Saturday, April 30, 2016

आइआइटी की राह होगी आसान, 470 सीटों पर अधिक होगा नामांकन

- जेइइ मेन से इस बार चुने जायेंगे टॉप दो लाख अभ्यर्थी

संवाददाता, पटनाजेइइ मेन के रिजल्ट के बाद उन अभ्यर्थी का चुनाव हो जायेगा, जिन्हें जेइइ एडवांस देने के लिए चुना जायेगा. दो लाख अभ्यर्थी देश भर से चुने जायेंगे, जो 22 मई को होने वाली जेइइ एडवांस की परीक्षा में शामिल होंगे. इस बार आइआइटी की राह थोड़ी आसान हो गयी है. एक तो 1.5 लाख की जगह सेलेक्शन दो लाख किया गया है. वहीं इस बार से आइआइटी कॉलेजों की संख्या बढ़ने से सीटें भी बढ़ गयी है. अभी तक 18 आइआइटी कॉलेज में नामांकन लिया जाता था, लेकिन इस बार 18 की जगह 22 आइआइटी कॉलेज में नामांकन लिये जायेगे. इससे 470 सीटें अधिक बढ़ गयी है. जेइइ एडवांस के ताजा प्रॉस्पेक्टस और सीबीएसइ वेबसाइट में इसकी जानकारी दी गयी है. इस बार 470 सीटों का इजाफा हुआ है.
- कई आइआइटी में मिलेगा मौका सीबीएसइ की माने तो इस बार कई आइआइटी को बढ़ाया गया है. इसमें गोवा आइआइटी, आइआइटी छतीसगढ़, आइआइटी जम्मू, आइआइटी करटनाटा शामिल है. आइआइटी गोवा में 80 सीटें, आइआइटी छत्तीसगढ़ में 180 सीटें, आइआइटी जम्मू में 100 सीटें और कर्नाटका आइआइटी में 100 सीटों पर नामांकन लिया जायेगा. इस बार कुल 22 आइआइटी में 9400 सीटों पर नामांकन का मौका अभ्यर्थी को मिलेगा.
- जून अंतिम सप्ताह में निकलेगा ऑल इंडिया रैंक आइआइटी के अलावा एनआइटी या दूसरे इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन के लिए जेइइ एडवांस के बाद ऑल इंडिया रैंक निकाला जायेगा. ऑल इंडिया रैंक के आधार पर ही अभ्यर्थी को तमाम एनआइटी और इंजीनियरिंग कॉलेज में सीटें एलॉट होगी. इसके बाद काउंसिलिंग और नामांकन का कार्य चलेगा. 30 अगस्त के नामांकन संबंधित सारी प्रक्रिया पूरी कर लेनी है. 

मदरसा बोर्ड का सिलेबस चेंज, होगी अब मौलवी में साइंस की पढ़ाई

- 12 सौ की जगह 8 सौ की परीक्षा लेने की तैयारी

संवाददाता, पटनाइंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज तक मदरसा बोर्ड के छात्र भी पहुंच सके, इसके लिए मदरसा बोर्ड ने सिलेबस चेंज करने का निर्णय लिया है. मदरसा बोर्ड में मौलवी में साइंस की पढ़ाई शुरू होगी. इसे इसी सत्र से लागू किया जायेगा. इसकी तैयारी बोर्ड ने करना शुरू कर दिया है. सिलेबस में यह चेंज पिछले 22 साल के बाद किया जायेगा. मौलवी साइंस में फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथेमेटिक्स और बायोलॉजी की पढ़ाई होगी. हर विषय के लिए 100-100 अंक निर्धारित किये गये है.
- अगस्त में शुरू होगा नया सेशन पंचायत चुनाव के कारण मदरसा बोर्ड के फोकानिया (मैट्रिक) और मौलवी (इंटर) की परीक्षा स्थगित कर दी गयी है. इस कारण इस बार नया सत्र देरी से शुरू होगा. बोर्ड की माने तो अगस्त में नया सत्र शुरू होगा. इससे पहले सिलेबस का सारी प्रक्रिया पूरी हो जायेगी. सिलेबस बनाने के लिए कमिटी बनायी गयी है. नयी कमिटी सिलेबस को तैयार को अंतिम रूप दे रहा है.
- आठ सौ अंक की होगी परीक्षा मौलवी की परीक्षा अभी 12 सौ अंकों की ली जाती है. इस अंकों में भी कटौती की जायेगी. नया सिलेबस आठ सौ अंकों का ही होगा. बोर्ड की माने तो अभी दिनियात विषय के तीन पेपर होते है. इसे कम करके दो या एक पेपर किया जायेगा. वहीं अरबी के दो पेपर होते है. इसे भी कम किया जायेगा. विषयों के कम करने से कुल अंक भी कम हो जायेगा. कम अंकों की परीक्षा होने से छात्रों के उपर दबाव कम होगा.
- फोकानिया के बाद छोड़ देते है मदरसा बोर्ड मदरसा बोर्ड में फोकानिया करने के बाद इंजीनियरिंग और मेडिकल को कैरियर चुनने वाले छात्र मौलवी से पढ़ाई नहीं करते है. फोकानिया करने के बाद ये छात्र बिहार बोर्ड से इंटर साइंस की पढ़ाई की पढ़ाई करते है. इससे मौलवी में 50 फीसदी छात्र कम हो जाते है. बोर्ड की माने तो मौलवी साइंस की पढ़ाई शुरू होने से छात्रों ड्रापआउट होने की संख्या कम होगी.
कोटइस साल से मौलवी साइंस की पढ़ाई शुरू होगी. अभी तक केवल मौलवी आर्ट्स की ही पढ़ाई होती थी. इससे फोकानिया के बाद काफी संख्या में छात्र ड्रापआउट हो जाते थे. हम कोशिश कर रहे है कि कुल अंक को भी कम किया जायें.
खुर्शीद अहमद, सचिव, बिहार राज्य मदरसा बोर्ड \\B

जेइइ मेन का रिजल्ट घोषित, पहली बार कट ऑफ सबसे कम

- पटना जोन से एक लाख अभ्यर्थी हुए शामिल

संवाददाता, पटनाज्वाइंट एंट्रांस एग्जामिनेशन (जेइइ) मेन 2016 का रिजल्ट बुधवार को शाम में जारी कर दिया गया. जेइइ मेन में सफल परीक्षार्थी देश के 22 आइआइटी, 30 एनआइटी व टॉप इंजीनियरिंग काॅलेजों में नामांकन ले सकेंगे. जेइइ मेन का रिजल्ट पहले सीबीएसइ के वेबसाइट cbseresult.nic.in पर जारी किया गया. इसके थोड़ी देर बार जेइइ मेन jeemain.nic.in पर रिजल्ट को डाला गया. नेटवर्क स्लो होने के कारण रिजल्ट डाउनलोड होने में भी थोड़ी दिक्कतें आयी. जेइइ एडवांस के लिए पिछले चार वर्षों की तुलना में पहली बार सभी केटेगरी में कट ऑफ में गिरावट आयी है. इस बार जेनरल अभ्यर्थी का कट ऑफ 100 पर गया है. जो 2015 से भी पांच अंक कम है. ज्ञात हो कि जेइइ मेन का ऑफ लाइन 3 अप्रैल और ऑन लाइन 9 और 10 अप्रैल को लिया गया था. देश भर से 12 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे. वहीं पटना जोन से एक लाख के लगभग परीक्षार्थी शामिल हुए थे.
- दो लाख अभ्यर्थी शामिल होंगे जेइइ एडवांस में जेइइ मेन में शामिल 12 लाख अभ्यर्थी में से दो लाख अभ्यर्थी का चयन जेइइ एडवांस के लिए किया गया है. पिछले साल तक 1.5 लाख अभ्यर्थी ही जेइइ एडवांस के लिए चुने जाते थे. लेकिन इस बार 50 हजार अधिक अभ्यर्थी जेइइ एडवांस दे पायेंगे. जेइइ एडवांस 22 मई को देश भर में लिया जायेगा.
- जेइइ मेन के मार्क्स और 12वीं के रिजल्ट पर होगा रैंक निर्धारित सीबीएसइ की माने तो जेइइ मेन के 60 फीसदी और 12वीं के रिजल्ट का 40 फीसदी वेटेज ऑल इंडिया रैंक निर्धारित करेगा. जिन अभ्यर्थी को जेइइ मेन में अच्छे मार्क्स होंगे, लेकिन अगर उनके 12वीं के रिजल्ट सही नहीं होंगे तो ऑल इंडिया रैंक उनके कम हो जायेगा. जेइइ मेन के साथ 12वीं का रिजल्ट भी ऑल इंडिया रैंक के लिए महत्वपूर्ण है.
- 16 अंकों का हुआ फायदा इस बार जेइइ मेन में चार प्रश्न गलत पूछे गये थे. फिजिक्स में दो प्रश्न, केमेस्ट्री और मैथेमेटिक्स में एक-एक प्रश्न गलत पूछे गये थे. ये सारे प्रश्न चार-चार अंको के थे. सीबीएसइ ने इन चारों प्रश्नों के 16 अंक सभी अभ्यर्थी को दिया है. इसका फायदा जेइइ मेन के अधिकांश अभ्यर्थी को हुआ. एक्सपर्ट की माने तो 2015 में कुछ प्रश्न को हटा कर मार्किंग की गयी थी. लेकिन इस बार प्रश्नों को नहीं हटाया गया. इस कारण कट ऑफ में गिरावट आयी. इस संबंध में प्रभात खबर ने 24 अप्रैल को खबर दी थी, जिसमें सीबीएसइ ने चार प्रश्न गलत पूछे जाने की बात स्वीकार करते हुए इनके पूरे अंक दिये जाने की बात कही थी.
- 30 जून को ऑल इंडिया रैंक सीबीएसइ 30 जून को ऑल इंडिया रैंक जारी करेगी. इसी रैंक के आधार पर बांकी एनआइटी और टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज में अभ्यर्थी नामांकन ले पायेंगे. ऑल इंडिया रैंक जेइइ मेन और 12वीं के रिजल्ट के आधार पर निकाला जायेगा.
- एडवांस में होंगे सफल, तभी होगा आइआइटी में नामांकन जुलाई 2012 में जेइइ का दो भागाें में बांटा गया. प्रथम भाग में जेइइ मेन और दूसरा जेइइ एडवांस लिया जाता है. आइआइटी में नामांकन के लिए जेइइ एडवांस जरूरी है. जेइइ मेन की परीक्षा एडवांस के लिए क्वालिफाइंड एग्जाम है. आइआइटी और एनआइटी केंद्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज में एडवांस के आधार पर ही नामांकल दिया जाता है.
- 22 आइआइटी में 94 सौ सीटों पर होगा नामांकन इस बार देश भर के 22 आइआइटी में नामांकन लिया जायेगा. पिछले साल तक 18 आइआइटी में ही नामांकन लिया गया. इस बार 470 सीटें बढ़ गयी है. इससे इस बार 9400 सीटों पर नामांकन लिये जायेंगे.
चार साल का ऐसा रहा कट आॅफ केटेगरी - 2016 - 2015 - 2014 - 2013
जनरल - 100 - 105 - 115 - 113ओबीसी - 70 - 70 - 74 - 70
एससी - 52 - 50 - 53 - 50एसटी - 48 - 44 - 47 - 45

दो पाली में लिया जायेगा 9वीं की परीक्षा

- 100 अंक के पूछे जायेंगे 50 प्रश्न

संवाददाता, पटनामैट्रिक की तरह की 9वीं की परीक्षा दो पाली में ली जायेगी. परीक्षा की तैयारी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने शुरू कर दी है. चुकी 9वीं में परीक्षार्थी की संख्या 17 लाख के लगभग है, इस कारण परीक्षा दो पाली में लेने का निर्णय लिया गया है. दो पाली के लिए प्रश्न पत्र अलग-अलग तैयार किया गया है. परीक्षा ओएमआर सीट पर लिया जायेगा. पांच विषयों की परीक्षा ली जायेगी. हर विषय में 50 प्रश्न पूछे जायेंगे. हर प्रश्न दो अंक का होगा. यानी प्रश्न पत्र 100 अंक का होगा. दो पाली के लिए प्रश्न पत्र अलग-अलग होगा.
- ब्लॉक स्तर पर बनाया जायेगा परीक्षा केंद्र 9वीं की परीक्षा में केंद्र भी अलग से बनाये जायेंगे. परीक्षार्थी काे अपने स्कूल में परीक्षा नहीं देने दिया जायेगा. ब्लॉक स्तर पर जितने भी स्कूल होंगे, उन्हें परीक्षा केंद्र बनाया जायेगा. बोर्ड अध्यक्ष प्रो. लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि 9वीं की परीक्षा के लिए केंद्र ब्लॉक स्तर पर बनाया जायेगा. परीक्षा दो पाली में ली जायेगी. किस पाली में छात्र रहेंगे, इसकी जानकारी एडमिट कार्ड में छात्रों को दिया जायेगा.
- रिजल्ट को लेकर फैसला जल्द9वीं परीक्षा के रिजल्ट को लेकर ग्रेडिंग करने की बात चल रही है. लेकिन अभी इस पर पूरा निर्णय नहीं लिया गया है. समिति की माने तो रिजल्ट ग्रेडिंग में निकाला जायेगा कि अंकों में निकाला जायेगा, इसका निर्णय अभी नहीं लिया गया है. शिक्षा विभाग ने पहले इसे ग्रेडिंग करने की बात कहीं थी, लेकिन इसे परिवर्तन भी किया जा सकता है. जल्द ही इस पर निर्णय लिया जायेगा.
- 2 से 15 मई तक भराये जायेंगे परीक्षा फार्म 9वीं का परीक्षा फार्म पूरी तरह से ऑन लाइन भरायें जायेंगे. ऑन लाइन परीक्षा फार्म के लिए समिति का वेबसाइट बनाने का टेंडर फाइनल हो चुका है. जल्द ही वेबसाइट को तैयार किया जायेगा. इस वेबसाइट पर ही स्कूल प्रशासन को ऑन लाइन 9वीं का परीक्षा फार्म समिति कार्यालय भेजना होगा. ऑन लाइन परीक्षा फार्म के लिए 2 मई से 15 मई तक का समय दिया गया है. 

