मृगनैनी कुमारी ने अपने शौक को ही बना लिया अपना कैरियर
संवाददाता, पटनाहर किसी के अंदर एक कला छुपी रहती है. बस जरूरत होता है, इसे बाहर निकालने की. कई बार यह शौक या हॉवी के रूप में बाहर आता भी है, पर यह अधिक आगे नहीं चल पाता है और दब कर रह जाता है. हमारे समाज में ऐसे भी लोग है जो अपने शौक काे ही अपना कैरियर का रूप दे डालते है. ऐसा ही एक उदाहरण बनी है मृगनैनी कुमारी. इंटर में ही शादी और परिवार की जिम्मेवारी आ जाने के बावजूद मृगनैनी से हिम्मत नहीं हारी. परिवार की जिम्मेवारी को पूरी तरह से निभाने के साथ-साथ पढ़ाई पूरी किया. इसके साथ अपने शौक को रोजगार का माध्यम बना डाला.
- कोलकाता के जूट आर्ट को बना दिया बिहार की पहचान
मृगनैनी कुमारी को बचपन से ही हैंडक्राफ्ट में काफी शौक था. फालतू पड़ी हुई चीजों को भी आर्ट का रूप दे देती थी. हमेशा कुछ नया प्रयोग करने के बारे में सोचती रहती थी. लेकिन जल्द शादी हो जाने के कारण मृगनैनी कुमारी के सपने दब कर रह गये. मृगनैनी कुमारी ने बताया कि शादी के बाद सारा कुछ छूट गया. लेकिन मैने हिम्मत नहीं हारी. परिवार की जिम्मेवारी को पूरा किया. बच्चे जब बड़े हो गये, स्कूल जाने लगे तो घर पर ही रह कर रोजगार करने की सोचने लगी. हैंडीक्राफ्ट के अपने शौक को फिर शुरू किया. इस बीच एक बार कोलकाता जाने का मौका मिला. वहां पर जूट आर्ट को देखी. फिर मैने ट्रेनिंग भी लिया. आज मै जूट आर्ट को एक अलग पहचान दे रही हूं. बिहारी लुक से इस आर्ट को आगे बढ़ा रही हूं. मेरे इस आर्ट में पटुआ से समान बनाया जाता है. अब इसकी पहचान कोलकाता जूट आर्ट से नहीं बल्कि बिहार के जूट आर्ट से होने लगा है.
- दूसरों को रोजगार दे रही है मृगनैनी
परिवार की जिम्मेवारी संभालते हुए मृगनैनी कुमारी खुद तो नौकरी नहीं किया, लेकिन आज वो इस जगह पर खड़ी है जहां दूसरी महिलाओं को रोजगार दे रही है. मृगनैनी कुमारी ने बताया कि शुरू में मै अकेले ही सारा कुछ करती थी. नये प्रयोग के बारे में सोचती थी, उसे स्केच का रूप देती, फिर उसे आर्ट से रूप में गढ़ती थी. लेकिन ये सारे काम करने में मुझे काफी समय लग जाता था. इसके बाद मै दूसरी महिलाओं को इकट्ठा करना शुरू किया. उन्हें ट्रेनिंग दी. अभी मेरे पास एेसी 25 महिलाएं है जो इस आर्ट से जुड़ी है.
- एक हजार का बिजनेस अब दो लाख पर पहुंच गया
मृगनैनी कुमारी ने एक हजार रूपये की पूंजी लगा कर रोजगार शुरू किया था. अब मृगनैनी का टर्न ओवर दो लाख तक पहुंच गया है. जूट आर्ट के तौर पर घर के सजावट के अलावा बैग, मूर्तियां आदि भी मृगनैनी बनाती है. मृगनैनी कुमारी ने बताया कि देश में कहीं पर भी कोई मेला लगता है तो मै वहां पर जाती हूं. बिहार उद्योग विभाग की ओर से 2011-12 में स्टेट अवार्ड से सम्मानित हो चुकी मृगनैनी कुमारी को 2014 में उपेंद्र महारथी संस्थान की ओर से भी बेस्ट स्टॉल का अवार्ड मिला था. सूरजकुंज मेला, दिल्ली हाट, प्रगति मैदान, सोनपुर मेला आदि में भी मृगनैनी कुमारी अपना स्टॉल लगाती है.

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