Sunday, April 3, 2016

शराब का नाम सूनते ही पापा और बेटे का चेहरा आ जाता है सामने

- विवेक मोहन चतुर्वेदी की कहानी की अंतिम कड़ी

संवाददाता, पटनाहितैशी हैपीनेस होम से वापस तो आ गया. एक साल तक घर में ही बैठा रहा. इस बीच शराब पीने का मन भी कई बार हुआ, लेकिन जब भी शराब पीने की काेशिश करता तो काउंसलर पुष्पीता की बातें सामने आ जाती थी. मार्च 2014 से जून 2015 तक घर पर ही ऐसे बैठा रहा. कहीं पर जाॅब की कोशिश भी करता तो जॉब नहीं मिल रही थी. क्योंकि शराब पीने से मेरा कांफिडेंस एकदम खत्म हो गया था. मेरा मैरेज लाइफ भी लगभग खत्म था. पत्नी सवीता मुझसे तलाक लेना चाहती थी. पत्नी को मनाने का काम शुरू किया. वो मुझ से इतना डर गयी थी कि मेरे पास वापस नहीं आना चाहती थी. उसे डर था कि बेटा मेहुल को मै कुछ ना कर दू. मै उसे काफी कंविंस करने की कोशिश करने लगा. कई महीने कोशिश करने के बाद वो थोड़ा कंविंस हुई और पांच दिनों के लिए पटना आयी. मुझसे मिलकर उसे थोड़ा संतोष हुआ कि अब मै शराब नहीं पीता हूं और बदल गया हूं. लेकिन वो यह कह कर फिर वापस जमशेदपुर चली गयी कि उसे जॉब छोड़ने में दो तीन महीने लग जायेंगे. इस बीच मै पत्नी का इंतजार करता रहा. अगस्त 2015 में पत्नी मेरे पास वापस आ गयी. मुझे ताकत मिला. इस बीच मुझे एक दवा की कंपनी में काम मिल गया. वहीं मेरी दीदी वंदना और जीजाजी उनके बिजनेस में हाथ बटाने को कहने लगे. उनके कपड़े का कई शो रूम पटना में है. मुझे कपड़े की दुकान का कोई अनुभव नहीं था. फिर मैने तीन महीने की कपड़े की दुकान में ट्रेनिंग लिया. इसी बीच खाजपुरा स्थित एक शो रूम खोलना था. इस शो रूम की पूरी जिम्मेवारी मुझे दे दी गयी. इसके बाद मै यहीं से अपनी नयी जिंदगी शुरू किया. अभी लगभग छह महीने से मै यहीं पर रहता हूं. अभी भी मेरे पास मेरे पुराने दोस्तों के फोन आते है. शराब पीने के लिए वो बुलाते है. लेकिन जब भी शराब पीने का ख्याल आता है तो पापा का मजबूर चेहरा, जो हर दिन इस आशा में रहता था कि एक दिन उनका बेटा शराब छोड़ देगा, सामने आ जाता है. वहीं बेटा मेहुल जो कहीं मुझे देखकर शराब पीना ना शुरू कर दे, ये ख्याल से ही मै डर जाता हूं. आज शराब का साथ नहीं है, लेकिन मेरे पास पूरा परिवार है. मै खुश हूं. मेरा पूरा परिवार मेरी हर खुशी के लिए हमेशा तैयार रहता है. अब तो दो साल से भी अधिक शराब को छोड़े हो गया. मन में ख्याल भी कम आता है. अब पूरा ध्यान परिवार पर देना चाहता हूं. 

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