बीपीएसइ के सिलेबस से गायब हो जायेगा पटना म्यूजियम
- 1764 के बाद के सारे एतिहासिक धरोहरों को रखा जायेगा बिहार म्यूजियम में
- यक्षिणी की मूर्ति के अलावा कई पीरियड के धरोहर भी जायेगा बिहार म्यूजियम
संवाददाता, पटना
विश्व में किस म्यूजियम में बुद्ध का अस्थि कलश रखा हुआ है. देश का कौन म्यूजियम है जहां पर गंधार से लायी गयी मूर्ति को रखी हुई है. राहुल सांस्कृतायन द्वारा लाये गये पांडुलिपि को किस म्यूजियम के पास धरोहर के रूप में रखा गया हैं. बीपीएसइ और बिहार लेवल सचिवालय आदि की प्रतियोगी परीक्षा में पूछे जाने वाले इन सवालों का जवाब अभी तक पटना म्यूजियम में मिल जाता था. मगर जुलाई के बाद ये सवाल तो वहीं रहेगें लेकिन जवाब पटना म्यूजियम की जगह बिहार म्यूजियम से मिलेगा. क्योंकि पटना म्यूजियम में रखी ऐसी बेशकीमती समान यहां से हटा कर बिहार म्यूजियम में रख दिया जायेगा. यह काम जुलाई तक पूरा हो जायेगा. म्यूजियम के सीनियर समेत तमाम एक्सपर्ट की टीम इसमें लगी हुई है. एक्सपर्ट की टीम को समानों की लिस्ट दे दी गयी है. इस लिस्ट के आधार पर ही पटना म्यूजियम से समानों को हटाने की तैयारी शुरू हो चुकी है. लिस्ट के आधार पर पटना म्यूजियम में रखी 1764 से पहले का सामान बिहार म्यूजियम में शिफ्ट कर दिया जायेगा. बांकी बचे 1764 के बाद का सामान पटना म्यूजियम में छोड़ दिया जायेगा.
- खत्म हो जायेगा जादू घर का जादू
पटना म्यूजियम को लोग जादू घर के नाम से अधिक जानते है. यह म्यूजियम अपने अंदर कई इतिहास संजोये है. इस म्यूजियम का इतिहास काफी पुराना है. म्यूजियम में अशोक काल से लेकर कई ऐसे कालों की एतिहासिक चीजें रखी हुई है जो वर्तमान में देश या विश्व के दूसरे म्यूजियम के पास उपलब्ध नहीं है. हर दिन सैकड़ों की संख्या में देश के साथ विदेशी पर्यटक भी इस म्यूजियम को देखने और जानने को आते है. अब जब इस म्यूजियम के खाली हो जाने की बात हो रही है तो विजिटर्स के साथ यहां पर काम करने वाले कर्मचारी और सीनियर ऑफिसर भी काफी निराश हो रहे है. कुछ सीनियर ऑफिसर ने तो दबी जुबान से लोग यह भी कहते है कि पटना म्यूजियम की साख पर खतरा हैं. जिस चीजों के लिए पटना म्यूजियम को जाना जाता है. अब जब वहीं यहां नहीं रहेगा तो पटना म्यूजियम लोग क्यूें आयेंगे.
कई दुर्भभ एतिहासिक चीजों का जगह बदल जायेगा
दस लाख से अधिक विजिटर ने जिस इतिहास को पटना म्यूजियम में देखा है, उन्हें फिर से इतिहास को दो तरीके से याद रखना होगा. जुलाई के बाद से ऐसे दोनों जगहों पर रखी दुर्लीा चीजों की अलग-अलग जानकारी रखनी होगी. पटना म्यूजियम में रखे ंसामन को दोनों जगह अलग-अलग कर दिया जायेगा. म्यूजियम के सीनियर ऑफिसर ने कहा कि इसके बाद म्यूजियम में बच्चो के लिए ज्येालॉजिकल पार्क के अलावा राजेंद्र प्रसाद से जुड़ी कुछ एतिहासिक चीजों ही देखने को मिलेगी. साथ ही म्यूजियम के अंदर जगह भी काफी खाली हो जायेगा. लेकिन अब तक गवर्नमेंट की ओर से इन खाली जगहों के यूज पर कोई बात नहीं बन पायी है.