Friday, April 8, 2016

55 फीसदी बढ़ गयी स्कूल की महंगाई, अभिभावक पर बढ़ा बोझ

 15 फीसदी किताबें हुई महंगी तो स्टेशनरी में हुआ 10 फीसदी इजाफा

संवाददाता, पटनाबच्चे का नामांकन हुआ. बच्चे नये क्लास में गये. नया सेशन भी सोमवार से रेगुलर शुरू हो गया. लेकिन यहां तक पहुंचने में अभिभावकों के जेब पर 55 फीसदी का एक्स्ट्रा बोझ भी पड़ गया. 2015 की तुलना में 2016 का नया सेशन 55 फीसदी महंगा हो गया. किताबें हो या नोट कॉपी या फिर स्टेशनरी सारी की सारी चीजों में 5 से लेकर 15 फीसदी तक बढ़ोतरी हो गयी है. खरीदारी में भले अभिभावकों को पता नहीं चला, लेकिन हर चीजों की कीमत इस बार पिछले साल की तुलना में अधिक हो गया है.
- कटौती की कोई गुंजाइश नहीं अभिभावक चाहते हुए भी किसी भी समान में कटौती नहीं कर पा रहे है. स्कूल के निर्देश के अनुसार सारी किताबें नया ही लेना है. पुरानी किताबें स्कूल में लाने की अनुमति नहीं है. वहीं नोट बुक तो नया ही चाहिए. स्टेशनरी भी फिर से नया ही लेना पड़ा है. रहा यूनिफार्म तो इसमें थोड़ा बहुत अभिभावक कटौती कर पायें है. अभिभावक प्रभात गुप्ता ने बताया कि अब सामान भी ऐसे मिलते है कि एक साल के बाद वो पहनने लायक भी नहीं बचता है. शूज का तो यह हाल होता है कि छह महीने के बाद ही दूसरा लेना पड़ता है. स्कूल के जो भी आइटम होते है, वो फिक्स दुकान में ही मिलता है.
- स्कूल काउंटर पर नो डिस्काउंट जिन स्कूल ने खुद ही काउंटर लगवायें थे, वहां पर तो कोई डिस्काउंट भी अभिभावकों नहीं मिला है. जिन स्कूलों ने बाहर के फिक्स दुकान से खरीदारी करने के लिए अभिभावकों को निर्देश दिया था, वहां पर 5 से 10 फीसदी की छूट अभिभावकों को दिया गया. स्कूल से खरीदारी करना अभिभावकों और भी महंगा पड़ा है.
- 70 फीसदी तक बढ़े है स्कूल फी इस बार सबसे अधिक स्कूल फी में बढ़ोतरी की गयी है. जहां मिसनरी स्कूलों ने 10 से 15 फीसदी तक ट्यूशन फी बढ़ाया है, वहीं पटना के कई प्राइवेट स्कूलों ने 70 फीसदी तक फी बढ़ा दिया है. ऐसे स्कूलों के अभिभावक ट्यूशन फी के बढ़ाये जाने से काफी परेशान है. अभिभावकों के बजट पर इसका काफी असर हो रहा है.
- पुराने किताबें नहीं होगा रिपीट कई स्कूलों ने इस बार अभिभावकों का सख्त निर्देश दिये है कि वो पिछले साल की किताबें रिपिट नहीं करेंगे. इससे अभिभावक चाहते हुए भी पुराने किताब बच्चे को नहीं दे पायें है. अभिभावक प्रिया प्रियदर्शी ने बताया कि उनके दो बच्चे एक छठी में और दूसरा पांचवी में गया है. पांचवी वाले के लिए भी पूरी तरह से नया किताब ही लेना पड़ा है. क्योंकि स्कूल ने पुराने किताब लेने से मना किया है. एक साल में तो किताब पुरानी नहीं होती है, फिर भी हमें वहीं किताब लेना पड़ा है.
पढ़ाई संबंधित चीजें - बढ़ गये इतने दाम किताबें - 15 फीसदी (हर विषय में)
नोट बुक - 10 फीसदी स्टेशनरी - 10 फीसदी
यूनिफाॅर्म - 5 फीसदी शूज - 5 फीसदी
ट्रांसपोर्टेशन - 10 फीसदी कोट
पिछले साल की तुलना में इस बार किताबों के दाम अधिक है. 20 फीसदी तक दाम बढ़े है. स्टेशनरी के दाम भी बढ़े है. पढ़ाई की हर चीजों के दाम में थोड़ा बहुत बढ़ोतरी हुई है. अनिल कुमार, मैरेजर, ज्ञान गंगा लिमिटेड \\B

सड़क का अतिक्रमण इतना कि दो घंटे तक सरकता रहता है स्कूल बस

दीघा सब्जी मंडी के अतिक्रमण से परेशान है स्कूल प्रशासन

संवाददाता, पटनासड़क के दोनों किनारे दुकानें, दुकानों के सामने आधी सड़क पर सब्जी की लंबी कतारें. सब्जी वालों के कतारों के बीच कुमचा वालें. कुमचा और सब्जी वाले के सामने साइकिल और पैदल चलने वालों की भीड़... आधी से अधिक सड़क का अतिक्रमण किया हुआ है. ऐसे में स्कूल की छुट्टी होते ही सड़क पर घंटों जाम की स्थिति बन जाती है. सड़क पर स्कूली बस सरकता हुआ नजर आता है और उसमें बैठे स्टूडेंट्स गर्मी से बेहाल होते रहते है. यह सारा नजारा मंगलवार को दीघा सब्जी मंडी के पास दिखा. स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां पर यह नजारा आम है. हर दिन स्कूल की छुट्टी के समय घंटों स्कूल की बस जाम में फंसती है.
- डिवाइडर बना, फिर भी लगता है जाम दीघा सब्जी मंडी में जाम की समस्या खत्म हो, इसके लिए पहले अतिक्रमण को हटाया गया. बाद में प्रशासन ने बीच मे डिवाइडर बना दिया. डिवाइडर तो बन गया, लेकिन जाम जस का तस रहा. क्योंकि फिर से दुबारा अतिक्रमण शुरू हो गया. सड़क के दोनो किनारे आधे सड़क तक सब्जी वालों ने कब्जा कर रखा है. इससे सड़क पर आने जाने में बहुत ही समस्या होता है. इससे दीघा और दानापुर इलाके के तमाम स्कूलों से आने वाले बसों, ऑटो आदि को उधर से गुजरने में काफी परेशानी होती है.
- स्कूल की टाइमिंग चेंज हाेने का भी असर नहीं जिला प्रशासन के निर्देश पर स्कूलो ने आपस में समय में भी परिवर्तन किया है. जहां सेंट डॉमिनिक सोवियोज हाई स्कूल की छुट्टी 12.30 बजे होता है. वहीं डॉन बास्को एकेडमी की छुट्टी 1.40 में होता है. इस बी हिमालयन स्कूल, वेस्ट प्वाइंट स्कूल की छुट्टी भी होती है. लेकिन इसके बावजूद स्कूल की बसें इस इलाके में फंसती है. सब्जी मंडी में आकर स्कूल की बस सरकने लगती है. मंडी को पार करने में बसों को काफी समय लग जाता है. इस बीच अगर कोई बस खराब हो गयी तो फिर तो परेशानी और बढ़ जाती है.
- दोपहर में खरीदारी नहीं, फिर भी लगा रहता है फूटपाथ दोपहर के समय दीघा सब्जी मंडी की अधिकांश दुकानें बंद रहती है. दोपहर होने के कारण लोग खरीदारी करने नहीं आते है. लेकिन दुकान वालें सब्जी फैला कर ही रखते है. बस उसके उपर बोरी डाल देते है. जिससे सब्जी घूप में सूख नहीं जायें. अगर फूटपाथ को दोपहर में हटा दिया जायें तो जाम की यह स्थिति नहीं बनेगी.
कोटदीघा सब्जी मंडी के कारण हर दिन स्कूल बस जाम में फंसता है. हम कई बार प्रशासन को इसकी जानकारी भी दिये है. एक दो बार सब्जी मंडी को हटाया भी गया है, लेकिन इसके बाद भी दुबारा फिर सब्जी बेचने वाले बैठ गये है. इस अतिक्रमण के कारण कई दिन तो तीन तीन घंटे तक बस फंसी रहती है.
जी जे गॉल्सटॉन, डायरेक्टर, सेंट डॉमिनिक सोवियोज हाई स्कूल दीघा में अतिक्रमण के कारण बस काफी देर तक फंस जाता है. इससे स्टूडेंट्स को काफी परेशानी होती है. सड़क पर ही दुकान खुले हुए है. इससे सड़क का काफी कम हो जाता है. स्कूल की बस गुजरती है तो काफी परेशानी होती है. कई बार घंटों तक जाम में फंसी रहती है.
मेरी अल्फांसो, प्रिंसिपल, डॉन बास्को एकेडमी \\B

सारे नियम ताक पर, सामान ढ़ाेेने वाले ऑटो में स्कूल जाते है बच्चे

ऑटो और वैन में ठूसे जाते है बच्चे

संवाददाता, पटनायहां तो नियम ही बनते है तोड़ने के लिए. खासकर अगर स्कूल की बात हो तो प्रशासन भले नियम बना दे, लेकिन स्कूल वाले उसे माने यह अनिवार्य नहीं होता है. सारे नियम को ताक पर रख कर स्कूल प्रशासन अपनी मरजी से स्कूल नियम का पालन करते है. अभी तक ताे सड़क पर ऑटो में बच्चे ठूसे हुए ही स्कूल आते और जाते नजर आते थे. लेकिन अब ताे समान ढोने वाले ऑटो में भी बच्चे स्कूल आते है. दीघा स्थित सरस्वती एकेडमी, बाघ कोठी के बच्चे हर दिन समान ढोने वाले ऑटो में स्कूल आते-जाते है. खुले ऑटो में बीच में एक तखत रखा हुआ है, इसी तखत पर बच्चे बैठे रहते है. छात्र आदित्य ने बताया कि हम लोग हर दिन ऐसे ही स्कूल जाते है और घर आते है. घर से स्कूल दूर है, इस कारण इसमें बैठे कर जाते है.
- तीन की जगह छह बैठाते है ऑटो में छोटे ऑटो में तीन और बड़े ऑटो यानी विक्रम छह बच्चे को बैठाया जाना है. लेकिन इस नियम का पालन नहीं होता है. जहां छोटे ऑटाे में तीन की जगह पांच (तीन पीछे और दो आगे ड्राइवर के बगल में) बच्चे को ऑटो वाले बैठाते है. वहीं विक्रम वाले ऑटो में छह की 12 बच्चे बैठे हुए नजर आते है. छह बच्चे बीच में और पीछे तीन या चार बच्चे को बैठाया जाता है. वहीं ड्राइवर के बगल में तीन बच्चे बैठे होते है. कई आॅटो में तो इससे भी अधिक बच्चे बैठे रहते है.
- कभी भी हो सकती है हादसा इस तरह आॅटो के उपर बच्चे का बैठना खतरे से खाली नहीं है. कभी भी हादसा हो सकती है. लेकिन इसकी चिंता ना तो स्कूल प्रशासन को है और ना ही अभिभावकों को. कई बार ट्रैफिक पुलिस की ओर से कुछ नियम बनाये भी गये तो उसे फाॅलो नहीं किया जा रहा है. कई ऑटो में तो बच्चे लटके हुए नजर आते है.
- भाड़ा बढ़ा कर, ठूसते है बच्चों को ऑटो के अलावा बस में भी स्टूडेंट्स खड़े हो कर घर आते जाते है. कई स्कूलों में सीट के मुताबिक बच्चे को बैठाना का नियम बना भी है. बस वालों को नियम फॉलो करने के लिए भी कहा गया है. बस वाले इसे लागू करते भी है, लेकिन साथ में भाड़ा भी बढ़ा देते है. कुछ दिनों के बाद भाड़ा तो वही रहता है, लेकिन बच्चों को सीटें मिलना बंद हो जाता है. क्योंकि बस वाले फिर सीट से अधिक बच्चे को ढोने लगते है. 

25 मई को सीबीएसइ 12वीं और 28 मई को 10वीं का निकलेगा रिजल्ट

संवाददाता, पटना

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेक्रेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) इस बार मई के अंतिम सप्ताह में बोर्ड रिजल्ट घोषित करेगा. सीबीएसइ ने इसके लिए तमाम इवैल्यूएशन सेंटर को रिजल्ट तैयार करके 10 मई तक भेजने का निर्देश दिया है. सीबीएसइ की माने तो 25 मई को 12वीं बोर्ड का रिजल्ट घोषित किया जायेगा. वहीं 28 मई को 10वीं बोर्ड का रिजल्ट घोषित किया जायेगा. इवैल्यूएशन का कार्य एक मई तक चलने की उम्मीद है. - तमाम जोन का एक साथ निकलेगा रिजल्ट
सीबीएसइ सूत्रो की माने तो इस बार देश के जोन का रिजल्ट एक साथ घोषित किया जायेगा. एक साथ रिजल्ट की घोषणा से तुलनात्मक रिजल्ट का अध्ययन सीबीएसइ आसानी से कर पाता है. 2015 में भी सारे जोन का रिजल्ट एक साथ निकाला गया था. इससे बोर्ड स्तर पर काफी सुविधा हुई थी. 2015 की तरह 2016 में भी तमाम जोन के 12वीं और 10वीं बोर्ड के रिजल्ट एक साथ निकाला जायेगा. - तीन जोन में ऑन स्क्रीन चल रहा इवैल्यूएशन
सीबीएसइ के तीन जोन अजमेर, पंचकुला और चेन्नई में ऑन स्क्रीन इवैल्यूएशन चलाये गये है. इससे इन जोन में इवैल्यूएशन का काम 20 अप्रैल तक समाप्त हो जायेगा. बांकी जिस जोन में इवैल्यूएशन मैन्यूअल चल रहा है, वहां पर एक मई तक समाप्त होगा. 10 मई तक तमाम जोन मार्क्स फाइल तैयार करके सीबीएसइ हेड ऑफिस दिल्ली भेजेंगे. इसके दस दिनों के बाद रिजल्ट घोषित किया जायेगा. कोट
कई बार जोन वाइज रिजल्ट निकालना पड़ता है. इससे कई दिनों तक रिजल्ट निकलता रहता है. लेकिन 2015 में जब एक साथ सारे जोन का रिजल्ट निकला तो बोर्ड को काफी आसानी हुई. इस बार भी सारे जोन का रिजल्ट एक साथ ही निकाले जाने की उम्मीद है. राजीव रंजन सिन्हा, सीबीएसइ सिटी कोर्डिनेटर 

दो लाख से बढ़ कर 24 लाख हो सकती है आइआइटी की फी

- मई में होने वाली बैठक में लिया जायेगा फैसला

संवाददाता, पटनाइंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (अाइआइटी) की फी में बढ़ोतरी की जा सकती है. इसको लेकर कई बैठक हुई है. प्रस्ताव आइआइटी काउंसिल के पास जा चुका है. मई में होने वाली बैठक में इस पर फैसला ले लिया जायेगा. अगर प्रस्ताव पर फैसला हो गया तो आइआइटी से बीटेक की सालाना फी 6 लाख रूपया हो जायेगा. मामला अभी आइआइटी काउंसिल में रखा हुआ है.
- 25 हजार से 3 लाख देना पड़ेगा एक सेमेस्टर की फी आइआइटी काउंसिल की मंजूरी मिली तो आइआइटी से बीटेक की चार साल (आठ सेमेस्टर) की पढ़ाई पर 24 लाख रूपये खर्च करने पड़ेंगे. अभी दो लाख रूपये फी में चार साल की पढ़ाई पूरी हो जाती है. आइआइटी से बीटेक करने वाले स्टूडेंट्स से एक सेमेस्टर (छह महीने की पढ़ाई की) 25 हजार रूपये फी ली जा रही है. सालाना फी 50 हजार रूपये होती है. आइआइटी काउंसिल का मानना है कि इससे आइआइटी का खर्च पूरा नहीं हो पा रहा है.
- शिक्षक, कर्मचारी को वेतन मिलने में दिक्कतें आइआइटी काउंसिल के पास भेजे गये प्रस्ताव के अनुसार सालाना खर्च अधिक होने से आइआइटी में मिलने वाली सुविधाओं में कमी करना पड़ जायेगा. यहां तक की शिक्षकों और कर्मचारी के वेतन में भी दिक्कतें आ जायेगी. इसी वजह से फी बढ़ाने का फैसला किया गया है. इसी लिए बीटेक की सेमेस्टर फी तीन लाख रूपया प्रति सेमेस्टर करने का प्रस्ताव है.
- दो सेमेस्टर में एक साल की पढ़ाई बीटेक की एक साल की पढ़ाई दो सेमेस्टर में पूरी होती है. छह महीने का एक सेमेस्टर होता है. इसलिए एक साल की फी 6 लाख रूपये होगी. फी बढ़ोतरी का प्रस्ताव बनाकर आइआइटी काउंसिल के पास है. अब अंतिम निर्णय काउंसिल लेगी. बढ़ी हुई फी सत्र 2016-17 से बढ़ायी जानी है. ज्ञात हो कि देश भर में 18 आइआइटी है. बढ़ी हुई फी सभी आइआइटी में लागू होगी.
- आइआइटी के एक छात्र पर खर्च होता है लाखोंआइआइटी से बीटेक करने वाले एक छात्र की चार साल की पढ़ाई पर लगभग लाखों रूपये खर्च होते है. यह खर्च लैब्, लाइब्रेरी, इंटरनेट, वाई फाई के इस्तेमाल, हॉस्टल में रहने और मेस में खाने की सुविधा के है. बड़े पैमाने पर स्कॉलरशिप भी दी जाती है. एक रिसर्च स्कॉलर को साल में 36 हजार रूपये स्कॉलरशिप मिलती है. इन सारे खर्च को पूरा करने के लिए आइआइटी प्रशासन फी बढ़ोतरी करने की सोच रही है.
कोटपिछल चार साल से आइआइटी के फी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. चार साल से प्रति सेमेस्टर 25 हजार रूपये फी ली जा रही है. इस बार फी बढ़ोतरी को लेकर हमारे पास कोई जानकारी नहीं आयी है. नया सेमेस्टर शुरू होने के समय कुछ पता चलेगा.
पुष्पक भट्टाचार्य, निदेशक, आइआइटी पटना \\B

