपने लिए सुमिता प्रकाश ने भी बनाया. बचपन से ही कुछ अलग करने की चाह ने आज सुमिता प्रकाश को समाज में अलग पहचान दिलायी है. हैंड वर्क में अलग-अलग तरीके से कई लोग कर रहे है, लेकिन सभी के बीच में अपनी कला को अलग पहचान देने का काम सुमिता प्रकाश ने किया है. तभी तो राज्य स्तर से लेकर नेशनल और फिर इंटरनेशनल लेवल पर सुमिता जी क्रियेटिव वर्क के कारण ही जानी जाती है.
- परंपरागत कला से लेकर कैनवास पर आज का पर्व त्योहार तक शामिल शादी के बाद बच्चे और फिर परिवार की देखभाल. इन सभी के बीच में सुमिता प्रकाश अपना वर्क के लिए समय नहीं निकाल पायी. लेकिन इसी बीच ससुर के कहने पर अपना काम शुरू किया. टेक्सटाइल डिजाइनिंग को कोर्स करके ब्लाॅक पेटिंग, स्क्रीन पेटिंग, मंजूषा ब्लॉक प्रिंट, एप्लिक आदि का काम करती हैं. सुमिता प्रकाश के पेटिंग की खास बात यह है कि विलुप्त हो रहे बिहार की कला को वो किसी ना किसी रूप में अपने पेटिंग में शामिल करती है. इसके अलावा दीपावली, होली, छठ, दशहरा आदि पर्व के हर मूवमेंट को अपने कैनवास लेती है. सुमिता प्रकाश ने बताया कि आरा की एक चुनरी कला है. जो अब विलुप्त हो रहा है. इस कला को मै अभी कुर्ते आदि में डाल कर नया लुक दे रही है. लोगों को पसंद भी आ रहा है. उसी तरह कोई भी पर्व होता है तो उसी के अनुसार डिजाइन करती हूं. इससे लोगों को फेस्टिवल च्वाइस का समान मिल जाता है.
- राज्य पुरस्कार से लेकर इंटरनेशनल ट्रेड फेयर तक सुमिता प्रकाश प्रोडक्शन से लेकर ट्रेनिंग देने का काम भी करती है. अभी तक 15 सौ से अधिक लड़कियों को ट्रेनिंग दे चुकी है. उद्योग विभाग, बिहार सरकार से 2013 में ब्लॉक प्रिटिंग के लिए राज्य पुरस्कार मिला. इसके अलावा जनवरी में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन में बिहार को रिप्रेजेंट कर चुकी है. इसके साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला में भी सुमिता प्रकाश जा चुकी है. इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में 2010 से 2012 तक जाने का माैका सुमिता प्रकाश को देश की ओर से मिला है.
- 15 हजार से शुरू किया छह लाख की हो रही कमाई सुमिता प्रकाश ने अपनी शुरूआत बहुत ही छोटे स्तर पर किया था. घर में ही रोजगार का माध्यम बना कर ब्लॉक प्रिंटिंग का काम शुरू किया. कुछ दिनो के बाद घर में ही अपना स्टॉल खोल लिया. आज कलाकार दुकानों में सामन लेने को जाते है. लेकिन सुमिता प्रकाश के कला के लोग ऐसे दिवाने है कि उनके घर ही लोग समान लेने पहुंच जाते है. सुमिता प्रकाश ने इसकी शुरूआत 15 हजार पूंजी लगा कर किया था. अब सालाना 5 से छह लाख रूपये की आमदनी हो रही है. सुमिता प्रकाश बताती है कि मै उत्सव आदि में शामिल होती हूं. लेकिन अगर किसी को मेरा सामान लेना होता है तो वो मेरे घर पर ही आकर लेते है. 

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