Rinku Jha
Friday, March 11, 2016
... रिजल्ट ने बदल दी जिलों की तस्वीर
पिछले पांच सालों में टॉप पर रहने वाले जिले चले गये निचले पायदान पर
रिंकू झा, पटना
परीक्षा में नकल होने से ना सिर्फ राज्य की तस्वीर बदलती है, बल्कि जिलों की भी तस्वीर बदल जाती है. जहां नकल होने से उस राज्य की बदनामी होती है, वहीं उन जिलों के रिजल्ट पर फर्क पड़ता है जहां पर परीक्षा कड़ाई से ली जाती है. ऐसी स्थिति में उन जिलों को काफी फायदा होता है जहां पर नकल खुलेआम चलता है. इससे ऐसे जिलों का रिजल्ट 80 से 90 फीसदी तक पहुंच जाता है. रिजल्ट का कुछ ऐसा सीन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के मैट्रिक के रिजल्ट में भी देखने को मिल रहा है. पिछले पांच सालों का आकलन करें तो उन जिलों के रिजल्ट सबसे बेहतर हो रहे जहां पर नकल चलती है.
- जो पीछे थे वो पहुंच गये टॉप पर
समिति सूत्रों की माने तो पिछले पांच सालों में मैट्रिक के रिजल्ट में जिलों के टॉप लिस्ट चेंज हो गया है. पहले टाॅप लिस्ट में सुपौल, पटना, भागलपुर, दरभंगा जिलों का रहता था. लेकिन अब इन जिलों का स्थान या तो बीच में रहता है या नीचे के पायदान में रहता है. पहले मैट्रिक का रिजल्ट 80 फीसदी तक ही जाता था, लेकिन अब 90 फीसदी के उपर भी रिजल्ट होता है. सूत्रों की माने तो मैट्रिक के रिजल्ट में जिलों का यह परिवर्तन पिछले पांच सालों में अधिक देखने को मिल रहा है.
- पांच सालों से चार पांच जिले ही रहते टॉप पर
पिछले पांच सालों में अरवल, नवादा, शेखपुरा, जमुई ऐसे कुछ जिले है जो रिजल्ट सबसे बेहतर कर रहे है. इन जिलो में रिजल्ट 90 फीसदी के उपर रहता है. बाकी कुछ जिला में 70 से 80 फीसदी तक रिजल्ट होता है. वहीं कुछ जिलों में 70 फीसदी के लगभग और बाकी में 60 फीसदी के नीचे रिजल्ट होता है. 60 फीसदी के नीचे रिजल्ट देने वाले जिलों की संख्या लगभग 10 है.
- बदल सकता है इस बार जिलों का नाम
इस बार मैट्रिक के रिजल्ट में फिर एक जिलों का नाम चेंज हो सकता है. इस बार प्रदेश भर में नकल पर रोक लगा दी गयी है. पूरी कड़ाई से परीक्षा ली जा रही है. ऐसे में बेहतर रिजल्ट में जिलों के नाम में चेंज हो सकता है. पिछले पांच साल में जिन जिलों ने कब्जा कर रखा है, उन जिलों के बदले कुछ और जिलें का नाम शामिल हो सकता है.
पिछले पांच सालों में मैट्रिक 2010 से 2015 तक मैट्रिक के रिजल्ट में टॉप तीन जिला
साल - 2010
टॉप तीन जिला - अरवल (95 फीसदी), नवादा (94 फीसदी), जमुई (94 फीसदी),
साल - 2011
टॉप तीन जिला - नवादा (96.15 फीसदी), खगड़िया (93.21 फीसदी), अरवल (92.33 फीसदी),
साल - 2012
टाॅप तीन जिला - जमुई (94.25 फीसदी), शेखपुरा (93.11 फीसदी), अरवल (91.33 फीसदी),
साल - 2013
टॉप तीन जिला - शेखपुरा (92.45 फीसदी), अरवल (93.31 फीसदी), नवादा (90.23 फीसदी),
साल - 2014
टाॅप तीन जिला - जमुई (93 फीसदी), अरवल (91.35 फीसदी), नवादा (92.79 फीसदी),
साल - 2015
टॉप तीन जिला - अरवल (95 फीसदी), नवादा (94 फीसदी), जमुई (94 फीसदी),
2010 से 2015 तक मैट्रिक के रिजल्ट में कम परसेंटेज लाने वाले जिले
साल - 2010
टॉप तीन जिला - समस्तीपुर (64 फीसदी), दरभंगा (54 फीसदी), सहरसा (52 फीसदी),
साल - 2011
टॉप तीन जिला - मधेपुरा (61.15 फीसदी), पूर्णिया (54.31 फीसदी), मधुबनी (52.32 फीसदी),
साल - 2012
टाॅप तीन जिला - दरभंगा (56.45 फीसदी), मधुबनी (45.11 फीसदी), पूर्णिया (65.33 फीसदी),
साल - 2013
टॉप तीन जिला - मुजफ्फरपुर (60.46 फीसदी), दरभंगा (69.38 फीसदी), मधुबनी (68.69 फीसदी),
साल - 2014
टाॅप तीन जिला - मधेपुरा (50 फीसदी), बांका (64.35 फीसदी), पूर्णिया (65.79 फीसदी)
साल - 2015
टॉप तीन जिला - अररिया (60 फीसदी), पूर्णिया (65 फीसदी), मुजफ्फरपुर (48 फीसदी)
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