Wednesday, March 2, 2016

तेजाब पीड़िता के हक की करती बात, मुफ्त इलाज के साथ विकलांगता का दिलवाया दर्जा

- लातूर से आकर बिहार में 14 साल से कर रही समाज सेवा 

संवाददाता, पटना
कुछ लोग जीते ही है बस दूसरों की खुशी के लिए. अब ये खुशी अगर अपने आस पास नहीं मिले तो वो कहीं और जाकर इस खुशी को ढूढ़ने की कोशिश करते है. इन्हीं में से एक है पटना की वर्षा. महाराष्ट्र के लातूर जिले की रहने वाली वर्षा की सारी पढ़ाई लिखाई भले महाराष्ट्र में हुई. लेकिन अपना कर्मभूमि उन्होंने बिहार को चूना. 2002 में वर्षा पटना आयी. शुरूआत में तो वो कई समाजिक संस्थान से जुड़ी रही. भूमिहीन लोगों के बीच रह कर काम किया. दलितों और बच्चों के बीच काम करते हुए वर्षा के सामने तेजाब पीड़िता के मामले आने शुरू हुए. तेजाब पीड़िता के मामले थाना में दर्ज नहीं होते थे और ना ही इलाज के लिए सरकार से सही मुआवजा की राशि की मिलती थी. यहां से वर्षा ने लड़ाई लड़नी शुरू किया. मनेर की रहने वाली चंचल पर गांव का ही एक लड़का ने तेजाब फेंक दिया था. चंचल के इलाज और मुआवजा दिलाने की लड़ाई में वर्षा को पता चला कि तेजाब पीड़िता को 25 हजार तक ही मुआवजे की राशि मिलती है. इतना ही नहीं तेजाब पीड़िता के मामले थाना में भी दर्ज नहीं होते है.  हर परिस्थिति को देखते हुए वर्षा ने 2012 में सुप्रीम कोर्ट में एक पीआइएल दर्ज करवाया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब पीड़िता चंचल के इलाज की राशि 13 लाख करने का आदेश दिया. इसके अलावा तेजाब पीड़िता को विकलांग का दर्जा सुप्रीम कोर्ट से मिला. साथ में सरकारी और प्राइवेट हास्पीटल में तेजाब पीड़िता के लिए मुफ्त इलाज की छूट मिली. अगर कोई हास्पीटल इलाज नहीं करने तो उसके खिलाफ अवमानना का केस दर्ज होगा. तेजाब पीड़िता को सुप्रीम कोर्ट से अधिकार दिलवाने के बाद से अब तक वर्षा ने कई तेजाब पीड़िता को उनका हक दिलवाया है. इसके अलावा अब वर्षा काे दूसरे स्टेट से भी बुलावा आता है. लगभग दस से उपर तेजाब पीड़िता की मदद कर चुकी वर्षा के प्रयास के तेजाब फेंकने वाले को सजा भी हुआ है. हाल में वर्षा के पास असम की निरूपमा तेजाब पीड़िता का मामला आया था. वर्षा निरूपमा को भी सारी सुविधाएं दिलवायी है. इन निर्दोष लड़कियों के बीच काम करते हुए वर्षा को काफी सूकुन मिलता है. पूरी जिंदगी इन लड़कियों के उपर समर्पित कर चुकी वर्षा ने उन तमाम लड़कियों से अपील की है कि अपनी हक की लड़ाई खुद लड़े. किसी चीज से डरे नहीं और ना ही मन में बात दबा कर रखें. अपनी आवाज खुद बने तभी सही हक मिलेगा.

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