- किया जाता रहा रिसर्च वर्क
पटना म्यूजियम की सूत्रो की माने तो सरकार प्लान तय नहीं कर पा रही है. लेकिन अब तमाम एतिहासिक धरोहर यहां से चले जायेंगे तो फिर यहां पर रिसर्च वर्क के अलावा कुछ और नहीं हो सकता है. जानकारी हो कि म्यूजियम में रखे समान और दुलर्भ पांडुलिपि को ट्रीट करने को लेकर काम पहले से चल रहा है. रिसर्च वर्क तो चलेगा लेकिन उन रिसर्चर के लिए मुश्किल हो जायेगी जो पटना म्यूजियम अपने रिसर्च वर्क को पूरा करने के लिए आया करते है. पटना विवि के अलावा देश के कई विवि के इतिहास के छात्र अपना रिसर्च वर्क पूरा करने के लिए पटना म्यूजियम में आते रहते है. कई विवि के छात्र तो हर साल अपना प्रोजेक्ट वर्क आदि भी पूरा करने के लिए पटना म्यूजियम आते रहते है.
- बुद्ध अस्थि कलश है पटना म्यूजियम की पहचान
एक तरफ पटना म्यूजियम से दुलर्भ एतिहासिक चीजें बिहार म्यूजियम में शिफ्ट कर दिया जायेगा. वहीं बुद्ध अस्थि कलश के लिए फेमस पटना म्यूजियम से बुद्ध अस्थि कलश भी वैशाली म्यूजियम में भेज दिया जायेगा. ज्ञात हो हर महीने सैकड़ों लोग बुद्ध अस्थि कलश को देखने के लिए पटना म्यूजियम आते है. इससे पटना म्यूजियम को अच्छा खासा रेवेन्यू भी प्राप्त हो जाता है.
- 1917 से है पटना म्यूजियम
पटना म्यूजियम देश के उन म्यूजियमों में से एक है जिसकी स्थापना अंगेज के समय में ही किया गया था. पटना म्यूजियम का स्थापना 1917 में किया गया था. यहां रखें दुलर्भ एतिहासिक चीजों को देखने के लिए देश और विदेश से भी लोग आते है. इस म्यूजियम में लगभग एक लाख दुलर्भ चीजें रखी हुई हैं.
ये सारी चीजें चला जायेगा बिहार म्यूजियम
- दीदारगंज की यक्षिणी की मूर्ति
- अफगानिस्तान स्थिति गंधार की मूर्ति
- बुलंदी बाग से मिली कांस्य की मूर्ति
- शुंग काल की मूर्तियां
- पाल वंश, नव पाषाण काल आदि काल के अलग-अलग जगहों से मिलने वाली अद्भुत कलाकृतियां और एतिहासिक चीजें
- अशोक काल की कई चीजों
- बुद्ध और महावीर काल से रिलेटेड कई दुलर्भ चीजें
- राहुल सांस्कृतायन की पांडुलिपि जो तिब्बत से पटना लाया गया था और उसे पटना म्यूजियम में रखा गया था
- दो हजार साल पुराना पेड़ जो पटना म्यूजियम में कई सालों पहले लाया गया था
- चौसा बक्सर से मिली कांस्य मूर्ति
कोट
सरकार के पास से हमें समानों की लिस्ट तैयार करने को कहा गया हैं. यह लिस्ट हमे जुलाई तक तैयार करनी है. पटना म्यूजियम से काफी संख्या में समान बिहार म्यूजियम शिफ्ट हो जायेगा. 1964 से पहले के समानों की लिस्ट मांगी गयी हैं.