इंटर के 63 सौ शिक्षकों को बिहार बोर्ड ने किया ब्लैकलिस्टेड

 इंटर मूल्यांकन में ये शिक्षक नहीं हुए शामिल, अगले साल भी रहेगा इन पर बैन

संवाददाता, पटनाइंटर के मूल्यांकन में शामिल नहीं होना उन शिक्षकों के लिए भारी पड़ गया, जिन्हाेंने मूल्यांकन को हल्के में लिया. प्रदेश भर से ऐसे 63 सौ शिक्षक का नाम सामने आया है जो इंटर के मूल्यांकन में शामिल नहीं हुए है. इन शिक्षकों को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया है. ये शिक्षक अब अगले साल से इंटर के मूल्यांकन में शामिल नहीं होंगे. इतना ही नहीं समिति की ओर से इन शिक्षकों के नाम के लिस्ट को शिक्षा विभाग भी भेजने की तैयारी चल रही है.
- साइंस और आर्ट्स में सबसे अधिक शिक्षक इंटर के मूल्यांकन के लिए लगभग 15 हजार शिक्षकों को लगाया गया था. पांच अप्रैल तक मूल्यांकन समाप्त करने का समय सीमा भी समिति कार्यालय ने रखा गया था. 15 हजार में 63 सौ शिक्षकों ने मूल्यांकन में योगदान ही नहीं दिया. इसमें सबसे अधिक मैथेमेटिक्स, केमेस्ट्री, हिस्ट्री, भूगोल, अकाउंटेंसी, हिंदी और इंगलिश विषय में शिक्षकों की कमी थी. साइंस और आर्ट्स स्ट्रीम में तीन-तीन हजार शिक्षकों ने मूल्यांकन में याेगदान नहीं दिया. वहीं कॉमर्स में तीन सौ शिक्षक मूल्यांकन कार्य में शामिल नहीं हुए.
- 12 शिक्षक हुए एक्सपेल्ड अभी तक इंटर के मूल्यांकन में 12 शिक्षकों को एक्सपेल्ड भी किया गया है. इन शिक्षकों के पास रौल नंबर, मोबाइल आदि पाये गये थे. वहीं ये शिक्षक उत्तर पुस्तिका पर अधिक अंक देते हुए पकड़ाये गये थे. इसमें रामकृष्ण द्वारिका कॉलेज के अलावा मोतिहारी के दो मूल्यांकन केंद्र भी शामिल था. मोतिहारी के जिला स्कूल से दो और मंगल सेमिनरी स्कूल से दो शिक्षकों को सचिव ने खुद एक्सपेल्ड किया था.
कोटजो शिक्षक मूल्यांकन कार्य में शामिल नहीं हुए और जो शिक्षक मूल्यांकन कार्य के दौरान एक्सपेल्ड किये गये, उन सभी को समिति के परीक्षा एक्ट के तहत कार्रवाई की जायेगी. ये सभी शिक्षक को समिति ब्लैकलिस्टेड कर रही है. इन शिक्षकों को अब इंटर के मूल्यांकन में नहीं लगाया जायेगा.
हरिहर नाथ झा, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति \\B

पांच हजार में 52 परीक्षार्थी ही देंगे स्पेशल टीइटी

- एक हजार ने किया आवेदन, परीक्षा देंगे मात्र 52

- पूरे बिहार में एकमात्र सेंटर द्वारिका कॉलेज में, नौ व दस को होगी परीक्षासंवाददाता, पटना
जिस परीक्षा को दुबारा लेने के लिए काफी ताम झाम हुआ. छात्रों का विरोध, बिहार बोर्ड पर आरोप, हाई कोर्ट का हस्तक्षेप हुआ. 2011 से चले आ रहे विरोध के बाद आखिर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने अपनी गलती स्वीकार किया और स्पेशल टीइटी में शामिल होने के लिए आवेदन मांंगे. फरवरी से मार्च तक आवेदन लिये गये. आवेदन तो एक हजार जमा हुआ, लेकिन मात्र 52 अभ्यर्थी की स्पेशल टीइटी और एसटीइटी देने के लिए योग्य पाये गये है. 9 और 10 अप्रैल को टीइटी और एसटीइटी की परीक्षा आयोजित होगी. इसके लिए पूरे बिहार में एक ही परीक्षा केंद्र द्वारिका कॉलेज, पटना में बनाया गया है. - बाकी अभ्यर्थी ने किया बोर्ड ऑफिस में हंगामा
जिन अभ्यर्थी के आवेदन को समिति कार्यालय ने छांट दिया है, उन अभ्यर्थी ने समिति कार्यालय में आकर हंगामा किया. शुक्रवार को समिति कार्यालय में दो बजे के बाद अभ्यर्थी को एडमिट कार्ड लेने के लिए बुलाया गया था. इसी समय में बाकी दूसरे अभ्यर्थी भी आकर हंगामा करने लगे. आधे घंटे तक चले हंगामा को रोकने के लिए पुलिस बल को बुलाया गया. - हाईकोर्ट के आदेश पर स्पेशल टीइटी
2011 में जब टीइटी और एसटीइटी की परीक्षा ली थी. उस समय लगभग पांच हजार अभ्यर्थी के ओएमआर सीट बिहार बोर्ड की गलती के कारण भुला गया था. इन अभ्यर्थी के ओएमआर सीट की जांच भी नहीं हो पायी थी. इस मामले को लेकर अभ्यर्थी हाई कोर्ट में केस किये. हाई कोर्ट ने समिति को दुबारा इन अभ्यर्थी की परीक्षा लेने का आदेश दिया. इसी के तहत स्पेशल टीइटी और एसटीइटी की परीक्षा ली जायेगी. कोट
स्पेशल टीइटी और एसटीइटी में वहीं अभ्यर्थी शामिल होंगे, जिनका आेएमआर सीट बिहार बोर्ड की गलती से भुला गया था. बाकी किसी भी वजह वाले अभ्यर्थी शामिल नहीं किये जायेंगे. स्पेशल टीइटी हाई कोर्ट के आदेश पर लिया जा रहा है. हरिहर नाथ झा, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समित \\B

Monday, April 4, 2016

अनट्रेंड टीचर कर रहे सीबीएसइ 12वीं और 10वीं का इवैल्यूएशन

 कई स्कूलों में पकड़ में आयें टीचर को इवैल्यूएशन करने से किया गया मना

संवाददाता, पटनाकेस वन - एमए अंसारी फिजिक्स के इवैल्यूशन के लिए एग्जामिनर के रूप में सेंट डॉमिनिक स्कूल में नियुक्त किये गये थे. सेंट पॉल हाई स्कूल, सासाराम से एमए अंसारी फिजिक्स के मूल्यांकन के लिए आयें थे. शुक्रवार को मूल्यांकन का दूसरा दिन था. जब हेड एग्जामिनर ने एमए अंसारी द्वारा जांचे गये आंसर कॉपी की जांच की तो पता चला कि सही आंसर में भी उन्होंने मार्क्स काट लिये थे. आंसर काॅपी सही से नहीं जांचे थे. इसकी जानकारी पटना सीबीएसइ रीजनल ऑफिसर को दिया गया. टीचर से पूछताछ के बाद पता चला कि एमए अंसारी ट्रेंड टीचर नहीं है. इसके बाद एमए अंसारी को वापस स्कूल भेज दिया गया.
केस टू - अजय कुमार ज्ञानदीप हाई स्कूल, नौबतपुर में इकोनॉमिक्स के टीचर है. अजय कुमार सिंपल ग्रेजुएट है. लेकिन स्कूल वालों ने उनका नाम सीबीएसइ के पास ट्रेंड टीचर के रूप में करके लिस्ट बना कर भेज दिया. जब इवैल्यूशएन का समय आया तो अजय कुमार को एग्जामिनर के रूप में जाने को स्कूल वालों ने कहा. लेकिन पकड़े जाने के डर से अजय कुमार स्कूल से छुट्टी लेकर चले गये. सीबीएसइ के 10वीं और 12वीं में इवैल्यूएशन में इस बार भी अनट्रेंड टीचर को शामिल किया गया है. स्कूल प्रशासन ने टीचर्स की लिस्ट सीबीएसइ को भेजा. लेकिन सीबीएसइ ने इसकी जांच नहीं किया कि कौन टीचर ट्रेंड है और कौन अनट्रेंड है. स्कूल ने जो लिस्ट भेजा उन तमाम टीचर को एग्जामिनर बना कर इवैल्यूएशन सेंटर पर भेज दिया गया. अब जब इवैल्यूएशन चल रहा है तो कई सेंटर पर अनट्रेंड टीचर पकड़ में आ रहे है. अभी तक विभिन्न सेंटर से 125 अनट्रेंड टीचर को पकड़ा जा चुका है. हेड एग्जामिनर को टीचर पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है.
- बनाना था डाटा बैंक 2015 में आंसर कॉपी इवैल्यूएशन में हुई गड़बड़ी के बाद सीबीएसइ ने तमाम स्कूलो को टीचर्स की डाटा बैंक बनाने का निर्देश दिया था. यह डाटा बैंक ऑन लाइन बनाना था. इसमें किसी भी स्कूल के तमाम टीचर को डाटा बैंक में ऑन लाइन फार्म भरना था. फार्म में टीचर्स के क्वालिफिकेशन से लेकर उनके अनुभव तक को भरना था. पटना के कई स्कूलों ने तो इसे फाॅलो किया, लेकिन कई स्कूल के अभी भी टीचर्स के डाटा बैंक नहीं है.
- छह हजार एग्जामिनर लगाये गये इवैल्यूएशन में इस बार सीबीएसइ 10वीं और 12वीं में छह हजार एग्जामिनर को लगाया गया है. वहीं छह हजार एग्जामिनर पर छह सौ हेड एग्जामिनर को रखा गया है. हेड एग्जामिनर हर अांसर कॉपी की जांच अपने स्तर से कर रहे है. इससे एग्जामिनर की गलती पकड़ में आ रही है. पटना जोन में इस बार आठ शहरो में 40 इवैल्यूएशन सेंटर बनाये गये है.
- मैथ का मूल्यांकन आज से हुआ शुरू सोमवार से मैथ सब्जेक्ट का मूल्यांकन शुरू किया गया है. अभी तक फिजिक्स, केमेस्ट्री, इकोनॉमिक्स का इवैल्यूशन चल रहा था. सोमवार से मैथ सब्जेक्ट का मूल्यांकन शुरू हुआ है. मैथ सब्जेक्ट के लिए लगभग 10 मूल्यांकन केंद्र बनाये गये है. हेड एग्जामिनर के निर्देश पर मूल्यांकन का कार्य शुरू होगा.
- 25 अप्रैल तक चलेगा इवैल्यूशन 10वीं और 12वीं का मूल्यांकन अभी 15 दिन और चलेगा. सीबीएसइ के अनुसार 25 अप्रैल तक इवैल्यूशन चलेगा. जैसे-जैसे इवैल्यूशन हो रहा है, मार्क्स को स्कूल सीबीएसइ के पास भेज रहा है. मार्क्स अपग्रेड का काम हर दिन किया जा रहा है. 30 अप्रैल तक सारे मूल्यांकन समाप्त कर देने है. चुकी इस बार सीबीएसइ के कई जोन में ऑन स्क्रीन इवैल्यूशएन किया जा रहा है, इस कारण मैनुअल इवैल्यूशएन करने वाले तमाम जोन को 30 अप्रैल तक मूल्यांकन कर लेने का निर्देश दिया गया है.  

