Rinku Jha
Friday, March 11, 2016
रिजल्ट चाहे जो हो, बच्चों को साथ दे पैरेंट्स
सीबीएसइ ने अभिभावकों को काउंसेलिंग के दौरान रिजल्ट को लेकर दिये टिप्स
संवाददाता, पटना
स्कूल में परीक्षा समाप्त हो चुकी है. अभी तमाम स्कूलों में रिजल्ट का दौर शुरू हो गया है. कुछ स्कूलों ने रिजल्ट निकालना भी शुरू कर दिया है. बारी-बारी से हर क्लासेज का रिजल्ट निकाला जा रहा है. ऐसे में रिजल्ट देखकर बच्चे डिप्रेशन में भी जा रहे है. सीबीएसइ ने स्कूल रिजल्ट को लेकर पैरेंट्स को कई टिप्स दिये है. सीबीएसइ के अनुसार रिजल्ट बोर्ड की हो या स्कूल की, पैरेंट्स को हमेशा बच्चों का साथ देना चाहिए. मार्क्स केवल खुद का आकलन होता है कि आपके बच्चे में कहां पर क्या कमी है. उसे स्टेट्स ना जोड़े. सीबीएसइ के अनुसार कई पैरेंट्स बच्चे के रिजल्ट को खुद की इज्जत और स्टेट्स से जोड़ लेते है. इसका सबसे बुरा असर बच्चों के उपर ही पड़ता है.
- सीबीएसइ ने पैरेंट्स को प्रेशर नहीं बनाने की दी सलाह
स्कूल के रिजल्ट को लेकर सीबीएसइ ने पैरेंट्स को प्रेशर नहीं देने की सलाह भी दिया है. सीबीएसइ ने सलाह में कहा है कि पैरेंट्स बच्चे से बहुत ज्यादा एक्सपेक्टेशन रखते है. मगर पैरेंट्स के उम्मीदों को बच्चे खुद पर बोझ मानते है. क्योंकि पढ़ने से अधिक बच्चों के उपर पैरेंट्स को खुश रखने का प्रेशर होता है. इस प्रेशर में भी कई बार उनका एग्जाम बिगड़ता है. रिजल्ट खराब आता है. कई बार तो कुछ बच्चे पढ़ाई में वीक होते है, उन बच्चों पर भी अच्छे मार्क्स लाने का प्रेशर होता है.
इन चीजों पर दे पैरेंट्स ध्यान
- बच्चे की क्षमता देखकर उसे वैसे ही एक्सेप्ट करें
- दूसरों बच्चों से खुद के बच्चे की तुलना ना करें. क्योंकि हर बच्चे की अपनी कैपेबिलिटी होती है - अच्छे मार्क्स लाने पर गिफ्ट देने का लालच ना दे
- रिजल्ट आने के लगभग 120 घंटे पहले बच्चों से बात करके उनका मनोबल जीते - बच्चों के साथ फ्रेंडली बिहेवियर रखिये
- एहसास करायें कि अगर कम मार्क्स आता है तो कोई बात नहीं, नेक्स्ट क्लास में अच्छी कोशिश करेंगे - उन्हें आजादी दीजिए, लेकिन उनके हाव भाव पर गौर कीजिए
- सुसाइड के लिए सोचने वाले बच्चों में काफी दिन पहले से ही लक्षण बदल जाते है- रिजल्ट को लेकर बच्चों को चेतावनी कभी ना दे
- रिजल्ट वाले दिन खुद बच्चों के साथ रहें.
क्यों करें टीचर
- कमजाेर बच्चों को मेंटल स्पोर्ट करें - बच्चे को लेकर पैरेंट्स से बात करें, बच्चों के सामने उनकी शिकायत ना करें
- मेंटल सेटिस्फेक्शन जरूरी है और ये टीचर ही बच्चों का दे सकते है- स्टूडेंट्स को एग्जाम्पल देकर समझाएं, बच्चों की काउंसिलिंग किया जायें
- नोट बुक में माइनस कांमेंट ना करें - रिजल्ट देते वक्त जरूर कहें कि अच्छा किये हो, नेक्स्ट टाइम और अच्छा करना
- दोस्तों के सामने स्टूडेंट्स को बुरी तरह से ना डांटे. उसे प्यार से समझाएं - क्लास में सारे बच्चों को रिजल्ट देने के बाद सारे बच्चों के बेहतर परफार्मेंस के लिए तालियां बजायें
- स्टूडेंट को नये क्लास में प्रमोट होने की बधाई दे
कोट
पैरेंट्स करें सपोर्ट
रिजल्ट अच्छा ना होने पर भी पैरेंट्स बच्चों का सपोर्ट करें. फैमिली का माहौल इस तरह रखें कि बच्चा ना ही डिप्रेशन में जायें और ना ही सुसाइड करने की सोचे. अगर पैरेंट्स ही बच्चों का साथ नहीं देंगे तो वो इस तरह का कदम उठा ही लेते है. अक्सर बच्चे अपने रिजल्ट पर कई उम्मीदें बना लेते है. लेकिन उस तरह के मार्क्स नहीं आने पर डिप्रेशन में चले जाते है. इस कारण इस पर हर पैरेंट्स को ध्यान देने की जरूरत है.
कुमुद श्रीवास्तव, काउंसलर, सीबीएसइ
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