जय प्रकाश नारायण, डायरेक्टर, पटना म्यूजियम
- 1764 के बाद के सारे एतिहासिक धरोहरों को रखा जायेगा बिहार म्यूजियम में
- यक्षिणी की मूर्ति के अलावा कई पीरियड के धरोहर भी जायेगा बिहार म्यूजियम
संवाददाता, पटना
विश्व में किस म्यूजियम में बुद्ध का अस्थि कलश रखा हुआ है. देश का कौन म्यूजियम है जहां पर गंधार से लायी गयी मूर्ति को रखी हुई है. राहुल सांस्कृतायन द्वारा लाये गये पांडुलिपि को किस म्यूजियम के पास धरोहर के रूप में रखा गया हैं. बीपीएसइ और बिहार लेवल सचिवालय आदि की प्रतियोगी परीक्षा में पूछे जाने वाले इन सवालों का जवाब अभी तक पटना म्यूजियम में मिल जाता था. मगर जुलाई के बाद ये सवाल तो वहीं रहेगें लेकिन जवाब पटना म्यूजियम की जगह बिहार म्यूजियम से मिलेगा. क्योंकि पटना म्यूजियम में रखी ऐसी बेशकीमती समान यहां से हटा कर बिहार म्यूजियम में रख दिया जायेगा. यह काम जुलाई तक पूरा हो जायेगा. म्यूजियम के सीनियर समेत तमाम एक्सपर्ट की टीम इसमें लगी हुई है. एक्सपर्ट की टीम को समानों की लिस्ट दे दी गयी है. इस लिस्ट के आधार पर ही पटना म्यूजियम से समानों को हटाने की तैयारी शुरू हो चुकी है. लिस्ट के आधार पर पटना म्यूजियम में रखी 1764 से पहले का सामान बिहार म्यूजियम में शिफ्ट कर दिया जायेगा. बांकी बचे 1764 के बाद का सामान पटना म्यूजियम में छोड़ दिया जायेगा.
- खत्म हो जायेगा जादू घर का जादू
पटना म्यूजियम को लोग जादू घर के नाम से अधिक जानते है. यह म्यूजियम अपने अंदर कई इतिहास संजोये है. इस म्यूजियम का इतिहास काफी पुराना है. म्यूजियम में अशोक काल से लेकर कई ऐसे कालों की एतिहासिक चीजें रखी हुई है जो वर्तमान में देश या विश्व के दूसरे म्यूजियम के पास उपलब्ध नहीं है. हर दिन सैकड़ों की संख्या में देश के साथ विदेशी पर्यटक भी इस म्यूजियम को देखने और जानने को आते है. अब जब इस म्यूजियम के खाली हो जाने की बात हो रही है तो विजिटर्स के साथ यहां पर काम करने वाले कर्मचारी और सीनियर ऑफिसर भी काफी निराश हो रहे है. कुछ सीनियर ऑफिसर ने तो दबी जुबान से लोग यह भी कहते है कि पटना म्यूजियम की साख पर खतरा हैं. जिस चीजों के लिए पटना म्यूजियम को जाना जाता है. अब जब वहीं यहां नहीं रहेगा तो पटना म्यूजियम लोग क्यूें आयेंगे.
कई दुर्भभ एतिहासिक चीजों का जगह बदल जायेगा
दस लाख से अधिक विजिटर ने जिस इतिहास को पटना म्यूजियम में देखा है, उन्हें फिर से इतिहास को दो तरीके से याद रखना होगा. जुलाई के बाद से ऐसे दोनों जगहों पर रखी दुर्लीा चीजों की अलग-अलग जानकारी रखनी होगी. पटना म्यूजियम में रखे ंसामन को दोनों जगह अलग-अलग कर दिया जायेगा. म्यूजियम के सीनियर ऑफिसर ने कहा कि इसके बाद म्यूजियम में बच्चो के लिए ज्येालॉजिकल पार्क के अलावा राजेंद्र प्रसाद से जुड़ी कुछ एतिहासिक चीजों ही देखने को मिलेगी. साथ ही म्यूजियम के अंदर जगह भी काफी खाली हो जायेगा. लेकिन अब तक गवर्नमेंट की ओर से इन खाली जगहों के यूज पर कोई बात नहीं बन पायी है.