55 फीसदी बढ़ गयी स्कूल की महंगाई, अभिभावक पर बढ़ा बोझ

 15 फीसदी किताबें हुई महंगी तो स्टेशनरी में हुआ 10 फीसदी इजाफा

संवाददाता, पटनाबच्चे का नामांकन हुआ. बच्चे नये क्लास में गये. नया सेशन भी सोमवार से रेगुलर शुरू हो गया. लेकिन यहां तक पहुंचने में अभिभावकों के जेब पर 55 फीसदी का एक्स्ट्रा बोझ भी पड़ गया. 2015 की तुलना में 2016 का नया सेशन 55 फीसदी महंगा हो गया. किताबें हो या नोट कॉपी या फिर स्टेशनरी सारी की सारी चीजों में 5 से लेकर 15 फीसदी तक बढ़ोतरी हो गयी है. खरीदारी में भले अभिभावकों को पता नहीं चला, लेकिन हर चीजों की कीमत इस बार पिछले साल की तुलना में अधिक हो गया है.
- कटौती की कोई गुंजाइश नहीं अभिभावक चाहते हुए भी किसी भी समान में कटौती नहीं कर पा रहे है. स्कूल के निर्देश के अनुसार सारी किताबें नया ही लेना है. पुरानी किताबें स्कूल में लाने की अनुमति नहीं है. वहीं नोट बुक तो नया ही चाहिए. स्टेशनरी भी फिर से नया ही लेना पड़ा है. रहा यूनिफार्म तो इसमें थोड़ा बहुत अभिभावक कटौती कर पायें है. अभिभावक प्रभात गुप्ता ने बताया कि अब सामान भी ऐसे मिलते है कि एक साल के बाद वो पहनने लायक भी नहीं बचता है. शूज का तो यह हाल होता है कि छह महीने के बाद ही दूसरा लेना पड़ता है. स्कूल के जो भी आइटम होते है, वो फिक्स दुकान में ही मिलता है.
- स्कूल काउंटर पर नो डिस्काउंट जिन स्कूल ने खुद ही काउंटर लगवायें थे, वहां पर तो कोई डिस्काउंट भी अभिभावकों नहीं मिला है. जिन स्कूलों ने बाहर के फिक्स दुकान से खरीदारी करने के लिए अभिभावकों को निर्देश दिया था, वहां पर 5 से 10 फीसदी की छूट अभिभावकों को दिया गया. स्कूल से खरीदारी करना अभिभावकों और भी महंगा पड़ा है.
- 70 फीसदी तक बढ़े है स्कूल फी इस बार सबसे अधिक स्कूल फी में बढ़ोतरी की गयी है. जहां मिसनरी स्कूलों ने 10 से 15 फीसदी तक ट्यूशन फी बढ़ाया है, वहीं पटना के कई प्राइवेट स्कूलों ने 70 फीसदी तक फी बढ़ा दिया है. ऐसे स्कूलों के अभिभावक ट्यूशन फी के बढ़ाये जाने से काफी परेशान है. अभिभावकों के बजट पर इसका काफी असर हो रहा है.
- पुराने किताबें नहीं होगा रिपीट कई स्कूलों ने इस बार अभिभावकों का सख्त निर्देश दिये है कि वो पिछले साल की किताबें रिपिट नहीं करेंगे. इससे अभिभावक चाहते हुए भी पुराने किताब बच्चे को नहीं दे पायें है. अभिभावक प्रिया प्रियदर्शी ने बताया कि उनके दो बच्चे एक छठी में और दूसरा पांचवी में गया है. पांचवी वाले के लिए भी पूरी तरह से नया किताब ही लेना पड़ा है. क्योंकि स्कूल ने पुराने किताब लेने से मना किया है. एक साल में तो किताब पुरानी नहीं होती है, फिर भी हमें वहीं किताब लेना पड़ा है.
पढ़ाई संबंधित चीजें - बढ़ गये इतने दाम किताबें - 15 फीसदी (हर विषय में)
नोट बुक - 10 फीसदी स्टेशनरी - 10 फीसदी
यूनिफाॅर्म - 5 फीसदी शूज - 5 फीसदी
ट्रांसपोर्टेशन - 10 फीसदी कोट
पिछले साल की तुलना में इस बार किताबों के दाम अधिक है. 20 फीसदी तक दाम बढ़े है. स्टेशनरी के दाम भी बढ़े है. पढ़ाई की हर चीजों के दाम में थोड़ा बहुत बढ़ोतरी हुई है. अनिल कुमार, मैरेजर, ज्ञान गंगा लिमिटेड \\B

जेइइ मेन में 16 मार्क्स के प्रश्न गलत, इन प्रश्नों को किया जा सकता है माइनस

 फिजिक्स के दो सवाल और मैथ और केमेस्ट्री के एक-एक सवाल थे गलत

संवाददाता, पटनाज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेइइ) मेन 2016 में फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथेमेटिक्स में 16 अंक के प्रश्न गलत पूछे गये है. तीनों सब्जेक्ट मिला कर इस बार चार प्रश्न गलत पूछे गये है. इसको लेकर स्टूडेंट्स और सब्जेक्ट एक्सपर्ट ने सीबीएसइ को सूचना दी है. इसमें फिजिक्स से दो प्रश्न, केमेस्ट्री से एक और मैथेमेटिक्स से एक प्रश्न गलत पूछा गया है. सब्जेक्ट एक्सपर्ट से मिली सूचना के बाद अब सीबीएसइ उन प्रश्नों को माइनस करने की सोच रहा है. उन प्रश्नों को माइनस करने के बाद ही बांकी प्रश्नों का आंसर कंप्यूटाइज जांची जायेगी.
- 2015 में भी 12 अंक के प्रश्न थे गलत जेइइ मेन की परीक्षा में गलत प्रश्न केवल इसी साल नहीं पूछा गया है, बल्कि 2015 में भी गलत प्रश्न आयें थे. 2015 में 12 अंक के प्रश्न गलत पूछे गये है. इस बार गलत प्रश्नों की संख्या बढ़ गयी है. 2015 में भी 12 मार्क्स को माइनस किया गया था.
- क्वेश्चन माइनस होगा तो कम हो जायेगा कटऑफ सब्जेक्ट एक्सपर्ट का कहना है कि 16 मार्क्स माइनस करके मार्किंग हुई तो कटऑफ लिस्ट नीचे आयेगी. जो सामान्य कटऑफ वर्ष 2015 में 105 मार्क्स की थी. वह इस बार 90 मार्क्स तक जा सकती है. ओबीसी की 60 मार्क्स और एससी, एसटी की कटऑफ 40 मार्क्स जा सकती है. इस बार जेइइ मेन क्वालीफाई करने वाले स्टूडेंटों की संख्या 2 लाख रहेगी. इससे पहले 1.50 लाख स्टूडेंट पास हुए थे. इसका असर भी कटऑफ पर पड़ेगा.
ये प्रश्न थे गलत - पेपर कोड-जी के फिजिक्स पेपर में 35वां क्वेश्चन एंगुलर मोमेंटम का पूछा गया, जिसके दो आंसर आयें है. आब्जेक्टिव क्वेश्चन में एक ही आंसर मान्य होता है.
- माडर्न फिजिक्स का 41वां क्वेश्चन ट्रांजिस्टर का है. इसके भी दो आंसर निकल रहे है. - मैथेमेटिक्स का 17वां सवाल भी गलत पूछा गया है. बाइनोमिनल का जो सवाल आया है, उसका आंसर मैच नहीं कर रहा है.
- केमेस्ट्री के 67वें नंबर का क्वेश्चन गलत बताया गया है. क्वेशचन में स्टाेचिमेट्री का जिक्र है लेकिन इसका आंसर नहीं निकल पा रहा है. एक्सपर्ट व्यू
एक प्रश्न के आंसर गलत थे. स्टूडेंट्स के बार-बार आंसर बनाने के बाद भी सही उत्तर नहीं आ रहा था. परीक्षा के बाद जब प्रश्नों का एनैलाइसिस किया गया तो पता चला कि वो आंसर ही गलत थे. एसके ठाकुर, मैथ एक्सपर्ट
इस बार फिजिक्स के दो प्रश्नों में गड़बड़ी थी. एक प्रश्न के दो आंसर दे दिये गये थे. दोनों ही अांसर सही थे. एेसे में स्टूडेंट्स कंफ्यूज्ड हो गये कि कौन सा आंसर सही है. अमरेंद्र कुमार, फिजिक्स एक्सपर्ट \\B

Sunday, April 3, 2016

दस रूपये में नहीं मिलेगी सीबीएसइ की आंसर कॉपी, चाहिए ताे देने होंगे एक हजार

 सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सूचना के अधिकार के तहत नहीं दी जाती आंसर कॉपी

रिंकू झा, पटना
समस्तीपुर के 12वीं के छात्र बसुधेष विजय ने सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत सीबीएसइ से वर्ष 2013 की आंसर काॅपी मांगी. लेकिन सीबीएसइ ने आंसर कॉपी नहीं दिया. इसके बाद बसुधेष विजय केंद्रीय सूचना आयोग के पास गये. केंद्रीय सूचना आयोग ने सीबीएसइ पटना रीजनल ऑफिस पर 25 हजार रूपये का जुर्माना लगाया और 21 दिन के अंदर छात्र को आंसर काॅपी उपलब्ध करवाने को आदेश दिया. बसुधेष के पिता डा. वीके मिश्रा ने बताया के 13 दिसंबर 2015 को केंद्रीय सूचना आयोग ने सीबीएसइ रीजनल ऑफिस को 21 दिन के अंदर जुर्माना देने काे कहा था. लेकिन अभी सीबीएसइ ने नहीं दिया है.                         बसुधेष विजय अकेले छात्र नहीं हैं, जिनको ऐसी परेशानी से जूझना पड़ा. ऐसे सैकड़ों छात्र आरटीआइ के तहत सीबीएसइ से आंसर काॅपी की मांग करते हैं, लेकिन उनको नहीं दिया जाता. अगर किसी छात्र को आंसर कॉपी चाहिए तो इसके लिए उसे सीबीएसइ के पास अप्लाई करना होता है. अप्लाई करने बाद मार्क्स का वेरिफिकेशन होता है. इसके बाद ही सीबीएसइ आंसर काॅपी उपलब्ध करवाती है. इसकी वजह से दस रुपये में होने वाले काम के लिए भी छात्रों को हजार रुपये तक देना पड़ता है.
- आंसर कॉपी चाहिए तो देना होगा एक हजार रूपया सीबीएसइ के नियम के अनुसार आंसर काॅपी सूचना के अधिकार के तहत नहीं मिलेगा. इसके लिए छात्र को आवेदन देना होगा. आवेदन देने के समय मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए तीन सौ रूपये देना होता है. वेरिफिकेशन होने के बाद फिर आंसर कॉपी मिलता है. आंसर कॉपी लेने के लिए फिर सात सौ रूपये देना होता है. मतलब एक हजार रूपये खर्च कीजिए तो सीबीएसइ आंसर कॉपी देता है. इसके लिए 20 से 25 दिनों का इंतजार भी करना होता है.
- 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने दस रूपये में आंसर काॅपी देने का दिया था आदेश सूचना के अधिकार के तहत दस रूपये में आंसर कॉपी मिले, इसके लिए कोलकाता हाई कोर्ट ने आदित्य बंधोपाध्याय बनाम सीबीएसइ के तहत दस रूपये और दो रूपये प्रति पेज के हिसाब से आंसर काॅपी उपलब्ध करवाने के लिए कहा था. हाईकोर्ट के आॅर्डर को सीबीएसइ ने सुप्रीम कोर्ट में केस किया. सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाई कोर्ट के आॅर्डर को सही ठहराया. इसके बावजूद सीबीएसइ छात्रों को आंसर कॉपी सूचना के अधिकार के तहत नहीं दे रही है.
- बसुधेष विजय के केस में केंद्रीय सूचना आयोग ने दिया आदेश इतना ही नहीं बसुधेष विजय के केस के तहत केंद्रीय सूचना आयोग ने भी 2015 दिसंबर में सीबीएसइ से आंसर कॉपी सूचना के अधिकार के तहत देने काे कहा था. लेकिन अपने ही नियम पर आंसर काॅपी उपलब्ध करवाता है. अब सीबीएसइ के खिलाफ फिर एक बार छात्र सुप्रीम कोर्ट में पिटिशन डाले है. लॉ की पढ़ाई कर रहे कुमार शानू और पारस जैन ने सुप्रीम कोर्ट में कंटेंप्ट पिटिशन डाला है, जिसमें सीबीएसइ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं माना है. कुमार शानू ने बताया कि अांसर कॉपी लेने के लिए छात्रों को काफी पैसे खर्च होते है. ऐसे में सीबीएसइ को सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानना होगा. इसके लिए हमने पिटिशन डाला है.
कोट : सीबीएसइ का यह नियम है. मैं इसमें बहुत कुछ नहीं कह सकता हूं. आंसर कॉपी लेने के लिए आवेदन ही करने का नियम है. सूचना के अधिकार के तहत कॉपी नहीं दी जाती है. इसके लिए 20 से 25 दिन लगता है. यह सारा कुछ दिल्ली से होता है.
आरआर मीणा, रीजनल आॅफिसर, सीबीएसइ पटना \\B

दो घंटे का किया इंतजार, निकला रिजल्ट, खुश हुए अभिभावक

- केंद्रीय विद्यालय बेली रोड में आरटीइ के तहत हुआ 80 बच्चों का नामांकन

संवाददाता, पटनासुबह से ही अभिभावक बैठे थे. इंतजार कर रहे थे. हर पल उनके लिए कठिन हो रहा था. हो भी क्यूं नहीं, आज आरटीइ के तहत उनके बच्चे का नाम आने वाला था. स्कूल की ओर से शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन की पारदर्शिता लाने की पूरी कोशिश की जा रही थी. सारी प्रक्रियाएं अभिभावकों के सामने किया जा रहा था. नाम एनांउसमेंट, जज का परिचय और लॉटरी निकालने की सारी प्रक्रिया अभिभावकों के बीच किया गया. दो घंटे के इंतजार के बाद अभिभावकों को रिजल्ट दिया गया. रिजल्ट निकलने के साथ ही अभिभावकों के चेहरे खिल गये जिनके बच्चे का नाम नामांकन लिस्ट में आया था. ये सारा कुछ रविवार को केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड में सुबह से ही चल रहा था. स्कूल में शिक्षा के अधिकार के तहत लॉटरी सिस्टम से बच्चों काे चुना गया.
- 80 बच्चों का होगा नामांकनकेंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से नामांकन की प्रक्रिया शिक्षा के अधिकार के तहत आने वाले बच्चों से शुरू होता है. रविवार को इसकी शुरूअात हुई. शिक्षा के अधिकार के तहत 1175 आवेदन आयें थे. इसमें से पहले शिफ्ट में 775 आवेदन और दूसरे शिफ्ट में 400 आवेदन आयें थे. इसमें एससी, एसटी, ओबीसी, इडब्ल्यूएस और दिव्यांग छात्रों को रखा गया था. केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड में लॉटरी की शुरूआत रविवार को हुआ. स्कूल दो शिफ्ट में चलता है. दो शिफ्ट मिलाकर आठ सेक्शन चलता है. हर सेक्शन में 40-40 स्टूडेंट्स होते है. हर सेक्शन में दस-दस बच्चे का नामांकन शिक्षा के अधिकार के तहत लिया जायेगा.
- एक अप्रैल से न्यू सेशन होगा शुरूआरटीइ के तहत नामांकन लेने की प्रक्रिया 25 मार्च से शुरू होगी. इसके साथ एक अप्रैल से नये सेशन शुरू हो जायेगा. नामांकन की सारी प्रक्रिया 31 मार्च तक कर लिया जायेगा. शिक्षा के अधिकार के बाद कोटे वाले बच्चे का रिजल्ट निकलेगा. इसके बाद नामांकन शुरू होगा. ज्ञात हो कि पटना में पांच केंद्रीय विद्यालय चल रहा है. इन तमाम केंद्रीय विद्याालय में 25 फीसदी नामांकन शिक्षा के अधिकार के तहत लिया जायेगा.
लॉटरी में पांच लोगों की थी टीम - एस. वल्लभव, स्कूल के प्रिंसिपल, केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड
- एसके पासवान, मैथ टीचर, केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड- शीला देवी और राजू बिंद, अभिभावक, जिन्होंने शिक्षा के अधिकार के तहत आवेदन दिया है
- अनिल कुमार, ओएसडी, पटना कमिशनर कोट
क्लास वन में नये नामांकन की तिथि खत्म हो गयी है. जो भी आवेदन शिक्षा के अधिकार के तहत आये है, उसकी लॉटरी आज निकाली गयी है. दो शिफ्ट मिलाकर 80 बच्चों का नामांकन लिया जायेगा. ये सारे बच्चे केंद्रीय विद्यालय बेली रोड के आसपास के क्षेत्र के ही है. हर सेक्शन में 10 बच्चे का नामांकन होगा. एस. वल्लभव, प्रिंसिपल, केवी, बेली रोड \\B

जीपीएस सिस्टम से होगी स्कूल टीचर्स की मॉनिटरिंग

- केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय में नये सेशन से होगी शुरू

