Friday, April 8, 2016

55 फीसदी बढ़ गयी स्कूल की महंगाई, अभिभावक पर बढ़ा बोझ

 15 फीसदी किताबें हुई महंगी तो स्टेशनरी में हुआ 10 फीसदी इजाफा

संवाददाता, पटनाबच्चे का नामांकन हुआ. बच्चे नये क्लास में गये. नया सेशन भी सोमवार से रेगुलर शुरू हो गया. लेकिन यहां तक पहुंचने में अभिभावकों के जेब पर 55 फीसदी का एक्स्ट्रा बोझ भी पड़ गया. 2015 की तुलना में 2016 का नया सेशन 55 फीसदी महंगा हो गया. किताबें हो या नोट कॉपी या फिर स्टेशनरी सारी की सारी चीजों में 5 से लेकर 15 फीसदी तक बढ़ोतरी हो गयी है. खरीदारी में भले अभिभावकों को पता नहीं चला, लेकिन हर चीजों की कीमत इस बार पिछले साल की तुलना में अधिक हो गया है.
- कटौती की कोई गुंजाइश नहीं अभिभावक चाहते हुए भी किसी भी समान में कटौती नहीं कर पा रहे है. स्कूल के निर्देश के अनुसार सारी किताबें नया ही लेना है. पुरानी किताबें स्कूल में लाने की अनुमति नहीं है. वहीं नोट बुक तो नया ही चाहिए. स्टेशनरी भी फिर से नया ही लेना पड़ा है. रहा यूनिफार्म तो इसमें थोड़ा बहुत अभिभावक कटौती कर पायें है. अभिभावक प्रभात गुप्ता ने बताया कि अब सामान भी ऐसे मिलते है कि एक साल के बाद वो पहनने लायक भी नहीं बचता है. शूज का तो यह हाल होता है कि छह महीने के बाद ही दूसरा लेना पड़ता है. स्कूल के जो भी आइटम होते है, वो फिक्स दुकान में ही मिलता है.
- स्कूल काउंटर पर नो डिस्काउंट जिन स्कूल ने खुद ही काउंटर लगवायें थे, वहां पर तो कोई डिस्काउंट भी अभिभावकों नहीं मिला है. जिन स्कूलों ने बाहर के फिक्स दुकान से खरीदारी करने के लिए अभिभावकों को निर्देश दिया था, वहां पर 5 से 10 फीसदी की छूट अभिभावकों को दिया गया. स्कूल से खरीदारी करना अभिभावकों और भी महंगा पड़ा है.
- 70 फीसदी तक बढ़े है स्कूल फी इस बार सबसे अधिक स्कूल फी में बढ़ोतरी की गयी है. जहां मिसनरी स्कूलों ने 10 से 15 फीसदी तक ट्यूशन फी बढ़ाया है, वहीं पटना के कई प्राइवेट स्कूलों ने 70 फीसदी तक फी बढ़ा दिया है. ऐसे स्कूलों के अभिभावक ट्यूशन फी के बढ़ाये जाने से काफी परेशान है. अभिभावकों के बजट पर इसका काफी असर हो रहा है.
- पुराने किताबें नहीं होगा रिपीट कई स्कूलों ने इस बार अभिभावकों का सख्त निर्देश दिये है कि वो पिछले साल की किताबें रिपिट नहीं करेंगे. इससे अभिभावक चाहते हुए भी पुराने किताब बच्चे को नहीं दे पायें है. अभिभावक प्रिया प्रियदर्शी ने बताया कि उनके दो बच्चे एक छठी में और दूसरा पांचवी में गया है. पांचवी वाले के लिए भी पूरी तरह से नया किताब ही लेना पड़ा है. क्योंकि स्कूल ने पुराने किताब लेने से मना किया है. एक साल में तो किताब पुरानी नहीं होती है, फिर भी हमें वहीं किताब लेना पड़ा है.
पढ़ाई संबंधित चीजें - बढ़ गये इतने दाम किताबें - 15 फीसदी (हर विषय में)
नोट बुक - 10 फीसदी स्टेशनरी - 10 फीसदी
यूनिफाॅर्म - 5 फीसदी शूज - 5 फीसदी
ट्रांसपोर्टेशन - 10 फीसदी कोट
पिछले साल की तुलना में इस बार किताबों के दाम अधिक है. 20 फीसदी तक दाम बढ़े है. स्टेशनरी के दाम भी बढ़े है. पढ़ाई की हर चीजों के दाम में थोड़ा बहुत बढ़ोतरी हुई है. अनिल कुमार, मैरेजर, ज्ञान गंगा लिमिटेड \\B

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