- किया जाता रहा रिसर्च वर्क
पटना म्यूजियम की सूत्रो की माने तो सरकार प्लान तय नहीं कर पा रही है. लेकिन अब तमाम एतिहासिक धरोहर यहां से चले जायेंगे तो फिर यहां पर रिसर्च वर्क के अलावा कुछ और नहीं हो सकता है. जानकारी हो कि म्यूजियम में रखे समान और दुलर्भ पांडुलिपि को ट्रीट करने को लेकर काम पहले से चल रहा है. रिसर्च वर्क तो चलेगा लेकिन उन रिसर्चर के लिए मुश्किल हो जायेगी जो पटना म्यूजियम अपने रिसर्च वर्क को पूरा करने के लिए आया करते है. पटना विवि के अलावा देश के कई विवि के इतिहास के छात्र अपना रिसर्च वर्क पूरा करने के लिए पटना म्यूजियम में आते रहते है. कई विवि के छात्र तो हर साल अपना प्रोजेक्ट वर्क आदि भी पूरा करने के लिए पटना म्यूजियम आते रहते है.
- बुद्ध अस्थि कलश है पटना म्यूजियम की पहचान
एक तरफ पटना म्यूजियम से दुलर्भ एतिहासिक चीजें बिहार म्यूजियम में शिफ्ट कर दिया जायेगा. वहीं बुद्ध अस्थि कलश के लिए फेमस पटना म्यूजियम से बुद्ध अस्थि कलश भी वैशाली म्यूजियम में भेज दिया जायेगा. ज्ञात हो हर महीने सैकड़ों लोग बुद्ध अस्थि कलश को देखने के लिए पटना म्यूजियम आते है. इससे पटना म्यूजियम को अच्छा खासा रेवेन्यू भी प्राप्त हो जाता है.
- 1917 से है पटना म्यूजियम
पटना म्यूजियम देश के उन म्यूजियमों में से एक है जिसकी स्थापना अंगेज के समय में ही किया गया था. पटना म्यूजियम का स्थापना 1917 में किया गया था. यहां रखें दुलर्भ एतिहासिक चीजों को देखने के लिए देश और विदेश से भी लोग आते है. इस म्यूजियम में लगभग एक लाख दुलर्भ चीजें रखी हुई हैं.
ये सारी चीजें चला जायेगा बिहार म्यूजियम
- दीदारगंज की यक्षिणी की मूर्ति
- अफगानिस्तान स्थिति गंधार की मूर्ति
- बुलंदी बाग से मिली कांस्य की मूर्ति
- शुंग काल की मूर्तियां
- पाल वंश, नव पाषाण काल आदि काल के अलग-अलग जगहों से मिलने वाली अद्भुत कलाकृतियां और एतिहासिक चीजें
- अशोक काल की कई चीजों
- बुद्ध और महावीर काल से रिलेटेड कई दुलर्भ चीजें
- राहुल सांस्कृतायन की पांडुलिपि जो तिब्बत से पटना लाया गया था और उसे पटना म्यूजियम में रखा गया था
- दो हजार साल पुराना पेड़ जो पटना म्यूजियम में कई सालों पहले लाया गया था
- चौसा बक्सर से मिली कांस्य मूर्ति
कोट
सरकार के पास से हमें समानों की लिस्ट तैयार करने को कहा गया हैं. यह लिस्ट हमे जुलाई तक तैयार करनी है. पटना म्यूजियम से काफी संख्या में समान बिहार म्यूजियम शिफ्ट हो जायेगा. 1964 से पहले के समानों की लिस्ट मांगी गयी हैं.
जय प्रकाश नारायण, डायरेक्टर, पटना म्यूजियम
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