संवाददाता, पटनाअभी तक स्टूडेंट्स पर नजर टीचर्स रखा करते थे. लेकिन अब टीचर्स पर भी नजर रखी जायेगी. टीचर्स स्कूल समय से आयें और कोर्स समय से पूरा हो, इसके लिए जीपीएस सिस्टम से टीचर्स पर नजर रखी जायेगी. टीचर्स को माइक्रो चिपयुक्त कार्ड जारी किया जायेगा. यह माइक्रो चिप कार्ड को जीपीएस से कनेक्ट किया जायेगा. इससे टीचर्स के लोकेशन की जानकारी मिलती रहेगी. इसकी मॉनिटरिंग सीधे दिल्ली से की जायेगी. पहले चरण में यह कार्ड केंद्रीय विद्यालय और नवाेदय विद्यालय के टीचर्स को जारी किया जायेगा. लेकिन आगे राज्य स्तर पर चल रहे सरकारी विद्यालयों के टीचर्स पर भी इसे लागू किया जायेगा.
- टीचर्स की अनुपस्थिति से कोर्स नहीं होता पूरा हाल में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा एक बैठक आयोजित की गयी. बैठक में टीचर्स की उपस्थिति का मुद्दा सबसे अधिक हुआ. स्कूल में टीचर्स की अनुपस्थिति के कारण कोर्स पूरा नहीं हो पाने की मजबूरी भी रखी गयी. यह भी समाने आया कि शिक्षक उपस्थिति दर्ज कर स्कूल से चले जाते है. समय पर क्लास नहीं लेते है. इस वजह से समय पर कोर्स पूरा नहीं हो पाता है.
- माइक्रो चिप में होगी सभी जानकारी टीचर्स को जो कार्ड मिलेगा, उसमें सारी जानकारी रहेगी. नाम, पता, उम्र्र, ब्लड ग्रुप, मोबाइल नंबर, ई-मेल आइडी, एजुकेशन डिटेल, एक्सपीरियंस समेत अन्य जानकारी रखी जायेगी. बायोमेट्रिक्स मशीन से कनेक्ट करने पर टीचर की पूरी जानकारी आ जायेगी.
- एमएचआरडी से होगी मॉनिटरिंग स्कूल में टीचर कब आयें और कब गये. इसकी जानकारी मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के अधिकारियों को मिलती रहेगी. वे दिल्ली से ही इसकी मॉनिटरिंग करेंगे. इस दौरान कोई टीचर बिना सूचना के देर से आ रहा है या अनुपस्थित है तो इसकी जानकारी मिल जायेगी और उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
ये सारे होंगे फायदे- स्कूल के समय में टीचर बाहर नहीं जा पायेंगे
- जीपीएस से जुड़े होने के कारण उसके लोकेशन की जानकारी मिलती रहेगी. - समय पर क्लास लगेगी
- कोर्स आधा अधूरा नहीं रहेगा - टीचर अपनी मनमानी नहीं कर पायेंगे
- टीचर्स कहां जा रहे है, इसकी पूरी जानकारी आसानी से मिल जायेगी 

एफिलिएशन नहीं मिलेगा तो सीबीएसइ पैसा करेगा वापस

- एफिलिएशन के लिए आवेदन फी का 50 फीसदी तक होगा वापस

संवाददाता, पटनास्कूल को एफिलिएशन नहीं मिलेगा तो उनके पैसे अब वापस हो जायेंगे. स्कूलों को अब घाटा नहीं होगा. एफिलिएशन के लिए आवेदन करने के बाद अगर बोर्ड से मान्यता नहीं मिलती है तो ऐसे में उनके 50 फीसदी तक आवेदन फी वापस हो जायेगा. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेक्रेंडरी एजुकेशन सीबीएसइ ने यह फैसला 2016-17 सत्र में स्कूलों को मिलने वाले एफिलिएशन के संबंध में लिया है. सीबीएसइ के अनुसार एफिलिएशन की धारा 15.6 में परिवर्तन करके यह निर्णय लिया गया है. एफिलिएशन को लेकर जो भी आवेदन अब बोर्ड के पास आयेगा. उसकी जांच के बाद जो आवेदन रिजेक्ट कर दिया जायेगा. उन स्कूलों को 10 फीसदी से लेकर 50 फीसदी तक आवेदन फी वापस कर दिया जायेगा.
- हजारों आवेदन होते है जमा एफिलिएशन को लेकर हर साल सीबीएसइ के पास हजारों आवेदन जमा होते है. बोर्ड द्वारा कई केटेगरी में स्कूलों को एफिलएशन दिया जाता है. हर केटेगरी के लिए फी भी अलग-अलग तय किया गया है. जिन स्कूलों का एफिलएशन समाप्त हो गया है, उन्हें दुबारा एफिलएशन लेने के लिए 50 हजार आवेदन फी देना होता है. वहीं नये स्कूल जो एफिलिएशन लेना चाहते है, उन्हें 10 हजार आवेदन फी देना होता है. जिन स्कूलों का एफिलिएशन सीबीएसइ समाप्त कर देता है, ऐसे स्कूलों को तीन लाख रूपये आवेदन फी के तौर पर देना होता है. अब हर केटेगरी में 50 फीसदी तक फी को वापस किया जायेगा.
- एक साल पहले करना होता है आवेदन किसी भी स्कूल को एफिलिएशन के लिए एक साल पहले आवेदन देना होता है. जो स्कूल आवेदन करता है, उन स्कूलों की जांच बोर्ड अपने तरीके से करता है. जांच के बाद संतुष्ट होने के बाद ही उस स्कूल को एफिलिएशन मिलता है. किसी स्कूल को कितने सालों के लिए एफिलिएशन दिया जायेगा, इसका भी निर्णय बोर्ड खुद लेता है. कम से कम एक साल के लिए मान्यता देने का प्रावधान सीबीएसइ के पास है.
एफिलिएशन के लिया जाने वाला आवेदन फी पहली बार एफिलिएशन लेने पर - 10 हजार
एफिलिएशन समाप्त होने और दुबारा अप्लाई करने पर - 50 हजार सीबीएसइ द्वारा एफिलिएशन समाप्त कर देने और उसके बाद अप्लाई करने पर - तीन लाख
कोटएफिलिएशन के 15.6 धारा में परिवर्तन किया गया है. अब जो भी स्कूल एफिलिएशन के लिए आवेदन करेंगे. अगर उन स्कूलों के आवेदन को रिजेक्ट किया जायेगा तो एेसी स्थिति में उन स्कूलों को 50 फीसदी तक पैसे वापस कर दिये जायेंगे.
पीआइ साबू, डायरेक्टर, सीबीएसइ एफिलिएशन \\B

स्कूलों ने सिलेबस में एनसीइआरटी बुक्स से किया किनारा, अभिभावकों की कट रही जेब

 कोर्स में 30 फीसदी एनसीइआरटी और 70 फीसदी प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें शामिल

रिंकू झा, पटनाहर क्लास में एनसीइआरटी बुक्स ही चलाये जायेेंगे. स्कूल किसी भी क्लास में प्राइवेट पब्लिकेशन के बुक नहीं चलायेंगे. 2016 के सेशन से इसे लागू करने के लिए स्कूलों को निर्देश दिया गया था. लेकिन इस बार भी स्कूलों ने अपनी मनमानी करने से बाज नहीं आये. अधिकांश स्कूलों ने अपने बुक्स की लिस्ट में एनसीइआरटी को किनारा करके प्राइवेट पब्लिकेशन के बुक्स को शामिल किये है. इसमें 30 फीसदी बुक्स ही एनसीइआरटी के है. बाकी 70 फीसदी बुक्स केवल प्राइवेट पब्लिकेशन के है. कई स्कूल तो ऐसे हैं जिन्होंने एनसीइआरटी के 10 फीसदी बुक्स भी नहीं रखा है.
- ढीली हो रही अभिभावक की जेब एनसीइआरटी बुक्स के दाम प्राइवेट पब्लिकेशन बुक्स की तुलना में 50 फीसदी कम होती होती है. ऐसे में प्राइवेट पब्लिकेशन के बुक्स की खरीदारी करने में अभिभावकों की जेब ढीली पड़ रही है. अभिभावक रोहित रंजन की माने तो उन्हें क्लास चौथी की बुक्स खरीदना है. हर बुक की कीमत दो सौ रूपये से कम नहीं है. एनसीइआरटी के एक या दो बुक ही स्कूल की लिस्ट में शामिल है. वहीं अभिभावक प्रिया भाटिया ने बताया कि किताबों के पूरा सेट खरीदने में चार हजार के लगभग खर्च आयें है.
- हर किताब के साथ लेना होता है वर्क बुकअधिकांश स्कूलों में किताबों के साथ वर्क बुक भी चलता है. ऐसे में जितनी किताबें उतने ही वर्क बुक भी लेना होता है. ऐसे में अगर आठ सब्जेक्ट है तो वर्क बुक मिला कर 16 की संख्या हो जाती है. प्राइवेट पब्लिकेशन के बुक के साथ वर्क बुक लेना आवश्यक है. वर्क बुक की प्रैक्टिस हर सब्जेक्ट में करना होता है. इससे एक्स्ट्रा खर्च अभिभावकों को करना होता है.
- 8वीं तक शामिल करना है एनसीइआरटी बुक्स बस्ता का बोझ कम करने के लिए मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा हर क्लास में एनसीइआरटी बुक्स को लागू करने के लिए कहा गया था. इसे इसी बार 2016 के सेशन से ही लागू करना था. एनसीइआरटी बुक्स स्टूडेंट्स को आसानी से उपलब्ध हो, इसके लिए सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों से स्टूडेंट्स के रिक्वायरमेंट के अनुसार संख्या बताने को भी कहा गया था. लेकिन पटना के अधिकांश स्कूलों ने यह नहीं किया. ऑन लाइन बुक्स रिक्वायरमेंट की लिस्ट सीबीएसइ ने मांगी थी.
हर क्लास के किताबों की खरीदारी में अभिभावक हो रहे परेशान क्लास - 1 से 4
कुल सब्जेक्ट - आठ बुक्स की संख्या - 12 से 15
कुल एनसीइआरटी बुक्स - तीन सारे बुक्स का प्राइस - 25 सौ से 35 सौ तक
क्लास - 5 से 7 कुल सब्जेक्ट - आठ
बुक्स की संख्या - 16 से 18 कुल एनसीइआरटी बुक्स - दो
सारे बुक्स का प्राइस - 35 सौ से 44 सौ तक क्लास - 8वीं
कुल सब्जेक्ट - आठ बुक्स की संख्या - 18 से 20
कुल एनसीइआरटी बुक्स - तीन सारे बुक्स का प्राइस - 5 हजार तक
कोटप्राइवेट पब्लिकेशन के बुक की खरीदारी अधिक होती है. हर क्लास के एवरेज बात करें तो 30 फीसदी ही एनसीइआरटी के बुक्स स्कूलों में पढ़ाई जाती है. बाकी 70 फीसदी बुक्स प्राइवेट पब्लिकेशन के ही चलते है. स्कूल की ओर से लिस्ट लेकर अभिभावक आते है. हम उन्हें किताब उपलब्ध करवाते है.
शिव शक्ति सिंह, वाइस प्रेसिडेंट, ज्ञान गंगा लिमिटेड\\B

स्पेशल पेन से होगा जेइइ मेन, बस एडमिट कार्ड और आइ-कार्ड ले जाने की अनुमति

- सीबीएसइ ने तमाम परीक्षा केंद्रों को दिया निर्देश

संवाददाता, पटनाआइआइटी, एनआइटी समेत विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले के लिए होने वाले ज्वाइंट एंट्रांस एग्जामिनेशन (जेइइ) मेन में नये नियम का पालन करना पड़ेगा. एआइपीएमटी की तरह जेइइ मेन में भी परीक्षार्थी को पेन, पेंसिल लाने की अनुमति नहीं है. परीक्षार्थी को पेन और पेंसिल आदि एग्जाम सेंटर पर ऑन स्पॉट ही मिलेगा. परीक्षार्थी एडमिट कार्ड और आइकार्ड लेकर ही परीक्षा केंद्र पर जायेंगे. इस संबंध में सीबीएसइ ने तमाम परीक्षा केंद्रों का आवश्यक निर्देश जारी कर दिया है. पटना जोन से लगभग 55 हजार परीक्षार्थी इस बार जेइइ मेन में शामिल होंगे. बिहार में पटना के अलावा गया और मुजफ्फरपुर में भी परीक्षा आयोजित हो रही है. पटना में कुछ 29 परीक्षा केंद्र बनाये गये है, वहीं गया में 8 और मुजफ्फरपुर में 10 परीक्षा केंद्र पर जेइइ मेन लिया जायेगा.
- काउंट डाउन शुरू जेइइ मेन की परीक्षा को मात्र 36 घंटे रह गये है. 3 अप्रैल को जेइइ मेन का ऑफ लाइन परीक्षा ली जायेगी. वहीं 9 और 10 अप्रैल को जेइइ मेन का अॉन लाइन परीक्षा आयोजित होगी. देश भर में 132 परीक्षा केंद्र पर एक साथ परीक्षा ली जायेगी. ऑफ लाइन परीक्षा के लिए तमाम परीक्षा केंद्र पर आंसर कॉपी भेज दिया गया है.
- दो घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचे सीबीएसइ ने तमाम परीक्षा केंद्र को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 9 बजे के बाद आने वाले परीक्षार्थी को केंद्र पर अंदर आने की अनुमति नहीं होगी. इस कारण तमाम परीक्षार्थी दो घंटे पहले ही परीक्षा केंद्र के अंदर आ जायें. परीक्षा केंद्र पर हर परीक्षार्थी की गहन पूछताछ आैर मेटर डिटेक्टर से जांच होगी. हर परीक्षा केंद्र पर मेटर डिटेक्टर लगी रहेगी. इससे परीक्षार्थी की जांच होगी.
- लाना होगा फोटो व आइडी कार्ड जेइइ मेन एग्जाम में एडमिट कार्ड के साथ खुद की फोटो, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट आदि में से किसी एक ही कॉपी लाना होगा. 2015 में 12वीं बोर्ड पास अभ्यर्थी को मार्टशीट लेकर आना होगा. वहीं फ्रेशर है या 2016 में 12वीं बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए है, उन्हें 12वीं का एडमिट कार्ड ले जाना अनिवार्य होगा.
यह होगा फायदा सीबीएसइ की मानें तो अपने पेन आदि ले जाने पर परीक्षार्थी कंफ्यूज्ड हो जाते थे. नीले पेन से अटेंप्ट करना है या ब्लैक पेन से. इस सख्ती से उन्हें पेन एग्जाम सेंटर पर उपलब्ध होंगे. जिससे उन्हें इस तरह का कोई कंफ्यूजन नहीं हाेगा.
इन चीजो पर है पाबंदी- फुल आस्तीन के शर्ट
- फुल जूता पहनने पर - गर्ल्स हेयर पीन लगा कर नहीं ले जा सकती
- किसी तरह की अंगूठी नहीं पहन कर जाना है- घड़ी नहीं पहनना है
- मनी पर्स ले कर नहीं जा सकते पॉजिटिव थिकिंग से जायें
- प्रश्न पत्र के निर्देश को ध्यान से पढ़े. और उसका पालन करें - ओएमआर शीट में जरा भी गड़बड़ी दिखे, जैसे ठीक से प्रिंट ना होना या फिर सवाल के सिक्यूएंस का ओएमआर शीट से न मिलना तो तुरंत केंद्र प्रभारी को बताएं
- हरेक प्रश्न में कुछ सवाल आसान और कुछ कठिन होेंगे. सबसे पहले आसान सवालों का चुनाव कर ले. पहले इनको हल करें - रिवीजन के लिए 15 मिनट का समय जरूर रखें 

आज मेरी पहचान पति से नहीं, मेरे खुद के काम से है

- लोगों के कॉमेंट का नजरअंदाज करके शुरू किया मीनाक्षी झा ने अपना काम

संवाददाता, पटनानाम गुम जाता है, आपका रास्ता बदल जाता है. लेकिन अगर कुछ याद रहता है तो वो आपका काम है. जिंदगी में एक समय ऐसा आता है जब आपके काम ही आपकी पहचान बनती है. आपको नहीं बल्कि आपके काम को लोग पहचानते है. कुछ ऐसा ही पहचान दानापुर की मीनाक्षी बना चुकी है. दानापुर मिथिला कॉलोनी की रहने वाली मीनाक्षी ने हर मुश्किलों का सामान किया. लेकिन हार नहीं मानी. पढ़ाई का सपना तो पूरा नहीं कर पायी, लेकिन खुद की पहचान बनाने में पीछे नहीं हटी. तभी तो आज अपने पति से नहीं बल्कि खुद की पहचान से मीनाक्षी जानी जाती है. मीनाक्षी ने बताया कि पहले लोग मुझे मेरे ससुराल या पति के नाम से जानते थे, आज मेरी खुद की पहचान है.
- पहले सीखा अब देती है दूसरों को ट्रेनिंग
मीनाक्षी ने अपनी प्रयास अकेले शुरू किया था. कई सालों तक प्रयास करने के बाद आज मीनाक्षी खुद का ट्रेनिंग सेंटर चला रही है. मीनाक्षी ने बताया कि मै- पहले सीखा अब देती है दूसरों को ट्रेनिंग मधुबनी पेंटिंग, फेवरिक पेंटिंग, टेडी वियर, जड़ी कढ़ाई, मशीन की कढ़ाई, सिल्क आर्ट, क्ले आर्ट सभी सीखा है. आज मै हर तरह का हैंड वर्क कर सकती हूं. जो सीखा अब उसे दूसरों को सीखा हूं. मैने अपना काम 40 हजार रूपये लगा कर शुरू किया था. अभी 40 से 50 हजार रूपये कमा रही हूं. घर से ही सारा काम करती हूं. आर्डर लेने के साथ उसे पूरा करके देना ही मेरी प्राथमिकता होती है.
- क्ले आर्ट में पहचान बना चुकी है मीनाक्षी मीनाक्षी ने बताया कि क्ले आर्ट में उनकी सबसे अधिक पहचान है. क्ले आर्ट से बनी मूर्तियां लोगों को काफी पसंद है. क्ले आर्ट में अलग-अलग डिजाइन की मूर्तियां बनती है. इसे सीखने वालों की भी काफी डिमांड रहता है. अभी अलग-अलग चीजों को सीखने के लिए लगभग 40 से 50 महिलाएं हमारे पास ट्रेनिंग के लिए आती है. क्ले आर्ट के अलावा दूसरे आर्ट के लिए स्कूल से भी आफर आ रहे है.
- मुहल्ले वाले करते थे काॅमेंटमूल रूप से मधुबनी की रहने वाली मीनाक्षी झा की शादी पटना रहने वाले प्रकाश चंद्र झा से हुइ. शादी के बाद परिवार आदि में व्यस्त होने के कारण मीनाक्षी अपने कैरियर को आगे नहीं कर पायी. बताती है मीनाक्षी की शादी के बाद परिवार में बिजी हो गयी. मै पढ़ाई करके एलएलबी करना चाहती थी. वकालत का लाइन मुझे पसंद था. लेकिन मै नहीं कर पायी. इसी बीच मेरे भाई का निधन हो गया. इससे मै पूरी तरह से टूट गयी. लेकिन बाद में खुद को इंगेज करने के लिए हैंड वर्क आदि की ट्रेनिंग लेना शुरू किया. घर से जब ट्रेनिंग लेने जाती तो आस पास के लोग कॉमेंट करते थे कि पैसे की कमी है, इस कारण मै ट्रेनिंग ले रही हूं. इसके बाद जब खुद का काम शुरू किया और बोर्ड घर बाहर लगाया तो लोग फिर कॉमेंट करने लगे कि पैसा नहीं है इस कारण मै दूसरों को सीखा रही हूं. 

आरटीइ नामांकन में केंद्रीय विद्यालय अव्वल, ले चुके है दस हजार बच्चों का नामांकन

- शिक्षा विभाग के आरटीइ स्कूलों की लिस्ट में केंद्रीय विद्यालय शामिल नहीं

संवाददाता, पटनाशिक्षा का अधिकार कानून को प्राइवेट स्कूल भले नकार रहा हो, नामांकन नहीं ले रहा हो, लेकिन अगर बात केंद्रीय विद्यालय की होगी तो हर साल यहां पर नामांकन होता है. 2011 में लागू हुआ आरटीइ कानून के तहत हर साल नामांकन लिये जाते है. पटना जिला में जहां अब तक 270 स्कूलों ने मिलकर मात्र 3511 बच्चाें का नामांकन 2011 से 2015 तक में लिया है, वहीं अगर केंद्रीय विद्यालय की बात करें तो पटना जिला में पांच केंद्रीय विद्यालय है. इन केंद्रीय विद्यालयों ने 2011 से 2015 तक 10 हजार बच्चों का नामांकन लिया है. लेकिन इसकी जानकारी शिक्षा विभाग को नहीं है. शिक्षा विभाग के आरटीइ नामांकन लेने वाले स्कूलों के लिस्ट में केंद्रीय विद्यालय शामिल नहीं है.
- पहले आरटीइ नामांकन प्रक्रिया होती है पूरी केंद्रीय विद्यालय में नामांकन की प्रक्रिया फरवरी से शुरू होती है. ऑन लाइन आवेदन लेने के बाद पहले आरटीइ नामांकन के लिए लाॅटरी निकाली जाती है. लॉटरी की सारी प्रक्रिया अभिभावकों के सामने होता है. लाॅटरी निकालने में अभिभावकों को भी शामिल किया जाता है. जिन बच्चों का नाम लॉटरी में आता है, उन बच्चों के नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोटे या अन्य केटेगरी वाले बच्चे का नामांकन लिया जाता है.
- सात किलाेमीटर का दायरा करता पूरी केंद्रीय विद्यालय आरटीइ नामांकन लेने में सात किलोमीटर का दायरा रखता है. सात किलोमीटर के बीच जो भी बच्चे होते है, उनका नामांकन संबंधित केंद्रीय विद्यालय में लिया जाता है. स्कूल में क्लास वन में जितने सेक्शन चलते है, उन हर सेक्शन में 10 बच्चों का नामांकन आरटीइ के तहत ली जाती है. यानी कम से कम 10 बच्चे का नामांकन तो केंद्रीय विद्यालय में होता ही है.
कोटशिक्षा विभाग की ओर से कोई सूचना कभी मांगी नहीं गयी है. जब हमने सूचना मांगी जायेगी तभी तो हम देंगे. 2011 से ही प्रदेश भर के तमाम 51 केंद्रीय विद्यालय में आरटीइ नामांकन लिये जाते है. नये सत्र में पहले आरटीइ नामांकन होता है तभी दूसरे केटेगरी या कोटे वाले का नामांकन लिये जाते है.
एमएस चौहान, क्षेत्रीय निदेशक, केंद्रीय विद्यालय संगठन, पटना जोन सूचना के अधिकार के तहत आरटीइ नामांकन की लिस्ट में तमाम प्राइवेट स्कूलों का नाम रहता है, लेकिन केंद्रीय विद्यालय में नामांकन की लिस्ट विभाग नहीं देता है. हर साल नामांकन की प्रक्रिया में प्राइवेट स्कूल का नाम आता है, लेकिन केंद्रीय विद्यालय उसमें शामिल नहीं होता है.
अजय कुमार चौरसिया, आरटीआइ एक्टिविस्ट\\B

शराब का नाम सूनते ही पापा और बेटे का चेहरा आ जाता है सामने

- विवेक मोहन चतुर्वेदी की कहानी की अंतिम कड़ी

संवाददाता, पटनाहितैशी हैपीनेस होम से वापस तो आ गया. एक साल तक घर में ही बैठा रहा. इस बीच शराब पीने का मन भी कई बार हुआ, लेकिन जब भी शराब पीने की काेशिश करता तो काउंसलर पुष्पीता की बातें सामने आ जाती थी. मार्च 2014 से जून 2015 तक घर पर ही ऐसे बैठा रहा. कहीं पर जाॅब की कोशिश भी करता तो जॉब नहीं मिल रही थी. क्योंकि शराब पीने से मेरा कांफिडेंस एकदम खत्म हो गया था. मेरा मैरेज लाइफ भी लगभग खत्म था. पत्नी सवीता मुझसे तलाक लेना चाहती थी. पत्नी को मनाने का काम शुरू किया. वो मुझ से इतना डर गयी थी कि मेरे पास वापस नहीं आना चाहती थी. उसे डर था कि बेटा मेहुल को मै कुछ ना कर दू. मै उसे काफी कंविंस करने की कोशिश करने लगा. कई महीने कोशिश करने के बाद वो थोड़ा कंविंस हुई और पांच दिनों के लिए पटना आयी. मुझसे मिलकर उसे थोड़ा संतोष हुआ कि अब मै शराब नहीं पीता हूं और बदल गया हूं. लेकिन वो यह कह कर फिर वापस जमशेदपुर चली गयी कि उसे जॉब छोड़ने में दो तीन महीने लग जायेंगे. इस बीच मै पत्नी का इंतजार करता रहा. अगस्त 2015 में पत्नी मेरे पास वापस आ गयी. मुझे ताकत मिला. इस बीच मुझे एक दवा की कंपनी में काम मिल गया. वहीं मेरी दीदी वंदना और जीजाजी उनके बिजनेस में हाथ बटाने को कहने लगे. उनके कपड़े का कई शो रूम पटना में है. मुझे कपड़े की दुकान का कोई अनुभव नहीं था. फिर मैने तीन महीने की कपड़े की दुकान में ट्रेनिंग लिया. इसी बीच खाजपुरा स्थित एक शो रूम खोलना था. इस शो रूम की पूरी जिम्मेवारी मुझे दे दी गयी. इसके बाद मै यहीं से अपनी नयी जिंदगी शुरू किया. अभी लगभग छह महीने से मै यहीं पर रहता हूं. अभी भी मेरे पास मेरे पुराने दोस्तों के फोन आते है. शराब पीने के लिए वो बुलाते है. लेकिन जब भी शराब पीने का ख्याल आता है तो पापा का मजबूर चेहरा, जो हर दिन इस आशा में रहता था कि एक दिन उनका बेटा शराब छोड़ देगा, सामने आ जाता है. वहीं बेटा मेहुल जो कहीं मुझे देखकर शराब पीना ना शुरू कर दे, ये ख्याल से ही मै डर जाता हूं. आज शराब का साथ नहीं है, लेकिन मेरे पास पूरा परिवार है. मै खुश हूं. मेरा पूरा परिवार मेरी हर खुशी के लिए हमेशा तैयार रहता है. अब तो दो साल से भी अधिक शराब को छोड़े हो गया. मन में ख्याल भी कम आता है. अब पूरा ध्यान परिवार पर देना चाहता हूं. 

बहन ने दिया साथ, तभी छोड़ पाया शराब

- विवेक मोहन चतुर्वेदी की कहानी का दूसरा अंक

संवाददाता, पटनाहितैशी हैप्नीनेस के पास मुझे डाल दिया गया. तीन दिनों तक तो मुझे पता ही नहीं चला कि मुझे शराब छुड़ाने वाले संस्था के छोड़ा गया है. शुरूआत में तीन दिनो तक मुझे दवा देकर सुला कर रखा जाता था. क्याेकि जब नींद खुलती थी तो मै खुद का हाथ काट लेता था. सारा सामान फेंक देता था. नवंबर 2013 में मुझे हितैसी में भरती करवाया गया. एक सप्ताह तक मै काफी एग्रेसिव रहता था. लेकिन दवा और काउंसिलिंग ने मुझे काफी फायदा दिया. मेरे हितैशी मै आने के एक सप्ताह बाद ही मुझे बेटा हुआ. पत्नी मेरी जमशेदपुर में थी. हमारे बीच तलाक होने की बात आ रही थी. मेरी काउंसिलिंग हर दिन पुष्पीता मैम करती थीं. पुष्पीता मैम ने मुझे मेरे बेटे होने की खबर दी. कहा कि तुम तो अपने पिता को खुशी नहीं दे पायें, क्या तुम चाहते हो कि तुम्हारा बेटा भी तुम्हारे जैसा बने. पुष्पीता मैम हमेशा मुझे मेरे पिता और बेटे के उपर फोकस करती रही. इसका मेरे दिमाग पर बहुत असर हुआ. यहां पर मै चार से पांच महीने रहा. इस बीच मैने एक बार भी शराब नहीं पीया. दिमाग में कई बातें आती थी. अकेले में खूब रोता था. मुझे योगा करवाया जाता था. भगवान के भजन सुनाये जाते थे. धीरे-धीरे मेरा दिमाग शांत होने लगा. गुस्सा कम आने लगा. मुझे अपने परिवार की याद आने लगी. बहन और जीजाजी मिलने आते थे. वंदना दीदी का चेहरा देखता तो काफी सूकून मिलता था. चार पांच महीने के बाद दीदी मुझे लेकर घर चली अायी. डाक्टर और काउंसलर ने मुझे और रहने की सलाह दिया. मै जब आ रहा था तो डाक्टर ने कहा कि यह बाहर जाकर फिर शराब पीने लगेगा. अगले एक महीने के अंदर यह दुबारा यहां पर भरती होगा. लेकिन मेरी दीदी के अंदर ऐसा विश्वास था कि वो मुझे घर ले आयी. घर पर मै एक साल तक अकेले ऐसे ही बैठा रहा. अब मेरे पास मेरी नयी जिंदगी की एक चुनौती थी. इस चुनौती काे मुझे खुद सामना करना था. मेरे पास कुछ नहीं बचा था. यहीं से मुझे अपने लिए रास्ता निकाला था.... क्रमश: 

एक ही अफसोस.... पापा का अंतिम संस्कार तक नहीं पाया


- शराब छोड़ने के बाद बस रह जाता है अफसोस
संवाददाता, पटनाकहते है जो बीत जाता है वह वापस नहीं आता. अगर सही किया तो पीछे की लाइफ को सोच कर खुशी मिलती है, अगर गलत किया तो एक अफसोस रह जाता है. कुछ ऐसे ही अफसोस भरी जिंदगी उन शराब पीने वालों की होती है जो शराब के नशे में क्या कर जाते है, इसका उन्हें पता तक नहीं होता है. अपनी जिंदगी तो बर्बाद करते ही है, साथ में उनका पूरा परिवार भी तबाह हो जाता है. लेकिन उन्हें इसका अफसोस तब होता है जब वो नशे से बाहर आते है. हम आपके पास ऐसे ही शख्स की कहानी रखेंगे. जिसे शराब की बुरी लत लगी थी. शराब ही उनकी जिंदगी थी. शराब का ऐसा नशा था कि पत्नी छोड़ कर चली गयी. बहन ने नाता तोड़ लिया. पिता को लीवर कैंसर था. लेकिन शराब के नशे में उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं हुई. अंत में पिता दुनियां छोड़ गये. अंतिम संस्कार तक वो पिता का शराब के नशे के कारण नहीं कर पाया... बाद में इसका अफसोस हुआ. खुद को शराब की नशे से बाहर किया. इसके लिए पूरा दो साल मेहनत भी किया. आज वो दुबारा अपनी जिंदगी शुरू कर चुके है. खाजपुरा में कपड़े का अपना शो रूम खोला है. पूरा परिवार को साथ लेकर चल रहे है. लेकिन उन्हें आज भी इस बात का काफी अफसोस है कि जिंदगी भर पिता को दुख देता रहा. और जब पिता दुनिया छोड़ गये, तब अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाया. इस शख्स का नाम विवेक मोहन चतुर्वेदी है. कदमकुंआ के विवेक माेहन चतुर्वेदी अब दूसरों को शराब नहीं पीने काे लेकर मोटिवेट करते है. विवेक मोहन के पिता मदन मोहन चतुर्वेदी पटना हाई कोर्ट में वकील थे. मां गायत्री चतुर्वेदी भी पटना हाई कोर्ट में वकील है. एक बहन वंदना प्रकाश है. अब विवेक अपना पूरा ध्यान अपने बिजनेस में लगा रहे है. जहां दूसरे लोग मीडिया के पास अपना नाम छुपा कर अपनी शराब पीने की कहानी बयां करते है. वहीं विवेक मोहन खुद अपनी कहानी लोगों के सामने रखना चाह रहे है जिससे उन लोगों को सबक मिले जो शराब को छोड़ नहीं पा रहे है. विवेक मोहन चतुर्वेदी की कहानी हम तीन सीरीज में पेश करेंगे... इसकी पहली कड़ी विवेक मोहन की ही जुबानी...
पापा का अंतिम संस्कार करना था, घाट पर बहन से किया मारपीट मै घर में अकेला हूं. इस कारण बचपन से ही काफी दुलार प्यार में पला बढ़ा. जो कहता था मेरी मांग तुरंत पूरी की जाती थी. 1998 में डीएवी खगौल से 10वीं बोर्ड फर्स्ट डिवीजन से पास किया. काफी अच्छे मार्क्स आयें. चुकी पापा की भी स्टडी कोलकाता से हुई थी. इस कारण मै भी आगे की पढ़ाई के लिए कोलकाता चला गया. 12वीं बोर्ड कोलकाता से ही किया. पेइंग गेस्ट के तौर पर मै रहता था. मै चुकी सीए बनना चाहता था. इस कारण कॉमर्स से ग्रेजुएशन करने के साथ-साथ सीए की भी तैयारी करता था. सीए के लिए 2001 में फाउंडेशन कोर्स भी मैने पास किया. कोलकाता में रहते हुए मेरे कुछ दोस्त बन गये थे. इन्हीं चार पांच दोस्त मिलकर किराये के मकान में रहने लगे. अभी तक सारा कुछ ठीक था. दोस्तों के साथ रहते हुए कई बार बर्थडे आदि पर ओकेजनली ड्रींक पीने लगा. जिस मकान में रहता था, वहां पर एक लड़की के साथ मेरा अफेयर भी चलने लगा. इस बीच 2002 में ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर की परीक्षा थी. मेरा रिजल्ट खराब हो गया. इसके बाद मै डिप्रेशन में रहने लगा. डिप्रेशन से बचने के लिए लगातार ड्रींक लेने लगा. अब तक मेरी आदत की जानकारी फैमिली को हो गयी थी. पाता मां कोलकाता आ गये. फैमिली के डर से मैने शराब की जगह स्लीपिंग प्लिस दवा लेना शुरू कर दिया. एक दिन में 20 से 25 स्लीपिंग प्लिस लेता था. फिर पापा ने मुझे उस किराये के मकान से हटा कर फिर पेइंग गेस्ट म शिफ्ट कर दिया. कोलकाता के सॉकलेक सिटी इलाके में पेइंग गेस्ट के तौर पर रहने लगा. वहां पर मेरा शिवम नाम का लड़का रहता था. शिवम के सलाह पर मै खांसी की दवा कोरेक्स लेने लगा. एक दिन में मै तीन चार बोतल कारेक्स की पी जाता था. छह महीने तक मै यह लेता रहा. इससे खाना पीना काफी कम हो गया. इससे मेरे पेनक्रियाज में प्राब्लम हो गया. एक दिन तबीयत खराब होने से 2.30 बजे रात में मुझे हास्पीटल में भरती होना पड़ा. मेरी स्थिति देखकर पापा मुझे पढ़ाई छुड़ा कर पटना ले लायें. 2004 में मै पटना आ गया. एक साल तक मै पटना में रहा. पटना में नये सिरे से पढ़ाई शुरू किया. आरपीएम कॉलेज में 2005 में ग्रेजुएशन में नामांकन लिया. काफी अकेलापन हो गया था. तो सोचा पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी भी करूं. कई जगह कोशिश करने के बाद 2006 में सोनी कंपनी में मुझे सेल्स मैन की नौकरी मिली. नौकरी के सिलसिले में मुझे कई बार बाहर भी जाना पड़ता था. यहां पर भी दोस्तों का ड्रींक पीने का माहौल मिल गया. दोस्तों के जबरदस्ती करने पर मै फिर से ड्रींक लेने लगा. अब मै शराब के साथ स्लीपिंग प्लिस, कोरेक्स और गाजा का भी आदी हो गया था. मेरे इस नशे की जानकारी फैमिली को 2009 में पता चल गया. पापा ने कुछ नहीं कहा, बस समझाया कि ऐसे में मेरा शरीर खराब हो जायेगा. फिर 2011 में मेरा जॉब छूट गया. इसके बाद मैने अपना बिजनेस शुरू किया. 2012 फरवरी में मेरी शादी कर दी गयी. शादी के बाद पत्नी को पता चला. शराब के नशे में पत्नी को काफी पीटता था. एक दिन वो भी मुझे छोड़ कर चली गयी. इस बीच पता चला कि पापा को लीवर कैंसर है. मै घर में बैठ का मां का जेवर चुरा कर बेच कर शराब पीता था. और मेरी मां अकेले पापा को कभी दिल्ली तो कभी लखनउ में इलाज करवाने ले जाती थी. अंत में नवंबर 2013 में पाता का निधन लखनऊ में हो गया. फिर मेरे जीजाजी मुझे लेकर बनारस गये. बनारस में ही पापा का अंतिम संस्कार होना था. मै अंतिम संस्कार के समय पर भी काफी नशे में था. मेरी बहन ने कुछ कह दिया. इसके बाद घाट पर ही बहन से खूब लड़ाई किया. उसके साथ मारपीट तक कर लिया. शराब के नशे में मै काफी गुस्से में हो जाता था. घाट पर जैसे तैसे मुझे लोग पटना लेकर आयें. मेरी नशे में होने के कारण पापा का 13वीं तक नहीं हुआ. आर्य समाज के अनुसार तीन दिनों में ही सारा काम समाप्त कर दिया गया. नशे में मै इतना गुस्सा में था कि एक दिन घर में ही आग लगाने लगा. फिर फैमिली वालों ने मुझे हितैसी हैप्पीनेस नशा विमुक्ति केंद्र में भरती करवा दिया....
विवेक मोहन चतुर्वेदी, कदमकुंआ \\B

स्पोर्ट्स करवाये और रिपोर्ट भेजे स्कूल

- हर स्कूल को स्पाेर्ट एक्टिविटी करना है जरूरी

संवाददाता, पटनाअब स्कूलों को स्पोर्ट एक्टिविटी करना अनिवार्य कर दिया गया है. हर स्कूलों को नये सेशन में स्पोर्ट एक्टिविटी करवानी है. इसके लिए सीबीएसइ ने स्कूलों को निर्देश जारी किया है. एक्टिविटी करवाने के अलावा स्कूलों को एक्टिविटी की रिपोर्ट तैयार करना होगा. इस रिपोर्ट को साल में दो बार सीबीएसइ के पास भेजना भी है. पहला रिपोर्ट सितंबर से अक्टूबर के बीच और दूसरा रिपोर्ट फरवरी से मार्च के बीच भेजना है. इस सेशन से स्पोर्ट एक्टिविटी के मार्क्स भी ओवरऑल मार्क्स में जुड़ेंगे.
- 10 हजार देना होगा स्पोर्ट फी सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को एनूअल स्पोर्ट फी फिक्स कर दिया है. नये सेशन से तमाम स्कूलों को 10 हजार स्पोर्ट एनूअल फी के तौर पर सीबीएसइ के पास जमा करना होगा. लिस्ट ऑफ कैडिंडेंट्स के आधार पर 10वीं और 12वीं के रजिस्ट्रेशन के समय यह एनूअल फी स्कूलों को जमा करना है.
- 11 से 19 साल तक के बच्चे होंगे स्पोर्ट में शामिल सीबीएसइ ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि प्रायमरी लेबल के हर क्लास के बच्चे काे स्पोर्ट एक्टिविटी में शामिल करना है. 11, 14, 17 और 19 साल के स्टूडेंट्स को स्पोर्ट एक्टिविटी में शामिल होना है.
- बाक्सिंग और कबड्डी को जोड़ा गया स्पोर्ट में सीबीएसइ स्कूल के स्टूडेंट्स अब बाक्सिंग और कबड्डी खेल में भी शामिल हो पायेंगे. सीबीएसइ ने इस साल से दो नये स्पोर्ट्स को जोड़ा है. इन दोनों एक्टिविटी में स्टूडेंट्स शामिल हो सकेंगे. खेल को बढ़ावा देने और इन खेलों के डिमांड को देखते हुए सीबीएसइ ने दोनों खेल को जोड़ा है.
- केटेगरी वाइज करना है स्पोर्ट एक्टिविटी सीबीएसइ के अनुसार हर स्कूल को चार केटेगरी मे स्पोर्ट्स एक्टिविटी करवानी होगी. गर्ल्स और ब्वायज के लिए अलग-अलग टीम बनायी जानी है. स्टूडेंट्स के उम्र सीमा का पालन करना जरूरी है. स्कूल लेबल के अलावा रिजन लेवल पर भी स्पोर्ट्स करवाना है. रिजन लेवल के बाद स्टेट और नेशनल लेवल का स्पोर्ट रीजनल ऑफिस और सीबीएसइ दिल्ली की ओर से करवायी जायेगी. 

प्राइवेट स्कूल : ना लिया नामांकन और ना ही भरा जुर्माना

- पटना जिला के 32 स्कूलों ने अब तक नहीं लिया आरटीइ के तहत कोई नामांकन

संवाददाता, पटनाशिक्षा का अधिकार सभी को है. भले इसको लागू करने के लिए शिक्षा का अधिकार कानून बना हो, लेकिन प्राइवेट स्कूलों ने इस कानून की परिभाषा ही बदल दी है. सभी को शिक्षा देने के बदले अपनी मरजी से शिक्षा का अधिकार देने की बात करते है. प्राइवेट स्कूलों पर सरकार का काेई दबाव नहीं है. शिक्षा के अधिकार को स्कूल अपनी मरजी से चलाते है. आरटीइ के तहत नामांकन नहीं लेने पर जुर्माना का भी प्रावधान है, लेकिन आश्चर्य की बात है कि अब तक किसी भी स्कूल ने जुर्माना तक नहीं भरा है.
- किसी नोटिस की बात नहीं मानता प्राइवेट स्कूल जुर्माना को लेकर स्कूल के पास कोई नोटिस भी नहीं दिया गया है. विभागीय स्तर पर प्राइवेट स्कूलों पर कार्रवाई करने की बातें तो होती है, लेकिन अभी तक किसी भी स्कूल पर आरटीइ के तहत कोई कार्रवाई नहीं किया गया है. प्राइवेट स्कूलों में आरटीइ के तहत नामांकन जून जुलाई से शुरू होता है और सालों भर चलता है. विभाग के दबाव पर कोई स्कूल एक दो नामांकन ले कर खानापूर्ति कर लेते है. 2015-16 सत्र की बात करें तो जुलाई से लेकर जनवरी तक 107 स्कूलों ने 1422 बच्चों का नामांकन लिया है.
- 25 फीसदी नामांकन का अभी तक नहीं दी जानकारी बिहार में शिक्षा का अधिकार काननू 2011 में पूरी तरह से लागू किया गया. आरटीइ के तहत 25 फीसदी नामांकन क्लास वन में हर स्कूलों को लेना है. लेकिन 2011 से लेकर अब तक किसी भी स्कूल ने विभाग को 25 फीसदी नामांकन की जानकारी नहीं दिया है. क्लास वन में कितने बच्चे पढ़ रहे है और उसका 25 फीसदी नामांकन के तहत कितने बच्चे का नामांकन लिया गया. स्कूल बस खानापूर्ति केे तौर पर दो चार बच्चे की जानकारी विभाग को देते है.
- 32 स्कूलों ने नहीं लिया अब तक नामांकन आरटीइ के तहत 32 स्कूल ऐसे है जिन्होंने अब तक एक भी नामांकन नहीं लिया है. इसमें सबसे बड़ा कहे जाने वाला दिल्ली पब्लिक स्कूल है. जहां पर 2011 से 2015 तक एक भी नामांकन आरटीइ के तहत नहीं लिया गया है. इन स्कूलों ने अब तक जुर्माना भी नहीं भरा है. इन 32 स्कूलों पर कार्रवाई करने की प्रक्रिया पिछले चार महीने से चल रही है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं किया गया है. दिल्ली पब्लिक स्कूल की बात करें तो कई बार स्कूल को नामांकन लेने के लिए नोटिस भी दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद नामांकन नहीं लिया गया है.
कोटशिक्षा के अधिकार के तहत प्राइवेट स्कूल काफी उदासीन है. कोई भी स्कूल नामांकन नहीं लेना चाहता है. ऐसे में स्कूल पर अलग-अलग तरीके से दबाव डालते है. दबाव डालने में एक दो स्कूल नामांकन लेता भी है. लेकिन 25 फीसदी नामांकन स्कूल ने लिया या नहीं, इसकी जानकारी कोई भी स्कूल ने अभी तक नहीं दिया है.
राम सागर सिंह, कार्यकारी निदेशक, सर्वशिक्षा अभियान \\\\ \\B

बैकिंग छोड़ शुरू किया केक बनाना, इनोवेशन कर बना रही थ्री डी केक

- पटना की रीना सिन्हा ने सास ससुर के लिए छोड़ा नौकरी, अब बेकिंग को ही बना लिया रोजगार

रिंकू झा, पटनाअपने काम में तो इनोवेशन कई लोग करते है, लेकिन अपने लाइफ में इनोवेशन कर, पूरी लाइफ स्टाइल को ही चेंज करने वाले कुछ ही लोग होते है. और एेसे लोग ही अपने काम में भी यूनिक इनोवेशन कर पाते है. कुछ ऐसे ही अपने लाइफ में इनोवेशन कर और लाइफ स्टाइल काे ही बदल देने का काम पटना की रीना सिन्हा ने किया है. बैंकिंग क्षेत्र को छोड़ रीना सिन्हा ने बेकरी के क्षेत्र में काम करना शुरू किया. केक के अलग-अलग फ्लेवर के अलावा थ्री डी केक को इनोवेट किया. रीना सिन्हा ने बताया कि केक बनाना पूरा टेक्निकल है. उसे कितना सजा सकते है. किस तरह से केक के स्वाद को बेहतर बना सकते है. इन चीजों पर मै हर दिन कुछ ना कुछ करती रहती हूं. एक बार फेल होती हूं, लेकिन ट्राई करते-करते मै एक दिन अच्छा स्वाद ले ही आती हूं. रीना सिन्हा बोरिंग केनाल रोड स्थित रामनिवास पैलेस से ही अपनी बेकरी चला रही हैं.
- डोरेमन से लेकर छोटा भीम तक जिस डिजाइन का केक चाहिए, रीना सिन्हा उसे डिजाइन कर डालती है. अब आपके उपर है कि कौन सा डिजाइन का केक बनाना चाहते है. बाइक डिजाइन का केक चाहिए या कार, या फिर साइकिल, ट्रेन का डिजाइन चाहिए. कोई भी डिजाइन हो थ्री डी केक को घंटे भी में रीना सिन्हा तैयार कर डालती है. केक का डिमांड इत
ना है कि हर दिन सात से दस केक रीना सिन्हा को बनाना होता है. रीना सिन्हा ने बताया कि बच्चों में कार्टून कैरेक्टर जैसे डोरेमन, छोटा भीम, बीएमडब्ल्यू, मसर्डिज कार, पटना का गोलघर आदि डिजाइन के केक काफी डिमांड में होते है.
- सास ससुर के लिए बनी होम मेकर रीना सिन्हा महाराष्ट्र की रहने वाली है. एमकॉम और पूणे यूनिवर्सिटी से एमबीए करने के बाद वहीं पर बैंक में जॉब भी करने लगी. इसी बीच पटना के मनीष सिन्हा ने रीना सिन्हा ने लव मैरेज किया. कई साल पूणे में रहने के बाद रीना पटना आ गयी. रीना सिन्हा ने बताया कि चुकी सास ससुर यहां पर अकेले थे. सास ससुर के पास रहना चाहती थी. इस कारण पटना आ गयी. शुरू में जॉब के लिए ट्राई किया. लेकिन मुझे सास ससुर के साथ घर में ही रहना था. ऐसे में मैने घर में ही कुछ करने का प्लान करने लगी. बचपन से ही केक आदि बनाना मेरी हॉवी थी. मैने उसे और बेहतर करने की सोची. पटना में जो केक का मार्केट है, वो सही नहीं है. इस कारण मैने घर की महिलाओं को केक बनाने की ट्रेनिंग देना भी शुरू किया.
- 50 महिलाओं को दे चुकी है ट्रेनिंग रीना सिन्हा घर में रह ट्रेनिंग देती है. सात दिन, दस दिनों का फाउंडेशन कोर्स देकर केक बनाना और उसे सजाना सिखाती है. विंटर वैकेशन, समर वैकेशन आदि में स्कूल के बच्चों के लिए भी स्पेशल क्लासेज चलाती है. रीना सिन्हा ने बताया कि मेरा मकसद अधिक से अधिक हाउस वाइफ को केक बनाना सिखाना है. हर दो या तीन महीनों पर दस दिनों का कोर्स करवाती हूं. अभी तक 50 से अधिक महिलाओं को कोर्स करवा कर केक बनाना सीखा चुकी हूं.
- थ्री डी के अलावा अब वेडिंग केक रीना सिन्हा हर दिन केक बनाती है और उसे सजाती है. प्रत्येक दिन पांच से दस किलो केक रीना सिन्हा बनाती है. इसमे नार्मल के साथ डिजाइनर, थीम और जेल केक भी शामिल होती है. थ्री डी केक के बाद अब रीना सिन्हा जल्द ही वेडिंग केक भी बनाना शुरू करने वाली है. रीना सिन्हा ने बताया के वेडिंग केक की पूछताछ लोग करते है. जल्द ही वेडिंग केक का मजा भी पटना वालों को मिलेगा. इसमें इंगेजमेंट के साथ शादी के हर लम्हें को केक के रूप में देखा जा सकेगा. 

 जेइइ मेन का कट ऑफ होगा हाई, 120 से 130 के बीच होगा सेलेक्शन


- 18 को जेइइ मेन का आंसर ' की ' और 27 अप्रैल को आयेगा रिजल्ट
संवाददाता, पटनाज्वाइंट एंट्रांस एग्जामिनेशन (जेइइ) मेन 2016 का कट ऑफ इस बार अधिक पर जायेगा. जहां 2015 में कट ऑफ 104 पर गया था. वहीं इस बार कट ऑफ मार्क्स 120 से 130 के बीच जायेगा. सब्जेक्ट एक्सपर्ट की माने तो इस बार जेइइ मेन का प्रश्न पत्र पिछले साल के मुकाबले आसान था, इस कारण कट ऑफ भी हाई होगा. रविवार को जेइइ मेन की परीक्षा प्रदेश भर में आयोजित किया गया. पटना के अलावा मुजफ्फरपुर और गया में परीक्षा केंद्र बनाये गये थे. पटना में 69, मुजफ्फरपुर में 10 और गया में 8 परीक्षा केंद्र पर परीक्षा संचालित किया गया. परीक्षा दो पाली में लिया. प्रथम पाली सुबह 9.30 बजे से 12.30 बजे तक हुआ. वहीं द्वितीय पाली 2 बजे से 5 बजे तक लिया गया. प्रथम पाली मे बीटेक में नामांकन लेने वाले परीक्षार्थी शामिल हुए वहीं द्वितीय पाली में आर्किटेचर में नामांकन लेने वाले परीक्षार्थी को शामिल किया गया.
- 12वीं से आसान था जेइइ मेन में मैथ पेपर मैथ सब्जेक्ट के एक्सपर्ट एसके ठाकुर ने बताया कि 12वीं बोर्ड के मुकाबले जेइइ मेन में मैथ के प्रश्न आसान थे. कैलकुलेशन और अल्जेब्रा से 9 और 8 प्रश्न पूछे गये थे. इस बार ट्रीग्रोमेंट्री के प्रश्न दो ही प्रश्न आये है. वहीं फिजिक्स एक्सपर्ट राजीव रंजन ने बताया कि फिजिक्स में कई प्रश्न घुमावदार पूछे गये है. वहीं केमेस्ट्री विषय जेइइ मेन में ठीक है. 360 अंक के जेइइ मेन में इस बार 120 से 130 बीच के बीच कट ऑफ जाने की उम्मीद की जा रही है.
- 18 से 22 के बीच आयेगा आंसर की सीबीएसइ के अनुसार जेइइ मेन का आंसर की 18 को जेइइ मेन के वेबसाइट पर डाल दिया जायेगा. इस बीच अभ्यर्थी अपने आंसर का मिलान आंसर की से कर सकते है. वहीं जेइइ मेन का रिजल्ट 27 अप्रैल को घोषित किया जायेगा. इसमें जो अभ्यर्थी टॉप 20 हजार में आयेंगे, वहीं अभ्यर्थी जेइइ एडवांस में शामिल होंगे. इस बार 30 जून के पहले ऑल इंडिया रैंक निकाला जायेगा. 

Friday, April 1, 2016

स्पेशल पेन से होगा जेइइ मेन, बस एडमिट कार्ड और आइ-कार्ड ले जाने की अनुमति


- सीबीएसइ ने तमाम परीक्षा केंद्रों को दिया निर्देश
संवाददाता, पटनाआइआइटी, एनआइटी समेत विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले के लिए होने वाले ज्वाइंट एंट्रांस एग्जामिनेशन (जेइइ) मेन में नये नियम का पालन करना पड़ेगा. एआइपीएमटी की तरह जेइइ मेन में भी परीक्षार्थी को पेन, पेंसिल लाने की अनुमति नहीं है. परीक्षार्थी को पेन और पेंसिल आदि एग्जाम सेंटर पर ऑन स्पॉट ही मिलेगा. परीक्षार्थी एडमिट कार्ड और आइकार्ड लेकर ही परीक्षा केंद्र पर जायेंगे. इस संबंध में सीबीएसइ ने तमाम परीक्षा केंद्रों का आवश्यक निर्देश जारी कर दिया है. पटना जोन से लगभग 55 हजार परीक्षार्थी इस बार जेइइ मेन में शामिल होंगे. बिहार में पटना के अलावा गया और मुजफ्फरपुर में भी परीक्षा आयोजित हो रही है. पटना में कुछ 29 परीक्षा केंद्र बनाये गये है, वहीं गया में 8 और मुजफ्फरपुर में 10 परीक्षा केंद्र पर जेइइ मेन लिया जायेगा.
- काउंट डाउन शुरू जेइइ मेन की परीक्षा को मात्र 36 घंटे रह गये है. 3 अप्रैल को जेइइ मेन का ऑफ लाइन परीक्षा ली जायेगी. वहीं 9 और 10 अप्रैल को जेइइ मेन का अॉन लाइन परीक्षा आयोजित होगी. देश भर में 132 परीक्षा केंद्र पर एक साथ परीक्षा ली जायेगी. ऑफ लाइन परीक्षा के लिए तमाम परीक्षा केंद्र पर आंसर कॉपी भेज दिया गया है.
- दो घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचे सीबीएसइ ने तमाम परीक्षा केंद्र को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 9 बजे के बाद आने वाले परीक्षार्थी को केंद्र पर अंदर आने की अनुमति नहीं होगी. इस कारण तमाम परीक्षार्थी दो घंटे पहले ही परीक्षा केंद्र के अंदर आ जायें. परीक्षा केंद्र पर हर परीक्षार्थी की गहन पूछताछ आैर मेटर डिटेक्टर से जांच होगी. हर परीक्षा केंद्र पर मेटर डिटेक्टर लगी रहेगी. इससे परीक्षार्थी की जांच होगी.
- लाना होगा फोटो व आइडी कार्ड जेइइ मेन एग्जाम में एडमिट कार्ड के साथ खुद की फोटो, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट आदि में से किसी एक ही कॉपी लाना होगा. 2015 में 12वीं बोर्ड पास अभ्यर्थी को मार्टशीट लेकर आना होगा. वहीं फ्रेशर है या 2016 में 12वीं बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए है, उन्हें 12वीं का एडमिट कार्ड ले जाना अनिवार्य होगा.
यह होगा फायदा सीबीएसइ की मानें तो अपने पेन आदि ले जाने पर परीक्षार्थी कंफ्यूज्ड हो जाते थे. नीले पेन से अटेंप्ट करना है या ब्लैक पेन से. इस सख्ती से उन्हें पेन एग्जाम सेंटर पर उपलब्ध होंगे. जिससे उन्हें इस तरह का कोई कंफ्यूजन नहीं हाेगा.
इन चीजो पर है पाबंदी- फुल आस्तीन के शर्ट
- फुल जूता पहनने पर - गर्ल्स हेयर पीन लगा कर नहीं ले जा सकती
- किसी तरह की अंगूठी नहीं पहन कर जाना है- घड़ी नहीं पहनना है
- मनी पर्स ले कर नहीं जा सकते पॉजिटिव थिकिंग से जायें
- प्रश्न पत्र के निर्देश को ध्यान से पढ़े. और उसका पालन करें - ओएमआर शीट में जरा भी गड़बड़ी दिखे, जैसे ठीक से प्रिंट ना होना या फिर सवाल के सिक्यूएंस का ओएमआर शीट से न मिलना तो तुरंत केंद्र प्रभारी को बताएं
- हरेक प्रश्न में कुछ सवाल आसान और कुछ कठिन होेंगे. सबसे पहले आसान सवालों का चुनाव कर ले. पहले इनको हल करें - रिवीजन के लिए 15 मिनट का समय जरूर रखें 

आज मेरी पहचान पति से नहीं, मेरे खुद के काम से है

- लोगों के कॉमेंट का नजरअंदाज करके शुरू किया मीनाक्षी झा ने अपना काम
संवाददाता, पटना

नाम गुम जाता है, आपका रास्ता बदल जाता है. लेकिन अगर कुछ याद रहता है तो वो आपका काम है. जिंदगी में एक समय ऐसा आता है जब आपके काम ही आपकी पहचान बनती है. आपको नहीं बल्कि आपके काम को लोग पहचानते है. कुछ ऐसा ही पहचान दानापुर की मीनाक्षी बना चुकी है. दानापुर मिथिला कॉलोनी की रहने वाली मीनाक्षी ने हर मुश्किलों का सामान किया. लेकिन हार नहीं मानी. पढ़ाई का सपना तो पूरा नहीं कर पायी, लेकिन खुद की पहचान बनाने में पीछे नहीं हटी. तभी तो आज अपने पति से नहीं बल्कि खुद की पहचान से मीनाक्षी जानी जाती है. मीनाक्षी ने बताया कि पहले लोग मुझे मेरे ससुराल या पति के नाम से जानते थे, आज मेरी खुद की पहचान है.
- पहले सीखा अब देती है दूसरों को ट्रेनिंग
मीनाक्षी ने अपनी प्रयास अकेले शुरू किया था. कई सालों तक प्रयास करने के बाद आज मीनाक्षी खुद का ट्रेनिंग सेंटर चला रही है. मीनाक्षी ने बताया कि मै- पहले सीखा अब देती है दूसरों को ट्रेनिंग मधुबनी पेंटिंग, फेवरिक पेंटिंग, टेडी वियर, जड़ी कढ़ाई, मशीन की कढ़ाई, सिल्क आर्ट, क्ले आर्ट सभी सीखा है. आज मै हर तरह का हैंड वर्क कर सकती हूं. जो सीखा अब उसे दूसरों को सीखा हूं. मैने अपना काम 40 हजार रूपये लगा कर शुरू किया था. अभी 40 से 50 हजार रूपये कमा रही हूं. घर से ही सारा काम करती हूं. आर्डर लेने के साथ उसे पूरा करके देना ही मेरी प्राथमिकता होती है.
- क्ले आर्ट में पहचान बना चुकी है मीनाक्षी
मीनाक्षी ने बताया कि क्ले आर्ट में उनकी सबसे अधिक पहचान है. क्ले आर्ट से बनी मूर्तियां लोगों को काफी पसंद है. क्ले आर्ट में अलग-अलग डिजाइन की मूर्तियां बनती है. इसे सीखने वालों की भी काफी डिमांड रहता है. अभी अलग-अलग चीजों को सीखने के लिए लगभग 40 से 50 महिलाएं हमारे पास ट्रेनिंग के लिए आती है. क्ले आर्ट के अलावा दूसरे आर्ट के लिए स्कूल से भी आफर आ रहे है.
- मुहल्ले वाले करते थे काॅमेंट
मूल रूप से मधुबनी की रहने वाली मीनाक्षी झा की शादी पटना रहने वाले प्रकाश चंद्र झा से हुइ. शादी के बाद परिवार आदि में व्यस्त होने के कारण मीनाक्षी अपने कैरियर को आगे नहीं कर पायी. बताती है मीनाक्षी की शादी के बाद परिवार में बिजी हो गयी. मै पढ़ाई करके एलएलबी करना चाहती थी. वकालत का लाइन मुझे पसंद था. लेकिन मै नहीं कर पायी. इसी बीच मेरे भाई का निधन हो गया. इससे मै पूरी तरह से टूट गयी. लेकिन बाद में खुद को इंगेज करने के लिए हैंड वर्क आदि की ट्रेनिंग लेना शुरू किया. घर से जब ट्रेनिंग लेने जाती तो आस पास के लोग कॉमेंट करते थे कि पैसे की कमी है, इस कारण मै ट्रेनिंग ले रही हूं. इसके बाद जब खुद का काम शुरू किया और बोर्ड घर बाहर लगाया तो लोग फिर कॉमेंट करने लगे कि पैसा नहीं है इस कारण मै दूसरों को सीखा रही हूं.